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JSSC CGL पेपर लीक केस में खुलती जा रही परतें, 135 में 120 सवाल परीक्षा में हुए मैच

 रांची  SSC CGL Paper Leak: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) प्रतियोगिता परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के लिए गठित 17 सदस्यीय एसआइटी को लगातार नई जानकारियां मिल रही हैं। नए सिरे से जब इस मामले की जांच तेज हुई तो गिरफ्तार एक-एक आरोपित इस परीक्षा में कथित पेपर लीक की पुष्टि करने लगे। सीआइडी के पूर्व डीजी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में सीआइडी ने जांच के दौरान 16 आरोपितों को गिरफ्तार तो किया था, लेकिन जांच में पेपर लीक की पुष्टि नहीं कर सकी थी। पूर्व की जांच में सीआइडी ने पाया था कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुई थी, बल्कि पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों से अवैध तरीके से वसूली की गई थी। जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी, ओएमआर शीट की हेराफेरी सहित अनियमितता मामले की जांच के क्रम में गिरफ्तार परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी के बाद ही एक-एक कर गड़बड़ियों का खुलासा होता गया। अभय कुमार तिवारी जेपीएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के मामले में गिरफ्तार हुआ था। जब उससे पूछताछ हुई तो उसने जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में भी गड़बड़ी से पर्दा उठाया। उसने बताया कि उसने स्वयं सहित अपनी पत्नी सुषमा कुमारी व भाई अक्षय तिवारी को उक्त परीक्षा में पास कराने के लिए जेएसएससी सीजीएल परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। अभय तिवारी ने यह भी बताया था कि उक्त परीक्षा में 12-12 लाख रुपये से लेकर किसी अभ्यर्थी से 15 लाख तो किसी से 20-20 लाख रुपये लेकर अभ्यर्थियों की सेटिंग कराई गई थी और उन्हें पास कराया गया था। बोकारो से लेकर नेपाल तक रटवाए गए थे प्रश्न व उत्तर सीजीएल परीक्षा मामले में एसआइटी ने गिरफ्तार आरोपितों से सख्ती से पूछताछ की तो आरोपितों ने बताया कि उन्हें बोकारो से लेकर नेपाल तक प्रश्न व उत्तर रटवाए गए थे। रटवाए गए 135 प्रश्नों में से 120 प्रश्न परीक्षा में मैच कर गए थे। रुपये देने वाले अभ्यर्थियों को भी सफलता हासिल हुई थी। सीआइडी की एसआइटी ने पिछले एक महीने के भीतर 11 सफल अभ्यर्थियों व परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के कर्मियों को गिरफ्तार किया है। अभ्यर्थियों व आइसीएन से जुड़े कर्मियों ने पेपर लीक की सूचना पर मुहर लगाई है। इसी सिंडिकेट से पूर्व में गिरफ्तार 16 अभ्यर्थी भी जुड़े थे, जिन्होंने अभ्यर्थियों से रुपये वसूले, उन्हें संबंधित ठिकानों तक पहुंचाया, जहां उन्हें प्रश्न व उत्तर रटवाया। इसमें विशेषज्ञों की भी मदद ली गई थी। वेबेल को मिला था काम, आइसीएन से करवाया, फिर लीक हुआ प्रश्न पत्र जेएसएससी सीजीएल परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबेल एजेंसी को मिली थी। वेबेल ने अपने सहयोगी आइसीएन से परीक्षा संचालन में मदद ली। आइसीएन प्रश्न प्रिंट होने से लेकर स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने में शामिल रहा। सीआइडी की जांच में पुष्टि हो चुकी है कि आइसीएन ने ही पेपर लीक किया अभ्यर्थियों, एजेंटों, दलालों, अधिकारियों के सिंडिकेट में आइसीएन भी शामिल था, जिसने पेपर लीक कर अयोग्य अभ्यर्थियों को मदद पहुंचाई है। सीआइडी ने अब तक 250 से अधिक अभ्यर्थियों व संदिग्धों का बयान ले लिया है। हर दिन पूछताछ जारी है। प्रखंड कल्याण पदाधिकारी कुंदन कुमार से रिमांड पर होगी पूछताछ सीआइडी की एसआइटी अब गिरफ्तार गुमला जिले के सिसई के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी कुंदन कुमार को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। कुंदन कुमार की नियुक्ति जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के माध्यम से हुई थी। सीआइडी ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि कुंदन कुमार ने स्वयं व अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी एजेंट बनकर अवैध भुगतान किया था और नौकरी हासिल की थी। सीआइडी सभी बिंदुओं पर छानबीन कर रही है। भाजपा लगातार कर रही है पूर्व डीजी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग सीआइडी की जांच में पेपर लीक की पुष्टि के बाद भाजपा लगातार पूर्व डीजीपी सह सीआइडी के पूर्व डीजी अनुराग गुप्ता के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से पत्राचार कर व इंटरनेट मीडिया एक्स पर पोस्ट कर पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। बाबूलाल मरांडी के अनुसार अनुुराग गुप्ता ने जान-बूझकर सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक व अनियमितता के मामलों की अनदेखी करते हुए आरोपों को गलत ठहराया था। सभी आरोप एक-एक कर सही साबित होते जा रहे हैं।  JSSC-CGL मामले की जांच को प्रभावित करने, उसे गलत दिशा में ले जाने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कराने के आरोपों से घिरे पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता पर कार्रवाई करने से मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM आखिर क्यों हिचक रहे हैं?     आखिर ऐसी क्या वजह थी कि अनुराग गुप्ता छात्रों द्वारा लगाए गए…

मृत समझकर किया अंतिम संस्कार, 28 महीने बाद घर पहुंची शिवानी; अब उलझी पुलिस की जांच

लखनऊ राजधानी लखनऊ में बड़ा चमत्कार हो गया है। यहां परिवार ने जिस महिला को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वह 28 महीने बाद जिंदा घर लौट आई। 28 वर्ष की शिवानी पांच सितंबर को बीकेटी तहसील के नवीकोट नंदना गांव में अपने मायके पहुंची। उसे देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। करीब डेढ़ वर्ष पहले आईआईएम रोड के पीछे नाले में एक अज्ञात महिला का शव मिला था। मायकेवालों ने उसकी पहचान शिवानी के रूप में की थी। इसके बाद भैंसाकुंड में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस प्रकरण में ससुरालवालों के खिलाफ दहेज हत्या का केस भी दर्ज कराया गया था। अब शिवानी के जिंदा लौटने से मामला उलझ गया है। सवाल है कि नाले में मिला शव आखिर किस महिला का था। पुलिस शिवानी को थाने ले गई और उससे पूछताछ की जा रही है। अपने प्रेमी के साथ पारा में रह रही उसके बारे में पता चला है कि वह अपने प्रेमी के साथ पारा में रह रही थी। पुलिस ने मामले में पड़ताल तेज कर दी है। अब सोमवार को पुलिस 164 के बयान दर्ज कराएगी। परिवार के मुताबिक, शिवानी का विवाह की शादी 22 अप्रैल 2020 को मूल रूप से सीतापुर और यहां बीकेटी के भीखापुर निवासी आनंद सिंह से हुई। आरोप है कि कुछ समय बाद उससे प्लाट की मांग की जाने लगी। दादी की मौत के बाद मायके आई शिवानी ने मां को जानकारी और फिर वापस ससुराल नहीं गई। दो मई 2024 की सुबह ससुराल से आधार कार्ड लाने की बात कहक शिवानी घर से निकली, लेकिन लौटी नहीं। ससुरालवालों ने भी जानकारी से किया इन्कार पिता सर्वेश सिंह उर्फ हींगू ने तलाश शुरू की। ससुरालवालों ने भी जानकारी से इन्कार किया तो बीकेटी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। 16 जुलाई को आइआइएम रोड के पीछे नाले में अज्ञात महिला का शव मिला। पुलिस ने शिवानी के स्वजन को सूचना दी। मेडिकल कालेज में स्वजन ने हाथ में बंधे कलावे और अंगूठी के आधार पर शिवानी के रूप में पहचान की। पुलिस की मौजूदगी में भैंसाकुंड में अंतिम संस्कार हुआ और ससुरालवालों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। शिवानी ने बताया सच पुलिस के मुताबिक, शिवानी पारा में जावेद नामक युवक के साथ रह रही थी, जो नगर निगम के शौचालय की देखरेख करता है। शिवानी के अनुसार उसकी मुलाकात जावेद से पारा में हुई। जावेद ने कई बार उसे घर लौटने के लिए कहा, लेकिन वह वापस नहीं गई। डीएनए रिपोर्ट में निकला था किसी और का शव डीएनए रिपोर्ट में निकला था किसी और का शव एसीपी बीकेटी विकास पांडेय ने बताया कि महिला के शव का डीएनए टेस्ट कराया गया था। रिपोर्ट में पता चला कि शव शिवानी का नहीं है इसलिए ससुराल पक्ष से किसी को जेल नहीं भेजा गया था, लेकिन अपहरण की धारा में जांच चल रही है। साथ ही वह शव किसका था यह पता लगाया जा रहा है। शिवानी से पूछताछ में पता चलेगा कि इतने दिन वह क्यों नहीं लौटी।  

छत्तीसगढ़ में जमीन सीमांकन हुआ आसान! डिजिटल सुविधा से तहसील के चक्कर खत्म, ऐसे मिलेगा लाभ

डिजिटल छत्तीसगढ़- अब ज़मीन के सीमांकन के लिए नहीं काटने पड़ेंगे तहसील के चक्कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश,पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन रायपुर,   राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ज़मीन के सीमांकन (Demarcation)  की प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। अब ज़मीन मालिकों को नाप-जोख या सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।        नए डिजिटल सिस्टम में सीमांकन आवेदन के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि सिर्फ  लोक सेवा केंद्र (CSC/चॉइस सेंटर) और राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिज़न  पोर्टल या सेवासेतु के माध्यम से ही आवेदन जमा किए जा सकेंगेद्य जिससे सीमांकन के ऑफलाइन या मैन्युअल आवेदन को म-बवनतज अंतर्गत  तहसील स्तर से दर्ज करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर हो जाएंगे। एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी अपने रिपोर्ट ऑनलाइन  जमा करने का प्रावधान भी इसमें शामिल किया जा रहा है, जिससे आवेदक को आवेदन के संबंध मे सभी स्तर के जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।      राजस्व विभाग के भू-अभिलेख शाखा से जारी पत्र अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट  (E-Court)  सॉफ्टवेयर में ज़रूरी तकनीकी सुधार कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गये हैं।        सिर्फ आपत्ति होने पर ही जाना होगा तहसील        नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग से पूरी होगी। आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना पड़ेगा, जब सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी या अन्य पक्ष द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए। अगर मामला निर्विवाद है, तो आवेदक को एक बार भी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होगी।        मैन्युअल व्यवस्था खत्म होने से दफ्तरों की अनचाही भाग-दौड़ और बिचौलियों का दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। तय समय-सीमा के कारण मामलों के पेंडिंग रहने की समस्या दूर होगी और आवेदकों को निश्चित समय में सीमांकन रिपोर्ट मिल जाएगी।  ई-गवर्नेंस की ओर एक और बड़ा कदम      राजस्व विभाग नागरिकों की सुविधा के लिए पहले ही कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर चुका है। जिसमें डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 एवं P-II नागरिक घर बैठे खसरा और खतौनी की QR कोड वाली प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं। ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (Diversion) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है।          राजस्व विभाग की यह नई पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और आम लोगों की समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

दिल्ली में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 मौतें, CM रेखा गुप्ता के निर्देश पर 5 अफसर निलंबित

नई दिल्ली  दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को गिरी 5 मंजिला इमारत मामले में दिल्ली सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के मुताबिक, सीएम रेखा गुप्ता के सख्त निर्देश के बाद एमसीडी ने 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। जिसमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, रणवीर सिंह, ललित कुमार गोयल, सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। बिल्डिंग के मालिक की तलाश के लिए गठित की गई 10 टीमें वहीं बिल्डिंग के गिरने से हुए हादसे के संबंध में भवन मालिक हरिराम बंसल को गिरफ्तार करने के लिए 10 अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद उसे ढूंढने और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इन टीमों में स्थानीय जिला पुलिस और विशेष स्टाफ के कर्मियों के साथ-साथ जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी 10 टीमों का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अतिरिक्त डीसीपी) रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी अभियान की निगरानी कर रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर तलाशी का समन्वय कर रहे हैं। सत्य निकेतन हादसे ने खोली सिस्टम की पोल पुलिस के अनुसार, हरिराम का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने के प्रयासों के तहत दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने दर्ज की FIR पुलिस ने रविवार को हरिराम बंसल और अन्य लोगों के खिलाफ इमारत गिरने के संबंध में एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार, इमारत का उपयोग पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में किया जा रहा था और बेसमेंट में कथित तौर पर नवीनीकरण का काम चल रहा था, तभी अचानक इमारत गिर गई। इस घटना में सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 12 लोगों को बचा लिया गया है और हादसे वाली जगह पर मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है।

बेटियों को नेतृत्व और सुरक्षा का मजबूत कवच, मीना मंचों के 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेगी योगी सरकार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विद्यालय स्तर पर चल रहे कार्यक्रमों को संस्थागत मजबूती दे रही है। इसी नीति के अंतर्गत विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व क्षमता विकास का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए राज्य स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार एसआईईटी, प्रयागराज में 09 से 24 सितंबर तक नौ बैचों में कुल 450 प्रतिभागियों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) एवं मास्टर ट्रेनर (एमटी) कार्यशाला होगी। कार्यशाला में मीना मंचों के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता प्रदान करने तथा यौन शोषण संबंधी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिभागियों की क्षमता संवर्धित की जाएगी। नौ बैचों में होगा प्रशिक्षण जारी दिशा निर्देश के अनुसार प्रथम एवं द्वितीय बैच की कार्यशाला 09 एवं 10 सितंबर, तृतीय एवं चतुर्थ बैच की 11 एवं 12 सितंबर, पंचम एवं षष्ठम बैच की 21 एवं 22 सितंबर, सप्तम एवं अष्टम बैच की 16 एवं 17 सितंबर तथा नवें बैच की कार्यशाला 23 एवं 24 सितंबर 2026 को होगी। प्रत्येक बैच में 50 प्रतिभागी शामिल होंगे और कुल 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 75 जनपदों से होगी सहभागिता कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रथम बैच में बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फैजाबाद और फर्रुखाबाद से छह-छह प्रतिभागी शामिल होंगे। द्वितीय बैच में फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर और हमीरपुर से प्रतिभागी होंगे। तृतीय बैच में हापुड़, हरदोई, हाथरस, जालौन, जौनपुर, झांसी, कन्नौज और कानपुर देहात तथा चतुर्थ बैच में कासगंज, कौशाम्बी, कुशी नगर, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ और महराजगंज से प्रतिभागी शामिल होंगे। इसी तरह पंचम बैच में महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर तथा षष्ठम बैच में पीलीभीत, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संत कबीर नगर और शाहजहांपुर से प्रतिभागी होंगे। सप्तम बैच में शामली, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी तथा अष्टम बैच में आगरा, अलीगढ़, औरैया, प्रयागराज, अम्बेडकर नगर, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़ और बागपत से सहभागिता होगी जबकि नवां बैच 23 एवं 24 सितंबर को आयोजित होगा, जिसमें बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही और बिजनौर से प्रतिभागी शामिल होंगे। मीना मंचों को मिलेगा सशक्त नेतृत्व कार्यशाला का उद्देश्य मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता और सुरक्षा संबंधी जागरूकता से जोड़ते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। टीओटी एवं एमटी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागी आगे संबंधित स्तरों पर इस क्षमता को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विद्यालयों में बालिकाओं की सहभागिता को बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। कोट: योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। मीना मंच बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व विकास का प्रभावी माध्यम है। 450 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण इस व्यवस्था को और मजबूत करेगा। *संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश*

₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance का लोकार्पण, BPL परिवारों की 50 महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित

रायपुर सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से रेखांकित करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भोपाल सर्कल ने रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में दो महत्वपूर्ण CSR पहल कीं। एक ओर पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, रायपुर को ₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance प्रदान की गई, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद एवं BPL परिवारों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 50 सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। इन महत्वपूर्ण अवसरों पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अध्यक्ष सी.एस. सेट्टी की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशेष बात यह रही कि बैंक के सभी प्रबंध निदेशक  अश्विनी तिवारी, राणा आशुतोष कुमार सिंह, राम मोहन राव अमरा एवं रवि रंजन भी एक मंच पर उपस्थित रहे। SBI के शीर्ष नेतृत्व की इस सामूहिक उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की और भोपाल सर्कल के लिए यह एक गौरवपूर्ण अवसर बना। जीवन बचाने वाली चिकित्सा सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम SBI द्वारा CSR के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई Advanced Life Care Ambulance अत्याधुनिक जीवन रक्षक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित है। आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुंचाने में यह एम्बुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एम्बुलेंस को पंडित JNM मेडिकल कॉलेज, रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने प्राप्त किया। इस अवसर पर SBI भोपाल सर्कल के मुख्य महाप्रबंधक प्रभाष कुमार सुबुद्धि सहित CMC के सभी सदस्य एवं बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। SBI की इस पहल को रायपुर और आसपास के क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। यह केवल एक एम्बुलेंस का योगदान नहीं, बल्कि जरूरत के समय जीवन बचाने की व्यवस्था को मजबूत करने की पहल है। 50 सिलाई मशीनों से आत्मनिर्भरता की ओर कदम CSR कार्यक्रम की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में BPL लाभार्थियों के लिए 50 सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। लाभार्थियों का चयन परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना अभनपुर द्वारा किया गया था। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार का साधन देकर आत्मनिर्भर बनाना है। सिलाई मशीन मिलने से महिलाएं अपने घर से ही आय अर्जित करने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगी। SBI Ladies Club(कॉर्पोरेट सेंटर) की ओर से श्रीमती सूर्या श्रीदेवी, विजया अमरा एवं अमृता सिन्हा एवं अन्य वरिष्ठ सदस्याओं द्वारा लाभार्थियों को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में भोपाल मंडल की ओर से लेडीज क्लब अध्यक्षा श्रद्धांजलि सुबुद्धि सहित बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। CSR को सेवा और सशक्तिकरण का माध्यम बना रहा SBI SBI की इन दोनों पहलों ने बैंक के CSR दृष्टिकोण की व्यापकता को सामने रखा। *एक पहल जीवन बचाने वाली स्वास्थ्य सुविधा को मजबूती देती है, तो दूसरी जरूरतमंद महिलाओं के हाथों में आत्मनिर्भरता का साधन सौंपती है। SBI भोपाल सर्कल की यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों तक अवसर, सुविधा और सम्मान पहुंचाना भी है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जीवनरक्षक सुविधा और महिलाओं के हाथों में रोजगार का साधन—SBI की CSR पहल ने रायपुर में सेवा, संवेदना और सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली संदेश दिया।

भाजपा के बाद अब JDU को मिल सकती है विधान परिषद सभापति की कुर्सी, NDA में बनी सहमति की चर्चा

 पटना  बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद अब सत्ता के गलियारों में एक और बड़े राजनीतिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। बिहार विधान परिषद के सभापति का पद एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जा सकता है। चर्चा है कि इसको लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहमति बन चुकी है। यदि यह बदलाव होता है तो इसे भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-संतुलन साधने की दिशा में अहम कदम माना जाएगा।फिलहाल विधान परिषद के सभापति की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह के पास है। नई सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि सरकार में महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे के बाद अब विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी जदयू को दी जा सकती है। भाजपा के पास कई अहम पद, जदयू की दावेदारी क्यों मजबूत? सरकार में मुख्यमंत्री पद समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भाजपा के पास हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को दिया जाना एनडीए के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाने का संदेश माना जा रहा है। यानी सदन के दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों में से एक पर जदयू की मौजूदगी गठबंधन के भीतर जिम्मेदारियों के संतुलित बंटवारे का संकेत दे सकती है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधान परिषद में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन जदयू भी मजबूत स्थिति में है। आंकड़ों को देखें तो परिषद में भाजपा के 25 और जदयू के 20 सदस्य हैं। इसके अलावा राजद के 15, कांग्रेस के दो, निर्दलीय सात तथा सीपीआई, सीपीएम, हम, रालोमो और लोजपा (रामविलास) के एक-एक सदस्य हैं। विधानसभा में भी भाजपा और जदयू के बीच सीटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं है। भाजपा के 88 जबकि जदयू के 85 विधायक हैं। ऐसे में दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए संवैधानिक पदों का बंटवारा एनडीए के भीतर सत्ता-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है। जदयू के लिए नई नहीं है सभापति की कुर्सी विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की दावेदारी पहले भी रही है। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर करीब दो वर्षों तक इस पद पर रहे थे। वहीं, महागठबंधन सरकार के दौरान उपसभापति हारुण रशीद ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे साफ है कि विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी को लेकर जदयू की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है। किसे मिलेगी जिम्मेदारी, इस पर नजर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सभापति का पद जदयू के खाते में जाता है तो पार्टी किस वरिष्ठ विधान पार्षद को यह जिम्मेदारी देगी।पार्टी के भीतर अनुभवी नामों पर मंथन की चर्चा है। हालांकि, संभावित नाम को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक तौर पर यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नई सरकार के दौर में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-साझेदारी का नया प्रारूप सामने आ रहा है। ऐसे में विधान परिषद सभापति का पद किसके पास जाता है, इसे आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर शक्ति-संतुलन के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जाएगा।  

राजस्थान के मौसम का बदला मिजाज, 7 सितंबर के बाद घटेगी बारिश, 12-13 सितंबर से फिर अलर्ट

जयपुर राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 8 से 10 सितंबर तक ज्यादातर इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है। राहत के इस दौर के बाद 12-13 सितंबर से फिर बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं। 7 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। 7 सितंबर को इन इलाकों में बारिश के आसार मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार 7 सितंबर को अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों के अलावा टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। उदयपुर संभाग में भी कुछ जगह बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, बीकानेर और नागौर में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है। उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बना सिस्टम कमजोर राजस्थान में पिछले दिनों हुई बारिश के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) प्रमुख मौसम सिस्टम था। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ी थीं। IMD ने 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई थी। अब यह सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके कमजोर होने के साथ राजस्थान में मानसून की सक्रियता भी कम होने की संभावना है। इसलिए 7 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों घट सकती हैं। 8 से 10 सितंबर तक बारिश से राहत मौसम विभाग के अनुसार 8 से 10 सितंबर के बीच राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की संभावना है। इस दौरान व्यापक बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। यानी अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश से कुछ राहत मिल सकती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है। 12-13 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून बारिश में यह कमी लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 और 13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं। 12 से 15 सितंबर के बीच पूरबाई हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ सकती है। इससे पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में कई स्थानों पर खंड-खंड बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा रह सकती हैं। हालांकि इस दौरान किसी एक सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है। इसलिए इस दौर को फिलहाल नमी बढ़ने और पूरबाई हवाओं के असर से संभावित बारिश के चरण के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। 16-17 सितंबर से फिर कम हो सकती है बारिश मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 सितंबर के आसपास प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में एक बार फिर कमी आ सकती है। हालांकि 10 से 15 दिन के विस्तारित पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले किसी नए मौसम सिस्टम, मानसून ट्रफ की स्थिति और हवाओं के रुख का राजस्थान की बारिश पर असर पड़ सकता है। इसलिए अगले चरण की बारिश को लेकर स्थिति साफ होने के साथ पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।  

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट की फटकार, ‘सिर्फ मालिक नहीं, MCD भी जिम्मेदार’

 नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतों के गिरने के मामले में दाखिल PIL पर सुनवाई की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे. कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी।  यह PIL सत्य निकेतन इलाके में कल हुई उस घटना के बाद दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें गिर गई थीं. इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. इमारतों में रहने वाले कई छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है. उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए।  हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अधिक गहरे और सार्थक तरीके से काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें गिरीं, उनमें आसपास के DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. कोर्ट ने कहा कि यह आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं देता, जिसके कारण छात्रों को PG का इस्तेमाल करना पड़ता है।  HC ने DU से बाहर से आने वाले कितने छात्र उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. कोर्ट ने MCD से पूछा कि क्या PG चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं. MCD को इस बारे में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है।  इमारतों की अनुमति की जांच और PG हॉस्टल का ऑडिट हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराई जाए कि हादसे में गिरी इमारतें वैध अनुमति के साथ बनाई गई थीं या नहीं. अगर इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी तो इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है. कोर्ट ने गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है. इसके साथ ही MCD को PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनका निर्माण संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ है या नहीं. सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर लेते हैं. इस पर HC ने पूछा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट PG के तौर पर किराए पर दिया जा रहा है. कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा देने को भी कहा. चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है. जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि हर निर्माण नियमों के अनुसार किया जाए. HC ने कहा कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग होते तो शायद ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था. कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। 

AI-डेटा से डिफेंस और फूड प्रोसेसिंग तक हर सेक्टर में अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब  AI-डेटा से डिफेंस और फूड प्रोसेसिंग तक हर सेक्टर में अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 25 से ज्यादा नई नीतियां लागू 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को MSME सेक्टर में रोजगार भोपाल मध्यप्रदेश अब निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। दुबई यात्रा के पहले दिन पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश की दृष्टि से हर क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेक्टर, ड्रोन, डिफेंस और साइंस सिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश के लिए राज्य में अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर क्षेत्र की स्थानीय क्षमता को पहचानकर उसे उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदलना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में जो पहल की है, मध्यप्रदेश में उसे प्रभावी रूप से लागू किया गया है। राज्य सरकार ने कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया है और 25 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़े उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल अधिक अनुकूल हुआ है। MSME सेक्टर में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग MSME क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने शासकीय सेवाओं में नई भर्तियां भी लागू की हैं। प्रदेश में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है और निर्यात के क्षेत्र में भी राज्य लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है।उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापार हितैषी नीतियों का उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ स्थानीय उद्यमों को भी विस्तार के अवसर उपलब्ध कराना है। निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे उद्योगों की स्थापना और संचालन दोनों को सुगम बनाया जा सके। AI, डेटा, ड्रोन और डिफेंस पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश ने AI, डेटा, ड्रोन और डिफेंस जैसे नए क्षेत्रों को विशेष रूप से प्रमोट किया है। प्रदेश में तीन नए IT पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो रीवा, इंदौर और उज्जैन में बन रहे हैं। इनसे तकनीकी उद्योगों, स्टार्टअप और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।उन्होंने कहा कि प्रदेश में साइंस सिटी भी विकसित की जा रही है। विज्ञान, तकनीक, नवाचार और नई पीढ़ी के कौशल विकास के लिहाज से यह महत्वपूर्ण पहल है।  जमीन, बिजली, पानी और ग्रीन एनर्जी की पर्याप्त उपलब्धता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति बेहद मजबूत है। प्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक और भूमि, सरप्लस बिजली तथा पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पंप लोड और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता प्रदेश में है।उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए भूमि और संसाधनों के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आवागमन की सुविधा भी जरूरी है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में भी अपनी कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। यही वजह है कि प्रदेश देशभर के निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में दुनिया की सबसे सस्ती बिजली बन रही है। सस्ती बिजली, ग्रीन एनर्जी, पर्याप्त भूमि, पानी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संयोजन प्रदेश को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाता है। इन सुविधाओं और नीतिगत लाभों के आधार पर मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को प्रतिस्पर्धा दे रहा है। नीतियां बनीं निवेश की ताकत, लाभ जमीन पर पहुंचा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सरकार ने केवल नीतियां बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि निवेशकों को नीतियों के आधार पर मिलने वाले लाभ प्रभावी रूप से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। व्यापार हितैषी नीतियों के साथ निवेशकों के लिए आवश्यक सुविधाओं और अनुकूल वातावरण का निर्माण किया गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने का परिणाम है कि बड़े उद्योगों की स्थापना तेजी से हो रही है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से जिला स्तर तक पहुंचेगा उद्योग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करने के नए अवसर तैयार किए गए हैं। इस पहल की देशभर में सराहना हुई है।अब सरकार का फोकस जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और संभावनाओं को चिन्हित कर उन्हें उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसरों में बदला जा रहा है। इससे औद्योगिक विकास बड़े शहरों तक सीमित न रहकर जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा। शिक्षा और स्वास्थ्य को रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से प्रदेश में शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी इसी दृष्टिकोण से सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि बेहतर सेवाओं के साथ इस क्षेत्र में भी रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ें। भोपाल-इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, चार नए एयरपोर्ट की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश और पर्यटन के लिए बेहतर एयर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है। प्रदेश में चार और नए एयरपोर्ट विकसित किए जाने की तैयारी है। ग्वालियर और जबलपुर भी एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से तैयार हैं और भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के कारण मध्यप्रदेश देश और दुनिया से तेजी से जुड़ … Read more