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मंत्री केदार कश्यप बोले- आदिवासी समाज के सशक्त नेतृत्व और शिक्षा से बन रहा नया छत्तीसगढ़

आदिवासी समाज के सशक्त नेतृत्व और शिक्षा से नए छत्तीसगढ़ का निर्माण हो रहा है : मंत्री केदार कश्यप छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन का हुआ लोकार्पण, उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान शिक्षा, संगठन और संस्कार से समाज होगा मजबूत, युवाओं से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज रायपुर के महादेव घाट में आयोजित छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन लोकार्पण, सम्मान समारोह एवं वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए। उन्होंने नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण किया और शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं प्रतिभाओं को सम्मानित किया। शिक्षा और संगठन समाज की सबसे बड़ी ताकत               मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी शिक्षा, संगठन और संस्कार होते हैं। आज आदिवासी समाज के युवा शिक्षा, प्रशासन, तकनीक, व्यवसाय, खेल और जनप्रतिनिधित्व सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह नए और विकसित होते छत्तीसगढ़ का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज दूरस्थ क्षेत्रों के आदिवासी युवा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी और जनप्रतिनिधि बनकर समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। सामाजिक भवन बनेगा विकास और मार्गदर्शन का केंद्र               मंत्री कश्यप ने कहा कि सामाजिक भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की एकता, संवाद, संस्कार और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन का केंद्र है। यहां विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक कार्यक्रमों और समाज के विकास से जुड़े कार्यों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। शासकीय योजनाओं से आदिवासी समाज को मिल रहा सशक्त आधार               कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति, छात्रवृत्ति, आवासीय विद्यालय, कौशल विकास, वनाधिकार, स्वरोजगार, लघु वनोपज का बेहतर मूल्य तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण जैसी योजनाओं से आदिवासी समाज को आगे बढ़ाया जा रहा है। युवाओं को आगे बढ़ाने का किया आह्वान              मंत्री केदार कश्यप ने समाज के वरिष्ठजनों से अपनी समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, डिजिटल तकनीक और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की।             कार्यक्रम के अंत में मंत्री केदार कश्यप ने सामाजिक भवन के निर्माण के लिए समाज को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि संगठित समाज, शिक्षित युवा और सशक्त नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

योगी सरकार के प्रयासों से UP में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

उपराज्यपाल की समीक्षा के बाद दिल्ली में घटा ट्रैफिक जाम, डिजिटल सिस्टम से मिला सुधार

नई दिल्ली दिल्ली में ट्रैफिक नियमों के कड़ाई से पालन करने के चलते बीते तीन महीनों के दौरान जाम की समस्या करीब एक तिहाई कम हुई।उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यातायात जाम से निपटने के उपायों की समीक्षा की और पुलिस को एआई और डिजिटल यातायात प्रबंधन प्रणाली का तेजी से विस्तार करने का निर्देश दिया। संधू ने पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा और यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मकसद दो अप्रैल को टोडापुर स्थित दिल्ली यातायात पुलिस मुख्यालय के दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों के पालन का जायज़ा लेना था। अधिकारियों के अनुसार, गूगल मैप के जरिए हर 15 मिनट पर दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से 25 जून के बीच शहर में औसत जाम की लंबाई घटकर 32.43 किलोमीटर रह गई, जबकि जनवरी-मार्च के दौरान यह 48.25 किलोमीटर थी। यातायात पुलिसकर्मियों की सड़कों पर बढ़ेगी तैनाती उन्होंने बताया कि यातायात पुलिसकर्मियों की सड़कों पर बढ़ी मौजूदगी, पैदल गश्त, इंजीनियरिंग संबंधी सुधारों और प्रौद्योगिकी आधारित प्रवर्तन उपायों के कारण स्थिति में सुधार आया है। दिल्ली यातायात पुलिस की नागरिक-केंद्रित 'प्रोजेक्ट संगम' पहल के तहत चिह्नित 62 प्राथमिक यातायात 'हॉटस्पॉट' में से 34 स्थानों पर महीने-दर-महीने जाम में कमी दर्ज की गई।     उनके मुताबिक, कैलाश नगर में पुश्ता रोड पर यातायात जाम में 82.59 प्रतिशत की कमी आई, जबकि खजूरी चौक पर 74.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तीन मूर्ति गोलचक्कर पर भी यातायात प्रवाह में 66.01 प्रतिशत का सुधार देखा गया।     हालांकि, सड़क निर्माण और अन्य कारकों के कारण चार स्थानों पर जाम बढ़ गया। इनमें नारायणा फ्लाईओवर भी शामिल है, जहां जाम 1.28 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा साउथ एक्सटेंशन पार्ट-1 में 7.55 प्रतिशत, मैक्स अस्पताल, साकेत में 14.93 प्रतिशत और भवभूति मार्ग पर जाम 349.87 प्रतिशत बढ़ा।     अधिकारियों ने द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और डाबड़ी गोल चक्कर को भी लगातार जाम लगने वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया, जिसके लिए तत्काल बुनियादी ढांचे और परिचालन हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अतिक्रमण पर एजेंसियों का एक्शन उपराज्यपाल को सूचित किया गया कि अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी), नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) जैसी नगर निकाय एजेंसियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण और नियमित समन्वय बैठकें शुरू की गई हैं।     बैठक के दौरान, संधू ने यातायात नियमों के उल्लंघनों की चौबीसों घंटे निगरानी और बेहतर जाम प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित और डिजिटल प्रवर्तन प्रणालियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।     उन्होंने कहा कि यातायात जाम से न केवल समय और ईंधन की बर्बादी होती है, बल्कि शहर में प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ जाता है।  

22.97 करोड़ की परियोजना से पलामू में एआई, डेटा साइंस और रोबोटिक्स शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

रांची राज्य सरकार ने रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) जैसी आधुनिकतम तकनीक में शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य से सरकार ने पलामू स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कालेज में चार क्षेत्रों में सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित करने की योजना स्वीकृत की है। पांच वर्ष की इस परियोजना पर 22.97 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना के तहत ही स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए पलामू इंजीनियरिंग कालेज में जीईसी इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। कुल परियोजना लागत में से एक करोड़ रुपये इसके शेयर कैपिटल के रूप में मिलेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य सिविल कंस्ट्रक्शन तथा टाउन प्लानिंग के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार तथा परामर्श सेवाओं को प्रोत्साहित करना, ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित पेशेवरों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करना है। साथ ही इससे उद्योग प्रेरित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं का डेटा विश्लेषण, बीटेक, एमटेक एवं पीएचडी शोधार्थियों के अनुसंधान कार्यों में सहयोग प्रदान करना है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन चारों सेंटर आफ एक्सीलेंस से न केवल पलामू इंजीनियरिंग कालेज, बल्कि राज्य के छह राजकीय पालीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षण में लाभ मिलेगा। सेंटर आफ एक्सीलेंस के लिए रोबोटिक्स लैब, डेटा साइंस लैब, रिन्यूअल ईनर्जी लैब, टाउन प्लानिंग लैब, अर्थक्वेक इंजीनियरिंग लैब, वेस्ट टू इनर्जी कंजरवेशन लैब आदि की स्थापना की जाएगी। राज्य सरकार ने इस परियोजना की स्वीकृति के पहले आइआइटी (आइएसएम), धनबाद से टेक्निकल वेटिंग कराई थी। संस्थान स्तर पर होगी निगरानी समिति जीईसी पलामू इनाेवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर फाउंडेशन द्वारा एक संस्थान स्तर पर निगरानी समिति गठित की जाएगी। इस समिति में सेंटर आफ एक्सीलेंस के फैकल्टी इंचार्ज, इंडस्ट्री पार्टनर के प्रतिनिधि, संबंधित विभागाध्यक्ष, मेंटर संस्थान के प्रतिनिधि रहेंगे। यह समिति सेंटर आफ एक्सीलेंस के संचालन तथा निगरानी का दायित्व निभाएगी। राज्य के भीतर एवं बाहर स्थित मेंटर संस्थानों की की पहचान करना तथा उन्हें सेंटर आफ एक्सीलेंस के संचालन में सहायता के लिए परामर्श या अनुदान प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करने की भी जिम्मेदारी समिति निभाएगी। ये पालीटेक्निक संस्थान जुड़ेंगे सेंटर आफ एक्सीलेंस से – राजकीय पालीटेक्निक, रांची – राजकीय महिला पालीटेक्निक, रांची – राजकीय पालीटेक्निक, जमशेदपुर – राजकीय पालीटेक्निक, आदित्यपुर – राजकीय पालीटेक्निक, लातेहार – राजकीय पालीटेक्निक, सिमडेगा इन चार क्षेत्रों में तैयार होगा सेंटर आफ एक्सीलेंस     सिविल कंस्ट्रक्शन तथा टाउन प्लानिंग     रोबोटिक्स एंड आटोमेशन     डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस     सस्टनेबल एंड रिन्यूअल ईनर्जी टेक्नोलाजी  

अब बिना इंटरनेट AI से पढ़ेंगे बच्चे, समस्तीपुर के स्कूलों में शुरू होगी स्मार्ट शिक्षा

समस्तीपुर. सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई अब सिर्फ किताब, कॉपी और कक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। मोबाइल आधारित 'पढ़ाई' ऐप के जरिये बच्चे घर बैठे बिना इंटरनेट के भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करेंगे। एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित यह ऐप बच्चों की पढ़ने की क्षमता, उच्चारण और सीखने की गति का आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार सीखने में मदद करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के ताजपुर और मोरवा प्रखंड के चयनित सरकारी विद्यालयों में 'टेक्नोलाजी इन टीचिंग एट द राइट लेवल' कार्यक्रम का संचालन मार्च 2027 तक किया जाएगा। यह प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से लागू होगा। इस पहल में कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को शामिल किया जाएगा। कमजोर बच्चों की पहचान होगी आसान हर बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है। कुछ बच्चे तेजी से सीखते हैं, जबकि कुछ को अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता होती है। 'पढ़ाई' ऐप बच्चों के प्रदर्शन का वास्तविक समय में विश्लेषण कर यह बताएगा कि किस बच्चे को भाषा या गणित में अधिक सहायता की जरूरत है। इससे शिक्षकों को बच्चों के अधिगम स्तर के अनुसार मार्गदर्शन देने में सुविधा होगी। ऐप बताएगा कहां हो रही गलती एआई आधारित यह ऐप केवल अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं कराएगा, बल्कि बच्चों की पढ़ने की क्षमता का भी मूल्यांकन करेगा। बच्चा जब पाठ पढ़ेगा तो ऐप उसकी आवाज सुनकर उच्चारण, पढ़ने की गति और त्रुटियों का विश्लेषण करेगा। इसके साथ ही 'असर' टूल पर आधारित गणितीय आकलन भी इसमें शामिल किया गया है। इससे बच्चों की बुनियादी भाषा दक्षता मजबूत होने के साथ आगे की पढ़ाई की मजबूत नींव तैयार होगी। घर पर भी मिलेगा अभ्यास का अवसर शिक्षा विभाग के अनुसार इस ऐप का उद्देश्य स्कूल की पढ़ाई का विकल्प बनना नहीं, बल्कि बच्चों को अतिरिक्त अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराना है। स्कूल के बाद भी बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार घर पर अभ्यास कर सकेंगे। इससे उन बच्चों को विशेष लाभ मिलेगा, जिन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग नहीं मिल पाता। साथ ही शिक्षक और अभिभावक भी बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति को आसानी से समझ सकेंगे। एफएलएन सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम     यह पहल बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल उपकरणों को कक्षा आधारित शिक्षण प्रक्रिया से जोड़कर बच्चों के अधिगम स्तर का आकलन, उनकी आवश्यकता के अनुसार समूहीकरण और उचित शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने में यह उपयोगी साबित होगी। – सुधीर कुमार, कार्यक्रम समन्वयक, प्रथम पढ़ाई' ऐप का प्रयोग सफल 'पढ़ाई' ऐप का प्रयोग सफल रहा तो बच्चों की पढ़ाई के आकलन, अभ्यास और सुधार की पूरी प्रक्रिया को नया डिजिटल आधार मिलेगा। यह पहल भविष्य में सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। – जमालुद्दीन, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) शिक्षा विभाग, समस्तीपुर

डिफॉल्टरों को लीज वापस देने का मामला कोर्ट पहुंचा, सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

ग्वालियर  मध्य प्रदेश में खनिज विभाग के अफसरों और खनन माफिया की सांठगांठ से चल रहे घोटाले को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से सीधे पूछा। जब अवैध खनन करने वालों पर करोड़ों रुपए की पेनल्टी बकाया है, तो उनसे अभी तक वसूली क्यों नहीं की गई? सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले इन डिफॉल्टरों को वापस खनन लीज किस आधार पर दे दी गई? यह तल्ख सवाल जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता अकरम खान द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किए हैं। मामले में राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी है। अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी। साल 2017 से कुंडली मारकर बैठे हैं रसूखदार याचिका में बताया है कि जिले के खनन माफिया पर 305 करोड़ 97 लाख रुपए की भारी-भरकम जुर्माना राशि बकाया है। यह वसूली साल 2017 से लंबित है, लेकिन खनिज विभाग इसे वसूलने में पूरी तरह नाकाम रहा। नियमानुसार जुर्माना न चुकाने पर खदान संचालकों को 'ब्लैकलिस्ट' कर उनका खनन तुरंत रोका जाना चाहिए था। लेकिन, रसूखदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। रसूखदारों को तोहफे में मिली नई लीज याचिका में यह भी बताया कि हद तो यह हो गई कि पुराने करोड़ों रुपए दबाकर बैठे खनन माफियाओं की खदानें न सिर्फ रिन्यू (नवीनीकरण) कर दी गईं, बल्कि उन्हें नई जगहों पर खनन करने के लिए नई लीजें भी आवंटित कर दी गईं हैं। मतलब उनके पेनल्टी न चुकाने को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। बिलौआ-बेरजा में 100 फीट तक खोद दी जमीन याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि ग्वालियर जिले के बिलौआ और बेरजा क्षेत्र में काले पत्थर (क्रशर गिट्टी) का सबसे बड़ा कारोबार है। यहां नियमों को ताक पर रखकर ऐसा अंधाधुंध अवैध खनन किया गया है जिसने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। बिलौआ में अवैध खनन करने वालों ने जमीन को 25 से 30 मीटर (करीब 100 फीट) गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया है। माफिया की जेब में गया राजस्व खनिज विभाग ने जब पूर्व में इनकी जांच की थी, तो बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन पाया गया था। माफिया यहां से कई हजार घनमीटर कीमती काला पत्थर निकालकर बाजार में बेच चुके हैं। जो करोड़ों रुपए सरकारी खजाने में आने चाहिए थे, वे सीधे माफिया की जेब में चले गए।  

जिला परिषद चुनाव परिणामों पर विवाद, मुक्तसर में धांधली के आरोप; हाईकोर्ट जाने की तैयारी

श्री मुक्तसर साहिब. मुक्तसर में मंगलवार को जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरपर्सन का चुनाव कर लिया है। वोटिंग के बाद आम आदमी पार्टी की गुरविंदर कौर मलोट को चेयरपर्सन चुना गया। वहीं वाइस चेयरपर्सन शिरोमणि अकाली दल की कुलविंदर कौर जस्सिआना सर्वसम्मति से चुन ली गईं, क्योंकि आप के पास वाइस चेयरमैन का कोई उम्मीदवार नहीं था। यह प्रक्रिया रेड क्रास भवन में की गई। शिअद ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व विधायक और जिला प्रधान कंवरजीत सिंह रोजी बरकंदी ने कहा कि प्रशासन ने सत्ता पक्ष के इशारे पर धक्केशाही की। उनका आरोप है कि जिले की 13 सीटों में से सात शिअद के पास थीं, जबकि आप के पास सिर्फ पांच और कांग्रेस के पास एक सदस्य था। शिअद नेता ने क्या दावा किया? ऐसे में चेयरमैन शिअद का बनना चाहिए था। शिअद नेता मनजिंदर सिंह बिट्टू ने दावा किया कि ब्लाक समिति के दो चेयरमैनों सहित उनके पास नौ वोटें थीं। उन्होंने कहा कि एक वोट रद कर दी गई और एक सदस्य की वोट को धक्के से आप में शामिल करके हमें 8-7 के फर्क से हराया गया। एसडीएम ने मंत्री और विधायक के दबाव में आकर मनमानी की। शिअद ने साफ कर दिया है कि वह इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। प्रशासन के अनुसार 17 सदस्यों का कोरम था। इसमें चेयरमैन चुनाव के लिए आप को आठ वोट मिले, शिअद को सात वोट मिले और एक वोट रद हो गया। कांग्रेस से संबंधित एक जिला परिषद सदस्य गैरहाजिर रहा। आप ने मनाया जश्न आप ने चेयरपर्सन बनने पर जश्न मनाया। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री डा. बलजीत कौर, विधायक जगदीप सिंह काका बराड़ और गिद्दड़बाहा से विधायक हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों के भाई सनी ढिल्लों मौजूद रहे। नवनियुक्त चेयरपर्सन गुरविंदर कौर मलोट ने कहा कि वह विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगी और लोगों की समस्याएं हल करने के लिए तत्पर रहेंगी। वाइस चेयरपर्सन कुलविंदर कौर जस्सिआना ने कहा कि वह चेयरमैन के बराबर कुर्सी पर बैठकर लोगों का काम करेंगी। धक्केशाही करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा शिअद के पूर्व विधायक कंवरजीत सिंह रोजी बरकंदी ने कहा कि इससे हफ्ता पहले भी जब चेयरमैन का चुनाव होना था तो सत्ता पक्ष ने बायकाट कर दिया था। अब मंगलवार को दूसरी बार चुनाव हुआ था अधिकारियों ने सरेआम सत्ता पक्ष के कहने पर धक्केशाही की है।‌ऐसा करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। आप के पास चार महीने चेयरमैनशिप रहेगी और उसके बाद विधानसभा चुनाव में लोग इनको धक्केशाही का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि सोमवार को चुनाव से एक दिन पहले उनका ब्लाक समिति का चेयरमैन पुलिस ने बिना वजह उठा लिया था। जिसे हमने देर शाम को रिहा करवाया। यह सरकार की बौखलाहट है।

किसानों को नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किया जा रहा जागरूक

नैनो उर्वरकों के उपयोग से लागत में कमी और उत्पादन में होती है वृद्धि किसानों को नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किया जा रहा जागरूक राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 1.14 लाख बोतलों का वितरण रायपुर,   मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राज्य में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के दौरान सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। 26 जून 2026 की स्थिति में राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है, जिसमें से 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है तथा 1.14 लाख बोतलों से अधिक का वितरण किसानों को किया जा चुका है। शेष मात्रा समितियों में उपलब्ध है, जिससे आगामी कृषि कार्यों के लिए किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया पारंपरिक ठोस रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। इनका उपयोग करने से उर्वरकों की मात्रा कम लगती है, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, उत्पादन लागत घटती है तथा फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के किसान वैज्ञानिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकें। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सहकारी समिति एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी प्राप्त करें तथा इन आधुनिक उर्वरकों का अधिक से अधिक उपयोग कर कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में सहभागी बनें।

नशा तस्कर मुकेश बनिया पर शिकंजा, 42 लाख की संपत्ति अटैच

रायपुर. नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। आदतन एनडीपीएस आरोपी मुकेश उर्फ मुकेश बनिया की करीब 42 लाख रुपये की संपत्तियों पर SAFEMA सक्षम प्राधिकारी मुंबई ने फ्रीजिंग ऑर्डर की पुष्टि कर दी है। इससे आरोपी अब बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के इन संपत्तियों को बेच, गिरवी रख या हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। बता दें कि इससे पहले गांजा तस्कर रवि साहू की संपत्ति अटैच की गई थी। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर “सूखे नशे के विरुद्ध अभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की बरामदगी ही नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। डीसीपी सेंट्रल जोन उमेश प्रसाद गुप्ता और एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल के मार्गदर्शन में थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने मुकेश बनिया के आर्थिक नेटवर्क की विस्तृत जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी और उससे जुड़े लोगों के नाम पर एक मकान और तीन वाहन मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से अर्जित धन से खरीदे गए थे। इसके बाद एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ(1) के तहत इन संपत्तियों को फ्रीज करने का प्रस्ताव भेजा गया, जिसे SAFEMA ने मंजूरी दे दी। 31 आपराधिक मामलों का आरोपी है मुकेश पुलिस के अनुसार मुकेश बनिया रायपुर में लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ 31 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, हत्या, बलवा, मारपीट और गुंडागर्दी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। 26 फरवरी 2026 को सिटी कोतवाली पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार किया गया था। उसके कब्जे से 6.119 किलोग्राम गांजा, एक देशी कट्टा, तीन जिंदा कारतूस, 2400 अल्प्राजोलम की नशीली गोलियां समेत अन्य सामग्री बरामद की गई थी। इससे पहले पुलिस ने आरोपी के आधुनिक तकनीक से संचालित गांजा हाइडआउट का भी खुलासा किया था। पहले PIT-NDPS के तहत हुई थी कार्रवाई आरोपी की लगातार आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए उसके खिलाफ पहले ही PIT-NDPS Act, 1988 के तहत डिटेंशन ऑर्डर जारी किया जा चुका है। इसके बाद पुलिस ने उसके आर्थिक स्रोतों की गहन जांच शुरू की, जिसके आधार पर संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई की गई। अब होगी जब्ती की कार्रवाई पुलिस के अनुसार अब संबंधित पक्ष को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष यह साबित करना होगा कि संपत्तियां वैध आय से खरीदी गई हैं। यदि वे इसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए तो नियमानुसार इन संपत्तियों को स्थायी रूप से शासन के पक्ष में जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस का संदेश रायपुर पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि अब नशा तस्करों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी तक सीमित कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि अपराध से अर्जित उनकी अवैध संपत्तियों और आर्थिक नेटवर्क को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत समाप्त किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा के पर्यवेक्षण में निरीक्षक सतीश सिंह गहरवार ने वित्तीय जांच, दस्तावेजों के संकलन, राजस्व एवं परिवहन अभिलेखों की जांच तथा सफेमा के समक्ष समन्वय की पूरी प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने फ्रीजिंग ऑर्डर की पुष्टि की।

मध्य प्रदेश में प्रमोशन पर नई हलचल, 10 साल बाद बढ़ी प्रक्रिया; आरक्षण नियमों पर फिर छिड़ा विवाद

भोपाल  प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है। इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है, लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंगे, लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित (सामान्य) वर्ग नुकसान में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे हैं। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे हैं, जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है। पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुड़े अधिकारियों के साथ सोमवार को मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे, यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति हो सकेगी। यदि किसी संवर्ग में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा। वहीं, अनारक्षित श्रेणी में जितने भी पद आएंगे, उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अवसर मिलेगा, क्योंकि अनारक्षित का मतलब सभी वर्गों से लिया गया है। इसे मेरिट से भी जोड़ा गया है। इसके मायने यह हुए कि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली ए प्लस प्लस रहती है और दूसरा कोई नहीं रहता है तो वह ऊपर आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के लिए तैयारी करके रख लें। वरिष्ठता सूची भी देख लें। उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नति की तैयारी करने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसका आधार हाई कोर्ट द्वारा नियम पर किसी प्रकार का स्थगन न देने को बनाया गया है। वहीं, निर्णय सुरक्षित रखा गया है लेकिन अब संभावना यही है कि पहले बेंच गठित होगी और अंतिम सुनवाई करके निर्णय सुनाया जाएगा। दो साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी। दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी होंगे लाभान्वित भले ही दस साल बाद पदोन्नति का अवसर बन रहा हो, मगर दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रतिनियुक्ति के पद भी पदोन्नति की श्रेणी में आएंगे। किसी के लिए कोई पद रोककर नहीं रखा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट कर दी गई है कि पदोन्नति 2025 के नियम लागू होने के बाद से दी जाएगी।