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E-Passport आया भारत में: नई चिप तकनीक के साथ—जानें पुराने पासपोर्ट धारकों के लिए नियम

नई दिल्ली     पासपोर्ट सिस्टम को अपग्रेड करते हुए भारत नेक्स्ट जेनरेशन ई-पासपोर्ट को रोलआउट कर रहा है. ये पासपोर्ट कटिंग एज सिक्योरिटी फीचर्स से लैस होगा. इसमें इंटरलॉकिंग माइक्रोलेटर्स, रीलिफ टिंट्स और RFID चिप लगी होगी. इस चिप में एन्क्रिप्टेड बायोमैट्रिक्स डेटा और दूसरी जानकारी होंगी.  रोलआउट के तहत सभी नए पासपोर्ट्स अब ई-पासपोर्ट होंगे. वहीं मौजूदा नॉन-इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट्स एक्सपायर डेट तक वैध रहेंगे. सरकार जून 2025 तक पूरी तरह से ई-पासपोर्ट में ट्रांजिट करने की योजना में है.  हाई-टेक फीचर्स से लैस होगा नया पासपोर्ट सभी ई-पासपोर्ट रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन चिप और एटिना के साथ आएंगे. इनमें यूजर्स का बायोमैट्रिक्स और पर्सनल डेटा एन्क्रिप्शन के साथ स्टोर होगा. इसमें यूजर्स की फोटो और फिंगरप्रिंट जैसी डिटेल्स स्टोर होंगी. कॉन्टैक्टलेस डेटा रीडिंग क्षमताओं की वजह से इमिग्रेशन काउंटर पर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज होगी.  साथ ही फ्रॉड और टेम्परिंग के मामलों में कमी आएगी. अब तक विदेश मंत्रालय ने 80 लाख ई-पासपोर्ट भारत में जारी कर चुका है. जबकि विदेश स्थित भारतीय मिशनों के माध्यम से 60,000 से अधिक ई-पासपोर्ट जारी किए हैं.  फ्रॉड्स को रोकना होगा आसान विदेश मंत्रालय ने एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए सिस्टम की वजह से पासपोर्ट फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी. साथ ही ऐसे मामलों को रोका जा सकेगा, जिसमें एक ही शख्स के पास एक से अधिक पासपोर्ट होते हैं. अगर किसी के पास पहले से पासपोर्ट मौजूद है, तो मौजूदा सिस्टम तुरंत उसे डिटेक्ट कर लेगा.  मई 2025 में शुरू हुए पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्जन 2.0 (PSP V2.0) के तहत अब 37 रिजनल पासपोर्ट ऑफिस, 93 पासपोर्ट सेवा केंद्र और 451 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र काम कर रहे हैं. इस प्रोग्राम के ग्लोबल वर्जन GPSP V2.0 को 28 अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया है. इस सिस्टम की वजह से लोगों को बेहतर पासपोर्ट एक्सपीरियंस मिलेगा. नया सिस्टम AI चैटबॉट और वॉयस बॉट एप्लिकेशन के साथ आएगा. बेहतर सिक्योरिटी के लिए AI का इस्तेमाल किया जाएगा. इस सिस्टम को DigiLocker, Aadhaar और PAN के साथ डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए इंटीग्रेट किया जा सकेगा.

देसी कंपनी Lava का नया ऑफर, Agni 4 को पहले यूज करें और घर पर सर्विस पाएं

नई दिल्ली देसी मोबाइल फोन ब्रांड Lava ने एक खास ऑफर का ऐलान किया है. कंपनी जल्द ही अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन Lava Agni 4 को लॉन्च करने वाली है. लॉन्च से पहले कंपनी Lava Agni 4 का अर्ली एक्सेस लोगों को दे रही है. यानी आप खरीदने से पहले इस फोन को इस्तेमाल कर सकेंगे.  ब्रांड ने इस पूरे कैंपेन को Demo@Home नाम दिया है. इसके तहत लावा की टीम फोन खरीदने से पहले घर पर Agni 4 को उपलब्ध कराएगी. यहां आपको हैंडसेट इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा. आप उसका डिजाइन और उसकी क्षमताओं को चेक कर पाएंगे. इसके बाद अगर फोन पसंद आता है, तो आप उसे खरीद सकते हैं.  खरीदने से पहले यूज कर पाएंगे फोन ये स्मार्टफोन 20 नवंबर को लॉन्च होने वाला है. हालांकि, कंपनी चुनिंदा शहरों में ही Demo@Home सर्विस का ऐक्सेस दे रही है. 20 नवंबर से 24 नवंबर के बीच आप बेंगलुरू, दिल्ली और मुंबई में Demo@Home को इस्तेमाल कर सकेंगे. कस्टमर्स को इस सर्विस के लिए रजिस्टर करना होगा.  ये इनवाइट ऑनली एक्सपीरियंस है. चुनिंदा लोगों को कंपनी की ओर से संपर्क किया जाएगा. उन्हें फोन का एक्सक्लूसिव एक्सपीरियंस दिया जाएगा. कंपनी का कहना है कि कंज्यूमर को इसके बाद फोन खरीदना जरूरी नहीं होगा.  कितनी होगी कीमत और क्या होंगे फीचर्स?  रिपोर्ट्स की मानें, तो Lava Agni 4 की कीमत 30 हजार रुपये तक हो सकती है. इसमें 6.67-inch का AMOLED डिस्प्ले दिया जाएगा, जो 1.5K रेज्योलूशन और 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें MediaTek Dimensity 8350 प्रोसेसर दिया जा सकता है.  डिवाइस LPDDR5X RAM यानी फास्ट रैम और UFS 4.0 स्टोरेज (लेटेस्ट स्टोरेज चिप) के साथ आएगा. फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकता है, जिसका प्राइमरी लेंस 50MP का है. सेकेंडरी कैमरा 8MP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस होगा.  फ्रंट में कंपनी 50MP का सेल्फी कैमरा दे सकती है. कनेक्टिविटी की बात करें, तो इसमें USB 3.2 और Wi-Fi 6E जैसे फीचर्स मिलेंगे. डिवाइस 5000mAh की बैटरी और फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें 66W की फास्ट चार्जिंग मिल सकती है.

टीवी स्क्रीन को साफ करते समय ना करें यह छोटी−छोटी गलतियां

टीवी के सामने बैठकर हम सभी अपने फेवरिट सीरियल व मूवी आदि देखते हैं, लेकिन जरा सोचिए कि आप टीवी खोले और आपको स्क्रीन गंदी नजर आए या फिर स्क्रीन के उपर उंगलियों के निशान हों तो यकीनन आपको स्क्रीन पर उतनी क्लीयरिटी नजर नहीं आएगी और फिर अपना फेवरिट सीरियल देखने का भी वह मजा नहीं आएगा, जो वास्तव में आना चाहिए। तो चलिए आज हम आपको टीवी स्क्रीन को साफ करने का आसान तरीका बता रहे हैं−   एलईडी व एलसीडी टीवी एलईडी व एलसीडी टीवी काफी डेलिकेट होते हैं और उन्हें सामान्य तौर पर गीला करके क्लीन करना उचित नहीं माना जाता। इसके लिए सबसे पहले आप उसकी डस्ट साफ करें और इसके लिए माइक्रोफाइबर युक्त सूखे कपड़े का इस्तेमाल करें। इसके बाद अगर आपको स्क्रीन पर किसी तरह के निशान या धब्बे नजर आ रहे हैं तो उसके लिए आप वाइप्स का सहारा ले सकते हैं। आजकल इलेक्टानिक सामान के लिए वाइप्स अलग से मिलते हैं, आप उसका इस्तेमाल करें। इसके अलावा टीवी के बटन व पिछले हिस्से को क्लीन करने के लिए माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करना अच्छा रहेगा। आप प्लाज्मा स्क्रीन को भी एलईडी टीवी की तरह ही आसानी से क्लीन कर सकते हैं। ट्यूब टेलीविजन इस तरह से टीवी पुराने समय में काफी चलन में थे, लेकिन आज भी लोग इनका इस्तेमाल करते हैं। अगर आपके पास ट्यूब टेलीविजन है तो आप इसे बेहद आसानी से साफ कर सकते हैं। यह बिल्कुल उसी तरह साफ किया जाता है, जिस तरह आप अपने घर का शीशा क्लीन करते हैं। इसके लिए आप माइक्रोफाइबर क्लीनिंग क्लॉथ को हल्का गीला करके उससे टीवी स्क्रीन को साफ करें या फिर आप विंडो क्लीनिंग स्प्रे की मदद से भी भी ट्यूब टीवी को क्लीन कर सकते हैं।   छोटी−छोटी बातें अगर आप चाहते हैं कि आपका टीवी हमेशा चमकता रहे तो आप सप्ताह में कम से कम एक बार टीवी स्क्रीन को माइक्रोफाइबर कपड़े की मदद से साफ करें। कभी भी टीवी स्क्रीन पर सीधे कुछ भी स्प्रे न करें, भले ही वह ट्यूब टीवी क्यों न हो। जरूरत से ज्यादा स्प्रे आपके टीवी के कैबिनेट को नुकसान पहुंचा सकते हैं, यहां तक कि टीवी सेट को डैमेज कर सकते हैं। अपनी टीवी स्क्रीन पर ऐसे प्रॉडक्ट का इस्तेमाल न करें, जिसमें अमोनिया, एल्कोहॉल व एसीटोन का इस्तेमाल किया गया हो।  

जिम का मिलेगा डबल फायदा, अगर एक्सरसाइज के बाद खाएंगे यह चीजें

आज के समय में लोग बॉडी बनाने और खुद को फिट रखने के लिए जिम का सहारा लेते हैं। लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग होते हैं, जो वर्कआउट तो करते हैं, लेकिन उन्हें कुछ खास फायदा नजर नहीं आता। हो सकता है कि आपके वर्कआउट में कोई कमी न हो, लेकिन आप अपने आहार पर ध्यान न दे रहे हों। जो लोग वर्कआउट करते हैं या जिम जाते हैं, उन्हें अपनी डाइट पर अधिक फोकस करना चाहिए। जरा सी लापरवाही से आपको विपरीत परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। तो चलिए जानते हैं जिम के बाद क्या खाएं− प्रोटीन रिच फूड अगर आप एक्सरसाइज के बाद अपने मसल्स की रिकवरी करना चाहते हैं तो सबसे पहले तो आपको एक्सरसाइज के आधे घंटे के भीतर कुछ न कुछ खाना चाहिए। दरअसल, वर्कआउट के दौरान हमारा शरीर न्यूटिएंट्स का इस्तेमाल करता है और इसलिए पोस्ट वर्कआउट मील शरीर को हील करने में मदद करता है। बेहतर होगा कि आप वर्कआउट के बाद आधे घंटे के भीतर एक प्रोटीन रिच फूड जरूर लेना चाहिए। अगर आप खुद को टोनअप करना चाहते हैं तो कार्ब्स से बचें। आप प्रोटीन रिच डाइट में पीनट बटर सैंडविच, सोया मिल्क, पनीर या बेसन चीला खा सकते हैं। खाएं सैंडविच अगर आप कुछ लाइट और पौष्टिक खाना चाहते हैं तो वर्कआउट के बाद सैंडविच खाया जा सकता है। आप ब्राउन ब्रेड में कई तरह की वेजिटेबल्स का इस्तेमाल करके खाएं। ब्राउन राइस आप वर्कआउट के बाद ब्राउन राइस भी खा सकते हैं। यह एंटी−ऑक्सीडेंट से समृद्ध होते हैं और इनमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जो आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाते हैं और वजन घटाने में भी मदद करते हैं। पानी भी है जरूरी चूंकि एक्सरसाइज के दौरान आप काफी पसीना बहाते हैं, जिसके कारण शरीर से इलेक्टालाइट की कमी हो जाती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि आप खुद को हाइडेट रखें। वैसे तो शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए पानी पिया जा सकता है। लेकिन अगर आप चाहें तो पानी के स्थान पर नारियल पानी पीएं। यह पोटेशियम का एक अच्छा स्त्रोत है, जो शरीर में फलूयड को बैलेंस करने में मदद करता है। साथ ही नारियल पानी के सेवन से आपको वर्कआउट के बाद होने वाले क्रैम्प की संभावना भी काफी कम हो जाती है। इसके अलावा आप पोस्ट वर्कआउट डाइट के रूप में लो फैट मिल्क और फ्रूट्स की मदद से कुछ स्मूदी बनाकर उसका सेवन भी कर सकते हैं।  

प्रीमियम फोन खरीदने का सुनहरा मौका—33 हजार से ज्यादा की छूट का फायदा उठाएँ

नई दिल्ली बिना ज्यादा बजट खर्च किए प्रीमियम स्मार्टफोन में अपग्रेड करने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। Amazon पर Samsung Galaxy S24 5G को भारी 44 फीसदी की छूट के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। यह फोन अपनी तेज परफॉर्मेंस, भरोसेमंद कैमरा सेटअप और शार्प डिस्प्ले के लिए जाना जाता है, जो कम कीमत में फ्लैगशिप अनुभव चाहने वालों के लिए इसे एक आकर्षक विकल्प बनाता है। कीमत और ऑफर Samsung Galaxy S24 5G का 8GB/128GB वेरिएंट लॉन्च में 74,999 रुपये का था। लेकिन अब यह फोन अमेजन पर 44 फीसदी की छूट के बाद केवल 41,810 रुपये में उपलब्ध है। इसके साथ ही अगर ग्राहक Amazon Pay ICICI बैंक कार्ड से पेमेंट करते हैं तो उन्हें 1,254 रुपये तक का कैशबैक भी मिलेगा। कैशबैक के बाद इस फोन की कीमत लगभग 40,571 रुपये होगी। इसके अलावा, अगर आप अपना पुराना फोन एक्सचेंज करते हैं तो अतिरिक्त बचत के तौर पर 39,150 रुपये तक की छूट भी मिल सकती है, जो आपके पुराने फोन की स्थिति और मॉडल पर निर्भर करेगी। स्पेसिफिकेशन और फीचर्स Samsung Galaxy S24 5G में 6.2 इंच का डायनामिक AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 2600 निट्स पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। यह फोन Snapdragon 8 Gen 3 चिपसेट और 4000mAh बैटरी से लैस है, जो 25W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। सॉफ़्टवेयर के तौर पर यह Android 16 आधारित Samsung One UI 8 पर चलता है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में ब्लूटूथ 5.3, Wi-Fi 6, NFC और USB Type-C पोर्ट दिए गए हैं। विकल्प और मुकाबला इस प्राइस रेंज में Samsung Galaxy S24 5G का मुकाबला Google Pixel 9A, Vivo V60 5G, Motorola Razr 60 और Realme GT 7 Pro जैसे दमदार स्मार्टफोन्स से होता है।

छोटे बच्चों के कान में तेल डालना कितना सही? एक्सपर्ट्स ने किया साफ

बच्चों की देखभाल में माता-पिता हर चीज़ को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। नहाने से लेकर खाना खिलाने तक, हर काम में सावधानी बरतनी पड़ती है। इसी तरह बच्चे के कानों की सफाई भी एक ऐसा विषय है जिसमें कई लोग पारंपरिक तरीकों का उपयोग करते हैं। पुराने समय से घरों में बच्चों के कान और नाक में सरसों का तेल डालने की परंपरा चली आ रही है। कई परिवार आज भी यह मानकर ऐसा करते हैं कि इससे कान की गंदगी (earwax) ढीली होकर आसानी से बाहर निकल जाएगी। लेकिन आधुनिक चिकित्सा क्या कहती है? क्या यह तरीका वास्तव में सही और सुरक्षित है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं। क्या बच्चों के कान में तेल डालना सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कान में तेल डालने की प्रक्रिया को कर्ण पूर्ण कहा जाता है। यह कभी-कभी earwax को नरम करने में मदद कर सकती है और कुछ लोगों में कान के सूखापन को भी कम कर सकती है। हालांकि, यह आवश्यक नहीं कि यह तरीका हर बच्चे या हर उम्र में सुरक्षित हो। खासकर छोटे बच्चों के कान बहुत नाज़ुक और संवेदनशील होते हैं। अगर उनके कान में बिना डॉक्टर की सलाह के तेल डाला जाए, तो इससे कान में जलन, संक्रमण या अन्य समस्याएँ हो सकती हैं। कई बार तेल कान के अंदर जाकर फंस जाता है, जिससे आगे चलकर गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इसी कारण डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों के कानों में तेल डालने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 1 साल से छोटे बच्चे को न दें ये 6 Foods, हो सकते हैं खतरनाक! 6 महीने से छोटे बच्चों में तेल बिल्कुल नहीं डालना चाहिए छह महीने से कम उम्र के बच्चों के कान बेहद नाज़ुक होते हैं। इस उम्र में कान का पर्दा (eardrum) और अंदरूनी संरचना पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में तेल डालने से न सिर्फ जलन और इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है, बल्कि गाढ़ा तेल भीतर जाकर चिपक सकता है, जिससे सुनने में समस्या भी हो सकती है। कई बार तेल से कान नम हो जाता है और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती है। इसलिए छह महीने से छोटे बच्चों में तेल डालना पूरी तरह से असुरक्षित माना जाता है। अगर खुजली या पीप हो  तो तेल नहीं डालना चाहिए अगर बच्चे के कान में पहले से कोई समस्या है, जैसे कान दर्द, खुजली, पानी या पीप आना, तो तेल डालना बिल्कुल नहीं चाहिए। ऐसा करने से कान का संक्रमण और ज्यादा बढ़ सकता है। तेल बैक्टीरिया या फंगस को पनपने का मौका देता है, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है। कभी-कभी कान के पर्दे में हल्का छेद होना सामान्य है, और यदि ऐसे में तेल डाला जाए तो यह सीधे कान के अंदर जाकर नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए यदि बच्चे के कान में पहले से कोई लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, न कि तेल डालकर इलाज करने की कोशिश। यदि डॉक्टर अनुमति दें, तो अगर डॉक्टर किसी खास वजह से बच्चे के कान में तेल डालने की अनुमति देते हैं, तो यह काम बहुत सावधानी से करना चाहिए। सबसे पहले इस्तेमाल किया जाने वाला तेल हल्का गुनगुना होना चाहिए। बहुत ज्यादा गर्म तेल कान को जला सकता है, जबकि ठंडा तेल असहजता और दर्द पैदा कर सकता है। तेल 1–2 बूँद से ज्यादा नहीं डालना चाहिए। तेल डालने के बाद बच्चे को कुछ मिनट के लिए करवट लिटाएँ ताकि तेल सही तरह अंदर पहुंचे। बाल हटाने के महंगे तरीके छोड़ें, बच्चों के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय कान की सफाई करते समय केवल बाहर की सतह को ही साफ करना चाहिए। इसके लिए कॉटन बॉल का हल्का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन कॉटन बड्स या स्टिक को कभी भी कान के अंदर तक नहीं डालना चाहिए। इससे earwax और ज्यादा अंदर धकेली जा सकती है, जिससे blockage या संक्रमण हो सकता है। छोटे बच्चों के कानों की गहरी सफाई हमेशा डॉक्टर से करवाना बेहतर माना जाता है। पारंपरिक तौर पर बच्चों के कान में तेल डालना सुरक्षित माना जाता था, लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस के अनुसार यह तरीका हमेशा सुरक्षित नहीं होता, खासकर छोटे बच्चों के लिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कान में तेल डालना कई समस्याओं को जन्म दे सकता है, जैसे संक्रमण, जलन, blockage और eardrum को नुकसान। इसलिए बच्चों के कानों की सफाई खुद से करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम है।

रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका AI को कर रहा है युद्ध के नए हथियार में तब्दील

नई दिल्ली अमेरिका अब साइबर वॉर को पूरी तरह बदलने जा रहा है। वह AI एजेंट्स बना रहा है जो दुश्मनों के नेटवर्क में अपने आप घुसकर हमला करेंगे। इस साल सरकार ने एक गुप्त स्टार्टअप पर लाखों डॉलर खर्च किए हैं। यह कंपनी दुश्मन देशों पर एक साथ सैकड़ों हमले करने की क्षमता विकसित कर रही है। यह तकनीक इतनी तेज है कि हफ्तों का काम कुछ मिनटों में हो जाएगा। वर्जीनिया की एक छोटी कंपनी है ट्वेंटी। इसे XX भी कहते हैं। US साइबर कमांड ने इसे 12.6 मिलियन डॉलर तक का कॉन्ट्रैक्ट दिया। नेवी से भी 240,000 डॉलर का रिसर्च कॉन्ट्रैक्ट मिला। कंपनी में काम करने वालों का बैकग्राउंड क्या? कंपनी की वेबसाइट कहती है कि वह पुराने काम को आसान बनाएगी। हफ्तों का मैनुअल काम अब ऑटोमेटिक हो जाएगा। सैकड़ों टारगेट पर एक साथ ऑपरेशन चलेगा। यह अमेरिका और उसके दोस्तों के साइबर युद्ध को बदल देगा। ट्वेंटी की टीम में सबके पास सैन्य या खुफिया एजेंसियों का अनुभव है। CEO जो लिन अमेरिकी नेवी रिजर्व में रहे हैं। वह पालो आल्टो नेटवर्क्स में प्रोडक्ट हेड थे। वहां उन्होंने सरकारी ग्राहकों को नेटवर्क की कमजोरियां बताईं। CTO लियो ओल्सन अमेरिकी आर्मी में सिग्नल इंटेलिजेंस ऑफिसर थे। वाइस प्रेसीडेंट इंजीनियरिंग स्काइलर ओनकेन ने साइबर कमांड और आर्मी में 10 साल से ज्यादा काम किया। गवर्नमेंट रिलेशंस हेड एडम हॉवर्ड हाल ही में ट्रंप प्रशासन की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ट्रांजिशन टीम में थे। AI के क्षेत्र में क्या करती है यह कंपनी? फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि यह तो स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आया है कि ट्वेंटी कंपनी क्या कर रही है। लेकिन इसके इसके नौकरी के विज्ञापनों से साफ हो गया कि वह क्या बना रही है। 'ऑफेंसिव साइबर रिसर्च का डायरेक्टर' की पोस्ट पर बैठा शख्स साइबर हमले के नए रास्ते ढूंढेगा, AI से चलने वाले ऑटोमेशन टूल्स बनाएगा। 'AI इंजीनियर' के तौर पर काम करने वाले कर्मचारी क्रू AI जैसे ओपन सोर्स टूल्स इस्तेमाल करेंगे। ये टूल्स कई AI एजेंट्स को एक साथ काम करने देते हैं। 'एनालिस्ट' की नौकरी के लिए ‘पर्सोना डेवलपमेंट’ का जिक्र है। यानी फेक ऑनलाइन अकाउंट बनाना, जो दुश्मन के खेमे में घुसकर जानकारी चुराए या हमला करे। यह तकनीक सोशल इंजीनियरिंग पर बेस्ड है। क्या नामी AI कंपनियों का इस्तेमाल भी कर रहा अमेरिका? रिपोर्ट में यह भी दावा है कि संभव है कि अमेरिका OpenAI, एंथ्रोपिक या एलन मस्क की xAI का भी इस्तेमाल कर रहा हो। रक्षा मंत्रालय ने इन तीनों को 200 मिलियन डॉलर तक के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। यह ‘फ्रंटियर AI’ प्रोजेक्ट के लिए है। लेकिन कोई कंपनी नहीं बता रही कि वह क्या बना रही है। ट्वेंटी का फायदा यह है कि वह एक साथ सैकड़ों टारगेट पर हमला करने की तकनीक बना रही है। यह पुरानी तकनीकों से कहीं आगे है। रक्षा के क्षेत्र में AI का इस्तेमाल हो रहा AI का इस्तेमाल अभी ज्यादातर रक्षा में होता है। इस हफ्ते फोर्ब्स ने बताया कि इजरायली स्टार्टअप टेंजाई OpenAI और एंथ्रोपिक के मॉडल को बदलकर सॉफ्टवेयर में कमजोरियां ढूंढ रही है। लेकिन उसका मकसद हैकिंग नहीं, बल्कि सुरक्षा जांच है। यानी AI अभी बचाव में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ट्वेंटी जैसी कंपनियां इसे हमले का हथियार बना रही हैं। अमेरिका बनाम चीन अमेरिका चुपके से AI को साइबर युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बना रहा है। ट्वेंटी जैसी कंपनियां इसे तेज, सस्ता और बड़े पैमाने पर करने जा रही हैं। चीन भी पीछे नहीं है। आने वाले सालों में साइबर हमले इंसानों से नहीं, AI एजेंट्स से होंगे।

मोबाइल फोटोग्राफी अपग्रेड करें: स्मार्टफोन से DSLR जैसी फोटो लेने के बेहतरीन उपाय

इन दिनों लॉन्च होने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन्स में बेहतर कैमरा दिया जाता है। कई स्मार्टफोन्स में तो डीएसएलआर की तरह ही प्रोफेशनल मोड्स दिए जाते हैं। लेकिन बेहतर कैमरा होने के बावजूद आपको बेहतर तस्वीरें क्लिक करने में परेशानी आ सकती है। आज हम आपको कुछ ऐसे स्मार्ट तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप भी डीएसएलआर क्वालिटी की तस्वीरें क्लिक कर सकते हैं। कलर एडजस्ट करना तस्वीर क्लिक करने से पहले आप कैमरे के व्हाइट बैलेंस ऑप्शन में जाकर इसका कलर एडजस्ट कर लें। कई बार लो लाइट में तस्वीर लेते समय हमे कलर करेक्शन करना जरूरी होता है नहीं तो हमारे मन के मुताबिक तस्वीरे हम क्लिक नहीं कर पाते हैं। ब्राइटनेस कंट्रोल करना कलर के साथ ही ब्राइटनेस कंट्रोल करना भी उतना ही जरूरी है। ज्यादा रोशनी की वजह से कैमरे से ली गई तस्वीर काफी चमकीला दिखाई देता है जो कि आपकी आखों को अच्छा नहीं लगता है। इसके लिए प्रोफेशनल मोड में कम रोशनी में तस्वीर क्लिक करने के लिए शटर स्पीड और ISO को कम से कम 400 रखना होगा तभी आप बेहतर तस्वीर क्लिक कर सकते हैं। हाथ को स्टेबल रखें डीएसएलआर में स्टेब्लाइजर दिया होता है जो कैमरे को स्थिर रखने में मदद करता है लेकिन स्मार्टफोन में स्टेब्लाइजर नहीं दिया होता है जिसकी वजह से फोन में ली गई तस्वीर के हिलने का डर रहता है। हाथ के हिल जाने की वजह से तस्वीर ब्लर या धूंधली दिखाई देती है। हमेशा मैनुअल या प्रोफेशनल मोड में खींचे तस्वीरें अगर आप बेहतर तस्वीर क्लिक करना चाहते हैं तो कैमरा ऐप को मैनुअल या फिर प्रोफेशनल मोड में ही इस्तेमाल करें। इससे आपके फोन से क्लिक की हुई तस्वीर बेहतर दिखाई देती है। फिल्टर का करें इस्तेमाल कैमरा में अच्छी तस्वीर क्लिक करने के लिए आपको फिल्टर का इस्तेमाल करना जरूरी है। बिना फिल्टर के तस्वीर क्लिक करने पर तस्वीरें खराब हो सकती हैं।  

अल्जाइमर का खतरा: शुरुआती संकेतों की पहचान अब संभव नई तकनीक से

नई दिल्ली  क्या कोई बीमारी अपने लक्षण दिखने से कई साल पहले ही पकड़ी जा सकती है। अल्जाइमर के मामले में अब यह संभव होता दिखाई दे रहा है। शोधकर्ताओं ने ऐसा उन्नत मॉडल तैयार किया है, जो बीमारी का जोखिम लक्षण आने से लगभग 10 वर्ष पहले ही बता सकता है। यह खोज मेडिकल साइंस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि समय रहते रोकथाम और उपचार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। क्या है यह नया भविष्यवाणी मॉडल? अमेरिकाके वैज्ञानिकों ने एक प्रेडिक्शन मॉडल विकसित किया है, जो कई प्रमुख कारकों का विश्लेषण कर अल्जाइमर या हल्की संज्ञानात्मक हानि का खतरा बताता है। यह मॉडल व्यक्ति के मस्तिष्क स्वास्थ्य की जाँच कर लंबे समय तक होने वाली संज्ञानात्मक गिरावट का अनुमान लगाता है। इस मॉडल में शामिल प्रमुख कारक उम्र और लिंग आनुवांशिक जोखिम (APOE e4 वेरिएंट) मस्तिष्क में एमिलॉयड प्रोटीन का स्तर PET स्कैन की रिपोर्ट इन सभी संकेतों के आधार पर यह उपकरण किसी व्यक्ति के 10 वर्षों या पूरे जीवनकाल में बीमारी के खतरे का आकलन करता है। 5,858 लोगों के डेटा पर आधारित शोध यह अध्ययन द लैन्सेट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कुल 5,858 प्रतिभागियों के लंबे समय से एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण किया, जो Mayo Clinic Study of Aging से लिया गया था। ध्यान रखने योग्य बातें     APOE e4 जीन वाले लोगों में अल्जाइमर का खतरा अधिक पाया गया।     महिलाएं, पुरुषों की तुलना में जीवनभर हल्की संज्ञानात्मक हानि या अल्जाइमर के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं।     PET स्कैन में यदि एमिलॉयड स्तर अधिक मिले, तो डिमेंशिया या स्मृति हानि का जोखिम भी बढ़ जाता है। कैसे काम करता है यह उपकरण? PET स्कैन मस्तिष्क में जमा एमिलॉयड प्रोटीन की पहचान करता है, जो अल्जाइमर के शुरुआती बदलावों का मुख्य संकेत है। नया मॉडल इसी जानकारी को उम्र, आनुवांशिक जोखिम और अन्य कारकों के साथ मिलाकर एक स्पष्ट जोखिम प्रोफाइल तैयार करता है। यह मॉडल बताने में सक्षम है कि अगले 10 वर्षों में व्यक्ति को हल्की संज्ञानात्मक हानि होगी या नहीं। उसके पूरे जीवनकाल में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना कितनी है। इससे डॉक्टर समय रहते आवश्यक हस्तक्षेप, दवाइयां, ब्रेन एक्सरसाइज, शारीरिक सक्रियता या जीवनशैली सुधार की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टरों और रोगियों के लिए बड़ी उपलब्धि शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल को एक नई दिशा दे सकती है। जिस तरह कोलेस्ट्रॉल देखकर हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन किया जाता है, उसी प्रकार यह मॉडल भी मस्तिष्क स्वास्थ्य का व्यक्तिगत पूर्वानुमान देने में सक्षम होगा। हालांकि अभी यह शोध चरण में है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल्जाइमर की शुरुआती पहचान और रोकथाम में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण? अल्जाइमर का अभी कोई पूर्ण उपचार नहीं है, लेकिन यदि शुरुआती जोखिम समय से पहले पता चल जाए तो बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है, जीवनशैली में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं, मरीज और परिवार मानसिक रूप से तैयार हो सकते हैं।  

Vivo X300 सीरीज़ जल्द भारत में लॉन्च: कैमरा फीचर्स बनेंगे बड़ी खासियत

नई दिल्ली वीवो की फ्लैगशिप X300 सीरीज का आगाज इंडिया में होने जा रहा है। कंपनी ने बताया है कि 2 दिसंबर को वह भारत में vivo X300 सीरीज के स्‍मार्टफोन पेश करेगी। अभी 2 फोन लाए जाने की बात सामने आ रही है। इनमें vivo X300 और vivo X300 प्रो मॉडल शामिल हैं। प्रो मॉडल को ड्यून ब्राउन और फैंटम ब्‍लैक कलर्स में लाया जाएगा। बेस मॉडल यानी एक्‍स300 को समिट रेड, फैंटम ब्‍लैक और मिस्‍ट ब्‍लू कलर्स में लॉन्‍च किया जाएगा। वीवो एक्‍स सीरीज कंपनी की प्रीमियम सीरीज है। चीन में इसे पहले ही लॉन्‍च किया जा चुका है। ग्‍लोबल लॉन्‍च भी शुरू हो गए हैं। अब भारत की बारी है। दोनों फोन में 200 मेगापिक्‍सल कैमरा अब तक आई जानकारी के अनुसार, Vivo X300 सीरीज के दोनों मॉडलों में 200 मेगापि‍क्‍सल का मेन रियर कैमरा दिया जाएगा। एक्‍स300 मॉडल में मिलने वाला 200 एमपी का मेन कैमरा, सैमसंग एचपीबी सेंसर होगा। उसके साथ 50 मेगापिक्‍सल का अल्‍ट्रा-वाइड कैमरा और 50 मेगापिक्‍सल का LYT602 पेरिस्‍कोप टेलिफोटो कैमरा दिया जाएगा और टेल‍िमैक्रो को भी सपोर्ट करेगा। वहीं, प्रो मॉडल में मेन कैमरा 50 मेगापिक्‍सल का LYT828 सेंसर होगा। उसके अलावा 50 मेगापिक्‍सल का अल्‍ट्रा-वाइड कैमरा दिया जाएगा। तीसरा कैमरा 200 मेगापिक्‍सल का सैमसंग एचपीबी सेंसर होगा। दोनों ही फोन्‍स में कंपनी ने 50 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा देने की तैयारी की है। वनप्‍लस 15 से बड़ा सेल्‍फी कैमरा वीवो एक्‍स 300 सीरीज में हाल में लॉन्‍च हुए वनप्‍लस 15 स्‍मार्टफोन से बड़ा सेल्‍फी कैमरा मिलने वाला है। वनप्‍लस 15 में 32 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा दिया गया है, जबकि वीवो एक्‍स 300 सीरीज में 50 मेगापिक्‍सल सेल्‍फी कैमरा मिलने जा रहा है। मीडियाटेक का डाइमेंसिटी 9500 प्रोसेसर वीवो एक्‍स300 सीरीज को चीन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 9500 प्रोसेसर के साथ लॉन्‍च किया गया था। भारत में भी यह स्‍मार्टफोन इसी चिपसेट के साथ आएंगे। इन दिनों स्‍मार्टफोन कंपनियां फोटोग्राफर किट को काफी प्रमोट कर रही हैं। वीवो ने भी एक्‍स300 सीरीज के साथ प्रो मॉडल के लिए किट उतारी है। यह फोन की कैमरा क्षमता को बेहतर बनाती है। हालांकि अगर भारत में यह किट लाई जाती है तो बाकी देशों की तरह ही इसे अलग से बेचा जाएगा। माना जा रहा है कि दिसंबर से ही वीवो एक्‍स300 सीरीज खरीदारी के लिए उपलब्‍ध हो जाएगी। इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन बेचा जाएगा।