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हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए बेस्ट ऑप्शन? जानिए Dylect NutriPro Slow Press Juicer का रिव्यू

आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ जिम और डाइट तक सीमित नहीं है. लोग अब घर पर फ्रेश और न्यूट्रिशन से भरपूर जूस बनाना चाहते हैं. लेकिन ज्यादातर घरों में जो जूसर होते हैं वो मिक्सर वाले सेटअप के साथ आते हैं. यानी इन जूसर से सभी फलों के जूस को नहीं निकाला जा सकता है. ऐसे जूसर का विकल्प स्लो जूसर हैं. क्योंकि मिक्सर-ग्राइंडर वाले सेटअप से जूस नहीं बल्कि फलों का पेस्ट निकलता है. यही वजह है कि स्लो प्रेस और कोल्ड प्रेस जूसर्स तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. इन्हीं में से एक है डायलेक्ट न्यूट्रीप्रो स्लो प्रेस जूसर (Dylect NutriPro Slow Press Juicer), जो हाल में भारत में लॉन्च हुआ है. डायलेक्ट ने इस प्रोडक्ट के साथ किचन अप्लायंसेस की कैटेगरी में भी एंट्री की है. कंपनी कहती है कि ये जूसर सिर्फ जूस नहीं बनाता, बल्कि फलों और सब्जियों के पोषण को बेहतर तरीके से बचाकर रखता है. पिछले कुछ दिनों से हम इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. आइए जानते हैं ये जूसर कितना दमदार है. डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी डायलेक्ट का ये स्लो जूसर पहली नजर में काफी प्रीमियम और कॉम्पैक्ट महसूस होता है. इसका मोटर यूनिट थोड़ा भारी जरूर है, लेकिन इसी वजह से इस्तेमाल के दौरान मशीन स्टेबल रहती है. डिजाइन मॉडर्न किचन अप्लायंस के साथ फिट बैठता है. यानी ये आपके मॉडर्न किचन का हिस्सा आसानी से बन जाएगा और ज्यादा जगह भी नहीं घेरता है.Dylect बॉक्स में कंपनी ने यूजर मैन्युअल, क्विक असेंबली गाइड, रेसिपी बुक, क्लीनिंग ब्रश, दो कंटेनर और पुशर दिया हैं. रेसिपी बुक में आपको कई जूस कॉम्बिनेशन के अच्छे आइडिया मिल जाएंगे. इन्हें आप ट्राई कर सकते हैं. इस स्लो जूसर की असेंबली काफी आसान है. इसमें लॉकिंग सिस्टम दिया गया है, जिसकी वजह से अगर ढक्कन सही तरीके से बंद नहीं होगा, तो मशीन स्टार्ट नहीं होगी. ये एक अच्छा सेफ्टी फीचर है. अगर आपको इसकी असेंबली में दिक्कत आ रही है, तो आप बॉक्स में मिलने वाले क्यूआर कोड्स को स्कैन करके उसका प्रॉसेस देख सकते हैं. कैसा रहा एक्सपीरियंस? जूसर को सेटअप करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. सभी पार्ट्स आसानी से फिट हो जाते हैं और एक बार लॉक हो जाने पर मशीन मजबूत तरीके से काम करती है. फल और सब्जियां ऊपर से डालनी होती हैं और जरूरत पड़ने पर पुशर का इस्तेमाल किया जा सकता है. मशीन में दो अलग आउटलेट दिए गए हैं. एक से आपको फ्रेश जूस मिलेगा, जबकि दूसरे से वेस्ट पल्प बाहर आता है. जूसर में एक सिंपल स्विच दिया गया है, जिसमें ऑन-ऑफ और एक रिवर्स बटन मिलता है. रिवर्स बटन का इस्तेमाल आप तब कर सकते हैं, जब कोई फल या सब्जी अंदर फंस जाए. इस जूसर से आप नट मिल्क और कोकोनट मिल्क भी तैयार कर सकते हैं.Dylect रफॉर्मेंस कैसी है? डायलेक्ट का ये स्लो जूसर धीरे-धीरे जूस निकालता है. इसमें हाई-स्पीड ब्लेड्स वाली गर्मी पैदा नहीं होती, इसलिए जूस ज्यादा फ्रेश और नैचुरल लगता है. मौसंबी और तरबूज जैसे फलों के साथ मशीन काफी स्मूद काम करती है. वहीं गाजर और चुकंदर जैसी हार्ड सब्जियों पर मोटर थोड़ा ज्यादा आवाज करता है, लेकिन जूस निकालने में दिक्कत नहीं होती. सबसे अच्छी बात ये है कि पल्प काफी ड्राई निकलता है, यानी मशीन फलों से अच्छा-खासा जूस एक्सट्रैक्ट कर लेती है. इस मशीन की सफाई करना आसान है. कंपनी ने अलग ब्रश दिया है, जिससे फिल्टर और अंदरूनी हिस्से साफ किए जा सकते हैं. अगर आपको इंस्टेंट और बहुत बड़ी मात्रा में जूस बनाना है, तो ये थोड़ा स्लो महसूस हो सकता है. बॉटम लाइन डायलेक्ट न्यूट्रीप्रो स्लो प्रेस जूसर (Dylect NutriPro Slow Press Juicer) उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है, जो घर पर हेल्दी और फ्रेश जूस चाहते हैं. इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन, आसान असेंबली और न्यूट्रिशन-फोकस्ड स्लो प्रेस टेक्नोलॉजी इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए काफी उपयोगी बनाती है. इस जूसर की कीमत 12,999 रुपये है. हालांकि, डिस्काउंट ऑफर के साथ आप इसे लगभग 10 हजार के बजट में खरीद सकते हैं. कई लोगों को ये डिवाइस महंगा लग सकता है. अगर आप अपनी हेल्थ पर इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो डिवाइस को खरीद सकते हैं.

AC में नहीं आ रही ठंडक? ये 5 संकेत बताते हैं गैस कम हो गई है

गर्मी शुरू होते ही एसी सबसे जरूरी चीज बन जाता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि एसी चल रहा होता है, फिर भी ठंडक नहीं मिलती. लोग समझ नहीं पाते कि दिक्कत क्या है. ऐसे में सबसे बड़ा शक AC की गैस पर जाता है. एसी में गैस कम होना एक आम समस्या है. लेकिन अच्छी बात यह है कि इसके कई साइन घर बैठे ही समझे जा सकते हैं. इसके लिए हर बार मैकेनिक बुलाने की जरूरत नहीं होती. क्योंकि थर्ड पार्टी मैकेनिक कई बार ज्यादा पैसे बनाने के लिए गैस को लेकर झूठ बोलते हैं या दूसरी गैस भर देते हैं. अलग अलग एसी में रेफ्रिज्रेंट यानी गैस भी अलग तरह की भरी जाती है. कूलिगं कम हो गई? गैस कम या लीक होने का सबसे पहला साइन ठंडक से जुड़ा होता है. अगर आपका एसी पहले जल्दी ठंडा करता था और अब काफी देर लग रही है, तो यह गैस कम होने का साइन हो सकता है. कई बार एसी सिर्फ हवा देता है, लेकिन ठंडक नहीं आती. इसका मतलब होता है कि कूलिंग सही तरीके से नहीं हो रही. दूसरा बड़ा साइन आउटडोर यूनिट से जुड़ा होता है. अगर आप ध्यान से देखें तो आउटडोर यूनिट के पाइप पर बर्फ जमने लगती है. यह आम बात नहीं है. ऐसा तब होता है जब गैस का प्रेशर सही नहीं होता. यह संकेत मिलने पर तुरंत ध्यान देना चाहिए. तीसरी चीज बिजली बिल से समझ आती है. अगर आपका AC पहले से ज्यादा बिजली खपत कर रहा है और फिर भी ठंडक कम दे रहा है, तो यह भी गैस कम होने का इशारा हो सकता है. क्योंकि जब गैस कम होती है, तो कंप्रेसर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. घर पर एसी की गैस कैसे चेक करें? अब सवाल आता है कि घर पर कैसे चेक करें. इसके लिए आप AC को 16 से 18 डिग्री पर चलाकर देखें. अगर 10 से 15 मिनट में कमरा ठंडा नहीं होता, तो समझ लें कि कुछ गड़बड़ है. साथ ही इनडोर यूनिट से आने वाली हवा को हाथ लगाकर देखें. अगर हवा ठंडी नहीं लग रही, तो गैस कम हो सकती है. विंडो AC में यह चेक करना थोड़ा आसान होता है. आप पीछे की ग्रिल के पास पाइप को देख सकते हैं. अगर वहां बर्फ जमी दिखे या पानी ज्यादा टपक रहा हो, तो यह साइन है कि गैस का बैलेंस सही नहीं है. स्प्लिट AC में आउटडोर यूनिट पर नजर रखनी पड़ती है. वहां से आने वाली आवाज, पाइप की हालत और कूलिंग सब कुछ संकेत देते हैं. अगर आवाज ज्यादा आ रही है और कूलिंग कम है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐप के जरिए गैस पता करें कुछ नए AC मॉडल में स्मार्ट फीचर भी आते हैं. कई कंपनियां ऐप के जरिए कूलिंग परफॉर्मेंस और एरर दिखाती हैं. हाल ही में भारतीय ब्रांड ऑप्टिमिस्ट ने एसी लॉन्च किया. कंपनी ने गैस चेक करना आसान बना दिया है और ऐप के जरिए ही आप गैस चेक कर सकते हैं. कुछ AC में प्रेशर या गैस से जुड़े एरर कोड भी दिख जाते हैं. हालांकि सीधे गैस लेवल दिखाने वाला फीचर हर AC में नहीं होता. एरर कोड को आप इंटरनेट पर सर्च करके या कस्टमर केयर से बात करके चेक कर सकते हैं. एक बात ध्यान रखना जरूरी है. AC की गैस खुद से भरने की कोशिश न करें. यह काम हमेशा ट्रेनड टेक्नीशियन से ही करवाएं. क्योंकि गैस का सही प्रेशर बहुत जरूरी होता है. अगर समय रहते गैस की समस्या पहचान ली जाए, तो AC की लाइफ भी बढ़ती है और बिजली बिल भी कंट्रोल में रहता है. इसलिए हर सीजन से पहले AC की जांच करना हमेशा बेहतर होता है.

महंगा नारियल पानी नहीं! गर्मी में ये 5 सस्ते देसी ड्रिंक्स रखेंगे शरीर को हाइड्रेट

गर्मी बढ़ते ही तेज धूप, पसीना और उमस की वजह से शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में लोग ठंडी-ठंडी ड्रिंक्स से अपने आपको कूल और फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं. चिलचिलाती गर्मी में अगर कोई ड्रिंक लोगों को खूब पसंद आती है तो वो नारियल पानी होता है. एक्सपर्ट्स से लेकर डॉक्टर्स तक गर्मियों में नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग खुद को हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी पीना पसंद करते हैं. इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और थकान भी दूर करते हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय में नारियल पानी की कीमत काफी बढ़ गई हैं. कई शहरों में एक नारियल पानी के लिए 80 से 100 रुपये या उससे भी ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं. ऐसे में बहुत से लोगों के लिए इसे रोजाना खरीदना मुश्किल होता है. अगर आपको भी रोजाना नारियल पानी खरीदना भारी पड़ता है तो परेशान ना हों. गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए सिर्फ नारियल पानी पर ही निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको कई देसी और सस्ती ड्रिंक्स बताने वाले हैं, जिनमें भरपूर पानी, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 सस्ते और हेल्दी ऑप्शंस के बारे में, जो नारियल पानी की जगह आपकी डाइट का हिस्सा बन सकते हैं. 1. तरबूज का जूस: लिस्ट में सबसे पहला नाम तरबूज के जूस का आता है. गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है. इसका जूस शरीर में पानी की कमी पूरी करने में मदद करता है. इसमें नारियल पानी की तरह ही भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं. 2. लौकी का जूस: भले ही कई लोगों को लौकी पसंद न हो, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि सेहत के मामले में ये किसी सुपरफूड से कम नहीं है. लौकी में 92% पानी होता है. साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को गर्मी में हाइड्रेट रखने के साथ ही एनर्जी देने में भी मदद करते हैं. 3. सफेद पेठे का जूस: सफेद पेठा का जूस भी गर्मियों में नारियल पानी की जगह पीने के लिए बढ़िया ऑप्शन है. सफेद पेठे में 96% पानी होता है. ऐसे में ये शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर पानी के साथ कैल्शियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर को ठंडक देने और हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है. 4. केले के तने का जूस: केले के फल के साथ उसका तना भी पोषण का खजाना माना जाता है. इसके जूस में विटामिन बी6, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद कर सकता है. इतना ही नहीं ये शरीर को अंदरूनी ठंडक भी देता है. 5. स्नेक गॉर्ड का जूस: स्नेक गॉर्ड (चिचिंडा) का जूस भी शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ अंदर से साफ रखने में भी मदद कर सकता है.

गर्मी से राहत का देसी सुपरड्रिंक: सत्तू शरबत की आसान रेसिपी

गर्मियों के मौसम में सूरज की तपिश और चिलचिलाती धूप शरीर का सारी एनर्जी सोख लेती है. ऐसे में खुद को हाइड्रेटेड और ऊर्जावान रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. अगर आप भी इस चिलचिलाती गर्मी से परेशान हैं और सुबह-सुबह कुछ ऐसा चाहते हैं जो पेट को ठंडक दे और दिनभर एक्टिव रखे तो सत्तू का ठंडा-ठंडा शरबत आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन है. इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है. प्रोटीन, फाइबर और आयरन से भरपूर सत्तू न सिर्फ पेट की गर्मी को शांत करता है, बल्कि डाइजेशन को सुधारकर आपको लू की चपेट में आने से भी बचाता है. रोज़ सुबह नाश्ते में एक गिलास सत्तू का शरबत पीने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आप दिनभर तरोताजा महसूस करते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान और क्विक रेसिपी. सामग्री: चना सत्तू: 4 बड़े चम्मच ठंडा पानी: 2 गिलास भुना जीरा पाउडर: 1 छोटा चम्मच काला नमक: स्वादानुसार नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा प्याज: 1 चम्मच (वैकल्पिक) बारीक कटी हरी मिर्च व हरा धनिया: थोड़ी सी बर्फ के टुकड़े सत्तू का नमकीन शरबत बनाने की विधि एक बड़े बर्तन या जग में 4 चम्मच चने का सत्तू डालें. अब इसमें थोड़ा सा ठंडा पानी डालकर चम्मच या मथनी की मदद से अच्छे से मिलाएं ताकि कोई गांठ (lumps) न रहे. जब सत्तू अच्छे से घुल जाए, तो बचा हुआ पूरा ठंडा पानी इसमें डाल दें. इसके बाद भुना जीरा पाउडर, काला नमक और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. अगर आपको पसंद हो, तो इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिला लें. इससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. शरबत को गिलासों में निकालें, ऊपर से आइस क्यूब्स डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें.

सोनाली चिकन: ब्रायलर और देसी मुर्गे के बीच का नया हेल्दी विकल्प

 आज के समय में चिकन की काफी डिमांड है क्योंकि नॉनवेजिटेरियन लोगों के लिए वो एक प्रोटीन का अच्छा सोर्स है. मार्केट में चिकन की बढ़ती कीमतों और ब्रायलर चिकन के बारे में सोशल मीडिया पर आए दिन आ रही खबरों के कारण अक्सर लोग कुछ नए ऑपशंस की तलाश में रहते हैं. यदि आप नॉनवेज के शौकीन हैं तो बाजार में इन दिनों एक ऐसे चिकन की चर्चा है जिसका नाम सुनते ही लोग काफी शॉक होते हैं. हम बात कर रहे हैं 'सोनाली चिकन' की. इसके नाम के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है. यदि आप भी चिकन खाने के शौकीन हैं और हेल्थ के साथ समझौता किए बिना बजट में बेस्ट स्वाद चाहते हैं तो सोनाली चिकन आपके लिए सबसे सही चॉइस हो सकता है. इसका कारण है कि यह चिकन न केवल दिखने में बल्कि स्वाद में भी पूरी तरह देसी मुर्गे जैसा होता है लेकिन इसकी कीमत काफी कम होती है. तो आइए जानते हैं ये चिकन की कौन सी ब्रीड है और देसी चिकन की तुलना में कितनी फायदेमंद है. क्या है सोनाली चिकन ब्रीड? इस अनोखी ब्रीड के मुर्गों के पंख सुनहरे-पीले और चमकीले होते हैं जो देखने में बिल्कुल सोने की तरह चमकते हैं. इसी गोल्डन वाइब के कारण इसका नाम सोनाली रखा गया है. सोनाली चिकन कोई साधारण ब्रीड नहीं है बल्कि यह रोड आइलैंड रेड (RIR) और फायौमी (Fayoumi) मुर्गों का एक स्पेशल क्रॉस-ब्रीड है. इस ब्रीड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से नेचुरल और देसी चिकन की तरह फील देता है. जहां एक तरफ नॉर्मल ब्रायलर चिकन के पेट और स्किन के पास काफी ज्यादा फैट जमा होता है वहीं सोनाली चिकन में एब्डोमिनल फैट (पेट की चर्बी) न के बराबर होता है. फैट न होने के कारण इसके मांस को लीन और हाई-क्वालिटी का माना जाता है. कम फैट होने के कारण जिम जाने वाले और अपनी फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने वाले लोग इसे काफी पसंद करते हैं. सोनाली चिकन के न्यूट्रिशन रोड आइलैंड रेड + फेयूमी के क्रॉस ब्रीड सोनाली चिकन की 100 ग्राम मात्रा में कपरीब 165-175 कैलोरीज होती हैं. इसके अलावा 20-23 ग्राम प्रोटीन, 7-9 ग्राम कुल फैट, सैचुरेट फैट-2-2.5 ग्राम, कोलेस्ट्रॉल 70-80 मिग्रा, आयरन 1.2-1.5 मिग्रा, कैल्शियम 10-15 मिग्रा, विटामिन बी12- 0.3-0.5 मिग्रा होता है. सोनाली मुर्गी के अंडे में प्रति अंडा (50g) 70-75 कैलोरी, 6-7 ग्राम प्रोटीन, फैट 5 ग्राम होता है. यदि मुर्गी को कीड़े-मकोड़े खिलाए जाएं तो अंडों में प्रोटीन और बढ़ जाता है. 3 महीने में मांस के लिए और 4 महीने बाद अंडे देना शुरू करती है. क्या कहती है रिसर्च? पबमेड सेंट्रल (PMC) में पब्लिश्ड रिसर्च के अनुसार, सोनाली चिकन का मीट ब्रायलर के मुकाबले इंसानी शरीर के लिए ज्यादा बेहतर पाया गया है. रिसर्च में देखा गया कि सोनाली चिकन खाने से ब्लड में कुल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स लेवल को कंट्रोल रखने में काफी मदद मिलती है जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है और हार्ट की बीमारियों का जोखिम भी कम होता है. सोनाली चिकन में खतरनाक लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले फैक्टर्स बहुत कम होते हैं. डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कम फैट और बेहतर लिपिड प्रोफाइल की वजह से यह चिकन दिल की बीमारियों और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए ब्रायलर के मुकाबले एक सेफ चॉइस है. कैसे तैयार होती है ये ब्रीड? रिपोर्ट के मुताबिक, सोनाली चिकन सिर्फ खाने वालों के लिए ही नहीं बल्कि इसे पालने वाले किसानों के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो रहा है. यह ब्रीड भारत और बांग्लादेश के गर्म और ट्रॉपिकल क्लाइमेट में बहुत आसानी से सरवाइव कर लेती है. ब्रायलर मुर्गों की तुलना में इन्हें बहुत ज्यादा केयर, महंगी दवाओं या स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इनका ग्रोथ रेट ब्रायलर से थोड़ा धीमी होता है और इन्हें तैयार होने में करीब 60 दिन का समय लगता है. लेकिन मार्केट में इनकी अच्छी और स्टेबल कीमत मिलने के कारण किसानों का नेट प्रॉफिट मार्जिन काफी ज्यादा रहता है.

गर्मियों में टैनिंग से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं एलोवेरा और मिल्क पाउडर फेस पैक

 तेज धूप और गर्म हवाओं का सबसे ज्यादा असर हमारी स्किन पर पड़ता है. लंबे समय तक धूप में रहने से चेहरे पर टैनिंग, कालापन और रूखापन नजर आने लगता है. गर्मियों में लोग सनटैन से सबसे ज्यादा परेशान होते हैं और कुछ लोग तो इसे हटाने के लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और पार्लर ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं, मगर घर में मौजूद चीजों से आप आसानी से अपनी काली पड़ी स्किन को चमका सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. अगर आप भी टैनिंग से परेशान हैं तो आज हम आपको एक ऐसा घरेलू नुस्खा बताने जा रहे हैं, जो आपके काफी काम आ सकता है. मिल्क पाउडर और एलोवेरा का फेस पैक तेज धूप से काली पड़ी स्किन को साफ करने में काफी असरदार उपाय माना जाता है. एलोवेरा-मिल्क पाउडर फेस पैक के फायदे एलोवेरा त्वचा को ठंडक देने और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. वहीं मिल्क पाउडर में मौजूद लैक्टिक एसिड डेड स्किन हटाकर चेहरे की रंगत निखारने में मदद करता है. इन दोनों का कॉम्बिनेशन सनटैन हटाने के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, इसलिए दादी-नानी के जमाने यह नुस्खा इस्तेमाल किया जा रहा है. फेस पैक बनाने का तरीका     1 बड़ा चम्मच मिल्क पाउडर     2 बड़े चम्मच फ्रेश एलोवेरा जेल     आधा चम्मच शहद     कुछ बूंदें गुलाब जल इन सभी चीजों को एक बाउल में अच्छी तरह मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार कर लें. कैसे करें इस्तेमाल सबसे पहले चेहरे को फेस वॉश से साफ कर लें. अब तैयार फेस पैक को चेहरे और गर्दन पर अच्छे से लगाएं. करीब 15 से 20 मिनट तक इसे सूखने दें. इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए ठंडे पानी से चेहरा धो लें. हफ्ते में 2 से 3 बार इस पैक का इस्तेमाल करने से स्किन की टैनिंग धीरे-धीरे कम होने लगती है और चेहरा साफ, मुलायम और ग्लोइंग नजर आने लगता है. त्वचा को मिल सकते हैं ये फायदे     सनटैन और कालापन कम करने में मदद     स्किन को ठंडक और हाइड्रेशन     डेड स्किन हटाने में सहायक     चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद     स्किन को मुलायम और फ्रेश बनाएगी इन बातों का रखें ध्यान अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो इस फेस पैक को लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. साथ ही धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना न भूलें, ताकि आपकी स्किन को दोबारा नुकसान न पहुंचे.

गर्मी से राहत दिलाने वाला गुलाब-मिश्री शरबत: घर पर बनाएं नेचुरल कूल ड्रिंक

चिलचिलाती गर्मी और झुलसाती लू शरीर को बेहाल कर देती है. ऐसे मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना और पेट को ठंडक पहुंचाना सबसे जरूरी होता है. बाजार में मिलने वाले केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स युक्त कोल्ड ड्रिंक्स कुछ देर के लिए तो राहत देते हैं लेकिन सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. अगर आप इस गर्मी खुद को और अपने परिवार को एकदम तरोताजा रखना चाहते हैं, तो घर पर प्राकृतिक गुणों से भरपूर गुलाब और मिश्री का ठंडा-ठंडा शरबत बनाएं. आयुर्वेद में गुलाब और मिश्री दोनों की तासीर बेहद ठंडी मानी गई है जो न सिर्फ शरीर का तापमान सामान्य करती है बल्कि आपको दिनभर के लिए गजब की एनर्जी भी देती है. आइए जानते हैं इस रिफ्रेशिंग और खुशबूदार शरबत को बनाने की बेहद आसान रेसिपी. गुलाब और मिश्री के शरबत की रेसिपी ताजा लाल गुलाब की पंखुड़ियां: 1 कप (अच्छी तरह धुली हुई) धागे वाली मिश्री: 1/2 कप (पिसी हुई) ठंडा पानी: 3 से 4 गिलास नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच तुलसी या सब्जा के बीज: 1 छोटा चम्मच (पानी में भिगोए हुए) बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका गुलाब का पेस्ट बनाएं: सबसे पहले साफ की हुई गुलाब की पंखुड़ियों को मिक्सी के जार में थोड़ा सा पानी डालकर दरदरा या स्मूथ पीस लें. एक बड़े जग या बर्तन में ठंडा पानी लें और उसमें पिसी हुई धागे वाली मिश्री डालकर अच्छी तरह चम्मच से तब तक घोलें जब तक मिश्री पूरी तरह पानी में मिल न जाए. मिश्री चीनी का एक हेल्दी और ठंडा विकल्प है. अब इस मिश्री के पानी में पिसा हुआ गुलाब का पेस्ट और नींबू का रस मिलाएं. नींबू का रस डालने से गुलाब का रंग बहुत खूबसूरत निखर कर आता है और शरबत में एक बढ़िया खट्टा-मीठा ट्विस्ट मिलता है. अगर आप शरबत को और अधिक सेहतमंद और ठंडा बनाना चाहते हैं, तो इसमें पहले से भीगे हुए सब्जा मिला दें. यह पेट की गर्मी को शांत करने में बहुत मददगार होते हैं. तैयार शरबत को अच्छी तरह मिक्स करें और छलनी की मदद से गिलासों में छान लें. ऊपर से बर्फ के टुकड़े और कुछ ताजी गुलाब की पंखुड़ियां डालकर एकदम ठंडा-ठंडा सर्व करें.

घर पर बनाएं देसी उबटन: बेसन, चंदन और केसर से पाएं ग्लोइंग स्किन

 हर कोई चाहता है कि उसकी स्किन साफ,  चमकदार और बेदाग दिखे. इसके लिए लोग कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार घरेलू नुस्खे भी बेहद असरदार साबित होते हैं. उन्हीं में से एक है उबटन, जिसका इस्तेमाल पुराने समय से ही चेहरे की देखभाल के लिए किया जाता रहा है. अगर आप भी नेचुरल तरीके से अपनी स्किन में निखार लाना चाहते हैं तो घर पर आसानी से बनने वाला यह देसी उबटन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. यह उबटन न सिर्फ आपकी डेड स्किन में मदद करता है, बल्कि चेहरे को गहराई से साफ करके उसे सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाने में भी मदद करता है. आइए जानते हैं कि घर पर देसी उबटन कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 2 चम्‍मच बेसन 1 चम्मच चंदन पाउडर 1 चम्मच केसर पाउडर 2 चम्‍मच चावल का आटा 1 चम्‍मच मसूर दाल का पाउडर देसी उबटन कैसे बनाएं ? इस देसी उबटन को बनाने के लिए एक बाउल में सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें गुलाब जल डालकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें. इसके बाद चेहरे को साफ पानी से धोकर उबटन को पूरे चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट तक सूखने दें. जब उबटन सूख जाए तो हल्के हाथों से रगड़ते हुए ठंडे पानी से चेहरा धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इस उबटन को इस्तेमाल हफ्ते में 1 से 2 बार करें. देसी चीजों से बना यह उबटन स्किन के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इनके रेगुलर इस्‍तेमाल से त्‍वचा साफ, ग्‍लोइंग और हेल्‍दी बनती है. इस उबटन में मौजूद बेसन, चंदन, केसर, चावल का आटा और मसूर दाल डेड स्किन को हटाकर चेहरे को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाते हैं. इन बातों का रखें ध्यान कभी भी उबटन लगाने के बाद चेहरे को जोर-जोर से न रगड़ें. उबटन का इस्तेमाल करने से पहले एक बार पैच टेस्ट जरूर कर लें. अगर किसी भी तरह की एलर्जी, खुजली या जलन महसूस हो तो इसे चेहरे पर लगाने से बचें.  

गर्मी में भी नहीं फटेंगे होंठ: अपनाएं ये 4 आसान घरेलू उपाय

 अक्सर लोग सोचते हैं कि होंठ फटने की समस्या सिर्फ सर्दियों के मौसम में होती है लेकिन ऐसा नहीं है. मई-जून की इस चिलचिलाती गर्मी, तेज धूप और धूल-भरी गर्म हवाओं के कारण होंठों की नाजुक त्वचा अपनी नमी खो देती है. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने से होंठ न सिर्फ फटने और बेजान होने लगते हैं, बल्कि कई बार धूप के संपर्क में आने से इनका रंग भी काला पड़ने लगता है. अगर आप भी फटे और रूखे होंठों से परेशान हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. यहां हम आपको कुछ ऐसे ट्रिक्स बता रहे हैं जिनकी मदद से आप गर्मी में भी अपने होंठ को एकदम सॉफ्ट, हाइड्रेटेड और नेचुरल गुलाबी रख सकते हैं. 1. हाइड्रेशन है बेहद जरूरी पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन होंठ फटने के सबसे बड़े कारणों में से एक है. शरीर में पानी की कमी होने पर होंठों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है जिससे वो रूखे और पपड़ीदार होकर फटने लगते हैं. इसलिए आपको हमेशा हाइड्रेट रहना चाहिए और रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए. 2. मलाई और हल्दी का इस्तेमाल रात को सोने से पहले होंठों पर ताजी दूध की मलाई में एक चुटकी हल्दी मिलाकर लगाएं. मलाई में मौजूद फैटी एसिड्स होंठों को डीप मॉइश्चराइज करते हैं और हल्दी अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों से फटी हुई त्वचा को तेजी से ठीक करती है. सुबह उठते ही आपको लिप्स एकदम सॉफ्ट मिलेंगे. 3. चीनी और शहद का स्क्रब अगर होंठों पर पपड़ी जम रही है तो आधा चम्मच शहद में थोड़ी सी पिसी हुई चीनी मिलाकर उंगली से होंठों पर 2 मिनट के लिए हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में स्क्रब करें. यह ट्रिक डेड स्किन को तुरंत हटाकर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है जिससे होंठों का नेचुरल गुलाबीपन वापस आ जाता है. 4. नारियल तेल और चुकंदर अगर आपके होंठ ड्राई होने के साथ ही बहुत काले भी हो गए हैं तो बाजार के केमिकल वाले लिप बाम की जगह नारियल तेल में चुकंदर का रस मिलाकर एक छोटी डिब्बी में रख लें. दिन में जब भी होंठ सूखे लगें तो इसे लगाएं. नारियल तेल होंठों की नमी को लॉक करेगा और चुकंदर का रस आपके लिप्स को बिना किसी नुकसान के खूबसूरत गुलाबी रंग देगा.

आधार कार्ड की ये गलती बन सकती है बड़ी परेशानी!

कई लोगों को अपने आधार कार्ड की याद तभी आती है, जब बैंक में KYC करवानी हो, नया अकाउंट खोलना हो, मोबाइल नंबर अपडेट करना हो या किसी सरकारी योजना का फायदा लेना हो. लेकिन यहीं एक बड़ी समस्या छिपी होती है. कई आधार कार्ड में छोटी-छोटी गलतियां सालों तक नजर ही नहीं आतीं. रोजमर्रा के काम तो चलते रहते हैं, लेकिन जैसे ही दोबारा KYC वेरिफिकेशन या किसी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच होती है, यही मामूली गलती अचानक बड़ी परेशानी बन सकती है. अगर आपके आधार कार्ड में दर्ज जानकारी और बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद डिटेल्स मेल नहीं खाते हैं, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. इसलिए समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर लेना बेहतर रहता है. नाम का मेल न होना बढ़ा सकता है मुश्किलें आधार और बैंक खाते में नाम का मेल न होना सबसे आम समस्याओं में से एक है. अगर आपके आधार कार्ड पर लिखा नाम बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नाम से अलग है, तो KYC या अकाउंट वेरिफिकेशन के दौरान परेशानी आ सकती है. कई बार यह अंतर बहुत छोटा होता है, जैसे नाम की स्पेलिंग में मामूली गलती, मिडिल नेम का छूट जाना, कहीं पूरे नाम की जगह सिर्फ इनिशियल्स का इस्तेमाल होना या फिर सरनेम अलग तरीके से दर्ज होना. आमतौर पर लोग इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन KYC जांच के दौरान यही वजह रुकावट बन सकती है. आधार से जुड़ा पुराना नंबर कर सकता है जरूरी कामों में रुकावट आजकल आधार से जुड़ी ज्यादातर सेवाएं OTP के जरिए ही पूरी होती हैं. चाहे आधार डाउनलोड करना हो, डिटेल्स अपडेट करनी हो, e-KYC करवानी हो या फिर अपनी पहचान वेरिफाई करनी हो, हर जगह OTP उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है जो आधार से लिंक होता है. समस्या तब आती है जब लोग अपना मोबाइल नंबर बदल तो लेते हैं, लेकिन उसे आधार में अपडेट करना भूल जाते हैं. शुरुआत में सब कुछ नॉर्मल लगता है, लेकिन जैसे ही किसी जरूरी काम के लिए OTP की जरूरत पड़ती है, पता चलता है कि OTP उस पुराने नंबर पर जा रहा है जो अब उनके पास है ही नहीं. डेट ऑफ बर्थ, जेंडर समेत इन डिटेल्स को जरूर चेक करें अगर आपके आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ गलत है, तो आगे चलकर यह छोटी सी गलती बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. खासकर तब, जब आपके आधार की जानकारी PAN कार्ड, बैंक खाते, बीमा पॉलिसी या इनवेस्टमेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स से मैच न करे. ऐसे सिचुएशन में वेरिफिकेशन का प्रोसेस अटक सकता है या उसमें देरी हो सकती है. सिर्फ डेट ऑफ बर्थ ही नहीं, जेंडर या अन्य पर्सनल डिटेल्स में हुई गलती भी मुश्किलें खड़ी कर सकती है.