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स्मार्टफोन को हर हफ्ते रीस्टार्ट करना क्यों है जरूरी, जानिए इसके बड़े फायदे

आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं. सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है. एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती. हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है. रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है. रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है. अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है. रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है. सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है. Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता. किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है. क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है. अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है. ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है.

प्रीमियम स्मार्टफोन सस्ता: Galaxy S25 Ultra पर बैंक ऑफर और एक्सचेंज से बड़ी बचत

नया स्मार्टफोन खरीदने जा रहे हैं तो सैमसंग के फ्लैगशिप ग्रेड स्मार्टफोन पर बंपर ऑफर मिल रहा है. सैमसंग गैलेक्सी एस 25 अल्ट्रा एक पावरफुल है, जिसमें दमदार प्रोसेसर, 200MP का कैमरा और कई अच्छे फीचर्स दिए गए हैं. अब इस हैंडसेट पर बंपर डील मिल रही है और इसको करीब आधे दाम में घर लाया जा सकता है. Samsung Galaxy S25 Ultra को Amazon पर 94,977 रुपये में लिस्ट किया है, जबकि इस हैंडसेट को बीते साल 1,29,999 रुपये में लॉन्च किया था. अब इस हैंडसेट पर 35,022 रुपये का फ्लैट डिस्काउंट मिल रहा है. Amazon पे आईसीआईसीआई  बैंक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके यूजर्स को 2849 रुपये का एक्स्ट्रा डिस्काउंट हासिल कर सकते हैं, जिसके बाद ये कीमत घटकर 92,128 रुपये तक हो जाएगी. सैमसंग गैलेक्सी एस 25 अल्ट्रा को खरीदने के लिए अगर पुराने हैंडसेट एक्सचेंज करेंगो तो मैक्सिमम 22,500 रुपये तक की कीमत को कम किया जा सकता है. इसके बाद सैमसंग गैलेक्सी एस 25 अल्ट्रा की कीमत और कम हो जाएगी, जो 72,477 रुपये तक नीचे जा सकती है. एक्सचेंज वैल्यू पुराने हैंडसेट की कंडिशन पर निर्भर करती है. Samsung Galaxy S25 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स Samsung Galaxy S25 Ultra में एक बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जो 6.9 इंच का डाइनेमिक LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले है, जिसके साथ 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलता है. इसमें HDR10+ का सपोर्ट, 2600 निट्स की पीक ब्राइटनेस मिलेगी. सैमसंग गैलेक्सी एस 25 अल्ट्रा में Snapdragon 8 Elite चिपसेट का यूज किया गया है. इसमें 16GB तक रैम और 1TB तक की स्टोरेज दी गई है. ये ऐप्स को स्मूद परफॉर्मेंस देते हैं Samsung Galaxy S25 Ultra का कैमरा Samsung Galaxy S25 Ultra में क्वाड कैमरा सेटअप दिया गया है, जो 200 मेगापिक्सल प्राइमरी कैमरा सेंसर के साथ आता है और इसमें OIS का भी सपोर्ट मिलता है. 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड एंगल कैमरा, 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस मिलता है, जो 5X ऑप्टिकल जूम के साथ आता है. इसमें 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा भी है, जो 3X ऑप्टीकल जूम के साथ आता है. Samsung Galaxy S25 Ultra की बैटरी Samsung Galaxy S25 Ultra में  5,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W का फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलता है. यह 30 मिनट में करीब 65 परसेंट बैटरी को चार्ज कर देता है. इसमें 15W वायरलेस चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. इसमें एस पेन का सपोर्ट मिलता है.

तालिबान का नया फरमान, सरकारी अधिकारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक; दुनिया में बढ़ी चिंता

काबुल  अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक और सख्त फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया तो उसका फोन मौके पर तोड़ दिया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी और शरिया के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।  यह आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी को छूट चाहिए तो उसके लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी जरूरी होगी।  एक ब्रिटिश न्यूज प्लेटफॉर्म दि गार्डियन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में तालिबान अधिकारियों को यह आदेश पढ़ते और लोगों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए भी देखा गया है. हालांकि तालिबान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  पूरे देश में लागू नहीं किया जा रहा स्मार्टफोन बैन रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा. कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक भी इसका असर देखने को मिल रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान फिलहाल लोगों की प्रतिक्रिया पर नजर रख रहा है और संभव है कि भविष्य में पूरे देश में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाए. उनका कहना है कि यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है।  इंटरनेट पर पाबंदी का कड़ा विरोध हाल के महीनों में तालिबान ने इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन पर नियंत्रण बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं. पिछले साल सितंबर में पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. तालिबान ने इसे "अनैतिक सामग्री रोकने" के लिए जरूरी बताया था. हालांकि इस फैसले का व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा था, जिसके बाद इंटरनेट बहाल करना पड़ा।  विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. हाल ही में हेरात शहर में महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे. ये प्रदर्शन महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए थे. आरोप है कि तालिबान बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत भी हुई थी. वीडियो सामने आने के बाद तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा।  तालिबान स्मार्टफोन पर क्यों लगा रहा बैन? तालिबान को यह भी चिंता है कि सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज और बैठकों की जानकारी लीक कर रहे हैं. कई मामलों में सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गई थी।  हेरात के कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि उनके दफ्तरों में कई महीनों से स्मार्टफोन पर अनौपचारिक रोक लगी हुई थी. एक कर्मचारी ने दावा किया कि जब वह मोबाइल लेकर कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों ने फोन जब्त कर लिया और बाद में उसे तोड़ दिया।  तालिबान का यह भी मानना है कि कर्मचारी काम करने के बजाय घंटों मोबाइल फोन पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में है, लेकिन इसका समाधान स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है।   

मोबाइल स्क्रीन और गिरता बर्थ रेट! रिसर्च के दावे से दुनिया में हलचल

 नई दिल्ली दुनिया के कई देशों में एक बड़ी समस्या तेजी से बढ़ रही है. लोग पहले के मुकाबले कम बच्चे पैदा कर रहे हैं. कई देशों में हालात ऐसे हो गए हैं कि वहां की आबादी धीरे-धीरे घटने लगी है। पहले माना जाता था कि इसकी सबसे बड़ी वजह महंगाई, नौकरी का दबाव, छोटे घर और बदलती लाइफस्टाइल है. लेकिन अब रिसर्च में एक नया और चौंकाने वाला एंगल सामने आ रहा है. साइंटिस्ट्स और रिसर्चर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या स्मार्टफोन और सोशल मीडिया भी जन्म दर घटने की बड़ी वजह बन चुके हैं।  सोशल मीडिया बदल रहा है लाइफ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के दो-तिहाई से ज्यादा देशों में बर्थ रेट उस स्तर से नीचे जा चुकी है, जिसे आबादी को स्टेबल रखने के लिए जरूरी माना जाता है।  आसान शब्दों में कहें तो अब कई देशों में लोग इतने बच्चे पैदा नहीं कर रहे कि अगली पीढ़ी पुरानी आबादी की जगह ले सके. साउथ कोरिया, जापान, चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में यह प्रॉब्लम पहले से थी, लेकिन अब लैटिन अमेरिका, मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में भी यही ट्रेंड तेजी से दिख रहा है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10-15 साल में बर्थ रेट में अचानक आई गिरावट सिर्फ आर्थिक वजहों से नहीं समझाई जा सकती. रिसर्चर्स का मानना है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने लोगों की जिंदगी जीने का तरीका बदल दिया है।  अब लोग पहले की तरह बाहर मिलना-जुलना कम कर रहे हैं. रिलेशनशिप बनाना मुश्किल हो रहा है और अकेलापन बढ़ रहा है. यही चीज आगे चलकर शादी और बच्चों पर असर डाल रही है।  जहां इंटरनेट फास्ट वहां बर्थ रेट स्लो! एक स्टडी में अमेरिका और ब्रिटेन में 4G इंटरनेट नेटवर्क आने के बाद के डेटा को देखा गया. इसमें पाया गया कि जिन इलाकों में तेज मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां बर्थ रेट ज्यादा तेजी से गिरी. रिसर्चर्स का कहना है कि स्मार्टफोन आने के बाद यंगसटर्स का ज्यादा समय ऑनलाइन जाने लगा और आमने-सामने मिलने का समय कम हो गया।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब डेटिंग, दोस्ती और रिश्तों का बड़ा हिस्सा स्क्रीन तक सीमित होता जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग लगातार दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखते रहते हैं, जिससे रिश्तों को लेकर उम्मीदें बदल रही हैं. कई लोग लंबे रिश्ते बनाने से बच रहे हैं. अकेले रहने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पहले जन्म दर इसलिए घटती थी क्योंकि शादीशुदा जोड़े कम बच्चे पैदा करते थे. लेकिन अब सबसे बड़ा कारण यह बन रहा है कि रिश्ते ही कम बन रहे हैं. यानी बड़ी संख्या में लोग शादी या लंबे रिलेशनशिप तक पहुंच ही नहीं रहे।  हालांकि एक्सपर्ट्स सिर्फ स्मार्टफोन को ही पूरी तरह जिम्मेदार नहीं मानते. महंगे घर, नौकरी का दबाव, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और भविष्य को लेकर डर भी बड़ी वजहें हैं. कई देशों में युवाओं को स्थायी नौकरी और घर खरीदना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में वे शादी और बच्चों का फैसला टाल रहे हैं।  सोशल मीडिया का असर मेंटल हेल्थ पर भी देखा जा रहा है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लगातार स्क्रीन पर रहने से अकेलापन, तनाव और डिप्रेशन बढ़ रहा है. इससे लोगों की सोशल लाइफ प्रभावित हो रही है।  कुछ देशों में सरकारें इस गिरती जन्म दर को रोकने के लिए पैसे भी दे रही हैं. जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में बच्चों के लिए आर्थिक मदद, टैक्स छूट और दूसरी योजनाएं चलाई जा रही हैं. लेकिन इसके बावजूद जन्म दर में खास सुधार नहीं दिख रहा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ पैसे देने से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि असली बदलाव लोगों की लाइफस्टाइल और सोशल बिहेवियर में आया है।   

सरकार ने स्मार्टफोन्स पर भेजा अलर्ट SMS, अचानक बजने लगे फोन

भोपाल   केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार को देशभर में देसी मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का टेस्ट किया, ताकि जब कुदरत का कहर बरपा हो तो अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके. इस सिस्टम को ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट’ कहा जाता है. अभी, NDMA (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी) की तरफ से एक फ्लैश SMS मैसेज के रूप में, पूरे भारत में इसकी टेस्टिंग चल रही है. NDMA 2 मई 2026 को आपके इलाके में सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट का टेस्ट करेगा।  सरकार की ओर से जारी किए नोटिफिकेशन में लिखा था कि आपके मोबाइल फोन पर मैसेज आने के बाद, कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं है. प्लीज़ घबराएं नहीं. जब शनिवार को इमरजेंसी अलर्ट आया, तो फोन तेज अलार्म टोन और एक फ्लैशिंग मैसेज के साथ काफी जोर से बजा. अलर्ट देसी इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम (SACHET) से दिए गए थे, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने बनाया है. यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है, जिसे इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन ने रिकमेंड किया है।  सरकार ने भेजा अलर्ट SMS (Screenshot Massage) इस सिस्टम का मकसद सुनामी, भूकंप, बिजली गिरने, और गैस लीक या केमिकल खतरों जैसी इंसानों की बनाई इमरजेंसी जैसी स्थितियों में, टारगेटेड इलाकों में मोबाइल यूजर्स को SMS के जरिए आपदा और इमरजेंसी से जुड़े अलर्ट देना है. हालांकि सरकार ने पहले भी कुछ बार इस सिस्टम को टेस्ट किया है, लेकिन अभी ये अलर्ट इस सिस्टम को देश भर में लागू करने से पहले सिस्टम की परफॉर्मेंस और भरोसे का अंदाजा लगाने के लिए किए जा रहे हैं. ये टेस्ट अलर्ट NDMA ने भेजे थे, जो भारत में आपदा मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी संस्था है।  टेस्ट मैसेज उन मोबाइल फोन पर मिले जिनके सेल ब्रॉडकास्ट टेस्ट चैनल चालू थे. आप सेटिंग्स, सुरक्षा और इमरजेंसी, वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट, टेस्ट अलर्ट पर जाकर अलर्ट चालू या बंद कर सकते हैं. पूरे देश में टेस्टिंग के बाद, मोबाइल अलर्ट सिस्टम पूरे देश में चालू हो जाएगा और सभी मोबाइल हैंडसेट पर कई भारतीय भाषाओं में इमरजेंसी अलर्ट भेजेगा। 

भारत में मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ीं, यूजर्स पर पड़ेगा असर

स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. भारत में एक बार फिर मोबाइल फोन महंगे हो रहे हैं और इस बार दो बड़ी कंपनियों Motorola और Nothing ने अपने कई स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा दी है. हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों ने अपने पॉपुलर मॉडल्स के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसका सीधा असर आम यूजर्स की जेब पर पड़ने वाला है. Motorola और Nothing ने बढ़ाईं कीमतें सबसे पहले बात Motorola की करें तो कंपनी ने अप्रैल 2026 से अपने कुछ चुनिंदा मॉडल्स की कीमत बढ़ाई है. रिपोर्ट्स के अनुसार Moto G35, Moto G57 Power और Edge 60 Fusion जैसे स्मार्टफोन्स अब पहले से महंगे हो गए हैं. इन डिवाइसेज की कीमत में लगभग 1000 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है. पहले जो फोन एक तय बजट में आसानी से मिल जाते थे, अब वही मॉडल थोड़ा ज्यादा खर्च करवाएंगे. यह बढ़ोतरी सिर्फ प्रीमियम फोन्स तक सीमित नहीं है. Motorola ने अपने बजट और मिड-रेंज सेगमेंट को भी महंगा किया है. यानी जो यूजर्स 15 से 25 हजार रुपये के बीच फोन खरीदने की सोच रहे थे, उन्हें अब अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा. खास बात यह है कि यह बदलाव नए स्टॉक के साथ लागू हो रहा है, इसलिए कई ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर कीमतें अलग-अलग भी दिख सकती हैं. अब बात Nothing की करें तो कंपनी ने भी अपने नए और पॉपुलर मॉडल्स की कीमत में बदलाव किया है. Nothing Phone 2a और Phone 3a Lite जैसे स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ने की खबर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकी कीमत में करीब 2000 से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. यानी जो फोन पहले 20 से 22 हजार रुपये के आसपास मिल रहा था, अब उसकी कीमत 23 से 26 हजार रुपये तक जा सकती है. क्यों हो रहे हैं स्मार्टफोन्स महंगे? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अचानक स्मार्टफोन्स इतने महंगे क्यों हो रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कंपोनेंट्स की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी. खासतौर पर RAM और स्टोरेज जैसे पार्ट्स की कीमतें बढ़ गई हैं. AI टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से मेमोरी चिप्स की डिमांड काफी बढ़ गई है, जिससे सप्लाई पर दबाव पड़ा है और कीमतें ऊपर चली गई हैं. हालांकि कंपनियां AI के नाम पर ज्यादा मार्जिन कमाने के लिए भी तेजी से फोन महंगे कर सकती हैं. क्योंकि ये एक परसेप्शन बन चुका है कि AI की वजह से चिप शॉर्टेज हो रही है. इसके अलावा ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें भी एक बड़ी वजह हैं. कई देशों में मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है. साथ ही रुपये की कमजोरी ने भी इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ा दी है. यही कारण है कि सिर्फ Motorola और Nothing ही नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियां भी धीरे-धीरे अपने स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ा रही हैं. क्या कहते हैं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स? इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. कंपनियों के लिए कम कीमत में ज्यादा फीचर्स देना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में या तो यूजर्स को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे या फिर कम फीचर्स के साथ समझौता करना पड़ेगा. इस पूरे बदलाव का असर सीधे तौर पर कस्टमर्स पर पड़ने वाला है. जो लोग नया फोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, उनके लिए यह सही समय हो सकता है कि वे जल्दी फैसला लें. क्योंकि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में वही फोन और महंगे हो सकते हैं.

कम कीमत, दमदार फीचर्स: ₹5999 में आया 50MP कैमरा और 6000mAh बैटरी वाला नया फोन

नई दिल्ली भारतीय ब्रैंड Ai+ ने अपना नया और क‍िफायती स्‍मार्टफोन Ai+ Pulse 2 लॉन्‍च कर दिया है। इसमें 50 मेगापिक्‍सल का कैमरा और 6 हजार एमएएच बैटरी दी गई है। इसकी कीमत बेहद कम 5999 रुपये रखी गई है। वहीं, सैमसंग ने नया 60W का कॉम्‍पैक्‍ट पावर एडप्‍टर पेश किया है। iQOO Z11x की इंडिया में लॉन्‍च डेट सामने आ गई है। ओपो ने बताया है कि वह OPPO K14 5G को इसी महीने पेश करने जा रही है। सभी खबरों को वि‍स्‍तार से जानते हैं। Ai+ Pulse 2 लॉन्‍च हुआ 5999 रुपये में Ai+ Pulse 2 को भारत में 5999 रुपये में लॉन्‍च किया गया है। हालांकि कंपनी ने कहा है कि यह कीमत शुरुआती 24 घंटों के लिए प्रभावी रहेगी। इसकी सेल 11 मार्च को दाेपहर 12 बजे से फ्लिपकार्ट पर होगी। इस फोन में 6.745 इंच का HD+ वी-नॉच डिस्‍प्‍ले दिया गया है। 120Hz का रिफ्रेश रेट है। फोन की पीक ब्राइटनैस 400 निट्स है। इसमें 50 मेगापिक्‍सल का मेन रियर कैमरा दिया गया है। फ्रंट कैमरा 8MP का है। Ai+ Pulse 2 में Unisoc T7250 प्रोसेसर दिया गया है। फोन में 6 हजार एमएएच बैटरी है, जो 18वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसके 4GB + 64GB मॉडल की कीमत 5999 और 6GB + 128GB मॉडल के दाम 7999 रुपये हैं। Samsung 60W पावर एडप्‍टर लॉन्‍च Samsung ने अपना 60W पावर एडप्‍टर भारतीय मार्केट में भी पेश कर दिया है। इसे पिछले साल सबसे पहले लाया गया था। अब ये इंडियन मार्केट में भी मिलेगा। दावा है कि इसे स्‍मार्टफोन्‍स के साथ-साथ, लैपटॉप और ईयरबड्स को चार्ज करने के लिए बनाया गया है। यह पावर एडप्‍टर, गैलियम नाइट्रेड (GaN) टेक्‍नोलॉजी पर काम करता है। इससे इसका डिजाइन कॉम्‍पैक्‍ट रखने में मदद मिलती है जबकि इसकी क्षमता बढ़ जाती है। इसकी कीमत 3,499 रुपये है और यह Samsung.com के साथ-साथ Amazon, Flipkart आदि पर मिलेगा। OPPO K14 5G इंडिया लॉन्‍च डेट OPPO K14 5G को भारत में 9 मार्च को लॉन्‍च किया जाएगा। यह पिछले साल आए K13 5G की जगह लेगा। नए ओपो फोन में 7 हजार एमएएच की बैटरी मिलने वाली है। यह 45 वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करेगी। फोन में Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट दिया जाएगा जो पिछले साल दिए गए Snapdragon 6 Gen 4 के मुकाबले डिसेंट अपग्रेड है। इसके बाकी फीचर्स अभी सामने नहीं आए हैं। iQOO Z11x लॉन्‍च डेट iQOO Z11x को भारत में 12 मार्च को लॉन्‍च किया जाएगा। यह Z सीरीज में कंपनी का नया स्‍मार्टफोन होने वाला है और MediaTek Dimensity 7400 Turbo चिपसेट से पावर्ड होगा। दावा है कि यह 23 हजार रुपये की प्राइस रेंज में सबसे तेज फोन होगा। फोन में 7200 एमएएच की बैटरी दी जाएगी, जो पिछले साल आए मॉडल में दी गई बैटरी के मुकाबले बड़ा अपग्रेड होने वाला है। यह फोन 44 वॉट की फास्‍ट चार्जिंग के साथ आएगा। लेटेस्‍ट एंड्रॉयड 16 पर बेस्‍ड OriginOS 6 पर चलेगा। इसे एमेजॉन के साथ-साथ आईकू इंडिया की वेबसाइट पर सेल किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी सप्लाई की कमी से 2026 में हो सकता है वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट

नई दिल्ली  गंभीर मेमोरी सप्लाई संकट का सामना कर रहे वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट ने 2025 का अंत मामूली एकल-अंकीय (सिंगल डिजिट) साल-दर-साल वृद्धि के साथ किया। यह बढ़ोतरी बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक हालात और छुट्टियों के मौसम में मजबूत मांग के कारण संभव हुई।  2025 की चौथी तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 3.8 प्रतिशत बढ़ी। यह लगातार चौथी तिमाही रही जब बाजार में सुधार देखा गया। साथ ही, यह 2021 के बाद सबसे मजबूत हॉलिडे तिमाही रही। चीन और पूर्वी यूरोप को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार 2026 में बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में अनुमान है कि 2026 में स्मार्टफोन शिपमेंट 12.4 प्रतिशत साल-दर-साल घट सकती है, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी की कमी, कंपोनेंट की तेजी से बढ़ती कीमतें और लोअर-एंड ओईएम कंपनियों की संरचनात्मक कमजोरियां 2026 में बाजार पर दबाव डालेंगी। यह गिरावट 2027 तक जारी रह सकती है और सुधार की उम्मीद 2027 के अंत में है, जब अतिरिक्त मेमोरी क्षमता उपलब्ध होगी। काउंटरपॉइंट के प्रिंसिपल एनालिस्ट यांग वांग ने कहा, "इसका असर 2027 की दूसरी छमाही तक जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि मेमोरी सप्लाई बढ़ने में कई तिमाहियां लगेंगी। खासकर निम्न-स्तरीय स्मार्टफोन सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि एलपीडीडीआर4 मेमोरी की सप्लाई अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से घट रही है।" उन्होंने बताया कि ओईएम कंपनियां पहले ही नए लॉन्च में देरी, सीमित प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और स्पेसिफिकेशन में बदलाव जैसे कदम उठा रही हैं। जनवरी 2026 में कुछ एंड्रॉयड ओईएम पोर्टफोलियो में 10 से 20 प्रतिशत तक कीमतों में बढ़ोतरी भी देखी गई है। मौजूदा गिरावट की मुख्य वजह मेमोरी सप्लाई चेन में गहरा असंतुलन है। निर्माता कंपनियां ज्यादा मुनाफा देने वाले एआई-केंद्रित डीआरएएम और एंटरप्राइज एसएसडी एनएएनडी के लिए वेफर क्षमता का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार के सभी हिस्से समान रूप से प्रभावित नहीं होंगे। प्रीमियम सेगमेंट अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है और सिंगल डिजिट वृद्धि दर्ज कर सकता है, जबकि 200 डॉलर से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट में 20 प्रतिशत से अधिक गिरावट की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत सप्लाई चेन, बेहतर मूल्य निर्धारण क्षमता और प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान देने के कारण एप्पल और सैमसंग इस संकट का बेहतर सामना कर सकते हैं।

भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री में भारी गिरावट, 10 साल में पहली बार आई धड़ाम

 नई दिल्ली चीन की स्मार्टफोन कंपनियों को भारत में बड़ा झटका लगा है. करीब एक दशक बाद पहली बार इन ब्रांड्स की कमाई और बाजार हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है. Xiaomi, Oppo, Realme और OnePlus जैसे बड़े नामों की बिक्री भारत में कमजोर पड़ी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के दौरान इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ निगेटिव रही है, जबकि पिछले कई सालों से लगातार इनका ग्राफ ऊपर जा रहा था. डेटा बताता है कि भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 2023 में करीब 54 फीसदी थी. अब यह घटकर लगभग 48 फीसदी के आसपास आ गई है.   क्यों गिर रहा भारत में चीनी स्मार्टफोन मार्केट? यानी हर दो में से एक फोन अब चीनी ब्रांड का नहीं रहा. यह बदलाव अचानक नहीं आया है. पिछले दो सालों में भारतीय ग्राहक धीरे धीरे प्रीमियम और ब्रांड वैल्यू वाले फोन्स की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं. Apple और Samsung जैसे ब्रांड्स की बिक्री बढ़ी है, खासकर 30 हजार रुपये से ऊपर वाले सेगमेंट में. इस गिरावट की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि एंट्री लेवल और मिड रेंज सेगमेंट में मार्जिन काफी कम हो गया है. पहले जहां चीनी कंपनियां सस्ते फोन बेचकर बड़ी संख्या में यूजर्स जोड़ लेती थीं, अब उसी सेगमेंट में मुकाबला बहुत तेज हो गया है. ऐपल और सैमसंग का दबदबा भारतीय ब्रांड्स और पुराने इंटरनेशनल प्लेयर्स भी आक्रामक ऑफर दे रहे हैं. साथ ही सरकार की मेक इन इंडिया पॉलिसी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर का असर भी बाजार पर दिख रहा है. एक और बड़ा कारण प्रीमियम फोन की डिमांड का बढ़ना है. भारत में अब ज्यादा लोग 5G, बेहतर कैमरा और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट वाले फोन चाहते हैं. इस सेगमेंट में Apple और Samsung की पकड़ मजबूत है. प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर फोकस Xiaomi और Oppo जैसी कंपनियों ने प्रीमियम फोन लॉन्च किए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक वैसी ब्रांड ट्रस्ट नहीं मिल पाई है जैसी पुराने खिलाड़ियों को मिली है. OnePlus का प्रीमियम सेगमेंट में नाम जरूर है, लेकिन उसकी कुल बिक्री पर असर पड़ा है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीनी कंपनियों के लिए यह चेतावनी है. अगर वे सिर्फ सस्ते फोन पर टिके रहेंगी, तो आने वाले समय में मुश्किल बढ़ेगी. अब उन्हें भारत में ज्यादा निवेश करना होगा, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी और प्रीमियम सेगमेंट में भरोसेमंद इमेज बनानी होगी. इसके साथ ही आफ्टर सेल्स सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट पर भी फोकस करना पड़ेगा, क्योंकि अब भारतीय ग्राहक सिर्फ कीमत नहीं, पूरे एक्सपीरियंस को देखकर फोन खरीद रहा है. चीनी कंपनियों का सप्लाई चेन अब भी मजबूत हालांकि जानकार यह भी कहते हैं कि चीनी कंपनियां इतनी आसानी से बाजार से बाहर नहीं होंगी. इनके पास बड़ा नेटवर्क है, मजबूत सप्लाई चेन है और भारत में पहले से करोड़ों यूजर्स मौजूद हैं. आने वाले महीनों में ये कंपनियां नई स्ट्रैटेजी के साथ वापसी करने की कोशिश करेंगी. लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है. भारत का स्मार्टफोन बाजार बदल रहा है और चीनी ब्रांड्स को अपनी चाल बदलनी होगी, वरना उनकी पकड़ और ढीली पड़ सकती है.

स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर संकट: IDC बोला– 2026 में सबसे बड़ी गिरावट तय

अमेरिकी मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी, इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) ने चेतावनी दी है कि स्‍मार्टफोन मार्केट इस साल 2026 में अबतक की सबसे बड़ी गिरावट देखेगा। इसकी वजह मेमोरी और रैम की कीमतों में बढ़ोतरी को बताया गया है, जिससे स्‍मार्टफोन्‍स महंगे हो रहे हैं। आईडीसी ने कहा है कि स्‍मार्टफोन कंपनियों का शिपमेंट यानी डिवाइस की शिपिंग 10 साल से भी ज्‍यादा समय के निचले स्‍तर को देखने वाली है। हाल ही में देखा गया है कि स्‍मार्टफोन कंपनियों ने अपने तमाम प्रोडक्‍ट्स की कीमतों को बढ़ाया है। सैमसंग की A और F सीरीज के पुराने मॉडलों में 1 हजार रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। यह सब मेमोरी चिप्‍स और रैम की कीमत बढ़ने की वजह से हो रहा है। दिग्‍गज कंपनी वेस्‍टर्न डिजिटल (WD) ने हाल ही में बताया था कि उसके पास अगले 1 साल के मेमोरी चिप्‍स के ऑर्डर आ गए हैं। 12.9% घट सकता है स्‍मार्टफोन श‍िपमेंट IDC की रिपोर्ट (REF.) के अनुसार, इस साल स्मार्टफोन शिपमेंट में 12.9% फीसदी की कमी देखने को मिल सकती है। इसके कुल स्‍मार्टफोन्‍स की शिपिंग 1.12 अरब यूनिट रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गिरावट के कारण सबसे ज्‍यादा प्रभावित होंगे, सस्‍ते एंड्रॉयड स्‍मार्टफोन बनाने वाले मैन्‍युफैक्‍चरर्स। छोटी कंपनियां कर रहीं बड़ा संघर्ष इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्‍मार्टफोन मार्केट में कीमतें बढ़ने से छोटी कंपनियां बड़ा संघर्ष कर रही हैं। वह मार्केट से बाहर हो रही हैं। वहीं, ऐपल और सैमसंग जैसे दिग्‍गज अपना मार्केट शेयर बनाए हुए हैं। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि प्रीमियम सेगमेंट में यूजर कुछ हजार के अंतर को गंभीरता से नहीं लेता। 20 हजार रुपये की प्राइस रेंज में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी मुश्किल पैदा कर देती है। कहां परेशानी झेलेंगी कंपनियां? एनाल‍िस्‍ट ने बताया IDC की रिपोर्ट में एनालिस्ट्स ने बताया है कि कॉम्‍पोनेंट की लागत बढ़ने से स्‍मार्टफोन कंपनियों का मार्जिन कम होगा। उन्‍हें इसका बोझ अपने ग्राहकों पर डालना होगा। और कीमत बढ़ने से डिमांड कमजोर हो रही है। आईडीसी की रिपोर्ट कहती है कि अपने प्रीमियम स्‍मार्टफाेन्‍स की बदौलत ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियां इस मुसीबत का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं।