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महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का भवन 45 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनेगा

भोपाल  लक्ष्मणबाग परिसर से लगी भूमि में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने निर्माण स्थल पहुंचकर कार्य का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा 45.79 करोड़ रूपये की लागत से बनाए जा रहे विश्वविद्यालय भवन के प्रशासनिक ब्लॉक में सेमिनार हॉल के साथ ही ऑफिस, एकाउण्ट सेक्शन, प्लेसमेंट सेक्शन तथा रिकॉर्ड रूम का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार अकादमिक ब्लाक में 12 अध्ययन कक्ष, 4 प्रोफेसर कक्ष तथा एक कम्प्यूटर लैब का निर्माण किया जाएगा। साथ ही 50 सीटर कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य भी आरंभ हो गया है। विश्वविद्यालय में बालक छात्रावास का निर्माण भी कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निरीक्षण के दौरान कार्ययोजना का निरीक्षण करते हुए गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इस अवसर पर विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. पंचूलाल प्रजापति, उप मुख्यमंत्री  शुक्ल के प्रतिनिधि  राजेश पाण्डेय सहित विभागीय अधिकारी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा पेंशन का लाभ, डीबीटी से पारदर्शिता

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना प्रदेश की लाखों बुजुर्ग महिलाओं के लिए जीवन का नया आधार बनकर उभरी है। वर्तमान में राज्य सरकार 29,23,364 बुजुर्ग महिलाओं को नियमित पेंशन का लाभ प्रदान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर और निराश्रित महिलाओं के लिए यह योजना केवल एक सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी साबित हो रही है, जिससे उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान मिला है। पारदर्शिता और डीबीटी: बिचौलियों का खेल खत्म योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शिता है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से दी जाने वाली 1,000 रुपये प्रति माह की सहायता राशि अब बिचौलियों के बजाय सीधे लाभार्थियों तक पहुँच रही है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली के तहत हर तिमाही 3,000 रुपये सीधे बुजुर्ग महिलाओं के बैंक खातों में जमा किए जा रहे हैं। इस डिजिटल पहल ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर दिया है और पात्र महिलाओं को समय पर आर्थिक संबल सुनिश्चित किया है। पूर्वांचल में सबसे अधिक लाभ: जौनपुर रहा नंबर वन आंकड़ों के नजरिए से देखें तो पूर्वांचल के जिलों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिला है। जौनपुर जिला इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जहाँ 1,00,820 बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन मिल रही है। इसके बाद आजमगढ़ (86,166) और बलिया (79,160) का स्थान है। प्रशासन का विशेष जोर उन महिलाओं की पहचान करने पर है जो अब भी इस दायरे से बाहर हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला सामाजिक सुरक्षा के इस चक्र से वंचित न रहे। आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान में वृद्धि नियमित आर्थिक सहायता ने बुजुर्ग महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक बदलाव लाया है। अब उन्हें दवा, राशन और छोटे-मोटे खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस आत्मनिर्भरता ने परिवारों के भीतर भी उनकी स्थिति को मजबूत किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य इस योजना का दायरा बढ़ाकर प्रदेश की हर निराश्रित बुजुर्ग महिला को सशक्त और स्वावलंबी बनाना है।  

राजस्थान SI भर्ती में बड़ा अपडेट: परीक्षा निरस्त, सितंबर 2026 में फिर से एग्जाम संभव

जयपुर राजस्थान लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 को निरस्त कर दिया है. भर्ती परीक्षा फिर से होगी, जिसकी रूपरेखा भी तय हो गई है. आरपीएससी अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू के मुताबिक, परीक्षा में केवल वे 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी ही शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहले आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्र दिए थे. 16 मई से अभ्यर्थियों को फॉर्म में सुधार का अवसर दिया जाएगा. इस दौरान जानकारी में आवश्यक सुधार के अलावा अपडेट भी कर सकेंगे. संशोधन प्रक्रिया 30 मई 2026 तक चलेगी, जिसमें मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस और एड्रेस में बदलाव किया जा सकेगा. यह अपडेट भी जानना है जरूरी परीक्षा ओटीआर और पात्रता संशोधन से पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा. एसएसओ आईडी बदलने वाले अभ्यर्थी फेच एप्लीकेशन फॉर्म विकल्प से पुराना डेटा नए प्रोफाइल में ट्रांसफर कर सकेंगे. फॉर्म में बदलाव नहीं फिर भी करना होगा ये काम आयोग ने साफ किया है कि आयु, आरक्षण और शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण 2021 के आवेदन के समय की स्थिति के आधार पर ही होगा. परीक्षा और प्रक्रिया में अगर किसी अभ्यर्थी को आवेदन में कोई बदलाव नहीं करना है. तब भी उसे एडिट मोड में जाकर ‘संशोधन की आवश्यकता नहीं' वाली घोषणा और बायोमेट्रिक उपयोग की सहमति देनी होगी. इसके बाद ओटीपी सत्यापन के जरिए आवेदन सबमिट होगा. निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. सितंबर में हो सकती है परीक्षा एसआई भर्ती 2021 परीक्षा के लिए 3 फरवरी 2021 को नोटिफिकेशन जारी हुआ. 859 पदों के लिए 13 से 15 सितंबर 2021 को भर्ती परीक्षा आयोजित हुई. इसमें 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थी लिखित परीक्षा के बाद 20 हजार 359 अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट के लिए पास हुए. 3 हजार 291 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चयनित हुए. 1 जून 2023 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली के बाद मामला कोर्ट पहुंच गया था. हाल ही में 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एसआई भर्ती 2021 को रद्द रखने का फैसला बरकरार रखा था. भर्ती परीक्षा का आयोजन सितंबर-2026 में होने की संभावना है.

छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक संपन्न

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने राज्य में स्वीकृत विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्यों में गति लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि भू-अर्जन और फारेस्ट क्लीयरेंस जैसी प्रक्रियाओं को समय-सीमा में पूर्ण किया जाए ताकि परियोजनाओं का लाभ किसानों को जल्द मिल सके। बैठक की प्रमुख उपलब्धियां और परियोजनाएं            पैरी-कोडार लिंक नहर (गरियाबंद) सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक पाइपलाइन लिंक नहर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से महानदी की सहायक पैरी नदी के अतिरिक्त जल का उपयोग पेयजल, निस्तारी और औद्योगिक कार्यों के लिए होगा। इससे गरियाबंद और महासमुंद जिले के 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई सुविधा विकसित होगी।              मोहमेला-सिरपुर बैराज (रायपुर)-आरंग विकासखंड में महानदी पर प्रस्तावित इस बैराज से 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्वहन सिंचाई सुनिश्चित होगी। यह क्षेत्र में पर्यटन, नौका विहार और सुगम आवागमन को भी बढ़ावा देगा।              मटनार बहुउद्देशीय परियोजना (बस्तर) इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित यह योजना बस्तर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उद्वहन प्रणाली पर आधारित होने के कारण इसमें कोई विस्थापन या पुनर्वास की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी सुरक्षित रहेगी। देउरगांव उद्वहन बैराज (बस्तर) जगदलपुर के समीप इंद्रावती नदी पर बनने वाली यह परियोजना बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। निविदा और प्रशासनिक अनुमोदन           बैठक में विभिन्न परियोजनाओं के निविदा प्रारूपों  पर विस्तार से चर्चा कर उन्हें अनुमोदित किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो, ऊर्जा सचिव  सारांश मित्तर, वित्त विभाग की विशेष सचिव मती शीतल शाश्वत वर्मा सहित विभिन्न परियोजनाओं के मुख्य अभियंता और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सपा सरकार में हर दिन होते थे 19 दंगे और 33 अपहरण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, जहां सपा सरकार में वर्ष 2012 से 2017 के बीच एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 19 दंगे होते थे, उसी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ। इस अवधि में कुछ अराजक तत्वों द्वारा जरूर दंगा भड़काने की कोशिश की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे धकेला गया। इतना ही नहीं, जिस उत्तर प्रदेश में कभी व्यापारियों को आए दिन फिरौती के लिए अगवा कर लिया जाता था, उसी प्रदेश में वर्ष 2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई। प्रदेश में दो वर्षों में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में हर दिन अपहरण की 33 घटनाएं दर्ज की गईं। एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश की अपराध दर (क्राइम रेट) शून्य दर्ज की गई है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार नगालैंड में यह अपराध दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वर्ष 2023 में भी यूपी में इस श्रेणी में क्राइम रेट शून्य था। यह बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई से संभव हुआ है। पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट, माफिया की संपत्तियों की जब्ती और अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने जैसे सख्त कदमों का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है।  योगी सरकार ने दंगााइयों के मंसूबों पर फेरा पानी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। मामूली हिंसक घटनाओं के उग्र रूप लेने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 2.2 रही। यहां यूपी में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज होने का आधार वही मामले हैं, जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को योगी सरकार ने समय रहते विफल कर दिया और अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा भड़काने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक मंचों से कहते हैं, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।‘ एनसीआरबी रिपोर्ट में मणिपुर में बलवा की अपराध दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई है।  सपा सरकार के समय प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा था जब दंगे, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं आम चर्चा का विषय बन चुकी थीं। विशेष रूप से वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। उस दौरान एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे हुए। उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे और अपहरण की 33 घटनाएं सामने आती थीं।

मानवता की सेवा में रेडक्रॉस की भूमिका सराहनीय- मुख्यमंत्री साय

रायपुर विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ शाखा के चेयरमेन  तोमन साहू जी चेयरमेन एवं अन्य पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को रेडक्रॉस का बैज पहनाकर एवं  स्मृति चिन्ह भेंट कर विश्व रेडक्रॉस दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सभी पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों को इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मानवता की सेवा के साथ ही आपदा के समय में रेडक्रॉस संस्था की भूमिका सराहनीय है। इस अवसर पर वाइस चेयरमेन  रुपेश पाणिग्रही,कोषाध्यक्ष  संजय पटेल,राज्य प्रबंध समिति सदस्य  प्रदीप साहू, संरक्षक सदस्य  दिनेश तापड़िया उपस्थित थे।

तेज हवाओं और बारिश से पटना में तबाही, पेड़ गिरे और गाड़ियां क्षतिग्रस्त, मौसम विभाग की चेतावनी

 पटना बिहार की राजधानी पटना में मौसम एक बार फिर खराब हो गया है। शुक्रवार 8 मई को दोपहर में अचानक शहर के आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल दिया। दिन में 4 बजे ही अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ शाम को बारिश शुरू हो गई। आंधी से जगह-जगह पेड़ गिर गए। मौसम विभाग ने तात्कालिक पूर्वानुमान जारी करते हुए बिहार के 6 जिलों में शाम को आंधी, बारिश, वज्रपात का रेड अलर्ट जारी किया है। इनमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, शिवहर और सीतामढ़ी जिले शामिल हैं। इससे पहले औरंगाबाद, गयाजी, पटना, जहानाबाद और अरवल जिले में भी रेड अलर्ट की चेतावनी जारी की गई। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के भीतर राज्य भर में मौसम खराब रहने की आशंका जताई है। शनिवार 9 मई को राज्य के अधिकांश जिलों में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली गिरने, बारिश के साथ आंधी और ओलावृष्टि का खतरा बना रहेगा। लोगों से खराब मौसम में सावधान रहने की अपील की गई है। पटना में बारिश पटना में गिरे पेड़, गाड़ियां दबीं राजधानी में शुक्रवार दोपहर बाद आई आंधी से कई जगहों पर नुकसान की खबर है। हार्डिंग रोड सिंचाई भवन के पास तेज हवा से एक पेड़ गिर गया, इससे ठेला और बाइक उसके नीचे दब गई। हज भवन के पास भी सड़क किनारे पेड़ गिरने से एक गाड़ी उसके नीचे दब गई। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पटना में आंधी से गिरे पेड़ बिहार में जारी है आंधी, बारिश का दौर बिहार में इस सप्ताह मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात से विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण बिहार, पूर्वी बिहार और सीमांचल के कुछ जिलों में बरसात हुई। किशनगंज, अररिया, गयाजी, मधेपुरा, नवादा, रोहतास, नालंदा, कैमूर जैसे जिलों में कुछ जगहों पर पानी गिरा। पटना में दो दिन बारिश के आसार राजधानी में अगले दो दिनों तक आंधी-बारिश के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 9 और 10 मई को पटना में बादल छाए रहेंगे और मेघगर्जन के साथ बारिश के एक-दो दौर चल सकते हैं। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। कब तक खराब रहेगा बिहार का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिमी यूपी में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिमी यूपी और उससे सटे बिहार के इलाकों में भी हवा का एक चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। इसका असर मौसम पर दिख रहा है। 9 मई को बिहार के अधिकांश हिस्सों में बरसात की संभावना जताई जा रही है। अगले सप्ताह से मौसम के सामान्य होने के आसार हैं। आंधी-बारिश का दौर खत्म होने के बाद राज्य में तापमान में अचानक बढ़ोतरी होगी। साथ ही भीषण गर्मी का दौर फिर शुरू हो जाएगा।

मोबाइल एप के जरिए होगा प्रतिदिन चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का कारोबार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। अवध क्षेत्र और आसपास के 10 जिलों में कार्यरत ‘सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी’ के जरिए ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक और मोबाइल एप के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, संग्रह और भुगतान व्यवस्था को संचालित कर सकेंगी। इस पहल से प्रतिदिन चार लाख लीटर से अधिक दूध के व्यापार को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में गांव की महिलाओं के लिए तैयार किया गया पारदर्शी दुग्ध नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनता जा रहा है। अवध और आसपास के जिलों में सवा लाख से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा चुका है, जिनके हाथों में अब केवल दुग्ध उत्पादन ही नहीं बल्कि तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी होगी। गांव-गांव बने दुग्ध संग्रह केंद्र सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी द्वारा गांव गांव दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों के यहां से दूध को उचित मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इसे महिलाएं ही संचालित करती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है, वहीं पशुपालकों को भी बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिली है। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। महिला किसानों को महीने में तीन बार, दस-दस दिन के अंतराल पर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। इन जिलों में तैयार हुआ नेटवर्क लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, प्रतापगढ़ कानपुर नगर और फतेहपुर में ग्रामीण महिलाओं का विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है। ‘सामर्थ्य साथी’ एप से मिलेगा हर दिन का हिसाब दुग्ध कारोबार को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए ‘सामर्थ्य साथी’ नाम से मोबाइल एप शुरू किया गया है। इस एप के जरिए दुग्ध उत्पादकों को रियल टाइम दूध बिक्री, भुगतान, गुणवत्ता जांच और अन्य आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ना केवल सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का बड़ा माध्यम है। इसी उद्देश्य से गांव स्तर पर महिलाओं को डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी जागरूकता भी की जा रही है। पारदर्शिता से बढ़ा महिलाओं का भरोसा दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर पैसे के भुगतान तक पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होने से दुग्ध उत्पादकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेटा, भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी भी स्वयं कर रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान देने के साथ ही ‘आत्मनिर्भर गांव’ मॉडल को भी मजबूत करती दिखाई दे रही है। दुग्ध क्रांति अब गांव की चौपाल से मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच रही है।

अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, मध्यप्रदेश में 10 साल की सजा और भारी जुर्माने का प्रस्ताव

भोपाल प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकार के पास अब तक इनकी वास्तविक संख्या का अद्यतन रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। वहीं, दूसरी ओर नगरीय प्रशासन विभाग अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई के लिए नया कानून तैयार कर रहा है, जिसमें अवैध कॉलोनाइजरों पर जुर्माना और सजा कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। वर्ष 2016 के पुराने आंकड़े वर्ष 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियों की पहचान की थी। इनमें से 3,155 कॉलोनियां केवल प्रदेश के 16 नगर निगम क्षेत्रों में चिह्नित की गई थीं। उस समय ग्वालियर नगर निगम में सबसे अधिक 696 अवैध कॉलोनियां दर्ज की गईं। उसके बाद इंदौर नगर निगम था, जहां 636 कॉलोनियां चिह्नित हुईं थीं। इसके अलावा खंडवा में 338, भोपाल में 320 और जबलपुर में 224 अवैध कॉलोनियां सामने आई थीं।  

जल जीवन मिशन घोटाला: मास्टरमाइंड संजय बड़ाया थाईलैंड फरार, जांच तेज

 जयपुर राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान हुए 960 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली से पूर्व रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद, अब पूर्व मंत्री महेश जोशी एसीबी की गिरफ्त में हैं और 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. एसीबी की पूछताछ में इस घोटाले के तार विदेश तक जुड़ते नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल संजय बड़ाया (Sanjay Badaya) गिरफ्तारी के डर से थाईलैंड भाग गया है. संजय बड़ाया क्या करता था? सूत्रों के मुताबिक, संजय बड़ाया इस पूरे घोटाले की अहम कड़ी है. वह पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल, दोनों का बेहद करीबी माना जाता है. एसीबी की जांच में सामने आया है कि बड़ाया के जिम्मे पैसों के लेन-देन का प्रबंधन करना, अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली खाना, अपने चहेते लोगों को PWD विभाग में लगवाना और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाकर ठेके दिलवाना जैसे काम थे. एसीबी की टीम को भनक लगने से पहले ही वह एक शादी में शामिल होने के बहाने थाईलैंड भाग गया. अब एसीबी उसके भारत लौटते ही उसे गिरफ्तार करने की तैयारी में है. कैसे हुआ 960 करोड़ का फर्जीवाड़ा? साल 2023 में दर्ज हुए इस मुकदमे में जांच एजेंसियों ने पाया कि मंत्री रहते हुए महेश जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं. 'मैसर्स गणपति ट्यूबवेल' और 'मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल' को नियमों के विपरीत जाकर करोड़ों के टेंडर बांटे गए. इन दोनों कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल (Ircon International) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर गैर-कानूनी तरीके से ये टेंडर हासिल किए थे. एसीबी इन दोनों कंपनियों के मालिकों सहित अब तक 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है. महेश जोशी से ACB पूछ रही ये सवाल एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, महेश जोशी से गहन पूछताछ जारी है. एसीबी की टीम मुख्य रूप से इन तीन सवालों के जवाब तलाश रही है. पहला सवाल- घोटाले का पैसा कहां गया और उसे कहां ठिकाने लगाया गया है? दूसरा सवाल- टेंडर प्रक्रिया में किस प्रकार की शिकायतें थीं और पद का दुरुपयोग कैसे किया गया? तीसरा सवाल- संजय बड़ाया और अन्य फरार आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन की क्या व्यवस्था थी?