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चेहरे पर पीरियड ब्लड लगाने का ट्रेंड: काम करता है या नुकसानदायक? जानें डॉक्टरों की राय

नई दिल्ली पहले के जमाने में जब महिलाओं को पीरियड्स आते थे तो घर में किसी को भी पता नहीं चलता था, लेकिन अब जमाना काफी बदल गया है। अब महिलाएं इसे छुपाने में कोई शर्म नहीं करती। वहीं, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड वायरल हो रहा है, जिसमें कई महिलाएं चेहरे पर अपना पीरियड ब्लड लगाती हुई दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि चेहरे पर अपना पीरियड ब्लड लगाने से त्वचा ग्लोइंग, यंग और हेल्दी दिखने लगती है। इसे Menstrual Masking का नाम दिया गया है। वहीं, इसके बारे में ObGyn और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मानसी नारलकर ने अपने इंस्टाग्राम पर इस ट्रेंड पर एक विस्तृत वीडियो शेयर किया। डॉ. मानसी नारलकर ने बताया कि ट्रेंड के पीछे जो लॉजिक बताया जा रहा है वह पूरी तरह सही नहीं है। दावा किया जाता है कि पीरियड ब्लड में स्टेम सेल्स और साइटोकाइन्स होते हैं, जो स्किन रिपेयर करने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर मानसी कहती हैं कि ये सिर्फ थ्योरी है, इसे लेकर अभी कोई मजबूत वैज्ञानिक रिसर्च नहीं है। चेहरे की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे में अनस्टेराइल चीज़ें लगाने से फंगल इन्फेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, स्किन एलर्जी, पिंपल्स और रैशेज लंबे समय में स्किन डैमेज हो सकता है। डॉक्टर्स साफ चेतावनी देते हैं कि यह ट्रेंड हानिकारक है। इसे चेहरे पर लगाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है डॉक्टरों के मुताबिक पीरियड ब्लड में एंडोमेट्रियल टिश्यू (गर्भाशय की परत), वेजाइनल डिस्चार्ज, बैक्टीरिया, फंगस और माइक्रो ऑर्गेनिज्म होता है क्योंकि यह खून वेजाइना से होकर बाहर आता है, इसलिए यह स्टेराइल नहीं होता। यही कारण है कि इसे चेहरे पर लगाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, बता दें कि पंजाब केसरी इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Nvidia CEO खुलासाः क्यों AI चिप बनाने में खर्च होते हैं अरबों रुपये

नई दिल्ली जितनी तेजी से AI हम सभी की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है, उतनी ही तेजी से इनके पीछे लगी कंपनियों की लागत आसमान छू रही है। अगर आपको इस बारे में कोई अंदाजा नहीं कि AI चिप बनाने में क्या खर्च आता है, तो बता दें कि यह सारा खेल अरबों-खरबों रुपये का है। इस बारे में खुद AI चिप बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी NVIDIA के सीईओ जेनसेन हुआंग बता चुके हैं। उनके अनुसार, एक नई AI-चिप आर्किटेक्चर को डिजाइन और बनाने की शुरुआत में ही 5.5 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो जाते हैं। यह मोटी रकम चिप की पहली यूनिट के फैक्ट्री से बाहर आने से पहले ही खर्च हो जाती है। चलिए चिप बनाने के पूरे प्रोसेस और उस पर आने वाली लागत के बारे में जेनसेन हुआंग के जरिए समझते हैं। इतनी बड़ी राशि की जरूरत क्यों? किसी नई जेनरेशन की AI चिप बनाने के लिए उस चिप का डिजाइन, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर डेवलपमेंट, सिमुलेशन, टूल चेन, आदि सब कुछ पूरी तरह तैयार करना पड़ता है। हुआंग के मुताबिक (ref.), इन डिजाइन और इंजीनियरिंग के खर्चों पर बी 5 से 6 बिलियन डॉलर खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा चिप का डिजाइन तैयार हो जाने के बाद उसे फैब्रिकेट कराने के लिए एक मास्क सेट बनाना पड़ता है। इस पर आमतौर पर 500 मिलियन डॉलर का खर्च आ जाता है। कहने का मतलब है कि इससे पहले एक भी चिप बन पाए लगभग 5.5 बिलियन डॉलर यानी कि 4,914 करोड़ का खर्च उठाना पड़ता है। प्रति चिप आता है कितना खर्च चिप बनाने के लिए शुरू में होने वाला खर्च बहुत ज्यादा लग सकता है लेकिन यह लागत प्रित चिप पर आने वाले खर्च से काफी अलग है। इसे समझने के लिए आप AI-चिप Blackwell B200 की कीमत देख सकते हैं। यह प्रति चिप 30,000 से 40,000 यूएस डॉलर के आसपास बैठती है। देखा जाए तो यह कीमत इस चिप के पिछले जेनरेशन H100 की कीमत के आस-पास ही है। कहने का मतलब है कि एक चिप की कीमत में भारी-भरकम R&D या शुरुआती खर्च को शामिल नहीं किया जाता। यह सिर्फ उस एक चिप की मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और वितरण खर्च और प्रॉफिट मार्जिन को बताता है। इतने महंगे चिप बनाना क्यों है जरूरी? आपके मन में सवाल उठ सकता है कि इतने महंगे AI चिप बनाना क्यों जरूरी है। दरअसल साधारण सीपीयू या जीपीयू के मुकाबले हाई एंड AI चिप्स जैसे कि Blackwell B200 काफी शक्तिशाली होते हैं। इनकी कंप्यूटेशनल कैपेसिटी, मेमोरी और एफिशिएंसी इतनी ज्यादा होती है कि यह सैंकड़ों नॉर्मल प्रोसेसर और जीपीयू की जगह काम कर सकते हैं। इससे उर्जा, समय और ऑपरेशन कॉस्ट में काफी बचत हो सकती है।

सोशल मीडिया पर छाया MOM गैजेट, बेंगलुरु के शख्स ने बनाया AI जो भूख लगते ही खाना मंगाए

 नई दिल्ली सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के फूड हैक्स और किचन ट्रिक्स मिल जाते हैं, लेकिन एक भारतीय इंजीनियर का नया आइडिया लोगों को हैरान कर रहा है. इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक ऐसा अनोखा डिवाइस दिखाया गया है, जो आपकी भूख पहचान कर अपने-आप खाना ऑर्डर कर देता है. कंटेंट क्रिएटर @zikiguy की सीरीज़ “Inventions You Will Never Think Of” में दिखाया गया यह गैजेट लोगों की एक आम परेशानी समय पर खाना भूल जाना का मजेदार और अनोखा समाधान पेश करता है. ऐसा गैजेट जो भूख पहचान लेता है वीडियो में दिखाया गया डिवाइस का नाम MOM (Meal Ordering Module) है, इसे बेल्ट पर लगाया जाता है. यह पेट से आने वाली भूख की आवाज सुनकर पहचान लेता है और जैसे ही आवाज मिलती है, यह ज़ोमैटो के ज़रिए अपने-आप खाना ऑर्डर कर देता है. क्रिएटर मज़ाक में कहते हैं, “इसका नाम MOM इसलिए है, क्योंकि ये मुझे माँ की तरह समय पर खाना खाने के लिए मजबूर करता है.” भूख पहचानने वाला यह गैजेट कैसे काम करता है? इस अनोखे डिवाइस को बनाने के लिए इंजीनियर ने अपनी बहन का स्टेथोस्कोप इस्तेमाल किया. उन्होंने पेट की आवाज रिकॉर्ड करने के लिए एक छोटा माइक्रोफोन, एक साउंड सेंसर, छोटी बैटरी और ESP32 माइक्रोकंट्रोलर लगाकर अंदर की पूरी सिस्टम तैयार की. यह गैजेट पेट की आवाजें सुनकर उनका डेटा वाई-फाई के जरिए एक लोकल सर्वर तक भेज देता है. डिवाइस को पूरा रूप देने के लिए उसने एक 3D-प्रिंटेड बॉडी बनाई और एक ऑन/ऑफ स्विच भी लगाया. इंजीनियर के मुताबिक, इस डिवाइस का कोड पेट की गुर्राने की तीव्रता और कितनी देर तक आवाज चलती है, इसका विश्लेषण करता है अगर पेट की आवाज ज्यादा तेज और लंबी होती है, तो यह मानता है कि भूख ज्यादा है — और ऐसे में डिवाइस दो पिज़्ज़ा या पूरी बिरयानी जैसा बड़ा ऑर्डर कर देता है. ज़ोमैटो से अपने-आप खाना ऑर्डर करने की क्षमता ( डिवाइस) MOM की सबसे रोचक खासियत है इसका ज़ोमैटो के MCP सर्वर से कनेक्शन है. इससे यह गैजेट अपने आप आसपास के रेस्टोरेंट्स को तलाश सकता है, उनकी रेटिंग देख सकता है, दामों के हिसाब से फिल्टर कर सकता है, और फिर यूज़र की पिछली पसंद के आधार पर एक डिश चुनकर ऑर्डर कर देता है. वीडियो में, क्रिएटर दिखाता है कि कैसे डिवाइस ने अपने आप खाना ऑर्डर कर दिया और जब वह दरवाजा खोलता है, तो कई पिज्जा बॉक्स देखकर दंग रह जाता है. सोशल मीडिया पर जमकर कर रहे कमेंट एक यूजर ने लिखा, “इसे अनावश्यक आविष्कारों की लिस्ट में डाल देना चाहिए. जब किसी ने पूछा कि “आपने इसे टेस्ट कैसे किया?”, तो क्रिएटर ने मज़ाक में कहा कि उसे पूरा दिन बिना खाना खाए बैठना पड़ा. एक ने लिखा, “भाई, तुम तो मेरा बैंक बैलेंस ही खत्म कर दोगे. दूसरे ने कहा, “लगता है, तुम्हारी इंजीनियरिंग की डिग्री आखिर काम आ ही गई.” एक मजाकिया कमेंट था, “ये वीडियो खास उन लोगों के लिए बना है जिनकी फुल-टाइम नौकरी है, नियम और शर्तें लागू।” क्या यह गैजेट सच में भविष्य में आएगा? अभी यह साफ नहीं है कि MOM जैसे उपकरण कभी असली प्रोडक्ट बन पाएंगे या नहीं. लेकिन एक बात तय है—यह गैजेट इंटरनेट पर लोगों को खूब हंसी और मनोरंजन दे रहा है। खाने के शौकीनों और टेक्नॉलजी पसंद करने वालों, दोनों को यह आइडिया काफी मजेदार लगा।

पेट की फैट और किडनी स्वास्थ्य का कनेक्शन: स्टडी में बताया गया सही कमर माप

मुंबई   मोटापा की स्थिति तब मानी जाती है, जब शरीर में फैट इस सीमा तक बढ़ जाता है कि वह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने लगता है और उसके कारण आप अपनी डेली लाइफस्टाइल के काम नहीं कर पाएं. एक्सपर्ट के मुताबिक, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अगर 30 या इससे अधिक है, तो इसे मोटापा माना जाता है. वैसे तो मोटापे के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं लेकिन हाल ही में BMC Nephrology जर्नल में पब्लिश स्टडी में दावा किया गया है कि सिर्फ वजन बढ़ना या मोटापे तक सीमित नहीं है बल्कि आपके कमर की चर्बी आपकी किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती है. क्या कहती है स्टडी? स्टडी में वैज्ञानिकों ने इस बात को जानने की कोशिश की कि कमर और ऊंचाई का अनुपात (Waist-to-Height Ratio, WHtR), किडनी की कार्यक्षमता में तेजी से गिरावट (Rapid Kidney Function Decline, RKFD) और गुर्दे की दीर्घकालीन बीमारी (Chronic Kidney Disease, CKD) के बीच क्या संबंध है. इस स्टडी में 4374 लोगों को शामिल किया गया था जिनकी किडनी की स्थिति स्टडी से पहले नॉर्मल थी. फिर हर इंसान की कमर और ऊंचाई का अनुपात निकाला गया और उन्हें लगभग चार साल तक फॉलो किया गया. स्टडी के दौरान देखा गया कि किन लोगों की किडनी की प्रोडक्टिविटी में गिरावट (RKFD) आई है और किन लोगों को क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD) की समस्या हुई है. रिसर्च के रिजल्ट में सामने आया कि जिन लोगों का कमर और ऊंचाई का अनुपात अधिक था, उनमें किडनी फंक्शन गिरने का खतरा 30% तक बढ़ गया और CKD का खतरा लगभग 50% अधिक था. वहीं जिन लोगों की कमर का अनुपात सबसे अधिक था, उनमें CKD का रिस्क कमर के सबसे कम कमर वाले ग्रुप के मुकाबले करीब 4 गुना अधिक पाया गया था. रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि कमर और ऊंचाई का अनुपात, किसी व्यक्ति में किडनी डिजीज का खतरा जानने के लिए बीएमआई से कहीं ज्यादा सटीक है. क्या पाया वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिकों को पता चला कि पेट की चर्बी सिर्फ मोटापे का नहीं बल्कि किडनी डिजीज का भी बड़ा कारण बन सकती है. चीन में की गई इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि अगर आपकी कमर आपकी ऊंचाई के मुकाबले ज्यादा है तो आपकी किडनी की प्रोडक्टिविटी धीरे-धीरे घट सकती है और आगे चलकर CKD जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. बीएमआई नहीं है सटीक पैमाना वैज्ञानिकों के मुताबिक, आम तौर पर लोग अपने स्वास्थ्य का आकलन BMI से करते हैं लेकिन बीएमआई केवल वजन और लंबाई के हिसाब से मोटापा बताता है, वह यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहां जमा है. अब ऐसे में यदि किसी के पेट के चारों ओर अधिक चर्बी जमा है तो वह सबसे नुकसान पहुंचाती है क्योंकि इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को बढ़ाने की क्षमता होती है और यह मेटाबॉलिक सिस्टम को बिगाड़ देती है. कितना होना चाहिए कमर का साइज? स्टडी में यह भी देखा गया कमर और ऊंचाई का अनुपात और किडनी की प्रोडक्टिविटी में कमी के बीच सीधा-सीधा संबंध है. यानी जैसे-जैसे पेट की चर्बी बढ़ेगी, वैसे-वैसे किडनी की सेहत गिरती जाएगी. वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि अगर किसी व्यक्ति का कमर और ऊंचाई का अनुपात 0.50 से ज्यादा है यानी आपकी कमर आपकी ऊंचाई के आधे से अधिक तो उसे अपनी लाइफस्टाइल और डाइट पर तुरंत ध्यान देना चाहिए. उदाहरण के लिए यदि आपकी ऊंचाई 170 सेमी है तो आपकी कमर 85 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यह छोटा-सा पैमाना आपकी किडनी की उम्र बढ़ा सकता है. हालांकि यह रिसर्च केवल चीन की आबादी पर आधारित थी और इसकी अवधि करीब चार साल की थी इसलिए इसे पूरी दुनिया की जनसंख्या पर लागू नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद, यह एक मजबूत सबूत देता है कि पेट की चर्बी से शरीर के अंदर की हेल्थ पर भी लागू होती है.

11 इंच स्क्रीन वाला सैमसंग Galaxy Tab A11+ 5G भारत में हुआ लॉन्च, जानें कीमत

नई दिल्ली सैमसंग ने भारत में अपना नया टैबलेट बेहद खामोशी के साथ लॉन्‍च किया है। इसका नाम Samsung Galaxy Tab A11+ है। ग्‍लोबल मार्केट्स में इसे सितंबर में ही ले आया गया था। अब भारत के लिए इसे लाया गया है। इस टैब में 11 इंच का टीएफटी डिस्‍प्‍ले दिया गया है। हालांकि बैटरी 7040 एमएएच की है जो 25 वॉट की वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। बैटरी के मामले में यह टैब कमतर द‍िख रहा है क्‍योंकि आजकल स्‍मार्टफोन्‍स में इससे बड़ी बैटरी दी जा रही है। इस टैब को 4 वेरिएंट्स में लिया जा सकेगा। शुरुआती कीमत 22999 रुपये है। नया सैमसंग टैबलेट 4 वेरिएंट्स में आता है। इसे वाईफाई के अलावा वाईफाई और सेल्‍युलर मॉडल में लाया गया है ताकि लोग सिम कार्ड लगाकर भी इसे इस्‍तेमाल कर पाएं। इसके 6GB RAM + 128GB मॉडल को सिर्फ वाईफाई ऑप्‍शन के साथ 22,999 रुपये (ref.) में लिया जा सकेगा। वाईफाई और सेल्‍युलर मॉडल के दाम 26,999 रुपये हैं। कंपनी 8GB RAM + 256GB वेरिएंट भी लाई है, जिसके वाईफाई मॉडल के दाम 28,999 रुपये हैं, जबकि वाईफाई और सेल्‍युलर मॉडल की कीमत 32999 रुपये है। यह टैब ग्रे और सिल्‍वर कलर्स में आता है। अच्‍छी बात यह है कि सेल्‍युलर कनेक्‍ट‍िविटी 5जी है। जैसाकि हमने बताया, इस टैब में 11 इंच का टीएफटी एलसीडी डिस्‍प्‍ले दिया गया है, जो 90 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट ऑफर करता है। इस टैब में मीडियाटेक डाइमें‍सिटी प्रोसेसर दिया गया है। यह 5जी कनेक्‍ट‍िविटी ऑफर करता है। नया सैमसंग टैब लेटेस्‍ट एंड्रॉयड 16 पर चलता है, जिसमें वनयूआई 8 की लेयर है। इस टैब में 8 मेगापिक्‍सल का बैक और 5 मेगापिक्‍सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। वीडियो कॉल से ऑनलाइन मीटिंग तक ठीकठाक होने की उम्‍मीद है। इसमें सैमसंग का डेक्‍स मोड भी मिलता है, जिससे टैबलेट को पीसी की तरह इस्‍तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि इसकी बैटरी 7040 एमएएच है जो कई लोगों को इसलिए कम लग सकती है, क्‍योंकि आजकल स्‍मार्टफोन कंपनियों ने इससे बड़ी बैटरी अपने स्‍मार्टफोन में देना शुरू कर दिया है। सैमसंग टैब ए11 प्‍लस की 7040 एमएएच बैटरी 25 वॉट की वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह आईपी52 रेटिंग के साथ आता है, जिससे टैब को धूल और छींटों से सुरक्षा मिलती है। इस टैब का वजन 477 से 482 ग्राम तक है।

फोन के एक बटन पर पाएं तीन फीचर, जानें कैसे

नई दिल्ली अगर आपने फीचर फोन चलाया होगा तो आपको मालूम होगा कि फीचर फोन की ‘हार्ड की’ यानी बटन पर ढेरों शॉर्टकट दिए जाते थे। लेकिन वर्तमान समय में आने वाले स्मार्टफोन में शॉर्टकट काफी कम होते हैं। अगर आप चाहें तो गूगल प्लेस्टोर पर मिलने वाले कुछ खास एप की मदद से खुद के शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में। बटन रीमैपर गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद इस एप की मदद से आप जितना चाहें उतने शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। साथ ही इसके दो वर्जन उपलब्ध हैं जिसमें से प्रीमियम वर्जन है। प्रीमियम वर्जन के लिए शुल्क अदा करना होता है। मुफ्त में मिलने वाले बटन रीमैपर (नो रूट) एप को डाउनलोड करें। इसे ओपन करने के बाद जब सबसे पहले एप खुलेगा तो स्क्रीन पर ऊपर की तरफ एक खास तरह का विकल्प आएगा। इसे एक्टिवेट करना होगा। इसके बाद शॉर्टकट तैयार करने के लिए सबसे पहले एप को खोलें, उसके बाद नीचे दाईं ओर दिए गए प्लस के निशान पर क्लिक करें। इसके बाद दो विकल्प मिलेंगे। इसमें से ऊपर वाले विकल्प का चुनाव करें। फिर ‘न्यू एक्शन’ नाम का पॉपअप खुलेगा। इसके अंदर की लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करते ही आपके सामने उन सभी विकल्पों की सूची आ जाएगी, जहां पर आप शॉर्टकट सेट कर सकते हैं। किसी एक का चुनाव करने के बाद नीचे लॉन्ग एक्शन का विकल्प दिखेगा। उसे एक्टिवेट करने के लिए, उस पर क्लिक कर दें। यहां तक कि लॉन्ग एक्शन का समय भी बदला जा सकता है। फिर ओके पर क्लिक कर दें। इस प्रक्रिया को अपनाकर आप जितने चाहें उतने शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। इसकी मदद से आप होम बैक, रिसेंट एप, कैमरा और वॉल्यूम की पर अपने मनमुताबिक शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। यहां तक कि इस पर एक बटन पर दो शॉर्टकट सेट हो सकते हैं। एक साधारण क्लिक पर और दूसरा लॉन्ग क्लिक कर। मेन्यू की रीमैपर बटन रीमैपर से ज्यादा मेन्यू की रीमैपर (नो रूट) एप पर शॉर्टकट सेट किए जा सकते हैं। इस एप में बटन के चार क्लिक विकल्प दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर एक क्लिक पर एक एप खुलेगा। दो क्लिक पर दूसरा एप खुलेगा। साथ ही तीन बार बटन को क्लिक करने पर तीसरा एप सामने आ जाएगा। वहीं जरूरत पड़ने जल्दी-जल्दी चार क्लिक करने पर चौथा विकल्प खुलकर सामने आएगा। इन विकल्प में आप फोन सेटिंग या एप को शामिल कर सकते हैं। यह एप गूगल प्लेस्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध है।  

आँखों के नीचे झुर्रिया को दूर करने के घरेलू नुस्खों

आंखे वो चीज है जिसे लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। लेकिन अगर आँखों के नीचे झुर्रिया या काले घेरे हो तो चेहरे की खूबसूरती फीकी पड जाती है। आंखों के नीचे की त्वचा काफी नाजुक होती है। आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल आजकल आम बात हो गई है। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी ये समस्या बढ़ती जा रही है और इसकी अहम वजह भागदौड़ की दिनचर्या है, जिसमें आराम नहीं है। ऐसे में आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे खूबसूरती और स्मार्टनेस को कम कर सकते हैं। कभी-कभी यह समस्या आनुवांशिकता के कारण भी आती है। यह डार्क सर्कल्स आपके सौन्दर्यता में ग्रहण लगा देते हैं। वैसे तो बहुत सारे क्रीम के इस्तेमाल से भी इससे राहत पाया जा सकता है। कई बार आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे, अनहेल्दी लाइफस्टाइल का परिणाम होते हैं। बहुत ज्यादा काम करने, तनाव लेने, नींद न पूरी हो पाने और अन्य कारणों से आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं। डार्क सर्कल की समस्या से बचने के लिए घरेलू नुस्खों का कोई जवाब नहीं है। इसकी मदद से बिना किसी दुष्प्रभाव के आप डार्क सर्कल से छुटकारा पा सकते हैं। डार्क सर्कल से कैसे बचें आंखों के नीचे पड़ने वाले डार्क सर्कल आपकी खूबसूरती बिगाड़ सकते हैं। यह समस्या कई वजहों जैसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना, नींद न आना, मानसिक तनाव या फिर बहुत ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करने के कारण भी हो सकती है। इन डार्क सर्कल की वजह से आपकी सुंदरता तो कम होती ही है साथ ही व्यक्ति थका हुआ और उम्रदराज भी नजर आता है। आइए जानें डार्क सर्कल को दूर करने के घरेलू नुस्खों के बारे में। टमाटर टमाटर के रस में, नींबू का रस, चुटकीभर बेसन और हल्दी  मिला लें। इस पेस्ट  को अपनी आंखों के चारों ओर लगाएं और 20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में 3 बार जरुर करें। इससे डार्क सर्कल धीरे-धीरे कम होने लगेगा। आलू यह बहुत ही असरकारी नुस्खा है। रात में सोने से पहले चेहरा को अच्छे से साफ करें। इसके बाद आलू की पतली स्लाइस काटकर उन्हें आंखों पर 20 से 25 मिनट रखें। इसके बाद चेहरा को अच्छे से साफ कर लें। गुलाब जल गुलाब जल की मदद से डार्क सर्कल की समस्या से निजात पा सकते हैं। बंद आंखों पर गुलाब जल में भिगोई हुई रूई को आंखों पर रखें। ऐसा केवल 10 मिनट तक करें। ऐसा करने से आंखों के आस पास की त्वहचा चमक उठेगी। बादाम का तेल काले घेरे से छुटकारा पाने के लिए बादाम के तेल बहुत फायदेमंद है। बादाम के तेल को आंखों के आस-पास लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर उंगलियों से 10 मिनट तक हल्की मालिश करें। इसके बाद चेहरा साफ कर लें। चाय का पानी चायपत्ती को पानी के साथ उबाल लें और फिर ठंडा होने के लिए रख दें। इसके बाद रुई के फाहे को उसमें भिगोकर आंखों के नीचे और आस-पास लगाएं। थोड़ी देर बाद पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे के काले घेरे तेजी से कम हो जाएंगे। टी बैग डार्क सर्कल्स को दूर करने के लिए प्रयोग किए गए ठंडे टी-बैग्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। टी-बैग्स में मौजूद तत्व टैनिन आंखों के आसपास की सूजन और काली त्वचा को पहले जैसे करता है और आपको डार्क सर्कल से निजात मिलता है। शहद और बादाम का तेल बादाम के तेल और शहद को अच्छी तरह मिलाकर सोने के पहले आंखों के आसपास लगाएं और सारी रात लगा रहने दें। सुबह उठकर सामान्य पानी से चेहरा धो लें। हर रोज इस नुस्खे को आजमाने से कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल दूर हो जाएगा। पुदीना पत्ताछ पुदीने की पत्तिीयों को पीस लें और आंखों के आस पास लगा लें। इसे कुछ देर तक इस पेस्ट को ऐसे ही छोड़ दें और फिर आंखों को पानी से धो लें। इससे आपको डार्क सर्कल से निजात पाने में काफी सहायता मिलेगी। संतरे का रस और ग्लिसरीन संतरे का रस विटामिन सी से भरपूर होता है जो कि त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। संतरे के रस में ग्लिसरीन की कुछ बूंदे मिलाएं और इस पेस्ट को हर रोज आंखों और आस पास के एरिया पर लगाएं। यह डार्क सर्कल से निजात दिलाने का प्रभावशाली तरीका है। जैतून तेल जैतून का तेल सौंदर्य से जुड़ी कई समस्याओं में काफी फायदेमंद है। इससे आंखों के आसपास हल्के हाथों से मालिश करें, इससे रक्त संचार ठीक रहता है और आंखों की थकान कम होती है जिससे डार्क सर्कल की समस्या दूर होती है।  

डाइट में जरुर शामिल करें पालक का जूस, फायदे है कमाल के

इस बात से तो हर कोई वाकिफ है कि फल व सब्जियों के रस का सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है। अगर आप भी अपनी डाइट में किसी जूस को शामिल करने का मन बना रहे हैं तो शुरूआत पालक के जूस से कीजिए। पालक के जूस में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, साथ ही यह सेहत के लिए भी कई मायनों में लाभकारी होता है। तो चलिए जानते हैं पालक के जूस का सेवन करने से होने वाले लाभों के बारे में-   पोषक तत्वों से भरपूर पालक को यदि एक सुपरफूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसके जूस का सेवन करने से व्यक्ति को कई तरह के पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, सी तो मिलता है ही, साथ ही इसमें आयरन, प्रोटीन मैग्नीशियम, कैल्शियम, खनिज आदि पोषक तत्व भी होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। एक बेहतरीन एंटी-एजिंग जो लोग लंबे समय तक जवां दिखने की चाहत रखते हैं, उन्हें पालक के जूस को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स होने के साथ-साथ कुछ ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो बढ़ती उम्र की निशानियों को बेहद आसानी से कम करते हैं। यह ढीली त्वचा में कसावट व झुर्रियों को कम करने के साथ-साथ आपके चेहरे का निखार भी बढ़ाने में मदद करता है। पाचन तंत्र के लिए वरदान अधिकतर बीमारियों की जड़ व्यक्ति का पेट ही होता है। अगर पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करे तो व्यक्ति एक खुशहाल व निरोगी जीवन जी सकता है और आपकी पाचन क्रिया की प्रणाली को बेहतर बनाने में पालक का जूस फायदेमंद साबित हो सकता है। यह न सिर्फ विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है, बल्कि इसमें पाया जाने वाला फाइबर पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, अपच, एसिडिटी आदि को भी दूर करता है।   महिलाओं के लिए लाभदायक पालक का जूस महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायी है। दरअसल, भारत में करीबन 70 प्रतिशत महिलाएं आयरन की कमी से जूझ रही हैं। लेकिन अगर वह अपनी डाइट में पालक के जूस को शामिल करती हैं, तो इससे उनके शरीर की आयरन की आवश्यकता पूरी होगी। इतना ही नहीं, गर्भावस्था में भी महिला को पालक के जूस का सेवन अवश्य करना चाहिए।   वजन कम करने में सहायक अगर आप अपना वजन कम करने की फिराक में हैं तो भी पालक का जूस आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। दरअसल, पालक के जूस में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है, जिसके कारण इसका सेवन बेफिक्र होकर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें प्रोटीन भी पाया जाता है जो वजन कम करने और मसल्स को बिल्डअप करने में सहायक होता है।  

घर पर ही बनाएं बाजार जैसा जेल आईलाइनर

जब भी आंखों के मेकअप की बात होती है तो आईलाइनर का इस्तेमाल अवश्य किया जाता है। इसके बिना आईमेकअप पूरा ही नहीं होता। आमतौर पर महिलाएं बाजार में मिलने वाले आईलाइनर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो खुद घर पर भी जैल बेस्ड आईलाइनर बनाकर इस्तेमाल कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इसे बनाने का तरीका-   इनकी होगी जरूरत घर पर जेल आईलाइनर बनाने के लिए आपको ब्लैक या किसी कलर के आईशैडो, एक छोटा कंटेनर, आई प्राइमर व नारियल के तेल की आवश्यकता होगी। वैसे तो आईलाइनर बनाने के लिए ब्लैक आईशैडो का प्रयोग किया जाता है, लेकिन अगर आप कलरफुल आईलाइनर बनाना चाहती हैं तो उस कलर के आईशैडो का प्रयोग करें। इन सभी चीजों के इस्तेमाल से एक बेहतरीन आईलाइनर तैयार किया जा सकता है।   यूं बनाएं आईलाइनर होममेड जेल आईलाइनर बनाने के लिए सबसे पहले ब्लैक आईशैडो को स्क्रैप करके कंटेनर में भरें। अब इसमें थोड़ा सा प्राइमर मिलाएं और तब तक मिक्स करें, जब तक इनकी कसिस्टेंसी एक जैसी न हो जाए। अब इसमें नारियल तेल की कुछ बूंदें मिलाएं और इन्हें फिर से अच्छी तरह मिक्स करें। आपका आईलाइनर बनकर तैयार है।   होते हैं यह फायदे होममेड जेल आईलाइनर बनाने के कई तरह के फायदे हैं। सबसे पहले तो आप इस तरीके से उन कलर्स के आईलाइनर भी बना सकते हैं, जो मार्केट में आसानी से अवेलेबल नहीं होते। इसके अतिरिक्त यह जेल आईलाइनर बेहद स्मूद लुक देता है और करीबन सात से आठ घंटे तक आराम से टिकता है।   इसका रखें ध्यान   अगर आप भी घर पर आईलाइनर बनाने का मन बना रही हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसे कि आईलाइनर बनाने के लिए लूज आईशैडो का प्रयोग करें।   अगर आप अपने आईलाइनर को शिमरी इफेक्ट नहीं देना चाहतीं तो बेहतर होगा कि आप मैट आईशैडो का प्रयोग करें।   वहीं जिस आईप्राइमर का आप इस्तेमाल करें, वह क्लीयर हो। अर्थात् उसका अपना कोई कलर न हो। अन्यथा अंत में आपके आईलाइनर का वह कलर नहीं आएगा, जिसकी आपको इच्छा है।   अगर आपके पास नारियल का तेल नहीं है तो आप उसके स्थान पर वैसलीन का प्रयोग भी कर सकती हैं।  

मोबाइल में कभी न करें ये काम, न हैंग होगा और न ही हैक

नई दिल्ली डिजिटल वर्ल्ड में सबसे ज्यादा खतरा हैकिंग का होता है। हैकर्स हमारे डिवाइसों पर सेंधमारी करके निजी जानकारी चुरा लेते हैं। हमारे वाई-फाई से लेकर स्मार्टफोन कुछ भी सुरक्षित नहीं है। अगर आप अपने मोबाइल को हैकर्स से बचाना चाहते हैं तो कुछ टिप्स आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं। ये टिप्स आपके मोबाइल को सुरक्षित रखेंगे और हैकिंग का खतरा नहीं रहेगा। आइए जानते हैं हैकिंग से बचने के उपाय कैसे हैक होता है मोबाइल अगर हम अनप्रोटेक्टेड व पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं तो हमारा मोबाइल हैक हो सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति के यूएसबी से फोन चार्ज करने पर भी मोबाइल हैकिंग का खतरा रहता है। मोबाइल पर आने वाले अज्ञात मैसेज के लिंक को खोलने से भी फोन हैक हो सकता है। फोन हैक होने के संकेत अगर आपका फोन हैंग या बिना इस्तेमाल के गर्म हो रहा है तो समझिए फोन हैक हो गया है। इसके अलावा फोन खुद से रिबूट होने लगे या स्विच ऑफ हो जाए तो यह भी हैंकिंग का संकेत हो सकता है। आप अपने फोन को स्विच ऑफ कर रहे हैं और वो बंद न हो तो यह भी एक खतरे की घंटी हो सकती है। ऐसे हैक होने से बचाएं फोन आपके फोन में आने वाले मैसेज में अगर कोई अधूरे यूआरएल वाला लिंक आया है तो उसे भूलकर भी न खोलें। अज्ञात कम्प्यूटर से फोन चार्ज करते वक्त ओनली चार्जिंग ऑप्शन ही चुनें।” रेमेम्बेर पासवर्ड” ऑप्शन पर क्लिक करने से हमेशा बचें। इससे हैकिंग के खतरे बढ़ जाते हैं। पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते वक्त ऑटोमैटिक कनेक्शन ऑप्शन को बंद कर दें। भूलकर भी सार्वजनिक वाई-फाई से पैसे का लेन-देन या किसी भी तरह की खरीददारी न करें। इससे स्मार्टफोन हैक हो सकता है।