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दरबार साहिब में अमेरिकी राजदूत की मौजूदगी के दौरान खालिस्तानी झंडे लहराए

अमृतसर. भारत में अमेरिकी राजदूत सरजियो गोर के आज (सोमवार) श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचते ही शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के कार्यकर्ताओं ने खालिस्तान के झंडे दिखाए। खालिस्तान झंडे दिखाए जाने के बाद माहौल गरमा गया है। इस दौरान वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने राजदूत सरिजयो गोर को ज्ञापन देने का भी प्रयास किया, लेकिन वे विफल रहे। इस पूरी घटना के बाद पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष इमान सिंह मान ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वे अमेरिकी राजदूत को सिख समुदाय से जुड़े कई बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। जलियांवाला बाग का भी करेंगे दौरा अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने आज यानी सोमवार को एक दिवसीय अमृतसर दौरे पर पहुंचे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होकर गुरुघर का आशीर्वाद लिया। इसके अलावा उनके जलियांवाला बाग और पार्टिशन म्यूजियम जाने का भी कार्यक्रम निर्धारित है। राजदूत के अमृतसर दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उनके निर्धारित कार्यक्रम वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी। श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विशेष प्रबंध किए गए हैं। सर्जियो गोर के दौरे का प्रमुख केंद्र श्री हरिमंदिर साहिब रहेगा। यहां वह माथा टेकने के साथ गुरुघर की मर्यादा के अनुसार दर्शन करेंगे। इसके बाद उनके जलियांवाला बाग और पार्टिशन म्यूजियम जाने का कार्यक्रम है। दोनों स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।

सीएसआर भागीदारी को नई गति देने 30 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव

भोपाल  मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों के समावेशी विकास में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की भागीदारी को व्यापक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 30 सितंबर को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्य स्तरीय सीएसआर भागीदारी कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। “महिलाओं और बच्चों में निवेश : मध्यप्रदेश के समावेशी विकास के लिए सीएसआर की संभावनाओं का उपयोग” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया करेंगी। कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों में कॉरपोरेट संस्थानों, सीएसआर फाउंडेशन, सामाजिक संगठनों और विकास संस्थाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से आँगनवाड़ी अधोसंरचना के आधुनिकीकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण तथा मैदानी कार्यबल की क्षमता निर्माण जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में सीएसआर निवेश की संभावनाओं को सामने लाया जाएगा। सरकार और कॉरपोरेट क्षेत्र के बीच मजबूत होगी विकास साझेदारी कॉन्क्लेव में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्राथमिकताओं, प्रदेश में सीएसआर की वर्तमान स्थिति तथा निवेश के संभावित क्षेत्रों पर प्रस्तुतीकरण होगा। सचिव महिला बाल विकास  जी.वी. रश्मि प्रदेश के मानव संसाधन विकास में कॉरपोरेट सीएसआर की भूमिका और संभावनाओं पर मुख्य वक्तव्य देंगी। आयुक्त महिला बाल विकास श्री संदीप जी.आर. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बीच विकास साझेदारी की आवश्यकता और संभावनाओं पर जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश की सीएसआर नीति तथा महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में सीएसआर सहयोग के संभावित अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट क्षेत्र को महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्यों में दीर्घकालिक और परिणाम आधारित साझेदारी के लिए प्रोत्साहित करना है। आँगनवाड़ी अधोसंरचना से पोषण और प्रारंभिक शिक्षा तक पर होगा मंथन कॉन्क्लेव में आँगनवाड़ी अधोसंरचना के आधुनिकीकरण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा पर विशेष चर्चा होगी। विशेषज्ञ और विभिन्न सामाजिक एवं विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि आँगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्षम, आधुनिक और बाल-अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक हस्तक्षेपों पर विचार साझा करेंगे। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा तथा मैदानी कार्यबल की क्षमता निर्माण पर भी विशेष सत्र आयोजित होगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल के डॉ. अरुण कोंकणी मध्यप्रदेश में कुपोषण की स्थिति और उसके समाधान के उपायों पर प्रस्तुति देंगे। विभिन्न सीएसआर संस्थानों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपने अनुभव तथा सहयोग की संभावनाएं साझा करेंगे। मैदानी अमला बताएगा जमीनी जरूरतों और चुनौतियों की तस्वीर सम्मेलन में आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने मैदानी अनुभव साझा करेंगे। इससे सीएसआर क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को महिला एवं बाल विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, उपलब्ध संसाधनों और आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा। खनिज क्षेत्र फाउंडेशन निधि के उपयोग तथा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कानून से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा होगी। खुले संवाद सत्र में कॉरपोरेट और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे तथा महिला एवं बाल विकास के प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। साझेदारी के ठोस प्रस्तावों के साथ होगा सम्मेलन का समापन समापन सत्र में विभिन्न संस्थानों की ओर से सहयोग के संकल्प, सहयोग में रुचि-पत्र तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। कोल इंडिया की दक्षिण-पूर्वी कोयला क्षेत्र इकाई के कार्यों का सम्मान किया जाएगा तथा सिक्योरिटी पेपर मिल की ओर से सहयोग में रुचि-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।  

3 एकड़ में धान की खेती, पीएम किसान निधि से दशरथ राठौर को मिली आर्थिक मजबूती

पीएम किसान सम्मान निधि से खेती को मिला सहारा, किसान दशरथ राठौर हुए आत्मनिर्भर तीन एकड़ में धान की खेती कर रहे किसान को कृषि कार्यों की जरूरतें पूरी करने में मिल रही आर्थिक मदद रायपुर  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए खेती-किसानी की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत आन्दुल निवासी किसान दशरथ राठौर भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी खेती को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। दशरथ राठौर लगभग 3 एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। खेती से होने वाली आय के साथ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से उन्हें कृषि कार्यों से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। दशरथ राठौर बताते हैं कि खेती के दौरान बीज, खाद, कृषि सामग्री सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए समय-समय पर धनराशि की जरूरत होती है। ऐसे समय में पीएम किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि उनके लिए उपयोगी साबित होती है। इससे खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है और कृषि कार्यों को बिना रुकावट जारी रखने में सहूलियत होती है। उन्होंने बताया कि योजना से मिलने वाली सहायता भले ही खेती की कुल लागत का एक हिस्सा है, लेकिन जरूरत के समय यह राशि उनके लिए काफी उपयोगी होती है। इससे उन्हें कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने में आर्थिक सहयोग मिलता है और खेती को बेहतर ढंग से जारी रखने का भरोसा भी मिलता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिले आर्थिक सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए दशरथ राठौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को निरंतर आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रही है।

100 टन कृषि कचरे से बनाया टेक्सटाइल फाइबर, अब अमेरिका-कोरिया पहुंचेगा यूपी का हेम्प

ग्रेटर नोएडा  यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश के कारोबारियों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर दे रहा है। संभल की भारत हेम्प एग्रो ने करीब 100 टन भांग (हेम्प) के कृषि अवशेष को हाई-ग्रेड टेक्सटाइल फाइबर में बदलकर नया बाजार तैयार किया है। कंपनी ने अब अमेरिका और दक्षिण कोरिया में हेम्प फाइबर के निर्यात के लिए एमओयू भी किया है। भारत हेम्प एग्रो के फाउंडर आयुष सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में इसकी शुरुआत हुई थी। हेम्प का कृषि अवशेष पहले जलाया या फेंक दिया जाता था। कंपनी ने इसी कचरे को टेक्सटाइल फाइबर में बदलना शुरू किया। उन्होंने बताया कि हेम्प फाइबर प्राकृतिक रूप से एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल होता है और कॉटन के मुकाबले इसके उत्पादन में काफी कम पानी खर्च होता है। एक हजार किसानों की आय दोगुनी आयुष सिंह के मुताबिक, इस पहल से करीब एक हजार किसानों की आय दोगुनी हुई है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से करीब तीन हजार ग्रामीण परिवारों को रोजगार और सहयोग मिला है। कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार की प्रोटोटाइप डेवलपमेंट ग्रांट और केंद्र सरकार की नेशनल एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम से भी सहयोग मिला है। विशेष रूप से योगी सरकार की सकारात्मक नीतियों के चलते कारोबार की संभावनाएं पहले से काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के पिछले तीन संस्करणों में काफी बड़े अवसर मिले हैं। अब अमेरिका और दक्षिण कोरिया में निर्यात के लिए एमओयू होने से कारोबार को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुला है। आयुष सिंह ने बताया कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की न्यू एज फाइबर पॉलिसी में हेम्प को एलाइड फाइबर के रूप में शामिल किए जाने से इस क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने बताया कि भारत में हेम्प की संभावनाओं के बावजूद इससे जुड़े उत्पाद पहले चीन से आयात किए जा रहे थे। इसी को देखते हुए देश में ही हेम्प फाइबर तैयार करने की क्षमता विकसित करने की शुरुआत की गई।

महानदी के बढ़े जलस्तर से जांजगीर-चांपा में अलर्ट, कलेक्टर-SP ने किया निरीक्षण

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार महानदी के बढ़ते जलस्तर और जांजगीर-चांपा जिले के तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल और महानदी के तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी के जलस्तर एवं बहाव की स्थिति के साथ सुरक्षा, राहत और बचाव की तैयारियों का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण बैराज और पुल के साथ तटीय क्षेत्रों तथा महंत लालदास महाविद्यालय में बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण किया। राहत शिविर में प्रभावित लोगों के ठहरने के साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। महानदी पुल पर आवागमन बंद, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई महानदी के पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन बंद कर दिया गया है। कलेक्टर-एसपी ने पुल और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर एवं बहाव को देखते हुए अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय, नियमित स्वास्थ्य जांच प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलभराव के कारण होने वाली संभावित बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य सहित संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। तटीय एवं जलभराव संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने आवश्यक मानव संसाधन एवं अन्य संसाधनों को तैयार रखा गया है। तटीय क्षेत्रों में मुनादी, लोगों को सतर्क रहने की समझाइश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। तटीय और पूर्व में जलभराव से प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से नागरिकों को संभावित जलभराव तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। नदी के जलस्तर, पुल-पुलियों और आवागमन वाले मार्गों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि स्थिति में बदलाव होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें। कलेक्टर-एसपी ने नागरिकों से नदी, पुल, घाट और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि तेज बहाव वाले पानी के पास सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं तथा प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से बंद किए गए मार्गों और स्थानों पर जाने का प्रयास न करें। किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा महानदी के तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, राहत और आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। राहत शिविर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्वास्थ्य जांच में जुटी हैं, वहीं पुलिस, राजस्व, नगर सेना और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका शिवरीनारायण के अध्यक्ष राहुल थवाईत, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, एसडीएम शिवरीनारायण सुभावना साहू, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

बाढ़ में प्रशासन और टीमवर्क की मिसाल, राहत-बचाव अभियान से लोगों को मिली सुरक्षा

बाढ़ आपदा के बीच जिला प्रशासन की तत्परता और टीमवर्क से सुरक्षित किया गया रेस्क्यू अभियान राहत शिविरों में सेवा एवं समपर्ण से किए जा रहे कार्य     रायपुर  धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश और जलभराव के बीच जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का सिलसिला लगातार जारी है।     कुरुद क्षेत्र के लोमश ऋषि आश्रम में बाढ़ के पानी के बीच फंसे 9 लोगों को पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 9 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर राहत दल, पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। सलोनी राहत शिविर में बेहतर व्यवस्थाएं, राजस्व अमले ने सेवा और समर्पण से किया कार्य     सलोनी स्थित बाढ़ राहत शिविर में साफ-सफाई, स्वच्छता एवं भोजन व्यवस्था संतोषजनक और व्यवस्थित रही। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरंतर जायजा ले रहे हैं। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों के लिए सुबह नाश्ते के साथ नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर परिसर में स्वच्छता एवं हाईजीन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

युवा नवाचार और उद्यमिता की ओर बढ़ें, राज्यपाल रमेन डेका ने दिया संदेश

विचारों को उद्यम में बदलने का साहस रखें युवा-  रमेन  डेका तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव का शुभारंभ, सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि युवाओ को सिर्फ नौकरी पाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि  अपने विचारों को उद्यम में बदलने का साहस भी रखना चाहिए। एक अच्छा विचार, सही मार्गदर्शन और उपयुक्त तकनीक के साथ आगे बढ़े तो वही नवाचार सफल स्टार्टअप का रूप ले सकता है और आगे चलकर अनेक लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है। राज्यपाल डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर रायपुर में छत्तीसगढ़ के युवाओं में नवाचार, उद्यमिता विकास और प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ‘यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर उन्होंने  विश्वविद्यालय में स्थापित  सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल ने कहा कि हर क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। देश की बढ़ती आबादी की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ नई तकनीकों और नए प्रयोगों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य के लिए आवश्यक मूलभूत खाद्य पदार्थों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है। जब हमारी खाद्य आवश्यकताएं सुरक्षित होंगी, तभी हम विकास के अन्य क्षेत्रों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवाचार की सबसे बड़ी संभावनाएं हमारे अपने संसाधनों में हैं। कृषि, वनोपज, खाद्य प्रसंस्करण, मिलेट, जैविक खेती, पशुपालन और जनजातीय उत्पादों जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार अवसर हैं। कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज ऐसे नवाचारों की आवश्यकता है, जो किसानों की लागत कम करें, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाएं, फसल के नुकसान को कम करें तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और बाजार उपलब्ध कराने में मदद करें। ऐसे नवाचार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। उन्होंने किचन गार्डन और बाड़ी की अवधारणा को फिर से बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि स्टार्टअप शुरू करने से पहले बाजार का सर्वेक्षण करें और उत्पाद या सेवा की मांग तथा बाजार की संभावनाओं को समझें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसकी स्पष्ट योजना और रोडमैप तैयार करना चाहिए। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए परिश्रम और प्रशिक्षण के साथ बाजार का सर्वेक्षण, प्रबंधन क्षमता और वित्तीय समझ भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के साथ युवाओं को कौशल प्रदान करना आवश्यक है, ताकि वे अपनी पारिवारिक आय बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास में योगदान दे सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और नई शिक्षा नीति में भी कौशल एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर डेका ने युवा नवाचारी उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन  भी किया। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव प्रकाश, एनआईटी के डायरेक्टर डॉ समीर बाजपेई, नाबार्ड के अधिकारी, सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में बोले वित्त मंत्री

कमजोर और ग्रामीण वर्ग तक बीमा पहुंचाना सबसे जरूरी : सुरेश खन्ना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में बोले वित्त मंत्री बोले- योगी सरकार के प्रयास से बीमा के बारे में जागरूकता बढ़ी है, दुर्घटना और बीमारी के समय आर्थिक नुकसान कम करने में बीमा बड़ी सुरक्षा बीमा एजेंटों से अपील- पॉलिसी की शर्तों और क्लेम की प्रक्रिया की पूरी जानकारी लोगों तक पहुंचाएं ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि योगी सरकार के प्रयास से बीमा के बारे में शहरी और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर वर्ग तक इसकी पहुंच बढ़ाने की अभी बहुत जरूरत है। बीमारी, दुर्घटना या किसी दूसरी विपरीत परिस्थिति में सबसे ज्यादा आर्थिक संकट कमजोर परिवारों के सामने आता है। ऐसे में बीमा उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने और नुकसान कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। वित्त मंत्री यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आयोजित ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस, क्लेम, सरकारी बीमा योजनाओं और वित्तीय समावेशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर ऐसी कई योजनाएं चल रही हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी भी है। इसके बावजूद इनका जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा। खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक बीमा की जानकारी पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सक्षम और शहरी वर्ग को बीमा के बारे में अपेक्षाकृत अधिक जानकारी होती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। दुर्घटना या दूसरी विपरीत परिस्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पर बड़ा बोझ पड़ सकता है। बीमा के जरिए इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोगों को पॉलिसी की पूरी शर्तें बताएं  एजेंट सुरेश खन्ना ने बीमा एजेंटों और कंपनियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एजेंट केवल पॉलिसी कराने तक सीमित न रहें, बल्कि बीमाधारक को प्रीमियम, नवीनीकरण, क्लेम और दूसरी जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी दें। इससे जरूरत के समय लोगों को क्लेम लेने में परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर लोगों से सीधे जुड़े व्यक्तियों तक भी बीमा की जानकारी पहुंचनी चाहिए। इनके माध्यम से गांवों में ज्यादा लोगों को जागरूक किया जा सकता है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अनदेखी पड़ सकती है भारी वित्त मंत्री ने वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि इसकी अहमियत अक्सर दुर्घटना होने के बाद समझ में आती है। गांवों में कई बार लोग लापरवाही या जानकारी के अभाव में वाहनों का जरूरी बीमा नहीं कराते। दुर्घटना होने और किसी तीसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की स्थिति में यह बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस इस तरह के जोखिम को कवर करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए वाहन मालिकों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है। हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम को लेकर दूर हुईं कई भ्रांतियां कार्यशाला में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ परिस्थितियों में पॉलिसी की शर्तों के अनुसार नेटवर्क या इम्पैनल्ड अस्पताल से बाहर इलाज कराने पर भी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने पर रीइम्बर्समेंट क्लेम किया जा सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस तरह की जानकारी आम लोगों तक पहुंचना जरूरी है। कई बार पॉलिसीधारक को अपनी पॉलिसी में उपलब्ध सुविधाओं और क्लेम की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। इस कारण वह जरूरत के समय बीमा का पूरा लाभ नहीं उठा पाता। गंभीर बीमारी कभी परिवार के सामने खड़ा कर देती थी आर्थिक संकट कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पहले परिवार में किसी व्यक्ति को लिवर सिरोसिस, किडनी की गंभीर बीमारी, कैंसर या हृदय रोग जैसी बीमारी होने पर इलाज का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन जाता था। कई परिवारों की जमा पूंजी खत्म हो जाती थी और जमीन-जायदाद तक बेचने या गिरवी रखने की नौबत आ जाती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। योजना के तहत पात्र परिवारों को द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। पांच लाख तक कैशलेस इलाज, दूसरे राज्य में भी उपचार की सुविधा कार्यक्रम में बताया गया कि योजना के तहत सरकारी और इम्पैनल्ड निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसमें देशभर में पोर्टेबिलिटी का प्रावधान भी है। यानी पात्र लाभार्थी दूसरे राज्य में भी योजना से जुड़े अस्पताल में उपचार करा सकता है। उत्तर प्रदेश में योजना के वित्तपोषण में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी है। इसमें केंद्र सरकार की 60 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बीमा को गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर वित्त मंत्री ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंच पर वित्तीय समावेशन और बीमा पर चर्चा का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि बीमा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी है। इसके लिए बीमा कंपनियों, एजेंटों और स्थानीय प्रतिनिधियों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि विशेष ध्यान उन लोगों पर होना चाहिए जो गरीबी रेखा के नीचे हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जिनके लिए किसी दुर्घटना अथवा गंभीर बीमारी का खर्च पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शासन की सचिव वित्त संदीप कौर, आईआरडीएआई के जीएम पंकज तिवारी, एक्सिस मैक्स के वीपी सुमित सत्यन, बजाज जनरल इंश्योरेंस के वीपी एजाज खान और केयर हेल्थ  रूरल के सीडीओ अतुल सबरवाल समेत बीमा एवं वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

पहले सेल्फी, फिर सात फेरे… ट्रेड शो में योजनाओं को बताने का मनभावन अंदाज

ग्रेटर नोएडा इंटरनेशनल ट्रेड शो घूमने पहुंचे लोग जब समाज कल्याण विभाग के आउटलेट में कदम रखते हैं तो एक-एक कर अलग-अलग दृश्य उनका ध्यान खींचते हैं। सामने डिजिटल सेल्फी प्वाइंट है, कुछ कदम आगे विवाह मंडप में दूल्हा-दुल्हन फेरे लेते नजर आते हैं। आगे बढ़ने पर सिलाई केंद्र और किराना स्टोर के मॉडल ग्रामीण परिवारों की बदलती तस्वीर दिखाते हैं। यानी सरकारी योजनाओं की जानकारी यहां पढ़ने के बजाय देखने और महसूस करने का अनुभव देती है। क्लिक होते ही खुद मोबाइल तक पहुंच रही सेल्फी आउटलेट के प्रवेश हिस्से में बनाया गया डिजिटल सेल्फी प्वाइंट युवाओं और परिवारों को रोक रहा है। यहां क्यूसेक मशीन के माध्यम से सेल्फी लेने की सुविधा है। फोटो लेने के बाद तस्वीर सीधे संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर पहुंच जाती है। सेल्फी लेने के बाद लोग आसपास लगी योजनाओं की प्रदर्शनी देखने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इसके बाद कन्या विवाह योजना का मॉडल सामने आता है। दो सजे विवाह मंडपों में कटआउट के जरिए दूल्हा-दुल्हन को फेरे लेते हुए दिखाया गया है। मंडप में इलेक्ट्रॉनिक हवन कुंड भी लगाया गया है। पूरा दृश्य विवाह समारोह का आभास कराता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित योजना को आसानी से समझने का माध्यम बनता है। कुछ कदम आगे अभ्युदय कोचिंग योजना का प्रदर्शन है। कटआउट और डिस्प्ले के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई है। समाज कल्याण विभाग की दूसरी कल्याणकारी योजनाओं को भी अलग-अलग मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। ज्योति टेलर से दीपक किराना स्टोर तक दिखा आत्मनिर्भरता का रास्ता महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की पहल 'ज्योति टेलर' काउंटर पर दिखाई देती है। ग्रामीण परिवेश की महिला को घर से सिलाई का काम करते हुए दिखाकर यह समझाने का प्रयास किया गया है कि सरकारी योजनाओं से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर को आय के साधन में बदल सकती हैं। पास ही दीपक किराना स्टोर का मॉडल छोटे कारोबार के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की तस्वीर सामने रखता है। आउटलेट में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है। उत्पादों की जानकारी लेने के साथ ट्रेड शो में आने वाले लोग उनकी खरीदारी भी कर रहे हैं। मंच की ओर बढ़ते ही दृश्य बदल जाता है। यहां अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की लोककलाओं और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां हो रही हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों की भीड़ जुटती है और मोबाइल कैमरे निकल आते हैं। कोई वीडियो बनाता है तो कोई कलाकारों के साथ सेल्फी लेता है। योगी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया यह आउटलेट सहायता से लेकर शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, रोजगार और संस्कृति तक की तस्वीर एक ही परिसर में पेश कर रहा है। योजनाओं को मॉडल और प्रत्यक्ष प्रदर्शन से जोड़ने के कारण यह आउटलेट ट्रेड शो में महज सूचना केंद्र न रहकर लोगों के लिए अनुभव और संवाद का केंद्र बन गया है।

गल्ले में 500 के नोट, लेकिन 5-10-20 के सिक्कों और नोटों के लाले; बाजार में बढ़ी परेशानी

निम्बाहेड़ा  पितृपक्ष के बाद अब नवरात्र और दीपावली का त्योहारी सीजन सिर पर है। आम तौर पर इन दिनों बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है, लेकिन निम्बाहेड़ा के छोटे बाजारों से लेकर मुख्य किराना और फल-सब्जी मंडियों तक इस समय एक अजीब सी माथापच्ची चल रही है। ग्राहक की जेब में 200 या 500 का नोट है, उसे 20 या 30 रुपए का सामान चाहिए, लेकिन दुकान पर पहुंचते ही सबसे पहला और बड़ा सवाल यही गूंज रहा है भाई साहब, 10 का छुट्टे देना; छुट्टे हैं क्या? त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इस दौर में छोटे नोटों और सिक्कों की किल्लत ने रोजमर्रा के लेन-देन को बड़ा सिरदर्द बना दिया है। डिजिटल दौर की अपनी मजबूरियां और यूपीआई का भ्रम आज के समय में डिजिटल भुगतान (यूपीआई) को नकदी का सबसे बड़ा विकल्प माना जाता है, लेकिन निम्बाहेड़ा के स्थानीय बाजारों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। हर ग्राहक डिजिटल नहीं: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, ग्रामीण इलाकों से आने वाले खरीदार और ठेले-पटरियों से रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले लोग आज भी पूरी तरह कैश पर निर्भर हैं।     यूपीआई चार्ज का डर: हाल ही में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क लगने की चर्चाओं और भ्रम ने आम जनता के मन में एक मनोवैज्ञानिक डर पैदा कर दिया है। इसके चलते लोग अपने पास मौजूद छोटे नोटों को खर्च करने के बजाय होल्ड (संचित) करने लगे हैं।     तकनीकी अड़चनें: त्योहारों के सीजन में लोड बढ़ने पर सर्वर डाउन होना या नेटवर्क फेल होना आम बात है। ऐसे में इंटरनेट या स्कैनर धोखा दे जाते हैं और मौके पर केवल छुल्ले पैसे ही काम आते हैं। आपसी जुगाड़ से चल रहा काम, आगे और बिगड़ेगी स्थिति जब आधिकारिक बैंकिंग व्यवस्था से कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा, तो निम्बाहेड़ा के छोटे व्यापारियों ने खुद ही इसका तोड़ निकाल लिया है। व्यापारी आपस में ही एक-दूसरे को बड़े नोट देकर चिल्लर और छोटे नोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल आने वाले नवरात्र और दीपावली के पीक सीजन को लेकर है। जब त्योहारी खरीदारी का दौर परवान चढ़ेगा, तब छोटे मूल्यवर्ग की जरूरत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाएगी। यदि समय रहते बैंकों और स्थानीय स्तर पर छोटे नोटों की यह किल्लत दूर नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में छुट्टा है क्या? सिर्फ एक दुकानदार का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बाजार की सबसे बड़ी रुकावट बन जाएगा। गल्ले में 500 के नोट, पर चिल्लर के लाले दुकानदारों की परेशानी यह है कि दिनभर की बिक्री में बड़े नोट तो धड़ल्ले से आ रहे हैं और गल्ले में जमा होते जा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों को खुले पैसे या खुल्ले लौटाने के लिए 5, 10, 20 और 50 रुपए के नोट या सिक्के ढूंढे नहीं मिल रहे। बाजार की तस्वीर यह है कि एक दुकानदार के पास यदि गलती से सिक्के आ गए, तो आस-पास के दूसरे दुकानदार उससे चिल्लर मांगने पहुंच जाते हैं। यानी बाजार में कुल नकदी तो घूम रही है, लेकिन वह उस छोटे मूल्यवर्ग में नहीं है जिसकी रोजमर्रा के खुदरा कारोबार को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।