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प्राइवेट वीडियो लीक कैसे होती है? MMS स्कैंडल और सजा से जुड़े अहम तथ्य

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर आम लोगों के ही नहीं बल्कि मशहूर हस्तियों और इनफ्लुएंसर के भी निजी वीडियो के वायरल होने के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार ये वीडियो झूठे या डीपफेक तकनीक से बनाए गए निकलते हैं, लेकिन कई मामलों में ये बिना अनुमति के बनाए और फैलाए गए असली वीडियो होते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर सोफिक एसके का एक निजी वीडियो वायरल हुआ है जिसके बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि किसी की निजता का उल्लंघन करना और प्राइवेट वीडियो वायरल करना कानून की नजर में कितना गंभीर है। हालिया घटनाक्रम में बंगाल के इनफ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड का एक निजी वीडियो कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से फैल गया। वीडियो वायरल होने के कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर 'सोफिक वायरल वीडियो' जैसे सर्च शब्द ट्रेंड करने लगे। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूज़र्स के बीच मतभेद दिखा। कुछ लोगों ने इसे असली बताया जबकि अन्य ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे छेड़छाड़ किया गया या एआई (AI) तकनीक से बनाया गया बताया। हालांकि वीडियो के असली या फेक होने की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। MMS वीडियो क्या है? यह किसी की प्राइवेट वीडियो हो, जो सोशल मीडिया पर उसे बदनाम करने के लिए वायरल कर दी जाती है। इससे किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी पर सीधा हमला होता है। इस तरह की घटनाएं न सिर्फ कानूनन अपराध हैं बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार करने वाली है, लेकिन लोग इस बात को नहीं समझते। MMS लीक होने पर पीड़ित सबसे ज्यादा परेशान हो जाता है। कैसे लीक हो जाती है MMS वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी भी कंटेंट को वायरल होने से आप रोक नहीं सकते। ऐसे में अगर यह किसी की प्राइवेट वीडियो है, तो यह इतनी तेजी से फैलता है कि आप इसे शेयर करने या डाउनलोड होने से रोक नहीं सकते। एक बार वीडियो अपलोड करने के बाद इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। इसका एक कारण फोन चोरी या गुम होना भी हो सकता है। इससे आपके फोन में रिकॉर्ड प्राइवेट वीडियो का कोई गलत इस्तेमाल कर लेता है। हैकिंग के जरिए भी वीडियो लीक होना आसान होता है। कुछ लिंक या ऐप ऐसे होते हैं, जिससे किसी अनजान व्यक्ति के हाथ में आपके फोन का एक्सेस आ जाता है। वह आपके फोन का कैमरा भी यूज कर सकता है। धोखा देना- कई बार आपका साथी आपके साथ प्यार में धोखे से वीडियो बना लेता है, फिर बाद में वह इसका गलत इस्तेमाल करता है। बहुत सारे MMS लीक केसों में वीडियो किसी पार्टनर, दोस्त या जान-पहचान वाले द्वारा बनाया गया होता है। इसमें सबसे बड़ा कारण झगड़ा, बदला और ब्लैकमेल होता है। कितनी मिलती है सजा बता दें कि पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 से 3 साल तक की कैद और जुर्माना। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना। धारा 73 के तहत ऐसे अपराध गैर-जमानती और असंज्ञेय  माने जाते हैं। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है और जमानत मिलना भी आसान नहीं होता है।  

बचपन से 32 साल तक दिमाग कैसे बदलता है? जीवनभर में आते हैं 4 अहम मानसिक परिवर्तन

हमारा दिमाग जीवन भर एक जैसा नहीं रहता। यह लगातार विकसित और बदलता रहता है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है हमारे दिमाग में भी उसी के हिसाब से बदलाव आते हैं। इसी से जुड़ी एक रिसर्च में पता चला है कि व्यक्ति का दिमाग चार मुख्य स्टेजेस से गुजरता है। आपको बता दें कि ये चार स्टेज हैं, 9, 32, 66 और 83 वर्ष की उम्र। इस दौरान व्यक्ति के दिमाग में अहम बदलाव आते हैं, जो उसकी सोचने, समझने और दुनिया के देखने के तरीके को नया आकार देते हैं। आइए इन चारों स्टेजेस के बारे में समझते हैं। कैसे किया गया यह रिसर्च? यह रिसर्च कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया। उन्होंने शून्य से लेकर नब्बे साल तक की उम्र के 3,802 लोगों के दिमाग का विस्तार से स्टडी किया। इसके लिए एमआरआई स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। दिमाग के जीवनभर के चार स्टेज-     बचपन से किशोरावस्था का स्टेज (9 साल की उम्र)- यह वह उम्र है जब बच्चे का दिमाग बचपने की सीमा से निकलकर किशोरावस्था में प्रवेश करता है। इस दौरान दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेजी से संचार बढ़ता है और सीखने की गति बहुत तेज होती है।     मेच्योरिटी और स्थिरता का दौर (32 साल की उम्र)- यह उम्र एक बहुत बड़ा मोड़ मानी जाती है। इसके बाद दिमाग "एडल्ट मोड" में प्रवेश कर जाता है। यह सबसे लंबा स्टेज होता है, जो लगभग तीन दशकों तक चलता है। इस दौरान दिमाग की संरचना काफी स्थिर और मेच्योर हो जाती है। व्यक्ति की सोच, फैसले लेने की क्षमता और भावनात्मक समझ इस उम्र में पूरी तरह से विकसित हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि 32 साल की उम्र तक आते-आते व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह मेच्योर हो जाता है।     वृद्धावस्था की शुरुआत (66 साल की उम्र)- इस उम्र के आसपास दिमाग ‘अर्ली एजिंग’ यानी शुरुआती वृद्धावस्था के स्टेज में प्रवेश करता है। रिटायरमेंट का समय आने के साथ-साथ दिमाग के काम करने की गति थोड़ी धीमी होने लगती है, लेकिन एक्सपीरिएंस और नॉलेज अपने चरम पर होता है।     लेट एजिंग (83 साल की उम्र)- यह "लेट एजिंग" के स्टेज की शुरुआत है। इस उम्र में दिमाग की संरचना में गिरावट के लक्षण नजर आ सकते हैं और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। क्यों हैं ये चार स्टेज महत्वपूर्ण? इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता एलेक्सा मौसले के अनुसार, इन चरणों को समझने से हमें यह जानने में मदद मिलती है कि कुछ लोगों का दिमाग जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर अलग तरह से क्यों विकसित होता है। चाहे वह बचपन में सीखने की समस्या हो या बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होना। इससे भविष्य में दिमाग से जुड़ी बीमारियों के इलाज और बचाव में मदद मिल सकती है।  

भविष्य की इंटरनेट स्पीड इस फैसले पर: जानिए 6GHz की अहमियत

नई दिल्ली    भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में इस वक्त एक जंग चल रही है. ये जंग 6GHz बैंड्स को लेकर है. जहां भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटर्स और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां 6-गीगाहर्ट्ज बैंड्स को लेकर एक दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं. दोनों ही पक्ष सरकार से अलग-अलग तरीके से इन्हें जारी करने की मांग कर रहे हैं.  फैसला चाहे जो हो, इसका असर हमारे मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi स्पीड पर पड़ने वाला है. 6GHz बैंड्स का लाइसेंस कैसे जारी होगा इसी बात को लेकर तमाम कंपनियां आमने सामने हैं. इस वक्त दुनिया भर में 6GHz बैंड्स की चर्चा है. इंटरनेट और टेलीकॉम की दुनिया में 6GHz इस वक्त किसी रियल एस्टेट की तरह है.  दुनिया के कुछ देशों ने इसे अनलाइसेंस Wi-Fi के लिए ओपन कर दिया है, तो कुछ ने इसे फ्यूचर मोबाइल यूज के लिए रिजर्व रखा है. वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने 6G बैंड्स पर कोई फैसला नहीं लिया है. इन देशों की लिस्ट में भारत भी है.  6GHz स्पेक्ट्रम बना नया जंग का मैदान Apple, Amazon, Meta, Cisco और Intel जैसी कंपनियां चाहती हैं को भारत 6GHz वाले 1200 MHz बैंड को अनलाइसेंस रखे और इसे Wi-Fi यूज के लिए अलाउ करे. उनका कहना है कि ये बैंड घर और ऑफिस में नेटवर्क की भीड़ को कम कर सकता है. खासकर Wi-Fi 7 डिवाइसेस की एंट्री के बाद.  उनका कहना है कि भारत को ग्लोबल पैटर्न को फॉलो करना चाहिए. वहीं Jio और Vi का मानना है कि भारत को 6GHz को IMT स्पेक्ट्रम के तहत मोबाइल नेटवर्क्स के लिए जारी करना चाहिए. दोनों ही ऑपरेटर्स का कहना है कि ये बैंड 5G और फ्यूचर 6G रोलआउट के लिए बहुत जरूरी है.  कैसे होगा यूजर्स का फायदा? खासकर उन शहरों में जहां खपत ज्यादा है. टेलीकॉम कंपनियों की चिंता जायज है. बिना मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के भारतीय नेटवर्क्स पर फ्यूचर में वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस के बढ़ने से दबाव पड़ेगा. वहीं भारती एयरटेल ने फिलहाल बीच का रास्ता चुना है. कंपनी का कहना है कि भारत को स्पेक्ट्रम जारी करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. हालांकि, फैसला किसी भी पक्ष का हो, आम यूजर्स के रोजमर्रा के काम पर इसका असर जरूर पड़ेगा.  ये बैंड Wi-Fi के लिए जारी होता है, तो घर और ऑफिस में नेटवर्क वाइड होगा, उन पर दबाव कम होगा और परफॉर्मेंस बेहतर होगी. खासकर उन जगहों पर जहां मल्टी डिवाइस का इस्तेमाल होता है.  वहीं मोबाइल नेटवर्क्स के लिए अगर ये बैंड जारी होता है, तो 5G और 6G का बड़ा बूस्ट मिलेगा. मोबाइल इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी. अगर भारत इस मामले में कोई फैसला नहीं लेता है और मामले को फ्यूचर के लिए टालता है, तो लोगों को इसका फायदा मिलने में देरी होगी.

Realme C85 5G कल देगा दस्तक: मिलेगा फुल वॉटरप्रूफ डिज़ाइन और दमदार 7000mAh बैटरी

नई दिल्ली कंपनी ने कंफर्म कर दिया है कि Realme C85 5G भारत में 28 नवंबर को लॉन्च होगा। फोन की माइक्रोसाइट Flipkart पर लाइव हो चुकी है, जिससे यह कंफर्म हो गया है कि फोन इस प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। माइक्रोसाइट पर कंपनी ने इसके कुछ खास फीचर्स का भी खुलासा किया है। फोन की सेल भी कल 12PM बजे से शुरू हो जाएगी। बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग भी फोन में 7,000mAh की बैटरी मिलेगी। दावा है कि यह 22 घंटे तक का वीडियो प्लेबैक, 50 घंटे की कॉलिंग और 145 घंटे का म्यूजिक प्लेबैक टाइम प्रदान करेगी। कंपनी ने यह भी बताया कि 1 परसेंट बैटरी में फोन 9 घंटे का स्टैंडबाय और 40 मिनट की कॉलिंग देगा। इसमें 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट होगा, जो 5 मिनट के चार्ज पर 1.5 घंटे की बैटरी लाइफ देगा। हैंडसेट में 6.5W रिवर्स चार्ज सपोर्ट भी मिलेगा। मजबूत और वॉटरप्रूफ फोन डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंस के लिए IP69 प्रो लेवल रेटिंग के साथ आएगा। यह MIL-STD 810H ग्रेड शॉक रेजिस्टेंस बॉडी के साथ आएगा, यानी फोन अचानक गिरने पर टूटेगा नहीं। डिस्प्ले कंपनी ने डिस्प्ले का साइज कंफर्म नहीं किया है लेकिन यह बता दिया है कि फोन में 1200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस वाला सुपर ब्राइट एमोलेड डिस्प्ले मिलेगा। कैमरा फोटोग्राफी के लिए, फोन में पीछे की तरफ 50-मेगापिक्सेल का 'Sony AI' कैमरा होगा। फोन में AI-पावर्ड इमेज एडिटर भी होगा, जिसे AI Edit Genie कहा जाएगा। वियतनाम में फोन के फीचर्स Realme C85 5G वियतनाम में लॉन्च हो चुका है। जहां इसमें 6.8 इंच एचडी प्लस (1570×720 पिक्सेल) एलसीडी पैनल है, जिसका रिफ्रेश रेट 144 हर्ट्ज तक है और इसकी पीक ब्राइटनेस 1200 निट्स है। फोन MediaTek Dimensity 6300 चिप से लैस है, जिसे 8GB रैम और 256GB स्टोरेज के साथ जोड़ा गया है। फोटो और वीडियो के लिए, Realme C85 5G में 50-मेगापिक्सेल का मेन शूटर है। इसमें 8 मेगापिक्सेल का सेल्फी कैमरा भी है।

शादी से पहले चाहिए नेचुरल ग्लो? ट्राई करें ये 4 आसान फेस पैक

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में त्वचा की देखभाल अक्सर पीछे रह जाती है। लेकिन जब कोई शादी जैसा खास मौका सामने हो, तो हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा दमकता हुआ और तरोताजा नजर आए। ऐसे में इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए बाजार के केमिकल प्रोडक्ट्स के बजाय प्राकृतिक फेस पैक्स एक बेहतरीन ऑप्शन हैं। ये न सिर्फ चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाते हैं, बल्कि त्वचा को पोषण भी देते हैं। आइए जानते हैं शादी में जाने से पहले ट्राई करने के लिए 4 असरदार फेस पैक्स के बारे में। बेसन और दही का पैक यह फेस पैक भारतीय घरों में सदियों से सौंदर्य निखार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह त्वचा की सफाई करके उसमें इंस्टेंट ग्लो लाता है। सामग्री-     2 चम्मच बेसन     1 चम्मच ताजा दही     आधा चम्मच शहद     कुछ बूंदें नींबू का रस बनाने का तरीका- सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं और सूखने दें। सूखने के बाद गीले हाथों से हल्के-हल्के स्क्रब करते हुए ठंडे पानी से धो लें। फायदे-     बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है और डेड स्किन सेल्स को हटाता है।     दही त्वचा को प्राकृतिक रूप से मॉइस्चराइज करती है और उसमें कसाव लाती है।     शहद एक प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट है, जो त्वचा में नमी बनाए रखता है।     नींबू दाग-धब्बों को हल्का करता है। हल्दी और चंदन पाउडर का ग्लो पैक हल्दी और चंदन त्वचा के लिए रामबाण हैं। यह पैक त्वचा को अंदरूनी ग्लो देने के साथ-साथ उसे ठंडक और शांति भी देता है, जो शादी जैसे स्ट्रेसफुल इवेंट से पहले बेहद जरूरी है। सामग्री-     1 चम्मच चंदन पाउडर     आधा चम्मच हल्दी पाउडर     1 चम्मच गुलाब जल     1 चम्मच दूध या मलाई बनाने का तरीका- चंदन पाउडर और हल्दी को गुलाब जल और दूध में मिलाकर एक चिकना पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट तक सूखने दें। सूख जाने पर हल्के हाथों से रब करते हुए ठंडे पानी से धो लें। फायदे-     चंदन पाउडर त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, रैशेज और जलन को शांत करता है।     हल्दी त्वचा को डिटॉक्सीफाई करती है और उसमें प्राकृतिक चमक लाती है।     गुलाब जल त्वचा के पीएच संतुलन को बनाए रखता है और त्वचा को तरोताजा करता है।     दूध या मलाई त्वचा को मुलायम बनाती है और उसमें नमी बरकरार रखती है। शहद और दालचीनी का ग्लो बूस्टर अगर आपको मुहांसों की समस्या है और त्वचा बेजान सी लगती है, तो यह पैक आपके लिए परफेक्ट है। शहद और दालचीनी दोनों ही एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर हैं। सामग्री-     1 चम्मच कच्चा शहद     आधा चम्मच दालचीनी पाउडर     आधा चम्मच नींबू का रस बनाने का तरीका- शहद और दालचीनी पाउडर को अच्छी तरह मिला लें। अगर त्वचा ऑयली है तो इसमें नींबू का रस भी मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट बाद हल्के गुनगुने पानी से धो लें। फायदे-     शहद त्वचा में नमी बनाए रखते हुए बैक्टीरिया से लड़ता है।     दालचीनी ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देकर त्वचा में नैचुरल ग्लो लाती है और मुहांसों को कम करती है।     नींबू का रस त्वचा के एक्स्ट्रा ऑयल को कम करता है और ब्लैकहेड्स व्हाइटहेड्स से छुटकारा दिलाता है। पपीता और ओटमील का एक्सफोलिएटिंग पैक यह पैक त्वचा की डेड स्किन को हटाकर उसे कोमल और चमकदार बनाने का काम करता है। पपीते में मौजूद एंजाइम त्वचा के लिए नेचुरल एक्सफोलिएंट का काम करते हैं। सामग्री-     2 चम्मच पका हुआ पपीता, मैश किया हुआ     1 चम्मच ओटमील     1 चम्मच दही बनाने का तरीका- पपीते, ओटमील और दही को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट तक लगा रहने दें। फिर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज करते हुए ठंडे पानी से धो लें। फायदे-     पपीता त्वचा को एक्सफोलिएट करके उसे चमकदार बनाता है और फाइन लाइन्स को कम करता है।     ओटमील त्वचा की नमी बरकरार रखता है और हल्के एक्सफोलिएंट का काम करता है।     दही त्वचा में कसाव लाती है और उसे मुलायम बनाती है।  

एक मिनट की जांच बताएगी हार्ट हेल्थ की पूरी कहानी, बेहद आसान तरीका

दिल की सेहत की समय-समय पर जांच करना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कोई परेशानी हो, तो वक्त पर उसका इलाज करवाया जा सके। अपने दिल का हाल जानने के लिए आप घर पर खुद से एक छोटा-सा टेस्ट कर सकते हैं। इसे स्टेयर क्लाइंबिंग टेस्ट कहते हैं। जी हां, एक साधारण-सा एक मिनट का टेस्ट आपकी हार्ट हेल्थ के बारे में काफी कुछ बता सकता है। आइए जानें कि यह टेस्ट कैसे करना है और इसके रिजल्ट आपके दिल के बारे में क्या बताते हैं। यह टेस्ट क्या है? एक रिसर्च में इस टेस्ट को हार्ट हेल्थ जांचने का एक विश्वसनीय तरीका माना गया है। इस टेस्ट का मकसद यह पता लगाना है कि आप एक मिनट में कितनी जल्दी चार मंजिल की सीढ़ियां चढ़ पाते हैं। टेस्ट कैसे करें? सबसे पहले एक चार मंजिल की सीढ़ी ढूंढें। सुनिश्चित करें कि सीढ़ियां सूखी और साफ हों ताकि फिसलने का खतरा न रहे। आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।     बिल्कुल रिलैक्स पोजिशन में शुरुआत करें। जोर-जोर से सांस न लें या दौड़ न लगाएं। बस अपनी सामान्य गति से सीढ़ियां चढ़ना शुरू करें।     जैसे ही आप पहला कदम चढ़ें, एक स्टॉपवॉच या फोन में टाइमर शुरू कर दें।     लगातार और बिना रुके 60 सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश करें।     चौथी मंजिल पर पहुंचने में लगे समय को नोट कर लें। अब जानें, आपका परिणाम क्या कहता है? स्टडी के अनुसार, यदि आप 60 सीढ़ियां चढ़ने में 40-45 सेकंड से कम का समय लेते हैं और सांस फूलने या सीने में दर्द जैसी कोई तकलीफ नहीं होती, तो यह संकेत है कि आपका दिल स्वस्थ है और आपकी फिटनेस का स्तर अच्छा है। इसका मतलब है कि आपका दिल शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को जरूरी मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम है। वहीं, अगर आपको इस टेस्ट को पूरा करने में एक मिनट से ज्यादा समय लगता है या फिर चढ़ाई के दौरान आपकी सांस बहुत ज्यादा फूलने लगती है, सीने में भारीपन या दर्द महसूस होता है, चक्कर आते हैं, या आपको बीच में ही रुकना पड़ जाता है, तो यह दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। क्यों काम करता है ये टेस्ट? सीढ़ियां चढ़ना एक तरह की एरोबिक एक्सरसाइज है। इसमें शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए हमारा दिल तेजी से धड़कता है और फेफड़े ज्यादा ऑक्सीजन लेने का काम करते हैं। अगर दिल स्वस्थ है, तो वह इस चुनौती को आसानी से हैंडल कर लेता है। लेकिन अगर दिल कमजोर है या उसमें कोई समस्या है, तो वह शरीर की मांग के अनुसार खून की सप्लाई नहीं कर पाता, जिसके कारण सांस फूलना, थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सावधानियां और सीमाएं     यह टेस्ट केवल एक शुरुआती जांच है, यह किसी मेडिकल टेस्ट का विकल्प नहीं है।     अगर आपको पहले से ही दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों में दर्द या सांस की गंभीर बीमारी है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के यह टेस्ट न करें।     टेस्ट के दौरान अगर चक्कर आएं, सीने में तेज दर्द हो या बहुत ज्यादा परेशानी हो, तो तुरंत रुक जाएं और आराम करें।  

वैज्ञानिकों का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाएगी इंसान को 150 साल तक जवान

नई दिल्ली किसी भी इंसान की लंबी से लंबी उम्र 100 साल के आसपास होती है। बहुत कम लोग होते हैं जो इतने साल जिंदा रहते हैं। जबकि इंसान की औसत उम्र तो 72 साल के आसपास ही मानी जाती है। लेकिन क्या हो अगर कोई आपसे कहे कि भविष्य में इंसान 150 साल तक जिंदा रहेंगे। इस बात पर यकीन करना जरा मुश्किल है, लेकिन AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने तो पूरा खेल ही बदल दिया है। अब दावा किया जा रहा है कि AI की मदद से इंसान की उम्र बढ़ाई जा सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि AI ऐसा कैसे कर पाएगा? चलिए जानते हैं। वैज्ञानिकों ने खोजा यह तरीका डेटा सोसाइटी की रिपोर्ट बताती है कि हमारा शरीर इसलिए बूढ़ा होता है क्योंकि हमारे सेल के अंदर मौजूद डीएनए धीरे-धीरे खराब होता जाता है। जब खाना-पानी और आराम बहुत होता है, तो शरीर नई कोशिकाएं बनाने में लगा रहता है, मरम्मत नहीं करता। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका ढूंढा है। वे शरीर को थोड़ा 'झटका' देते हैं, जिससे कोशिकाएं खुद-ब-खुद मरम्मत करने लगती हैं। अभी इसकी दवा ट्रायल पर है। AI कैसे लोगों की उम्र बढ़ाएगा? पहले CRISPR नाम की तकनीक से डीएनए बदलते थे, लेकिन वह एक ही समय की तस्वीर दिखाती थी। असल जिंदगी में जीन का व्यवहार हर पल बदलता रहता है, खाने, तनाव और मौसम के साथ। यहां AI कमाल कर रहा है। AI पूरे समय जीन की हरकत पर नजर रखता है और सही समय पर सही इलाज बताता है। इससे इलाज एक-एक व्यक्ति के लिए अलग-अलग और बिल्कुल सटीक बन जाता है। साइड इफेक्ट भी बहुत कम होते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि आने वाले समय में 60-70 साल के लोग भी उतने ही तेज दिमाग वाले रहेंगे जितने 20-25 साल की उम्र में होते हैं। याददाश्त, सोचने की ताकत सब बरकरार रहेगी। लोग सिर्फ लंबा जीवन नहीं, बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जिएंगे। 100-120 साल की उम्र में तंदरुस्त रहेंगे लोग डेटा सोसाइटी के को-फाउंडर दिमित्री एडलर कहते हैं, 'AI आपको सुपरहीरो नहीं बनाएगा, लेकिन आपको ज्यादा स्वस्थ, तेज दिमाग वाला और मजबूत बना देगा।' बहुत जल्दी हम उन लोगों को देखेंगे जो 100-120 साल की उम्र में भी जवान जैसे खेल-कूद कर रहे होंगे।

चिप्स-बिस्किट से सावधान! प्रोसेस्ड फूड कैसे चुपचाप बिगाड़ रहा है आपकी सेहत?

आधुनिक जीवनशैली ने मोटापे की ऐसी चुनौती दी है, जिससे पार पार पाना आसान नहीं है। इससे डायबिटीज, हार्ट, लिवर और किडनी जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ रहा है। लांसेट ने इसे लेकर अध्ययन की एक श्रृंखला प्रकाशित की है, जिसमें दो बातें स्पष्ट हैं, पहली प्रसंस्करित भोजन (अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड) की प्रचुरता ने हमारे स्वस्थ भोजन के विकल्पों को सीमित कर दिया है और दूसरी, स्वस्थ आहार के लिए व्यक्तिगत से लेकर नीतिगत स्तर तक जागरूक होने की अब अनिवार्यता बढ़ गई है। यह जानते हुए कि इस तरह के भोजन सेहत के लिए नुकसानदेह हैं, फिर भी चिप्स, बिस्किट, पैकेज्ड पेय, इंस्टैंट नूडल्स जैसे तमाम अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ हमारी रसोई में जगह बढ़ाते जा रहे हैं। भारत में मोटापा और डायबिटीज बढ़ाने में अल्ट्रा प्रोसेस्ड भोजन सिर्फ एक वजह भर नहीं है, बल्कि प्रमुख कारण हैं। लांसेट के अनुसार, अगर गैर- संचारी रोगों की चपेट में आने से बचना है, तो अल्ट्रा प्रोसेस्ड भोजन को लेकर तुरंत चेतने की आवश्यकता है। जानें अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के बारे में इस तरह के खाद्य पदार्थों में पांच से अधिक ऐसे घटक होते हैं, जो रसोई में नहीं पाए जाते, जैसे- प्रिजर्वेटिव एडिटिव, डाइ, स्वीटनर और इमल्सीफायर। बिस्किट, पेस्ट्री, सास, इंस्टैंट सूप, नूडल्स, आइसक्रीम, ब्रेड, फिजी ड्रिंक्स जैसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य कई सारे घरों में लोग रोज प्रयोग करते हैं। अनेक सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में लोग अब फाइबर और प्रोटीन के बजाय अत्यधिक शुगर, नुकसानदेह वसा और नमक का सेवन करने लगे हैं। खास बात हैं कि पैकेटबंद और अत्यधिक कैलोरी वाले इस तरह के भोजन छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच चुके हैं। 12 तरह की बीमारियों का कारण है अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड लांसेट में प्रकाशित इस समीक्षात्मक अध्ययन में 43 वैश्विक विशेषज्ञों ने 104 अध्ययनों के आधार पर प्रसंस्करित भोजन के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया है। इससे 12 तरह की संभावित समस्याओं को चिह्नित किया गया है, जिसमें टाइप-2 डायबिटीज, कार्डियोवैस्कुलर किडनी की बीमारी, डिप्रेशन और असामयिक मौत जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। कुछ विज्ञानियों का मानना है कि आज की जीवनशैली के चलते अल्ट्रा प्रोसेस्ड भोजन से मुक्त हो पाना लगभग असंभव है। वहीं, अध्ययन के आलोचकों की मानें तो इससे पुरानी बीमारियों का जोखिम तो बढ़ता है, पर सभी तरह के यूपीएफ से खतरा बढ़ता है, पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता।     28.6 प्रतिशत भारतीय मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं आइसीएमआर इंडिया डायबिटीज (2023) के अध्ययन के मुताबिक।     11.4 प्रतिशत भारतीयों में डायबिटीज और 15.3 प्रतिशत में प्री-डायबिटीज की स्थिति बन चुकी है वर्तमान में।     40 प्रतिशत भारतीयों में पेट के पास वसा का जमाव (एब्डोमिनल ओबिसिटी) हो चुका है।     3.4 प्रतिशत बच्चों में मोटापे की समस्या चिह्नित की गई एनएचएफएस-5 में, वहीं एनएचएफएस-4 में यह आंकड़ा 2.1 प्रतिशत पर था । कैलोरी और पोषण के बीच बढ़ता असंतुलन अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड में शुगर, वसा, नमक की अधिकता होने के चलते स्वाद बढ़ जाता है, जिससे लोग सेवन के लिए आकर्षित होते हैं। इसमें रिफाइंड कार्ब और शुगर की अधिकता के कारण ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, जिससे शरीर का इंसुलिन रिस्पांस प्रभावित होता है। मेटाबोलिज्म प्रभावित होने के चलते टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम रहता है। क्यों जरूरी है पारंपरिक भारतीय भोजन सबसे बड़ी समस्या यही है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड तेजी से पारंपरिक भारतीय भोजन यानी अनाज, दालों और सब्जियों की जगह लेता जा रहा है। सही ढंग से तैयार पारंपरिक भारतीय भोजन में फाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रचुरता रहती है । इससे मेटाबोलिक समस्या होने की आशंका भी कम होती है।  

हेल्दी समझकर रोज पीते हैं ग्रीन टी? ये 7 साइड इफेक्ट्स कर सकते हैं सेहत खराब

ग्रीन टी को हेल्दी रूटीन का हिस्सा माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, कैटेचिन्स और पॉलीफेनॉल्स शरीर को टॉक्सिन्स से बचाते हैं, मेटाबॉलिज्म बढ़ाते हैं और वजन कम करने में मदद करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ग्रीन टी सभी के लिए सुरक्षित हो सकती है, क्योंकि कुछ हेल्थ कंडीशन्स में इसका सेवन उल्टा नुकसान पहुंचा सकता है। जी हां, यहां ऐसे ही कुछ लोगों की जानकारी दी गई है जिनको ग्रीन टी से परहेज करना चाहिए । आइए जानते हैं। प्रेग्नेंट महिलाएं ग्रीन टी में कैफीन और टैनिन्स मौजूद होते हैं, जो गर्भावस्था में फोलिक एसिड के एब्जॉर्पशन को कम कर सकते हैं। इससे भ्रूण में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अधिक कैफीन प्रीमैच्योर डिलीवरी या कम वजन वाले बच्चे का कारण भी बन सकता है। ब्रेस्टफीडन कराने वाली महिलाएं कैफीन मां के दूध में पहुंचकर शिशु में नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और पेट की समस्या पैदा कर सकता है। खासकर नवजात शिशुओं के लिए यह असर ज्यादा हानिकारक हो सकता है। कैफीन सेंसिटिव लोग जो लोग कैफीन के प्रति संवेदनशील होते हैं, उन्हें थोड़ी सी मात्रा में भी घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, कंपकंपी और चक्कर हो सकती है। उनके लिए ग्रीन टी का नियमित सेवन समस्या को बढ़ा सकता है। एनीमिया पेशेंट ग्रीन टी में मौजूद टैनिन्स आहार से मिलने वाले आयरन के एब्जॉर्पशन को बाधित करते हैं। इससे आयरन की कमी और गंभीर हो सकती है, खासकर अगर मरीज पहले से ही हीमोग्लोबिन के लो लेवल से जूझ रहा हो। पेट या लिवर की समस्या वाले लोग खाली पेट ग्रीन टी पीने से पेट में एसिडिटी, गैस, मितली और जलन की समस्या बढ़ सकती है। कुछ मामलों में ज्यादा मात्रा में सेवन लिवर एंजाइम्स पर नकारात्मक असर डालकर लीवर डैमेज का खतरा भी बढ़ा देता है। ब्लड प्रेशर या हार्ट पेशेंट्स ग्रीन टी में मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को प्रभावित कर सकता है। साथ ही यह कुछ हार्ट डिजीज की दवाओं के असर को भी बदल सकता है, जिससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है। ब्लड थिनर दवा लेने वाले लोग ग्रीन टी में मौजूद विटामिन के, ब्लड थिनर दवाओं (जैसे वारफेरिन) के असर को कम कर देता है, जिससे ब्लड क्लोटिंग का खतरा बढ़ सकता है। ग्रीन टी फायदेमंद है, लेकिन सही व्यक्ति और सही मात्रा में। अगर आपको यहां बताई गई समस्याएं या इनमें से एक हैं, तो डॉक्टर से सलाह लिए बिना इसका सेवन न करें। याद रखें, हेल्दी ड्रिंक भी गलत परिस्थिति में हानिकारक बन सकती है।  

Google Meet अचानक ठप — मीटिंग्स रुकीं, यूजर्स सोशल मीडिया पर जताई नाराज़गी

नई दिल्ली  गूगल का पॉपुलर फ्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म Google Meet भारत में ठप हो गया है। इसकी शिकायत करने के लिए यूजर्स ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। भारत के सैंकड़ों यूजर्स इस आउटेड से प्रभावित हुए हैं। इस आउटेज के कारण कई यूजर्स वीडियो कॉल में शामिल नहीं हो पाए या उसे होस्ट नहीं कर पाए क्योंकि प्लेटफॉर्म में बड़े पैमाने पर आउटेज हुआ। यूजर्स का कहना है कि स्क्रीन पर “502, that’s an error” मैसेज दिखाई दे रहा है।   67% यूजर्स ने वेबसाइट से जुड़ी दिक्कतों को फ्लैग किया आउटेड को ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर ने दोपहर 12:08 बजे तक 1700 आउटेज रिपोर्ट रिकॉर्ड की थीं, जिसमें 67% यूजर्स ने वेबसाइट से जुड़ी दिक्कतों को फ्लैग किया और 32% ने सर्वर से जुड़ी दिक्कतों की रिपोर्ट की, जिससे गूगल मीट के खिलाफ शिकायतों में तेजी से बढ़ोतरी दिखती है। यह एक हफ्ते बाद हुआ जब Cloudflare में एक बड़ी टेक्निकल दिक्कत के बाद इंटरनेट के कई हिस्से डाउन हो गए थे।   एक्स पर शिकायत कर रहे यूजर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूजर्स शिकायत कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि यह समस्या बड़े पैमाने पर है। लोग पूछ रहे हैं क्या “Google Meet सबके लिए डाउन है?” और “Google Meet डाउन क्यों है??” कई ट्वीट में @GoogleIndia को टैग करके सफाई मांगी गई। हर बड़ी टेक कंपनी डाउन क्यों हो रही हैं? कई लोगों ने यह भी सवाल किया, “Google meet डाउन है!! इस महीने हर बड़ी टेक कंपनी क्यों डाउन हो रही है?” एक और ने कहा, “इस महीने हर बड़ी टेक कंपनी डाउन हो रही है!!! मैं अभी भी GCP आउटेज का इंतजार कर रहा हूं!!!” एक और ने कमेंट किया, “क्या Google Meet किसी और के लिए भी डाउन है? पहले Cloudflare, फिर AWS… अब GCP भी चाहता है।” पिछले हफ्ते, Cloudflare को लगातार सर्विस में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन दिक्कतों की वजह से कई इलाकों के सैकड़ों यूजर्स उन वेबसाइट और सर्विस को एक्सेस नहीं कर पाए जो कंपनी के नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर थीं। Cloudflare के यह बताने के बाद कि एक छिपी हुई सॉफ्टवेयर कमी ने उसके सिस्टम पर असर डाला है, सोशल नेटवर्क एक्स और एआई चैटबॉट ChatGPT समेत बड़े प्लेटफॉर्म में बड़े पैमाने पर दिक्कतें आईं।