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मल्टी-अकाउंट फीचर जल्द ही WhatsApp में: अलग नंबरों से एक साथ चलेंगे कई अकाउंट

नई दिल्ली ​WhatsApp एक बड़ा अपग्रेड लाने वाला है। हालांकि, यह अपडेट पहले से ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए अपलब्ध है, लेकिन अब लंबे इंतजार के बाद आईफोन चलाने वालों के लिए भी आने वाला है। आईफोन यूजर्स जल्द एक ही फोन में कई व्हाट्सऐप अकाउंट चला पाएंगे। जी हां, यह बिल्कुल इंस्टाग्राम, जीमेल और फेसबुक जैसा होगा। जिस प्रकार आप एक फोन में कई जीमेल, इस्टाग्रांम अकाउंट जोड़ सकते हैं। उसी प्रकार व्हाट्सऐप में भी मल्टीपल अकाउंट बना और जोड़ सकेंगे। फिर अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार कई अकाउंट्स के बीच आसानी से स्विच कर सकेंगे। इस फीचर का काफी लंबे समय से इंतजार हो रहा था। फीचर की डिटेल के लिए नीचे पढ़ें। अभी चल रही टेस्टिंग WAbetainfo की लेटेस्ट रिपोर्ट से पता चला है कि अभी यह फीचर टेस्टिंग फेज में है। इसे बाद में स्टेबल वर्जन के लिए रोल आउट किया जाएगा। व्हाट्सऐप के इस मल्टी-अकाउंट फीचर की मदद से यूजर एक ही फोन में अपने बिजनेस, ऑफिस और पर्सनल व्हाट्सऐप अकाउंट को आसानी से मैनेज कर पाएगा। इस फीचर के बाद उन्हें अलग-अलग फोन में विभिन्न व्हाट्सऐप अकाउंट चलाने की जरूरत नहीं होगी। ये लोग अभी से कर सकते हैं यूज जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अभी इसे टेस्टिंग के लिए रोल आउट किया गया है। अगर आप टेस्टफ्लाइट पर व्हाट्सऐप के बीटा वर्जन का इस्तेमाल करते हैं, तो इस फीचर को एक्सपीरियंस कर सकते हैं। आपके अकाउंट के लिए आया है या नहीं, ऐसे करें पता फीचर आपके अकाउंट के लिए आया है या नहीं, ये जानने के लिए आपको ऐप के सेटिंग्स मेन्यू में जाना होगा। उसके बाद आपको "अकाउंट लिस्ट" नाम से एक सेक्शन दिखेगा। या फिर QR कोड आइकन के बगल में एक खास बटन दिखेगा। अगर यह ऑप्शन है तो इसका मतलब है कि फीचर आपके लिए आ गया है। यह सेक्शन यूजर्स को बिना किसी सेकेंडरी डिवाइस या WhatsApp Business के सीधे ऐप से नया अकाउंट जोड़ने की सुविधा देता है। अभी सिर्फ दो अकाउंट कर सकते हैं इस्तेमाल आपकी जानकारी के लिए बात दें कि फिलहाल, बीटा वर्जन में यूजर्स एक बार में सिर्फ दो व्हाट्सऐप अकाउंट इस्तेमाल कर सकते हैं। टेस्टर्स एक बिल्कुल नया नंबर जोड़ सकते हैं, जिसे उन्होंने पहले कभी व्हाट्सऐप पर इस्तेमाल नहीं किया हो। इसके अलावा, यूजर्स अपने पुराने व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट्स को भी फिर से कनेक्ट कर पाएंगे। जैसे ही अकाउंट लिंक होगा, सभी चैट और प्रेफरेंसेज अपने आप सिंक हो जाएंगे। इस फीचर के जरिए व्हाट्सऐप अन्य इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप से काफी अलग हो जाएगा। सभी अकाउंट्स की सेटिंग होंगी बिल्कुल अलग WhatsApp में जोड़े गए हर अकाउंट के लिए सभी सेटिंग्स और प्रेफरेंस अलग-अलग रहती हैं। हर प्रोफाइल के लिए अलग चैट हिस्ट्री, बैकअप कॉन्फिगरेशन और नोटिफिकेशन टोन सेट कर सकते हैं। यूजर अपने डेटा इस्तेमाल की प्रेफरेंस या स्टोरेज की जरूरतों के आधार पर और मीडिया ऑटो-डाउनलोड ऑप्शन को अलग से मैनेज भी कर सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हर एक अकाउंट के लिए सभी सेटिंग अलग होगी। कब होगा रोल आउट? अभी इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि फीचर को कब रोल आउट किया जाएगा। उम्मीद है कि कंपनी सफल टेस्टिंग के बाद फीचर सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर देगी, लेकिन अभी इसके लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इस फीचर से Arattai जैसे ऐप्स के लिए मुश्किलें खड़ीं हो सकती हैं।

Realme GT 8 Pro भारत में लॉन्च: अनोखी ‘चेंजिंग डिज़ाइन’ टेक्नोलॉजी के साथ पहली बार

नई दिल्ली Realme GT 8 Pro और Realme GT 8 Pro Dream Edition भारतीय बाजार में लॉन्च हो गए हैं। इन फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में Ricoh-ट्यून्ड कैमरा और Qualcomm का लेटेस्ट 3nm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट मिल रहा है। Realme GT 8 Pro भारत में दूसरा ऐसा फोन है, जिसमें यह नया चिपसेट इस्तेमाल हुआ है। फोन को कई रैम और स्टोरेज वेरिएंट में लाया गया है। ड्रीम एडिशन को खास टेक्सचर्ड बैक पैनल और Aston Martin से प्रेरित डिजाइन के साथ लाया गया है। स्मार्टफोन में QHD+ BOE Q10 डिस्प्ले दिया गया है। फोन्स की कीमत और सभी स्पेसिफिकेशन जानने के लिए नीचे पढ़ें। फोन में मिलती है 7000mAh की बैटरी इस फोन में 7,000mAh की बड़ी बैटरी है। यह 120W SuperVOOC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इससे फोन बहुत जल्दी चार्ज हो जाता है। यह फोन IP66, IP68 और IP69 रेटिंग के साथ आता है। रियर कैमरा मॉड्यूल बदलने वाला फोन Realme GT 8 Pro में 6.79 इंच की QHD+ BOE Q10 फ्लेक्सिबल AMOLED स्क्रीन दी गई है। इसका रिफ्रेश रेट 144Hz और पीक ब्राइटनेस 2,000 निट्स है। फोन HDR को सपोर्ट करता है। फोन Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन के साथ आता है। इस फोन का खास फीचर स्वैपेबल रियर कैमरा मॉड्यूल है। इसका मतलब है कि आप तीन अलग-अलग कैमरा आइलैंड स्टाइल फोन में लगा सकते हैं। परफॉरमेंस और हार्डवेयर है गजब फोन्स में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 SoC चिपसेट दिया गया है। हैंडसेट 16GB तक की LPDDR5X RAM और 512GB तक की UFS 4.1 स्टोरेज के साथ आया है। इसमें Adreno 840 GPU लगा है। Realme GT 8 Pro फोन Android 16 पर बेस्ड Realme UI 7.0 पर चलता है फोन में 200MP का कैमरा इस फ्लैगशिप फोन में Ricoh GR-ट्यून्ड ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें 50MP का Sony IMX906 मेन सेंसर है, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस और एक 200MP का टेलीफोटो कैमरा लगा है, जो 120x तक का डिजिटल जूम दे सकता है। फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा मिल रहा है। रियर कैमरे से 4K 60fps तक की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। फोन के अन्य फीचर फोन के अन्य फीचर्स की बात करें तो इसमें ड्यूल-व्यू वीडियो, स्लो-मोशन कैप्चर, टाइम-लैप्स, Google Lens इंटीग्रेशन और पैनोरमिक फोटोग्राफी जैसे फीचर्स मिलते हैं। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, Wi-Fi 6, Bluetooth 6.0, NFC, USB Type-C पोर्ट दिए गए हैं। यह NavIC, BeiDou, Galileo, GLONASS और QZSS जैसे ग्लोबल सैटेलाइट पोजिशनिंग सिस्टम को भी सपोर्ट करता है। ​ Realme GT 8 Pro सीरीज की कीमत Realme GT 8 Pro स्मार्टफोन के 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 72,999 रुपये है। वहीं, 16GB RAM और 512GB स्टोरेज वाले टॉप मॉडल की कीमत 78,999 रुपये है। ड्रीम एडिशन को एक ही वेरिएंट में लाया गया है। इसमें 16GB RAM और 512GB स्टोरेज दिया गया है। 5000 रुपये का डिस्काउंट ये दोनों फोन 25 नवंबर से Flipkart और Realme की आधिकारिक वेबसाइट पर खरीदने के लिए उपलब्ध होंगे। प्रो वेरिएंट Diary White और Urban Blue में आया है। फोन पर 5,000 तक का बैंक डिस्काउंट और छह महीने की EMI की सुविधा मिलेगी। Dream Edition पर लॉन्च डिस्काउंट नहीं है।

हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रण: घर पर बीपी मॉनिटरिंग से मिलते हैं बेहतर नतीजे

क्या अस्पताल में जब कोई आपका ब्लड प्रेशर मापता है तो वह अधिक होता है, लेकिन घर में सामान्य रहता है। ऐसी स्थिति को व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहा जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह होप एशिया नेटवर्क ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें क्लीनिक, घर की माप तथा 24 घंटे की निगरानी, तीनों को समान महत्व दिया गया है। यह गाइडलाइन 22 देशों के संस्थानों के सहयोग से हुए शोध के बाद जारी की गई है, जिसमें लखनऊ का किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) भी शामिल है। इस अध्ययन के मुताबिक भारत में 21.1 प्रतिशत लोगों को 'व्हाइट कोट हाइपरटेंशन' है, वहीं 18.9 प्रतिशत को 'मास्क्ड हाइपरटेंशन (यानी क्लीनिक में सामान्य, घर पर हाइ) की समस्या है, जिससे बीपी के गलत आकलन की आशंका रहती है।  42 प्रतिशत मरीजों में गलत आकलन का खतरा रहता है, इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट की परेशानी की आशंका रहती है। क्यों है घर पर वीपी मापना जरूरी बीपी के सही आकलन के लिए क्लीनिक, घर और 24 घंटे की निगरानी से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इलाज तय किया जाना चाहिए। घर पर सुबह-शाम कम से कम चार दिन इसकी माप जरूरी है। इससे सही दवाओं के चयन में मदद मिलती है। रक्तचाप मापने का सही तरीका मापने से पहले पांच मिनट शांत बैठें। कुर्सी पर सीधे बैठें, पैर जमीन पर हों और उन्हें क्रास न करें। हाथ दिल की ऊंचाई पर रहे। मापते समय न बोलें और न हिलें। आस्तीन चढ़ाकर मापने से गलत परिणाम आते हैं। सटीकता के लिए एक-दो मिनट के अंतर से दो बार मापें। ब्लड प्रेशर की निगरानी के लिए 24 घंटे का ब्लड प्रेशर मापने वाली मशीन काइस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। इस उपाय से दवाइयों का सही प्रयोग और स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। रक्तचाप नियंत्रण के उपाय -दैनिक भोजन में नमक को कम करें। पैक्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। -आहार में ताजे फल, सब्जियां, दालें, जई, बाजरा, ज्वार, राजमा, चना, बादाम, अखरोट और सलाद शामिल करें। -प्रतिदिन 30 मिनट तेज चलने का प्रयास करें, योग और प्राणायाम करें। -धूमपान, तंबाकू और शराब से दूरी रखें। -तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें। रक्तचाप से जुड़ी भ्रांतियां -केवल बुजुर्गो को होता है- यह गलत है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव व मोटापे के कारण युवा भी बड़ी संख्या में प्रभावित हैं। -यह कोई बीमारी नहीं- अत्यधिक कम रक्तचाप भी चक्कर, कमजोरी और बेहोशी का कारण बन सकता है।   -इसकी दवा कभी बंद नहीं होती- यह भ्रांति है। यदि व्यक्ति नमक कम करे, व्यायाम, प्राणायाम करे, वजन कम करे और तनाव नियंत्रित रखे तो रक्तचाप इतना स्थिर हो जाता है कि चिकित्सक धीरे-धीरे दवा कम या पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं।  

Google का नया कमाल: बल्ब की रोशनी से चार्ज होने वाला स्मार्ट रिमोट लॉन्च

नई दिल्ली गूगल ने अपने टीवी के लिए एक कमाल का जादुई रिमोट पेश किया है। जादुई इसलिए क्योंकि इस खास टीवी रिमोट की बैटरी कभी भी खत्म नहीं होगी और ना ही इसे चार्ज पर लगाना पड़ेगा। इतना ही नहीं यह आपके कमरे में मौजूद बल्ब की रौशनी से पावर सोंख कर खुद को चालू रखेगा। चलिए इस जादुई रिमोट के बारे में डिटेल में जानते हैं और पता लगाते हैं कि इसके पीछे कौन सी टेक्नोलॉजी काम कर रही है। गूगल ने पेश किया नया रिमोट गूगल ने अपने टीवी के लिए एक नया रिमोट पेश किया है, जो कि सोलर पावर पर चलेंगे। इस नए सोलर-पावर्ड रिमोट का नाम G32 है।इस रिमोट को चलाने के लिए समय-समय पर इसकी बैटरी नहीं बदलनी पड़ेगी। इसे लेकर स्वीडन की कंपनी Epishine ने बताया कि उनकी टेक्नोलॉजी अब Google TV प्लेटफॉर्म के लिए बनाए गए नए रेफरेंस रिमोट में इस्तेमाल हो रही है। बता दें कि Epishine ऐसे सोलर सेल बनाती है जो कि घर के अंदर मौजूद रौशनी से पावर जेनरेट कर सकते हैं। इस खास रिमोट को गूगल के ऑफिशियल सप्लायर Ohsung Electronics बना रहा है। इस रिमोट में दोनो तरफ सोलर सेल लगे हैं जो रिचार्जेबल बैटरी को पावर देते हैं। कैसे काम करता है गूगल का ‘जादुई’ रिमोट गूगल द्वारा पेश किया गया खास टीवी रिमोट रौशनी से चार्ज होगा और इसके लिए सूरज की रौशनी नहीं बल्कि घर में मौजूद बल्ब की रौशनी भी काफी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रिमोट तब तक चार्ज होता रहेगा, जब तक कि यह रौशनी के संपर्क में रहेगा। अगर इसे किसी बंद अंधेरी जगह पर रख दिया जाएगा, तभी इसकी चार्जिंग बंद होगी। इससे लोगों को अपने टीवी रिमोट की बैटरी को समय-समय पर बदलना नहीं पड़ेगा। यह रिमोट लॉन्ग टर्म में ई-कचरे को भी कम करेगा। प्रैक्टिकल हो रहे सोरल-पावर्ड रिमोट ऐसा नहीं है कि सोलर-पावर्ड रिमोट का आइडिया नया है। Hama ने पिछले साल Exeger की Powerfoyle टेक के साथ ऐसा ही एक यूनिवर्सल रिमोट लॉन्च किया था। इसी तरह सैमसंग का ईको रिमोट भी इसी तरह की टेक्नोलॉजी के साथ लंबे समय से मौजूद है और साबित करता है कि घर के अंदर मौजूद रौशनी से चार्जिंग अच्छे से काम कर सकती है। अब क्योंकि गूगल रेफरेंस हार्डवेयर में यह सुविधा दे रहा है इसलिए अन्य कंपनियां भी इसे आसानाी से अपने स्ट्रीमिंग डिवाइसेज में शामिल कर पाएंगीं। बता दें कि बड़ी संख्या में ब्रैंड गूगल के रेडी-मेड रिमोट डिजाइन को इस्तेमाल करते हैं। इससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होती है। फिलहाल यह रिमोट ना ही किसी डिवाइस के साथ आता है और ना ही इसे अलग से खरीदा जा सकता है। इसे अलग-अलग कंपनियों के लिए रेफरेंस डिजाइन के तौर पर बनाया जाता है। अलग-अलग ब्रैंड अक्सर इनके बटन लेआउट को Netflix, YouTube, Prime Video या लोकल ऐप्स के शॉर्टकट से बदल देते हैं।

e-पासपोर्ट का विस्तार: 80 लाख जारी, पुराने पासपोर्ट पर क्या असर?

भारत ने पासपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह हाई-टेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा दिया है। विदेश मंत्रालय ने पूरे देश में उन्नत सुरक्षा सुविधाओं वाले ई-पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नई तकनीक से लैस यह पासपोर्ट न सिर्फ इमिग्रेशन को तेज़ करेगा, बल्कि पहचान से जुड़े फर्जीवाड़े को लगभग असंभव बना देगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब से जारी होने वाले सभी पासपोर्ट ई-पासपोर्ट होंगे, जबकि पुराने पासपोर्ट उनकी वैधता खत्म होने तक मान्य रहेंगे। यदि आपने 28 मई 2025 के बाद पासपोर्ट बनवाया या रिन्यू कराया है, तो आपको ई-पासपोर्ट ही मिला होगा। ई-पासपोर्ट क्या है और कैसे काम करता है? नया ई-पासपोर्ट बाहर से बिल्कुल पुराने जैसा दिखता है, लेकिन इसके कवर में एक खास इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होगी। इसी चिप में आपकी सभी अहम जानकारी डिजिटल रूप से सुरक्षित रहती है—     नाम     फोटो     फिंगरप्रिंट     बायोमेट्रिक डिटेल     अन्य व्यक्तिगत जानकारी यह डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और इसमें मौजूद डिजिटल सिग्नेचर को बदला नहीं जा सकता। दुनिया के किसी भी एयरपोर्ट पर मशीन इसे एक सेकंड में पढ़ सकती है। फर्जी पासपोर्ट बनाना लगभग असंभव पुराने पासपोर्ट में सारी जानकारी छपी या लिखी होती थी, इसलिए नकली दस्तावेज बनाना आसान होता था। लेकिन ई-पासपोर्ट की चिप में मौजूद डेटा को नकली चिप से कॉपी करना संभव नहीं है। अगर कोई पहचान बदलकर फर्जी पासपोर्ट तैयार करे भी तो इमिग्रेशन मशीन तुरंत पकड़ लेगी। लंबी लाइनों से राहत—तेज़ एंट्री और एग्ज़िट अभी की इमिग्रेशन प्रक्रिया में दस्तावेज़ मिलान और पहचान जांच में समय लगता है। ई-पासपोर्ट आने के बाद—     चेकिंग समय घटेगा     एयरपोर्ट पर लंबी लाइनों में खड़ा रहने का झंझट कम होगा     यात्रियों की एंट्री-एग्ज़िट और भी स्मूथ हो जाएगी पुराने पासपोर्ट वालों को क्या करना होगा? सरकार ने इसे लेकर भ्रम खत्म करते हुए कहा है—     पुराना पासपोर्ट पूरा वैध है, चाहे वह ई-पासपोर्ट न हो।     आपको इसे तुरंत बदलने की जरूरत नहीं है।     इसकी वैधता खत्म होने या रिन्यू कराने पर नया पासपोर्ट ई-पासपोर्ट ही बनेगा। पहले कुछ चुनिंदा शहरों में यह सुविधा थी, लेकिन अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है। अब तक कितने ई-पासपोर्ट जारी हुए? विदेश मंत्रालय के अनुसार—     80 लाख से अधिक ई-पासपोर्ट भारत में जारी किए जा चुके हैं     विदेशों में भारतीय मिशनों ने 60 हजार से ज्यादा ई-पासपोर्ट जारी किए     देश में 511 पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरू हो चुके हैं     बाकी बचे 32 लोकसभा क्षेत्रों में भी जल्द ही केंद्र खुलेंगे नया पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्ज़न 2.0 (PSP 2.0) 2025 से लागू है, जिसमें शामिल हैं—     एआई चैटबॉट     वॉयस-बॉट     डिजिलॉकर इंटीग्रेशन     आधार और पैन वेरिफिकेशन     तेज़ डॉक्यूमेंट चेक यह नया सिस्टम पूरी प्रक्रिया को 100% डिजिटल और बेहद सुरक्षित बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।  

गूगल की रिपोर्ट: 2025 में भारत में सबसे लोकप्रिय Apps की लिस्ट

नई दिल्ली Google Play ने भारत के लिए Best of 2025 की लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें उन ऐप्स और गेम्स को जगह मिली है जिन्होंने इस साल लोगों की डिजिटल लाइफ पर सबसे बड़ा असर डाला. इस लिस्ट से साफ है कि भारतीय यूजर्स अब एआई फीचर्स, लोकल कल्चर और प्रैक्टिकल प्रोडक्टिविटी टूल्स को अधिक पसंद कर रहे हैं. District App: भारत का Best App of 2025 इस साल का सबसे बड़ा विनर है District: Movies Events Dining ऐप. Zomato के इस नए ऐप ने देशभर में, खासकर बड़े शहरों के यूजर के बीच, जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की. District आपकी पसंद, आपके शहर के रुझान और आपकी एक्टिविटी को समझकर बताता है कि आपको कौन सी फिल्म देखनी चाहिए, कहां खाना खाने जाना चाहिए और कौन सा इवेंट अटेंड करना चाहिए. एआई की मदद से यह ऐप एक तरह से आपका पर्सनल एंटरटेनमेंट और फूड असिस्टेंट बन गया है. इसी वजह से Google ने इसे India’s Best App of 2025 का खिताब दिया. CookieRun India: Best Game of 2025 गेमिंग कैटेगरी में पहला स्थान मिला है CookieRun India: Running Game को. यह गेम भारतीय खिलाड़ियों के साथ इसलिए जुड़ पाया क्योंकि इसमें भारतीय थीम्स, भारतीय कैरेक्टर, भारतीय कपड़े और भारतीय म्यूजिक का तड़का लगाया गया है. गेम इतना आसान और मजेदार है कि हर उम्र के लोग इसे पसंद कर रहे हैं. इसी वजह से इसे Best Game of 2025 के साथ-साथ Best Pick Up and Play अवॉर्ड भी मिला है. एआई वाले ऐप्स की बाढ़ 2025 की लिस्ट को देखकर साफ है कि भारत में एआई ऐप्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. InVideo AI, जिसे Best for Personal Growth का अवॉर्ड मिला, लोगों को सिर्फ टेक्स्ट लिखकर वीडियो बनाने की सुविधा देता है. Toonsutra, जिसे Best Hidden Gem चुना गया, भारतीय कॉमिक्स को एआई की मदद से सिनेमेटिक और मॉडर्न डिजिटल एक्सपीरियंस में बदल देता है. यहें तक कि Goodnotes और Luminar: Photo Editor जैसे कामकाजी ऐप्स भी एआई का इस्तेमाल कर लोगों के रोजमर्रा के काम आसान बना रहे हैं — जैसे नोट लेना या फोटो एडिट करना. हेल्थ, वेलनेस और रोजमर्रा की जरूरतें लोग अब डिजिटल वेलनेस और समय प्रबंधन पर भी खास ध्यान देने लगे हैं. Daily Planner: To Do List Task, जिसे Best Everyday Essential चुना गया, टास्क मैनेजमेंट, जर्नलिंग और मूड ट्रैकिंग को एक ही ऐप में जोड़ता है. SleepisolBio, जिसे Best for Watches मिला, लोगों की नींद सुधारने और तनाव कम करने में मदद करता है. नए Trending Apps भी सुर्खियों में Google ने इस बार पहली बार Top Trending कैटेगरी भी शामिल की है. इसमें Instamart, Seekho, और Adobe Firefly जैसे ऐप्स को जगह मिली, जो तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और जिनके यूजर एंगेजमेंट में बड़ा उछाल देखा गया है. भारत का गेमिंग इकोसिस्टम और भी मजबूत गेमिंग हमेशा से भारतीय यूजर्स का पसंदीदा सेगमेंट रहा है. CookieRun India के साथ-साथ Free Fire Max, जिसे Best Ongoing Game का अवॉर्ड मिला, लगातार अपनी पकड़ बनाए हुए है. भारतीय डेवलपर्स द्वारा बनाए गए Kamala – Horror Exorcism Escape और Real Cricket Swipe जैसे गेम भी इस साल खूब पसंद किए गए. भारत की डेवलपर कम्युनिटी की ताकत Google का कहना है कि Android और Play Store इकोसिस्टम भारत में 3.5 मिलियन से ज्यादा नौकरियां सपोर्ट करता है और ₹4 ट्रिलियन से ज्यादा का आर्थिक योगदान देता है. 2025 की यह लिस्ट बताती है कि भारत की ऐप और गेम डेवलपर कम्युनिटी अब दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे इनोवेटिव टीमों में से एक बन चुकी है. 

कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़े: डॉक्टर से समझें वजह और रोकथाम

इस सदी की शुरुआत से अब तक बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या दोगुणी हो चुकी है। कई बच्चों में इसका स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता, जिससे यह परेशानी धीरे-धीरे विकराल रूप ले लेती है। युवा अवस्था में प्रवेश से पहले ही वे हार्ट, किडनी और स्ट्रोक जैसी बेहद गंभीर बीमारियों के संभावित शिकार हो जाते हैं। खराब आहार, निष्क्रियता भरी दिनचर्या और बढ़ता मोटापा बच्चों को उच्च रक्तचाप की मुसीबत में धकेल रहे हैं। लांसेट की हालिया रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में 11.4 करोड़ बच्चे हाइपरटेंशन की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिस तेजी से बच्चों में हाइपरटेंशन बढ़ा है, उससे अभिभावकों और स्वास्थ्य देखभाल तंत्र को तुरंत चेतने की जरूरत है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआत में कुछ बच्चों में रक्तचाप का स्तर तेजी से बढ़ता है, लगभग 14 साल की उम्र में, खासकर लड़कों में, यह चरम स्थिति में होता है। इन दौरान नियमित जांच कराने की जरूरत होती है। इस परेशानी के पीछे मुख्य कारण बचपन में बढ़ता मोटापा है, जबकि थोड़े से प्रयास से इसे रोका जा सकता है। रिपोर्ट की मानें तो मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के साथ-साथ इस उम्र में अब अस्थमा और मानसिक सेहत से जुड़ी समस्याओं का भी जोखिम बढ़ता जा रहा है। हमें समझना होगा कि स्वस्थ बच्चे ही एक स्वस्थ युवा के रूप में विकसित होंगे, ऐसे में आहार, व्यायाम जैसी आदतों का विकास बचपन में ही करने की जरूरत है। जिन परिवारों में हाइपरटेंशन की हिस्ट्री रही है, उन्हें बच्चों की सेहत को लेकर विशेष रूप से गंभीर रहने की जरूरत है। बच्चे की हो बीपी व बीएमआइ की जांच साल 2000 तक उच्च रक्तचाप सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन बीते दो दशकों में बच्चे – किशोर भी इसकी गिरफ्त में आए हैं। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चे युवावस्था में हाइ ब्लड प्रेशर के कारण हृदय और किडनी रोग की चपेट में आ जाएंगे। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मोटापा और जेनेटिक प्रमुख हैं। मोटापे से ग्रस्त लगभग हर पांचवां बच्चा हाई बीपी से पीड़ित है। इनमें से 50 प्रतिशत को पता ही नहीं होता कि उन्हें बीपी की समस्या है। शहरों में रहने वाले बच्चों में 20 प्रतिशत मोटापे की गिरफ्त में हैं। क्या हैं वजहें देर तक मोबाइल टीवी देखना पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव, नींद पूरी न करना, फल एवं सब्जियां कम खाना, मीठे पदार्थ, खेलकूद से दूरी और फास्ट- फूड का अधिक सेवन बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर की समस्या बढ़ाता है। क्रोनिक किडनी डिजीज, रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी, पालिसिस्टिक किडनी डिजीज, हाइपरथायराइडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम और जन्मजात एड्रेनल हाइपरप्लासिया भी बच्चों में उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ाते हैं । हार्ट डिजीज जैसे को आर्कटेशन आफ आर्टा के साथ स्टेरायड, गर्भनिरोधक गोलियां, नशीली दवाएं और स्लीप एप्निया से भी बच्चे बीपी रोग की चपेट में आ रहे हैं।     मोटापा और अधिक वजन     खराब दिनचर्या, खराब आहार, नमक का अधिक सेवन     किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन और जांच का अभाव कैसे करें बचाव प्रतिवर्ष बच्चों की बीपी और बीएमआई की जांच आवश्यक है, उन्हें संतुलित व पौष्टिक आहार दें, बच्चे को किसी एक आउटडोर एक्टिविटी से जोड़ें। तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग और मेडिटेशन कराएं। जंक फूड और मीठे पदार्थों से उन्हें दूर रखें। पढ़ाई के लिए अतिरिक्त दबाव न डालें, स्क्रीन टाइम अधिकतम एक घंटा हो, भोजन में नमक कम करें, ताजे फल-सब्जियां खिलाएं, आठ घंटे नींद की आदत डालें। बच्चों को अनावश्यक स्टेरायड न दें। ध्यान रखें कि यदि आपका बच्चा मोटापे की चपेट में है तो युवावस्था में उसे हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज, दिल का दौरा, स्ट्रोक, खराब कोलेस्ट्राल, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया, किडनी रोग और कुछ तरह के कैंसर का खतरा तीन-चार गुणा तक अधिक रहता है।  

सिर्फ दो मिनट में जानिए स्मार्ट फोन की स्पीड बढ़ाने के ये 4 रामबाण टिप्स

  स्मार्ट फोन की धीमी गति के कारण यदि आप भी परेशान हैं तो आप ये आसान टिप्स अपनाकर उसकी गति तेज कर सकते हैं। -फोन में अगर ढेरों एप्लीकेशन हैं तो पहला काम यह करें कि जिन एप्लीकेशंस का प्रयोग आप नहीं करते हैं उन्हें तुरंत हटा दें। इससे आपके स्मार्ट फोन की स्पीड तेज हो जाएगी। -जिस भी ऐप का आप सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उसके कैश को नियमित रूप से डिलीट करते रहें। कैश को हटाने के लिए सबसे पहले सेटिंग्स-एप्स में जाएं। यहां उस ऐप पर क्लिक करें जिसके कैश को क्लियर करना है। क्लिक करने के बाद आपको ‘क्लियर कैश’ विकल्प पर क्लिक करना है। -कैश क्लीन करने के अतिरिक्त स्मार्टफोन में केवल उन्हीं ऐप्स को जगह दें जो आपके काम की हैं। यदि आपके फोन की भी इनबिल्ट स्टोरेज कम है तो सबसे अच्छा विकल्प है कि इंटरनल स्टोरेज में मौजूद तस्वीरें, म्यूजिक और वीडियो फाइल को माइक्रोएसडी कार्ड में मूव कर दें। -आपको सेटिंग्स को देखना चाहिए कि कंपनी द्वारा आपके फोन को सॉफ्टवेयर अपडेट तो नहीं मिला है। जांच के लिए सेटिंग्स-सिस्टम-अबाउट-सॉफ्टवेर अपडेटस में जाएं। यदि कोई सॉफ्टवेयर अपडेट मिलता है तो फोन को अपडेट करने से पहले बैकअप जरूर लें।  

जंक फूड का दिमाग पर कंट्रोल! अध्ययन में खुलासा—4 दिन में ही कमज़ोर होने लगती है मेमोरी

नई दिल्ली ब्रिटेन में प्रोसेस्ड जंक फूड के इंसानी दिमाग पर पड़ने वाले असर से संबंधित रिसर्च में सामने आया कि इस तरह के खाने का ज़्यादा सेवन इंसान के दिमाग के ऐसे हिस्सों में बदलाव कर सकता है जो खाने के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। ऐसा खाना दिमाग के कुछ अहम हिस्सों जैसे – हाइपोथैलेमस, एमीग्डाला और न्यूक्लियस अक्कम्बेन्स में बदलाव कर सकता है। ये हिस्से भूख, संतुष्टि और खाने के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ओवरईटिंग की भी होती है समस्या इस रिसर्च से यह भी पता चलता है कि प्रोसेस्ड जंक फूड का ज़्यादा सेवन दिमाग के उन क्षेत्रों में संरचनात्मक परिवर्तनों से जुड़ा है जो खाने के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। इससे ओवरईटिंग की भी समस्या होती है। बढ़ रही बीमारियाँ, सेवन पर ध्यान देने की ज़रूरत इस रिसर्च से यह सवाल भी उठता है कि क्या अब प्रोसेस्ड जंक फूड पर कड़ी नीतियाँ बनानी चाहिए? वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़्यादा प्रोसेस्ड जंक फूड पहले से ही कई बीमारियों जैसे डायबिटीज़, हृदय रोग और मानसिक विकारों से जुड़ा हुआ है। अब दिमाग पर इनके प्रभाव को देखते हुए इनके सेवन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। सिर्फ 4 दिन लगातार खाया जंक फूड तो याददाश्त हो सकती है कमजोर क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो प्री वीकेंड और पोस्ट वीकेंड सेलिब्रेशन के लिए जंक फूड को तरजीह देते हैं? अगर ऐसा है तो ये खबर आपके लिए है. इन फैटी फूड्स का अगर 4 दिन भी आप नियमित तौर पर सेवन करते हैं तो सतर्क हो जाइए क्योंकि ऐसा कर आप अपने शरीर को ही नहीं ब्रेन को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. स्टडी बताती है कि इससे कॉग्निटिव डिसफंक्शन (सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर) का रिस्क बढ़ता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है. स्टडी में क्या पाया गया? अमेरिका स्थित उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय (यूएनसी) के शोध से पता चलता है कि फैटी जंक फूड वजन बढ़ाने या आपको डायबीटिक बनाने से बहुत पहले ही ब्रेन को अटैक करता है यानि इनके नियमित सेवन से सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है. ये रिजस्ट चेताते और बताते हैं कि हमे मोटापे और याददाश्त को कमजोर करने वाले कारकों पर प्रहार करना चाहिए. जिनमें सबसे पहले नाम आता है वेस्टर्न-स्टाइल जंक फूड का. न्यूरॉन पत्रिका में प्रकाशित फाइंडिंग से पता चला है कि हिप्पोकैम्पस में ब्रेन सेल्स का एक ग्रुप, जिसे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स कहा जाता है, हाई फैट डाइट (एचएफडी) खाने के बाद बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है. सीसीके इंटरन्यूरॉन्स की सक्रियता का कारण ब्रेन के ग्लूकोज लेने की क्षमता का कमजोर होना है. यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन में चीफ इनवेस्टिगेटर और फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर जुआन सोंग ने कहा कि यह हाइपरएक्टिविटी हिप्पोकैम्पस द्वारा मेमोरी प्रोसेसिंग करने के तरीके को बाधित करती है. ये हाइपरएक्टिविटी हाई फैट डाइट (एचएफडी) लेने के कुछ दिनों बाद तक भी जारी रहती है. इस खोज से यह भी पता चला है कि पीकेएम2 नामक एक प्रोटीन इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है. दरअसल, ये प्रोटीन ब्रेन सेल्स द्वारा एनर्जी के उपयोग को कंट्रोल करता है. यूएनसी न्यूरोसाइंस सेंटर के सदस्य सोंग ने कहा, "हम जानते थे कि डाइट और मेटाबॉलिज्म ब्रेन हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी कि हिप्पोकैम्पस में मौजूद सीसीके इंटरन्यूरॉन्स (मस्तिष्क कोशिकाओं के विशिष्ट और कमजोर समूह) मिलेंगे." सोंग ने आगे कहा, "हमें सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात का हुआ कि ग्लूकोज की कमी होने के बाद इन कोशिकाओं ने तेजी से अपनी एक्टिविटी बदल दी और यह बदलाव ही याददाश्त कमजोर करने के लिए काफी था." टीम ने ये परीक्षण चूहों पर किया. उन्हें फैटी जंक फूड जैसे हाई फैट वाली डाइट पर रखा. हाई फैट वाली डाइट खाने के 4 दिनों के भीतर परिणामों से पता चला कि मेमोरी के सेंटर में सीसीके इंटरन्यूरॉन्स असामान्य रूप से सक्रिय हो गए. शोध यह भी दर्शाता है कि ब्रेन में ग्लूकोज को रिलीज करने से वास्तव में एक्स्ट्रा एक्टिव न्यूरॉन्स शांत हो गए और चूहों की स्मृति संबंधी समस्याएं ठीक हो गईं. अध्ययन से पता चलता है कि मोटापा संबंधित न्यूरोडीजेनेरेशन रोकने और ब्रेन हेल्थ को बनाए रखने के लिए खान-पान में बदलाव और कुछ औषधियां सहायक सिद्ध हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई-फैट-डाइट के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग से भी फायदा पहुंच सकता है. इससे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स सामान्य होते हैं और मेमोरी सुधरती है.

अचानक दुनिया की कई बड़ी ऑनलाइन सेवाएं एक साथ ठप, लाखों यूजर्स हुए परेशान, नहीं कर रहा काम

नई दिल्ली  मंगलवार दोपहर अचानक दुनिया की कई बड़ी ऑनलाइन सेवाएं एक साथ ठप हो गईं, जिससे यूजर्स को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह समस्या इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली दिग्गज कंपनी Cloudflare के बड़े पैमाने पर हुए आउटेज के कारण उत्पन्न हुई। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एक साथ ठप क्लाउडफ्लेयर की टेक्निकल समस्या के चलते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर), एआई प्लेटफॉर्म ChatGPT, ऑनलाइन डिजाइन टूल Canva और कई अन्य वेबसाइट्स कुछ समय के लिए काम नहीं कर सकीं। हजारों यूजर्स ने इंटरनेट पर शिकायत दर्ज कराई कि वे इन सेवाओं पर लॉग इन या कंटेंट लोड नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर रही कि वेबसाइट डाउन होने की जानकारी देने वाला Downdetector भी सही से एक्सेस नहीं हो पा रहा था।   कैसे बढ़ी दिक्कतें? ब्रिटिश अखबार The Independent के अनुसार, आउटेज की शुरुआत तब हुई जब क्लाउडफ्लेयर के सर्वर अचानक धीमे पड़ने लगे। कई वेबसाइट्स को लोड होने में सामान्य से कई गुना अधिक समय लग रहा था। बाद में कंपनी ने पुष्टि की कि उनके नेटवर्क में एक "टेक्निकल गड़बड़ी" आई है, जिस पर उनकी टीम काम कर रही है। स्थिति धीरे-धीरे सामान्य कुछ समय की मुश्किलों के बाद हालात सुधरने लगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X फिर से सामान्य रूप से चलने लगा है और कई अन्य साइटें भी धीरे-धीरे वापस ऑनलाइन हो रही हैं। हालांकि, क्लाउडफ्लेयर ने अभी तक आउटेज की पूरी वजह या उसके समाधान पर आधिकारिक अपडेट जारी नहीं किया है।   एक महीने पहले AWS में भी आई थी दिक्कत यह पहला बड़ा आउटेज नहीं है। पिछले महीने Amazon Web Services (AWS) के डाउन होने से भी दुनिया की कई प्रमुख वेबसाइट्स और ऐप्स ठप हो गए थे। उस वक्त भी यूजर्स को लॉगिन से लेकर फाइल अपलोड तक में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। मौजूदा क्लाउडफ्लेयर आउटेज भी उसी तरह की व्यापक तकनीकी गड़बड़ी का संकेत देता है।