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हेल्थ अलर्ट: दो शहरों में ब्रेस्ट कैंसर के केस सबसे ज्यादा, पूर्वोत्तर में लंग कैंसर बढ़ा

 नई दिल्ली हाल ही में एक रिसर्च स्टडी में यह दावा किया गया है कि देश के दक्षिणी राज्यों में कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। JAMA ओपन नेटवर्क में प्रकाशित राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तो देश भर में स्तन कैंसर की राजधानी के रूप में उभरा है, जहाँ प्रति 100,000 महिलाओं में 54 इस असाध्य रोग के दंश से पीड़ित हैं जो देशभर में सर्वोच्च घटना दर है, जबकि बेंगलुरु का स्थान दूसरे नंबर पर आता है, जहां एक लाख महिलाओं में औसतन 46.7 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की मार झेल रही हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के महानगर न केवल ओवरऑल कैंसर संकट का सामना कर रहे हैं, बल्कि वहां विशिष्ट प्रकार का कैंसर महामारी के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में इस पर कंट्रोल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है। स्तन कैंसर के मामले में टॉप पर साउथ के शहर वर्ष 2015 से 2019 के दौरान देशभर में 43 जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों (PBCR) को कवर करने वाले इस स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्तन कैंसर दर वाले शीर्ष छह क्षेत्रों में से चार दक्षिण भारत के हैं। इनमें चेन्नई क्षेत्र में प्रति 100,000 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर 45.4 है, जबकि केरल के अलाप्पुझा और तिरुवनंतपुरम में यह क्रमशः 42.2 और 40.7 है। यह पैटर्न दक्षिण भारत, विशेषकर इसके शहरी केंद्रों को भारत में स्तन कैंसर महामारी का केंद्र बनाता है। 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 238,085 महिलाओं के स्तन कैंसर से प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है। रिसर्च स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर दक्षिण भारतीय शहरों में तेजी से और व्यापक पैमाने पर पसरा है, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में दूसरे किस्म के कैंसर के मामले बढ़े हैं। रिपोर्ट में इन कैंसर मामलों के बढ़ने के पीछे विशिष्ट स्थानीय कारकों की ओर भी इशारा किया गया है। लंग्स कैंसर पर क्या रिपोर्ट? इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्तन कैंसर के मामले में जहां दक्षिण भारतीय शहर आगे हैं, वहीं फेफड़ों के कैंसर के मामले में पूर्वोत्तर के राज्य आगे हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि फेफड़ों के कैंसर के मामलों में मणिपुर की राजधानी आइज़ोल में प्रति 100,000 महिलाओं में 33.7 इससे ग्रसित हैं जबकि इस राज्य का औसत दर 24.8 दर्ज किया गया है। हालांकि, दक्षिण भारतीय शहरों में भी लंग्स कैंसर की स्थिति चिंताजनक दिखाई देती हैं, जहाँ हैदराबाद में प्रति 100,000 पर 6.8 और बेंगलुरु में प्रति 100,000 में 6.2 केस दर्ज किए गए हैं। ओरल कैंसर के मामले में कौन सा शहर आगे? पुरुष फेफड़ों के कैंसर के पैटर्न के मामले में दक्षिण भारत में केरल सबसे आगे है, जहाँ को कई जिलों में यह दर बेहद ऊँची हैं। धरती पर का स्वर्ग कहलाने वाले कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी लंग्स कैंसर के मामले में उच्चतम दर (39.5 प्रति 100,000) पर हैं, जबकि केरल के जिले उसके बाद के स्थान पर हैं। केरल के कन्नूर में यह दर 35.4, मालाबार में 32.5, कासरगोड में 26.6, अलप्पुझा में 25.3 और कोल्लम में प्रति 100,000 पर 24.2 है।ओरल कैंसर के मामलों में भी हैदराबाद, बेंगलुरु सबसे आगे है, जबकि अहमदाबाद इस मामले में सबसे ऊपर है।

सिर्फ 99 रुपये में घर के हर कोने में मिलेगा WiFi, Airtel का झकास ऑफर

नई दिल्ली एयरटेल एक ऐसा कमाल का ऑफर लेकर आई है जिसकी वजह से सिर्फ 99 रुपये में आपके घर का कोना-कोना WiFi नेटवर्क से भर जाएगा। दरअसल अगर आप भी अपने घर में WiFi का इस्तेमाल करते हैं, तो डेड जोन की समस्या से वाखिफ होंगे। घर में कुछ ऐसी जगहें होती हैं, जहां तमाम तिकड़म भिड़ाने के बावजूद WiFi का नेटवर्क नहीं पहुंचता। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ही एयरटेल Coverage+ Wi-Fi Extender सर्विस लेकर आया है। चलिए डिटेल में जानते हैं कि Airtel आखिर 99 रुपये में क्या ऑफर कर रहा है और इससे आपको क्या फायदा होगा। Mesh WiFi टेक्नोलॉजी पर आधारित Airtel, Mesh टेक्नोलॉजी पर आधारित WiFi एक्सटेंडर की सर्विस ऑफर कर रहा है। इससे आपका घर एक स्मार्ट डिजिटल हब बन जाएगा। दरअसल Mesh पर आधारित एक्सटेंडर्स साधारण एक्सटेंडर की तरह काम नहीं करते। यह टेक्नोलॉजी ज्यादा एडवांस होने के साथ-साथ यूजर फ्रेंडली भी है। इससे न सिर्फ आपके इंटरनेट कनेक्शन की क्वालिटी बेहतर हो जाती है बल्कि पूरे घर में स्टेबल इंटरनेट कनेक्शन मिल पाता है। किन लोगों को फायदा? अगर आपका घर बड़ा है और एक सिंगल WiFi राउटर पूरे घर को कवर नहीं कर पाता या फिर अलग-अलग फ्लोर पर रहने की वजह से आपका WiFi कनेक्शन कमजोर पड़ जाता है, तो Airtel की नई सर्विस आपके लिए ही है। Airtel की मेश आधारित नई सर्विस में पॉड्स को इस तरह से घर में रखा जाता है कि कोई भी डेड जोन न बचे। ये पॉड्स मेन राउटर और आपस में लगातार बात करते रहते हैं। इससे एक सेल्फ हीलिंग अडैप्टिव नेटवर्क बन जाता है। यह 4,000 sq ft तक के एरिया मेंमजबूत कवरेज दे सकता है। इसका प्रीमियम वर्जन और भी बड़ी प्रॉपर्टीज के लिए बनाया गया है। कीमत सिर्फ 99 रुपये Airtel इस प्रीमियम सर्विस को अपने ग्राहकों को सिर्फ 99 रुपये में ऑफर कर रहा है। इस सर्विस के लिए आपको 1000 रुपये का रिफंडेबल डिपॉजिट भी जमा कराना होगा। बता दें कि इसके लिए आपके पास पहले से एक एक्टिव Airtel WiFi कनेक्शन होना चाहिए। इसके बाद आप अगर Airtel Thanks ऐप पर जाकर Mesh सर्च करेंगे, तो आपके सामने इस सर्विस से जुड़ा मेन्यु खुल जाएगा। यहां आप रिफंडेबल डिपॉजिट जमा करवा कर 99 रुपये प्रति महीने की दर एक्सटेंडर मेश पॉड ऑर्डर कर सकते हैं। ध्यान रहे कि अगर आपके घर में एक से ज्यादा पॉड की जरूरत पड़ती है, तो आपको उसी के अनुसार डिपॉजिट और मंथली फीस चुकानी होगी।

डेंगू: बचाव और इलाज की हर जानकारी

कोई मच्छर काट ले तो टेंशन में न आएं। हर मच्छर डेंगू वाला नहीं होता। बुखार आ जाए तो भी घबराने की जरूरत नहीं। हर बुखार डेंगू का नहीं होता। डेंगू हो भी जाए तो पैनिक न हों। डेंगू में सिर्फ 1 फीसदी माले ही रिस्की होते हैं। बुखार का मैनेजमेंट घर में करें। डॉक्टर से इलाज कराएं। जब तक डॉक्टर न कहे, अस्पताल में भर्ती न हों। एक्सपर्ट्स से बात करके डेंगू से बचाव और इलाज पर जानकारी दे रहे हैं हम… क्या है बुखार जब हमारे शरीर पर कोई बैक्टिरिया या वायरस हमला करता है तो हमारा शरीर अपने आप ही उसे मारने की कोशिश करता है। इसी मकसद से शरीर जब अपना टेम्प्रेचर बढ़ाता है तो उसे ही बुखार कहा जाता है। जब भी शरीर का टेम्प्रेचर नॉर्मल (98.3) से बढ़ जाए तो वह बुखार माना जाएगा। आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ-पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट से उनका बुखार चेक किया जाता है। कई बार बुखार 104-105 डिग्री फॉरनहाइट तक भी पहुंच जाता है। कहीं यह बुखार डेंगू तो नहीं डेंगू वाले मच्छर के किसी इंसान को काटने के बाद डेंगू का वायरस इंसान के ब्लड में 2-7 दिनों तक रहता है। डेंगू बुखार के लक्षण मच्छर के काटने के 4-7 दिनों में दिखते हैं। कभी-कभी इसमें 14 दिनों का वक्त भी लगता है। बुखार अक्सर तेज होता है और दिन में 4-5 बार आता है। डेंगू बुखार तकरीबन 7-10 दिनों तक बना रहता है और अपने आप ठीक हो जाता है। बुखार से प्रभावित कुल लोगों में से 10 फीसदी को ही हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत होती है। डेंगू के सामान्य लक्षण हैंः बुखार, तेज बदन दर्द, सिर दर्द खास तौर पर आंखों के पीछे, शरीर पर दाने आदि। डेंगू ऐसा भी हो सकता है कि इसके लक्षण न उभरें। ऐसे मरीज का टेस्ट करने पर डेंगू पॉजिटिव आता है लेकिन वह खुद-ब-खुद बिना किसी इलाज के ठीक हो जाता है। दूसरी तरह का डेंगू बीमारी के लक्षणों वाला होता है। यह भी तीन किस्म का होता हैः क्लासिकल डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम। क्लासिकल डेंगू फीवर एक नॉर्मल वायरल फीवर है। इसमें तेज बुखार, बदन दर्द, तेज सिर दर्द, शरीर पर दाने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह डेंगू 5-7 दिन के सामान्य इलाज से ठीक हो जाता है। डेंगू हेमरेजिक फीवर थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें प्लेटलेट और डब्लूबीसी की संख्या कम होने लगती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकत्ते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। डेंगू शॉक सिंड्रोम में मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, उसका बीपी और नब्ज एकदम कम हो जाती है और तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है। …ताकि पैदा न हों मच्छर डेंगू के बचाव के लिए मच्छरों को पैदा होने से रोकना और काटने से रोकना, दोनों जरूरी हैंः कहीं भी खुले में पानी रुकने या जमा न होने दें। साफ पानी भी गंदे पानी जितना ही खतरनाक है। पानी पूरी तरह ढककर रखें। कूलर, बाथरूम, किचन आदि में जहां पानी रुका रहता है में दिन में एक बार मिट्टी का तेल डाल दें। ऐसा करने से उनमें मच्छरों के अंडे डिवेलप नही होंगे। एसीः अगर विंडो एसी के बाहर वाले हिस्से के नीचे पानी टपकने से रोकने के लिए ट्रे लगी हुई है तो उसे रोज खाली करना न भूलें। उसमें भी ब्लीचिंग पाउडर डाल कर रख सकते हैं। कूलरः इसका इस्तेमाल बंद कर दें। अगर नहीं कर सकते तो उसका पानी रोज बदलें और उसमें ब्लीचिंग पाउडर या बोरिक एसिड जरूर डालें। गमलेः ये चाहे घर के भीतर हों या बाहर, इनमें पानी जमा न होने दें। गमलों के नीचे रखी ट्रे भी रोज खाली करना न भूलें। छतः छत पर टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें या उलटा करके रखें। पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें। पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करके साफ करने के बाद पानी भरें। किचन, बाथरूमः सिंकध्वॉशबेसिन में भी पानी जमा न होने दें। हफ्ते में एक बार अच्छी तरह से सफाई करें। पानी स्टोर करने के बाद बर्तन पूरी तरह ढक कर रखें। बेहतर तो यह है कि गीले कपड़े से ऐसे बर्तनों को ढकें ताकि मच्छर को जगह न मिले। नहाने के बाद बाथरुम को वाइपर और पंखे की मदद से सुखा दें। ड्रॉइंगरूमः घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवाई का छिड़काव जरूर करें। डाइनिंग टेबल में सजाने के लिए रखे फूलों या फूलों के बर्तन में पानी रोज बदलें …ताकि न काटें मच्छर आउटडोर में पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनें। खासकर बच्चों के लिए इस बात का जरूर ध्यान रखें। मच्छर गाढ़े रंग की तरफ आकर्षित होते हैं इसलिए हल्के रंग के कपड़े पहनें। तेज महक वाली परफ्यूम लगाने से बचें क्योंकि मच्छर किसी भी तरह की तेज महक की तरफ आकर्षित होते हैं। कमरे में मच्छर भगानेवाले स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करें। मस्किटो रेपलेंट को जलाते समय सावधानी बरतें। इन्हें जलाकर कमरे को 1-2 घंटे के लिए बंद कर दें। सोने से पहले खिड़की-दरवाजे खोल लें। खिड़की, दरवाजे बंद रखेंगे तो सांस की बीमारी हो सकती है। घर की मेन एंट्रेंस के बाहर लगी ट्यूब लाइट के पास मस्किटो रेपलेंट (गुडनाइट, ऑलआउट आदि) जलाकर रखें। इससे गेट खुलने पर अंदर आनेवाले मच्छरों को रोका जा सकेगा। आजकल इसे 24 घंटे जलाकर रखें ताकि मच्छर को जगह न मिले। सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खुले हिस्सों पर विक्स लगाएं। इससे मच्छर पास नहीं आएंगे। एक नीबू को बीच से आधा काट लें और उसमें खूब सारे (6-7) लौंग घुसा दें। इसे कमरे में रखें। मच्छर भाग जाएंगे। मच्छरों को भगाने और मारने के लिए गुग्गुल जलाएं। लैवेंडर ऑयल की 15-20 बूंदें, 3-4 चम्मच वनीला एसेंस और चैथाई कप नीबू रस को मिलाकर एक बोतल में रखें। शरीर के खुले हिस्सों पर लगाने से पहले अच्छी तरह मिलाएं। इसे लगाने से मच्छर दूर … Read more

फेसबुक खाता बार-बार बंद, मार्क जुकरबर्ग ने META पर किया कानूनी हमला

वॉशिंगटन अमेरिका में एक वकील ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा के खिलाफ केस किया है। अब केस करने की वजह भी बड़ी दिलचस्प है, क्योंकि वकील का नाम मार्क जुकरबर्ग है। उनका कहना है कि फेसबुक बार-बार उनका अकाउंट सस्पेंड कर रहा है, जिसके चलते बिजनेस में हजारों डॉलर का नुकसान हुआ है। खबर है कि मामला कोर्ट पहुंचने के बाद कंपनी ने माफी मांगी है। खास बात है कि फेसबुक को फाउंडर का नाम भी मार्क जुकरबर्ग है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंडियाना के रहने वाले वकील जुकरबर्ग का कहना है कि कंपनी ने उनका अकाउंट गलत कारणों से ब्लॉक किया है। वह 38 सालों से कानूनी पेशे में हैं। उनका आरोप हैं कि फेसबुक ने बीते 8 सालों में 5 बार उनका खाता ब्लॉक किया है और हर बार उनपर आरोप लगाए गए कि वह किसी और के होने का नाटक करने के आरोप लगाए हैं। वकील के ये भी आरोप हैं कि बार-बार बैन होने के कारण उनकी प्रैक्टिस पर असर पड़ा है। उन्होंने मैरियन सुपीरियर कोर्ट में केस किया और दावा किया है कि मेटा ने 11 हजार डॉलर की कीमत के विज्ञापन हटाकर अपनी एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है। जुकरबर्ग का कहना है कि उन्होंने फोटो आईडी, क्रेडिट कार्ड और खुद की कई फोटोज समेत कई पहचान दे दी हैं। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मुझसे जो भी कहा मैंने किया। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आपको लगता है कि निलंबन उचित नहीं है तो आप अपील कर सकते हैं, तो मैंने अगले ही दिन अपील की। इसपर मुझे उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला और इस बात को अब 4 महीने हो गए हैं।' वकील ने कहा, 'उन्होंने आखिरी बार जब ऐसा किया था, तब खाता चालू करने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग गया था। तो मुझे नहीं पता कि मैं और उनका ध्यान किस तरह आकर्षित करूं।' आखिरी बार उनका खाता मई में बंद किया गया था और केस करने के बाद ही उसे बहाल किया गया था। कंपनी ने इसे गलती बताया था और कहा था, 'हम जुकरबर्ग के धैर्य की सराहना करते हैं और भविष्य में इस तरह की किसी घटना से बचने के लिए काम कर रहे हैं।' वकील ने कहा है कि इस बैन के चलते उनके बिजनेस पर असर हुआ है।  

ब्लैकहेड्स बनाम व्हाइटहेड्स: क्या है फर्क और कैसे करें इलाज?

 जब भी चेहरे पर ब्रेकआउट्स यानी क‍ि पिंपल्स होते हैं तो आपका पूरा लुक ब‍िगड़ जाता है। अक्सर ये ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की तरह दिखाई देते हैं। दोनों ही काफी जिद्दी होते हैं और आसानी से खत्म नहीं होते हैं। साथ ही ये दर्दनाक भी होते हैं। कई बार इन्हें हटाने की कोशिश करने से आपको ज्‍यादा नुकसान हो सकता है। कई लोग इन्‍हें नोचने या दबाने लगते हैं। ये तरीका ब‍िल्‍कुल भी सही नहीं है। अगर आप भी ब्‍लैकहेड्स और व्‍हाइट हेड्स को लेकर कन्‍फ्यूज हैं तो आपको हमारा ये लेख जरूर पढ़ना चाह‍िए। हम आपको इन दोनों के बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी देने जा रहे हैं। साथ ही ये भी बताएंगे क‍ि क‍िससे ज्‍यादा परेशानी होती है। आइए जानते हैं- व्‍हाइट हेड्स असल में छोटे-छोटे दाने जैसे दिखते हैं। इन्हें क्लोज्‍ड कॉमेडोन भी कहा जाता है। ये तब बनते हैं जब पोर्स पूरी तरह से ऑयल और डेड स्किन सेल्स से बंद हो जाते हैं। ये स्‍क‍िन पर ऊपर से सफेद या हल्के रंग की छोटी गांठ जैसी दिखाई देती है। ये नाक, होंठ के नीचे और माथे पर ज्‍यादा होते हैं। ब्लैक हेड्स क्या हैं? ब्लैक हेड्स भी पोर्स बंद होने की वजह से ही बनते हैं। बस इनमें फर्क ये है कि इनमें पोर्स का मुंह खुला रहता है और अंदर जमी गंदगी और ऑयल हवा लगने से काले रंग के हो जाते हैं। इसी वजह से इन्हें ब्लैक हेड्स कहा जाता है। ये भी ज्‍यादातर नाक और होंठ के नीचे होते हैं। क्‍याें होते हैं ब्‍लैक और व्‍हाइट हेड्स? ब्‍लैक हेड्स और व्‍हाइट हेड्स के पीछे की सबसे बड़ी वजह है स्‍क‍िन का ऑयली होना। जब ये ऑयल डेड स्‍क‍िन सेल्‍स के साथ म‍िलकर पोर्स को ब्‍लॉक कर देते हैं। तब जाकर ब्लैक हेड्स और व्‍हाइट हेड्स बनते हैं। कई बसार बैक्टीरिया का जमा होना और हार्मोनल चेंजेस भी इसकी एक बड़ी वजह बन सकती हैं। कैसे करें कंट्रोल? ब्लैक हेड्स और व्हाइट हेड्स की समस्या से छुटकारा पाने के ल‍िए आप बेकिंग सोडा और नींबू के रस को एक साथ मिक्स करें। इसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं। आपको इससे छुटकारा तुरंत म‍िलेगा। आप दो बार द‍िन में ये काम कर सकते हैं। वहीं दूसरा तरीका ये है क‍ि आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। रोजाना चेहरे पर एलोवेरा लगाने से स्‍क‍िन पर कील मुंहासे की समस्‍या से छुटकारा म‍िलेगा। फर्क भी समझें ब्लैक हेड्स और व्‍हाइट हेड्स दोनों ही नॉन-इंफ्लेमेटरी पिंपल्स हैं यानी इनमें सूजन नहीं होती। फर्क बस इतना है कि व्‍हाइटहेड्स छोटे दाने जैसे लगते हैं और बाद में बड़े पिंपल में बदल सकते हैं। वहीं ब्लैक हेड्स आसानी से पहचान में आ जाते हैं क्योंकि ये काले रंग के होते हैं।  

हार्ट अटैक का कारण बन सकती है B12 की कमी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली इन दिनों हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। बात जब भी हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट में प्लाक की आती है, तो डॉक्टर अक्सर उनकी डाइट, स्ट्रेस लेवल, एक्सरसाइज और नींद की कमी को इसका जिम्मेदार बताते हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ पोषक तत्वों की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि विटामिन-बी12 की कमी वर्षों से ब्लड प्रेशर और हार्ट रिस्क को चुपचाप बढ़ाने में भूमिका निभा रहा है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एकेडमिक मेडिसिन एंड फार्मेसी के मुताबिक शरीर में विटामिन-बी12 की कमी कई तरह आपकी हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं कैसे हार्ट अटैक का कारण बन सकती है शरीर में विटामिन-बी12 की कमी-   स्टडी में हुआ खुलासा एक शोध में इस बारे में एक दिलचस्प संबंध सामने आया है। जब शरीर में विटामिन बी12 का लेवल कम होता है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जो समय के साथ हार्ट वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है। यह संबंध हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम और उपचार के लिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया भर में करोड़ों लोगों में विटामिन बी12 की कमी पाई जाती है। क्यों जरूरी है विटामिन-बी12? विटामिन-B12 हमारे शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है, तो रेड ब्लड सेल्स को बनाने, नर्वस सिस्टम के काम और डीएनए सिंथसिस के लिए जरूरी है। इन सबके अलावा, यह ब्लड में अमीनो एसिड, होमोसिस्टीन के रेगुलेशन का भी काम करता है। जब होमोसिस्टीन का लेवल बढ़ जाता है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और दिल के दौरे का रिस्क फैक्टर बन जाता है। विटामिन B12 और हार्ट अटैक में कनेक्शन जब बी12 का लेवल कम होता है, तो शरीर होमोसिस्टीन को जरूरी कंपाउंड में बदल नहीं कर पाता है। ऐसे में हाई होमोसिस्टीन ब्लड वेसल्स के लिए टॉक्सिक होता है, जिससे वे कठोर और कम लचीली हो जाती हैं। इससे सूजन होती है और आर्टरीज की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस या प्लाक जमने की प्रोसेस तेज हो जाती है। हाई होमोसिस्टीन खून के थक्के बनने की संभावना को भी बढ़ा सकता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनते हैं। इसलिए खतरनाक है विटामिन-बी12 की कमी विटामिन-बी12 यूं तो कई वजहों से सेहत के लिए जरूरी होता है, लेकिन यह हार्ट हेल्थ के लिए भी काफी अहम है। दरअसल, विटामिन B12, होमोसिस्टीन को कंट्रोल में रखने के लिए फोलेट और विटामिन B6 के साथ मिलकर काम करता है। ऐसे में अगर इन तीनों में से किसी भी एक की कमी रिस्क फैक्टर को कई गुना बढ़ा सकती है, जिससे ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ता है और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। ऐसे में करें विटामिन-बी12 की कमी के पहचान     बहुत थकान या कमजोरी महसूस     मतली, उल्टी या दस्त होना     सामान्य से कम भूख लगना     वजन कम होना     मुंह या जीभ में दर्द     त्वचा का पीला पड़ना     हाथों और पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी होना     विजन संबंधी समस्याएं     चीजों को याद रखने में कठिनाई होना     बोलने में कठिनाई होना     उदास महसूस करना     चिड़चिड़ापन महसूस करना  

Galaxy Tab S11: सैमसंग का नया महंगा टैबलेट, ताकतवर बैटरी और फीचर्स के साथ

नई दिल्ली Samsung ने अपने लेटेस्ट टैबलेट Galaxy Tab S11 Ultra और Galaxy Tab S11 को लॉन्च कर दिया है। Galaxy AI और One UI 8 से लैस इन दोनो टैबलेट्स को काम और एंटरटेनमेंट को ध्यान में रख कर बनाया है। बता दें कि Tab S11 Ultra सिर्फ 5.1mm मोटा है और अब तक का सबसे पतला Galaxy Tab है। इसमें 3nm वाला प्रोसेसर, शानदार कैमरा और लंबी बैटरी लाइफ मिलती है। अपने नए S Pen डिजाइन और Samsung DeX के बेहतरीन फीचर्स के साथ यह दोनो टैबलेट्स प्रोडक्टिविटी को नई ऊंचाई पर ले जाते हैं। Galaxy Tab S11 सीरीज की कीमत Galaxy Tab S11 सीरीज के Galaxy Tab S11 Ultra और Galaxy Tab S11 की भारतीय कीमत सामने नहीं आई है। जैसे ही इनकी भारतीय कीमत का खुलासा होगा। उसे यहां अपडेट कर दिया जाएगा। Galaxy Tab S11 सीरीज के स्पेसिफिकेशंस Samsung Galaxy Tab S11 सीरीत के दोनो टैबलेट्स Galaxy Tab S11 और Tab S11 Ultra एंड्रॉयड 15 और One UI 8 के साथ आते हैं। इन दोनों ही टैबलेट्स को 7 साल तक ओएस और सिक्योरिटी अपडेट्स मिलते रहेंगे। इससे यह दोनों ही टैबलेट बहुत लंबे समय तक नए जैसे बने रहेंगे। डिस्प्ले की बात करें तो Galaxy Tab S11 में 11-इंच और Tab S11 Ultra में 14.6-इंच का डायनैमिक AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है। दोनों में 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है जो कि स्मूद स्क्रॉलिंग और बेस्ट गेमिंग एक्सपीरियंस देता है। दोनों ही टैब 1,600 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आते हैं और इन्हें धूप में भी बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकता है। इमनें एंटी रिफ्लेक्टिव कोटिंग का भी ऑप्शन मिलता है, जो रिफ्लेक्शन को कम कर देता है। परफॉर्मेंस की बात करें तो इनमें 3nm वाला MediaTek Dimensity 9400 चिपसेट मिलता है। इसके साथ 12GB रैम और 512GB तक की internal storage मिलती है। इस कॉम्बिनेशन की वजह से यह दोनो ही टैब्स फास्ट प्रोसेसिंग. स्मूद मल्टीटास्किंग और हैवी गेमिंग के लिए परफेक्ट हैं। इसके अलावा दोनो टैब्स में सैमसंग DeX एक्सपीरियंस को भी अपग्रेड किया गया है। इसकी वजह से अब यह मल्टीपल वर्कस्पेस को सपोर्ट करता है और एक्सटर्नल मोनीटर के साथ भी काम करता है। इसकी वजह से आप टैबलेट को लैपटॉप की तरह प्रोफेशनल कामों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। Camera की बात करें तो Galaxy Tab S11 Ultra में दो रियर कैमरे दिए गए हैं। इसमें 13MP का मेन कैमरा और 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलेगा। वहीं Tab S11 में सिर्फ एक 13MP का कैमरा दिया गया है । दोनों मॉडल्स में 12MP का अल्ट्रा-वाइड सेल्फी कैमरा मिलता है जो वीडियो कॉल्स और ग्रुप सेल्फी के लिए बेहतरीन है। डिजाइन और पोर्टेबिलिटी के हिसाब से ये टैबलेट्स शानदार हैं। Galaxy Tab S11 सिर्फ 5.5 मिमी मोटा है और वजन में सिर्फ 469 ग्राम का है। अल्ट्रा मॉडल 5.1 मिमी मोटाई और 692 ग्राम वजन के साथ आता है। इसका इतना पतला और हल्का होना इसे ट्रैवल में साथ रखने के लिए परफेक्ट बनाता है। दोनों ही टैब्स में बैटरी भी शानदार मिलती हैं। Tab S11 में 8,400mAh और अल्ट्रा में में 11,600mAh की बैटरी दी गई है। दोनों ही 45W की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं। AI की ताकत से भरपूर Galaxy Tab S11 सीरीज के दोनो टैबलेट्स में Gemini Live फीचर मिलता है और यह रियल टाइम स्क्रीन शेयरिंग करता है। इस फीचर की मदद से आप अपनी स्क्रीन पर दिख रही चीजों के बारे में Gemini से सवाल पूछ सकते हैं। इसके अलावा ड्रॉइंग असिस्ट आपके स्केच को साफ-सुथरे विजुअल्स में बदल सकता है। इसी तरह से राइटिंग असिस्ट आपके द्वारा लिखे हुए टेक्स्ट को बेहतर बना सकता है। इसके अलावा इसमें सर्कल टू सर्च के जरिए किसी भी टेक्स्ट को तुरंत ट्रांसलेट कर सकते हैं। एक बार फिर बता दें कि ये तमाम फीचर्स आपको Galaxy Tab S11 Ultra और Galaxy Tab S11 दोनों में मिलेंगे।

स्‍मार्टफोन-लैपटॉप खरीदने से पहले जानें: अभी लें या 22 सितंबर तक रुकें?

नई दिल्ली सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती की है। इसके बाद तमाम चीजों के दाम घटने वाले हैं। कंस्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कैटिगरी में एसी और टीवी खरीदने वालों को फायदा होगा, क्‍योंकि दोनों ही प्रोडक्‍ट्स पर जीएसटी को कम किया गया है, लेकिन बहुत से लोग स्‍मार्टफोन्‍स को लेकर भी उम्‍मीद लगाए बैठे थे। स्‍मार्टफोन्‍स के अलावा टैबलेट और लैपटॉप पर लगने वाले जीएसटी में भी कमी की उम्‍मीद की जा रही थी। हालांकि ऐसा नहीं हाे पाया है। सरकार के फैसले से स्‍मार्टफोन्‍स पर कोई असर नहीं हुआ है। इन पर लगने वाला जीएसटी 18 फीसदी ही रहेगा। टैबलेट और लैपटॉप की कीमतें भी पहले की तरह रहेंगी। अगर आपने नए आईफोन, सैमसंग फोन, टैब या लैपटॉप खरीदने की प्‍लानिंग की है, तो आइए जानते हैं कि क्‍या करना चाहिए। स्‍मार्टफोन्‍स खरीदने का सही टाइम सरकार ने स्‍मार्टफोन पर जीएसटी नहीं कम किया है। यह पहले की तरह ही 18 फीसदी बना रहेगा। अगर आप सैमसंग, ऐपल और दूसरे चीनी ब्रैंड्स के स्‍मार्टफोन खरीदने की तैयारी में हैं तो रुकने की जरूरत नहीं है। आप खरीद सकते हैं। इनकी कीमतों में कोई अंतर नहीं आने वाला है। टैबलेट खरीदने पर क्‍या मिलेगा फायदा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बहुत से लोग टैबलेट खरीदते हैं। इन पर लगने वाला जीएसटी शुल्‍क भी पहले की ही तरह रहेगा। ऐसे में अगर आप टैब खरीदने की योजना बना रहे हैं तो रुकने की जरूरत नहीं है। आप सैमसंग, ऐपल समेत किसी भी ब्रैंड का टैब लेंगे तो उसमें जीएसटी की वजह से कीमत कम होने वाली नहीं है। लैपटॉप खरीदने पर कितने का फायदा? लैपटॉप खरीदने की प्‍लानिंग कर रहे लोगों को जीएसटी की वजह से कोई फायदा फ‍िलहाल नहीं मिलने वाला है। उन्‍हें पहले की तरह ही 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। अगर आप आसुस, लेनोवो, डेल या एचपी का कोई भी मॉडल लेने वाले थे, चाहे वह गेमिंग लैपटॉप ही क्‍यों ना हो, आपको पहले जितनी ही रकम चुकानी होगी। छूट पाने का सिर्फ एक तरीका स्‍मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट पर छूट पाने का फ‍िलहाल सिर्फ एक ही तरीका है, आपको ऑनलाइन सेल का वेट करना चाहिए। इसी महीने से फ्लिपकार्ट और एमेजॉन पर फेस्टिव सेल शुरू हो रही है। सेल में तमाम बैंक कार्डों पर डिस्‍काउंट दिया जाता है। कंपनियां प्राइस में भी ड्रॉप करती हैं। इनके अलावा, ईएमआई की सुविधा भी दी जाती है। ऑनलाइन सेल की मदद से आप स्‍मार्टफोन, लैपटॉप और टैलबेट पर डिस्‍काउंट पा सकते हैं। स्‍मार्टफोन, टैब, लैपटॉप क्‍यों नहीं हुए सस्‍ते इसकी कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। पहले इन चीजों पर 18 फीसदी जीएसटी लगता था। इस स्‍लैब के बाद अब सबसे कम स्‍लैब 5 फीसदी का है। अगर स्‍मार्टफोन, टैब और लैपटॉप पर सिर्फ 5 फीसदी जीएसटी देना पड़ता, तो कीमतों में काफी कमी आ सकती थी, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

ढलती उम्र में भी पाएं ग्लोइंग स्किन: जानें आसान होममेड सीरम रेसिपी

अक्सर उम्र बढ़ने, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत डाइट, स्ट्रेस, और पॉल्यूशन के कारण स्किन अपनी टाइटनेस और नेचुरल ग्लो खोने लगती है। जिससे स्किन ढीली, बेजान और झुर्रियों से भरने लगती है। ऐसे में केमिकल युक्त प्रॉडक्ट्स से बेहतर है कि आप घर पर बने नेचुरल सीरम का इस्तेमाल करें। होममेड सीरम में मौजूद नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और हाइड्रेटिंग एजेंट्स स्किन को डीप नरिशमेंट देते हैं, जिससे स्किन को टाइटनेस और ग्लो दोनों मिलते हैं। यहां कुछ बेहतरीन होममेड सीरम की जानकारी दी गई है, जो स्किन की टाइटनेस को बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं। तो आइए जानते हैं इनके बारे में- एलोवेरा और विटामिन ई सीरम एलोवेरा स्किन को हाइड्रेट और विटामिन-ई फ्री रेडिकल्स से बचाता है। इसलिए दो चम्मच एलोवेरा जेल में दो विटामिन ई कैप्सूल मिलाकर रात में सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। ग्रीन टी और एलोवेरा सीरम ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को डिटॉक्स कर और कसाव प्रदान करते हैं। ठंडी ग्रीन टी में एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाकर चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें। रोज वॉटर और ग्लिसरीन सीरम रोज वॉटर स्किन को टोन और ग्लिसरीन नमी बनाए रखने में मदद करता है। दो चम्मच रोज वॉटर में एक चम्मच ग्लिसरीन मिलाकर हल्के हाथों से लगाएं। यह सीरम स्किन को सॉफ्ट, टाइट और ग्लोइंग बनाता है। हयालूरोनिक एसिड और गुलाबजल सीरम हयालूरोनिक एसिड स्किन को हाइड्रेटेड और बनाए रखता है।एक चम्मच हयालूरोनिक एसिड में दो चम्मच गुलाबजल मिलाकर इसे चेहरे पर लगाएं।यह स्किन की टाइटनेस को बनाए रखने में सहायक है। एलोवेरा और शहद सीरम एलोवेरा और शहद में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन को हाइड्रेट और टाइट बनाते हैं।एक चम्मच एलोवेरा में एक चम्मच शहद मिलाकर लगाएं। यह स्किन की लोच बढ़ाकर उसे ग्लोइंग बनाता है। नींबू और शहद सीरम नींबू में मौजूद विटामिन सी और शहद में एंटीबैक्टीरियल गुण स्किन को पोषण और कसाव प्रदान करते हैं।एक चम्मच नींबू के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं। चंदन और गुलाबजल सीरम चंदन में स्किन को ठंडक और कसावट देने वाले गुण होते हैं।एक चम्मच चंदन पाउडर में दो चम्मच गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। नारियल तेल और विटामिन ई सीरम नारियल तेल में विटामिन ई मिलाकर चेहरे पर हल्की मसाज करें। यह सीरम स्किन को पोषण और कसावट दोनों प्रदान करता है।

मेथी का पानी है सेहत का खजाना: शुगर कंट्रोल से लेकर वजन घटाने तक बेहद कारगर

क्या आपकी सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से होती है? अगर हां, तो जरा ठहरिए और यह आर्टिकल पूरा पढ़ लीजिए। जी हां, आपके किचन में एक ऐसा जादुई नुस्खा छिपा है जो आपकी सुबह की सबसे अच्छी शुरुआत बन सकता है और साथ ही आपको कई बीमारियों से भी बचा सकता है। हम बात कर रहे हैं मेथी दाना की। यह छोटा-सा सुनहरा मसाला सिर्फ सब्जियों का स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि रोज सुबह खाली पेट इसका पानी पीने से आप मोटापे और शुगर जैसी बड़ी समस्याओं को जड़ से खत्म कर सकते हैं। आइए, आपको बताते हैं रोज खाली पेट इसे पीने से 5 कमाल के फायदे। क्यों फायदेमंद है मेथी का पानी? मेथी के दानों में भरपूर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसमें मौजूद कुछ खास कंपाउंड्स आपके शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर देते हैं, जिससे ब्लड शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता। इसके अलावा, मेथी में गेलेक्टोमैनन नामक घुलनशील फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है और आपको बार-बार भूख लगने से रोकता है। मेथी का पानी पीने के फायदे     शुगर करे कंट्रोल: मेथी का पानी डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करता है।     वजन घटाने में मददगार: जैसा कि हमने बताया, मेथी का फाइबर भूख को कम करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट बर्निंग की प्रक्रिया में तेजी आती है।     पाचन तंत्र को मजबूत बनाए: यह पानी कब्ज, एसिडिटी और गैस जैसी पेट की समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है। इसलिए, मानकर चलिए कि रोज बासी मुंह इसे पीने से आपका डाइजेशन पहले से काफी बेहतर हो जाएगा।     हार्ट हेल्थ को सुधारे: नियमित रूप से सुबह मेथी का पानी पीने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और हार्ट को हेल्दी रखने में काफी मदद मिल सकती है।     त्वचा और बालों के लिए: मेथी के एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को चमकदार और बालों को मजबूत बनाने में भी मददगार होते हैं। कैसे बनाएं मेथी का पानी? इसे बनाना बेहद आसान है। बस इन दो सरल तरीकों को अपनाना होगा:     पहला तरीका: रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी दाना भिगो दें। सुबह उठकर इस पानी को छानकर खाली पेट पी लें। आप चाहें तो भीगे हुए मेथी दानों को चबाकर भी खा सकते हैं।     दूसरा तरीका: मेथी दानों को पानी में उबालें और जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर ठंडा होने के बाद पिएं।