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चुनावी जश्न के बाद पंजाब में बड़ा एक्शन, अकाली नेता समेत कई आरोपी नामजद

खन्ना/लुधियाना. नगर कौंसिल चुनाव के नतीजों के बाद लुधियाना जिले के खन्ना कस्बे में सियासी तनाव खुलकर सामने आ गया। जीत की खुशी दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े। इस प्रकरण में शिरोमणि अकाली दल से जुड़े नेता हरदीप सिंह उर्फ हनी रोशा और उनके भतीजे करण रोशा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वार्ड नंबर 30 से जीत दर्ज करने के बाद हनी रोशा समर्थकों के साथ क्षेत्र में जश्न मना रहे थे। इसी दौरान जुलूस आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार उर्फ सोनू जौहर के घर के पास पहुंच गया। यहां तेज आवाज में गाने बजाने और पटाखे चलाने को लेकर दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते झगड़े में बदल गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विवाद के दौरान कुछ लोग जबरन घर के भीतर घुस गए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। मामले में महिला के साथ अभद्र व्यवहार और गर्भवती महिला से धक्का-मुक्की के आरोप भी लगाए गए हैं। घटना की सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी। खन्ना पुलिस ने फुटेज और शिकायत के आधार पर दो दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। फिलहाल मुख्य आरोपी हनी रोशा और करण रोशा को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

गर्मी से राहत! छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में तापमान में गिरावट, रायपुर में आंधी-बारिश की चेतावनी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में नौपता के बीच बारिश और बदली ने लोगों को राहत दी है. रायपुर, राजनांदगांव और बिलासपुर जैसे प्रमुख शहरों के तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गए हैं. राजधानी में रविवार को आकाश मेघमय रहने और बारिश की संभावना जताई गई है. प्रदेश के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ अंधड़ और बिजली गिरने होने के आसार हैं.  प्रदेश में शनिवार को एक दो स्थानों पर हल्की से माध्यम बारिश हुई. सबसे ज्यादा तापमान दुर्ग में 42.6 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम पेंड्रा रोड में 24.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ. मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा के मुताबिक, एक द्रोणिका मध्य पाकिस्तान से अंदरुनी उड़ीसा तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर 1.5 किलोमीटर से 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक पश्चिमी विक्षोभ 78 डिग्री पूर्व में स्थित है. प्रदेश में बंगाल की खाड़ी से नमी का आगमन लगातार जारी है. आंधी-बारिश से अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट संभावित है.  रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? मौसम विभाग ने रायपुर शहर के लिए पूर्वानुमान जारी किया है. रविवार को आकाश आंशिक मेघमय रहने की सम्भावना जताई गई है. आंधी और वर्षा की संभावना है. दिन में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और रात के वक्त तापमान 28 डिग्री के आसपास रह सकता है.

गिरिबाला सिंह से CBI के तीखे सवाल, शरीर पर चोट के निशानों को लेकर साधी चुप्पी

भोपाल. मॉडल और एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह से पूछताछ का दायरा और तेज कर दिया है। 5 दिन की सीबीआई रिमांड के दौरान जांच एजेंसी कथित क्राइम सीन से छेड़छाड़, सीसीटीवी फुटेज, व्हाट्सएप चैट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशानों को लेकर लगातार सवाल पूछ रही है। इन तीखे सवालों के चक्रव्यूह में घिरीं पूर्व जज पूछताछ के दौरान काफी असहज नजर आईं और उन्होंने बेचैनी की शिकायत भी की है। FIR के आरोपों पर स्पष्टीकरण और चोट के निशानों पर फोकस सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व जज की भूमिका और घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर अपनी जांच केंद्रित की है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: गंभीर आरोपों पर जवाब तलब: सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के सामने दर्ज एफआईआर (FIR) में लगाए गए आरोपों को रखकर स्पष्टीकरण मांगा है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि शिकायतकर्ता पक्ष (त्विषा के परिजनों) द्वारा लगाए गए आरोपों के बावजूद उनकी भूमिका को सीमित क्यों माना जाए। शरीर पर मिली चोटों का सस्पेंस: पूछताछ के दौरान सीबीआई ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों का हवाला देते हुए सीधा सवाल किया कि त्विषा के शरीर पर मिले मृत्यु-पूर्व चोटों के निशान कैसे आए? एजेंसी ने यह भी पूछा कि घटना के समय परिवार के कौन-कौन से सदस्य घर में मौजूद थे और क्या ये चोटें सामान्य परिस्थितियों में लग सकती थीं? इन सवालों पर गिरिबाला सिंह अधिकांश समय पूरी तरह खामोश रहीं। डिजिटल साक्ष्य बने जांच का आधार; रिश्तों की कड़वाहट खंगाल रही CBI जांच एजेंसी अब केवल बयानों पर निर्भर न रहकर तकनीकी और वैज्ञानिक सबूतों के जरिए सच का पता लगाने में जुटी है: व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड: सीबीआई ने दोनों पक्षों के बीच हुए व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट्स को पूछताछ का प्रमुख आधार बनाया है। इसके जरिए शादी के बाद त्विषा और उसके ससुराल पक्ष के रिश्तों, कथित विवादों तथा मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के आरोपों पर बारीकी से जानकारी जुटाई जा रही है। गर्भावस्था को लेकर दबाव के आरोप: त्विषा की प्रेग्नेंसी को लेकर परिवार में हुई चर्चाओं और उस पर कथित रूप से डाले जा रहे मानसिक दबाव के आरोपों को लेकर भी पूर्व जज से कई तीखे सवाल पूछे गए हैं। पूर्व जज का दावा: गर्भपात के बाद डिप्रेशन में थीं त्विषा; जांच जारी पूछताछ के दौरान पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने मामले में एक नई थ्योरी सामने रखते हुए दावा किया है कि गर्भपात (मिसकैरेज) होने के बाद त्विषा गहरे अवसाद (डिप्रेशन) की स्थिति में आ गई थीं, जिसके कारण संभवतः उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा। सीबीआई पूर्व जज द्वारा किए गए इस डिप्रेशन और आत्महत्या की आशंका वाले दावे को अंतिम सच नहीं मान रही है। एजेंसी अब त्विषा के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स, संबंधित डॉक्टरों के बयानों और उपलब्ध फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर इस दावे की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

तंबाकू सेवन घटा, लेकिन बढ़ा अल्कोहल का चलन; बिहार के स्वास्थ्य सर्वे ने दिखाई नई तस्वीर

पटना शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ गई है। ये चौंकाने वाला खुलासा एक सर्वे में हुआ है। सर्वे में यह भी पता चला है कि बिहार में तंबाकू से भी ज्यादा पुरुष अल्कोहल ले रहे हैं। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस), 2024 – 25 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में कमी हुई जबकि अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 15 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में तंबाकू सेवन में एक प्रतिशत की कमी आई है। पहले 5 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू सेवन करती थी जो कि अब कम होकर चार प्रतिशत हो गई है। वहीं, 48.9 प्रतिशत पुरुषों की जगह अब 45.8 प्रतिशत पुरुष तंबाकू सेवन कर रहे हैं। जबकि, अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या 15.4 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, महिलाओं में अल्कोहल सेवन का प्रतिशत पूर्ववत 0.4 प्रतिशत स्थिर है। सात फीसदी से अधिक ग्रामीण मधुमेह की चपेट में सर्वे में पता चला है कि महिला एवं पुरुषों को मिलाकर बिहार के ग्रामीण इलाकों में सात फीसदी से अधिक मधुमेह से पीड़ित हैं। बात मधुमेह की करें तो राज्य स्तर पर महिलाओं के मुकाबले पुरुष मधुमेह से अधिक पीड़ित हैं। हालांकि, पिछले स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुकाबले में मधुमेह की समस्या में कमी दर्ज की गई है। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस), 2024 – 25 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव, स्तनपान सहित अन्य मानकों में सुधार दर्ज किया गया है। एनएफएचएस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 साल एवं उससे अधिक उम्र की महिलाओं में 6.2 प्रतिशत और पुरुष 8 प्रतिशत पुरुषों में 140 से 160 मिलीग्राम तक मधुमेह की शिकायत पाई गई है। जबकि, शहरी क्षेत्रों में समान रूप से 7.3 प्रतिशत महिलाएं और इतने ही पुरुष मधुमेह से पीड़ित हैं। वहीं, राज्य स्तर पर जहां 7.9 प्रतिशत पुरुष मधुमेह से पीड़ित हैं तो वहीं 6.3 महिलाएं मधुमेह से पीड़ित हैं। राज्य स्तर पर पिछले सर्वेक्षण में पुरुषों में मधुमेह 8.3 प्रतिशत तो 6.4 प्रतिशत महिलाओं में मधुमेह पाया गया था। राज्य में संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1 फीसदी एनएफएचएस की नई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में 89.9% तो ग्रामीण क्षेत्रों में 80.2 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो रहा है। इनमें सरकारी अस्पतालों में 57.5% हो रहे हैं। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी 84% प्रसव में मौजूद रहते हैं। वहीं, ऑपरेशन से प्रसव में बढ़ोतरी हुई है। यह 9.7% से बढ़कर 13.2% हो गई है। ऑपरेशन से प्रसव निजी क्षेत्र में बढ़ने (39.6% से बढ़कर 49.3% ) का संकेत रिपोर्ट में है जबकि सरकारी अस्पतालों में कम (3.6% से कम होकर 2.7 %) हुआ है बच्चों के स्वास्थ्य में गुणात्मक परिवर्तन की दृष्टि से राज्य में स्तनपान में बढ़ोतरी हुई है। तीन साल तक के बच्चों में जन्म के पहले एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या 31.1% से बढ़कर 51.9% हो गई है। इसी प्रकार, राज्य में 98% लोगों के घरों में बिजली की उपलब्धता, 99.8% लोगों के घरों में पेयजल की उपलब्धता हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 27.1 फीसदी महिलाएं कम वजन की शिकार बिहार के ग्रामीण इलाकों में 27.1 फीसदी महिलाएं कम वजन की शिकार हैं। सूबे में चार से एक व्यक्ति दुबलेपन का शिकार है। रिपोर्ट बताती है कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अंडर वेट हैं, वहीं शहरी क्षेत्र में 30 फीसदी महिलाएं और 29.9 फीसदी पुरुष मोटापे के शिकार हैं। इसके अलावा बिहार में चार में से एक व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स मानक से कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से ग्रामीण क्षेत्र लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। वेलनेस सेंटर पर मरीजों के जाने से उनका इलाज हो रहा है। बिहार में 12 हजार वेलेनस सेंटर चलते हैं। मुजफ्फरपुर में 619 वेलेनस सेंटर चल रहे हैं। वेलेनस सेंटर के संचालन की निगरानी स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था जपाइयो कर रही है।

बासमंडी उपकेंद्र ठप, नटखेड़ा में केबल में लगी आग; कई इलाकों में घंटों गुल रही बिजली

लखनऊ यूपी के लखनऊ में बासमंडी स्थित जीटीआई उपकेंद्र शनिवार शाम सात बजे ठप हो गया। इससे गणेशगंज, पान दरीबा और लालकुआं जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों की बत्ती गुल हो गई। शाम के वक्त बिजली न आने से करीब 40 हजार आबादी को पानी का संकट खड़ा हो गया। वहीं बाजारों में अंधेरा छा गया और कई व्यापारियों को समय से पहले अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं। लगभग सवा घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 8:15 बजे बिजली बहाल हो सकी। लखनऊ में लोग एक बार फिर बिजली-पानी के लिए परेशान हो गए। वहीं आलमबाग के नटखेड़ा रोड पर स्थिति और भी भयावह हो गई जब एक बिजली बॉक्स के केबल में अचानक आग लग गई। आग की लपटें देख इलाके में हड़कंप मच गया। व्यापारियों की सजगता से चंदरनगर उपकेंद्र को सूचना देकर बिजली कटवाई गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि इस दौरान कुटिया वाली गली और गोविंद गली सहित पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा गया। शाम के वक्त बिजली न आने से घरों में पानी भी नहीं आया। वहीं कर्मचारियों ने फाल्ट को दुरुस्त कर रात 08 बजे बिजली चालू की। नटखेड़ा रोड युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनीष अरोड़ा ने बताया कि क्षेत्र में आये दिन बिजली संकट बना रहता है। इसके अलावा जानकीपुरम जोन के अहिबरनपुर, प्रियदर्शनी और आईटीआई उपकेंद्रों की अंडरग्राउंड केबल फाल्ट हो गया। वहीं विद्युत विभाग के मुताबिक नबीकोट नंदना ट्रांसमिशन से प्रियदर्शनी उपकेंद्र, इंदिरानगर ट्रांसमिशन से आईटीआई उपकेंद्र व नबीकोट नंदना ट्रांसमिशन से अहिबरनपुर उपकेंद्र केबल फाल्ट हो गया। कर्मचारियों ने आनन-फानन में मोर्चा संभाला और लोड को दूसरे फीडरों पर शिफ्ट कर वैकल्पिक स्रोतों से बिजली चालू करने की कोशिश की। हालांकि, लोड अधिक होने के कारण कई इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या बनी रही। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शनिवार रात तक मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो सका। 1912 की शिकायतों का फर्जी निस्तारण न हो: एमडी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने शनिवार को कस्टमर केयर सेंटर 1912 का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्युत आपूर्ति और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा की। एमडी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों का समाधान तय समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। किसी भी हाल में फर्जी निस्तारण न किया जाए, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। फीडबैक लेने और समस्याओं के समाधान के बाद उपभोक्ताओं को धन्यवाद संदेश या ट्वीट करने पर विशेष जोर दिया।

‘हर घर एक रविवार, गंदगी पर प्रहार’ अभियान में उमड़ी जनभागीदारी, 50 हजार लोगों ने दिखाई रुचि

लखनऊ यूपी की रामनगर अयोध्या में नगर निगम अयोध्या की ओर से चलाए जा रहे हर घर एक रविवार, गंदगी पर प्रहार अभियान का रविवार को चलाया गया। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी रविवार की सुबह सात बजे लता चौक अयोध्या धाम के पास सफाई अभियान में भाग लेते हुए सड़क पर झाड़ू लगाई। नगर में जगह-जगह सफाई अभियान चलाया गया। इस मौके पर मेयर गिरीशपति त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अयोध्या पूरा महानगर आज स्वच्छता के लिए सड़कों पर उतर आया है। घर से बाहर अपने निकला है, गलियों को साफ कर रहा है, सार्वजनिक जगहों को साफ कर रहा है। 50 हजार से ज्यादा स्वीकृति पत्र मेरे पास ऑनलाइन आए हैं जो अयोध्या की सफाई में अपना योगदान करना चाहते हैं। 400 से ज्यादा स्थलों सामूहिक तौर पर लोग निकले हुए हैं। अयोध्या नगर का जन सामान्य से लेकर विशिष्ट वर्ग तक, चाहे डॉक्टर हों, इंजीनियर हों, वकील हों, अध्यापक हों या व्यवसायी हों सभी लोग आज अयोध्या की सड़कों पर हैं। सभी अयोध्या को स्वच्छ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी नगर की स्वच्छता के लिए एक साथ पूरे महानगर के लोग एक साथ सामूहिक संकल्प शक्ति के साथ एक साथ सामूहिक अभियान चलाएं ये दुनिया में अपने आप में अद्भुत अभियान है। मैं पूरे महानगर का, नगर निगम की टीम का, हमारे पार्षद गणों का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने अभियान में मदद की। आज पूरी दुनिया अयोध्या की स्वच्छता को देख रही है। स्वच्छ शहरों की लिस्ट में रैंकिंग पर मेयर ने कहा कि अभी हमारी 28वीं रैंकिंग है। उम्मीद है कि इस बार हम रैंकिग अच्छी करेंगे। इस अभियान से पहले अयोध्या नगर निगम के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने रायबरेली रोड स्थित गुरुनानक एकेडमी से नाका हनुमानगढ़ी होते हुए रामनगर तक पदयात्रा निकाली थी। उन्होंने आमजन से नगर निगम क्षेत्र में चलाए जाने वाले स्वच्छता के महाअभियान ‘एक रविवार, हर परिवार, करे गंदगी पर वार’ में सहभागिता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि सफाई के मामले में नगर को देश के टॉप- 10 महानगरों में लाने के लिए जन-जन की भागीदारी आवश्यक है। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने कहा कि 31 मई को अपने घरों के आसपास महज आधा घंटा सफाई करने से नगर साफ-सुथरा तो होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 जारी है। जनता को जोड़ने के लिए, 15-दिवसीय एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसका समापन आज हो रहा है। लोगों से अपील है कि जहां भी हों वहां साफ-सुथरा रखें।

गुरिंदरवीर के रिकॉर्ड की PM मोदी ने की तारीफ, ‘मन की बात’ में जानना चाहा जीत का मंत्र

जालंधर. पंजाब के जालंधर के युवा धावक गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी रफ्तार से देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में रांची में आयोजित राष्ट्रीय फेडरेशन कप एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में गुरिंदरवीर सिंह की खुलकर सराहना की और उनसे सीधे बातचीत कर उनके संघर्ष और सफलता की कहानी देशवासियों तक पहुंचाई। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि रांची में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे, लेकिन पुरुष 100 मीटर दौड़ में दो दिनों के भीतर तीन बार रिकॉर्ड टूटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। इसी उपलब्धि के कारण गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। भारतीय नौसेना में ऑफिसर हैं गुरविंदर बातचीत के दौरान गुरिंदरवीर सिंह ने बताया कि वह भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर हैं और उनका सपना ट्रैक पर भी देश का नाम रोशन करना तथा वर्दी में भी राष्ट्र सेवा करना है। उन्होंने बताया कि उनके पिता और दादा दोनों खिलाड़ी रहे हैं। बचपन में जब वह उनके पदक और ट्रॉफियां साफ करते थे, तभी उनके मन में भी खिलाड़ी बनने का सपना जागा। गुरिंदरवीर ने प्रधानमंत्री को बताया कि एक समय ऐसा भी था जब लोगों ने उन्हें कहा कि 100 मीटर दौड़ भारतीय खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त स्पर्धा नहीं है। कई लोगों का मानना था कि भारतीय धावक इस स्पर्धा में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। लेकिन उनके पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और असंभव को संभव करने की प्रेरणा दी। यही विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। संघर्ष व अनुशासन को बताया सफलता का राज प्रधानमंत्री ने जब उनसे सफलता का राज पूछा तो गुरिंदरवीर ने कहा कि संघर्ष, अनुशासन, परिवार का सहयोग और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा। हार और चोट के दौर में भी परिवार ने उनका मनोबल नहीं टूटने दिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने दोनों खिलाड़ियों की खेल भावना की भी सराहना की। गुरिंदरवीर ने बताया कि मैदान के बाहर वह और अनिमेष अच्छे मित्र हैं, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान दोनों एक-दूसरे को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय दौड़ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के अंत में गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि दोनों खिलाड़ी भविष्य में भी देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करेंगे। ‘मन की बात’ में मिली इस विशेष पहचान के बाद पंजाब ही नहीं, पूरे देश के खेल प्रेमियों में गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को लेकर गर्व का माहौल है। साथियो, एक स्पर्धा जिसकी पूरे देश में सबसे अधिक चर्चा हुई, वह थी 100 मीटर दौड़। महज दो दिनों के भीतर पुरुष 100 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा। यह उपलब्धि हासिल करने वाले दो खिलाड़ी हैं—गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर। मैंने सोचा कि इस बार ‘मन की बात’ में इन दोनों खिलाड़ियों से बातचीत की जाए, ताकि देशवासी इनके संघर्ष और सफलता की कहानी सुन सकें। प्रधानमंत्री: अनिमेष जी नमस्कार। गुरिंदरवीर जी, आपको भी नमस्कार, सत श्री अकाल। अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह: नमस्कार सर। प्रधानमंत्री: आप दोनों ने अद्भुत उपलब्धि हासिल की है। संगीत में तो जुगलबंदी के बारे में सुना था, लेकिन खेल में इस तरह की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा कम ही देखने को मिलती है। आप दोनों ने एक-दूसरे को चुनौती दी और फिर उससे आगे निकलने का प्रयास किया। मैं चाहता हूं कि ‘मन की बात’ के श्रोता आपके बारे में अधिक जानें। पहले अनिमेष जी, आप अपने बारे में बताइए। अनिमेष कुजूर: सर, मेरा नाम अनिमेष कुजूर है। मैं 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा का राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हूं। मेरा संबंध छत्तीसगढ़ से है और वर्तमान में मैं ओडिशा की ओर से खेलता हूं। पिछले वर्ष मैं एशियाई प्रतियोगिता और विश्व विश्वविद्यालय खेलों में पदक जीतकर लौटा था। मैंने वर्ष 2021 में एथलेटिक्स की शुरुआत की। उससे पहले मैं सैनिक विद्यालय, अंबिकापुर में पढ़ता था और फुटबॉल खेलता था। कोविड काल के दौरान मेरे माता-पिता मुझे बाहर जाकर दौड़ने और खेलने की अनुमति देते थे। बाद में मेरे मित्रों ने मुझे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। मुझे यह भी नहीं पता था कि वहां से राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन होगा। वहीं से मेरा चयन हुआ और आज मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। प्रधानमंत्री: बहुत अच्छा। अब गुरिंदरवीर जी, आप अपनी कहानी बताइए। गुरिंदरवीर सिंह: नमस्कार सर। मेरा नाम गुरिंदरवीर सिंह है। मैं भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर हूं और हाल ही में मैंने 100 मीटर दौड़ में 10.09 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। मैं पहला भारतीय हूं जिसने 10.1 सेकंड की बाधा को पार किया है। मेरा प्रयास है कि मैं ट्रैक पर भी और वर्दी में भी देश की सेवा करूं। मेरे पिता और दादा दोनों खिलाड़ी रहे हैं। बचपन में जब भी घर की सफाई होती थी, मैं उनके पदक और ट्रॉफियां साफ करता था। उन्हें देखकर मेरे मन में जिज्ञासा पैदा होती थी कि ये सम्मान कैसे मिले। तब मेरे पिता मुझे अपनी खेल यात्राओं की कहानियां सुनाते थे। वहीं से मेरे भीतर भी खिलाड़ी बनने का सपना पैदा हुआ। वे सुबह दौड़ने जाते थे, तो मैं भी उनके साथ जाने लगा। उन्होंने जो कुछ खेलों से सीखा था, वह मुझे सिखाना शुरू किया। इसी दौरान मैंने उसेन बोल्ट को विश्व रिकॉर्ड बनाते देखा। तब मैंने अपनी मां से मजाक में कहा था कि आज आप मुझे टेलीविजन देखने नहीं दे रहीं, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब आप मुझे टेलीविजन पर खोजेंगी। आज जब मेरी मां मुझे दौड़ते हुए देखती हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है। हम एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। मेरे पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी थे, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। उनका अधूरा सपना उन्होंने मेरे भीतर देखा। वे हमेशा कहते थे कि सपने केवल देखने से पूरे नहीं होते, उनके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। वे मुझे मिल्खा … Read more

सोशल मीडिया पर जातीय तनाव फैलाने का आरोप, यूट्यूबर मनीष पटेल की बेल चौथी बार रिजेक्ट

रीवा. आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में गिरफ्तार यूट्यूबर मनीष पटेल की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अदालतों से राहत मिलने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। बीते कुछ दिनों में उनकी जमानत याचिका लगातार चार बार खारिज हो चुकी है। जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक किसी भी अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस मामले ने अब कानूनी दायरे से निकलकर सामाजिक और जातीय बहस का रूप ले लिया है। रीवा और पूरे विंध्य क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध के बीच माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। लगातार चार बार खारिज हुई जमानत याचिका मनीष पटेल के खिलाफ दर्ज मामले को अदालतों ने गंभीर मानते हुए अब तक कोई राहत नहीं दी है। जानकारी के अनुसार 28 मई को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना नागेश की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 30 मई को चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.के. शर्मा की अदालत ने भी याचिका निरस्त कर दी। इससे पहले जिला न्यायालय और हाईकोर्ट भी मनीष पटेल को जमानत देने से इनकार कर चुके हैं। इस तरह अब तक चार अलग-अलग स्तरों पर उनकी जमानत याचिका अस्वीकार हो चुकी है। कानूनी जानकारों के अनुसार अब निर्धारित अवधि तक हाईकोर्ट में दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने का रास्ता भी सीमित हो गया है। गिरफ्तारी के बाद दो धड़ों में बंटा समाज मनीष पटेल की गिरफ्तारी के बाद विंध्य क्षेत्र में सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इंटरनेट मीडिया पर उनके समर्थक और विरोधी लगातार अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ संगठन उनके समर्थन में खुलकर सामने आए हैं, जबकि कई समूह गिरफ्तारी को उचित कार्रवाई बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ संगठनों द्वारा भी मनीष पटेल के समर्थन में रीवा पहुंचने की घोषणाएं सोशल मीडिया पर की गई हैं। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पुलिस और जिला प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। व्हाट्सएप ग्रुपों में फैल रहा जातीय तनाव पुलिस के अनुसार आरोपी के समर्थन में बनाए गए कुछ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में जाति विशेष को लेकर आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां साझा की जा रही हैं। इन संदेशों में सामाजिक बहिष्कार, धार्मिक गतिविधियों से दूरी बनाने और व्यापारिक संबंध समाप्त करने जैसी बातें लिखी जा रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ संदेशों में लोगों से एक विशेष समुदाय के नेताओं को वोट न देने, धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल न करने, व्यापारिक संबंध खत्म करने और सामाजिक व्यवहार में दूरी बनाने जैसी अपीलें की जा रही हैं। पुलिस का मानना है कि इस तरह की सामग्री सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। भड़काऊ पोस्ट से बचें रीवा पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाली सामग्री साझा न करें। साथ ही बिना सत्यापन के किसी भी पोस्ट, वीडियो या संदेश को आगे बढ़ाने से बचें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे संदेशों, वीडियो और टिप्पणियों की लगातार निगरानी की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति सांप्रदायिक या सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने कहा- माहौल बिगाड़ने वालों पर होगी कार्रवाई रीवा पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और एक्स सहित सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ जानकारी साझा न करें। एसपी के अनुसार सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावे, पुराने वीडियो और संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत की गई तस्वीरों का उपयोग अक्सर लोगों को भड़काने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अमृता पटेल ने लगाए धमकियों के आरोप इस बीच मनीष पटेल के साथ वीडियो बनाने वाली अमृता पटेल भी चर्चा में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। अमृता का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपमानजनक संदेश भेजे जा रहे हैं और जान से मारने तक की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे संदेशों और पोस्ट के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि धमकियां देने वाले लोग कौन हैं। दूसरी ओर रीवा पुलिस का कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायत मिलती है तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया की लड़ाई से बढ़ी प्रशासन की चुनौती पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली भड़काऊ सामग्री किस तेजी से सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है। मनीष पटेल का मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक विमर्श और डिजिटल जिम्मेदारी का विषय भी बन चुका है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सोशल मीडिया पर फैल रहे भड़काऊ संदेशों पर नियंत्रण रखना है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई और पुलिस की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि रीवा और विंध्य क्षेत्र की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

कमिश्नरेट लागू होते ही पहली जिला बदर कार्रवाई, कुख्यात बदमाश पर पुलिस का शिकंजा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के रायपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पहली बार जिला बदर की कार्रवाई की गई है. गुढ़ियारी इलाके के आदतन बदमाश अविनाश कोसले उर्फ मनिया को रायपुर समेत 6 जिलों की सीमा से बाहर रहने का आदेश दिया गया है. सक्षम न्यायालय की अनुमति के बिना वह 30 अगस्त तक इन जिलों में प्रवेश नहीं कर सकेगा. पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) मयंक गुर्जर की अनुशंसा पर यह कार्रवाई की गई है. जानकारी के मुताबिक, विकास नगर निवासी अविनाश कोसले के खिलाफ 12 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. हत्या के प्रयास और चाकूबाजी जैसे गंभीर मामलों में वह जेल भी काट चुका है. लेकिन लगातार कार्रवाई के बावजूद उसके व्यवहार में सुधार नहीं हुआ, जिसके कारण अब जिला बदर की कार्रवाई की गई. पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने आदेश जारी कर अविनाश को 29 मई की शाम 5 बजे से रायपुर, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों की सीमा से बाहर रहने के निर्देश दिए हैं.  पुलिस ने सुनवाई के बाद उसके खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी किया. कमिश्नरेट पुलिस का यह पहला जिला बदर आदेश है. पुलिस अब शहर के अन्य आदतन अपराधियों के खिलाफ लगातार शिकंजा कसने वाली है. इसके लिए कई मामलों में प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया जारी है.

Census 2026: रायपुर में पहले चरण का काम खत्म, छूटे मकानों को दूसरे फेज में मिलेगा मौका

रायपुर. छत्तीसगढ़ में 30 मई को जनगणना के पहले चरण का समापन हो गया है। अधिकारियों के अनुसार रायपुर जिले में प्रगणकों ने 100 प्रतिशत से भी अधिक घरों तक पहुंचकर मकान सूचीकरण का कार्य पूरा कर लिया है। जिन घरों तक पहुंच नहीं हो सकी, उनका डेटा अगले चरण में शामिल किया जाएगा। प्रगणकों ने घर-घर जाकर जानकारी एकत्र की और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे सर्वर में दर्ज किया। इससे जिले में जनगणना कार्य सफलतापूर्वक पूरा माना जा रहा है। जनगणना के दौरान 1 मई से 30 मई तक प्रगणकों ने घर-घर जाकर 33 प्रकार के सवालों के आधार पर जानकारी एकत्र की और उसे सीधे सर्वर में दर्ज किया। इससे पहले 16 से 30 अप्रैल तक लोगों द्वारा स्वयं ऑनलाइन स्व-गणना भी की गई थी। इस प्रक्रिया में नागरिकों की बुनियादी जानकारी, आवासीय स्थिति और अन्य आवश्यक विवरण शामिल किए गए। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डेटा को तुरंत अपडेट किया गया, जिससे जनगणना कार्य को गति और पारदर्शिता मिली। खाली घरों तक कई बार पहुंचे प्रगणक अधिकारियों ने बताया कि जिन घरों में लोग उपलब्ध नहीं थे, वहां प्रगणक तीन से चार बार पहुंचे। इसके बाद भी यदि जानकारी नहीं मिल सकी, तो उन घरों को “बंद” दर्ज कर सिस्टम में अपडेट कर दिया गया। इसके बावजूद प्रयास किया गया कि अधिकतम घरों का सही डेटा संग्रहित हो सके और किसी भी परिवार की जानकारी छूट न जाए। यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न की गई। 2027 में होगा दूसरा चरण, जुटाई जाएगी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना का अगला चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे शिक्षा, भाषा, व्यवसाय और जाति संबंधी डेटा एकत्र किया जाएगा। इससे सरकार को योजनाएं बनाने में अधिक सटीक और रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा। इस चरण में विस्तृत सामाजिक और आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिससे विकास योजनाओं को और प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। रायपुर में बनाए गए 3939 ब्लॉक, मजबूत व्यवस्था के साथ हुआ सर्वे जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए रायपुर जिले को 3939 ब्लॉकों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक प्रगणक को 180 से 200 घरों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके साथ ही हर छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर की नियुक्ति भी की गई थी। इस व्यवस्था से सर्वे कार्य की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित की गई तथा पूरे अभियान को समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।