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रातभर बालों में तेल लगाकर सोते हैं तो सावधान! जावेद हबीब ने बताया सही तरीका

बालों में तेल लगाना भारतीयों की हेयर केयर रूटीन का हिस्सा रहा है. पूराने समय से बालों को मजबूत, स्मूद, सिल्की और शाइनी बनाने के लिए लोत बालों में तेल लगाते आए हैं. खासकर बालों को मजबूत और घना रखने के लिए लोग अक्सर रात में सिर पर अच्छी तरह तेल लगाकर सोते हैं और सुबह शैंपू करते हैं. लेकिन अगर आप भी सालों से ऐसा करते आ रहे हैं, तो जरा रुकिए! मशहूर हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के मुताबिक, तेल लगाने का ये तरीका सही नहीं है. यही बालों के झड़ने से लेकर उनका कमजोर होना का एक बड़ा कारण है. उनका कहना है कि सिर्फ तेल लगा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि इसे कब और कैसे लगाया जा रहा है, ये भी बालों की सेहत के लिए काफी मायने रखता है. अगर आप भी बालों में रात को ठूस-ठूसकर तेल भरकर सो जाते हैं और सोचते हैं कि सुबह आपके बाल अच्छे मिलेंगे, तो आप बहुत गलत सोच रहे हैं. चलिए जानते हैं क्या है बालों में तेल लगाने का सही तरीका, जो उन्हें मजबूती देने के साथ ही टूटने से भी बचाएगा. रातभर तेल लगाकर सोना पड़ सकता है भारी भारतीय आमतौर पर मानते हैं कि बालों में तेल जितनी देर लगा रहेगा, उतना ही ज्यादा फायदा होगा. इसी सोच के चलते कई लोग रात को सोने से पहले सिर में तेल लगाते हैं और सुबह तक इसे लगा रहने देते हैं. लेकिन जावेद हबीब इस आदत को सही नहीं मानते. उनके मुताबिक, रात सोने के लिए होती है, बालों में घंटों तक तेल लगाए रखने के लिए नहीं. लंबे समय तक स्कैल्प पर तेल लगा रहने से धूल-मिट्टी और गंदगी चिपक सकती है. इसकी वजह से स्कैल्प ब्लॉक रहता है. इससे स्कैल्प से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं और बालों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. उनका कहना है कि रात में तेल लगाकर सोना ना केवल बाल झड़ने का बल्कि सफेद होने का भी बड़ा कारण है. सूखे बालों पर तेल लगाना भी सही तरीका नहीं? बालों में तेल लगाने को लेकर एक और आम आदत है कि लोग सीधे सूखे बालों और स्कैल्प पर खूब सारा तेल लगा लेते हैं. जावेद हबीब के अनुसार, ये भी तेल लगाने का सही तरीका नहीं है. जिस तरह शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल बालों की कंडीशन के हिसाब से किया जाता है, उसी तरह तेल लगाने का तरीका भी मायने रखता है. वो कहते हैं कि तेल लगाने से पहले बालों को हल्का गीला किया जा सकता है. इससे तेल को बालों पर फैलाना आसान होता है और जरूरत से ज्यादा तेल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. यानी तेल सूखे बालों पर नहीं, बल्कि हल्के गीले बालों पर लगाना अच्छा होता है. तो आखिर बालों में तेल कब लगाएं? जावेद हबीब के बताए तरीके के मुताबिक, बालों में तेल लगाने के लिए घंटों तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है. इसे शैंपू करने से कुछ समय पहले लगाया जा सकता है. तेल लगाने के बाद इसे करीब 5 से 10 मिनट तक बालों और स्कैल्प पर रहने दें और फिर शैंपू कर लें. यानी रातभर तेल लगाकर सोने के बजाय प्री-शैंपू ऑयलिंग को अपनी रूटीन में शामिल किया जा सकता है. तेल लगाते समय जोर-जोर से न रगड़ें बहुत से लोग ये भी मानते हैं कि सिर में तेल लगाते समय जितनी तेज मालिश की जाएगी, उतना ही ज्यादा फायदा होगा. लेकिन ऐसा करना जरूरी नहीं है. जावेद हबीब कहते हैं कि स्कैल्प को जोर से रगड़ने या नाखूनों से खुजलाने के बजाय हल्के हाथों से तेल लगाना अच्छा रहता है. तेल को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर हल्के हाथों से लगाएं. इसके बाद कुछ मिनट छोड़कर शैंपू कर लें. इससे बालों की जड़ें कमजोर नहीं होंगी. तेल लगाने का मतलब यह नहीं कि बालों में घंटों तेल रहे बालों में तेल लगाने का मकसद उन्हें जरूरत से ज्यादा ऑयली बनाना नहीं है. असल में हेयर केयर में सबसे जरूरी बात है कि आप अपनी स्कैल्प और बालों की जरूरत को समझें. बहुत ज्यादा तेल लगाना, उसे लंबे समय तक छोड़ना या स्कैल्प को जोर से रगड़ना जरूरी नहीं है.

Jio का ₹3,599 वाला धांसू प्लान, 365 दिन की वैलिडिटी के साथ रोज 2.5GB डेटा

अगर आप Jio का सिम इस्तेमाल करते हैं और बार-बार रिचार्ज कराने से परेशान हैं, तो आपके लिए एक लंबी वैलिडिटी वाला प्लान काम का हो सकता है. Jio ने अपनी एनिवर्सरी के मौके पर ₹3,599 का एक प्लान पेश किया है. इस प्लान में यूजर्स को लंबे समय तक रिचार्ज की टेंशन नहीं रहती. इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका डेटा बेनिफिट है. इसमें रोज 2.5GB डेटा मिलता है. यानी अगर आप हर दिन YouTube देखते हैं, Instagram चलाते हैं या WhatsApp पर वीडियो कॉल करते हैं, तो आपके पास रोज इस्तेमाल करने के लिए अच्छा डेटा रहेगा. पूरे साल चल सकता है प्लान ₹3,599 के इस प्लान की वैलिडिटी 365 दिनों की है. यानी एक बार रिचार्ज कराने के बाद करीब एक साल तक दोबारा रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. रोज 2.5GB डेटा के हिसाब से देखें तो पूरी वैलिडिटी के दौरान यूजर को काफी ज्यादा डेटा मिलता है. इसके साथ यूजर्स को अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है. यानी किसी भी नेटवर्क पर बात करने के लिए अलग से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है. इसके अलावा रोज 100 SMS भी मिलते हैं. जिओ के दूसरे फायदे भी मिलेंगे इस प्लान में जिओ की तरफ से मिलने वाले कुछ दूसरे बेनिफिट्स भी शामिल हैं. हालांकि, प्लान लेने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि आपके इलाके में जिओ की 5G सर्विस अवेलेबल है या नहीं और आपके फोन में 5G सपोर्ट करता है या नहीं. अगर आप ऐसा रिचार्ज चाहते हैं जिसे बार-बार कराने की जरूरत न पड़े, तो ₹3,599 वाला यह प्लान एक लंबी समय का ऑप्शन हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए, जो पूरे साल के लिए एक ही बार रिचार्ज कराकर टेंशन खत्म करना चाहते हैं.

ChatGPT के फ्री वर्जन में दिखेंगे Sponsored Ads, जानें आपकी पर्सनल चैट कितनी रहेगी सेफ

आज के समय में AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. ऑफिस के काम से लेकर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों तक, लोग AI टूल्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें ChatGPT भी काफी पॉपुलर है. अब तक इसके फ्री वर्जन का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. चैटजीपीटी के फ्री वर्जन में अब सवालों के जवाब के साथ Sponsored Ads भी नजर आ सकते हैं. यानी किसी सवाल का जवाब पढ़ते समय उसके नीचे आपको किसी कंपनी या प्रोडक्ट का एडवर्टाइजमेंट देखने मिलेगा. OpenAI अपने सब्सक्रिप्शन मॉडल के अलवा Ads के जरिए भी कमाई का रास्ता तैयार कर रहा है. ऐसे में आने वाले समय में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने का एक्सपीरिएंस फ्री यूजर्स के लिए थोड़ा बदल सकता है. आइए समझते हैं कि ये Ads कैसे दिखेंगे और क्या आपकी पर्सनल चैट्स सेफ रहेगा. क्या सभी यूजर्स को दिखेंगे Ads? चैटजीपीटी के बढ़ते यूजर बेस के बीच OpenAI ने Ads को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ये Ads खास तौर पर फ्री में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर सवाल के जवाब के नीचे एडवर्टाइजमेंट जरूर नजर आएगा. Ad किस यूजर को और किस तरह दिखाया जाएगा, यह प्लेटफॉर्म के सिस्टम और Ad मॉडल पर निर्भर करेगा. जवाब के नीचे दिख सकता है Sponsored Ad मान लीजिए आपने चैटजीपीटी से किसी प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछा. चैटजीपीटी आपको हमेशा की तरह इसका जवाब देगा. इसी जवाब के नीचे आपको एक छोटा स्पॉन्सर्ड Ad दिखाई दे सकता है. अगर आपको उस एडवर्टाइजमेंट में दिखाया गया कोई प्रोडक्ट पसंद आता है, तो आप उसके बारे में ज्यादा जानकारी ले सकते हैं या उसे खरीद सकते हैं. इस तरह कंपनियों को अपने प्रोडक्ट संभावित ग्राहकों तक पहुंचाने का नया प्लेटफॉर्म मिल जाएगा. कंपनियां चैटजीपीटी पर कैसे चलाएंगी Ads? चैटजीपीटी पर एडवर्टाइजमेंट दिखाने के लिए कंपनियां OpenAI के Ads प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके जरिए कंपनियों को अपने Ads को ज्यादा से ज्यादा पोटेंशियल कस्टमर तक पहुंचाने का मौका मिलेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों के लिए एडवर्टाइजमेंट की शुरुआती कीमत करीब 725 रुपये प्रति दिन हो सकती है. हालांकि, कीमत और Ad की अवेलियेबलीटी जैसे नियम समय के साथ बदल सकते हैं. क्या एडवर्टाइजर्स आपकी चैटजीपीटी चैट्स पढ़ पाएंगे? यह सवाल सबसे इंपॉर्टेंट है. आखिर जब चैटजीपीटी पर Ads दिखेंगे, तो क्या कंपनियां आपकी पर्सनल बातचीत भी देख पाएंगी? OpenAI के मुताबिक, एडवर्टाइजर्स यूजर्स की पर्सनल चैट्स को पढ़ नहीं सकते. यानी आपने चैटजीपीटी पर क्या सवाल पूछा, क्या इन्फॉर्मेशन शेयर की या किस सब्जेक्ट पर बातचीत की, इसकी जानकारी एडवर्टाइजर्स के साथ सीधे शेयर नहीं की जाएगी. Ads को सही यूजर्स तक पहुंचाने के लिए कुछ जरूरी जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन आपकी पर्सनल बातचीत एडवर्टाइजर्स को अवेलेबल नहीं कराई जाएगी. यानी चैटजीपीटी पर Ads आने के बावजूद आपकी पर्सनल चैट्स और एडवर्टाइजर्स के बीच एक अलगाव बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

घर पर ऐसे बनाएं नीम का साबुन, पिंपल्स और एक्स्ट्रा ऑयल से मिलेगी राहत

 नीम का इस्तेमाल लंबे समय से स्किन केयर में किया जाता रहा है. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं जो स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं. आज हम आपको नीम की पत्तियों से घर पर साबुन बनाना बताएंगे. यह साबुन चेहरे पर जमी गंदगी, एक्स्ट्रा ऑयल और बैक्टीरिया को साफ करने में मदद करता है, जिससे पिंपल्स होने का खतरा कम रहता है. साथ ही, यह स्किन को साफ, सॉफ्ट और फ्रेश बनाएं रखने में भी मदद करता है. आइए जानते हैं कि घर पर नीम से साबुन कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 250 ग्राम ग्लिसरीन सोप बेस 25 से 30 नीम की पत्तियां 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर 2 से 3 विटामिन ई कैप्सूल 4 बूंद नीम एसेंशियल ऑयल   नीम की पत्तियों से घर पर साबुन कैसे बनाएं? नीम साबुन बनाने के लिए सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें. अब इन्हें मिक्सर में डालकर पीस लें. पत्तियों को पीसते समय पानी न डालें. अब इसमें 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर डालें. इसके बाद विटामिन ई कैप्सूल को काटकर उसका तेल भी मिश्रण में डाल दें. आखिर में नीम एसेंशियल ऑयल की 4 बूंदें डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. अब ग्लिसरीन सोप बेस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसे माइक्रोवेव या डबल बॉयलर की मदद से पिघला लें. जब सोप बेस पूरी तरह पिघल जाए तो इसमें तैयार नीम का मिश्रण डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब इस मिश्रण को साबुन के सांचे में डाल दें और इसे 12 से 24 घंटे तक सेट होने के लिए छोड़ दें. साबुन जम जाए तो इसे सांचे से निकाल लें.     कैसे करें इस्तेमाल?     साबुन को सांचे से निकालने के बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर इस्तेमाल कर सकते हैं. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैर या हाथ के छोटे हिस्से पर लगाकर पैच टेस्ट जरूर कर लें. अगर जलन या खुजली जैसी समस्या हो तो इसका इस्तेमाल न करें.  

स्टेज-4 ब्रेस्ट कैंसर में नई दवाओं से बढ़ी उम्मीद, एम्स में मरीजों के इलाज के बेहतर विकल्प

भोपाल स्तन कैंसर की चौथी स्टेज सुनते ही मरीज और परिवार अक्सर उम्मीद छोड़ने लगते हैं, लेकिन हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मामले में इलाज की तस्वीर अब बदल रही है। आधुनिक लक्षित दवाओं ने उन मरीजों के लिए भी उपचार के नए रास्ते खोले हैं, जिनका कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका है। एम्स भोपाल की चिकित्सा कैंसर विज्ञान एवं रक्त रोग विभाग की संकाय सदस्य डॉ. आकांक्षा चौधरी ने भोपाल ऑन्कोलॉजी अपडेट्स 2026 में हेर-टू पॉजिटिव मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के एक मामले पर विशेषज्ञ चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने नई लक्षित दवाओं और मरीज की बीमारी के अनुसार उपचार चुनने की आधुनिक पद्धति की जानकारी साझा की। बीमारी की पहचान से तय होगा इलाज डॉ. चौधरी के अनुसार अब कैंसर का उपचार केवल यह देखकर तय नहीं किया जाता कि बीमारी किस अंग में है या किस चरण में पहुंची है। कैंसर कोशिकाओं की विशेषताओं की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। हेर-टू एक प्रोटीन है, जो कुछ स्तन कैंसर कोशिकाओं की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में पाया जाता है। ऐसे कैंसर को हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर कहा जाता है। जब यह स्तन से निकलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है तो इसे मेटास्टेटिक यानी चौथी स्टेज का कैंसर माना जाता है। नई दवाओं से बढ़े उपचार के विकल्प विशेषज्ञ चर्चा में ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन, पर्टुजुमैब और टुकाटिनिब जैसी नई लक्षित दवाओं पर चर्चा हुई। इन उपचारों ने चौथी स्टेज के हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर में बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। इनके साथ मरीजों के लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने की उम्मीद भी पहले की तुलना में बढ़ी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के उपचार के विकल्प काफी सीमित थे। लगातार हो रही चिकित्सा प्रगति के कारण अब मरीज की बीमारी की विशेषताओं के आधार पर कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। राहत: आयुष्मान से लक्षित इलाज एम्स भोपाल में हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मरीजों के लिए आधुनिक लक्षित उपचार  उपलब्ध हैं। ट्रास्टुजुमैब आधारित लक्षित उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है। इसके अलावा एम्स भोपाल के चिकित्सा कैंसर विज्ञान विभाग में स्तन कैंसर समेत उन्नत कैंसर के मरीजों के लिए लक्षित दवाओं, इम्यूनोथेरेपी और मरीज की बीमारी के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।  महिलाओं के लिए जरूरी संदेश हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर की रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि उपचार के विकल्प खत्म हो गए। खासकर बीमारी के शरीर में फैल जाने के बाद भी आधुनिक उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा या निप्पल में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, कैंसर की सही पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है। 

Cancer Alert: मोटापा और तनाव बना रहे बीमारी की वजह, पुरुषों में ओरल- महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ा

मुंबई  तनाव, मोटापे और बिगड़ी हुई जीनवशैली की वजह से शहरों में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डेटा के मुताबिक भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, बंगाल उड़ीसा में ओरल कैंसर के साथ लंग्स कैंसर इसोफेगस और स्टमक कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. और ये आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के भी आगे निकल गया है।  पुरुषों में अगर सबसे ज्यादा मामले ओरल कैंसर के हैं तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर. सर्वाइकल कैंसर ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में तेजी से बढ़ा है. कैसे टाटा मेमोरियल अब कैंसर को लेकर अवेयरनेस के साथ कैंसर फैलने से पहले उसके बचाव की रणनीति पर काम कर रहा है. आर्युवेद पर शुरु होने वाले क्लीनिकल ट्रायल क्या कैंसर के उपचार में नई खोज साबित होंगे. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल क्यों प्राइमरी स्क्रीनिंग पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।  शहरी जिंदगी का तनाव और मोटापा कैंसर की जड़ टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के रिसेप्शन से लेकर रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट तक मरीज और उनके परिजन ही दिखाई देते हैं. कैंसर के इलाज की पहली और आखिरी उम्मीद है ये अस्पताल. उम्मीद की यहां आ गए तो ज़िंदगी बच सकती है. रेडियोलॉजी एंव एकेडेमिक्स डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सुयश कुलकर्णी बताते हैं, ''देश भर से यहां लोग आते हैं. हालांकि हमारे और सेंटर भी हैं, लेकिन एक ट्रेडिशनल जो मरीज का रहता है उसे भरोसा होता है कि अगर मुंबई टाटा मेमोरियल में पहुंच गए तो सब ठीक हो जाएगा।  हम ये पूरी कोशिश करते भी हैं. लेकिन चुनौती ये है कि कैंसर के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं. और ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में इनकी तादाद ज्यादा है.'' डॉ. कुलकर्णी बताते हैं, ''शहरी जिंदगी का तनाव मोटापा और बिगड़ती लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है. दूसरा एक खतरा पेस्टिसाइड्स से भी है.'' वे कहते हैं, ''तनाव सीधे आपके शरीर के सेल्फ डिफेंस सिस्टम पर अटैक करता है. सीधे इम्यूनिटी प्रभावित होती है. तनाव से दूरी योग और एक्सरसाइज ये लाइफ स्टाइल में शामिल किये जाने की जरुरत है।  ये राज्य हैं जहां तेजी से फैल रहा है कैंसर भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा इन राज्यों में इसोफेगस कैंसर, लंग्स कैंसर ओरल कैंसर और स्टमक कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉक्टर शर्मिला पिंपरे के मुताबिक, ''अगर हम एक औसत देखें तो अगर हर एक लाख लोगों में 110 लोगों को कैंसर है तो इन राज्यों में ये आंकड़ा 210 तक पहुंच रहा है. यहां पर मुख्य वजह फूड हैबिट्स के साथ स्मोकिंग भी है. इसी तरह से अगर हम महिलाओं में देखें तो ग्रामीण इलाकों से ज्यादा मामले ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के हैं।  आर्युवेद कैंसर में कितना कारगर क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी कैंसर पर किस तरह से पूरी रोकथाम हो सके, इसके लिए प्रयास चिकित्सा की दूसरी विधाओं में भी किए जा रहे हैं. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल एक पूरा सैटअप तैयार कर रहा है. जहां पर आयुष के डॉक्टर्स के साथ पहले आर्युवेद का मेडिकल कल्टिनेशन किया जाएगा. उसके बाद क्लीनिकल ट्रायल भी शुरु होंगे. महाराष्ट्र के खोपोली में इसकी तैयारी हो रही है।  डॉ. शर्मिला बताती हैं, ''आयुष युनानी जो भी दूसरी पद्धतियां हैं उनके भी क्लीनिकल ट्रायल होंगे और फिर एविडेंस के साथ हम इस निश्कर्ष पर पहुंच सकेंगे कि ये कितना कारगर है. खोपोली में 27 एकड़ में ये तैयारी चल रही है.'' वे कहती हैं, ''अभी लोग कीमोथैरेपी छोड़कर आर्युवेद ट्रीटमेंट लेते हैं. लेकिन क्लनिकली साबित हो जाने के बाद ही इस पर जाना चाहिए. इसके लिए ही हम प्रयास कर रहे हैं कि क्या एलोपैथिक के साथ इन दवाओं की भी मदद ली जा सकती है. लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही परिणाम जान लेने के बाद ही इस मामले में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।  कैंसर रोकने अवेयरनेस कैम्प 13 से 15 साल के बच्चे टारगेट टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल केवल रोकथाम ही नहीं कैंसर के लिए जरुरी सावधानी क्या रखनी चाहिए इसके लिए भी जागरुकता अभियान चला रहा है. खास बात ये है कि ये कैम्पेन स्कूल के 13 से 15 साल के बच्चों को टारगेट करके डिजाइन किया गया है. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉ मंजूर सैंगर बताती हैं, ''असल में इस एज ग्रुप को चुनने की खास वजह ये है कि ये बच्चे खुद तो स्मोकिग करने से पहले संभाल लेंगे. ये परिवार में भी एक कैटेलिस्ट बनेंगे और सिगरेट से लेकर एल्कोहल रोकने का काम करेंगे. ये बच्चे अगर इस उम्र में संभल गए तो कॉलेज में भी ये इस सबसे दूर रहेंगे। 

₹3,500 के बजट में OnePlus Nord Buds 4: दमदार ANC और 54 घंटे की बैटरी, जानें पूरा रिव्यू

बजट TWS ईयरबड्स खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है, कि बजट में कौन-सा मॉडल सबसे बेहतर रहेगा. OnePlus Nord Buds 4 भी इसी सेगमेंट में एक नया ऑप्शन बनकर आया है. कंपनी ने इनमें दमदार ANC, शानदार साउंड, लंबी बैटरी लाइफ और प्रीमियम डिजाइन जैसे कई फीचर्स दिए हैं. लेकिन क्या ये ईयरबड्स रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी उतने ही अच्छे साबित होते हैं, जितना कंपनी ने कई प्रीमियम फीचर्स देने का दावा किया है? अगर आप जानना चाहते हैं कि ये ईयरबड्स पैसे वसूल हैं या नहीं, तो यहां पढिए इसका पूरा रिव्यू. डिजाइन और कम्फर्ट OnePlus Nord Buds 4 का डिजाइन पहले के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम और क्लीन है. कंपनी ने इस बार ग्लॉसी फिनिश की जगह मैट टेक्सचर दिया है, जिससे फिंगरप्रिंट और हल्के स्क्रैच आसानी से नहीं दिखेंगे. इसका चार्जिंग केस कॉम्पैक्ट है और जेब में आसानी से रखा जा सकता है. ईयरबड्स स्टेम-स्टाइल डिजाइन के साथ आते हैं और इनमें सिलिकॉन ईयर टिप्स मिलते हैं. हर एक ईयरबड का वजन सिर्फ 4.3 ग्राम है, इसलिए लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर भी कानों में भारीपन महसूस नहीं होगा. साथ ही IP55 रेटिंग की वजह से ये हल्की बारिश और पसीने से भी सुरक्षित रहते हैं. क्या-क्या मिलेंगे फीचर्स? OnePlus Nord Buds 4 में कई ऐसे फीचर्स मिलते हैं, जो आमतौर पर महंगे TWS में देखने को मिलते हैं. इनमें Bluetooth 6.1, ड्यूल-डिवाइस कनेक्टिविटी, गूगल फास्ट पेयर, माइक्रोसॉफ्ट स्विफ्ट पेयर, 6 माइक्रोफोन, 52dB तक Active Noise Cancellation (ANC) और AI Translate जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसके अलावा, 3D स्पेशियल ऑडियो (3D Spatial Audio), गेम स्पेशियल ऑडियो (Game Spatial Audio), मास्टर ट्यूनिंग मोड (Master Tuning Mode), कस्टम EQ प्रीसेट्स और HeyMelody ऐप का सपोर्ट भी मिलता है, जिसकी मदद से टच कंट्रोल, ANC मोड, गेम मोड और इक्वलाइजर जैसी सेटिंग्स को आसानी से कस्टमाइज किया जा सकता है. हालांकि, इसमें LHDC हाई-रेज ऑडियो कोडेक का सपोर्ट नहीं मिलता. यह सिर्फ SBC और AAC कोडेक्स को सपोर्ट करता है, लेकिन सामान्य यूजर्स के लिए यह कोई बड़ी कमी नहीं मानी जाएगी. साउंड क्वालिटी और ANC OnePlus Nord Buds 4 में 12mm टाइटेनियम-कोटेड डायनेमिक ड्राइवर दिए गए हैं, जो दमदार और बैलेंस्ड साउंड आउटपुट देते हैं. इसमें इन-डेप्थ बेस मिलेगा, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं, जिससे म्यूजिक साफ और डिटेल्ड सुनाई देगी. वोकल्स और मिड्स भी काफी क्लियर हैं, इसलिए गाने सुनने के साथ-साथ पॉडकास्ट और वीडियो देखने का एक्सपीरियंस भी अच्छा मिलेगा. ANC इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है. यह AC, पंखे और मेट्रो जैसी लगातार आने वाली आवाजों को काफी हद तक कम कर देता है. वहीं ट्रांसपेरेंसी मोड भी ठीक काम करता है, हालांकि कभी-कभी आवाजें थोड़ी आर्टिफिशियल महसूस हो सकती हैं. कॉलिंग और बैटरी कॉलिंग के लिए दिए गए 6 माइक्रोफोन इनडोर में साफ आवाज पहुंचाते हैं. बाहर हल्की हवा में भी कॉल क्वालिटी अच्छी रहती है, हालांकि तेज हवा में इसकी परफॉर्मेंस थोड़ी खराब हो सकती है. बैटरी लाइफ इस प्राइस रेंज में इसकी सबसे बड़ी खूबी है. कंपनी के मुताबिक, चार्जिंग केस के साथ ANC बंद होने पर 54 घंटे और ANC ऑन रहने पर 27 घंटे तक का कुल प्लेबैक मिलता है. इसके अलावा 10 मिनट की फास्ट चार्जिंग कई घंटों तक म्यूजिक सुनने के लिए अच्छा बैकअप दे देती है. क्या OnePlus Nord Buds 4 खरीदने चाहिए? अगर आपका बजट 3,500 रुपये के आसपास है और आप ऐसे TWS ईयरबड्स चाहते हैं, जिनमें शानदार साउंड क्वालिटी, भरोसेमंद ANC, लंबी बैटरी लाइफ और प्रीमियम डिजाइन मिले, तो OnePlus Nord Buds 4 एक बढ़िया ऑप्शन साबित हो सकते हैं. हाई-रेज ऑडियो कोडेक का सपोर्ट नहीं होना इसकी एक छोटी कमी जरूर है, लेकिन कीमत को देखते हुए यह इसकी खूबियों के सामने ज्यादा मायने नहीं रखती. यानी OnePlus Nord Buds 4 अपने सेगमेंट में एक ऑल-राउंडर और वैल्यू फॉर मनी TWS साबित होते हैं.

फ्रिज चलाने के लिए कितने सोलर पैनल चाहिए? छोटे से बड़े रेफ्रिजरेटर तक समझें पूरा हिसाब

एक आम फ्रिज काफी बिजली खाता है। शुरू होने पर इसे ज्यादा बिजली चाहिए होती है और फिर ठंडा रखने के लिए लगातार बिजली की जरूरत पड़ती है बिल्कुल AC की तरह। इसीलिए अगर आप सोलर लगवाने जा रहे हैं, तो सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि आपके घर के फ्रिज और बाकी सामानों को चलाने के लिए कुल कितने सोलर पैनल लगेंगे। अगर हम रेफ्रिजरेटर की बात करें तो अकेले इसके लिए कम से कम 3 से 4 खास सोलर पैनल की जरूरत होगी। हालांकि, हर फ्रिज का साइज और वॉट अलग होता है, इसलिए बिजली की खपत भी कम या ज्यादा हो सकती है। वैसे तो 3 से 4 सोलर पैनल किसी भी आम फ्रिज के लिए बहुत हैं, लेकिन अगर आपको बेस्ट रिस्पॉन्स और सही सेटअप चाहिए, तो कुछ जरूरी डिटेल्स देखनी होंगी। आइये, जानते हैं कि आपके फ्रिज के लिए कितने सोलर पैनल चाहिए होंगे। छोटी फ्रिज के लिए चाहिए 0.3 kW के सोलर पैनल एक उदाहरण देकर समझते हैं। मान लीजिए अगर आपके पास एक छोटा यानी मिनी-फ्रिज है, जैसा कि आप छोटी कैंपर वैन या काम की जगह पर इस्तेमाल करते हैं। बड़े साइज वाले मॉडल के मुकाबले, इस तरह के फ्रिज को बहुत कम बिजली की जरूरत होती है। इसे शुरू करने के लिए लगभग 0.3-0.4 kW और इसे चालू रखने के लिए 0.1-0.2 kW चाहिए होते हैं। जानकारी के अनुसार, इतनी बिजली के लिए आपको सिर्फ एक 0.3 kW के सोलर पैनल की जरूरत होगी। बड़े फ्रिज के लिए चाहिए कितने वॉट का सोलर सिस्टम? वहीं, अगर आप ज्यादा क्यूबिक फीट वाले बड़े फ्रेंच-डोर रेफ्रिजरेटर को चलाना चाहते हैं, तो इसमें बिजली का खर्च ज्यादा आएगा। फ्रेंच-डोर फ्रिज (आमतौर पर 500 लीटर या उससे ज्यादा) को शुरू करने के लिए लगभग 1.2-1.3 kW और उसके बाद साइकल चलाने के लिए 0.5-0.7 kW बिजली की जरूरत होगी। इसके लिए, आपको कम से कम 3 से 4 0.3 kW सोलर पैनल की जरूरत होगी और हो सकता है कि शुरुआती स्टार्ट-अप के लिए और भी ज्यादा पैनल लगें। (REF.) धूप के बाद फ्रिज चलाने के लिए चाहिए होगी बैटरी यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सोलर पैनल अकेले फ्रिज को तभी तक चला पाएगा जब तक धूप खिली रहेगी। अगर आप फ्रिज को लगातार चलाना चाहते हैं, तो आपको अपने घर पर सोलर बैटरी लगाने या पोर्टेबल पावर स्टेशन खरीदने के बारे में भी सोचना होगा। चाहे फ्रिज का साइज कुछ भी हो। इन दोनों में से किसी भी चीज से आप रात भर चीजों को चलाने के लिए काफी अतिरिक्त बिजली स्टोर कर पाएंगे।  

नेपाल बाढ़ में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बना WhatsApp ग्रुप, एक्सपर्ट दे रहे बचावकर्मियों को गाइडेंस

पाल में बाढ़ की तबाही के बाद अभी भी रेस्क्यू का काम जारी है. प्रसाशन की कोशिश है कि मलबे के पीछे जिंदा बचे हर एक शख्स की जान बचानी है. जान बचाने में अब वॉट्सऐप भी अहम भूमिका अदा कर रहा है. दरअसल, एक WhatsApp ग्रुप में जुड़े एक्सपर्ट की टीम नेपाल की एक घाटी में रेस्क्यू टीम को गाइड कर रही है. करीब एक सप्ताह से पहले आई भीषण बाढ़ की वजह से तबाह हुए हाइड्रोपावर प्लांट्स की सुरंगों में किसी के जिंदा होने की उम्मीद है और बचावकर्मी उनकी तलाश में जुटे हैं.  ये जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट से मिली है. दरअसल, इंजीनियरों ने 26 अगस्त नेपाल की त्रिशूली घाटी में पानी, मिट्टी और चट्टानों का सैलाब आने से पहले एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था. अब आपदा के बाद से यह ग्रुप हेलीकॉप्टरों और भारी मशीनरी के साथ मिलकर लोगों को बचाने की कोशिश में एक अहम टूल बन चुका है. हाइड्रो पावर प्लांट्स में लापता अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि छह हाइड्रो पावर प्लांट्स से करीब 900 लोग लापता हैं, जिनमें कुछ लोग बच गए होंगे. कम से कम तीन प्लांट निर्माणाधीन थे, ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि वहां काम करने वाले लोग सुरंगों में चल गए होंगे और खुद की जान बचाई होगी. दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला, दूसरों की तलाश जारी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पहली सफलता बीते शुक्रवार को मिली है. शुक्रवार को आपदा का 9वां दिन था और अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्लांट से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला जा चुका है. उनमें से एक ने बताया कि सुरंग में और भी लोग जिंदा हो सकते हैं. 22 लाख टन मिट्टी और मलबा आया कई सुरंगों के एंट्री तक पहुंचना अभी भी काफी मुश्किल हो रहा हैं. इन सुरंगों को पानी के बाहव के लिए बनाया गाया था. बाढ़ अपने साथ घाटी में करीब 22 लाख टन मिट्टी और मलबा बहाकर ले आई, जिससे सुरंगों के रास्ते भी पूरी तरह से बंद हो चुके हैं. वॉट्सऐप ग्रुप से रेस्क्यू टीम को गाइडलाइंस अब वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए रेस्क्यू टीम को आगे का रास्ता दिखाया जा रहा है, सुरंगा का रास्ता और दूरी आदि के बारे में बताया जा रहा है. ऐसे में WhatsApp सिर्फ नॉर्मल चैटिंग और दोस्तों के साथ ग्रुप आदि बनाने तक सीमित नहीं है, इसकी मदद से रेस्क्यू के काम को भी अंजाम दिया जा सकता है.

ग्लोइंग स्किन के लिए जरूरी है सही स्किनकेयर, जानें अपनी स्किन टाइप के हिसाब से रूटीन

  स्किनकेयर (Skin Care) का मतलब है, अपनी त्वचा की देखभाल करना ताकि वह साफ, स्वस्थ, चमकदार और उम्र के अनुसार फिट बनी रहे. यह एक रूटीन होता है जिसमें त्वचा को साफ करना, मॉइस्चराइज करना, धूप से बचाना और खास जरूरतों (जैसे दाग-धब्बे, पिंपल्स, ड्राईनेस) को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना शामिल है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी, प्रदूषण और तनाव के बीच स्वस्थ और चमकती त्वचा पाना एक चुनौती जरूर हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और नियमित देखभाल से यह बिल्कुल संभव है. स्किनकेयर सिर्फ सुंदरता की बात नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जुड़ी हुई चीज़ है. हर किसी की त्वचा अलग होती है- कुछ की ऑयली (तेलयुक्त), कुछ की ड्राय (रूखी), कुछ की सेंसिटिव और कुछ की नॉर्मल. पहला कदम यही है कि आप अपनी स्किन टाइप को समझें. इसके बाद ही आप सही उत्पाद और रूटीन चुन सकते हैं.