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iPhone Air पर भारी छूट, 32,410 रुपये सस्ते में मिल रहा सबसे पतला ऐपल फोन, जानें खरीदने का सही तरीका

नई दिल्ली  Apple ने इस साल अपना सबसे पतला फोन iPhone Air पेश किया था। अब इसकी कीमत कम हो गई है। जी हां, फोन सस्ते में मिल रहा है। VijaySales पर आईफोन एयर कम कीमत में बिक रहा है। यहां आईफोन एयर की कीमत 24910 रुपय कम है। साथ ही, 7500 रुपये का डिस्काउंट भी मिल रहा है। इस तरह फोन कुल मिलाकर 32,410 रुपये कम में खरीदा जा सकता है। आईफोन एयर ना सिर्फ ऐपल का सबसे पतला फोन है, बल्कि इसमें कई अच्छे फीचर्स दिए गए हैं, जिसमें बेहर कैमरा और बैटरी शामिल है। आइये, डिटेल में जानते हैं। 32,410 रुपये कम में मिल रहा आईफोन एयर आईफोन एयर की कीमत भारत में काफी कम हो गई है। अब यह लेटेस्ट आईफोन खरीदने का एक अच्छा ऑफर है। विजय सेल्स इस फोन पर भारी छूट दे रहा है। बता दें कि ऐपल की आधिकारिक वेबसाइट पर फोन की कीमत 1,19,900 रुपये से शुरू है। वहीं, VijaySales पर फोन अभी 94,990 रुपये की शुरुआती कीमत में मिल रहा है। इसका मतलब है कि फोन की कीमत 24,910 रुपये कम हो गई है। इतना ही नहीं, फोन पर 7,500 रुपये का डिस्काउंट भी दिया जा रहा है। हालांकि, यह ऑफर American Express बैंक के कार्ड पर पेमेंट करने पर मिलेगा। इस तरह फोन की कीमत कुल मिलाकर 32,410 रुपये कम हो जाएगी और आप आईफोन ऐयर को 87,490 रुपये में खरीद सकते हैं।बता दें कि ICICI बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड, Axis बैंक के क्रेडिट कार्ड या HDFC बैंक के क्रेडिट कार्ड से EMI पर खरीदते हैं तो 4,000 रुपये की छूट मिलेगी। अगर आप इस डील का फायदा उठाना चाहते हैं, तो जल्दी करें क्योंकि ये ऑफर ज्यादा समय के लिए नहीं होते। iPhone 17 Pro वाले चिपसेट के साथ आता है फोन फीचर्स की बात करें तो आईफोन एयर में 6.5 इंच का सुपर रेटिना XDR OLED डिस्प्ले दिया गया है। इसमें प्रोमोशन टेक्नोलॉजी और 120Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है। फोन का डिजाइन भी काफी अच्छा है। इसमें टाइटेनियम फ्रेम और सिरेमिक शील्ड 2 फ्रंट कवर लगा है, जिसे कंपनी सबसे मजबूत बताती है। इस फोन में ऐपल का नया A19 प्रो चिप लगा है, जो आईफोन 17 प्रो मॉडल में भी है। इसके साथ C1x मॉडेम भी है, जो कंपनी के मुताबिक पिछले मॉडेम से दोगुना तेज है। कैमरे की बात करें तो इसमें 48MP का फ्यूजन कैमरा दिया गया है। साथ में 12MP का टेलीफोटो लेंस भी है। सेल्फी के लिए 18MP का फ्रंट कैमरा है, जिसमें 'सेंटर स्टेज' फीचर है। इससे वीडियो कॉल के दौरान आप फ्रेम में ही रहते हैं, भले ही आप थोड़ा हिलें-डुलें। अच्छी बात यह है कि आप फ्रंट और रियर कैमरे से एक साथ वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। कनेक्टिविटी के लिए इसमें वाई-फाई 7, ब्लूटूथ 6 और थ्रेड जैसी नई टेक्नोलॉजी हैं। यह सब ऐपल के नए N1 चिप से चलता है। बैटरी की बात करें तो यह एक बार चार्ज करने पर 40 घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकती है। दुनिया भर में यह फोन ई-सिम (e-SIM) के साथ ही आता है, ताकि अंदर ज्यादा जगह बन सके। इसमें एक 'एक्शन बटन' भी है, जिससे आप किसी भी ऐप या फंक्शन को जल्दी से खोल सकते हैं। 'कैमरा कंट्रोल' फीचर से आप तुरंत कैमरा खोल सकते हैं या विजुअल इंटेलिजेंस फीचर्स को एक्टिवेट कर सकते हैं।  

गहरी नींद में सोते समय मुंह से लार बहने पर रहें अलर्ट?

अकसर दिन भर की थकान के बाद बिस्तर में पहुंचते ही लोगों को गहरी नींद आ जाती है। लेकिन कई बार गहरी नींद से जागने पर सुबह तकिए पर लगे लार के निशान व्यक्ति को असहज और शर्मिंदगी महसूस करवा सकते हैं। हो सकता है ऐसा कुछ कई बार खुद आपके साथ भी हुआ हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गहरी नींद में बहने वाली यह लार महज एक इत्तेफाक है या आपके शरीर की तरफ से दिया जाने वाला कोई खास इशारा? तो बता दें, डॉक्टरी भाषा में इस समस्या को 'सियलोरिया' (Sialorrhea) कहा जाता है। वैसे तो सोते समय लार निकलना इस बात का संकेत हो सकता है कि आप बहुत गहरी और सुकून भरी नींद में थे, लेकिन कई बार यह गलत पॉस्चर, एसिडिटी या साइनस जैसी समस्याओं की दस्तक भी हो सकती है। आइए समझते हैं कि आखिर रात के सन्नाटे में हमारा शरीर इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों देता है और इसके पीछे की असली वजह क्या है। क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट शारदाकेयर हेल्थसिटी में हेड ऑफ न्यूरोसाइंस डॉ. अतामप्रीत सिंह कहते हैं कि नींद में कभी-कभी लार टपकना आम बात है। यह अक्सर चेहरे की मांसपेशियों के ढीले होने, मुंह से सांस लेने या गलत सोने की मुद्रा के कारण होता है और आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे, तो यह नाक के लगातार बंद रहने, एसिड रिफ्लक्स, दांतों या मसूड़ों की समस्या, या नींद में निगलने की क्षमता कम होने का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में यह नसों या मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों से भी संबंधित हो सकता है। ऐसे में रोगी को चाहिए कि नाक को साफ रखें, सही तरीके से सोना और किसी भी छुपी हुई बीमारी का इलाज करने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। अगर लार टपकने की समस्या ज्यादा या लगातार बनी रहे, तो कारण जानने और आगे की परेशानियों से बचने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।                                 नींद में लार टपकने के पीछे छिपे 5 बडे़ कारण ​मस्तिष्क संबंधी विकार कई बार कुछ मस्तिष्क संबंधी विकारों के चलते मांसपेशियों पर कंट्रोल रखना मुश्किल हो जाता है, जिसकी वजह से व्यक्ति के मुंह से लार टपकने लगती है। इन विकारों में स्ट्रोक,सेरेब्रल पाल्सी, पार्किंसंस रोग, एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS),मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस), डाउन सिंड्रोम और ऑटिज्म शामिल हैं। इंफेक्शन कई बार किसी संक्रमण की वजह से भी मुंह से लार टपकने लगती है। जिसमें खराब गला या मोनोन्यूक्लिओसिस, साइनस इंफेक्शन, तोंसिल्लितिस, पेरिटोनसिलर फोड़ा जैसे संक्रमण शामिल होते हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें टॉन्सिलिटिस आपकी गर्दन और छाती तक फैल जाता है, जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति के मुंह से लार बहने लगती है। एलर्जी यदि आपको किसी चीज से एलर्जी है तो भी सोते वक्त आपके मुंह से लार बह सकती है। दरअसल, एलर्जी होने पर लार ग्रंथि ज्यादा मात्रा में लार बनाकर शरीर से विषाक्त पदार्थों बाहर निकालती है। बंद नाक कई बार जुकाम, एलर्जी या साइनस इंफेक्शन की वजह से व्यक्ति की नाक बंद हो जाती है। नाक बंद होने से भी सोते समय मुंह से लार आने की परेशानी हो सकती है। इस स्थिति में नाक को साफ रखें और स्टीम के साथ गर्म पानी से भाप लें। एसिडिटी जिन लोगों को एसिडिटी की समस्या रहती है उनके मुंह से भी सोते समय लार बह सकती है। कैसे रोकें लार बहना ? -पीठ के बल सोने की आदत डालें। -बंद नाक का इलाज करवाएं। इसके लिए सोने से पहले स्टीम ले सकते हैं। -पानी ज्यादा पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। -दवाओं की वजह से लार आने पर अपने डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर को दिखाना कब है जरूरी? अगर लार बहुत ज्यादा बनने के साथ सांस लेने में दिक्कत, निगलने में परेशानी या नींद पूरी न होने की समस्या परेशान करती है तो, डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या आप शकरकंद को सिर्फ सब्जी समझते हैं? इसके 6 हैरान कर देने वाले फायदे जानकर चौंक जाएंगे

जब बात हेल्दी और टेस्टी खाने की आती है, तो शकरकंद हर डाइट में स्टार बन जाता है, जिसे स्वीट पोटेटो के नाम से भी जाना जाता है। यह सिर्फ एक सिंपल सब्जी नहीं, बल्कि कई हेल्थ प्रॉब्लम का हल भी है। अगर आप सोच रहे हैं कि कौन इसे रोज खाए?, तो जान लीजिए कि शकरकंद कुछ लोगों के लिए सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए वरदान भी है। दिल के मरीज शकरकंद में पोटैशियम और एंटी इन्फ्लेमेटरी भरपूर होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखता है और दिल को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद हाई फाइबर दिल की बीमारी के खतरों को कम करने में भी मदद करता है, खासकर जब इसे अन्य हाई फाइबर वाले डाइट के साथ मिलाकर खाया जाए। गट हेल्थ वाले के लिए अच्छा शकरकंद में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इसके अलावा, शकरकंद आपके आंतों के माइक्रोबायोम में हेल्दी मात्रा में बैक्टीरिया बनाए रखने में मदद करता है, जिससे गट हेल्थ बेहतर होती है और कोलोन कैंसर का खतरा कम होता है। डायबिटीज के मरीज शकरकंद में पाए जाने वाले एंथोसायनिन के कारण इसका डार्क पर्पल कलर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और हेल्दी गट माइक्रोबायोम को बनाए रखने के लिए अच्छा ऑप्शन है। डायबिटीज के मरीज शकरकंद को आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। कमजोर विजन वाले लोग शकरकंद में मौजूद बीटा-कैरोटीन के कारण इसका कलर ब्राइट ऑरेंज होता है। जब आप इस एंटीऑक्सीडेंट को खाते हैं, तो यह विटामिन ए में बदल जाता है, जो आपकी आंखों की रोशनी को प्रोटेक्ट करने में मदद करता है। आप भी अपनी डेली डाइट में शकरकंद को जरूर शामिल करें। ब्रेन फंक्शन में सुधार अगर आप डेली डाइट में शकरकंद को शामिल करते हैं, तो इससे ब्रेन फंक्शन में सुधार हो सकता है। इसमें मौजूद एंथोसायनिन सूजन को कम करता है और मेमोरी को बेहतर बनाने का काम करता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोग शकरकंद बीटा कैरोटीन के सबसे बेहतरीन स्रोतों में से एक है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को इसे जरूर खाना चाहिए। यह आंतों की हेल्थ के लिए अच्छा होता है और शरीर को वायरल इन्फेक्शन से बचने में भी मदद करता है।   

फूलगोभी खरीदते समय न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह मानकर ब्लोटिंग से पाएं राहत

फूलगोभी का स्वाद काफी सारे लोगों को पसंद आता है। अब जब ठंड में सब्जी की मार्केट में ढेर सारी गोभियां मिलती है तो इसके पराठे, सब्जी से लेकर पकौड़ी और अचार तक बनाकर खाना लोग पसंद करते हैं। लेकिन एक बार फूलगोभी खा ली तो काफी सारे लोग ब्लोटिंग और डाइजेशन इशू से जूझने लगते हैं। जिससे बचने के लिए या तो फूलगोभी को खाते ही नहीं या फिर ब्लोटिंग दूर करने की दवा लेना शुरू कर देते हैं। दोनों ही सिचुएशन से बचना है तो न्यूट्रिशनिस्ट की छोटी सी सलाह को मान लें। जब भी मार्केट फूलगोभी खरीदने जाएं तो बस इस छोटे से अंतर को ध्यान में रखकर ही गोभी खरीदें। इससे आप ब्लोटिंग और इनडाइजेशन से बच जाएंगे। न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया फूलगोभी खरीदने का तरीका न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह ने फूलगोभी खरीदने के लिए छोटी सी टिप्स को शेयर किया है। जिसे अपनाकर आप फ्रेश गोभी खरीद पाएंगे। फ्रेश फूलगोभी पहचानने का तरीका फूलगोभी ताजी है या बासी पहचानने का तरीका बिल्कुल आसान है। ताजी फूलगोभी बिल्कुल सफेद, सॉफ्ट टाइट होगी। वहीं बासी फूलगोभी का रंग हल्का सा पीला पड़ चुका होता है और इसके फूल कई बार बिखरे हुए से दिखते हैं। वहीं फूलगोभी बिल्कुल टाइट नहीं लगती है। पीली फूलगोभी ना खरीदें मार्केट में फूलगोभी लेने जाएं तो कई बार दो तरह की फूलगोभी रखी दिख जाती है। एक बिल्कुल सफेद नजर आती है और दूसरी थोड़ी सी पीली या हल्के क्रीम कलर की दिखती है। अब गोभी खरीदते समय ज्यादातर लोग ताजा या बासी का अंदाजा कीड़ों से लगाते हैं। लेकिन फूलगोभी ताजी या बासी इसका पता गोभी के कलर से चलता है। अगर पीले रंग की गोभी होगी तो इसका मतलब है कि वो बासी है। इसमे मॉइश्चर और जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कमी होगी। हल्के पीले रंग की दिखने वाली गोभी ज्यादा लंबे टाइम से स्टोर की हुई होती है। इन फूलगोभियों में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेट्स पहले ही टूट चुके होते हैं। जिसकी वजह से इनके अंदर ऐसे न्यूट्रिएंट्स की मात्रा बहुत कम रह जाती है। अब फूलगोभी में जितना ज्यादा न्यूट्रिशन की कमी होगी वो उतना ज्यादा पाचन पर स्ट्रेस बढ़ाएगी। हल्के पीले रंग की फूलगोभी खाने पर ही ज्यादातर अपच, ब्लोटिंग और पेट में दर्द की शिकायत होने लगती है।

आयरन तवे को धोने के बाद सही इस्तेमाल कर डोसे को चिपकने से बचाएं

डोसा या चीला बनाने के लिए नॉनस्टिक तवा का यूज आसान होता है। लेकिन नॉनस्टिक सेहत के लिए हार्मफुल होता है और इसे जल्दी-जल्दी चेंज करने की जरूरत होती है। ऐसे में ज्यादातर लोग लोहे के तवे पर डोसा बनाने की सलाह देते हैं। लेकिन लोहे का तवा एक बार धो दिया जाए तो फिर इस पर डोसा बनाना मुश्किल हो जाता है और डोसा चिपकना शुरू हो जाता है। ऐसे में लोहे के तवे को सीजन करने का आसान तरीका जरूर सीख लें। सबसे पहले तो लोहे के तवे को धोना सीख लें – कास्ट आयरन तवा जिसे आप सीजन करके रखती हैं उसे धोने के लिए बहुत सारा घिसने की जरूरत नहीं होती। बस धोने से पहले हल्का सा गर्म कर लें। जिससे किनारे पर जमी पपड़ी आसानी से छूट सकेगी। बस इन पपड़ियों को किसी चीज से खुरचकर निकाल दें। फिर माइल्ड साबुन से धो दें। धोने के बाद कास्ट आयरन तवा को सीजन करने का तरीका – एक बार तवा या लोहे का पैन धो लिया तो फौरन उसके पानी को पोंछकर सुखा दें। फिर, उस पर हाई स्मोकिंग ऑयल जैसे सरसों का तेल या फिर तिल का तेल लगाएं। तेल लगाने के बाद किसी कपड़े या किचन टॉवले से पोंछ दें और गैस पर रखकर बर्तन को तब तक गर्म करें जब तक कि धुंआ ना निकलने लगे। एक बार बर्तन गर्म होकर धुआं निकलने लगे तो गैस की फ्लेम को बंद करके ठंडा हो जाने दें। बर्तन को गर्म करने से सारा ऑयल अंदर अब्जॉर्ब हो जाता है और बिल्कुल नॉनस्टिकी बनकर रेडी हो जाता है। बस जब ये तवा या पैन ठंडा हो जाए तो एक्स्ट्रा ऑयल को पोंछकर रख दें। अगर तवा नया है या आपने ज्यादा रगड़कर धोया है तो एक बार गर्म होकर ठंडा हो जाने के बाद फिर से इस पर तेल लगाएं और गर्म करें। फिर एक्स्ट्रा तेल को वाइप कर दें। इस प्रोसेस को दो सेतीन बार रीपिट करें। ऐसा करने से कास्ट आयरन या लोहे का तवा अच्छी तरह से चिकना हो जाएगा और फिर इस पर किसी भी तरह का डोसा या चीला नहीं चिपकेगा। सबसे खास बात अगर डोसा या तवा पहली बार बनाते समय चिपक रहा तो एक से दो बनाने के बाद फिर आसानी से बनना शुरू हो जाता है।

CES 2026 में Dreame का नया स्मार्ट होम सिस्टम, सीढ़ियों तक सफाई करेगा रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर

 नई दिल्ली स्मार्ट होम डिवाइस अब सिर्फ रोबोट वैक्यूम या एयर प्यूरीफायर तक सीमित नहीं रह गए हैं. CES 2026 में Dreame Technology इसी बदलते ट्रेंड को सामने लाने की तैयारी में है. कंपनी इस साल पहली बार अपना इकोसिस्टम एक साथ पेश कर रही है जिसमें सफाई से लेकर किचन, एयर कंडीशनिंग और पर्सनल केयर तक के प्रोडक्ट शामिल हैं.  अब तक Dreame को एक प्रीमियम स्मार्ट क्लीनिंग ब्रांड के तौर पर जाना जाता था, लेकिन CES 2026 में कंपनी खुद को सिर्फ वैक्यूम बनाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक कनेक्टेड होम ब्रांड के तौर पर पेश कर रही है. Dreame का फोकस ऐसे सिस्टम पर है जो बैकग्राउंड में काम करें और यूज़र को रोज़मर्रा के कामों से राहत मिले, बिना बार-बार मैनुअल कंट्रोल के. इस साल Dreame की मौजूदगी CES में पहले से कहीं बड़ी है. कंपनी पहली बार दो बड़े वेन्यू पर अपने प्रोडक्ट्स दिखाए हैं.. Las Vegas Convention Center में इसका मेन इकोसिस्टम शोकेस हुआ, जबकि Venetian Expo में स्मार्ट क्लीनिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स पर फोकस किया गया. यह Dreame का अब तक का सबसे बड़ा CES सेटअप है.  CES 2026 में Dreame कुछ नए और अहम प्रोडक्ट्स भी दिखाए गए हैं.  इनमें सबसे ज्यादा चर्चा X60 Series रोबोट वैक्यूम को लेकर है. कंपनी का दावा है कि यह अब तक का सबसे पतला फ्लैगशिप रोबोट वैक्यूम होगा, जिसकी मोटाई सिर्फ 7.95 सेंटीमीटर है. इसे खास तौर पर लो-हाइट फर्नीचर के नीचे बेहतर सफाई के लिए डिजाइन किया गया है. CES 2026 में Dreame ने एक और ऐसी टेक्नोलॉजी भी दिखाई, जिस पर खास ध्यान रहा. कंपनी ने एक स्टेयर क्लाइंबिंग रोबोट का डेमो दिया, जिसे खास तौर पर मल्टी स्टोरी घरों के लिए तैयार किया गया था. अब तक रोबोट वैक्यूम सीढ़ियों के पास रुक जाते थे, लेकिन Dreame का यह नया कॉन्सेप्ट सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में सक्षम बताया गया. इसका मकसद उन घरों को टारगेट करना था जहां एक से ज्यादा फ्लोर हैं और हर मंज़िल के लिए अलग-अलग सफाई समाधान इस्तेमाल करने पड़ते हैं. अगर यह टेक्नोलॉजी आगे चलकर प्रैक्टिकल साबित होती है, तो यह रोबोट वैक्यूम कैटेगरी में बड़ा बदलाव ला सकती है. स्मार्ट होम की दिशा में आगे बढ़ते हुए Dreame अब किचन और कूलिंग कैटेगरी में भी एंट्री कर रही है. CES में कंपनी एक नया D-Wind Series एयर कंडीशनर शोकेस किया है, जिसे कमरे के कोने में फिट करने के हिसाब से डिजाइन किया गया है. इसके साथ एक स्मार्ट रेफ्रिजरेटर भी पेश किया है, जो इंस्टेंट स्पार्कलिंग वॉटर देने की सुविधा के साथ आता है.  पर्सनल केयर सेगमेंट में भी Dreame कुछ नया कर रही है. कंपनी CES में AirStyle Pro HI नाम का नया 2-in-1 हेयर ड्रायर और स्टाइलिंग टूल दिखाया. इसे घर पर प्रोफेशनल-लेवल स्टाइलिंग के लिए बनाया गया है और इसमें नए अटैचमेंट्स जोड़े गए हैं. CES के दौरान Dreame एक खास लॉन्च इवेंट भी करेगी, जहां पूरे इकोसिस्टम को एक साथ डेमो किया जाएगा. कंपनी की कोशिश यह दिखाने की है कि अलग-अलग डिवाइस मिलकर एक सिंगल स्मार्ट होम एक्सपीरियंस कैसे दे सकते हैं, न कि अलग-अलग गैजेट्स की तरह काम करें. भारत के संदर्भ में देखें तो Dreame ने यहां 2023 में अपने ऑपरेशन शुरू किए थे और फिलहाल उसके प्रोडक्ट्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये उपलब्ध हैं. CES में किया जा रहा यह बड़ा शोकेस इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में कंपनी भारत समेत दूसरे बाजारों में भी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और बढ़ा सकती है. कुल मिलाकर, CES 2026 में Dreame का यह कदम सिर्फ नए प्रोडक्ट दिखाने तक सीमित नहीं है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि स्मार्ट होम का अगला चरण अलग-अलग डिवाइस नहीं, बल्कि एक जुड़े हुए सिस्टम पर आधारित होगा, जहां टेक्नोलॉजी दिखे कम और काम ज़्यादा करे.

अंतरिक्ष स्टेशन पर खोजा गया कैंसर का नया इलाज, पेम्ब्रोलिजुमाब का इंजेक्शन बनेगा क्रांतिकारी

 नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर की गई वैज्ञानिक रिसर्च ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. नासा और दवा कंपनी मर्क की टीम ने मिलकर स्पेस में प्रोटीन क्रिस्टल ग्रोथ की स्टडी की, जिससे कैंसर की एक प्रमुख दवा का नया रूप विकसित हुआ. अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सितंबर 2025 में इस नए इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है. अब मरीजों को 2 घंटे लंबी इन्फ्यूजन की जगह सिर्फ 1-2 मिनट का इंजेक्शन लगेगा. यह खबर कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी है, क्योंकि इलाज आसान, तेज और सस्ता हो गया है. क्या है यह नया इलाज? यह नया इलाज कंपनी मर्क की दवा पेम्ब्रोलिजुमाब (Pembrolizumab) का सबक्यूटेनियस इंजेक्शन रूप है. यह दवा इम्यूनोथेरेपी की श्रेणी में आती है. कुछ खास तरह के कैंसर (जैसे मेलानोमा, लंग कैंसर आदि) के इलाज में इस्तेमाल होती है. पहले यह दवा कैसे दी जाती थी?     मरीज को अस्पताल या क्लिनिक जाना पड़ता था.     नस में इन्फ्यूजन (IV ड्रिप) से दवा दी जाती थी.     इसमें 1-2 घंटे लगते थे.     बाद में इसे 30 मिनट तक कम किया गया था. अब नया तरीका     त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) सिर्फ एक इंजेक्शन.     लगाने में 1 से 2 मिनट लगते हैं.     हर तीन हफ्ते में एक बार.     मरीज का समय बचता है. अस्पताल का खर्च कम होता है. जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है. स्पेस स्टेशन की रिसर्च ने कैसे मदद की? अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) बहुत कम होता है – इसे माइक्रोग्रेविटी कहते हैं. पृथ्वी पर ग्रेविटी की वजह से क्रिस्टल बनाते समय कई समस्याएं आती हैं, जैसे क्रिस्टल छोटे, असमान या कम गुणवत्ता वाले बनते हैं. लेकिन स्पेस में…     क्रिस्टल बड़े, एकसमान और ज्यादा परफेक्ट बनते हैं.     इससे वैज्ञानिक दवा के अणुओं की संरचना को बेहतर समझ पाते हैं. मर्क कंपनी 2014 से ISS पर प्रयोग कर रही है. उन्होंने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (लैब में बनी प्रोटीन जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है) के क्रिस्टल स्पेस में उगाए. इन क्रिस्टल से पता चला कि दवा के कणों का सबसे अच्छा आकार और संरचना क्या होनी चाहिए, ताकि वे आसानी से घुलकर इंजेक्शन के रूप में दिए जा सकें. यह रिसर्च ISS नेशनल लेबोरेटरी के सपोर्ट से हुई. नासा स्पेस स्टेशन को निजी कंपनियों और वैज्ञानिकों के लिए खुला रखता है, ताकि माइक्रोग्रेविटी का फायदा उठाकर नई खोजें हों. स्पेस रिसर्च के फायदे क्या हैं?     पृथ्वी पर दवाओं का विकास तेज और बेहतर होता है.     कैंसर जैसे जटिल रोगों का इलाज आसान बनता है.     अंतरिक्ष यात्री के लिए लंबी स्पेस मिशन (चंद्रमा और मंगल) की तैयारी भी होती है.     कॉमर्शियल स्पेस इकोनॉमी बढ़ती है – निजी कंपनियां स्पेस में निवेश करती हैं. नासा का कहना है कि स्पेस स्टेशन पर किया गया काम न सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत सुधारता है, बल्कि पृथ्वी पर लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाता है. यह उदाहरण दिखाता है कि अंतरिक्ष की खोजें कैसे आम लोगों तक पहुंच रही हैं. भविष्य में स्पेस रिसर्च से और भी कई नई दवाएं और इलाज सामने आ सकते हैं. कैंसर मरीजों के लिए यह नया इंजेक्शन एक बड़ी उम्मीद है.  

हेयर फॉल का असली कारण आपकी थाली में! इन 4 चीजों को खाते ही बाल होने लगते हैं कमजोर

नई दिल्ली आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और खराब खान-पान के कारण बाल झड़ने की समस्या एक आम बात हो गई है। हम अक्सर महंगे शैम्पू, तेल और हेयर ट्रीटमेंट्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन अपनी डाइट पर ध्यान देना भूल जाते हैं। जी हां, हो सकता है आपके हेयर फॉल की असली वजह आपकी डाइट में ही छिपी हो। दरअसल, हम जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे बालों की सेहत पर पड़ता है। इसलिए अगर आप भी गिरते बालों से परेशान हैं, तो आपको अपने किचन में मौजूद कुछ चीजों को तुरंत बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। आइए जानें इन्हीं फूड्स के बारे में, जो बालों के लिए दुश्मन साबित हो सकते हैं। चीनी चीनी सिर्फ वजन ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण है। जब आप बहुत ज्यादा मीठा खाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ इंसुलिन लेवल पुरुष और महिला दोनों के शरीर में 'एंड्रोजन' हार्मोन को एक्टिव कर देता है। यह हार्मोन बालों के फॉलिकल्स को सिकोड़ देता है, जिससे बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं। इसके अलावा, चीनी स्कैल्प में सूजन पैदा करती है, जिससे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। हाई-ग्लाइसेमिक फूड्स मैदा से बनी चीजें जैसे पिज्जा, पास्ता, सफेद ब्रेड और रिफाइंड कार्ब्स शरीर में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाते हैं। इन फूड्स से शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है। जो लोग अपनी डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ज्यादा लेते हैं, उनमें समय से पहले बाल झड़ने और गंजेपन की समस्या ज्यादा हो सकती है। इनकी जगह होल ग्रेन को डाइट में शामिल करना एक बेहतर ऑप्शन है। डाइट सोडा और आर्टिफिशियल स्वीटनर कई लोग वजन घटाने के चक्कर में सामान्य चीनी की जगह 'डाइट सोडा' या 'शुगर-फ्री' ऑप्शन को चुनते हैं। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर होता है, जो बालों के फॉलिकल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और स्कैल्प की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप सोडा या ज्यादा कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो यह आपके बालों की चमक छीन सकता है और उन्हें जड़ों से कमजोर बना सकता है। शराब और कैफीन शराब शरीर को डिहाइड्रेट करती है। शरीर में पानी की कमी होने पर बाल सूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं। इसके अलावा, शराब शरीर में जिंक के स्तर को कम कर देती है। जिंक बालों की ग्रोथ के लिए एक जरूरी मिनरल है। इसी तरह, बहुत ज्यादा मात्रा में चाय या कॉफी पीना भी शरीर में पोषक तत्वों के अब्जॉर्प्शन में बाधा डालता है। इनकी जगह क्या खाएं? सिर्फ इन चीजों को छोड़ने से काम नहीं चलेगा, आपको अपनी डाइट में कुछ अच्छी चीजें जोड़नी भी होंगी-     प्रोटीन- अंडे, दालें और पनीर।     आयरन- पालक, मेथी और अनार।     ओमेगा-3- अखरोट और अलसी के बीज।  

असफलता का सबसे बड़ा कारण है लोकलाज और मृत्यु का भय

आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों में जीवन के कठोर सत्य सिखाते हैं। वे कहते हैं कि सफलता पाने के लिए साहस और निडरता जरूरी है। कुछ लोग दो चीजों से इतना डरते हैं कि जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते हैं। चाणक्य की चेतावनी है कि इन दो चीजों से डरने वाला इंसान कभी सफल नहीं होता है। ये दो चीजें हैं – लोक लाज (लोग क्या कहेंगे) और मृत्यु का भय। इनसे डरने से व्यक्ति अवसर चूक जाता है और जीवन में असफल रहता है। चाणक्य नीति सिखाती है कि इन भयों को त्यागकर ही बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। आज के समय में भी यह नीति बहुत प्रासंगिक है। आइए जानते हैं चाणक्य की यह चेतावनी और इसका महत्व। लोक लाज का डर आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोक लाज से डरने वाला कभी बड़ा काम नहीं कर पाता है। लोग क्या कहेंगे, इस डर से व्यक्ति नए रास्ते नहीं चुनता है। व्यापार शुरू करने, नौकरी बदलने या सपने पूरे करने में हिचकिचाता है। समाज की बातों से डरकर वह अपनी क्षमता का उपयोग नहीं करता है। चाणक्य की चेतावनी है कि लोक लाज का डर सफलता का सबसे बड़ा शत्रु है। जो लोग इस डर को त्याग देते हैं, वे ही इतिहास बनाते हैं। आज कई लोग इसी डर से रिस्क नहीं लेते और जीवन भर पछताते हैं। चाणक्य नीति सिखाती है कि अपनी बुद्धि और मेहनत पर भरोसा करें, लोगों की बातों पर नहीं। लोक लाज त्यागें, तो सफलता जरूर मिलेगी। मृत्यु का भय मृत्यु से डरने वाला जीते जी मर जाता है। मृत्यु का भय व्यक्ति को जोखिम लेने से रोकता है। बड़ा काम करने, यात्रा करने या नई शुरुआत करने में डर लगता है। चाणक्य की चेतावनी है कि मृत्यु निश्चित है, लेकिन उससे डरकर जीवन व्यर्थ करना मूर्खता है। जो लोग मृत्यु का भय त्याग देते हैं, वे निडर होकर मेहनत करते हैं और सफल होते हैं। योद्धा, व्यापारी या नेता सभी मृत्यु भय त्यागकर ही महान बने हैं। चाणक्य नीति सिखाती है कि मृत्यु को स्वीकार करें और जीवन को पूर्ण जीएं। इस भय से मुक्त होने पर ही बड़ी सफलता मिलती है। इन भयों से मुक्ति ही सफलता का राज आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोक लाज और मृत्यु भय से डरने वाला कभी सफल नहीं होता है। ये दो भय व्यक्ति को बांधे रखते हैं और अवसर चूक जाते हैं। चाणक्य नीति का सार है कि निडर बनें, साहस रखें। लोग क्या कहेंगे, इसकी चिंता छोड़ें और मृत्यु को निश्चित मानकर जीवन को हर पल जीएं। इन भयों को त्यागने से मन मजबूत होता है और सफलता के द्वार खुलते हैं। चाणक्य की यह चेतावनी आज भी लागू होती है – जो इनसे डरते हैं, वे असफल रहते हैं, जो त्याग देते हैं, वे इतिहास बनाते हैं। चाणक्य की नीति अपनाएं – लोक लाज और मृत्यु भय त्यागें तो जीवन में सफलता और सम्मान मिलेगा। साहस से ही बड़ा मुकाम हासिल होता है।

खर्च घटाने का OPPO का दांव: Realme बनेगा सब-ब्रैंड, यूज़र्स के मन में उठे सवाल

नई दिल्ली स्मार्टफोन बनाने वाली चीनी कंपनी Realme को ओप्पो की सब-ब्रांड के तौर पर शामिल किया जा रहा है। बुधवार को रियलमी ने बताया कि उसे BBK Electronics के तहत आने वाली एक और चीनी कंपनी Oppo की सब-ब्रांड बनाया जा रहा है। खर्चों में कटौती करने के लिए कंपनियों ने ये बड़ा फैसला लिया है। इससे दोनों कंपनियों को अपने संसाधनों को एक साथ लाने और खर्चों को कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि भारत समेत कई देशों में रियलमी के स्मार्टफोन्स को काफी पसंद किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल जरूर आएगा कि क्या अब मार्केट में Realme के स्मार्टफोन आना बंद हो जाएंगे। आइये, इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। Oppo की सब ब्रांड के तौर पर काम करेगी रियलमी Reuters की खबर के अनुसार, रियलमी को ओप्पो की सब-ब्रांड बनाया जा रहा है। भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप में इस कंपनियों के स्मार्टफोन बेचे और पसंद किए जाते हैं। बता दें कि रिलमी, चीनी कंज्यूमर हार्डवेयर दिग्गज BBK इलेक्ट्रॉनिक्स की कंपनी है। इसके तहत ही Oppo और Vivo स्मार्टफोन ब्रांड भी आते हैं। क्या बंद हो जाएंगे रियलमी के स्मार्टफोन? अगर आपको लग रहा है कि अब मार्केट में रियलमी के स्मार्टफोन आना बंद हो जाएंगे तो ऐसा नहीं है। रियलमी के स्मार्टफोन अभी भी लॉन्च किए जाएंगे और वे रियलमी के नाम से ही मार्केट में एंट्री लेंगे। लेकिन, रियलमी अब एक स्वतंत्र ब्रांड नहीं बल्कि ओप्पो की सब ब्रांड के तौर पर काम करेगी। यह नथिंग की सब ब्रांड CMF और वीवो की सब ब्रांड IQOO की तरह ही हो जाएगी। हालांकि, इसके फोन, टैबलेट और ऑडियो प्रोडक्ट रियलमी के नाम से ही मार्केट में बिकेंगे। क्यों लिया गया ये फैसला? रियलमी ने अपना पहला स्मार्टफोन सबसे पहले भारत में ही लॉन्च किया था। इसके बजट और मिड रेंज स्मार्टफोन को काफी पसंद किया जाता है। इसके बाद भी एक सब ब्रांड के तौर पर काम करने का फैसला लेना लोगों को चौंका रहा है। ऐसा कंपनी ने कॉस्ट कटिंग करने यानी पैसा बचाने के लिए किया है। ओप्पो की सब ब्रांड के तौर पर काम करने से ओप्पो और रियलमी दोनों ब्रांड्स का पैसा बचेगा। वे एक दूसरे के रीसोर्स का इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे पैसे बचाने और कंपनी को प्रॉफिट करने में मदद मिलेगी। सैमसंग और वीवो को मिलेगी चुनौती ITC की 2025 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार भारत में दूसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी ओप्पो थी। इस लिस्ट में वीवो पहले और तीसरे नंबर पर सैमसंग थी। वहीं, रियलमी छठे नंबर पर थी। अब ओप्पो की सब ब्रांड बनने के बाद ये दोनों ब्रांड मिलकर भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी बन सकती हैं। इससे सैमसंग और वीवो को बड़ी चुनौती मिलेगी।