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5 वर्षों में रोपे गए 27 लाख से अधिक पौधे, 951 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हरित आवरण

रायपुर पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार सतत भविष्य के लिए अनिवार्य है। इसमें वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और जन जागरूकता प्रमुख हैं। शहरी क्षेत्रों में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण, प्लास्टिक प्रतिबंध और जल प्रदूषण कम किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। वनों की रक्षा, बंजर भूमि का पुनरुद्धार और सामुदायिक उद्यान विकसित करना है।               छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बिलासपुर जिले के (कोटा परियोजना मंडल)  पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विगत पांच वर्षों (2021 से 2025-26) के दौरान निगम ने जिले के विभिन्न अंचलों में योजनाबद्ध तरीके से 27 लाख 14 हजार 350 पौधों का रोपण कर 951.980 हेक्टेयर क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया है। वृक्षारोपण के प्रमुख आंकड़े और प्रजातियां            852 हेक्टेयर के 66 कक्षों में 21.30 लाख पौधे लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से बेशकीमती सागौन का रोपण किया गया। सघन और त्वरित वृद्धि के लिए नीलगिरी और सागौन के उन्नत क्लोनल पौधों का रोपण किया गया। विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में 3.16 लाख से अधिक पौधे लगाकर ग्रीन कवर बढ़ाया गया। अरपा नदी का संरक्षण- एक विशेष पहल        नदी पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2025-26 में अरपा नदी के तटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत कम जगह में घने जंगल विकसित करने के लिए अरपा किनारे 3.620 हेक्टेयर में 20,300 पौधे रोपे जाएंगे। नदी के किनारों पर सघन ब्लॉक वृक्षारोपण और रामसेतु क्षेत्र में विशेष हरियाली विकसित की जाएगी, जिससे भू-क्षरण रुकेगा। दूरगामी प्रभाव वन विकास निगम के ये सतत प्रयास न केवल बिलासपुर के स्थानीय जलवायु संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं, बल्कि इससे भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण का एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है। निगम का यह अभियान प्रदेश की हरित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

नीमच में 12 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण के प्रयास से मुक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वन संरक्षण और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में नीमच जिले के पङदा सबरेंज अंतर्गत बीट मोकडी में वन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर लगभग 12 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण के प्रयास से मुक्त कराया। मुख्य वन संरक्षक उज्जैन  आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी नीमच  एस.के. अटोदे के निर्देशन तथा उप वन मंडल अधिकारी मानसा  दशरथ अखंड के मार्गदर्शन में परिक्षेत्राधिकारी  शाश्वत द्विवेदी के नेतृत्व में 7 मई को यह कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कक्ष क्रमांक 297 में लगभग 6 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास को विफल किया गया। ग्रामीणों द्वारा भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा था। मौके पर जेसीबी मशीनों की सहायता से डबरा-डबरी कंटूर ट्रेंच (सीपीटी) का निर्माण कराया गया तथा वन एवं राजस्व भूमि के बीच स्पष्ट सीमा रेखा निर्धारित करने के लिए खुदाई की गई, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके। इसी प्रकार 5 मई 2026 को कक्ष क्रमांक 298 में 4 हेक्टेयर तथा 6 मई 2026 को 2 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास को विफल किया गया। लगातार तीन दिनों तक चली कार्रवाई में कुल 12 हेक्टेयर वन भूमि को सुरक्षित किया गया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गेहूँ उपार्जन की कर रहे सतत मॉनीटरिंग

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और सतत मॉनीटरिंग तथा उपार्जन केन्द्रों के औचक निरीक्षण के परिणामस्वरूप गेहूँ की उपार्जन प्रक्रिया सुगमता से जारी है। किसानों को समय पर उपार्जित गेहूँ का भुगतान हो रहा है। अभी तक किसानों को 10403.17 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन 23 मई तक होगा। 9.38 लाख किसानों से 56.45 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 9 लाख 38 हजार किसानों से 56 लाख 45 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है कि तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटोग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके। मैं ट्रॉली में गेहूं लेकर आया था और मात्र 10 मिनट में मेरी ट्रॉली खाली हो गई। यहाँ पानी, बैठने और अन्य सभी सुविधाओं की बहुत अच्छी व्यवस्था है। आराम से बैठ सकते हैं, किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।”- रामचरण अन्ना, ग्राम रामकोट हमारी पंचायत में भी सायलो की व्यवस्था है। हम यहाँ ट्रॉली खाली कराने आए थे। यहाँ पानी, छाया और बैठने की बहुत अच्छी व्यवस्था है। बाहर और अंदर दोनों जगह किसान आराम से पानी पी सकते हैं। टेंट लगाए गए हैं और पेड़ों की छांव भी अच्छी है। अंदर बैठने और गार्डन जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।

गुणवत्ता के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शुक्रवार को उप नगर ग्वालियर बिरला नगर पुल से चंदन पुरा तक जनकल्याण समिति के सहयोग से सुपर सकर मशीन द्वारा चल रहे सीवर सफाई अभियान का निरीक्षण करते हुए सफाई कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश से पहले इस काम को हर हाल में पूर्ण करना है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां नवीन सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है वहां गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री  तोमर के निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन,नगर निगम प्रशासन, विद्युत वितरण कंपनी सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं पार्षद गण उपस्थित रहे। मंत्री  तोमर ने कहा कि आज ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन द्वारा सफाई का महाअभियान चलाया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। मंत्री  तोमर ने 15 ग्वालियर विधानसभा में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, आज स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है।यही बदलाव है। जो हमने और आपने साथ मिलकर किया है। मंत्री  तोमर ने कहा कि हमने बदलाव लाने की ठान ली है और जल्दी ही ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक पर होगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत 62 जोड़ों ने लिए सात फेरे, नवदंपत्तियों को मिली शासकीय सहायता

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देशानुसार रायपुर जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजनांतर्गत आज तीन विभिन्न स्थलों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कुल 62 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नए जीवन की शुरुआत की। टाऊन हॉल, आरंग में 16 जोड़ों का विवाह कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग मंत्री गुरू खुशवंत साहेब के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन, जनपद अध्यक्ष  टाकेश्वरी मुरली साहू, जनपद सदस्य  पद्मिनी साहू एवं जनपद उपाध्यक्ष  रविन्द्र चंद्राकर उपस्थित रहे। डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन, सासाहोली, तिल्दा-नेवरा में 31 जोड़ों का विवाह जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष  टीकेश्वर मनहरे, नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्रकला वर्मा, जिला पंचायत सदस्य एवं महिला एवं बाल विकास सभापति  शैल महेन्द्र साहू, जनपद सदस्य एवं महिला एवं बाल विकास सभापति  सरोज मुकेश भारद्वाज, नगर पालिका उपाध्यक्ष  पलक सुखवानी एवं समस्त पार्षदगण तिल्दा की उपस्थिति में संपन्न कराया गया। मंगल भवन, धरसीवां में 15 जोड़ों का विवाह जिला पंचायत सदस्य  सरोज चंद्रवंशी एवं जनपद अध्यक्ष  शकुंतला सेन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। शासन द्वारा सभी नवविवाहित जोड़ों को योजनांतर्गत निर्धारित सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने नवदंपत्तियों को सुखमय एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन हेतु शुभकामनाएं दीं। महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बेटियों का सम्मान और सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से गरीब परिवारों को संबल मिल रहा है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल रहा है। इस दौरान विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

अंग्रेजी ओलंपियाड वर्ड पावर के बने राष्ट्रीय विजेता

भोपाल  भोपाल के सांदीपनि विद्यालय गोविंदपुरा के कक्षा 5वीं के छात्र मास्टर आराध्य पाराशर ने ‘वर्ड पावर चैम्पियनशिप’ में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश एवं जिले का गौरव बढ़ाया है। छात्र आराध्य की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल तथा राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया है। इस अवसर पर प्रदेश ओलंपियाड प्रभारी डॉ. आर. पी. त्रिपाठी, सांदीपनि विद्यालय गोविंदपुरा की प्राचार्या डॉ. पूनम अवस्थी, शिक्षिका ऋतु सक्सेना एवं आराध्य के अभिभावक उपस्थित रहे। विगत दिनों मुंबई में आयोजित ‘वर्ड पावर चैम्पियनशिप’ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य स्तरीय विजेता विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रतियोगिता का आयोजन प्रतिवर्ष तीन चरणों में जन शिक्षा केंद्र, जिला एवं राज्य स्तर पर किया जाता है। मध्यप्रदेश में इस प्रतियोगिता का संचालन राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा किया जाता है। राज्य स्तर पर चयनित विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन आयोजक संस्था ‘लीप फॉर वर्ड’ द्वारा मेरिको एवं निहार शांति पाठशाला के सहयोग से किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 2 से 5 तक के विद्यार्थी भाग लेते हैं। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता विद्यार्थियों एवं उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को प्रमाण-पत्र, ट्रॉली बैग, स्पीकर, स्पोर्ट्स किट सहित विभिन्न उपहार प्रदान कर सम्मानित किया जाता है।  

पांच राज्य संग्रहालयों का निर्माण पूरा, तीन परियोजनाएं अंतिम चरण में

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग के अधीन संचालित पांच राज्य संग्रहालयों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्य पूरे कर जनता को समर्पित कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य परियोजनाओं के कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। इन संग्रहालयों में प्रदेश की गौरवशाली परंपरा, पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं और दुर्लभ मूर्तियां संरक्षित की गईं हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़ सकेंगी। प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय और नवाबी कला गैलरी बनी आकर्षण का केंद्र पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बीते पांच वर्षों में राज्य संग्रहालयों के विकास के लिए व्यापक कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ उसे आधुनिक स्वरूप देने का कार्य कर रही है। राज्य संग्रहालय लखनऊ में 2483.05 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन 4 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। यह संग्रहालय आम लोगों और विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा अवधी गैलरी (नवाबी कला) के सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण का कार्य भी 171.80 लाख रुपये की लागत से पूरा करा लिया गया है। यहां अवध की समृद्ध कला, संस्कृति और नवाबी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। वहीं विदेशी मूर्तिकला गैलरी की दुर्लभ मूर्तियों को भी स्थानांतरित कर सुरक्षित रूप से संग्रहालय परिसर में स्थापित कर दिया गया है। आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित हो रहा संग्रहालय परिसर संग्रहालय परिसर को आधुनिक सुविधाओं से भी लैस किया जा रहा है। चतुर्थ पार्श्व गैलरियों के पहुंच मार्ग, शौचालय, विद्युत व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे कराए जा चुके हैं। साथ ही संग्रहालय सभागार के सौंदर्यीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद उसका उद्घाटन 27 अगस्त 2025 को किया गया। ओल्ड कोठी में कैफेटेरिया आदि का कार्य 459.12 लाख रुपये और 460.49 लाख रुपये की लागत से बेसमेंट कक्षों के सुदृढ़ीकरण तथा 174.66 लाख रुपये की लागत से सीवर लाइन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट और नलकूप बोरिंग से जुड़े कार्य तेजी से चल रहे हैं।

17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों पर पूरी हुईं तैयारियां, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी में होगी परीक्षा

प्रयागराज / लखनऊ उ०प्र० शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा प्रवक्ता संवर्ग के 18 विषयों के कुल 624 पदों हेतु लिखित परीक्षा का आयोजन 09 एवं 10 मई 2026 को किया जाएगा। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित होगी, जिसमें कुल 4,64,605 पंजीकृत अभ्यर्थी प्रतिभाग करेंगे। योगी सरकार की पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा नीति के अनुकूल सभी तैयारियां की गई हैं।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार  ने 17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संबंधी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं हैं। परीक्षा केंद्रों के सभी कक्षों एवं महत्वपूर्ण स्थलों को एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से आच्छादित कर जिला कंट्रोल रूम तथा आयोग के अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से जोड़ा गया है। आयोग द्वारा सभी केंद्रों की कनेक्टिविटी का सफल परीक्षण भी कर लिया गया है। आयोग की ओर से परीक्षा के सघन अनुश्रवण के लिए प्रत्येक जनपद में एक-एक प्रेक्षक नियुक्त किया गया है। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं निगरानी टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का भ्रमण करेंगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी तथा पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित करने वाले व्यक्तियों एवं नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  09 मई को प्रथम पाली में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास एवं शिक्षाशास्त्र सहित 06 विषयों तथा द्वितीय पाली में अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य एवं समाजशास्त्र सहित 04 विषयों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। वहीं 10 मई को प्रथम पाली में नागरिक शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत एवं मनोविज्ञान सहित 05 विषयों तथा द्वितीय पाली में रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला सहित 04 विषयों की परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन सहित किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही एआई तकनीक की सहायता से ऐसे संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई है, जिन्होंने एक ही नाम से अलग-अलग फोटो के साथ अथवा एक ही फोटो के साथ अलग-अलग नामों से आवेदन किया है। ऐसे परीक्षार्थियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोग द्वारा अभिनव प्रयोग के रूप में लखनऊ मंडल के 10 परीक्षा केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पाली की परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद अभ्यर्थियों द्वारा प्रयुक्त ओएमआर उत्तर पत्रकों की स्कैनिंग परीक्षा कक्ष में ही कक्ष निरीक्षकों एवं परीक्षार्थियों की उपस्थिति में की जाएगी। स्कैन डाटा को तत्काल सुरक्षित किया जाएगा, जिसका आवश्यकता पड़ने पर मूल ओएमआर से मिलान किया जा सकेगा। आयोग अध्यक्ष ने सभी अभ्यर्थियों से समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचने एवं प्रवेश पत्र में अंकित निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की अपील की है। उन्होंने अभ्यर्थियों से किसी भी अफवाह अथवा भ्रामक सूचना से बचने तथा आयोग की वेबसाइट यूपीईएसएससी एवं आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध सूचनाओं पर ही भरोसा करने को कहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करने वाले अनुचित साधनों के प्रयोग पर उ०प्र० सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं ।

सोने के साथ अब कटनी के बड़वारा में डोलोमाइट के भंडार-ब्लॉक्स आरक्षित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कटनी जिला देश के महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह अयस्क, मार्बल और लेटराइट जैसे बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध कटनी अब स्वर्ण अयस्क के साथ ही डोलोमाइट के विशाल भंडार खनन के लिये तैयार हैं। कटनी के बड़ेरा एवं बचरबाड़ा में 50 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तीन बड़े डोलोमाइट ब्लॉक्स को माइनिंग कॉर्पोरेशन के पक्ष में आरक्षित किया गया है। इस निर्णय से कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहाकि अब कटनी ‘माइनिंग कैपिटल’ के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि कटनी केवल ‘चूना नगरी’ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खनिज आधारित औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार और आधुनिक खनन प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनहितकारी उपयोग के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी को ‘कनकपुरी’ अर्थात ‘स्वर्ण नगरी’ के रूप में विकसित करने की परिकल्पना को विशेष महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि कटनी की धरती केवल खनिज संपदा का भंडार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक शक्ति का नया आधार बन रही है। कटनी की स्लीमनाबाद तहसील के इमलिया गांव, जिसे स्थानीय स्तर पर “सुनाही” के नाम से भी जाना जाता है। यहॉ पर लगभग 3.35 लाख टन से अधिक स्वर्ण अयस्क मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। यह खोज लगभग 50 वर्षों की लंबी भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया और सर्वेक्षण के बाद की गई है। वर्ष 1974 में प्रारंभ हुए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के आधार पर इस क्षेत्र में स्वर्ण भंडार की संभावना व्यक्त की गई थी, जिसे अब वर्ष 2025-26 में अंतिम रूप दिया गया है। सोने के साथ तांबा, जिंक, लेड और चांदी के भंडार इमलिया क्षेत्र में केवल सोना ही नहीं, बल्कि तांबा, लेड, जिंक और चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों के भंडार भी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज कटनी को देश के प्रमुख बहु-खनिज क्षेत्रों में स्थापित करेगी। इन खनिज संसाधनों का उपयोग प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 50 वर्ष के लिए हुआ खनन समझौता स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए मुंबई की ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी ने 121 करोड़ रूपये से अधिक की बोली लगाकर 50 वर्षों के लिए खनन लीज प्राप्त की है। लगभग 6.5 हैक्टेयर क्षेत्र में खनन गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, औद्योगिक गतिविधियाँ और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खनिज उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन सुनिश्चित करना भी है। माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0 से मिला वैश्विक निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अगस्त 2025 में आयोजित ‘माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0’ ने कटनी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर नई पहचान दिलाई। कॉन्क्लेव में 56 हजार 414 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख उद्योग समूहों और निवेशकों के साथ वन-टू-वन चर्चा कर कटनी की खनिज क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया था। कॉन्क्लेव में 8 बड़ी कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई थी। इन निवेश प्रस्तावों से सीमेंट, मिनरल प्रोसेसिंग, ऊर्जा, धातु प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र में बड़े स्तर पर औद्योगिक विस्तार होने की संभावना है। इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होंगे। नवाचार और सुशासन से राजस्व में वृद्धि कटनी जिला प्रशासन की सक्रियता, तकनीक आधारित निगरानी और बेहतर खनन प्रबंधन के कारण कटनी के खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पूर्व में जहां जिले की औसत वार्षिक खनिज आय लगभग 100 करोड़ रूपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 160 करोड़ रूपये से अधिक हो गई है। नई खदानों और औद्योगिक इकाइयों के प्रारंभ होने से आने वाले वर्षों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल राजस्व वृद्धि नहीं, बल्कि खनिज संपदा से समग्र क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ सड़क, बिजली, जल, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। तकनीक से अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण राज्य सरकार ने कटनी में पारदर्शी और व्यवस्थित खनन व्यवस्था स्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया है। बड़वारा रोड पर स्थापित ई-चेक गेट के माध्यम से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की जा रही है। माइनिंग सर्विलांस सिस्टम के जरिए अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। प्रशासन द्वारा लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण कर वैधानिक खनन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पारदर्शिता, तकनीक और सुशासन के माध्यम से खनन क्षेत्र में नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है। रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार से स्थानीय युवाओं, आदिवासी समुदायों और श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का प्रयास है कि औद्योगिक विकास का लाभ सीधे स्थानीय नागरिकों तक पहुंचे और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण को नई गति मिले। कटनी आज प्रदेश की औद्योगिक शक्ति, प्राकृतिक संपदा और विकास दृष्टि का प्रतीक बनकर उभर रहा है। “स्वर्ण नगरी” और “माइनिंग कैपिटल” की अवधारणा के साथ कटनी आने वाले समय में न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।  

प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार से सशक्त हो रहा सांस्कृतिक वैभव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरें भावी पीढ़ियों को समृद्ध अतीत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। साथ ही हमारे गौरवशाली इतिहास, ज्ञान, कला और सभ्यता की जीवंत प्रतीक हैं।इन धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन समय की आवश्यकता है, जिससे भावी पीढ़ियाँ भी अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व का अनुभव कर सकें। राज्य सरकार “विरासत भी-विकास भी” के संकल्प को साकार करते हुए सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।प्रदेश में प्राचीन मंदिरों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पुनरुद्धार कार्य निरंतर किया जा रहा है।इन प्रयासों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश में विशिष्ट पहचान रखता है। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा प्रदेश में बिखरे मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से मूल स्वरूप में पुनर्स्थापन किया जा रहा है। ‘पुनर्संरचना’ एवं ‘एनास्टाइलोसिस’ जैसी तकनीकों के माध्यम से धरोहरों की मौलिकता और ऐतिहासिकता को संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और पुनर्जीवन का महत्वपूर्ण प्रयास है। देवबड़ला और आशापुरी बने पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण सीहोर जिले का देवबड़ला और रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभरकर सामने आया है। इन स्थानों की विशेषता यह है कि यहाँ मंदिरों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था, किंतु उत्खनन के दौरान प्राप्त बिखरे अवशेषों एवं खंडित प्रतिमाओं को वैज्ञानिक पद्धति से एकत्रित कर पुनर्स्थापित किया गया है। देवबड़ला में परमारकालीन मंदिरों का किया जा रहा है पुनर्स्थापन घने जंगलों के मध्य स्थित सीहोर जिले के देवबड़ला में 11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण कराया गया है। यहाँ ‘भूमिज शैली’ में निर्मित मंदिरों की ‘पंच-रथ’ योजना तत्कालीन उन्नत स्थापत्य कला का नमूना है। मंदिर क्रमांक-1 एवं 2 के पुनर्संरचना कार्य में मूल पत्थरों का उपयोग कर उनकी प्राचीनता को सुरक्षित रखा गया है। द्वार-शाखाओं पर उकेरी गई गंगा-यमुना की प्रतिमाएँ तथा सूक्ष्म नक्काशी इस स्थल को विशेष बनाती हैं। आशापुरी में किया जा रहा है प्रतिहारकालीन मंदिरों का संरक्षण रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र अपने प्राचीन मंदिर समूहों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 9वीं शताब्दी के प्रतिहारकालीन मंदिर क्रमांक-17 का पुनरुद्धार किया गया है। मंदिर के वर्गाकार गर्भगृह एवं मुखमंडप को अत्यंत सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित किया गया है। स्थल से प्राप्त शिव-नटेश, लक्ष्मी-नारायण तथा गजासुर संहारक शिव की प्रतिमाएँ प्रदेश की समृद्ध मूर्तिकला परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। सम्पूर्ण प्रदेश में हो रहे हैं मंदिर संरक्षण एवं पुनरुद्धार कार्य प्रदेश में धरोहर संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य व्यापक स्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में सिद्धेश्वर एवं अन्य मंदिर परिसरों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जा रहा है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर परिसर में प्राचीन धरोहरों को संरक्षित किया गया है। वहीं रायसेन जिले के धवला क्षेत्र में मंदिरों की संरचनात्मक सुरक्षा एवं विशेष सफाई कार्य संपादित किए गए हैं। इन सभी स्थलों पर ‘एनास्टाइलोसिस’ तकनीक के माध्यम से मूल पत्थरों द्वारा पुनर्गठन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिकता एवं मौलिक स्वरूप सुरक्षित बना रहे। इन समेकित प्रयासों से प्रदेश न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पहचान भी प्रदान कर रहा है। प्राचीन विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ने की यह पहल प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है। गौरवशाली अतीत और आधुनिक तकनीक के समन्वय से संचालित यह अभियान प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और विरासत के संरक्षण का सशक्त संदेश भी दे रहा है।