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बिना पेस्ट कंट्रोल किचन से कॉकरोच कैसे भगाएं

क्या आप भी अपने घर में कॉकरोचों की वजह से परेशान हैं. दरअसल घर और किचन कितना भी साफ क्यों न हो, लेकिन अगर एक भी कॉकरोच दिख जाए, तो पूरी सफाई पर पानी फिर जाता है. ये छोटे-छोटे कॉकरोच न सिर्फ देखने में गंदे लगते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी खतरनाक हैं. अगर आप भी कॉकरोच से परेशान हैं और महंगे पेस्ट कंट्रोल (Pest Control) का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो इन घरेलू उपायों को ट्राई कर सकते हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के जानते हैं आखिर कॉकरोच क्यों हैं खतरनाक और इन्हें कैसे भगाएं. ​कॉकरोच सिर्फ गंदगी नहीं, बीमारियां भी लाते हैं आपको बता दें कि कॉकरोच गंदी नालियों और कचरे से होकर आपके खाने तक पहुंचते हैं. इनसे डायरिया, फूड पॉइजनिंग और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए इन्हें हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. कॉकरोच भगाने के असरदार घरेलू उपाय ​1. बेकिंग सोडा और चीनी कॉकरोच को मीठा बहुत पसंद होता है, जबकि बेकिंग सोडा उनके सिस्टम को खराब कर देता है. इन्हें भगाने के लिए आप इन दोनों चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ​कैसे करें इस्तेमाल बराबर मात्रा में बेकिंग सोडा और पिसी हुई चीनी मिलाएं. अब इसे उन जगहों पर छिड़क दें जहां कॉकरोच ज्यादा आते हैं (जैसे सिंक के नीचे या अलमारी के पीछे). चीनी की महक से कॉकरोच खिंचे चले आएंगे और सोडा खाते ही उनका काम तमाम हो जाएगा. ​​2. तेजपत्ता- तेज पत्ता न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाने बल्कि कॉकरोच को भगाने में भी मददगार है. इसकी तेज गंध कॉकरोच को बिल्कुल पसंद नहीं होती. कैसे करें इस्तेमाल- मुट्ठी भर तेजपत्ते लें और उन्हें हाथों से मसलकर चूरा कर लें. अब इस चूरे को उन जगहों पर डाल दें जहां से कॉकरोच आते हैं. इसकी महक से वे रास्ता बदल लेंगे. ​3. नीम का तेल या पाउडर- ​नीम अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है. कॉकरोच भगाने में भी यह बहुत कारगर है. ​कैसे करें इस्तेमाल- रात को सोने से पहले उन जगहों पर नीम का तेल स्प्रे करें जहां कॉकरोच दिखते हैं. आप नीम के पानी का पोछा भी लगा सकते हैं. 4. लौंग ​लौंग की खुशबू इंसानों को अच्छी लगती है, लेकिन कॉकरोच इससे दूर भागते हैं. ​कैसे करें इस्तेमाल- किचन की दराजों और कोनों में 8-10 लौंग रख दें. यह एक सुरक्षित और खुशबूदार तरीका है. ​कॉकरोच न आएं इसके लिए क्या सावधानियां हैं जरूरी  ​​किचन को सूखा रखें-कॉकरोच पानी की तलाश में ज्यादा आते हैं. रात को सिंक और पाइप के पास पानी जमा न होने दें.  ​कूड़ेदान को ढककर रखें- खुला कूड़ा कॉकरोचों के लिए दावत की तरह है. हमेशा ढक्कन वाला डस्टबिन इस्तेमाल करें. दीवार की ​दरारें भरें- अगर दीवार या टाइल्स के बीच दरारें हैं, तो उन्हें तुरंत ठीक करवाएं. ये कॉकरोचों के छिपने का अड्डा होते हैं.

क्या सभी 1.5 टन के एसी एक बराबर ठंडक देते हैं? जानें वाट्स, स्टार रेटिंग और कमरे के साइज का सही गणित

Air Conditioner Cooling Capacity VS Tonnage क्या आपको भी लगता है कि सभी 1.5 टन के AC एक बराबर ठंडक देते हैं? अगर हां, तो ऐसा नहीं है। असल में AC के कूलिंग करने की क्षमता Ton से नहीं बल्कि कूलिंग कैपेसिटी से पता चलती है। ऐसे में एक जैसे Ton वाले AC भी अलग-अलग कूलिंग कैपेसिटी रख सकते हैं। अगर आप सिर्फ Ton को देखते हुए कम कूलिंग कैपेसिटी वाला AC खरीद लें, तो हो सकता है कि वे आपका कमरा ठंडा ही न कर सके। सिर्फ Ton देखकर नहीं खऱीदना चाहिए AC AC Buying Guide 2026 बाजार में 1.5 Ton के अलग-अलग ब्रैंड के AC एक दूसरे से 5000 रुपये तक कम में मिल जाते हैं। ग्राहक भी ज्यादातर सस्ता मॉडल ही चुनते हैं और समझते हैं कि उन्होंने एक बढ़िया डील क्रैक कर ली। असल में ऐसा नहीं है। दरअसल AC की असली ताकत Ton में नहीं, बल्कि Watts में छिपी कूलिंग कैपेसिटी में होती है। ज्यादातर लोग AC सिर्फ Ton देखकर खरीद लेते हैं। वहीं लोग यह भी मानकर चलते हैं कि 1.5 Ton के सभी AC एक बराबर ठंडक देते हैं। इन तमाम बातों को आप मिथक मान सकते हैं। कभी भी AC खरीदते हुए सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि AC कितने Ton का है, बल्कि AC की कूलिंग कैपेसिटी चेक करनी चाहिए और उसके बाद अपने कमरे के साइज के आधार पर तय करना चाहिए कि आपके लिए कौन सा AC सही है। अगर इस गणित से अभी तक आप अनजान हैं, तो संभव है कि आपका AC कमरे को ठंडा ही न कर पाएं और भारी बिजली बिल भरने के बाद भी आप पसीने में तर-बतर रहें। Ton नहीं AC की कूलिंग कैपेसिटी पर गौर करें AC खरीदते हुए आपको सिर्फ 1 टन या 1.5 टन पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि उसकी कूलिंग कैपेसिटी को चेक करना चाहिए। यह kW यानी कि Kilowatt मे या BTU से पता चलती है। असल में एक 1.5 टन के AC की कूलिंग कैपेसिटी 5.2 से 5.3 kW होनी चाहिए।वहीं कई कंपनियां AC को सस्ता करने के चक्कर में 1.5 Ton के नाम पर सिर्फ 4.7 या 4.8 kW की कैपेसिटी देती हैं। AC की कैपेसिटी कम होने से AC कमरे के साइज के हिसाब से छोटा पड़ जाता है और उसे लगातार काम करना पड़ता है। इससे बिजली की खपत बढ़ती है। कमरे के अनुसार चुनें कूलिंग कैपेसिटी कूलिंग कैपेसिटी का गणित समझने के बाद यह भी जानना जरूरी है कि कितने साइज के कमरे के लिए कितनी कूलिंग कैपेसिटी वाला AC लेना चाहिए। अगर कमरा 100 स्क्वायर फीट का है, तो 2600W-3500W की कूलिंग वाला 1 Ton का AC काफी रहता है। वहीं 100-150 स्क्वायर फीट साइज के कमरे के लिए 4000W – 5200W कूलिंग कैपेसिटी वाला 1.5 Ton का AC ठीक रहता है। इसी तरह 200 स्क्वायर फीट से ज्यादा या टॉप फ्लोर के लिए 5200W – 6500W कूलिंग कैपेसिटी वाला 2 टन तक का AC ठीक रहता है। ऐसे चुनें 3 स्टार या 5 स्टार रेटिंग वाला AC कूलिंग कैपेसिटी और कमरे के साइज का गणित समझने के बाद समझ लें कि कैसे 3 स्टार या 5 स्टार रेटिंग वाला AC चुनना चाहिए? दरअसल अगर AC दिन में 6-8 घंटे चलता है, तो 5 स्टार AC ही लें। वहीं AC इससे कम समय के लिए चलना हो, तो आप 3 स्टार AC भी ले सकते हैं।

बिना डेटा के भी करें मोबाइल का दमदार इस्तेमाल

इसमें कोई शक नहीं है कि आपको स्मार्टफोन और टैबलेट के बेहतर इस्तेमाल के लिए हमेशा इंटनेट की जरूरत पड़ेगी, लेकिन हर समय आपके डिवाइस में इंटरनेट कनेक्टिविटी मिले, ऐसा जरूरी नहीं है। तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं, जिनसे आप बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के अपने डिवाइस का बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं… जीपीएस नेविगेशन आप अक्सर गूगल मैप्स को नेविगेशन के लिए इस्तेमाल करते है, लेकिन दूसरे देश में यात्रा करते वक्त जब आपके पास डेटा सिम नहीं होगा, तब आप क्या करेंगे? और अगर आप प्रीपेड सिम इस्तेमाल करते हैं और उसका बैलेंस खत्म हो गया तो क्या करेंगे? ऐसे में गूगल मैप्स आपको ऑप्शन देता है, जिसमें आप चुनिंदा एरिया के मैप को डाउनलोड कर ऑफलाइन इस्तेमाल कर पाएंगे। इसके लिए आपको गूगल मैप्स में उस एरिया को सर्च करना पड़ेगा, जिसके मैप को आप ऑफलाइन इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसके बाद आपको डाउनलोड का एक ऑप्शन मिलेगा। मैप डाउनलोड होने के बाद आप इसका इस्तेमाल बिना इंटरनेट के कर सकते हैं। इसके अलावा आप एमएपीएस.एमई, करटा जीपीएस और हेयर मैप्स जैसे ऐप्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जो ऑफलाइन सर्विस देते हैं। विडियो देखना काफी लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल मूवी, टीवी शो और दूसरे विडियो देखने के लिए करते हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी होने पर आप ऐप्स पर अपने मुताबिक विडियो स्ट्रीम कर सकते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही ऐसे ऐप्स हैं, जो आपको विडियो डाउनलोड करने का ऑप्शन देते हैं। इस ऑप्शन से आप विडियो को डाउनलोड कर ऑफलाइन भी देख पाएंगे। यू-ट्यूब विडियो को ऑफलाइन सेव करने का ऑप्शन देता है। इसके लिए आपको विडियो के नीचे एक डाउनलोड लिंक मिलेगा, जहां से आप उस विडियो को ऑफलाइन सेव कर बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी देख सकते हैं। हालांकि आप इस विडियो को किसी दूसरे ऐप पर नहीं चला पाएंगे। नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार और एमेजॉन प्राइम कुछ ऐसे ऐप्स हैं, जिन पर आप विडियो डाउनलोड कर ऑफलाइन भी देख सकते हैं। म्यूजिक सुनना प्लेस्टोर पर कुछ ऐसे भी ऐप्स हैं, जो सब्सक्रिप्शन बेस्ड ऑप्शन सर्विस देते हैं। इन ऐप्स पर आप म्यूजिक ट्रैक्स डाउनलोड कर उन्हें ऑफलाइन भी सुन सकते हैं। आप गाना, विंक, सावन और हंगामा जैसे ऐप्स ट्राई कर सकते हैं। ये ऐप्स आईओएस और एंड्रॉयड के लिए बिल्कुल फ्री हैं। ये ऐप्स हिंदी, इंग्लिश और कुछ रीजनल लैंग्वेज में भी ऑपरेट होते हैं। आप जब भी म्यूजिक ट्रैक सेलेक्ट करेंगे तो आपको इसके आगे डाउनलोड बटन का आइकन मिलेगा। यहां से आप गाने डाउनलोड कर सकते हैं। हालांकि विडियो की तरह इन गानों को भी आप ऐप्स के अंदर ही चला पाएंगे। ये फोन के म्यूजिक प्लेयर पर ऑपरेट नहीं होंगी। आपको यह ध्यान रखना होगा कि इन ऐप्स पर गाने को तो फ्री में स्ट्रीम किया जा सकता है, लेकिन उसे डाउनलोड करने के लिए आपको मंथली सब्सक्रिप्शन लेना होगा। मल्टीपेल्यर गेमिंग अगर आप बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के अपने साथ बैठे दोस्तों के साथ मल्टीप्लेयर मोड पर गेम खेलना चाहते हैं तो आप क्या करेंगे? मार्केट में कुछ ऐसे गेम्स हैं, जिन्हें आप ब्लूटूथ कनेक्शन के खेल पाएंगे और इसमें डेटा भी इस्तेमाल नहीं होगा। गेट रियल स्टील: वर्ल्ड रोबोट बॉक्सिंग, वॉरलिंग्स, वर्चुअल टेबल टेनिस जैसे कुछ गेम्स हैं, जिन्हें आप ब्लूटूथ पर मल्टीप्लेयर मोड पर खेल सकते हैं।  

सिर्फ कुछ बूंदें और कमाल! क्यूटिकल ऑयल से नाखून बनें खूबसूरत

जब भी नाखूनों के देखभाल की बात आती है तो हमारा सारा ध्यान नेल पॉलिश, उसके शेप या फिर उसकी मजबूती की तरफ ही होता है। लेकिन इन नाखूनों की रक्षा करने वाली स्किन की पतली परत क्यूटिकल्स को हम भूल जाते हैं। नाखूनों के आस-पास का यह छोटा-सा हिस्सा बैक्टीरिया, ड्राइनेस और इंफेक्शन से सुरक्षा देने में एक कवच की तरह काम करता है। क्यूटिकल ऑयल की मदद से इन क्यूटिकल्स को हाइड्रेट रखने से आपके नाखून मजबूत, चमकदार और सेहतमंद बनते हैं। आइए, जानते हैं क्यूटिकल ऑयल नाखूनों की सेहत के लिए इतना अहम क्यों है और इसे कैसे चुन सकते हैं। क्यों जरूरी है क्यूटिकल ऑयल लगाना नियमित रूप से क्यूटिकल ऑयल लगाने से नाखूनों की नमी बनी रहती है, उसमें लचीलापन आता है और नाखून मजबूत होते हैं। खासकर यदि आप ज्यादा नेल पॉलिश या सेनेटाइजर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे करें इस्तेमाल रूई या फिर छोटे ब्रश की मदद से ऑयल की कुछ बूंदें क्यूटिकल्स पर लगानी है और कुछ मिनटों के लिए अच्छी तरह मसाज करना है। इस तरह चुनें सबसे बेहतर क्यूटिल ऑयल सबसे अच्छा क्यूटिकल ऑयल वो होता है जो स्किन में आसानी से समा जाए। यह पतला होना चाहिए, क्योंकि गाढ़ा ऑयल स्किन के अंदर नहीं जा पाता। वैसे ज्यादातर क्यूटिकल ऑयल में इन अलग-अलग ऑयल्स का कॉम्बिनेशन होता है: तेलों के अलावा क्यूटिकल ऑयल में विटामिन-ई और कई सारे एंटीऑक्सीडेंट्स भी मौजूद होते हैं। इन बातों का रखें ध्यान     नाखूनों की बेहतर सेहत के लिए हफ्ते में एक या दो बार क्यूटिकल ऑयल लगाएं। सोने जाने से पहले इसे लगाने से ज्यादा बेहतर हाइड्रेशन मिलता है।     आप नेल पॉलिश लगे नाखूनों के ऊपर भी क्यूटिकल ऑयल को लगा सकते हैं इससे चमक बढ़ती है और पॉलिश जल्दी नहीं निकलता।     क्यूटिकल ऑयल हर टाइप के नाखूनों के लिए सही होता है।     मैनीक्योर के बाद भी आप क्यूटिल ऑयल लगा सकते हैं इससे नाखून ज्यादा हेल्दी बने रहते हैं।     नियमित इस्तेमाल से आपको अपने नाखूनों में कुछ ही हफ्तों में फर्क नजर आने लगेगा।  

माइग्रेन के मरीज सावधान! इन खाद्य पदार्थों से बढ़ सकता है दर्द

आमतौर पर लोग मानते हैं कि सिरदर्द होने पर चाय या कॉफी का सेवन आराम दिलाता है। लेकिन जो लोग नियमित रूप से कॉफी का सेवन करते हैं, उन्हें यह पता ही नहीं होता कि यह माइग्रेन के लिए एक ट्रिगर के रूप में काम करती है। आधे सिर का दर्द अधिकतर लोगों को परेशान करता है। जब भी व्यक्ति को सिर में तेज दर्द होता है तो इसके लिए वह दवाई लेना ही पसंद करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने अपने खानपान पर ध्यान दिया है। नहीं न, दरअसल, ऐसी बहुत सी चीजें होती है जो माइग्रेन पीडि़त व्यक्ति की समस्या को बढ़ाती हैं। हालांकि व्यक्ति को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में, जिसे एक माइग्रेन पीडि़त व्यक्ति को अवॉयड करना चाहिए… कॉफी आमतौर पर लोग मानते हैं कि सिरदर्द होने पर चाय या कॉफी का सेवन आराम दिलाता है। लेकिन जो लोग नियमित रूप से कॉफी का सेवन करते हैं, उन्हें यह पता ही नहीं होता कि यह माइग्रेन के लिए एक ट्रिगर के रूप में काम करती है। दरअसल, कॉफी में बेहद उच्च मात्रा में पाया जाने वाला कैफीन दिमाग की नसों के काम में रुकावट डालता है। इसकी वजह से दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है और व्यक्ति को तेज सिरदर्द या आधे सिर में तेज दर्द का अहसास होता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने कॉफी इनटेक को धीरे−धीरे कम करने की कोशिश करें। एल्कोहल आपने कई बार नोटिस किया होगा कि एल्कोहल के सेवन के बाद अक्सर लोगों को हैंगओवर हो जाता है और उसके बाद उनके सिर में तेज दर्द होता है। एल्कोहॉलिक पेय पदार्थों के सेवन के तीन घंटे के भीतर ही वह माइग्रेन को ट्रिगर करते हैं। इसके कारण दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन बहुत तेज हो जाता है जिसकी वजह से कई बार डिहाईड्रेशन के कारण सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या बढ़ने लग जाती है। ठंडे खाद्य पदार्थ अक्सर कुछ लोगों को एकदम ठंडी चीजें जैसे आईसक्रीम आदि खाने से भी माइग्रेन का दर्द हो सकता है। खासतौर से, अगर आप एक्सरसाइज के तुरंत बाद या किसी गर्म तापमान के बाद ठंडी चीजें खाते हैं तो यह समस्या काफी बढ़ सकती है। चॉकलेट चॉकलेट खाना तो हर किसी को पसंद होता है, लेकिन कभी−कभी यह समस्या भी पैदा कर देता है, खासतौर से माइग्रेन पीडि़त व्यक्ति के लिए। चॉकलेट में पाया जाने कैफीन और बीटा−फेनीलेथाइलामीन नामक तत्व रक्त वाहिकाओं में खिंचाव पैदा करता है, जिसके कारण व्यक्ति को सिर में दर्द का अहसास होता है। नमक अत्यधिक नमक या बहुत अधिक नमक वाले फूड्स भी माइग्रेन की समस्या को बढ़ाते हैं। इस प्रकार के सॉल्टी व पैकेज्ड फूड में नमक के साथ−साथ कई तरह के हानिकारक प्रिजर्वेटिव्स भी मिलाए जाते हैं, जो माइग्रेन को ट्रिगर करते हैं।  

बालों की लंबाई बढ़ानी है? अंडे का ये नुस्खा अपनाएं

एक बाउल में अंडा व एक टेबलस्पून नारियल तेल लेकर उसे अच्छे से फेंटे। अब इस मिश्रण को बालों पर लगाकर करीबन 20 मिनट के लिए छोड़ दें। अब ठंडे पानी से बालों को वॉश करें व अंत में कंडीशन करें। आप सप्ताह में एक बार इस पैक का प्रयोग करें। प्रोटीन का पावरहाउस माने जाने वाले के हेल्थ बेनिफिट किसी से छिपे नहीं हैं। लेकिन इसके पोषक तत्व स्वास्थ्य के साथ−साथ सौंदर्य का भी ख्याल रखते हैं। आज के लाइफस्टाइल में बालों का झड़ना बेहद आम है। अगर आपके साथ भी यह समस्या होती है तो आप अंडे का इस्तेमाल कीजिए। यह न सिर्फ बालों का झड़ना रोकता है, बल्कि एग मास्क का इस्तेमाल करने से बाल तेजी से बढ़ते हैं। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ एग मास्क के बारे में, जो बालों को जल्दी बढ़ाने में मदद करते हैं… एलोवेरा व अंडा इस हेयर मास्क को बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में दो एग व्हाइट लेकर उसमें दो टेबलस्पून एलोवेरा जेल मिक्स करें। अब इस मिश्रण को बालों पर अच्छी तरह लगाकर करीबन आधे से एक घंटे के लिए छोड़ दें। अब ठंडे पान से बालों को धोएं और अंत में बालों को कंडीशन करें। आप सप्ताह में एक या दो बार इस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐलोवेरा जेल में अमीनो एसिड, ग्लूकोमैनन्स, स्टेरोल्स, लिपिड और विटामिन पाए जाते हैं। यह सभी पोषक आपके बालों व स्कैल्प को पोषण देते हैं, जिसके कारण बाल जल्दी बढ़ने लगते हैं। नारियल तेल व अंडा एक बाउल में अंडा व एक टेबलस्पून नारियल तेल लेकर उसे अच्छे से फेंटे। अब इस मिश्रण को बालों पर लगाकर करीबन 20 मिनट के लिए छोड़ दें। अब ठंडे पानी से बालों को वॉश करें व अंत में कंडीशन करें। आप सप्ताह में एक बार इस पैक का प्रयोग करें। नारियल तेल में पाए जाने वाले विटामिन बालों को नरिश करने के साथ−साथ जड़ों को मजबूती प्रदान करते हैं। जिसके कारण हेयरफॉल से निजात मिलती है और बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। अंडा व केला सबसे पहले एक केला लेकर उसे अच्छे से मैश करें। अब इसमें अंडा व एक चम्मच ऑलिव ऑयल डालकर अच्छी तरह फेंटे। अब इस पैक को बालों व स्कैल्प पर लगाकर 15−20 मिनट के लिए छोड़ दें। अब बालों को ठंडे पानी से धोएं और कंडीशन करें। जिन महिलाओं के बालों में रूखापन है, उनके लिए यह होममेड हेयर पैक एकदम परफेक्ट है। केला न सिर्फ बालों को मॉइश्चराइज करता है, बल्कि इसमें पोटैशियम भी उच्च मात्रा में पाया जाता है जो बालों को स्टेंथ प्रदान करता है।  

अब बिना ऐप के भी सुरक्षित रखें पेन ड्राइव, पासवर्ड लगाने का आसान ट्रिक

नई दिल्ली स्मार्टफोन गुम होने या चोरी होने पर उसका डाटा एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर का इस्तेमाल कर रिमोट एक्सेस से डिलीट कर सकते हैं मगर पेन ड्राइव खो जाए तब क्या करेंगे। ऐसी समस्या से बचने के लिए आप सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर पेन ड्राइव पर पासवर्ड सेट कर देते हैं। मगर क्या आपको पता है कि पेन ड्राइव पर बिना सॉफ्टवेयर के भी पासवर्ड लगाया जा सकता है। वहीं स्मार्टफोन में भी बिना एप के अपने निजी फोल्डर ओर फोटो को छिपा सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में… पेन ड्राइव पर पासवर्ड सेट करना बहुत ही आसान है। पासवर्ड सेट करने के लिए कंप्यूटर या लैपटॉप में दिए गए ‘स्टार्ट’ पर क्लिक करें। इसके बाद  ‘कंप्यूटर पैनल’ में जाएं। यहां दाईं तरफ ऊपर की ओर ‘व्यू बाई’ लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करके ‘लार्ज आइकन’ का चुनाव करें। इसके बाद बिट लाकर ड्राइवइन्क्रिप्सन पर क्लिक करें। नई स्क्रीन खुलने के बाद उसमें कंप्यूटर से जुड़ी हुई ड्राइव दिखाई देंगी। इसमें ‘पेन ड्राइव’ का विकल्प भी होगा जिसके सामने  बिट लाकर लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करें। ऐसा करने से नई विंडो स्क्रीन खुलेगी, जिसमें पेन ड्राइव के लिए पासवर्ड टाइप करना होगा। इसके बाद उस स्क्रीन पर ‘नेक्स्ट’ का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक कर दें और आगे बढ़ें। अब स्क्रीन पर दो विकल्प आएंगे जिसमें से ऊपर की ओर सेव दी पासवर्ड लिखा मिलेगा उसे चुनें। इस प्रक्रिया के बाद यूजर की पेन ड्राइव आसानी से सुरक्षित हो जाएगी। बिना सॉफ्टवेयर के छिपाएं फोन के फोल्डर स्मार्टफोन में जितने एप होते हैं, उनकी संख्या शायद ही किसी यूजर को पता हो। फोन हैंग होने की असली वजह ज्यादा एप होना भी है। अगर आपके फोन में भी ऐसा ही है तो अपने फोन में से एक एप्लीकेशन एप लॉकर या फोल्डर लॉकर  डिलीट कर दें क्योंकि यूजर बिना ‘एप लॉकर’ से भी निजी फोल्डर फोन में छिपा सकते हैं। इसके लिए फोन के एप मेन्यू में जाएं। वहां दिए गए ‘फाइल मैनेजर’ पर क्लिक करके उसके अंदर जाएं। यहां आप एसडी कार्ड और इंटरनल मेमोरी का भी चयन कर सकते हैं, जहां पर अपनी फाइलों को छिपाना चाहते हैं। मेमोरी का चयन करने के बाद फोल्डर बनाएं। फोल्डर बनाने के लिए ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन बिन्दुओं वाले ‘सेटिंग’ के आइकन पर क्लिक करें। इसके बाद एक नई विंडो खुलेगी जिस पर ‘न्यू फोल्डर’ लिखा होगा उस पर क्लिक करते ही नया फोल्डर बन जाएगा और उस पर नाम देने का विकल्प आएगा। ध्यान रहे कि फोल्डर का नाम देने से पहले पहले डॉट (.) अवश्य लगा दें। इसके बाद ‘ओके’ का विकल्प दबाएं। फोल्डर बनाते ही वह छिप जाएगा। फोल्डर को दोबारा देखने के लिए फोल्डर बनाने वाली जगह पर जाएं और वहां ऊपर की तरफ दिए गए ‘सेटिंग’ में जाकर शो हिडन फाइलका चुनाव करें। काम होने के बाद फोल्डर को दोबारा छिपाने के लिए  सेटिंग में दिए गए  हाईडहिडन फाइल पर क्लिक करना होगा।  

आंखों को बनाएं और भी खूबसूरत, जानें आई मेकअप का सही तरीका

आंखें चेहरे का सबसे आकर्षक हिस्सा होती हैं। कहा जाता है कि आंखें बिना बोले भी बहुत कुछ कह जाती हैं, और सही आई मेकअप इसे और भी प्रभावशाली बना सकता है। चाहे आप किसी पार्टी के लिए तैयार हो रही हों या ऑफिस के लिए, आंखों का मेकअप आपकी पूरी पर्सनैलिटी को बदल सकता है। लेकिन, परफेक्ट आई मेकअप करना एक कला है। इसलिए अपनी आंखों को और भी खूबसूरत और आकर्षक बनाने के लिए आई मेकअप करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बेस तैयार करना आई मेकअप शुरू करने से पहले आंखों के ऊपर आई प्राइमर या हल्का सा कंसीलर जरूर लगाएं। यह आंखों की त्वचा के रंग को एक समान करता है और आईशैडो को लंबे समय तक टिकाए रखता है। इससे रंग भी ज्यादा निखर कर आते हैं। सही आईशैडो और ब्लेंडिंग आईशैडो लगाते समय रंग अपनी ड्रेस और स्किन टोन के हिसाब चुनें। हमेशा क्रीज लाइन पर हल्का ब्राउन या न्यूड शेड लगाएं। आई मेकअप में सबसे जरूरी है ब्लेंडिंग। ब्रश की मदद से रंगों को इतनी अच्छी तरह मिलाएं कि कहीं भी कोई हार्श लाइन नजर न आए। आईलाइनर लगाने का सही तरीका लाइनर आपकी आंखों को शेप देता है। अगर आपकी आंखें छोटी हैं, तो बहुत मोटा लाइनर लगाने से बचें, इससे आंखें और छोटी लग सकती हैं। विंग्ड लाइनर आंखों को थोड़ा बड़ा और लिफ्टेड लुक देता है। अपनी ऊपरी लैश लाइन के अंदर काजल या जेल लाइनर लगाएं, इससे पलकें घनी नजर आती हैं। मस्कारा से दें फिनिशिंग टच बिना मस्कारा के आई मेकअप अधूरा है। मस्कारा लगाने से पहले आईलैश कर्लर का इस्तेमाल करें और फिर मस्कारा के दो कोट लगाएं। पहला लंबाई देने के लिए और दूसरा वॉल्यूम के लिए। ध्यान दें कि मस्कारा के क्लम्प्स न बनें। आइब्रो को न भूलें आपकी आइब्रो आपकी आंखों का फ्रेम होती हैं। अच्छी तरह से डिफाइन की हुई आइब्रो पूरे लुक को साफ-सुथरा और प्रोफेशनल बनाती हैं। आइब्रो पेंसिल या पाउडर का इस्तेमाल करें जो आपके बालों के रंग से एक शेड हल्का हो। इनर कॉर्नर को हाईलाइट करें आंखों के भीतरी कोने और आइब्रो बोन पर थोड़ा सा हाइलाइटर या शिमर शेड लगाएं। यह छोटी सी ट्रिक आपकी आंखों को तुरंत ब्राइट बनाती है। इन सावधानियों का जरूर रखें ध्यान     एक्सपायरी डेट- आंखें बहुत सेंसिटिव होती हैं। इसलिए पुराने या एक्सपायर्ड मस्कारा और लाइनर का इस्तेमाल कभी न करें, इससे इन्फेक्शन हो सकता है।     मेकअप रिमूवल- सोने से पहले आई मेकअप को अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर या मिसेलर वॉटर से साफ करना न भूलें और आंखों को जोर से न रगड़ें।  

कहीं ब्यूटी क्रीम न पहुंचा दे किडनी को नुकसान, डिब्बे पर लिखी बातों को न करें नजरअंदाज

इन दिनों सोशल मीडिया पर हर जगह तरह-तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स की भरमार है। हर जगह ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, जो रातों-रात गोरा बनाने या झुर्रियां गायब करने का दावा करते हैं। हालांकि, असल में सच्चाई कुछ और ही है। दरअसल, इन चमकते विज्ञापनों का सच इन प्रोडक्ट्स के डिब्बे के पीछे छोटे अक्षरों में लिखी सामग्री (Ingredients) में छिपी होती है। आइए एलेंटिस हेल्थकेयर, नई दिल्ली में डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन चांदनी जैन गुप्ता (एमबीबीएस और एमडी) से समझते हैं क्यों जरूरी है ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदते समय लेबल पढ़ना जरूरी है और इस दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए:- क्यों जरूरी है लेबल चेक करना? हम अपनी त्वचा पर जो भी लगाते हैं, स्किन उसे धीरे-धीरे अब्जॉर्ब कर लेती है, जिससे यह हमारे शरीर के अंदर तक जाता है। सस्ते या बिना ब्रांड वाले स्किन ब्राइटनिंग प्रोडक्ट्स में मर्करी यानी पारा का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इससे भले ही स्किन का रंग हल्का हो जाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में मर्करी शरीर के लिए जहर के समान है। इतना ही नहीं लंबे समय तक इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल स्किन को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ किडनी डैमेज, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और याददाश्त कमजोर होने जैसी गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकता है। साथ ही इसमें इस्तेमाल होने वाली खुशबू और प्रीजर्वेटिव्स जलन और एलर्जी का कारण बनते हैं। कैसे चुनें सही प्रोडक्ट?     ऑयली स्किन: इस स्किन टाइप के लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड वाले प्रोडक्ट्स अच्छे होते हैं, जिसके इसकी मात्रा 0.5% से 2% के बीच हो। बिना ब्रांड वाले प्रोडक्ट्स में इसकी मात्रा ज्यादा हो सकती है।     ड्राई स्किन: अगर आपकी त्वचा रूखी है, तो सेरामाइड्स वाले मॉइस्चराइजर आपके लिए सबसे अच्छे होते हैं। किसी भी अच्छी क्रीम में इसकी 2% तक की मात्रा स्किन को रिपेयर करने के लिए बेहतरीन मानी जाती है।     सेंसिटिव स्किन: इस तरह के लोगों को हमेशा ऐसे प्रोडक्ट्स लेना चाहिए, जिसपर साफ लिखा हो 'Fragrance-Free' या 'No Fragrance' (बिना खुशबू वाला)। क्या 'हर्बल' या 'नेचुरल' सुरक्षित होने की गारंटी है? अक्सर यह माना जाता है कि 'हर्बल' या 'नेचुरल' प्रोडक्ट्स स्किन के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा हो, यह जरूरी नहीं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो कुछ लोगों को पूरी तरह से प्राकृतिक चीजों से भी गंभीर एलर्जी हो सकती है।  

बड़ी मेडिकल सफलता: अब लक्षणों से पहले ही पकड़ में आएगा अल्जाइमर

अल्जाइमर ऐसा मानसिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने की क्षमता और दैनिक कार्यों को कम कर देती है। यह 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को प्रभावित करता है, जिसमें मस्तिष्क में प्रोटीन के असामान्य जमाव (प्लाक और टेंगल्स) के कारण कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। लक्षण दिखने से पहले चल सकता है बीमारी का पता अल्जाइमर रोग के शुरुआती निदान के लिए रक्त प्लाज्मा में विशिष्ट प्रोटीनों के संरचनात्मक और मात्रात्मक परिवर्तन महत्वपूर्ण संकेत है। इनमें शामिल हैं- पूरक 4ए और फाइब्रिनोजेन वाइ का बढ़ना, जबकि एपोलिपोप्रोटीन ए-1, ए- 2-एचएस-ग्लाइकोप्रोटीन और अफामिन में कमी होना, जो मस्तिष्क में सूजन और न्यूरोडीजेनेरेशन को दर्शाते हैं। ये बदलाव लक्षणों के प्रकट होने से वर्षों पहले न्यूरोनल क्षति और सूजन का संकेत दे सकते हैं। नए प्रकार के ब्लड सैंपल जो अमीनो एसिड के मात्रा के बजाय उनके मोड़ने का विश्लेषण करता है, अरंभिक संकेतों का पता लगाने में सक्षम हो सकता है। 500 से अधिक व्यक्तियों के रक्त प्लाज्मा नमूनों के विश्लेषण से पता चला है कि तीन प्रोटीनों में संरचनात्मक भिन्नताएं, एक जो इम्यून सिग्नलिंग में शामिल है, दूसरा प्रोटीन मोड़ने में और तीसरा जो रक्त प्रवाह में वसा का परिवहन करता है, अल्जाइमर स्थिति से मजबूत रूप से जुड़ी हुई हैं, जैसा कि नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों में बताया गया है। अल्जाइमर का पता लगाने का सटीक तरीका शोधकर्ताओं, जिनमें अमेरिका के द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के विज्ञानी भी शामिल हैं, ने कहा कि प्लाज्मा प्रोटीनों की संरचनात्मक भिन्नताएं संज्ञानात्मक रूप से सामान्य व्यक्तियों और अल्जाइमर तथा हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्तियों के बीच सटीक अंतर करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि यह विधि अंततः प्रारंभिक निदान और उपचार की दे सकती है। अल्जाइमर रोग का वर्तमान में निदान अमाइलाइड पट्टियों और टाऊ टंगल्स को मापकर किया जाता है, जो मस्तिष्क में अमाइलाइड और टाऊ प्रोटीनों के संचय के कारण बनते हैं, रक्त या रीढ़ की तरलता में। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति को प्रोटियोस्टैसिस की व्यापक विफलता शामिल होने की आशंका बढ़ती जा रही है, जो प्रोटीनों को सही तरीके से मोड़ने और क्षतिग्रस्त प्रोटीनों को हटाने के लिए जिम्मेदार प्रणाली है। प्रोटीन संरचना में बदलावों के कारण कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग   यह प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कम प्रभावी होती जाती है, जिसके कारण प्रोटीनों के निर्माण या पुनर्गठन के दौरान गलत तरीके से मोड़ने की संभावना बढ़ जाती है। द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर व वरिष्ठ लेखक जाच येट्स ने कहा कि कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग प्रोटीन संरचना में परिवर्तनों द्वारा संचालित होते हैं। सवाल यह था कि क्या विशिष्ट प्रोटीनों में संरचनात्मक परिवर्तन हैं, जो भविष्यवाणी के मार्कर के रूप में उपयोगी हो सकते हैं? शोधकर्ताओं ने प्रस्तावित किया कि यदि मस्तिष्क में प्रोटियोस्टैसिस बाधित होती है, तो रक्त में प्रवाहित प्रोटीनों में समान संरचनात्मक परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। प्रतिभागियों के प्लाज्मा नमूनों को तीन समूहों में विभाजित किया गया संज्ञानात्मक रूप से वयस्क, हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्ति और अल्जाइमर से निदान किए गए रोगी । तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ संबंध विश्लेषण ने यह निर्धारित किया कि तीन-आयामी अमीनो एसिड श्रृंखला में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों की कितनी मात्रा उजागर या दबी हुई थी, जो उनकी संरचना में परिवर्तनों को दर्शाती है। मशीन लर्निंग, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक रूप है का उपयोग रोग के चरण से जुड़े पैटर्न की पहचान के लिए किया गया। जैसे-जैसे अल्जाइमर रोग बढ़ा, विशिष्ट रक्त प्रोटीनों की संरचना कम "खुली" होती गई, जिसमें तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ सबसे मजबूत संबंध दिखाते हैं।