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फिजूल कॉल से हैं परेशान तो मोबाइल से इस तरह कर सकते है उन्हें ब्लॉक

आजकल टेलीमार्केटिंग का चलन जोरों पर है, हालांकि इसके लिए सिर्फ टेलीकॉम कंपनियां ही जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आप और हम भी जिम्मेदार हैं। आपमे से कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना मोबाइल नंबर दे रखा होगा। साथ ही कई बार हम नौकरी की तलाश में सोशल मीडिया पर आए किसी पोस्ट पर कॉमेंट में अपना मोबाइल नंबर दे देते हैं। इसके बाद टेलीमार्केटिंग कंपनियां आपका मोबाइल नंबर इकट्ठा करती हैं और फिर खेल शुरू होता है। तो अब सवाल यह है कि इससे कैसे बचा जाए? जियो, एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया के किसी भी नंबर पर स्पैम कॉल ब्लॉक करने के दो तरीके हैं जिनमें से पहला एसएमएस का तरीका है और दूसरा कॉलिंग का है। यदि आप अपने मोबाइल नंबर पर आने वाले फालतू के फोन से परेशान हैं तो सबसे पहले अपने फोन के मैसेजिंग ऐप में जाएं। इसके बाद एक मैसेज में स्टार्ट 0 टाइप करके 1909 पर सेंड कर दें। इसके बाद आपके फोन पर किसी प्रकार के फालतू और परेशान करने वाले स्पैम कॉल नहीं आएंगे। फोन करके ब्लॉक कराएं स्पैम कॉल : यदि आप फोन करके अपने नंबर पर आने वाले स्पैम कॉल को ब्लॉक कराना चाहते हैं तो अपने फोन में डायलर ऐप में जाएं और 1909 पर कॉल करें। इसके बाद फोन पर मिलने वाले निर्देशों का पालन करें और डू नॉट डिस्टर्ब (डीएनडी) सेवा को एक्टिव करें।  

स्प्लिट एंड्स से छुटकारा नहीं मिल रहा? शायद ये 7 आदतें हैं वजह

स्पिल्ट एंड्स या दोमुंहे बालों की समस्या किसी को भी हो सकती है। इसका उम्र या जेंडर से कोई लेना-देना नहीं। हालांकि, बालों में मजबूती के बावजूद भी उनके डैमेज होने का खतरा रहता है। यही डैमेज स्पिल्ट एंड्स या दोमुंहे बालों के रूप में जाना जाता है। आइए जानते हैं कि बाल दोमुंहे क्यों हो जाते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है। क्या हैं कारण     ज्यादा हीट स्टाइलिंग करना     तेज ब्रश या कंघी करना     धूप से होने वाला नुकसान     प्रदूषण या धूल-मिट्टी     खराब क्वालिटी के हेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करना     लंबे समय तक बालों को न कटवाना     गीले बालों को रगड़-रगड़ कर तौलिए से पोंछना क्या होता है नुकसान   इन सभी कारणों की वजह से बालों की ग्रोथ रुक सकती है। साथ ही यह कारण उन्हें बेजान बना देता है। इन वजहों से बाल डैमेज, कमजोर और अनहेल्दी हो जाते हैं। ऐसे बालों को दोमुंहे होने से बचा सकते हैं     हर दिन न करें वॉश: अगर आप हर दिन ही अपने बालों को धोते हैं, तो अनजाने में उनमें मौजूद नेचुरल ऑयल को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बालों की नमी कम हो जाती है। इसकी जगह दो से तीन दिनों में अपने बाल धोएं।     हेयरब्रश के टाइप पर दें ध्यान: बालों को दोमुंहे होने से बचाने के लिए इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि आप कौन-सी कंघी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा हेयरब्रश लें, जिसके दांत लचीले और चौड़े हों। बालों को कंघी करने से पहले आखिरी छोर को सुलझाने की कोशिश करें। तेज-तेज कंघी करने से बचें। हीटिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कंघी करने के बाद ही करें और गीले बालों पर हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी ही करें।     शैम्पू को बालों पर न रगड़ें: सिर पर शैम्पू लगाने और रगड़ने के बाद जैसे ही आप बालों को धोएंगे वह आपके बालों के बाकी हिस्सों में भी पहुंच जाएगा। आपको अलग से और शैम्पू लगाने की जरूरत नहीं।     सबसे पहले एंड में लगाएं: बालों के किसी भी हिस्से में कंडीशनर लगाने से पहले आखिरी छोर पर लगाएं।     हीट ड्राई करने से बचें: खासकर बालों के आखिरी छोर पर हीट ड्राई ना करें। ब्लो ड्रायर जैसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल बालों के बीच वाले हिस्से के लिए होता है न कि एंड के लिए।     स्टाइलिंग का बदलें तरीका: अगर आप कर्लिंग आयरन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बालों के एंड पर बहुत ज्यादा हीट ना दें। बालों को रूट से लेकर टिप तक कर्लिंग आयरन में घुमाने की बजाय, आयरन को रूट पर रखें और फिर बालों को धीरे-धीरे इसके आस-पास घुमाते जाएं।     ट्रिम कराते रहें: बालों को सेहतमंद रखने और दोमुंहे होने से बचाने के लिए इन्हें नियमित रूप से ट्रिम करवाते रहें। आप दो से तीन महीने के अंतराल पर ऐसा करा सकते हैं।  

रीढ़ को स्वस्थ और लचीला रखने के लिए 5 योगासन: नियमित अभ्यास से कमर दर्द में सुधार

 नई दिल्ली आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लगातार घंटों तक बैठना, मोबाइल या लैपटॉप पर झुके रहना और फिजिकल एक्टिविटीज की कमी के कारण आजकल कमर दर्द और कमजोर कोर मसल्स की समस्या आम हो गई है। कोर मसल्स शरीर का केंद्र होती हैं, जो बैलेंस, पॉस्चर और मूवमेंट को कंट्रोल करती हैं। अगर ये कमजोर हों तो पीठ दर्द, थकान और लो एनर्जी की शिकायतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में योग के कुछ विशेष आसनों का नियमित अभ्यास न सिर्फ कोर को मजबूत बनाता है, बल्कि पीठ को भी फ्लेक्सिबल और मजबूती देता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ असरदार योगासन, जो आपकी कोर स्ट्रेंथ और बैक हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को आराम देने के साथ कोर को भी रिलैक्स करता है। इस आसन में वज्रासन में बैठकर शरीर को आगे झुकाकर माथा जमीन से टच करते हैं और हाथों को आगे की ओर फैलाते हैं। यह पोज पीठ के निचले हिस्से में जमी टेंशन को कम करता है और मेंटली भी सुकून देता है। बालासन खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो स्ट्रेस या थकान से जूझ रहे हैं। भुजंगासन यह आसन पीठ के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाता है।इससे रीढ़ लचीली होती है और पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं। पेट के बल लेटकर, हाथों को कंधों के नीचे रखकर धीरे-धीरे सिर और छाती को ऊपर उठाएं। इस पोज से पीठ की जकड़न कम होती है और शरीर में एनर्जी का संचार होता है। नौकासन नौकासन को कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए सबसे असरदार योगासनों में गिना जाता है। इस पोज में शरीर एक नाव के आकार में आता है जिससे पेट, पीठ और जांघों पर एक साथ असर होता है। पीठ के बल लेटकर धीरे-धीरे पैरों, सिर और हाथों को ऊपर उठाएं और बैलेंस बनाए। शलभासन शलभासन पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और रीढ़ में फ्लेक्सिबिलिटी लाता है। इसे करते समय पेट के बल लेटकर दोनों पैरों और छाती को ऊपर उठाया जाता है। यह आसन स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से राहत देने में भी कारगर माना जाता है। बिटिलासन इसे अक्सर मार्जरासन (कैट पोज) के साथ किया जाता है। बिटिलासन में घुटनों और हथेलियों के सहारे जमीन पर आकर कमर को नीचे की ओर झुकाया जाता है और सिर को ऊपर उठाया जाता है। यह पोज कोर को हल्का खिंचाव देता है और पीठ की अकड़न को कम करता है। सेतुबंधासन यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने के साथ-साथ कोर मसल्स को भी टोन करता है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर टिकाएं। अब धीरे-धीरे कमर और हिप्स को ऊपर उठाएं, जबकि कंधे जमीन से लगे रहें।  

मल्टी-अकाउंट फीचर जल्द ही WhatsApp में: अलग नंबरों से एक साथ चलेंगे कई अकाउंट

नई दिल्ली ​WhatsApp एक बड़ा अपग्रेड लाने वाला है। हालांकि, यह अपडेट पहले से ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए अपलब्ध है, लेकिन अब लंबे इंतजार के बाद आईफोन चलाने वालों के लिए भी आने वाला है। आईफोन यूजर्स जल्द एक ही फोन में कई व्हाट्सऐप अकाउंट चला पाएंगे। जी हां, यह बिल्कुल इंस्टाग्राम, जीमेल और फेसबुक जैसा होगा। जिस प्रकार आप एक फोन में कई जीमेल, इस्टाग्रांम अकाउंट जोड़ सकते हैं। उसी प्रकार व्हाट्सऐप में भी मल्टीपल अकाउंट बना और जोड़ सकेंगे। फिर अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार कई अकाउंट्स के बीच आसानी से स्विच कर सकेंगे। इस फीचर का काफी लंबे समय से इंतजार हो रहा था। फीचर की डिटेल के लिए नीचे पढ़ें। अभी चल रही टेस्टिंग WAbetainfo की लेटेस्ट रिपोर्ट से पता चला है कि अभी यह फीचर टेस्टिंग फेज में है। इसे बाद में स्टेबल वर्जन के लिए रोल आउट किया जाएगा। व्हाट्सऐप के इस मल्टी-अकाउंट फीचर की मदद से यूजर एक ही फोन में अपने बिजनेस, ऑफिस और पर्सनल व्हाट्सऐप अकाउंट को आसानी से मैनेज कर पाएगा। इस फीचर के बाद उन्हें अलग-अलग फोन में विभिन्न व्हाट्सऐप अकाउंट चलाने की जरूरत नहीं होगी। ये लोग अभी से कर सकते हैं यूज जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अभी इसे टेस्टिंग के लिए रोल आउट किया गया है। अगर आप टेस्टफ्लाइट पर व्हाट्सऐप के बीटा वर्जन का इस्तेमाल करते हैं, तो इस फीचर को एक्सपीरियंस कर सकते हैं। आपके अकाउंट के लिए आया है या नहीं, ऐसे करें पता फीचर आपके अकाउंट के लिए आया है या नहीं, ये जानने के लिए आपको ऐप के सेटिंग्स मेन्यू में जाना होगा। उसके बाद आपको "अकाउंट लिस्ट" नाम से एक सेक्शन दिखेगा। या फिर QR कोड आइकन के बगल में एक खास बटन दिखेगा। अगर यह ऑप्शन है तो इसका मतलब है कि फीचर आपके लिए आ गया है। यह सेक्शन यूजर्स को बिना किसी सेकेंडरी डिवाइस या WhatsApp Business के सीधे ऐप से नया अकाउंट जोड़ने की सुविधा देता है। अभी सिर्फ दो अकाउंट कर सकते हैं इस्तेमाल आपकी जानकारी के लिए बात दें कि फिलहाल, बीटा वर्जन में यूजर्स एक बार में सिर्फ दो व्हाट्सऐप अकाउंट इस्तेमाल कर सकते हैं। टेस्टर्स एक बिल्कुल नया नंबर जोड़ सकते हैं, जिसे उन्होंने पहले कभी व्हाट्सऐप पर इस्तेमाल नहीं किया हो। इसके अलावा, यूजर्स अपने पुराने व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट्स को भी फिर से कनेक्ट कर पाएंगे। जैसे ही अकाउंट लिंक होगा, सभी चैट और प्रेफरेंसेज अपने आप सिंक हो जाएंगे। इस फीचर के जरिए व्हाट्सऐप अन्य इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप से काफी अलग हो जाएगा। सभी अकाउंट्स की सेटिंग होंगी बिल्कुल अलग WhatsApp में जोड़े गए हर अकाउंट के लिए सभी सेटिंग्स और प्रेफरेंस अलग-अलग रहती हैं। हर प्रोफाइल के लिए अलग चैट हिस्ट्री, बैकअप कॉन्फिगरेशन और नोटिफिकेशन टोन सेट कर सकते हैं। यूजर अपने डेटा इस्तेमाल की प्रेफरेंस या स्टोरेज की जरूरतों के आधार पर और मीडिया ऑटो-डाउनलोड ऑप्शन को अलग से मैनेज भी कर सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हर एक अकाउंट के लिए सभी सेटिंग अलग होगी। कब होगा रोल आउट? अभी इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि फीचर को कब रोल आउट किया जाएगा। उम्मीद है कि कंपनी सफल टेस्टिंग के बाद फीचर सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर देगी, लेकिन अभी इसके लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इस फीचर से Arattai जैसे ऐप्स के लिए मुश्किलें खड़ीं हो सकती हैं।

Realme GT 8 Pro भारत में लॉन्च: अनोखी ‘चेंजिंग डिज़ाइन’ टेक्नोलॉजी के साथ पहली बार

नई दिल्ली Realme GT 8 Pro और Realme GT 8 Pro Dream Edition भारतीय बाजार में लॉन्च हो गए हैं। इन फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में Ricoh-ट्यून्ड कैमरा और Qualcomm का लेटेस्ट 3nm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट मिल रहा है। Realme GT 8 Pro भारत में दूसरा ऐसा फोन है, जिसमें यह नया चिपसेट इस्तेमाल हुआ है। फोन को कई रैम और स्टोरेज वेरिएंट में लाया गया है। ड्रीम एडिशन को खास टेक्सचर्ड बैक पैनल और Aston Martin से प्रेरित डिजाइन के साथ लाया गया है। स्मार्टफोन में QHD+ BOE Q10 डिस्प्ले दिया गया है। फोन्स की कीमत और सभी स्पेसिफिकेशन जानने के लिए नीचे पढ़ें। फोन में मिलती है 7000mAh की बैटरी इस फोन में 7,000mAh की बड़ी बैटरी है। यह 120W SuperVOOC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इससे फोन बहुत जल्दी चार्ज हो जाता है। यह फोन IP66, IP68 और IP69 रेटिंग के साथ आता है। रियर कैमरा मॉड्यूल बदलने वाला फोन Realme GT 8 Pro में 6.79 इंच की QHD+ BOE Q10 फ्लेक्सिबल AMOLED स्क्रीन दी गई है। इसका रिफ्रेश रेट 144Hz और पीक ब्राइटनेस 2,000 निट्स है। फोन HDR को सपोर्ट करता है। फोन Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन के साथ आता है। इस फोन का खास फीचर स्वैपेबल रियर कैमरा मॉड्यूल है। इसका मतलब है कि आप तीन अलग-अलग कैमरा आइलैंड स्टाइल फोन में लगा सकते हैं। परफॉरमेंस और हार्डवेयर है गजब फोन्स में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 SoC चिपसेट दिया गया है। हैंडसेट 16GB तक की LPDDR5X RAM और 512GB तक की UFS 4.1 स्टोरेज के साथ आया है। इसमें Adreno 840 GPU लगा है। Realme GT 8 Pro फोन Android 16 पर बेस्ड Realme UI 7.0 पर चलता है फोन में 200MP का कैमरा इस फ्लैगशिप फोन में Ricoh GR-ट्यून्ड ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें 50MP का Sony IMX906 मेन सेंसर है, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस और एक 200MP का टेलीफोटो कैमरा लगा है, जो 120x तक का डिजिटल जूम दे सकता है। फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा मिल रहा है। रियर कैमरे से 4K 60fps तक की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। फोन के अन्य फीचर फोन के अन्य फीचर्स की बात करें तो इसमें ड्यूल-व्यू वीडियो, स्लो-मोशन कैप्चर, टाइम-लैप्स, Google Lens इंटीग्रेशन और पैनोरमिक फोटोग्राफी जैसे फीचर्स मिलते हैं। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, Wi-Fi 6, Bluetooth 6.0, NFC, USB Type-C पोर्ट दिए गए हैं। यह NavIC, BeiDou, Galileo, GLONASS और QZSS जैसे ग्लोबल सैटेलाइट पोजिशनिंग सिस्टम को भी सपोर्ट करता है। ​ Realme GT 8 Pro सीरीज की कीमत Realme GT 8 Pro स्मार्टफोन के 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 72,999 रुपये है। वहीं, 16GB RAM और 512GB स्टोरेज वाले टॉप मॉडल की कीमत 78,999 रुपये है। ड्रीम एडिशन को एक ही वेरिएंट में लाया गया है। इसमें 16GB RAM और 512GB स्टोरेज दिया गया है। 5000 रुपये का डिस्काउंट ये दोनों फोन 25 नवंबर से Flipkart और Realme की आधिकारिक वेबसाइट पर खरीदने के लिए उपलब्ध होंगे। प्रो वेरिएंट Diary White और Urban Blue में आया है। फोन पर 5,000 तक का बैंक डिस्काउंट और छह महीने की EMI की सुविधा मिलेगी। Dream Edition पर लॉन्च डिस्काउंट नहीं है।

हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रण: घर पर बीपी मॉनिटरिंग से मिलते हैं बेहतर नतीजे

क्या अस्पताल में जब कोई आपका ब्लड प्रेशर मापता है तो वह अधिक होता है, लेकिन घर में सामान्य रहता है। ऐसी स्थिति को व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहा जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह होप एशिया नेटवर्क ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें क्लीनिक, घर की माप तथा 24 घंटे की निगरानी, तीनों को समान महत्व दिया गया है। यह गाइडलाइन 22 देशों के संस्थानों के सहयोग से हुए शोध के बाद जारी की गई है, जिसमें लखनऊ का किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) भी शामिल है। इस अध्ययन के मुताबिक भारत में 21.1 प्रतिशत लोगों को 'व्हाइट कोट हाइपरटेंशन' है, वहीं 18.9 प्रतिशत को 'मास्क्ड हाइपरटेंशन (यानी क्लीनिक में सामान्य, घर पर हाइ) की समस्या है, जिससे बीपी के गलत आकलन की आशंका रहती है।  42 प्रतिशत मरीजों में गलत आकलन का खतरा रहता है, इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट की परेशानी की आशंका रहती है। क्यों है घर पर वीपी मापना जरूरी बीपी के सही आकलन के लिए क्लीनिक, घर और 24 घंटे की निगरानी से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इलाज तय किया जाना चाहिए। घर पर सुबह-शाम कम से कम चार दिन इसकी माप जरूरी है। इससे सही दवाओं के चयन में मदद मिलती है। रक्तचाप मापने का सही तरीका मापने से पहले पांच मिनट शांत बैठें। कुर्सी पर सीधे बैठें, पैर जमीन पर हों और उन्हें क्रास न करें। हाथ दिल की ऊंचाई पर रहे। मापते समय न बोलें और न हिलें। आस्तीन चढ़ाकर मापने से गलत परिणाम आते हैं। सटीकता के लिए एक-दो मिनट के अंतर से दो बार मापें। ब्लड प्रेशर की निगरानी के लिए 24 घंटे का ब्लड प्रेशर मापने वाली मशीन काइस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। इस उपाय से दवाइयों का सही प्रयोग और स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। रक्तचाप नियंत्रण के उपाय -दैनिक भोजन में नमक को कम करें। पैक्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। -आहार में ताजे फल, सब्जियां, दालें, जई, बाजरा, ज्वार, राजमा, चना, बादाम, अखरोट और सलाद शामिल करें। -प्रतिदिन 30 मिनट तेज चलने का प्रयास करें, योग और प्राणायाम करें। -धूमपान, तंबाकू और शराब से दूरी रखें। -तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें। रक्तचाप से जुड़ी भ्रांतियां -केवल बुजुर्गो को होता है- यह गलत है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव व मोटापे के कारण युवा भी बड़ी संख्या में प्रभावित हैं। -यह कोई बीमारी नहीं- अत्यधिक कम रक्तचाप भी चक्कर, कमजोरी और बेहोशी का कारण बन सकता है।   -इसकी दवा कभी बंद नहीं होती- यह भ्रांति है। यदि व्यक्ति नमक कम करे, व्यायाम, प्राणायाम करे, वजन कम करे और तनाव नियंत्रित रखे तो रक्तचाप इतना स्थिर हो जाता है कि चिकित्सक धीरे-धीरे दवा कम या पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं।  

Google का नया कमाल: बल्ब की रोशनी से चार्ज होने वाला स्मार्ट रिमोट लॉन्च

नई दिल्ली गूगल ने अपने टीवी के लिए एक कमाल का जादुई रिमोट पेश किया है। जादुई इसलिए क्योंकि इस खास टीवी रिमोट की बैटरी कभी भी खत्म नहीं होगी और ना ही इसे चार्ज पर लगाना पड़ेगा। इतना ही नहीं यह आपके कमरे में मौजूद बल्ब की रौशनी से पावर सोंख कर खुद को चालू रखेगा। चलिए इस जादुई रिमोट के बारे में डिटेल में जानते हैं और पता लगाते हैं कि इसके पीछे कौन सी टेक्नोलॉजी काम कर रही है। गूगल ने पेश किया नया रिमोट गूगल ने अपने टीवी के लिए एक नया रिमोट पेश किया है, जो कि सोलर पावर पर चलेंगे। इस नए सोलर-पावर्ड रिमोट का नाम G32 है।इस रिमोट को चलाने के लिए समय-समय पर इसकी बैटरी नहीं बदलनी पड़ेगी। इसे लेकर स्वीडन की कंपनी Epishine ने बताया कि उनकी टेक्नोलॉजी अब Google TV प्लेटफॉर्म के लिए बनाए गए नए रेफरेंस रिमोट में इस्तेमाल हो रही है। बता दें कि Epishine ऐसे सोलर सेल बनाती है जो कि घर के अंदर मौजूद रौशनी से पावर जेनरेट कर सकते हैं। इस खास रिमोट को गूगल के ऑफिशियल सप्लायर Ohsung Electronics बना रहा है। इस रिमोट में दोनो तरफ सोलर सेल लगे हैं जो रिचार्जेबल बैटरी को पावर देते हैं। कैसे काम करता है गूगल का ‘जादुई’ रिमोट गूगल द्वारा पेश किया गया खास टीवी रिमोट रौशनी से चार्ज होगा और इसके लिए सूरज की रौशनी नहीं बल्कि घर में मौजूद बल्ब की रौशनी भी काफी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रिमोट तब तक चार्ज होता रहेगा, जब तक कि यह रौशनी के संपर्क में रहेगा। अगर इसे किसी बंद अंधेरी जगह पर रख दिया जाएगा, तभी इसकी चार्जिंग बंद होगी। इससे लोगों को अपने टीवी रिमोट की बैटरी को समय-समय पर बदलना नहीं पड़ेगा। यह रिमोट लॉन्ग टर्म में ई-कचरे को भी कम करेगा। प्रैक्टिकल हो रहे सोरल-पावर्ड रिमोट ऐसा नहीं है कि सोलर-पावर्ड रिमोट का आइडिया नया है। Hama ने पिछले साल Exeger की Powerfoyle टेक के साथ ऐसा ही एक यूनिवर्सल रिमोट लॉन्च किया था। इसी तरह सैमसंग का ईको रिमोट भी इसी तरह की टेक्नोलॉजी के साथ लंबे समय से मौजूद है और साबित करता है कि घर के अंदर मौजूद रौशनी से चार्जिंग अच्छे से काम कर सकती है। अब क्योंकि गूगल रेफरेंस हार्डवेयर में यह सुविधा दे रहा है इसलिए अन्य कंपनियां भी इसे आसानाी से अपने स्ट्रीमिंग डिवाइसेज में शामिल कर पाएंगीं। बता दें कि बड़ी संख्या में ब्रैंड गूगल के रेडी-मेड रिमोट डिजाइन को इस्तेमाल करते हैं। इससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होती है। फिलहाल यह रिमोट ना ही किसी डिवाइस के साथ आता है और ना ही इसे अलग से खरीदा जा सकता है। इसे अलग-अलग कंपनियों के लिए रेफरेंस डिजाइन के तौर पर बनाया जाता है। अलग-अलग ब्रैंड अक्सर इनके बटन लेआउट को Netflix, YouTube, Prime Video या लोकल ऐप्स के शॉर्टकट से बदल देते हैं।

e-पासपोर्ट का विस्तार: 80 लाख जारी, पुराने पासपोर्ट पर क्या असर?

भारत ने पासपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह हाई-टेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा दिया है। विदेश मंत्रालय ने पूरे देश में उन्नत सुरक्षा सुविधाओं वाले ई-पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नई तकनीक से लैस यह पासपोर्ट न सिर्फ इमिग्रेशन को तेज़ करेगा, बल्कि पहचान से जुड़े फर्जीवाड़े को लगभग असंभव बना देगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब से जारी होने वाले सभी पासपोर्ट ई-पासपोर्ट होंगे, जबकि पुराने पासपोर्ट उनकी वैधता खत्म होने तक मान्य रहेंगे। यदि आपने 28 मई 2025 के बाद पासपोर्ट बनवाया या रिन्यू कराया है, तो आपको ई-पासपोर्ट ही मिला होगा। ई-पासपोर्ट क्या है और कैसे काम करता है? नया ई-पासपोर्ट बाहर से बिल्कुल पुराने जैसा दिखता है, लेकिन इसके कवर में एक खास इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होगी। इसी चिप में आपकी सभी अहम जानकारी डिजिटल रूप से सुरक्षित रहती है—     नाम     फोटो     फिंगरप्रिंट     बायोमेट्रिक डिटेल     अन्य व्यक्तिगत जानकारी यह डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और इसमें मौजूद डिजिटल सिग्नेचर को बदला नहीं जा सकता। दुनिया के किसी भी एयरपोर्ट पर मशीन इसे एक सेकंड में पढ़ सकती है। फर्जी पासपोर्ट बनाना लगभग असंभव पुराने पासपोर्ट में सारी जानकारी छपी या लिखी होती थी, इसलिए नकली दस्तावेज बनाना आसान होता था। लेकिन ई-पासपोर्ट की चिप में मौजूद डेटा को नकली चिप से कॉपी करना संभव नहीं है। अगर कोई पहचान बदलकर फर्जी पासपोर्ट तैयार करे भी तो इमिग्रेशन मशीन तुरंत पकड़ लेगी। लंबी लाइनों से राहत—तेज़ एंट्री और एग्ज़िट अभी की इमिग्रेशन प्रक्रिया में दस्तावेज़ मिलान और पहचान जांच में समय लगता है। ई-पासपोर्ट आने के बाद—     चेकिंग समय घटेगा     एयरपोर्ट पर लंबी लाइनों में खड़ा रहने का झंझट कम होगा     यात्रियों की एंट्री-एग्ज़िट और भी स्मूथ हो जाएगी पुराने पासपोर्ट वालों को क्या करना होगा? सरकार ने इसे लेकर भ्रम खत्म करते हुए कहा है—     पुराना पासपोर्ट पूरा वैध है, चाहे वह ई-पासपोर्ट न हो।     आपको इसे तुरंत बदलने की जरूरत नहीं है।     इसकी वैधता खत्म होने या रिन्यू कराने पर नया पासपोर्ट ई-पासपोर्ट ही बनेगा। पहले कुछ चुनिंदा शहरों में यह सुविधा थी, लेकिन अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है। अब तक कितने ई-पासपोर्ट जारी हुए? विदेश मंत्रालय के अनुसार—     80 लाख से अधिक ई-पासपोर्ट भारत में जारी किए जा चुके हैं     विदेशों में भारतीय मिशनों ने 60 हजार से ज्यादा ई-पासपोर्ट जारी किए     देश में 511 पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरू हो चुके हैं     बाकी बचे 32 लोकसभा क्षेत्रों में भी जल्द ही केंद्र खुलेंगे नया पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्ज़न 2.0 (PSP 2.0) 2025 से लागू है, जिसमें शामिल हैं—     एआई चैटबॉट     वॉयस-बॉट     डिजिलॉकर इंटीग्रेशन     आधार और पैन वेरिफिकेशन     तेज़ डॉक्यूमेंट चेक यह नया सिस्टम पूरी प्रक्रिया को 100% डिजिटल और बेहद सुरक्षित बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।  

गूगल की रिपोर्ट: 2025 में भारत में सबसे लोकप्रिय Apps की लिस्ट

नई दिल्ली Google Play ने भारत के लिए Best of 2025 की लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें उन ऐप्स और गेम्स को जगह मिली है जिन्होंने इस साल लोगों की डिजिटल लाइफ पर सबसे बड़ा असर डाला. इस लिस्ट से साफ है कि भारतीय यूजर्स अब एआई फीचर्स, लोकल कल्चर और प्रैक्टिकल प्रोडक्टिविटी टूल्स को अधिक पसंद कर रहे हैं. District App: भारत का Best App of 2025 इस साल का सबसे बड़ा विनर है District: Movies Events Dining ऐप. Zomato के इस नए ऐप ने देशभर में, खासकर बड़े शहरों के यूजर के बीच, जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की. District आपकी पसंद, आपके शहर के रुझान और आपकी एक्टिविटी को समझकर बताता है कि आपको कौन सी फिल्म देखनी चाहिए, कहां खाना खाने जाना चाहिए और कौन सा इवेंट अटेंड करना चाहिए. एआई की मदद से यह ऐप एक तरह से आपका पर्सनल एंटरटेनमेंट और फूड असिस्टेंट बन गया है. इसी वजह से Google ने इसे India’s Best App of 2025 का खिताब दिया. CookieRun India: Best Game of 2025 गेमिंग कैटेगरी में पहला स्थान मिला है CookieRun India: Running Game को. यह गेम भारतीय खिलाड़ियों के साथ इसलिए जुड़ पाया क्योंकि इसमें भारतीय थीम्स, भारतीय कैरेक्टर, भारतीय कपड़े और भारतीय म्यूजिक का तड़का लगाया गया है. गेम इतना आसान और मजेदार है कि हर उम्र के लोग इसे पसंद कर रहे हैं. इसी वजह से इसे Best Game of 2025 के साथ-साथ Best Pick Up and Play अवॉर्ड भी मिला है. एआई वाले ऐप्स की बाढ़ 2025 की लिस्ट को देखकर साफ है कि भारत में एआई ऐप्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. InVideo AI, जिसे Best for Personal Growth का अवॉर्ड मिला, लोगों को सिर्फ टेक्स्ट लिखकर वीडियो बनाने की सुविधा देता है. Toonsutra, जिसे Best Hidden Gem चुना गया, भारतीय कॉमिक्स को एआई की मदद से सिनेमेटिक और मॉडर्न डिजिटल एक्सपीरियंस में बदल देता है. यहें तक कि Goodnotes और Luminar: Photo Editor जैसे कामकाजी ऐप्स भी एआई का इस्तेमाल कर लोगों के रोजमर्रा के काम आसान बना रहे हैं — जैसे नोट लेना या फोटो एडिट करना. हेल्थ, वेलनेस और रोजमर्रा की जरूरतें लोग अब डिजिटल वेलनेस और समय प्रबंधन पर भी खास ध्यान देने लगे हैं. Daily Planner: To Do List Task, जिसे Best Everyday Essential चुना गया, टास्क मैनेजमेंट, जर्नलिंग और मूड ट्रैकिंग को एक ही ऐप में जोड़ता है. SleepisolBio, जिसे Best for Watches मिला, लोगों की नींद सुधारने और तनाव कम करने में मदद करता है. नए Trending Apps भी सुर्खियों में Google ने इस बार पहली बार Top Trending कैटेगरी भी शामिल की है. इसमें Instamart, Seekho, और Adobe Firefly जैसे ऐप्स को जगह मिली, जो तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और जिनके यूजर एंगेजमेंट में बड़ा उछाल देखा गया है. भारत का गेमिंग इकोसिस्टम और भी मजबूत गेमिंग हमेशा से भारतीय यूजर्स का पसंदीदा सेगमेंट रहा है. CookieRun India के साथ-साथ Free Fire Max, जिसे Best Ongoing Game का अवॉर्ड मिला, लगातार अपनी पकड़ बनाए हुए है. भारतीय डेवलपर्स द्वारा बनाए गए Kamala – Horror Exorcism Escape और Real Cricket Swipe जैसे गेम भी इस साल खूब पसंद किए गए. भारत की डेवलपर कम्युनिटी की ताकत Google का कहना है कि Android और Play Store इकोसिस्टम भारत में 3.5 मिलियन से ज्यादा नौकरियां सपोर्ट करता है और ₹4 ट्रिलियन से ज्यादा का आर्थिक योगदान देता है. 2025 की यह लिस्ट बताती है कि भारत की ऐप और गेम डेवलपर कम्युनिटी अब दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे इनोवेटिव टीमों में से एक बन चुकी है. 

कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़े: डॉक्टर से समझें वजह और रोकथाम

इस सदी की शुरुआत से अब तक बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या दोगुणी हो चुकी है। कई बच्चों में इसका स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता, जिससे यह परेशानी धीरे-धीरे विकराल रूप ले लेती है। युवा अवस्था में प्रवेश से पहले ही वे हार्ट, किडनी और स्ट्रोक जैसी बेहद गंभीर बीमारियों के संभावित शिकार हो जाते हैं। खराब आहार, निष्क्रियता भरी दिनचर्या और बढ़ता मोटापा बच्चों को उच्च रक्तचाप की मुसीबत में धकेल रहे हैं। लांसेट की हालिया रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में 11.4 करोड़ बच्चे हाइपरटेंशन की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिस तेजी से बच्चों में हाइपरटेंशन बढ़ा है, उससे अभिभावकों और स्वास्थ्य देखभाल तंत्र को तुरंत चेतने की जरूरत है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआत में कुछ बच्चों में रक्तचाप का स्तर तेजी से बढ़ता है, लगभग 14 साल की उम्र में, खासकर लड़कों में, यह चरम स्थिति में होता है। इन दौरान नियमित जांच कराने की जरूरत होती है। इस परेशानी के पीछे मुख्य कारण बचपन में बढ़ता मोटापा है, जबकि थोड़े से प्रयास से इसे रोका जा सकता है। रिपोर्ट की मानें तो मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के साथ-साथ इस उम्र में अब अस्थमा और मानसिक सेहत से जुड़ी समस्याओं का भी जोखिम बढ़ता जा रहा है। हमें समझना होगा कि स्वस्थ बच्चे ही एक स्वस्थ युवा के रूप में विकसित होंगे, ऐसे में आहार, व्यायाम जैसी आदतों का विकास बचपन में ही करने की जरूरत है। जिन परिवारों में हाइपरटेंशन की हिस्ट्री रही है, उन्हें बच्चों की सेहत को लेकर विशेष रूप से गंभीर रहने की जरूरत है। बच्चे की हो बीपी व बीएमआइ की जांच साल 2000 तक उच्च रक्तचाप सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन बीते दो दशकों में बच्चे – किशोर भी इसकी गिरफ्त में आए हैं। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चे युवावस्था में हाइ ब्लड प्रेशर के कारण हृदय और किडनी रोग की चपेट में आ जाएंगे। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मोटापा और जेनेटिक प्रमुख हैं। मोटापे से ग्रस्त लगभग हर पांचवां बच्चा हाई बीपी से पीड़ित है। इनमें से 50 प्रतिशत को पता ही नहीं होता कि उन्हें बीपी की समस्या है। शहरों में रहने वाले बच्चों में 20 प्रतिशत मोटापे की गिरफ्त में हैं। क्या हैं वजहें देर तक मोबाइल टीवी देखना पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव, नींद पूरी न करना, फल एवं सब्जियां कम खाना, मीठे पदार्थ, खेलकूद से दूरी और फास्ट- फूड का अधिक सेवन बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर की समस्या बढ़ाता है। क्रोनिक किडनी डिजीज, रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी, पालिसिस्टिक किडनी डिजीज, हाइपरथायराइडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम और जन्मजात एड्रेनल हाइपरप्लासिया भी बच्चों में उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ाते हैं । हार्ट डिजीज जैसे को आर्कटेशन आफ आर्टा के साथ स्टेरायड, गर्भनिरोधक गोलियां, नशीली दवाएं और स्लीप एप्निया से भी बच्चे बीपी रोग की चपेट में आ रहे हैं।     मोटापा और अधिक वजन     खराब दिनचर्या, खराब आहार, नमक का अधिक सेवन     किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन और जांच का अभाव कैसे करें बचाव प्रतिवर्ष बच्चों की बीपी और बीएमआई की जांच आवश्यक है, उन्हें संतुलित व पौष्टिक आहार दें, बच्चे को किसी एक आउटडोर एक्टिविटी से जोड़ें। तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग और मेडिटेशन कराएं। जंक फूड और मीठे पदार्थों से उन्हें दूर रखें। पढ़ाई के लिए अतिरिक्त दबाव न डालें, स्क्रीन टाइम अधिकतम एक घंटा हो, भोजन में नमक कम करें, ताजे फल-सब्जियां खिलाएं, आठ घंटे नींद की आदत डालें। बच्चों को अनावश्यक स्टेरायड न दें। ध्यान रखें कि यदि आपका बच्चा मोटापे की चपेट में है तो युवावस्था में उसे हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज, दिल का दौरा, स्ट्रोक, खराब कोलेस्ट्राल, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया, किडनी रोग और कुछ तरह के कैंसर का खतरा तीन-चार गुणा तक अधिक रहता है।