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खनिजो के अवैध परिवहन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, 02 हाइवा व 03 ट्रैक्टर ट्राली जप्त

बिलासपुर कलेक्टर बिलासपुर के निर्देशानुसार एंव उप संचालक के मार्गदर्शन मे जिला बिलासपुर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एंव भण्डारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।  खनिज अमला बिलासपुर द्वारा सकरी, गनियारी, तुरकाडीह, कोनी, मस्तूरी, पचपेड़ी, जोंधरा, गोपालपुर, कुकुरदिकला, भिलोनी, मानिकचौरी क्षेत्र की जाँच की गयी। जाँच के दौरान सकरी क्षेत्र में खनिज गिट्टी का परिवहन करते 1 हाइवा वाहन को जप्त किया गया। पचपेड़ी क्षेत्र में खनिज ईट मिट्टी का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया। गोपालपुर क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। जोंधरा क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया।मानिकचौरी क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। इस प्रकार जप्त कुल 05 वाहनों को पुलिस थाना सकरी व पचपेड़ी कि अभिरक्षा में रखा गया है। खनिजों के  अवैध उत्खनन,परिवहन, और भण्डारण पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग व पुलिस विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है।

70 ट्रैक्टर अवैध डंप रेत जब्त, कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

70 ट्रैक्टर अवैध डंप रेत जब्त, कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई अवैध खनन करते रंगे हाथ पकड़ाया जेसीबी और हाइवा बिलासपुर कलेक्टर  संजय अग्रवाल के सख्त निर्देशों के पालन में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ जिले में बड़ी कार्रवाई की गई। एसडीएम तखतपुर के मार्गदर्शन में आज सुबह ग्राम निरतु के घाट पर राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने दबिश दी।कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध रूप से रेत उत्खनन एवं परिवहन करते हुए एक जेसीबी और हाइवा को रंगे हाथों पकड़ा गया। दोनों वाहनों को तत्काल जब्त कर थाना कोनी के सुपुर्द किया गया। इस दौरान टीम ने ग्राम निरतु में अवैध रूप से डंप की गई रेत पर भी बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 70 ट्रैक्टर रेत को जब्त किया। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अवैध खनन करने वालों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी  है कि अवैध खनन एवं परिवहन के खिलाफ इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रोत्यूष बालापुरे ने 10वीं CBSE बोर्ड में हासिल किए 99% अंक, स्व-अध्ययन और दृढ़ संकल्प से रचा कीर्तिमान

सिवनी मालवा प्रोत्यूष बालापुरे (कक्षा 10वीं, CBSE) ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए हैं। जिस के लिए उनके सागर पब्लिक स्कूल भोपाल ने उन्हें 135000.00  छात्रवत्ति भी प्रदान की है।  इस उपलब्धि के पीछे छात्र का दृढ़ संकल्प, स्व-अध्ययन तथा परिवार और शिक्षकों का सहयोग प्रमुख रहा। छात्र के पिता डॉ. सतीश बालापुरे, शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा में पदस्थ हैं, जबकि माता सुमना बालापुरे मत्स्य विभाग में क्षेत्रीय प्रबंधक, भोपाल  के रूप में कार्यरत हैं। छात्र ने बताया कि उसने 10वीं कक्षा की शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि उसे बोर्ड परीक्षा में 99% अंक प्राप्त करने हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने अपने नाम के साथ सभी विषयों में पूरे अंक लिखकर कई स्टिकी नोट्स बनाए और उन्हें अपने PC, स्टडी टेबल, ड्रेसिंग मिरर, यहाँ तक कि अपनी पानी की बोतल पर भी चिपका दिया। सिलेबस की शुरुआत अच्छी रही, जिसका पूरा श्रेय शिक्षकों को जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्र ने क्विज़ और एलोक्यूशन जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी अन्य क्षमताओं को भी निखारा। छात्र के अनुसार, उसके शिक्षक अत्यंत सहयोगी रहे और किसी भी कॉन्सेप्ट में कठिनाई होने पर उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान की। पूरे वर्ष छात्र ने स्व-अध्ययन जारी रखा, हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव भी आए। प्री-बोर्ड 1 में अपेक्षित अंक नहीं मिलने पर छात्र ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने कमजोर पक्षों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। परीक्षाओं से पहले छात्र ने अपने सीनियर्स से पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र (PYQs) और तैयारी सामग्री एकत्र की, जिससे उसे CBSE के प्रश्नों के पैटर्न को समझने में सहायता मिली। प्रत्येक PYQ पर उसने स्वयं नोट्स तैयार किए, जिसमें प्राप्त अंक, गलतियाँ और सुधार के बिंदु शामिल थे। अंतिम दो महीनों में छात्र ने पूरी तरह से PYQs पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। विशेष रूप से उत्तर लेखन और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर कार्य किया गया। हाल ही में घोषित परिणाम में छात्र ने 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए। इस सफलता में माता-पिता, दादी, चाचा, बड़े पापा   का महत्वपूर्ण योगदान रहा। छात्र के अनुसार, कठिन समय में माता-पिता ने उसे प्रेरित किया और उसका हौसला बढ़ाया। माता ने विभिन्न स्थानों से अध्ययन सामग्री जुटाकर सहायता की, जबकि पिता ने कठिन वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझाया। बहन श्रुष्टि एवं  देव्यानी  ने भी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा पिछले 10 वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अभ्यास करने से छात्र को उत्तर लेखन शैली और समय प्रबंधन में विशेष लाभ मिला। छात्र ने आगे की पढ़ाई के लिए कॉमर्स विषय का चयन किया है और उसका लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सलाहकार बनना है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत है।

बाढ़ से बचाव की तैयारी तेज: पंजाब में नदियों-नालों से गाद निकालने की मंजूरी

चंडीगढ. मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रिमंडल ने मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने दरियाओं, चोओं और सेम नालों से गाद निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से जमीन मालिकों को अपनी लागत पर सफाई की अनुमति दे दी है। साथ ही, खुदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल गाद निकालने के काम में तेजी आएगी, बल्कि दरियाओं के पानी के प्रवाह में भी सुधार होगा। इससे संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। यह निर्णय सतलुज, ब्यास और सिसवां समेत अन्य दरियाओं और नालों की सफाई के लिए लिया गया है। लंबे समय से इन जल स्रोतों में जमा गाद के कारण पानी का बहाव प्रभावित हो रहा था, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बन जाती थी। सरकार ने ऐसे 9 संवेदनशील स्थानों की पहचान भी की है, जहां मानसून से पहले गाद निकालना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इन क्षेत्रों में सफाई नहीं की गई, तो पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसको देखते हुए संबंधित जमीन मालिकों को आगे आकर इस कार्य में सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने पंचायत स्तर पर आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाने के लिए भी अहम निर्णय लिया है। सरपंचों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के पदों के लिए आरक्षण नियम-6 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है। नई व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति, महिलाओं और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का रोस्टर पुनः निर्धारित किया जाएगा, ताकि हर वर्ग को बराबर अवसर मिल सके। कैबिनेट के फैसले जमीन मालिकों को आप सरकार ने दी सफाई की अनुमति। खोदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग का भी अधिकार।

कानून का कड़ा शिकंजा: बस्तर में बाल विवाह मामले में 5 आरोपी, दोनों पक्षों पर FIR

बस्तर. बस्तर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया है. नगर कोतवाली में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई. मामला जगदलपुर ब्लॉक के 21 मार्च 2026 को हुए विवाह समारोह से जुड़ा है. शुरुआत में यह सामान्य शादी लगी, लेकिन शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. जांच में सामने आया कि वधु की उम्र 18 वर्ष से कम थी. सत्यापन के बाद बाल संरक्षण विभाग ने तत्काल कानूनी कार्रवाई की. वर और वधु पक्ष के कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जिले में चार वर्षों में 15 मामले सामने आने की जानकारी मिली है. पहले ऐसे मामलों में समझाइश देकर छोड़ने की परंपरा रही. अब प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से समझौता नहीं होगा. 18 से कम लड़की और 21 से कम लड़के की शादी अपराध है. दोषियों को 2 साल सजा या 1 लाख जुर्माना हो सकता है. यह कार्रवाई सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

ग्रामीण कनेक्टिविटी को बूस्ट: 250 करोड़ से बनेंगी 235.45 किमी सड़कें

बस्तर. बस्तर जिले में विकास को नई गति देने वाली बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत हुई. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस-4 के तहत 86 कार्यों की आधारशिला रखी गई. इन सड़कों की कुल लंबाई 235.45 किलोमीटर बताई गई है परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 250 करोड़ रुपये है. कार्यक्रम का प्रसारण कुम्हरावंड सभागार में किया गया. ग्रामीण अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर दिया गया. लोहंडीगुड़ा, दरभा, बास्तानार और तोकापाल को बड़ा लाभ मिलेगा. दशकों पुरानी आवागमन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है. जनप्रतिनिधियों ने इसे विकास की नई लकीर बताया. स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी. सड़कें गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगी. अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समय पर काम पूरा करने निर्देश दिए गए. बस्तर के दूरस्थ इलाकों में अब विकास की रफ्तार और तेज होगी. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नई तकनीक की एंट्री जगदलपुर. बस्तर संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी तकनीकी सौगात मिली है. शहर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक स्टेरलाइजर मशीन लगी है. यह सुविधा संभाग के सरकारी या निजी अस्पतालों में पहली बताई जा रही है. अब संवेदनशील उपकरणों को बाहर भेजने की जरूरत कम होगी. रायपुर या विशाखापत्तनम पर निर्भरता घटेगी. इलाज की लागत और समय दोनों में राहत मिलेगी. कैथेटर, ट्यूब, ग्लव्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित होंगे. गर्मी से खराब होने वाले उपकरण अब सुरक्षित तरीके से साफ होंगे. 250 लीटर क्षमता वाली मशीन अस्पताल में स्थापित की गई है. क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा कम होने की उम्मीद है. आपातकालीन सर्जरी में भी तेज तैयारी संभव होगी. स्थानीय मरीजों को अब उच्च स्तरीय सुविधा घर के पास मिलेगी. यह उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है.

डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा: जनकल्याण कार्यों में तेजी लाकर गांवों में करें रात्रि विश्राम

जनकल्याण के कामों में तेज़ी लायें, निरीक्षण करें, गांवों में करें रात्रि विश्राम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव छोटे किसानों का गेहूं उपार्जन पहले करायें, उपार्जन केन्द्रों में हों सभी जरूरी सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ वीसी से की विभिन्न अभियानों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय से प्रदेश में चलाये जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान, पूर्ण हो चुके संकल्प से समाधान अभियान और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर समुचित दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागीय अधिकारियों एवं कलेक्टर्स से कहा कि प्रदेश और समाज की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा विभिन्न अभियानों के माध्यम से महती प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार के इन सभी प्रयासों एवं अभियानों में जन जुड़ाव एवं सहभागिता बेहद जरूरी है। इन सभी अभियानों की सार्थकता और सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब इनमें अधिकाधिक जनसहयोग एवं जन भागीदारी भी हो। इसके लिए सभी समर्पित और फोकस्ड होकर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे जनता के कल्याण के कामों को तेजी से पूर्ण करायें। सरकार की योजनाओं का फील्ड में पूर्णतया क्षमता और दक्षता के साथ व्यापक स्तर पर सुचारु एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर, उनकी जरुरतों और सुझावों पर अमल करते हुए जनोन्मुखी प्रशासन से खुद की और सरकार की साख बढ़ायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स लगातार जिले में भ्रमण करें, लोगों से चर्चा करें, उनकी समस्या सुनकर समाधान करें और गांवों में रात्रि विश्राम करें, इससे सरकारी योजनाओं का मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च तक 2026 तक "संकल्प से समाधान अभियान" चलाया गया। इस अभियान से सरकार की 106 प्रकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता और जरुरतमंदों तक पहुंचाया गया। सभी कलेक्टर्स इस अभियान के मूल लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हमेशा क्रियाशील रहें और जनता को अधिकतम लाभ दिलायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ हुआ है। यह 30 जून 2026 तक चलेगा। विगत 2 सालों में अभियान के अंतर्गत हुए जल संचयन के कार्यों से यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बन चुका है। अब आवश्यकता है कि इस साल भी जल संरक्षण और सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के भरसक प्रयास किये जायें। गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चल रही गेहूं उपार्जन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि छोटे किसानों का गेहूं पहले खरीदा जाये। उन्हें समय पर भुगतान भी करायें। सभी कलेक्टर्स गेहूं उपार्जन केन्द्रों का सघन निरीक्षण करें और यह देखें कि खरीदी केंद्र पर समुचित छाया-पानी, बारदाना, तेज गर्मी के चलते ओआरएस घोल, पावडर आदि सभी जरूरी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहें। किसानों को किसी भी तरह की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत परेशानी नही हो। अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया निर्बाध रूप में से जारी है।अब तक 1 लाख 13 हज़ार से अधिक किसानों से 4 लाख 96 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इन किसानों को करीब 355 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ऐसा पहली बार हुआ है कि पहले दिन तुलाई वाले किसानों को दूसरे दिन ही भुगतान भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय विकास एवं प्रशासन विभाग से कहा कि वे अपने विभागीय स्वच्छता अभियान को जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ लें। जनसहयोग से जगह-जगह पर प्याऊ लगवायें। इनकी साफ़-सफाई पर भी विशेष ध्यान दें।तकनीक से जुड़कर नवाचार भी करें। सांदीपनि विद्यालयों में करें रैन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के कारण बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट में आये उल्लेखनीय परिणामों को राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आई गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों को लेकर अभिभावकों की धारणा इस कदर परिवर्तित हुई है कि वे अपने बच्चों के दाखिले निजी विद्यालयों से निकालकर शासकीय सांदीपनि विद्यालयों में भर्ती करा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवायें। जून में जब स्कूल पुनः खुलेंगे, तब अधिकाधिक लोगों को सांदीपनि विद्यालयों का अवलोकन करायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बड़ी उपलब्धि है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण हमारा स्कूल ड्रॉप आउट रेशियो जीरो हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी बड़े धार्मिक स्थलों पर कम से कम 50 बेडेड हास्पिटल होने चाहिए। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में बर्न यूनिट्स स्थापित की जाये। ग्रीष्मकालीन स्थायी निर्देशों (मेडिकल प्रोटोकॉल्स) का कढ़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी अस्पतालों में जरूरी दवाएं उपलब्ध रहें। सभी कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी पूरी कर लें। पेयजल आपूर्ति में न रहे कोई कमी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाएं ताकि ग्रीष्मकाल में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था हर हाल में निर्बाध रहे। आवश्यकतानुसार टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जाये। पेयजल संरचनाओं के संरक्षण एवं संधारण पर विशेष ध्यान दें। किसी को भी पेयजल संबंधी परेशानी न होने पाये। ज्ञान भारतम ऐप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक "ज्ञान भारतम ऐप" तैयार किया गया है। कोई भी नागरिक पुरानी साहित्यिक या धार्मिक पांडुलिपियों को इस ऐप में अपलोड कर सकता है। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि 17 अप्रैल 26 तक इस ऐप में साढ़े 6 लाख से अधिक पांडुलिपियां अपलोड की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को इस विषय के … Read more

अवैध बोर खनन पर सख्ती : तुरकाडीह में कार्रवाई, बोर मशीन जब्त

अवैध बोर खनन पर सख्ती : तुरकाडीह में कार्रवाई, बोर मशीन जब्त बिलासपुर जिले के सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम तुरकाडीह में अवैध बोर खनन की सूचना पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बोर मशीन वाहन को जब्त कर लिया। तहसीलदार सकरी, थाना प्रभारी सकरी, थाना स्टाफ, हल्का पटवारी तुरकाडीह एवं थाना कोनी की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई। जांच के दौरान बोर खनन कार्य में संलग्न व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार की वैध अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इस पर कलेक्टर के 06 अप्रैल 2026 के जारी आदेश के उल्लंघन के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बोर मशीन को जब्त कर थाना कोनी के सुपुर्द किया गया। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए 6 अप्रैल 2026 से बोर खनन पर प्रतिबंध लागू किया है। प्रशासन द्वारा इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है तथा अवैध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

संस्थान का अजीब फरमान: ट्रेनिंग के दौरान शादी पर लगी रोक

गोपालगंज बिहार में गोपालगंज के हथुआ में स्थित जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ट्रेनिंग के दौरान कोई भी छात्रा शादी नहीं कर सकती. यदि कोई छात्रा इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।  यह आदेश कॉलेज परिसर में नोटिस के रूप में चस्पा किया गया था, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरल होते ही इस फरमान को लेकर लोगों में नाराजगी फैल गई और इसे छात्राओं की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया जाने लगा।  संस्थान की प्राचार्या मानसी सिंह ने इस आदेश को लेकर सफाई भी दी है. उनका कहना है कि नर्सिंग की पढ़ाई पूरी तरह आवासीय होती है, जहां छात्राएं संस्थान की निगरानी में रहकर प्रशिक्षण लेती हैं।  ऐसे में यदि छात्राएं शादी कर लेती हैं, तो उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि यह नियम कोई नया नहीं है, बल्कि विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत पहले से ही लागू है. नामांकन के समय ही छात्राओं से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं, जिसमें यह शर्त शामिल होती है कि वे प्रशिक्षण के तीन वर्षों के दौरान शादी नहीं करेंगी।  हालांकि, यह तर्क लोगों को रास नहीं आया और मामला तूल पकड़ता चला गया. सोशल मीडिया पर इस आदेश को ‘अजीबोगरीब’ बताते हुए आलोचना की जा रही है. कई लोगों ने इसे छात्राओं के व्यक्तिगत जीवन और अधिकारों में दखल बताया है।  मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है. गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा है कि वायरल नोटिस की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने हथुआ एसडीएम को 24 घंटे के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. डीएम ने साफ किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया गया है. गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. बीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत जांच कराई गई. जांच के बाद प्राचार्य द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया गया है. साथ ही प्राचार्य से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है. उन्होंने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी छात्रा के निजी जीवन से जुड़े ऐसे फैसलों पर संस्थान रोक लगा सकता है? क्या इस तरह के नियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हैं? फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। 

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए राज्य सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन प्रशिक्षण

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने राज्य सरकार ने उठाये कदम, दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण विशेषज्ञों ने संबद्ध अधिकारियों को दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण भोपाल आगामी अक्षय तृतीया 20 अप्रैल के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों की संभावनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग द्वारा 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006' के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रदेश भर के नामित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम, शुक्रवार को संचालनालय महिला बाल विकास भोपाल में हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करना और सूचना मिलते ही वैधानिक प्रक्रियाओं को गति देना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति के वरिष्ठ सलाहकार एवं अधिवक्ता श्री गुरमुख सिंह लाम्बा तथा यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के बाल संरक्षण अधिकारी श्री गोविंद बेनीवाल उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों ने बाल विवाह प्रतिषेध कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को संविधान प्रदत्त उनकी शक्तियों और कर्तव्यों का बोध कराया। वरिष्ठ सलाहकार श्री लाम्बा ने कानूनी प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं श्री बेनीवाल ने सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक तालमेल के महत्व को रेखांकित किया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को विस्तृत रूप से बताया गया कि बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही किस प्रकार निषेधाज्ञा जारी करवाई जाए और यदि विवाह संपन्न हो चुका हो, तो उसे शून्य घोषित कराने की विधिक प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर की जाने वाली त्वरित कार्रवाइयों और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाओं के बारे में भी ओरिएंटेशन किया। प्रशिक्षण में अधिकारियों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों को साझा किया, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्षय तृतीया के दौरान निगरानी तंत्र को अत्यंत संवेदनशील और सक्रिय रखा जाएगा जिससे किसी भी मासूम का भविष्य असुरक्षित न हो। इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रशिक्षण में विभाग के राज्य और जिला कार्यालयों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।