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दो पालियों में होगी प्रतियोगिता परीक्षा, जिले में बनाए गए 13 सेंटर

लातेहार झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2026 को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. यह परीक्षा 19 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित की जाएगी. पहली पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है. प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है. जिले में बनाए गए 13 परीक्षा केंद्र परीक्षा के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 13 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर परीक्षार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो. उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने किया निरीक्षण मंगलवार को उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने जिला मुख्यालय के कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और गांधी इंटर कॉलेज केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए. मूलभूत सुविधाओं पर दिया गया विशेष ध्यान निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने केंद्रों पर बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध कराई जाएं. कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण परीक्षा पर जोर उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि परीक्षा को कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है. इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने और सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश उन्होंने सभी केंद्राधीक्षकों और संबंधित कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही परीक्षा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. परीक्षार्थियों से समय पर पहुंचने की अपील जिला प्रशासन ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें. इससे परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सकेगी. निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी रहे मौजूद इस दौरान डीआरडीए निदेशक प्रभात रंजन चौधरी, अनुमंडल पदाधिकारी अजय कुमार रजक, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक गौतम साहू, डीटीओ उमेश मंडल, बीडीओ मनोज कुमार तिवारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे. सभी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया.

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नया इको-टूरिज्म स्पॉट, अप्रैल अंत में उद्घाटन संभव

बगहा बगहा वन क्षेत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के मदनपुर रेंज में बन रहा यह नया इको-टूरिज्म स्पॉट जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. करीब 0.548 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि गेटवे का अंतिम काम तेजी से चल रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 3.13 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसमें मुख्य प्रवेश द्वार के साथ हरियाली, बैठने की सुविधा और आकर्षक डिजाइन शामिल हैं. पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा यह इको-पर्यटन स्थल खासतौर पर उन सैलानियों के लिए तैयार किया जा रहा है जो प्राकृतिक वातावरण में सुकून के पल बिताना चाहते हैं. यहां आने वाले पर्यटक न केवल सुंदर नजारे देख सकेंगे, बल्कि आरामदायक माहौल में समय भी बिता पाएंगे. अप्रैल के अंत में उद्घाटन की तैयारी बगहा वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकार के अनुसार, पार्क का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और गेटवे अंतिम चरण में है. यदि सब कुछ प्लान के अनुसार रहा तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में वरीय अधिकारियों द्वारा इसका उद्घाटन किया जा सकता है. जल्द तय होगा प्रवेश शुल्क (Entry Fees) फिलहाल पार्क में प्रवेश शुल्क तय नहीं किया गया है. इसके लिए प्रस्ताव वरीय अधिकारियों को भेजा गया है. उम्मीद है कि जल्द ही शुल्क निर्धारित कर दिया जाएगा, ताकि आम पर्यटक भी आसानी से यहां पहुंच सकें. पर्यटकों के लिए सुविधाओं का खास इंतजाम इस स्थल पर पर्यटकों के लिए बैठने की व्यवस्था, नाश्ते की सुविधा और बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु घेराबंदी भी की गई है. साथ ही आकर्षक लाइटिंग इसे और भी सुंदर बनाएगी. पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ के शुरू होने से वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इससे न सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

रांची: नागपुरी गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को मिला ‘गुरु रत्न सम्मान 2026’

रांची  झारखंड के नागपुरी लोक संगीत जगत के प्रख्यात गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “गुरु रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें 14 अप्रैल को “भारत के गवैयों” संस्था की ओर से प्रदान किया गया. डॉ. बड़ाईक को यह गौरव नागपुरी लोक संगीत के संरक्षण, संवर्धन और इसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. इस सम्मान समारोह ने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती प्रदान की है. सांसद महुआ माजी ने की कलाकार की सराहना इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद महुआ माजी उपस्थित रहीं. उन्होंने डॉ. बड़ाईक को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे वरिष्ठ कलाकार हमारी संस्कृति और परंपरा के सच्चे संवाहक होते हैं. महुआ माजी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि लोक संगीत हमारी पहचान का अटूट हिस्सा है और डॉ. बड़ाईक जैसे व्यक्तित्व इसे युवा पीढ़ी के लिए सहेजकर रखने का महान कार्य कर रहे हैं. उन्होंने लोक कला को राजकीय और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही. नागपुरी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में भूमिका डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक लंबे समय से नागपुरी संगीत की जड़ों को सींचने में सक्रिय हैं. उन्होंने न केवल अपने गायन बल्कि अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से भी झारखंड की लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. वे लगातार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देकर लोक संगीत की मिठास को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उनकी विशिष्ट गायकी शैली ने न केवल दर्शकों का मन मोहा है, बल्कि कई युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी किया है. सुरों की महफिल में उमड़े संगीत प्रेमी सम्मान समारोह के दौरान पूरा वातावरण नागपुरी धुनों से सराबोर रहा. इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, प्रख्यात कलाकार और भारी संख्या में संगीत प्रेमी शामिल हुए. डॉ. बड़ाईक ने मंच से अपने कुछ लोकप्रिय नागपुरी गीतों की सुरीली प्रस्तुति भी दी, जिसे श्रोताओं ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया. इस सम्मान से पूरे नागपुरी संगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है और इसे राज्य की गौरवशाली विरासत के लिए एक सुखद क्षण माना जा रहा है.  

खेलगांव में बनकर तैयार स्केटिंग स्टेडियम, अब सड़क पर नहीं करना होगा अभ्यास

रांची  झारखंड के स्केटिंग के खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर है। खेलगांव के वेलोड्राम स्टेडियम के बगल में ईस्ट जोन का पहला स्केटिंग रिंक (स्टेडियम) लगभग बन कर तैयार हो चुका है। इसमें बस रेलिंग लगाने और पेंट करने का काम बचा हुआ है। वर्तमान में स्केटिंग के खिलाड़ियों को या तो सड़क पर अभ्यास करना पड़ता था या फिर किसी स्कूल के कैंपस का सहारा लेना पड़ता था। वहीं इस स्केटिंग रिंक में खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। इसके पहले फेज का काम पूरा हो चुका है। दूसरे फेज में इस स्केटिंग रिंक में रोलर हॉकी स्केट बोर्ड, पेवेलियन और गैलरी की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। खेलगांव में तैयार हो रहा है 4.15 करोड़ की लागत से स्केटिंग रिंक खेलगांव में चार करोड़ 15 लाख की लागत से इस स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जा रहा है। पूरा स्टेडियम लगभग 12660.43 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में तैयार किया गया है। जिसमें स्केटिंग रिंक, फ्री स्टाइल ग्राउंड सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई सुविधाएं होंगी। 2022 से इस रिंक को बनाने का काम शुरू किया गया है। लेकिन अभी तक केवल एक फेज का काम ही पूरा हो पाया है। जिसके तहत केवल स्केटिंग रिंक ही तैयार किया गया है। आने वाले समय में कई और सुविधाओं से इस पूरे स्टेडियम को लैस किया जायेगा। जिसके बाद इस स्टेडियम में एक साथ तीन इवेंट हो सकेंगे। संत जेवियर स्कूल में अभ्यास करते हैं खिलाड़ी वर्तमान में रांची जिला और आसपास के स्केटिंग के खिलाड़ी अभ्यास के लिए डोरंडा स्थित संत जेवियर स्कूल में जाते हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच राजेश राम का कहना है कि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम के शुरू होने के बाद खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाने में समस्या नहीं होगी। क्योंकि स्कूल में अभ्यास करने के बाद जब ये खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए किसी स्टेडियम में शामिल होते हैं तो उनको समस्याओं का सामना करना पड़ता है।जिसमें स्टेडियम का फर्श से लेकर स्पीड तक शामिल है। पांच खिलाड़ियों से हुई थी स्केटिंग की शुरुआत, अभी हैं 450 खिलाड़ी झारखंड की राजधानी रांची में स्केटिंग खेल की शुरुआत 2007 में संत जेवियर स्कूल से हुई थी। उस समय इस इवेंट में मात्र पांच ही खिलाड़ी थे। स्केटिंग कोच सुमित कुमार की मेहनत से लगभग 25 वर्ष में राज्य में कुल 450 रजिस्टर्ड खिलाड़ी हो चुके हैं। वहीं इन खिलाड़ियों में कुल 67 ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीता है। इसमें राजेश राम, सुमंत, सोमनाथ मिंज, सुषमा टोप्पो, रवि रंजन और एलेक्स लकड़ा जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। स्केटिंग रिंग नहीं होने के कारण इन खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास के लिए दूसरे राज्य भी जाना पड़ता है। जून में मिली है राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता की मेजबानी, 2000 खिलाड़ी होंगे शामिल रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ झारखंड को आगामी जून में राष्ट्रीय स्तर की रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता की मेजबानी मिली है। इसमें पूरे देश से लगभग 2000 खिलाड़ी शामिल होंगे। एसोसिएशन के सचिव सुमित कुमार ने बताया कि इस आयोजन में देश भर के खिलाड़ी शामिल होंगे। अगर समय पर स्टेडियम में रेलिंग और पेंट हो जाता है तो यही पर आयोजन करवाया जायेगा।खेल विभाग को इसकी पूरी जानकारी प्रदान कर दी गयी है। जिसके बाद काम तेजी से हो रहा है। रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ झारखंड के सचिव सुमित कुमार कहते हैं- खेलगांव में तैयार हो रहा स्केटिंग रिंक यहां के स्केटिंग के खिलाड़ियों के लिए लाइफलाइन साबित होगा। वर्तमान में खिलाड़ी या तो स्कूल में स्केटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं या फिर रिंग रोड़ और मोरहाबादी की सड़कों पर। ये दोनों जगह खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए सही नहीं है। लेकिन उनके बाद कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। स्टेडियम पूरी तरह तैयार हो जाने पर खिलाड़ियों को कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या कहते हैं राष्ट्रीय स्तर के मेडलिस्ट खिलाड़ी     स्कूल के ग्राउंड में अभ्यास करने में परेशानी होती है। ये ग्राउंड काफी छोटा है और जब हम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोेगिता में जाते हैं तो इसका असर हमारी परफारमेंस पर पड़ता है। यदि हमें स्केटिंग रिंक मिल जायेगा तो हम राष्ट्रीय स्तर में बेहतर करने के साथ रिकार्ड भी बन सकते हैं।     -आदित्य रंजन, ईस्ट जोन में स्वर्ण     वर्तमान में हमें अभ्यास के लिए एक ही जगह मिलती है। वो है सेंट जेवियर स्कूल में एक जगह। ये काफी छोटी जगह है और यहां अभ्यास करने में परेशानी होती है। वहीं स्केटिंग रिंग के शुरू हो जाने पर हम प्रतिदिन बेहतर अभ्यास कर पायेंगे और झारखंड और देश के लिए मेडल भी जीत सकेंगे।     -अबीर गुप्ता, स्टेट चैंपियन व ईस्ट जोन में रजत     हमारे अभ्यास की शुरुआत इसी ग्राउंड से हुई है और यहीं से सीखकर हमने मेडल भी जीता है। लेकिन बेहतर अभ्यास के लिए रिंक होना जरूरी है। इससे हमारा स्पीड बेहतर होगा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हम बेहतर रिजल्ट दे सकेंगे।     -आरव प्रभात, ईस्ट जोन में स्वर्ण     एक बेहतर स्टेडियम की जरूरत तो शुरुआती दौर से होता है। लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है इसलिए यहां पर अभ्यास करना पड़ता है। हम कभी-कभी स्मार्ट सिटी की सड़कों पर भी अभ्यास करते हैं लेकिन वहां खतरा अधिक है। स्टेडियम मिल जाने से हमें कहीं और भटकना नहीं पड़ेगा।     -हरीश कुमार, ईस्ट जोन में स्वर्ण  

Punjab Scheme: महिलाओं को ₹1500 महीना देगी सरकार, जानिए किन 3 डॉक्यूमेंट्स से होगा रजिस्ट्रेशन

जालंधर.  बाबा साहिब अंबेडकर के जन्म दिवस के अवसर पर एक निर्णायक कल्याण अभियान की शुरुआत करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब में लगभग हर महिला के सशक्तिकरण के लिए एक योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत प्रदेश भर की महिलाओं को 1000 से 1500 रुपये तक की मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस योजना को बाबा साहिब अंबेडकर के सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए, मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का शुभारंभ किया, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाएं केवल तीन दस्तावेजों के साथ इस योजना का लाभ ले सकती हैं, जबकि कैंपों और सहायक स्टाफ के एक विशाल नेटवर्क के माध्यम से महिलाओं को उनके घर पर ही सुविधा प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। यह योजना पहले 9 हलकों में शुरू की जाएगी और 15 मई से इसका विस्तार शेष 108 हलकों में किया जाएगा। योजना का भुगतान जुलाई से शुरू होगा और रजिस्ट्रेशन के लिए कोई समय सीमा नहीं होगी। इससे प्रत्येक पात्र महिला को लाभ की गारंटी प्रदान की गई है, चाहे वह कभी भी रजिस्ट्रेशन करवाए। 26,000 रजिस्ट्रेशन केंद्रों और हर गांव और वार्ड में तैनात समर्पित 'महिला सतिकार सखियों' के साथ, इस योजना को बड़े पैमाने पर लागू करने, बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और निश्चितता प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जो इसे देश में महिलाओं के लिए सबसे व्यापक प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता पहलों में से एक बनाती है। 15 मई से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन वरिष्ठ 'आप' नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया के साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की कि यह योजना पायलट आधार पर आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला देहाती सहित 9 हलकों में शुरू की गई है। उन्होंने कहा, "शेष 108 हलकों में महिलाओं के लिए रजिस्ट्रेशन 15 मई से शुरू होगा। जुलाई 2026 से 1000 या 1500 रुपये का मासिक भुगतान शुरू होगा।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिलाओं को पहुंच के बारे में आश्वस्त करते हुए कहा, "पंजीकरण के लिए कोई समय सीमा नहीं है और महिलाओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे 15 अप्रैल, 15 मई या 15 अगस्त को पंजीकरण करवाएं।" उन्होंने आगे कहा कि देर से पंजीकरण करवाने से लाभों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा, "उन्हें जुलाई के बाद अपना पूरा भुगतान मिलेगा, इसलिए चाहे वे सितंबर के अंत में पंजीकरण करवाएं, फिर भी उन्हें तीन महीने यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए पूरा भुगतान मिलेगा।" ये दस्तावेज जरूरी दस्तावेज प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए सीएम मान ने कहा, "पंजीकरण के लिए केवल तीन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिनमें पंजाब के पते वाला आधार, पंजाब का वोटर आईडी और बैंक पासबुक शामिल है। अनुसूचित जातियों की महिलाओं के मामले में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र भी आवश्यक है।" जाति प्रमाण पत्र की कमी वाली महिलाओं की चिंताओं पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "मैं जानता हूं कि मेरी कई अनुसूचित जातियों की बहनों और माताओं के पास जाति प्रमाण पत्र नहीं है, लेकिन उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है और उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि अगर इसमें समय लग रहा है तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे प्रमाण पत्र के बिना भी इस योजना के तहत पंजीकरण कर सकते हैं और 1000 रुपये मासिक प्राप्त करना शुरू कर सकते हैं। जब भी उनका प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, राज्य सरकार उन्हें जुलाई से 500 रुपये प्रति माह के बकाए का भुगतान करेगी। इस संबंध में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।" मुख्यमंत्री ने व्यापक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर एक पहुंच विधि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 8 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं की 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने और पंजीकरण प्रक्रिया में उनकी मदद करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा राज्य भर के हर गांव और वार्ड में महिला सतिकार सखियों को तैनात किया जाएगा।" क्या होगा प्रोसीजर? मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "एक बार जब वे अपना पंजीकरण फॉर्म भर लेते हैं और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार हो जाते हैं, तो वे अपने नजदीकी पंजीकरण केंद्र पर जा सकते हैं और वहां फॉर्म जमा करवा सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने व्यापक बुनियादी ढांचा सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए कि महिलाओं को पंजीकरण में कोई कठिनाई न हो, पंजाब सरकार द्वारा 26,000 से अधिक स्थानों पर पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसमें सभी आंगनवाड़ी केंद्र, सभी सेवा केंद्र और शहरी क्षेत्रों में सभी नगर निगम/समिति कार्यालय शामिल हैं।" इस योजना के लाभों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना हर वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपये का नकद लाभ सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "यह योजना महिलाओं को स्वतंत्र और सशक्त बनाकर उनके विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी।" उन्होंने इस पहल के पैमाने पर और जोर देते हुए कहा, “इस योजना के तहत महिलाओं के एक सीमित वर्ग को छोड़कर लगभग उन सभी महिलाओं को कवर किया जाएगा, जो 18 साल और उससे अधिक उम्र की हैं। इसलिए इस योजना से 97 फीसद से अधिक महिलाओं को लाभ होने की उम्मीद है, जो इसे देश में सबसे व्यापक महिला-पक्षधर सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक बनाती है।”

बैसाखी पर खास आयोजन: गुरुद्वारा भगत धन्ना जी में पहली बार महोत्सव, भारी भीड़

चंडीगढ़. बैसाखी और खालसा पंथ के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर सोमवार को पटियाला के गांव लाछड़ू खुर्द (घन्नौर) में एक नई परंपरा का आगाज हुआ। यहां स्थित गुरुद्वारा साहिब भगत धन्ना जी में पहली बार भव्य बैसाखी महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें घन्नौर और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में पहुंची संगत ने अपनी हाजिरी दर्ज करवाई। पूरा वातावरण 'जो बोले सो निहाल' के जयकारों और गुरबाणी के स्वर से आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। खालसा पंथ के स्थापना दिवस को समर्पित इस विशेष समागम में पंथ के प्रसिद्ध रागी और ढाडी जत्थों ने हाजिरी भरी। इंटरनेशनल पंथक ढाडी जत्थे के ज्ञानी लखविंदर सिंह रजौली (अंबाला) ने जोश भरे अंदाज में खालसा पंथ के गौरवशाली इतिहास को संगत के साथ साझा किया। वहीं, श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई शुभदीप सिंह ने मधुर गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुरु चरणों से जोड़ा। विभिन्न रागी जत्थों द्वारा प्रस्तुत कीर्तन ने वहां मौजूद संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। सेवा और प्रबंधन का दिखा अनूठा संगम महोत्सव की सफलता के पीछे समाजसेवी भगत सिंह और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। पहली बार आयोजित इस बड़े स्तर के कार्यक्रम को लेकर गांव में खासा उत्साह था। भगत सिंह ने बताया कि हजारों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि किसी को असुविधा न हो। समागम के दौरान गुरु का लंगर अटूट वितरित किया गया और सेवादारों ने पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं निभाईं। कार्यक्रम के समापन पर अरदास की गई, जिसमें सरबत के भले (विश्व कल्याण) की कामना की गई। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक बल्कि सामुदायिक सौहार्द का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा: वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट, 9 मजदूरों की दर्दनाक मौत, 30 घायल

नई दिल्ली.  सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। अचानक हुए इस हादसे के बाद प्लांट परिसर में आग और धुएं का गुबार फैल गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास मौजूद श्रमिक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे में 9 मजदूरों की मौत हो गई है।  जानकारी के अनुसार, हादसे के समय प्लांट में बड़ी संख्या में मजदूर कार्यरत थे। हादसे में करीब 30 से मजदूरों के घायल होने की सूचना है, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंच गई और तत्काल बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट के बाद प्लांट में भगदड़ की स्थिति बन गई थी, कई मजदूर झुलस गए, जबकि कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। बचाव दल द्वारा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन ने घटनास्थल को घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है। प्रारंभिक तौर पर बॉयलर फटना कारण माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक वजह सामने आएगी। सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। फिलहाल प्रशासन घायलों के बेहतर उपचार और राहत कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। बॉयलर के ट्यूब फटने हादसा- पुलिस पुलिस अधीक्षक प्रफुल ठाकुर के अनुसार, बॉयलर के ट्यूब फटने की वजह से यह हादसा हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक 9 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दस से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। कुछ मजदूरों के अब भी प्लांट परिसर में फंसे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने हादसे पर दुख जताया विष्णु देव साय ने सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से हुई दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक और हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।  

Fake Medicine Racket: खाद्य एवं औषधि विभाग की रेड, अवैध व्यापार करने वाले पकड़े गए

रायपुर. खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा राज्य में नकली दवाओं के अवैध व्यापार के विरुद्ध सतत अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कुछ माह पूर्व नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट, गोगाँव से नकली दवाओं की जप्ती के प्रकरण में एक बड़ी कार्यवाही की गई थी। जांच के दौरान इस संगठित सप्लाई चेन में संलिप्त आरोपियों—रोचक अग्रवाल (बिजरासन मेडिकोज, इंदौर), सुरेंद्र कामनानी (प्रेम प्रकाश एजेंसी, भाटापारा) एवं खेमराज बानी (सरस्वती मेडिकल स्टोर, सारंगढ़) की भूमिका सामने आई, जिन्हें रायपुर में कल सोमवार को गिरफ्तार किया गया। उक्त प्रकरण की कड़ी में सरस्वती मेडिकल स्टोर, सारंगढ़ में दिनांक दिसंबर माह में  विभाग द्वारा विस्तृत जांच एवं जब्ती की कार्यवाही की गई थी । निरीक्षण के दौरान संदिग्ध एवं नकली औषधियों के भंडारण एवं वितरण से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए थे,  जिन्हें विधिवत जप्त कर जांच में सम्मिलित किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तथा इस अवैध व्यापार के अन्य राज्यों से जुड़े होने की संभावना के आधार पर विभागीय टीम द्वारा अंतरराज्यीय जांच एवं विवेचना भी की गई। जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों एवं नेटवर्क की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रकरण में नियमानुसार अभियोजन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। विभाग द्वारा प्रकरण से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं संस्थानों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा आमजन से अपील की जाती है कि वे दवाओं की खरीद केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें। नकली दवाओं के विरुद्ध इस प्रकार की सख्त कार्यवाही भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी।

पाइपलाइन विछी है तो पीएनजी कनेक्शन जरूर लें : मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पीएनजी पाइपलाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, उस क्षेत्र के उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। इससे उन्हें गैस सिलेंडर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की सतत आपूर्ति होगी। उपभोक्ताओं से आग्रह है कि किसी तरह का भ्रम नहीं पालें। पीएनजी पूरी तरह से सुरक्षित है। मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2925 स्थानों पर जांच की गई, 4369 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 753 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत् रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है, देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल, डीजल, पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत् रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माइग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डेर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शतन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वससहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को उनके यहां रजिस्‍टर्ड 44 कम्‍प्रेस्‍ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्‍ट को चालू करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में 136 बायोगैस प्‍लांट संचालित होना बताया गया है। इन बायोगैस प्‍लांटों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिये गये हैं। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस का प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत् रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस के लिये सभी सीजीडी संस्था एवं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिका‍री उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्श‍न का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य् के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शनन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशानुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शरन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वी्कृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्यं प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शेन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये हैं। 

नोएडा आंदोलन के बाद श्रमिकों को मिली 10 तक सैलरी, दोगुना ओवरटाइम और बोनस

 नोएडा नोएडा में पिछले कुछ दिनों से आंदोलन कर रहे श्रमिकों की कई मांगों को उत्तर प्रदेश सरकार ने मान लिया है। एक तरफ जहां वेतन में वृद्धि का ऐलान कर दिया गया है तो दूसरी तरफ दोगुने ओवरटाइम से बोनस तक दिलाने का भरोसा दिया गया है। वेतन वृद्धि के अलावा श्रमिकों ने कई मांगें रखीं हैं, जिनमें से अधिकतर को सरकार ने स्वीकार कर लिया है और काम पर लौटने की अपील की है। हालांकि, सोमवार को हिंसा के बाद लगातार दूसरे दिन नोएडा में अधिकतर फैक्ट्रियों में कामकाज बाधित रहा। कई फैक्ट्रियों के बाहर श्रमिक अब भी धरना-प्रदर्शन में जुटे हैं। नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार की उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने वेतन में वृद्धि की सिफारिश करने के लिए सीएम योगी और उच्च अधिकार समिति को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'श्रमिकों की जो सबसे प्रमुख मांग थी वेतन वृद्धि की, उसे मान लिया गया है। इसके साथ और भी निर्देश दिए गए हैं कि श्रमिकों का वेतन 10 तारीख से पहले खाते में एकमुश्त पहुंचे। सालाना बोनस नवंबर से पहले मिले। ओवरटाइम के लिए डबल वेतन दिया जाएगा। साप्ताहिक छुट्टी पर काम के लिए भी डबल वेतन दिया जाएगा। यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए समितियां गठित की जाएंगी, जिनकी अध्यक्ष महिलाएं रहेंगी। नोटिस बोर्ड पर इनके नाम प्रदर्शित किए जाएंगे। शिकायत पेटियां और कंट्रोल रूम की व्यवस्था शिकायत पेटियां भी रहेंगी। कॉल सेंटर और कंट्रोल रूम की स्थापनी की गई है जिस पर श्रमिक शिकायत कर सकते हैं। डीएम ने कहा कि वह खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगी। उन्होंने कहा कि कोई शिकायत है तो हमेशा शासन-प्रशासन साथ है। लेकिन हिंसा कोई जवाब नहीं है। डीएम मेधा रूपम ने शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की और श्रमिकों की मांगों को स्वीकार करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। वेतन में कितना इजाफा आंदोलन के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। अन्य नगर निगम क्षेत्रों में संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है। शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। 20 हजार सैलरी वाली बात झूठी सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन खबरों को 'फर्जी और भ्रामक' करार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि श्रमिकों के लिए 20,000 रुपये प्रतिमाह की समान न्यूनतम मजदूरी तय कर दी गई है। सरकार ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'आधारभूत वेतन' तय करने की प्रक्रिया केंद्र के स्तर पर जारी है और इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। गौरतलब है कि प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारी यह कहते हुए सुने गए कि सरकार ने उनका न्यूनतम वेतन 20 हजार कर दिया है, लेकिन फैक्ट्री मालिक इजाफा नहीं कर रहे हैं।