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धूप वाला पानी और विटामिन-D: हकीकत, भ्रम या देसी नुस्खा?

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला अजीबोगरीब दावा कर रही है। उसका कहना है कि एक कांच की बोतल में पानी भरें, उसमें थोड़ी जगह खाली छोड़ दें और उसे दिनभर के लिए धूप में रख दें। महिला के अनुसार, इस धूप में रखे पानी को पीने से आपके शरीर में 'विटामिन डी' की कमी पूरी हो जाएगी। डॉक्टर के अनुसार, धूप में पानी रखकर उसे पीने से विटामिन डी मिलने की बात पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है। यह वैज्ञानिक रूप से बिल्कुल भी प्रमाणित नहीं है। डॉक्टर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि लोगों को इस तरह के गलत प्रयोग बिल्कुल नहीं करने चाहिए। शरीर में कैसे बनता है विटामिन डी? डॉक्टर ने समझाया कि शरीर में विटामिन डी बनने की एक पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। पानी पीने से इसका कोई लेना-देना नहीं है। असली प्रक्रिया कुछ इस तरह काम करती है:     धूप का सीधा संपर्क: जब आप अपने शरीर की कम से कम आधी त्वचा को सीधे धूप के संपर्क में लाते हैं, तो सूरज से अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी त्वचा पर पड़ती हैं।     त्वचा में रिएक्शन: ये किरणें त्वचा में मौजूद रसायन 'डीहाइड्रोकोले कैल्सिफेरोल' के साथ रिएक्शन करती हैं।     विटामिन डी3 का निर्माण: इस रिएक्शन के बाद शरीर में 'विटामिन डी3' बनता है। शरीर में कैसे काम करता है यह विटामिन? त्वचा में विटामिन डी3 बनने के बाद यह सीधा आपके लिवर में जाता है और वहां जाकर एक्टिवेट होता है। इसके बाद यह हड्डियों से जुड़ता है, जिससे आपकी बोन हेल्थ बेहतर होती है और यह 'ऑस्टियोपोरोसिस' जैसी हड्डियों की गंभीर बीमारी में भी मदद करता है। धूप से विटामिन डी लेने का सही तरीका क्या है? डॉक्टर के मुताबिक, अगर आप कपड़े पहनकर धूप में बैठते हैं, तो आपको विटामिन डी नहीं मिलेगा। कपड़े सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों को आपकी त्वचा तक जाने से रोक देते हैं। इसलिए, सूरज की किरणों का त्वचा से सीधा संपर्क होना बहुत जरूरी है। आपने अक्सर देखा होगा कि विदेशी लोग समुद्र के किनारे लेटकर धूप सेंकते हैं। वे ऐसा टैनिंग के साथ-साथ सीधे अपनी त्वचा पर विटामिन डी और अल्ट्रावायलेट किरणें प्राप्त करने के लिए ही करते हैं। धूप में रखे पानी से विटामिन डी मिलने का कॉन्सेप्ट पूरी तरह से गलत है। अगर आप सच में विटामिन डी पाना चाहते हैं, तो दिन में कम से कम आधा घंटा अपने शरीर के आधे हिस्से को बिना कपड़ों के सीधे धूप दिखाएं या फिर, जरूरत पड़ने पर विटामिन डी का सप्लीमेंट लें।  

स्लो वाई-फाई को तेज करने के लिए अपनाएं ये 9 तरीके

अगर आपके घर के वाई-फाई के सिग्नल कमजोर हैं, तो ये 9 सिंपल टिप्स अपनाएं और स्लो वाई-फाई से निजात पाएं। क्लिक करें… -राउटर घर के बीचों-बीच रखें, ताकि घर के हर हिस्से में बराबर सिग्नल पहुंचें। -राउटर की पोजिशन तय करने के लिए आप क्लाउडचेक की भी मदद ले सकते हैं। इससे आपको पूरे घर का वाई-फाई रूट पता चल जाएगा, और आप तय कर पाएंगे कि कहां सिग्नल कमजोर हैं। -राउटर को कभी भी फर्श पर न रखें। उसे जमीन से कम से कम 2 फीट ऊपर रखें, क्योंकि सिग्नल्स की दिशा कुछ नीचे की तरफ होती है। अगर राउटर फर्श पर रखा होगा तो सिग्नल्स के रास्ते में रुकावट आएगी। -राउटर को टीवी कैबिनेट या पर्दे के पीछे न छिपाएं। उसे खुले में रखें, ताकि फ्री सिग्नल और बेहतर स्ट्रेंथ मिले। -राउटर को टीवी, कॉर्डलेस फोन और माइक्रोवेव जैसे दूसरे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स से दूर रखें। उनसे राउटर सिग्नल बाधित होते हैं, क्योंकि वे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स छोड़ते हैं। -वाई-फाई चोरों से सतर्क रहें। अपना डब्लूपीए पासवर्ड ऐसा रखें कि कोई उसे हैक न कर सके। इसके लिए आप त्मंअमत की हेल्प ले सकते हैं। -सही वायरलेस चैनल भी आपके वाई-फाई के लिए इंपॉर्टंट है। खासतौर से तब, जब आपके आस-पास बहुत सारे वाई-फाई नेटवर्क हों। वाई-फाई एनेलाईजर और वाई-फाई स्टंबल्र जैसे टूल्स आपको अपने घर के लिए परफेक्ट चैनल सर्च करने में मदद कर सकते हैं। दूसरे राउटर्स की इंटरफरेंस कम करने से सिग्नल मजबूत किए जा सकते हैं। राउटर सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करते रहें। पुराने राउटर के मामले में आपको ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी। -चेक करें कि कहीं वीक सिग्नल का कारण आपका इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर तो नहीं है। इस मामले में हम अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं कि राउटर खराब है या सर्विस प्रवाइडर की समस्या है। अगर दोनों सिचुएशन (वाई-फाई से कनेक्शन और राउटर से डायरेक्ट कनेक्शन) में आपकी डिवाइस पर नेट स्लो है, तो इसकी वजह आपका सर्विस प्रवाइडर है। इसके लिए आप स्पीड टेस्ट की मदद ले सकते हैं, आपको पता चल जाएगा कि समस्या कहां है।  

जिद्दी स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के आसान घरेलू उपाय

प्रेग्नेंसी और वजन घटने या बढ़ने की वजह से अक्सर शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रेच माक्र्स हो जाते हैं। वहीं कई लोगों में हॉर्मोनल चेंजेस की वजह से भी ऐसे निशान पड़ जाते हैं। सफेद रंग के ये जिद्दी दाग यूं तो बड़ी मुश्किल से जाते हैं। पर हम आपको कुछ ऐसे घरेलू तरीके बता रहे हैं, जिससे इन निशानों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। पौष्टिक भोजन स्वस्थ त्वचा के लिए विटामिन सी और ई, जिंक, सिलिका और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुरता वाला संतुलित और पौष्टिक आहार चुनें। खाने में स्ट्रॉबेरी, जामुन, पालक, गाजर, हरी बींस, साग और बादाम शामिल करें। नींबू का रस नींबू का रस एक प्राकृतिक अम्ल है, जो स्ट्रेच माक्र्स को हल्का करता है। नींबू के रस को स्ट्रेच माक्र्स पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें। चीनी अपने प्राकृतिक सफेद रूप में चीनी स्ट्रेच माक्र्स हटाने का काफी कारगर उपाय है। एक चम्मच चीनी में बादाम का तेल और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर उसे स्ट्रेच माक्र्स पर लगाने से काफी असर होता है। वनस्पति तेल से मसाज गर्भवती महिलाओं को वनस्पति तेल से मसाज करना चाहिए। इससे स्ट्रेच माक्र्स के निशान कम हो जाते हैं। एलोवेरा जेल एक कप एलोवेरा में 2 चम्मच विटामिन ई का तेल मिलाइए। इस मिश्रण को तब तक लगाइए जब तक त्वचा इसे पूरी तरह सोख न ले। रोजाना लगाने से त्वचा में फर्क महसूस होगा। कोकोआ मक्खन स्ट्रेच माक्र्स पर कोकोआ मक्खन लगाने से दाग कम होते हैं। स्ट्रेच माक्र्स वाले भागों पर दिन में दो बार कोकोआ मक्खन से मसाज करें। एक महीने में ही फर्क आएगा।  

बिना टावर भी चलेगा फोन! ऐपल ला सकता है एंटीना वाला स्मार्ट कवर

एंटीना वाला फोन कवर, जी हां आपने सही सुना। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, Apple एक नए स्मार्ट केस डेवलप करने पर विचार कर रहा है। इसमें एक बड़ा और ज्यादा एडवांस्ड एंटीना सिस्टम जोड़ जाएगा ताकि सैटेलाइट कम्युनिकेशन को काफी बेहतर बनाया जा सके। बता दें कि कंपनी ने अपने आईफोन में 2022 में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS फीचर लॉन्च किया था। इसके बाद अब ऐपल भविष्य में आने वाले फोन्स में कई बड़े अपग्रेड देने पर विचार कर रही है। लेटेस्ट पेटेंट से पता चलता है कि इमरजेंसी SOS फीचर में जल्द ही एक बड़ा अपग्रेड आ सकता है। इस फीचर को बेहतर बनाने के लिए नए स्मार्ट कवर का पेटेंट कराया गया है। फोन के एंटीना नहीं होते इतने पावरफुल Apple ने iPhone 14 के साथ सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की शुरुआत की थी। इस फीचर के साथ कंपनी ने लोगों को चौंका दिया था। यूजर्स अपने आईफोन को लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की ओर पॉइंट करके इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन फोन के अंदर दिए गए एंटीना का सरफेस एरिया और पावर सीमित होती है, इसलिए डेटा ट्रांसमिशन भी सीमित हो जाता है। बिल्डिंग, पेड़ और जमीन के कारण सैटेलाइट के साथ कनेक्शन बनाए रखना में मुश्किल आती है। कवर बड़े ग्रुप के साथ बनाता है कनेक्शन इस समस्या को हल करने और अपनी सैटेलाइट SOS को और भी बेहतर बनाने के लिए Apple ने एक हटाने वाले कवर के लिए पेटेंट फाइल किया है। इसे फेज्ड ऐरे एंटीना के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सिग्नल बीम बनाने और उन्हें चलाने के लिए कई ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल करता है। कवर किसी एक सैटेलाइट पर लॉक होने के बजाय बड़े ग्रुप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है। यह आसमान में घूमते हुए सैटेलाइट के बीच आसानी से शिफ्ट हो सकता है। पेटेंट के इलस्ट्रेशन में एक फोल्ड-आउट कवर दिखाया गया है। यह आसमान की ओर पॉइंट करता है और डेडिकेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) लिंक या नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) के जरिए iPhone के साथ सिंक होता है। ज्यादा डेटा भेजने में मिलेगी मदद केस में एक बड़ा एंटीना लगा है, जो iPhone को ज्यादा डेटा भेजने में मदद कर सकता है। इसके बाद, फोन शायद ज्यादा सैटेलाइट कनेक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है। यह होने वाली रुकावट को कम कर सकता है और ट्रांसमिशन की ताकत को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसे कब मार्केट में लाया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ये साफ है कि आईफोन कवर के साथ अगर एनटीना लगा होगा तो SOS सर्विस काफी बेहतर हो जाएगी।

ChatGPT का बढ़ता क्रेज: भारत में युवा इसे कोडिंग, पढ़ाई और काम में कर रहे हैं इस्तेमाल, रिपोर्ट में खुलासा

मुंबई   भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस्तेमाल के मामले में एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. ओपनएआई के नए डेटा के मुताबिक, भारत अब चैटजीपीटी का अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन चुका है. भारत में चैटजीपीटी के वीकली एक्टिव यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ से भी आगे पहुंच चुकी है. इसमें खास बात यह है कि भारतीय यूज़र्स सिर्फ एआई को आज़मा नहीं रहे, बल्कि इसे अपनी डेली-लाइफ के काम और प्रोफेशनल जरूरतों के लिए गंभीरता से इस्तेमाल भी कर रहे हैं. ओपनएआई की नई पब्लिक डेटा पहल 'OpenAI Signals' की रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में यूज़र्स टेक्निकल टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल एवरेज से कहीं ज्यादा कर रहे हैं. खासतौर पर कोडिंग और डेटा एनालिसिस के मामले में भारत काफी तेजी से आगे निकल रहा है. प्लस और प्रो सब्सक्राइबर्स के बीच डेटा एनालिसिस टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल औसत से करीब चार गुना ज्यादा है. वहीं, कोडिंग से जुड़े के लिए Codex का इस्तेमाल लगभग तीन गुना ज्यादा देखा गया है. OpenAI के सीईओ सैम अल्टमैन ने भी आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए यही बात कही है. ChatGPT यूज़ करने के तरीके भारत में आंकड़ा ग्लोबल तुलना मुख्य नोट्स वीकली एक्टिव यूजर्स 100 मिलियन से ज्यादा US के बाद दूसरा सबसे बड़ा सबसे तेज Codex ग्रोथ कोडिंग (Coding / Codex) 3x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से 3 गुना तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु सबसे आगे डेटा एनालिसिस 4x ज्यादा (Plus/Pro) ग्लोबल एवरेज से 4 गुना एडवांस टूल्स में हाई यूज लर्निंग/एजुकेशन 2x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से दोगुना युवा सबसे आगे वर्क-रिलेटेड मैसेजेस 35% ग्लोबल: 30% ड्राफ्टिंग, डिबगिंग, स्पीड-अप प्रैक्टिकल गाइडेंस (नॉन-वर्क) 35% – सेल्फ-लर्निंग, डिसीजन मेकिंग जनरल जानकारी / राइटिंग दोनों कामों के लिए 20% – बेसिक क्वेरीज और कंटेंट उम्र ग्रुप 18-24: 50% 18-34: 80% 18-24: 33% युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर)   चैटजीपीटी का सबसे एडवांस यूज़ कर रहा भारत रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय यूज़र्स कोडिंग से जुड़े सवाल भी दुनियाभर के यूजर्स की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा पूछ रहे हैं. वहीं, पढ़ाई और लर्निंग से जुड़े सवालों में भी भारत ग्लोबल एवरेज से लगभग दोगुना आगे है. जियोग्राफिक तौर पर देखें तो तेलंगाना, कर्नाटका और तमिलनाडु जैसे टेक हब्स में कोडिंग से जुड़ा इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखने को मिला है. इसके अलावा भारत में लोग काम से जुड़े कामों के लिए भी चैटजीपीटी का काफी इस्तेमाल करते हैं और इसमें भी तेजी से बढ़ोतरी आई है. करीब 35% कंज्यूमर मैसेजेस सीधे काम से जुड़े होते हैं, जबकि ग्लोबल लेवल पर यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत है. ऑफिस वर्क में लोग ड्राफ्टिंग, एडिटिंग, टेक्निकल हेल्प, डिबगिंग और काम को तेज करने के लिए चैटजीपीटी पर भरोसा कर रहे हैं. भारत के यूज़र्स काम के अलावा भी चैटजीपीटी का काफी प्रैक्टिल तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. लगभग 35% नॉन-वर्क मैसेजेस किसी न किसी तरह की प्रैक्टिकल गाइडेंस से जुड़े होते हैं. इसके अलावा करीब 20% मैसेजेस जनरल जानकारी और 20% राइटिंग से जुड़े होते हैं. इससे साफ है कि लोग सेल्फ लर्निंग, डिसीजन मेकिंग और पर्सनल प्रोडक्टिविटी के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.     18-24: 33%    युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर) उम्र के लिहाज से देखें तो भारत में चैटजीपीटी का इस्तेमाल युवाओं के बीच सबसे ज्यादा है. 18 से 24 साल के यूज़र्स कुल मैसेजेस का लगभग आधा हिस्सा भेजते हैं. वहीं, 18 से 34 साल के यूज़र्स मिलकर करीब 80% मैसेजेस करते हैं. OpenAI के चीफ इकोनॉमिस्ट रोनी चैटर्जी का कहना है कि एआई को अपनाने की रफ्तार इतनी तेज है कि उसे मापने वाले टूल्स भी पीछे छूट रहे हैं. उनका मानना है कि OpenAI Signals भारत में एआई को लेकर चर्चा को हाइप से निकालकर डेटा के आधार पर समझने में मदद करेगा.

स्मार्टफोन यूजर्स अलर्ट! Google Gemini बनकर स्कैमर्स चुरा रहे पर्सनल डिटेल्स, जानें कैसे रहें सुरक्षित

नई दिल्ली क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी तरह स्कैमर्स भी गूगल जेमिनी (Google Gemini) का इस्तेमाल करके आपको अपना निशाना बना सकते हैं। NOD32 एंटीवायरस बनाने वाली कंपनी ESET के रिसर्चर्स ने PromptSpy नाम का एक नया एंड्रॉयड मैलवेयर खाजा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मैलवेयर यूजर्स को मैनिपुलेट करने के लिए गूगल जेमिनी का इस्तेमाल करता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेडिशनल मैलवेयर हार्ड कोडेड इंस्ट्रक्शन पर निर्भर करता है। PromptSpy पहला ऐसा एंड्रॉयड मैलवेयर है, जो जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करता है। आइये, इस नए मैलवेयर के बारे में डिटेल में जानते हैं और इससे बचने का तरीका भी बताते हैं। क्या है PrompySpy ? एंड्रॉयड मैलवेयर ऐड फ्रॉड के लिए स्क्रीनशॉट को एनालाइज करते हैं और इस तरह के काम करने के लिए वे मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। ESET का कहना है कि PrompySpy आपकी स्क्रीन की जानकारी पाने के लिए Gemini का इस्तेमाल करते हैं। वे स्क्रीन की जानकारी जेमिनी को भेजता है और AI चैटबॉट से पूछता है कि आगे क्या करना है। कैसे काम करता है मैलवेयर? रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह मैलवेयर अलग-अलग एंड्रॉयड डिवाइस और इंटरफेस के हिसाब से काम करता है। वे अब पहले से लिखी गई स्क्रिप्ट पर निर्भर नहीं रहते हैं। पहले इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके कुछ ही डिवाइस पर काम करते थे, लेकिन अब जेमिनी के जरिए स्कैमर्स अलग-अलग डिवाइस के पैटर्न को समझ लेते हैं और जेमिनी से आगे बढ़ने की प्रक्रिया भी पूछ लेते हैं। AI का करता है इस्तेमाल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एंड्रॉयड डिवाइस में एक ऐसा फीचर होता है, जिससे यूजर ऐप्स को “लॉक” या “पिन” कर सकते हैं ताकि जब आप सभी ऐप्स को बैकग्राउंड से हटाएंगे तो वे मेमोरी से साफ ना हों। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के फोन्स में यह विभिन्न तरह से काम करता है। यहीं PromptSpy AI का इस्तेमाल करता है। मैलवेयर स्क्रीन पर क्या है, इसकी जानकारी Gemini को XML फॉर्मेट में भेजता है, जिसमें UI एलिमेंट, टेक्स्ट लेबल, क्लास टाइप और स्क्रीन कोऑर्डिनेट शामिल हैं। एंड्रॉयड की इस सर्विस का होता है इस्तेमाल इसके बाद गूगल का AI चैटबॉट JSON में किसी ऐप को लॉक या पिन करने के निर्देश भेजकर जवाब देता है। फिर PromptSpy एंड्रॉयड की एक्सेसिबिलिटी सर्विस का इस्तेमाल करके यह काम करता है। ऐसे बचें Google का सुझाव है कि यूजर्स को अपने डिवाइस पर प्ले प्रोटेक्ट चालू करना चाहिए, क्योंकि यह सिक्योरिटी फीचर उनके डिवाइस को मैलवेयर से इन्फेक्ट होने से बचाने में मदद कर सकता है।

अब दुबला नहीं रहेगा बच्चा! वजन बढ़ाने के लिए 6 बेस्ट फूड्स

अक्सर कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा खाना तो अच्छे से खाता है, लेकिन फिर भी वह दुबला-पतला है और उसका वजन नहीं बढ़ रहा है। अगर आप भी इसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो चिंता न करें। विशेषज्ञ के मुताबिक, आप अपने बच्चे की डाइट में कुछ खास फूड्स को शामिल करके इस परेशानी को दूर कर सकते हैं। इस आर्टिकल में हम उन 6 बेहतरीन चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो बच्चे का वजन बढ़ाने में मदद करती हैं। दाल और घी आप किसी भी दाल को अच्छी तरह उबाल लें। फिर उसे अच्छे से मैश करके उसमें घी मिलाएं और बच्चे को खिलाएं। यह वजन बढ़ाने का एक बहुत अच्छा तरीका है। पनीर, टोफू या अंडा बच्चे के सही विकास के लिए ये जरूरी पोषक तत्व हैं। पनीर, टोफू या अंडे में प्रोटीन होता है, जो बच्चे का वजन बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है। शकरकंद या आलू शकरकंद या आलू को अच्छी तरह उबालकर और मैश करके बच्चे को दें। इसमें फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो शरीर को एनर्जी देते हैं और तेजी से वजन बढ़ाते हैं। पीसे हुए सूखे मेवे सूखे मेवों को बारीक पीस लें। इस पाउडर को आप दूध, दही या दाल में मिलाकर बच्चे को दे सकते हैं। ड्राई फ्रूट्स बच्चे का वजन बढ़ाने में बहुत असरदार होते हैं। आटे का हलवा और ओट्स का दलिया बच्चे को हल्की चीनी डालकर आटे का हलवा बनाकर खिलाने से भी वजन बढ़ता है। इसके अलावा, आप बच्चे को ओट्स का दलिया बनाकर भी दे सकते हैं, यह भी वजन बढ़ाने में मदद करता है। फुल फैट दही के साथ फल फुल फैट दही में केला, चीकू या आम मिलाकर एक स्वादिष्ट फ्रूट योगर्ट तैयार करें और बच्चे को खिलाएं। इससे भी बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है। अगर आपका बच्चा अंडरवेट है और उसका वजन नहीं बढ़ रहा है, तो आप उसे ये पौष्टिक चीजें दे सकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि इससे उसका वजन भी बढ़ेगा और उसके शरीर में किसी भी तरह के पोषण की कमी नहीं रहेगी।  

डॉक्टर की चेतावनी: सीपीआर देने से पहले ABC जरूर चेक करें

नई दिल्ली सीपीआर एक जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया है जो हृदय गति रुकने पर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाए रखने में मदद कर सकती है। सही समय पर दी गई सीपीआर अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज के जीवित बचने की संभावना को कई गुना बढ़ा सकती है। नोएडा के अमर उजाला कार्यालय में आयोजित एक विशेष हेल्थ कैंप के दौरान हृदय स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में नोएडा के एक निजी अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरभि छाबड़ा ने जीवन रक्षक तकनीक 'सीपीआर' (CPR) के बारे में एक बड़ा और जरूरी सुझाव दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीपीआर देने से पहले यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि मरीज को वास्तव में इसकी आवश्यकता है भी या नहीं। अक्सर घबराहट में लोग बेहोश पड़े हर व्यक्ति को सीपीआर देना शुरू कर देते हैं, जो कि डॉ. सुरभि के अनुसार मरीज के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। डॉ. छाबड़ा ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को सीपीआर देने से पहले 'एबीसी' (ABC) फॉर्मूले की जांच करना जरूरी है। यह तीन चरणों वाली प्रक्रिया बताने में मदद करती है कि क्या व्यक्ति का दिल या सांस वास्तव में रुक गई है। सही पहचान के बिना दी गई चेस्ट कंप्रेशन (छाती दबाना) मरीज की पसलियों या आंतरिक अंगों को चोट पहुंचा सकती है। एयरवे डॉ. सुरभि के अनुसार, एबीसी फॉर्मूले में सबसे पहला चरण 'ए' यानी एयरवे (Airway) की जांच करना है। जब कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए या बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले यह देखें कि उसका वायु मार्ग खुला है या नहीं। कई बार गले में कुछ फंसने या जीब के पीछे की ओर गिरने के कारण सांस का रास्ता रुक जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज का सिर थोड़ा पीछे झुकाएं और उसकी ठुड्डी को ऊपर उठाएं। यह क्रिया सांस की नली को सीधा करने और हवा के प्रवाह के लिए रास्ता साफ करने में मदद करती है। अगर वायु मार्ग अवरुद्ध है, तो सीपीआर देने का कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंच ही नहीं पाएगी। ब्रिदिंग एबीसी प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण चरण 'बी' यानी ब्रिदिंग है। डॉ. छाबड़ा ने सुझाव दिया कि मरीज के पास अपना कान ले जाएं और उसकी सांसों की आवाज सुनने की कोशिश करें। साथ ही अपनी नजरें मरीज की छाती पर रखें और देखें कि क्या वह ऊपर-नीचे हो रही है। अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो उसे सीपीआर की आवश्यकता नहीं होती है। अक्सर लोग सामान्य बेहोशी या 'मिर्गी' के दौरे में भी सीपीआर देने लगते हैं, जो गलत है। केवल तभी सीपीआर दें जब व्यक्ति की सांसें पूरी तरह रुक चुकी हों। सर्कुलेशन एबीसी फॉर्मूले का अंतिम स्टेज है 'सी' यानी सर्कुलेशन चेक करना है। इसका मतलब है कि मरीज के शरीर में खून का प्रवाह हो रहा है या नहीं, इसे जांचना। इसके लिए गर्दन के पास स्थित 'कैरोटिड पल्स' को 5 से 10 सेकंड तक महसूस करें। आप कलाई की नब्ज को भी चेक कर सकते हैं लेकिन अगर कलाई पर नब्ज न मिले तो गर्दन के पास ही चेक करें। डॉ. सुरभि के मुताबिक, अगर पल्स महसूस नहीं हो रही है और मरीज की सांसें भी बंद हैं, तो यह 'कार्डियक अरेस्ट' का स्पष्ट संकेत है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत सीपीआर शुरू कर देना चाहिए।  गलत सीपीआर से होने वाले जोखिम डॉ. सुरभि छाबड़ा ने अंत में यह स्पष्ट किया कि सीपीआर एक बेहद शक्तिशाली जीवन रक्षक तकनीक है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सही समय और सही मरीज के चुनाव पर निर्भर करती है। अगर किसी ऐसे व्यक्ति की छाती जोर से दबाई जाए जिसका दिल धड़क रहा है, तो इससे हार्ट रिदम बिगड़ सकता है और पसलियां टूट सकती हैं। एबीसी फॉर्मूले का पालन करने से आप न सिर्फ मरीज की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सहायता (एम्बुलेंस) आने तक उसे एक नया जीवन देने की संभावना भी बढ़ा सकेंगे।    

AI फोटो-वीडियो डालना अब जोखिम भरा? आज से लागू हुए इंटरनेट के 3 नए नियम, जानना जरूरी

नई  दिल्ली अगर आप सोशल मीडिया पर एआई (AI) से बनी तस्वीरें या वीडियो शेयर करने के शौकीन हैं तो आज से आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 'आईटी (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021' के नए संशोधन आज यानी 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। अब इंटरनेट पर किसी भी भ्रामक या एआई कंटेंट को बिना लेबल के पोस्ट करना आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'AI Impact Summit' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट को समाज के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने साफ किया कि एआई कंटेंट के लिए 'वॉटरमार्किंग' और सोर्स स्टैंडर्ड तय करना अब समय की मांग है। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर और ज्यादा सतर्क रहने पर जोर दिया। क्या है सिंथेटिकली जेनरेटेड कंटेंट (SGI)? नए नियमों के अनुसार एआई या कंप्यूटर द्वारा तैयार या मॉडिफाई किया गया कोई भी कंटेंट जो किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना जैसा दिखता हो उसे SGI माना जाएगा। ऐसे कंटेंट को शेयर करने से पहले 'वॉटरमार्क' या लेबल लगाना अनिवार्य है ताकि लोग समझ सकें कि यह असली नहीं है। सामान्य फोटो या वीडियो एडिटिंग को इस दायरे से बाहर रखा गया है। लागू हुए ये 3 बड़े बदलाव     अनिवार्य लेबलिंग: एआई कंटेंट पर लगा 'AI Label' एक बार लगने के बाद हटाया नहीं जा सकेगा।          प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी: फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसे प्लेटफॉर्म्स को एआई कंटेंट पहचानने के लिए विशेष टूल्स बनाने होंगे। बिना वेरिफिकेशन के ऐसा कंटेंट अपलोड नहीं होगा।     नियमित चेतावनी: सोशल मीडिया कंपनियां हर 3 महीने में अपने यूजर्स को एआई के गलत इस्तेमाल पर होने वाली सजा और जुर्माने के बारे में अलर्ट भेजेंगी। नो-गो जोन: इन पर है सख्त पाबंदी सरकार ने कुछ श्रेणियों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट, फर्जी दस्तावेज, हथियार बनाने की जानकारी और किसी की छवि बिगाड़ने वाले डीपफेक वीडियो बनाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। सख्त कानून और भारी जुर्माना नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। अगर सरकार किसी कंटेंट को हटाने का निर्देश देती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा (जो पहले 36 घंटे था)। शिकायतों पर रिस्पॉन्स देने की समय सीमा को घटाकर मात्र 12 घंटे कर दिया गया है।  

ठंड के मौसम में गाजर है सेहत का खजाना, मिलते हैं कई जबरदस्त लाभ

गाजर में कई तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर से इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, कई तरह के खनिज लवण व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। सर्दी का मौसम आते ही बाजार में लाल-लाल गाजर बेहद सस्ते दाम में मिलने लगती हैं। इतना ही नहीं, इस मौसम में लोग गाजर की सब्जी से लेकर उसका जूस तक पीना पसंद करते हैं। यूं तो गाजर को कई तहर से खाया जाता है लेकिन क्या आप इससे मिलने वाले फायदों से वाकिफ हैं। नहीं न, तो चलिए जानते हैं गाजर से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में-   प्रचुर होते हैं पोषक तत्व गाजर में कई तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर से इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, कई तरह के खनिज लवण व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। आंखों को रखेगा तंदुरूस्त गाजर का सेवन आंखों के लिए विशेष रूप से लाभदायी माना गया है। ऐसा इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन व विटामिन ए की वजह से होता है। इसलिए जो लोग गाजर का सेवन पर्याप्त मात्रा में करते हैं, उनकी आंखों की रोशनी लंबे समय तक दुरूस्त तो रहती है ही, साथ ही रतौंधी व मोतियाबिंद जैसी बीमारियां होने की आशंका भी कम हो जाती है।   सदा रखे जवां समय के पहिए को रोक पाना भले ही किसी के लिए संभव न हो लेकिन लंबे समय तक जवां बने रहने के लिए कुछ उपाय तो किए ही जा सकते हैं। इन्हीं में से एक है गाजर का सेवन करना। दरअसल, इसमें बीटा-कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। जो विभिन्न कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं और एजिंग के साइन्स को लंबे समय तक आने से रोकते हैं। इतना ही नहीं, गाजर का सेवन रूखी त्वचा, पिंपल्स, पिगमेंटेशन आदि समस्या से भी निजात दिलाते हैं।   हृदय के लिए लाभदायक गाजर हृदय के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। दरअसल, इसमें कैरोटीनॉयड्स पाए जाते हैं जो किसी भी तरह के हृदय रोग की आशंका को कम करते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें बीटा-कैरोटीन के साथ-साथ अल्फा कैरोटीन और ल्यूटिन भी पाया जाता है। गाजर का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। दांतों की सफाई गाजर प्लैक और खाद्य कणों को मुंह से निकालकर दांतों व पूरे मुंहे की सफाई करने का काम करता है। ठीक उसी तरह, जिस प्रकार एक टूथब्रश व टूथपेस्ट अपना काम करता है। गाजर में पाए जाने वाले मिनरल्स दांतों को किसी भी तरह की क्षति से बखूबी बचाते हैं। इसके अतिरिक्त गाजर मसूड़ों को उत्तेजित करके अधिक लार उत्पन्न करने में मदद करता है और यह लार क्षारीय होने के कारण कैविटी बनाने वाले बैक्टीरिया को संतुलित करके दांतों की रक्षा करता है।