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रिटायरमेंट से पहले खुद जान सकेंगे लीव इनकैशमेंट की राशि, 4.50 लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव इनकैशमेंट राशि को लेकर आदेश जारी किया है। अब कर्मचारी रिटायरमेंट या ड्यूटी के दौरान मौत की स्थिति में मिलने वाली छुट्टी लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान खुद लगा सकेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों, कार्यालयों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। सरकार के फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से अवकाश नकदीकरण की गणना को लेकर अलग-अलग विभागों में भ्रम और विवाद की स्थिति बनती रही है। नए निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया लागू होगी। अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड रखने के निर्देश वित्त विभाग के आदेश में सभी विभागों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अवकाश नकदीकरण की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए। भुगतान के समय एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को भुगतान में देरी न हो और गणना में गलतियां न हों। अधिकतम 300 दिन के अवकाश का मिलेगा भुगतान राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण लाभ दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी के खाते में 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश मौजूद है, तब भी भुगतान केवल 300 दिनों तक ही सीमित रहेगा। पहले लाभ लिया है तो घटेंगे उतने दिन वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी पहले किसी अवसर पर अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ ले चुका है, तो जितने दिनों का लाभ पहले लिया गया है, उसे 300 दिनों की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा। कर्मचारी को कुल मिलाकर 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ नहीं मिल सकेगा। कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?     नए आदेश के बाद सरकारी कर्मचारियों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है।     कर्मचारी पहले से अपनी संभावित लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान लगा सकेंगे।     विभागों में गणना को लेकर होने वाली गलतियों में कमी आएगी।     भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे।     सभी विभागों में एक समान नियम और प्रक्रिया लागू होगी।     रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की पारदर्शिता बढ़ेगी। ईएल इनकैशमेंट पर पारदर्शी लाना राज्य सरकार का कहना है कि इस आदेश का मुख्य उद्देश्य अर्जित अवकाश नकदीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और एकरूप बनाना है। अलग-अलग विभागों में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण कई बार कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब वित्त विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद सभी विभागों में एक जैसी व्यवस्था लागू होगी। क्या होता है लीव इनकैशमेंट सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारियों के खाते में अर्जित अवकाश (ईएल) जमा होते रहते हैं। कई कर्मचारी अपने पूरे अर्जित अवकाश का उपयोग नहीं कर पाते, जिसके कारण उनके खाते में बड़ी संख्या में छुट्टी बचे रह जाते हैं। जब कर्मचारी रिटायर होता है या सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है, तब उसके खाते में बचे हुए ईएल के बदले सरकार नकद भुगतान करती है। इसी भुगतान को अवकाश नकदीकरण या लीव इनकैशमेंट कहा जाता है। यह राशि कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कई मामलों में यह लाखों रुपए तक पहुंच सकती है।

13 जून तक का समय, फिर आर-पार की लड़ाई! पंजाब कर्मचारियों के ऐलान से बढ़ी सरकार की चिंता

लुधियाना   पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विस यूनियन की प्रदेश स्तरीय ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह विर्क और प्रदेश महासचिव तरसेम भट्ठल की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में 3 जून को वित्त मंत्री की अध्यक्षता में यूनियन की मांगों को लेकर हुई मीटिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने बताया कि सरकार की तरफ से मीटिंग की कार्रवाई रिपोर्ट 48 घंटे में जारी करने का भरोसा दिया गया था परंतु निर्धारित समय में रिपोर्ट जारी न होने के बाद मीटिंग में शामिल नेताओं ने संदेह जताया कि सरकार कहीं समय बिताने की नीति तो नहीं अपना रही? लीडरशिप ने कहा कि मौजूदा भगवंत मान सरकार के पिछले साढ़े 4 साल के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण कर्मचारी वर्ग का सरकार से विश्वास उठ चुका है। इसलिए फैसला किया गया कि पंजाब सरकार को तुरंत एक नोटिस जारी किया जाए और वित्त मंत्री के साथ हुई मीटिंग में विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में मांगों पर लिए गए फैसलों संबंधी संगठन की तरफ से खुद एक कार्रवाई रिपोर्ट तैयार करके जारी की जाए। नोटिस के जरिए सरकार को लिखा जाए कि वह मीटिंग में हुए फैसलों के मुताबिक 12 जून तक कर्मचारियों की मांगों को लागू करे, नहीं तो 13 जून को अगले बड़े संघर्ष का ऐलान किया जाएगा। प्रदेश प्रैस सचिव गुरप्रीत सिंह खटड़ा ने बताया कि इस ऑनलाइन मीटिंग में संगठन की प्रदेश लीडरशिप, विभागीय संगठनों की लीडरशिप और जिलों के अध्यक्ष व महासचिव शामिल हुए। इनमें रघबीर सिंह बडवाल, अनिरुद्ध मोदगिल, पिप्पल सिंह, जगदीश ठाकुर, खुशकरनजीत सिंह, तेजिंदर सिंह नंगल, विनोद सागर, गुरसेवक सिंह, हितेश शर्मा, विशालवीर, अमित कटोच, गुरप्रीत सिंह पनेसर, जैमल सिंह, मैनुअल नाहर, संगत राम बागी, अमरप्रीत सिंह, प्रताप सिंह और जसवंत सिंह मौजो शामिल थे।  पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विस यूनियन की प्रदेश स्तरीय ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह विर्क और प्रदेश महासचिव तरसेम भट्ठल की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में 3 जून को वित्त मंत्री की अध्यक्षता में यूनियन की मांगों को लेकर हुई मीटिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने बताया कि सरकार की तरफ से मीटिंग की कार्रवाई रिपोर्ट 48 घंटे में जारी करने का भरोसा दिया गया था परंतु निर्धारित समय में रिपोर्ट जारी न होने के बाद मीटिंग में शामिल नेताओं ने संदेह जताया कि सरकार कहीं समय बिताने की नीति तो नहीं अपना रही? लीडरशिप ने कहा कि मौजूदा भगवंत मान सरकार के पिछले साढ़े 4 साल के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण कर्मचारी वर्ग का सरकार से विश्वास उठ चुका है। इसलिए फैसला किया गया कि पंजाब सरकार को तुरंत एक नोटिस जारी किया जाए और वित्त मंत्री के साथ हुई मीटिंग में विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में मांगों पर लिए गए फैसलों संबंधी संगठन की तरफ से खुद एक कार्रवाई रिपोर्ट तैयार करके जारी की जाए। नोटिस के जरिए सरकार को लिखा जाए कि वह मीटिंग में हुए फैसलों के मुताबिक 12 जून तक कर्मचारियों की मांगों को लागू करे, नहीं तो 13 जून को अगले बड़े संघर्ष का ऐलान किया जाएगा। प्रदेश प्रैस सचिव गुरप्रीत सिंह खटड़ा ने बताया कि इस ऑनलाइन मीटिंग में संगठन की प्रदेश लीडरशिप, विभागीय संगठनों की लीडरशिप और जिलों के अध्यक्ष व महासचिव शामिल हुए। इनमें रघबीर सिंह बडवाल, अनिरुद्ध मोदगिल, पिप्पल सिंह, जगदीश ठाकुर, खुशकरनजीत सिंह, तेजिंदर सिंह नंगल, विनोद सागर, गुरसेवक सिंह, हितेश शर्मा, विशालवीर, अमित कटोच, गुरप्रीत सिंह पनेसर, जैमल सिंह, मैनुअल नाहर, संगत राम बागी, अमरप्रीत सिंह, प्रताप सिंह और जसवंत सिंह मौजो शामिल थे।

वित्त विभाग का बड़ा फैसला: पांच विभागों की सेवा पुस्तिकाओं का होगा परीक्षण

भोपाल  प्रदेश में 38 हजार कार्यभारित तथा आकस्मिकता से वेतन पाने वाले कर्मचारियों समेत अन्य इन विभागों में काम कर रहे अन्य अधिकारी कर्मचारी के रिटायरमेंट के पहले उनके संपूर्ण सेवाकाल के सर्विस रिकार्ड और वेतन निर्धारण की जांच की जाएगी। अगर किसी को नियम विरुद्ध फायदा पहुंचाया गया है तो ऐसे मामलों में कार्रवाई होगी। ऐसे कर्मचारी प्रदेश के लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग में सर्वाधिक हैं जिनकी जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। राज्य सरकार के वित्त विभाग ने इन विभागों में लंबित वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के लंबित प्रकरणों का शीघ्र परीक्षण कर उनका निराकरण सुनिश्चित करें। इन 5 विभागों में चलेगा विशेष अभियान सरकार ने पाया है कि सबसे ज्यादा पेंडिंग मामले और गड़बड़ियां कुछ खास विभागों में हैं। इसलिए इस विशेष अभियान को मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा।     लोक निर्माण विभाग      लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग     जल संसाधन विभाग     नर्मदा घाटी विकास विभाग     स्कूल शिक्षा विभाग लंबित मामलों का तुरंत निपटारा कई बार ऐसा होता है कि कर्मचारियों को समय पर उनका सही वेतन नहीं मिल पाता है। साथ ही प्रमोशन या रिटायरमेंट का लाभ नहीं मिल पाता है। वित्त विभाग ने माना कि वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसे से ज्यादा विवाद होता है। इन विवादों की वजह से कर्मचारियों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं दिक्कतों को दूर करने के लिए वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि वे कर्मचारियों के इन अटके हुए मामलों की तुरंत जांच करें और उनका जल्द से जल्द निपटारा करें। अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तय समय के अंदर कार्रवाई नहीं की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही उन पर एक्शन हो सकता है। विभागों को इस अभियान की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी वित्त विभाग को भेजनी होगी। 6 महीने में ठीक करनी होंगी सर्विस बुक वित्त विभाग ने सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें साफ कहा गया है कि वे कर्मचारियों की सर्विस बुक को अच्छे से चेक करें। उसमें कोई गलती मिलती है तो उसे तुरंत सुधारा जाए।  किसी मामले में पहले से मंजूरी लेने की जरूरत हो तो वह प्रक्रिया भी पूरी की जाए। इस पूरे काम को पूरा करने के लिए सरकार ने 6 महीने का समय तय किया है। आदेश में कई बातों का जिक्र आदेश में कहा गया है कि कई मामलों में वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित विवादों के कारण कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों का समाधान किया जाएगा। विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट भी वित्त विभाग को भेजनी होगी। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। सेवा पुस्तिका की जांच कर गलतियां सुधारें वित्त विभाग ने संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण कर गलतियों का सुधार करें और आवश्यक होने पर पूर्व अनुमोदन प्राप्त कर कार्रवाई करें। साथ ही आगामी छह माह के भीतर सेवा-अभिलेखों और वेतन निर्धारण संबंधी लंबित मामलों का निराकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विशेष अभियान के अंतर्गत सेवानिवृत्त एवं सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन निर्धारण, समयमान, क्रमोन्नति वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। .

कर्मचारियों के लिए एक और झटका, वेतन विवाद के बीच छुट्टियों को लेकर जारी हुआ नया फरमान

लुधियाना  नगर निगम द्वारा जनगणना डयूटी में लगे मुलाजिमों पर सख्ती दिन-ब-दिन बढ़ाई जा रही है जिसके तहत पहले जो मुलाजिम ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे, उन पर पुलिस केस दर्ज करवाने व सैलरी रोकने की कार्रवाई की गई। वहीं अब यह फरमान जारी कर दिया गया है कि जनगणना डयूटी में लगे मुलाजिमों को छुट्टी वाले दिन भी स्टेशन लीव नहीं मिलेगी। इस संबंधी जारी आर्डर में जनगणना का काम हर हाल में 13 जून तक पूरा करने के टारगेट का हवाला दिया गया है जिसके मद्देनजर जनगणना ड्यूटी में लगे मुलाजिमों पर छुट्टी वाले दिन भी स्टेशन छोड़ने से पहले एन.ओ.सी. लेने की शर्त लगा दी गई है। यह फैसला उन मुलाजिमों पर भी लागू होगा जिनकी छुट्टी उनके विभाग द्वारा पहले से मंजूर है या जिन्होंने विदेश यात्रा के लिए अप्लाई किया है। इस सर्कुलर की कापी डी.सी. के साथ डी.ई.ओ. व उन विभागों के हैड को भेजी गई है जिनके मुलाजिम जनगणना डयूटी में लगे हुए है। महानगर में शुरू हुई पेड़ों की जनगणना   महानगर में एक साथ 2 जनगणना शुरू हो गई है जिसके तहत नगर निगम द्वारा पेड़ों की गणना करवाने का फैसला किया गया है। यह प्रक्रिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी किए गए निर्देशों को लागू करने के लिए अपनाई गई है जहां शहर में आए दिन सामने आ रहे पेड़ों की अवैध रूप से कटाई होने के मामलों को लेकर केस चल रहा है।  इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एन.जी.टी. द्वारा पहले पेड़ों की गिनती करवाने की हिदायत दी गई है जो काम नगर निगम द्वारा एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा गया है, जिसके द्वारा काम शुरू करने को लेकर बागवानी शाखा द्वारा बाकायदा पंजाब ट्री प्रोटेक्शन एक्ट के तहत पब्लिक नोटिस जारी कर दिया गया है।

एमपी में कर्मचारियों को मिलेगा भत्ता और वेतन वृद्धि, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की

भोपाल  मध्यप्रदेश में लाखों संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के भत्तों व वेतन वृद्धि की राह खुल गई है। कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में मप्र हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील पर स्थगन देने से इनकार कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा संविदा कर्मियों के पक्ष में दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा मसला है, इसलिए इस पर स्थगन नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश प्रभावी बना रहेगा। इस संबंध में कोर्ट ने सरकार को सिंगल बेंच के निर्णय का पालन करने के निर्देश दिए हैं। सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित किया गया और उन्हें वेतनमान, भत्ते व वार्षिक वेतन वृद्धि दी गई, वही लाभ अब संविदा कर्मियों को भी दिया जाएगा। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील की थी। अधिवकता ओपी द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट ने 9 अप्रेल को उनके मामले में दिए गए निर्णय को उचित ठहराते हुए प्रदेश सरकार की अपील निरस्त कर दी। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर स्थगन देने से साफ इंकार कर दिया जिसमें संविदा कर्मचारियों को स्थायी कर्मी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को  वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हाईकोर्ट में मप्र सरकार की अपील खारिज हो जाने से मप्र के संविदा कर्मियों को खासी राहत मिली है। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हुआ है। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सिंगल बेंच के समक्ष नए दस्तावेज पेश करने की छूट दी है लेकिन तब तक संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान के संबंध में दिया गया पुराना आदेश प्रभावी रहेगा।

मध्य प्रदेश में 12 लाख कर्मचारियों को राहत, DA में 3% की बढ़ोतरी, मई में मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

भोपाल  अप्रैल की शुरुआत मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 फीसदी महंगाई भत्ता और राहत भत्ता बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आगे अब एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, 4200 रुपए तक सैलरी में बढ़ोतरी होगी, बढ़ी हुई राशि अप्रेल की सैलरी में जोड़कर मई में दी जाएगी। सरकार ने पेंशनरों को भी बड़ी सौगात दी है, उनकी मंहगाई राहत 58% और 257% तक बढ़ गई है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत होगा वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा। 6 किश्तों में होगा एरियर का भुगतान वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान 6 समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। भुगतान संबंधी अन्य निर्देश महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपए में जोड़ा जाएगा। जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।

सिविल सेवा नियम 1966 में हुआ बड़ा संशोधन, अधिकारी और कर्मचारी वीडियो कांफ्रेंसिंग से भी कर सकेंगे जांच

भोपाल  मध्य प्रदेश में लंबित विभागीय जांचों को तेजी से निपटाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 में संशोधन कर जांच प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाया गया है। अब आरोपित अधिकारी-कर्मचारियों को हर बार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बाध्यता नहीं रहेगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई संभव होगी और नोटिस ई-मेल के जरिए भेजे जाने पर भी मान्य होंगे। इस बदलाव से लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है। वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी सुनवाई नए संशोधन के तहत जांच अधिकारी अब आरोपित कर्मचारियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति दे सकेंगे। इससे बार-बार कार्यालय में पेश होने की जरूरत खत्म होगी और प्रक्रिया तेज होगी। ई-मेल से भेजे नोटिस भी होंगे मान्य अब नोटिस या सूचना अधिकृत ई-मेल पर भेजी जाएगी, जिसे विधिवत सूचना माना जाएगा। इससे नोटिस नहीं मिलने के बहाने से जांच टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। लंबित मामलों से निपटने की पहल अब तक नियमों की जटिलता के कारण कई कर्मचारी जांच लंबित रखते थे और सेवानिवृत्ति तक मामला खिंच जाता था। इसके चलते पेंशन जैसे मामलों में भी देरी होती थी। पोर्टल आधारित निगरानी व्यवस्था जांच से जुड़ी पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और हर स्तर पर निगरानी आसान होगी। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद फैसला मोहन यादव ने लंबित जांचों पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद यह संशोधन लागू किया गया। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद है।  

महंगाई भत्ता योजना रुकी, मार्च तक 64% देने का प्लान अब टला, 12 लाख सरकारी कर्मचारियों को इंतजार करना होगा

भोपाल   मध्य प्रदेश में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर वित्त विभाग की घोषित योजना फिलहाल पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने हाल ही में तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की है, जिसके बाद सातवें वेतनमान के तहत कर्मचारियों को अब कुल 58 प्रतिशत भत्ता मिलेगा जबकि विभागीय प्लान के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक यह दर 64 प्रतिशत तक पहुंचनी थी। इस अंतर के कारण प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। वित्त विभाग घोषित प्लान के मुताबिक 7वें वेतनमान पर 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता चालू वित्त वर्ष में नहीं दे पाएगा। ताजा ऐलान के आधार पर महंगाई भत्ता की राशि केंद्र सरकार के निर्णय के 8 माह बाद एमपी के कर्मचारी-अधिकारियों को दी गई है। जबकि केंद्र में जल्द ही फिर महंगाई भत्ता दिए जाने की कवायद चल रही है। ऐसे में एमपी के कर्मचारियों को नए घोषित होने वाले महंगाई भत्ते की दरों के आधार पर लाभ पाने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश में साढ़े सात लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स को राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दी जाती है। इस तरह 12 लाख कर्मचारियों अधिकारियों को बढ़ती महंगाई के दौर में 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता पाने के लिए 4 से 6 माह तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह तीन प्रतिशत बढ़ा हुआ भत्ता अप्रैल के वेतन में मिलने का राज्य सरकार का फैसला माना जा रहा है। अगर केंद्र ने मार्च में महंगाई भत्ता बढ़ा भी दिया तो राज्य सरकार तुरंत इसे नहीं देगी। यह था वित्त विभाग का प्लान वित्त विभाग ने जो प्लान तय किया था उसके अनुसार सातवां वेतनमान पाने वाले अधिकारी कर्मचारी को वर्ष 2025-26 में 31 मार्च 2026 तक 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलना है। इसी तरह वर्ष 2026-27 में 31 मार्च 2027 तक 74 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 31 मार्च 2028 तक 84 प्रतिशत और इसके बाद वर्ष 2028-29 में मार्च 2029 तक इसे 94 प्रतिशत पहुंचाना है जो सरकार की मौजूदा व्यवस्था के आधार पर गड़बड़ाता नजर आ रहा है। वित्त विभाग का यह प्लान इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि वित्त वर्ष 2028-29 में ही नवंबर-दिसंबर में विधानसभा के चुनाव होना हैं। एमपी को लाभ मिलने की संभावना कम प्रदेश में लगभग साढ़े सात लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत के दायरे में आते हैं। सरकार का तर्क है कि बढ़ा हुआ तीन प्रतिशत भत्ता अप्रैल के वेतन में जोड़ा जाएगा और भुगतान मई से होगा। लेकिन यदि केंद्र सरकार मार्च में फिर से महंगाई भत्ता बढ़ाती है, तो भी राज्य में उसका लाभ तुरंत मिलने की संभावना कम है। पिछली बार भी केंद्र के फैसले के करीब आठ महीने बाद राज्य कर्मचारियों को संशोधित दर का लाभ मिला था। प्लान के विपरीत अभी यह है मौजूदा स्थिति रोलिंग बजट की कवायद के बीच राज्य सरकार ने 6 माह पहले यह कहा था कि 2026-27 के बजट के पहले महंगाई भत्ते की राशि को सरकार 64 प्रतिशत तक पहुंचाएगी लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। 8 माह के अंतराल के बाद दिए गए महंगाई भत्ते की असलियत यह है कि यह 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी ही हुआ है। इसका भुगतान भी सरकार कर्मचारियों को अप्रैल के वेतन से मई माह से करेगी। सरकार के प्लान के चलते कर्मचारी नेता यह मानकर चल रहे थे कि 2025 की दिवाली और फिर 2026 में फरवरी-मार्च में सरकार दो से तीन किस्तों में महंगाई भत्ता बढ़ाकर इसे 31 मार्च के पहले 64 प्रतिशत तक पहुंचा देगी। 5वें और 6वें वेतनमान वालों के लिए यह बताई थी प्लानिंग वित्त विभाग ने महंगाई भत्ते को लेकर जारी प्लानिंग में 6 माह पहले कहा था कि जिन विभागों में 6वें या 5वें वेतनमान पाने वाले कर्मचारी हैं, उन्हें भी हर साल 10 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाकर दिया जाएगा। छठवें वेतनमान में वर्तमान में 252% तक महंगाई भत्ता दिया जाता है जो मुख्यमंत्री द्वारा होली के मौके पर की गई घोषणा के बाद 255 प्रतिशत हो जाएगा। आगामी वर्षों को लेकर सरकार की प्लानिंग यह है कि वर्ष 2026-27 में 265 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 280 और वर्ष 2028-29 में 295 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा। इसके हिसाब से विभागों को रोलिंग बजट में प्रावधान करना होगा। प्रदेश सरकार के उपक्रम, निगम, मंडल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसी तर्ज पर महंगाई भत्ता दिया जाना है। इसी तरह शासन में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत पांचवें वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों को वर्तमान में 315% के मान से मंहगाई भत्ता दिया जाना है। हालांकि सातवें वेतनमान की तरह यह स्थिति अभी लागू नहीं हो पाई है। इसके आधार पर जो प्लान तय किया है उसके मुताबिक वर्ष 2026-27 में 325 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 335 और वर्ष 2028-29 में 345 प्रतिशत के हिसाब से बजट प्रावधान किया जाएगा।

समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए EPF और ESI की तैयारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अध्यापक, अंशकालीन और ग्राम पंचायत कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इन कर्मचारियों की लंबी लड़ाई अब रंग लाने वाली है। मुख्य मांगें: समान कार्य के लिए समान वेतन और समान अधिकार ,आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण ,सभी कर्मचारियों को समय पर पूरा वेतन ,EPF और ESI की नियमित सुविधा सुनिश्चित ,ग्रेड वेतन कार्यानुसार देने की मांग ,नौकरी की सुरक्षा और मनमानी छंटनी रोकना मोर्चा पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेश के समस्त आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। जानकारी: मध्यप्रदेश में अब चतुर्थ श्रेणी पदों पर नियुक्ति नहीं होगी। सरकार ने पहले ही इन पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया रोक दी है। वित्त विभाग के 31 मार्च 2023 के निर्देशों के बाद अब केवल आवश्यकतानुसार ही आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकेंगी।