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हरियाणा में बड़ा खुलासा, बिना लाइसेंस बन रहा था नकली ENO

सोनीपत हरियाणा के सोनीपत जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नकली ENO fruit salt बनाने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश हुआ है। कुंडली थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव अटेरना के खेतों में अवैध रूप से फैक्टरी चलाई जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर छापेमारी की, जहां हजारों की संख्या में तैयार पैकेट बरामद किए गए। शुरुआती जांच में शक होने पर स्वास्थ्य विभाग, आयुष विभाग और फूड सेफ्टी टीम को बुलाया गया। फैक्ट्री के पास नहीं था लाइसेंस जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि फैक्टरी के पास किसी प्रकार का लाइसेंस नहीं था और जो ENO fruit salt तैयार किया जा रहा था, वह नकली प्रतीत हो रहा है। फैक्टरी संचालक अमरजीत दहिया मौके से फरार मिला और उसका फोन भी बंद है। लैब में जाँच के लिए भेजे गए सैंपल अधिकारियों ने मौके से सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेज दिए हैं। साथ ही पूरी फैक्टरी को सील कर दिया गया है। फूड सेफ्टी विभाग ने इस मामले में लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन कर दिया है और मामले की गहन जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले – पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार

रायपुर.  डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है। साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। सम्मेलन को सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

हरियाणा में राशन डिपो नियमों में बड़ा बदलाव, महिलाओं को मिला खास कोटा

चंडीगढ़ प्रदेश में अब राशन डिपो के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। साथ ही नए राशन डिपो का 33 फीसदी कोटा महिलाओं के लिए तय किया गया है। अच्छा आचरण होने पर 60 वर्ष के बाद भी डिपो धारकों की अवधि 5 साल और बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश सरकार ने नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों के तहत डिपो धारक की मृत्यु होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सहानुभूति के आधार पर लाइसेंस दिया जा सकेगा। कोटे के आधार पर हर तीसरी दुकान महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। एसिड अटैक पीड़ित, स्वयं सहायता समूह, विधवा, तलाकशुदा, अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में महिलाओं के आवेदन नहीं आते हैं तो पहले उन्हें आवेदन के लिए दो मौके दिए जाएंगे। इसके बाद ही डिपो किसी और को आवंटित किया जा जाएगा। डिपो के लिए ये नहीं कर सकेंगे आवेदन अब कोई भी व्यक्ति अगर पहले से डिपो धारक है तो वह दूसरे डिपो के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही डिपो धारकों के परिवार के लोग और रिश्तेदारों भी आवेदन नहीं कर पाएंगे। पंच, सरपंच, विधायक, सांसद किसी भी जनप्रतिनिधि के पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार भी डिपो के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। अगर कोई डिपो धारक बाद में सरपंच या पार्षद बन जाता है तो उसका लाइसेंस भी रद्द माना जाएगा। साथ ही राज्य या केंद्र सरकार का स्थायी या अनुबंधित कर्मचारी भी डिपो के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। अगर कोई डिपो धारक बाद में सरकारी नौकरी में आ जाता है तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य: खाद्य विभाग

रायपुर. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के साथ ही आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र राज्य सरकार लगातार भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि प्रदेश की ईंधन आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आपूर्ति की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। शासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रदेश में संचालित 2516 पेट्रोल पंपों तथा तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध है। मार्च 2026 में प्रदेश की मासिक पेट्रोल आवश्यकता 1.01 लाख किलोलीटर के विरुद्ध 1.27 लाख किलोलीटर (126 प्रतिशत) की आपूर्ति की गई। वहीं अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.60 लाख किलोलीटर पेट्रोल प्राप्त हो चुका है। इसी प्रकार मार्च में डीजल की आवश्यकता 1.64 लाख किलोलीटर के मुकाबले 3.00 लाख किलोलीटर (183 प्रतिशत) आपूर्ति हुई, जबकि अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.38 लाख किलोलीटर डीजल की आपूर्ति हो चुकी है। स्पष्ट है कि प्रदेश में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक निरीक्षण एवं छापेमारी की कार्रवाई जारी है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए विभागीय कॉल सेंटर (1800-233-3663) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है। 23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के संचालक की अध्यक्षता में तीनों ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह सामने आया कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनती है। इस पर कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करें। वर्तमान स्थिति के अनुसार, प्रदेश में लगभग 77,111 किलोलीटर पेट्रोल उपलब्ध है, जो लगभग 22 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। इसी प्रकार 84,295 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है, जो करीब 15 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। सरकार ने पुनः आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तथा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

बच्चों के अपहरण की साजिश का खुलासा, आर्थिक नुकसान के चलते रची गई थी योजना; चार गिरफ्तार

इंदौर   इंदौर में दो बच्चों के अपहरण के मामले ने कुछ घंटे के लिए परिजन और पुलिस-प्रशासन को संकट में डाल दिया था। बच्चों के अपहरण की खबर पूरे शहर में फैलते ही हड़कंप मच गया। हालांकि, इस पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महज पांच घंटे में ही बच्चों को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सकुल छुड़ाकर परिजनों को सौंप दिया है। इसके बाद परिजनों ने राहत का सांस ली।   पुलिस ने लाला राम नगर के बगीचे से बच्चों का अपहरण करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनका नाम राधिका प्रजापति, तनिषा सेन, ललित सेन और विनीत प्रजापति हैं। राधिका और विनीत भाई बहन हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कर्ज लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाया था। शेयर में नुकसान होने के कारण उन्होंने अपहरण की प्लानिंग की थी। वे दो दिन से बच्चों की रेकी कर रहे थे। दो दिन पहले बगीचे के फ्लैट पर वे एक बच्चे को ले कर गए थे।   कैब बुक कर ले गई थी बच्चों को युवती गार्डन से दोनों बच्चों का अपहरण करने के बाद युवती ने एक कैब बुक की और फिर उन्हें राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक फ्लैट में लेकर गई थी। दोनों बच्चों को अहसास हो चुका था कि उनके साथ कोई घटना हुई है। इसके बाद युवती ने उनके वीडियो लेना शुरू कर दिए। रात को दोनों बच्चों को भूख लगने लगी तो युवती ने दूध की सिंवैया खिलाई थी। हालांकि बच्चों ने पहले युवति से खाने के लिए कहा था।  फिर युवती ने पहले खुद सिंवैया चखी फिर दोनों बच्चों को दी।  25 पुलिसकर्मियों की टीम लगाई थी थाना पलासिया क्षेत्र से लापता हुए दो मासूम बच्चों के अपहरण मामले का पुलिस ने कुछ ही घंटों में खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बच्चों को सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। 23 अप्रैल की रात करीब 8:45 बजे पुलिस को सूचना मिली कि दो बच्चे अचानक लापता हो गए हैं। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें एक संदिग्ध महिला बच्चों को अपने साथ ले जाती नजर आई। आरोपी महिला ने बच्चों को चिप्स, चॉकलेट और अन्य चीजों का लालच देकर अपने साथ कार में बैठाया था।  तत्काल अपराध दर्जकर 10 विशेष टीमें गठित की गई इस दौरान परिजनों को फोन कर आरोपियों ने बच्चों को छोड़ने के बदले 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी और रात 11 बजे तक रकम नहीं देने पर हत्या की धमकी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्जकर 10 विशेष टीमें गठित की और 25 पुलिसकर्मियों को लेकर अलग-अलग टीमें बनाई। पुलिस टीम दत्ता नगर स्थित शिवांश अपार्टमेंट पहुंची, जहां एक फ्लैट में दबिश देकर बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। 

योगी सरकार की योजना का असर, डेयरी नेटवर्क से महिलाओं की आय बढ़ी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं। डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है। शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।  

स्वास्थ्य भवन बना आशा और उम्मीदों का केंद्र, मातृ-शिशु सेवा को मिलेगा नया आयाम : मंत्री राकेश सिंह

मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी की शीघ्र होगी पूर्ति : उप मुख्यमंत्री देवड़ा स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती स्वास्थ्य भवन बना आशा और उम्मीदों का केंद्र, मातृ-शिशु सेवा को मिलेगा नया आयाम : मंत्री राकेश सिंह मंदसौर जिला अस्पताल में 29 करोड़ के विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण एवं भूमि-पूजन  मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने शुक्रवार को मंदसौर जिले के स्वास्थ्य एवं अधोसंरचना विकास को नई गति देते हुए इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय, मंदसौर में कुल 29 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने 7 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित 100 बिस्तरीय नवनिर्मित वार्ड तथा 17 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बने 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) भवन का लोकार्पण किया। साथ ही 4 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से चांदाखेड़ी फंटा से खजुरिया मार्ग निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को धीरे-धीरे दूर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले विद्यार्थी प्रदेश में ही सेवाएं देंगे, जिससे आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जिला चिकित्सालय मंदसौर में आज जो सुविधाएं जोड़ी गई हैं, वे क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी सौगात हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य भवन केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आशाओं का केंद्र है। यह विशेष रूप से माताओं और बहनों की सेवा के लिए समर्पित रहेगा तथा समाज के लिए प्रेरणादायक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर किया जा रहा है। बदलते हुए भारत में परिवर्तन को महसूस किया जा रहा है। सकारात्मक परिवर्तन देखा जा रहा है। विकास को नए पंख लगे हैं। विकास की धारा बह रही हैं। विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि सरकार निरंतर विकास कार्यों को गति दे रही है और विभिन्न क्षेत्रों में नई सौगातें प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर बजट आवंटन किया गया। जिसके परिणामस्वरूप सुविधाओं में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। सांसद बंशीलाल गुर्जर ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने एक नई कार्य संस्कृति विकसित की है, जिसमें गुणवत्ता के साथ कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम के अंत में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।  

योगी सरकार ने बुजुर्गों को दिया सुरक्षा कवच, हर जिले में वृद्धाश्रमों से बेघर और असहाय बुजुर्गों को मिल रहा सहारा

लखनऊ.  योगी सरकार प्रदेश के बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। सरकार द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों में वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जहां बेघर, निराश्रित और असहाय बुजुर्गों को आश्रय, भोजन, चिकित्सा और देखभाल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। इस व्यवस्था से वर्तमान समय में 6055 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। नाश्ते से लेकर भोजन तक पौष्टिक खानपान प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुबह नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक पौष्टिक खानपान की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही साफ-सुथरे वस्त्र, स्वच्छ बिस्तर और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। वहीं वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की चिकित्सा सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाएं, डॉक्टरों की परामर्श सेवा और आपातकालीन स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे उन बुजुर्गों को राहत मिली है, जो आर्थिक तंगी या पारिवारिक उपेक्षा के कारण इलाज नहीं करा पाते थे। सभी जिलों में संचालित हैं वृद्धाश्रम योगी सरकार में यूपी के सभी 75 जिलों में 150 क्षमता वाले वृद्धाश्रम संचालित हैं जहां नाश्ते में चाय, हलवा, चना, नमकीन दलिया, नमकीन पूड़ी, पोहा और मीठी दलिया दी जाती है। वहीं दिन के खाने में अरहर दाल, राजमा, मिक्स वेज, मौसमी सब्जी, कढ़ी, रोटी, सब्जी, चावल और सलाद निर्धारित दिनों के अनुसार दिया जाता है। इसी तरह रात्रि के भोजन में रसेदार सब्जी, तहड़ी, खिचड़ी, पूड़ी, रोटी, चावल और खीर दी जाती है। योगी सरकार में बुजुर्गों को मिला नया जीवन योगी सरकार की इस बेहतर व्यवस्था से कई ऐसे बुजुर्गों को नया जीवन मिला है, जो पहले सड़कों, रेलवे स्टेशनों या सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा जीवन जीने को मजबूर थे। उन्हें सुरक्षित छत, समय पर भोजन और देखभाल मिल रही है। कई वृद्धाश्रमों में मनोरंजन, योग, भजन-कीर्तन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं, जिससे बुजुर्ग मानसिक रूप से प्रसन्न और सक्रिय बने रहें। 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन दे रही सरकार समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जहां जरूरत है, वहां अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा प्रतिमाह बुजुर्गों को 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन और आयुष्मान कार्ड के जरिए 5 लाख तक निशुल्क इलाज दिलवाने का काम भी विभाग के द्वारा किया जा रहा है। सबसे ज्यादा संख्या बरेली में  लखनऊ में 128, मैनपुरी में 116, प्रयागराज में 120, हमीरपुर में 107, मुरादाबाद में 127, बरेली में 134, गोरखपुर में 107, कानपुर देहात में 116, जालौन में 114, गौतमबुद्ध नगर में 104 बुजुर्ग रह रहे हैं।

मंडप में रोती रहीं बच्चियां, प्रशासन ने पहुंचकर बचाया बचपन

  बूंदी राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को 'नए घर' ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है तो वे फूट-फूट कर रोने लगीं. मंडप में गूंजी मासूमों की सिसकियां बच्चियों ने काउंसलिंग में अधिकारियों को बताया कि परिजनों ने उन्हें कुछ दिन के लिए दूसरे घर जाने की बात कही थी. लेकिन जब मंडप में पंडित ने फेरे शुरू कराए और उन्हें एक अजनबी युवक के साथ बैठाया गया तो उनके होश उड़ गए. खुशी से सजाए गए मंडप में मासूमों की सिसकियां गूंजने लगीं. समाज की भीड़ के आगे उनकी आवाज दब रही थी लेकिन तभी प्रशासन वहां देवदूत बनकर पहुंच गया. टीम का एक्शन और 50 शादियों पर रोक सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सात बाल विवाह को तुरंत रुकवा दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि हाल ही में चलाए गए अभियान के तहत 14 बाल विवाह रोके गए हैं. नैनवा, हिंडोली, दबलाना जैसे गांवों में दबिश दी गई. पिछले 4 महीनों में ही बूंदी प्रशासन ने 50 मासूमों की शादियां रुकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है. परंपरा के नाम पर बचपन की बलि यह मामला भील समाज से जुड़ा है जहां बच्चों के रिश्ते जन्म के समय ही तय कर दिए जाते हैं और आखातीज जैसे मौकों पर एक साथ कई शादियां कर दी जाती हैं. प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब समाज में डर का माहौल है. सभी मामलों में कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया गया है जिससे आगे इन शादियों को नहीं कराया जा सकेगा. "हमें शादी नहीं करनी, हमें पढ़ना है" जब बाल कल्याण समिति के सामने माता-पिता अपनी बच्चियों को वापस ले जाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो बच्चियों ने गजब की हिम्मत दिखाई. डरी-सहमी होने के बावजूद उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहतीं. बच्चियों का सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें आगे पढ़ना है. प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और समाज को भी इस कुरीति के खिलाफ जागरूक होना होगा.

योगी सरकार की नई नीति लागू, 30 जून तक होगा सर्वे और डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।