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UPI पेमेंट में बड़ा बदलाव संभव, 10 हजार से ऊपर ट्रांजैक्शन में लग सकती है 1 घंटे की देरी

भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डिजिटल पेमेंट्स की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. इंस्टैंट पेमेंट्स की वजह से UPI को मनी ट्रांसफर और किराने की दुकान तक पर यूज किया जा रहा है. अब इसी खूबी को कुछ समय के लिए बदला जा सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसको लेकर चर्चा पत्र जारी किया है, जिसमें डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ट्रांजैक्शन पर कुछ घंटे की देरी का नियम लाने का प्रस्ताव दिया है. पेमेंट्स में करीब 1 घंटे तक की देरी होगी. RBI का यह प्रपोजल कुछ पेमेंट्स के प्रोसेस के तरीकों को बदलने के लिए है. अगर ये नियम लागू होता है तो 10 हजार रुपये से अधिक रुपये वाली पेमेंट्स तुरंत कंप्लीट नहीं होगी. इस पेमेंट्स को कंप्लीट होने में कुछ समय लगेगा. रुपये भेजने वाले के बैंक खाते से रकम तुरंत कट जाएंगी लेकिन जिसके बैंक खाते में रुपये पहुंचने हैं, उसको 1 घंटे के बाद रिसीव होंगे. यह बदलाव सुरक्षा के मद्देनजर लाया जा रहा है. इस दौरान सेंडर्स चाहें तो पेमेंट्स को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकते हैं. 1 घंटे देरी का नियम P2P ट्रांसफर पर लागू होगा ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियम सिर्फ पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर लागू होगा. दुकान पर QR कोड के जरिए होने वाले पेमेंट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. साइबर ठगी पर नकेल कसने की तैयारी   RBI इस लिए ये बदलाव लाना चाहता है ताकि का साइबर ठगी पर नकेल कसी जा सके. साइबर ठगी के केस में रुपये कुछ मिनट के अंदर ना जाने कितने सारे अकाउंट से होकर गुजर जाते हैं और कैश के रूप में निकाल लिए जाते हैं. इसके बाद रिकवरी में परेशानी आती है. 1 घंटे की देरी का फॉर्मुला कैसे आएगा काम?    RBI की सलाह है कि 1 घंटे की देरी मददगार साबित होगी. रिजर्व बैंक इस देरी को गोल्डन आवर के रूप में मानता है, जहां यूजर्स को खुद सोचने का समय मिलेगा और इससे ठगी से बाहर निकलने का मौका मिलेगा. खाता धारक चाहे तो ट्रांजैक्शन को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकेंगे.   यहां गौर करने वाली बात यह है कि डेली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऑटो डेबिट और सब्सक्रिप्शन वाली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं दिखाई देगा. अगर शख्स किसी अनजान व्यक्ति को रुपये ट्रांसफर करते हैं, तो उसको ज्यादा सेफ्टी मिलेगी.  

केले के छिलके से बनाएं हेयर मास्क, बालों की ग्रोथ और शाइन बढ़ाने का आसान तरीका

केला खाने के कई फायदे हम सभी जानते हैं और इसे खाने के बाद छिलका डस्टबिन में डाल देते हैं। जैसे केला सेहत के लिए अच्छा होता है, वैसे ही इसका छिलका बालों की ग्रोथ के लिए अच्छा होता है। बालों की लंबाई बढ़ाने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते। महंगे तेल, शैंपू से लेकर घरेलू हेयर मास्क तक सब लगाकर देख लेते हैं लेकिन ग्रोथ नहीं बढ़ती। केले के छिलके वाला तरीका आप एक बार आजमाकर देखिए। केले के छिलके में पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट और नेचुरल ऑयल होते हैं, जो बालों को पोषण देकर उन्हें मुलायम, घना, लंबा और चमकदार बनाते हैं। इसका हेयर मास्क लगाने से आपके बाल तो बढ़ेंगे ही साथ में खोई हुई चमक भी लौटेगी। तो चलिए बताते हैं केले के छिलके से हेयर मास्क कैसे बनाएं। केले के छिलका का पाउडर इंस्टाग्राम की ब्यूटी डिजिटल क्रिएटर जो ओबरॉय ने बनाना पील हेयर मास्क बनाने का तरीका शेयर किया है। उनका कहना है कि आप इसे आसानी से बनाकर लगाएं और फिर बालों की बढ़ती हुई लंबाई देखें। तो अब आपको करना क्या है- सबसे पहले केले के कुछ छिलके लेने हैं। अब इन्हें ओवन या माइक्रोवेव में 210 डिग्री में 20 मिनट तक रखना है। जब इसे निकालेंगे तो ये बिल्कुल सूखकर हाथों से क्रश होने लगेंगे। अब इसे मिक्सी में ग्राइंड करके पाउडर बनाना है। इस पाउडर को छन्नी से छा लें, जिससे बड़ा कूड़ा निकल जाए। 2 चीजों को मिलाएं इस पाउडर को कटोरी में रखें और इसमें 1 कटोरी दही मिलाएं और 1-2 चम्मच शहद। सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। बस आपका बनाना हेयर मास्क रेडी हो गया। कैसे लगाएं बालों को हल्का सा गीला कर लें और फिर इस हेयर मास्क को अप्लाई करें। ऊपर से नीचे तक बालों में इसे लेप की तरह लगाएं और हेयर कैप लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर माइल्ड शैंपू से हेयर वॉश करें। आपको बेहतरीन रिजल्ट मिलेगा। इस हेयर मास्क को हफ्ते में 1 बार ही लगाएं। फायदे क्या हैं- बनाना पील हेयर मास्क लगाने के कई फायदे हैं, जो आपको जरूर जानने चाहिए। इससे ना सिर्फ बाल लंबे होंगे बल्कि मजबूत भी होंगे। यहां कुछ फायदे पढ़ें- -हेयर मास्क को लगाने से बाल होंगे शाइनी और सिल्की। दही बॉलों को नमी देगा। -ये बालों की जड़ों को मजबूत करता है और हेयर फॉल कम करने में मदद करता है। -ये स्कैल्प को साफ करता है और खुजली कम करता है। -बनाना पील हेयर मास्क ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे बालों की ग्रोथ सपोर्ट होती है।

इंस्टाग्राम ने लॉन्च किया नया फीचर, 15 मिनट तक एडिट कर सकेंगे कमेंट

इंस्टाग्राम ने आखिरकार उस फीचर को लॉन्च कर दिया है, जिसका इंतजार लंबे समय हो रहा था. इस न्यू फीचर की मदद से यूजर्स और क्रिएटर्स अपने ही कमेंट को पोस्ट करने के बाद एडिट कर सकेंगे. आमतौर पर पोस्ट पर गलती से कोई गलत कमेंट हो जाता है. इंस्टाग्राम के नए फीचर की मदद से उस गलती को सुधारा जा सकेगा. इसमें यूजर्स टाइपो या फिर अपनी कोई गलती को सुधार सकेंगे. इंस्टाग्राम की तरफ से जारी किया गया फीचर सिर्फ 15 मिनट के लिए काम करेगा. यानी अगर यूजर्स कमेंट करने के 15 मिनट के अंदर कमेंट को एडिट कर पाएंगे.   इंस्टाग्राम एडिट टैग को इसलिए यूज करेगी ताकि उनके प्लेटफॉर्म पर ट्रांस्पेरेंसी बनी रहे. अगर कोई भी यूजर्स अपने कमेंट को एडिट करता है तो बाकी लोगों को ये दिखना चाहिए कि वह कमेंट एडिट किया गया है.   कमेंट अपडेट के लिए मानने पड़ेंगे ये नियम       कमेंट एडिट के लिए 15 मिनट की टाइम लिमिट मिलेगी.       कमेंट को अनलिमिटेड एडिट्स कर पाएंगे.     ए़डिट की सुविधा सिर्फ टेक्स्ट पर लागू है.     कमेंट में फोटो आदि है तो उसे एडिट नहीं कर पाएंगे.     एडिट किए गए कमेंट पर एडिट्स का टैग दिखेगा. कैसे एडिट कर पाएंगे पोस्ट किया कमेंट ? इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए जा चुके कमेंट को एडिट करना आसान होगा. इसके लिए यूजर्स को कमेंट पर कुछ देर टैप करके रखना होगा. इसके बाद स्क्रीन पर नया ऑप्शन आएगा, जिसमें एडिट का ऑप्शन भी होगा. उस पर क्लिक करना होगा. इसके गलती गलत कमेंट को एडिट कर सकेंगे. कमेंट एक बार एडिट होने के बाद उस पर एडिटेड टैग नजर आने लगेगा. एक बार एडिट होने के बाद कोई भी यूजर्स ओरिजनल कमेंट को नहीं देख सकेगा, जिसकी जानकारी खुद कंपनी ने शेयर की है.

जिम में भारी वर्कआउट से बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, एक्सपर्ट की चेतावनी

 आजकल जिम जाना सिर्फ सेहत की जरूरत नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन गया है. लेकिन पिछले कुछ समय में जिम के फर्श पर गिरते और दम तोड़ते युवाओं की खबरों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या हम फिट होने के चक्कर में खुद को खत्म कर रहे हैं? न्यूज 18 की इस खास रिपोर्ट में विशेषज्ञों से समझिए कि आखिर गलती कहां हो रही है. हार्ट डिजीज स्पेशलिस्ट डॉ. रिपेन गुप्ता, वाइस चेयरमैन एवं यूनिट हेड – कार्डियोलॉजी, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत का मानना है कि युवाओं में बढ़ता ‘ईगो लिफ्टिंग’ (दूसरों को देखकर क्षमता से अधिक वजन उठाना) का चलन सबसे खतरनाक है. सोशल मीडिया के लिए रील बनाने के चक्कर में युवा अपनी सीमाओं को पार कर रहे हैं. ज्यादा वेट उठाने का शरीर पर असर एक्सपर्ट बताते हैं कि जब आप अचानक भारी वजन उठाते हैं, तो ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता है, जिससे दिल की धमनियों में दरार आ सकती है और अचानक हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. क्यों फेल हो रहा है युवाओं का दिल? – बिना जांच के भारी वर्कआउट. ज्यादातर युवा जिम जॉइन करने से पहले बेसिक हार्ट चेकअप नहीं कराते. कई लोगों को जन्मजात दिल की बीमारियां होती हैं जो सामान्य जीवन में पता नहीं चलतीं, लेकिन भारी एक्सरसाइज के दौरान ‘ट्रिगर’ हो जाती हैं. – शॉर्टकट का लालच. रातों-रात मसल्स बनाने के लिए सप्लीमेंट्स, फैट बर्नर और स्टेरॉयड का बढ़ता इस्तेमाल दिल की धड़कन को बिगाड़ता है. -नींद और रिकवरी की कमी. दिन भर की नौकरी का तनाव, रात को देर तक जागना और फिर सुबह उठकर बिना रिकवरी के इंटेंस वर्कआउट करना. ऐसे में थकान के कारण दिल पर प्रेशर पड़ता है, जिससे वो बर्दास्त नहीं कर पाता है. कोविड का साइड इफेक्ट डॉक्टर्स चेतावनी दे रहे हैं कि कोविड के बाद कई लोगों की नसों में खून के थक्के जमने या दिल की मांसपेशियों में सूजन की समस्या देखी गई है. ऐसे में बिना ‘ग्रैजुअल प्रोग्रेस’ के भारी जिमिंग जानलेवा साबित हो रही है. क्या हैं खतरे के संकेत? वर्कआउट के दौरान अगर शरीर ये इशारे दे, तो उसे ‘चुनौती’ न समझें, बल्कि तुरंत रुक जाएं- – सीने के बीचों-बीच दबाव या जलन महसूस होना. – बहुत ज्यादा पसीना आना और अचानक घबराहट होना. – गर्दन, जबड़े या बाएं कंधे में खिंचाव महसूस होना. – आंखों के सामने अंधेरा छाना या चक्कर आना. कैसे रहें सुरक्षित? अगर आप जिम की शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले कुछ हफ्ते केवल लाइट कार्डियो और बॉडी-वेट एक्सरसाइज करें. 30 की उम्र पार कर चुके हैं, तो जिम जाने से पहले एक TMT और ECG जरूर कराएं. जिम ट्रेनर के कहने पर कोई भी अनकही गोलियां या पाउडर न लें. किसी क्वालीफाइड न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह ही मानें. अगर किसी दिन नींद पूरी नहीं हुई या आप बीमार महसूस कर रहे हैं, तो उस दिन जिम स्किप करना ही समझदारी है.  

AC का Auto Clean फीचर क्या है और यह कैसे काम करता है?

अगर आप इस फीचर की वजह से AC खरीद रहे हैं या इसे AC सर्विस का विकल्प समझ रहे हैं, तो जरूरी है कि आप जान लें कि Auto Clean फीचर कैसे काम करता है और कितनी ताकत रखता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि यह फीचर पूरी तरह बेकार है, लेकिन यह AC सर्विस की जगह नहीं ले सकता। असल में यह फीचर AC में से आने वाली बदबू या बैक्टीरिया आदि को दूर करने में काफी हद तक सक्षम होता है लेकिन इसके चलते सर्विस को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है। कैसे काम करता है Auto Clean फीचर? Auto Clean फीचर असल में AC को साफ करने की जगह अंदर से सुखाता है। इसे आप ड्राइंग प्रोसेस समझ सकते हैं। दरअसल AC को इस्तेमाल करने के बाद उसमें नमी और पानी रह जाता है। यह नमी बैक्टीरिया या फंगस के पनपने का कारण बन सकती है, जिसकी वजह से AC से बदबू भी आती है। इस समस्या को दूर Auto Clean फीचर करता है। इसमें AC का कंप्रेसर काम नहीं करता और सिर्फ ब्लोअर फैन चालू रहता है। यह पंखा अंदर की कॉइल्स पर तेज हवा फेंकता है, जिससे वहां जमा सारी नमी पूरी तरह सूख जाती है। इससे AC में से किसी तरह की बदबू नहीं आती। Auto Clean Feature की सीमाएं क्या हैं? Auto Clean फीचर आपके AC को चकाचक साफ नहीं कर सकता। यह आपके AC से बदबू हटा सकता है लेकिन:     यह फीचर नमी को दूर कर सकता है, लेकिन धूल, मिट्टी और गंदगी की मोटी परत साफ नहीं कर सकता।     यह AC के फिल्टर को भी साफ नहीं कर सकता। इन्हें आपको हर 15 दिन में खुद साफ करना चाहिए।     इस फीचर से आउटडोर यूनिट क्लीन नहीं होती। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सिर्फ इंडोर यूनिट के अंदर ही चलता है।     इसके अलावा ड्रेन पाइप में फंसी गंदगी को भी यह फीचर नहीं साफ करता। Auto Clean फीचर के रहते सर्विस करवानी चाहिए? इसका सीधा और स्पष्ट जवाह है हां, क्योंकि Auto Clean फीचर AC में मौजूद नमी को सुखाने से ज्यादा कुछ भी नहीं कर सकता। AC में लगे फिल्टर से लेकर कंडेंसर तक में जमा होेने वाली गंदगी सिर्फ AC सर्विस के बाद ही साफ हो सकती है। दरअसल Auto Clean फीचर का नाम कुछ ऐसा है कि लोग इसे AC की सफाई से जोड़कर देख सकते हैं। हालांकि अगर आप इस फीचर के चक्कर में AC सर्विस को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो इससे आपका बिजली बिल तो बढ़ ही सकता है लेकिन साथ ही AC में आग लगने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। यही वजह है कि Auto Clean फीचर को सिर्फ AC से आने वाली बदबू को रोकने लायक ही मानना चाहिए।

इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा vs इंडक्शन: कौन है ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन?

 शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने नई टेक्नोलॉजी वाले इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे की जानकारी X पर पोस्ट की। इस अनोखे चूल्हे के बारे में बताया गया कि यह बिना LPG या PNG कनेक्शन के बिजली से आग की लपटें पैदा कर सकता है। हालांकि इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा, इंडक्शन चूल्हे से बेहतर है? दरअसल वीडियो में बिजली से आग की लपटें पैदा करने वाली यह टेक्नोलॉजी किसी जादू से कम नहीं लगती लेकिन असल सवाल यही है कि यह तकनीक कितनी प्रैक्टिकल है? क्या यह LPG-PNG के बाद रसोई में इस्तेमाल होने के लायक है? गौर करने वाली बात है कि इंडक्शन के मुकाबले 10 गुना ज्यादा कीमत और बिजली के ज्यादा इस्तेमाल के चलते यह आपके बिल को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है। इसके अलावा जहां इंडक्शन चूल्हे एफिशिएंसी 90% तक होती है, वहीं प्लाज्मा चूल्हा अपनी ज्यादातर ऊर्जा रोशनी और शोर में बर्बाद कर देता है। ऐसे में नई टेक्नोलॉजी को लेकर ज्यादा उम्मीदें लगाने से पहले दोनों के फर्क को समझ लेना जरूर हो जाता है। इंडक्शन और प्लाज्मा चूल्हे की कीमत में फर्क इंडक्शन और प्लाज्मा चूल्हे में सबसे बड़ा फर्क कीमत को लेकर दिखता है। भारत में जहां एक अच्छा इंडक्शन चूल्हा 2500 से 4500 रुपये में खरीदा जा सकता है। वहीं नई तकनीक होने की वजह से प्लाज्मा चूल्हे की कीमत 35000-45000 रुपये तक जाती है। वहीं अगर किसी खास मॉडल को आप चीन या वियतनाम जैसे दूसरे देश से इंपोर्ट कर रहे हैं, तो प्लाज्मा चूल्हे की कीमत 60,000 रुपये तक भी पहुंच सकती है। इसके बाद इस चूल्हे की मेंटेनेंस भी इंडक्शन चूल्हे से कई गुना ज्यादा पड़ती है। इस वजह से LPG-PNG के बाद इंडक्शन चूल्हा ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन नजर आता है।(REF.) टेक्नोलॉजी और बिजली की खपत में फर्क अब भले इंडक्शन और इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा बिजली पर काम करते हैं लेकिन अलग-अलग टेक्नोलॉजी की वजह से इनकी बिजली की खपत और खर्च अलग-अलग पड़ता है। प्लाज्मा चूल्हा हवा को आयोनाइज करके प्लाज्मा फ्लेम बनाता है। इससे आग तो पैदा होती है, लेकिन ऊर्जा का बड़ा हिस्सा रौशनी और आवाज के रूप में बर्बाद होता है। साथ ही इसकी बर्तन में हीट ट्रांसफर करने की ताकत भी एक साधारण LPG या इंडक्शन चूल्हे के मुकाबले काफी कम होती है। वहीं इंडक्शन चूल्हा मैग्नेटिक फील्ड से सीधा बर्तन को गर्म करता है। इसमें ऊर्जा की बर्बादी न के बराबर होती है। आसान भाषा में समझाएं, अगर आप इंडक्शन और इल्केट्रिक प्लाज्मा चूल्हे पर 1 घंटा खाना पकाएं, तो प्लाज्मा बिजली की ज्यादा खपत करते हुए महीने भर में 60-100 यूनिट तक बिजली खा सकता है। वहीं इंडक्शन इससे आधे से भी कम में खाना पका देगा। भारतीय रसोई के लिए कौन प्रैक्टिकल अब बात अगर भारतीय रसोई की करें, जहां ज्यादा आंच पर सब्जी, रोटी-पराठें पकाए जाते हैं। वहां इंडक्शन चूल्हा ज्यादा प्रैक्टिकल साबित होता है। दरअसल प्लाज्मा चूल्हे की खासियत है कि उसके लिए किसी खास बर्तन की जरूरत नहीं होती लेकिन प्लाजमा चूल्हे की आंच इतनी स्थिर नहीं होती कि भारतीय पकवान अच्छे से पकाए जा सकें।  

झुर्रियों से बचाव के लिए खाएं ये 5 सुपरफूड्स, त्वचा रहेगी जवान

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां और फाइन लाइंस आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन हमारी खराब जीवनशैली और खान-पान इसे समय से पहले ही न्योता दे देते हैं. अगर आप भी महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट्स के बजाय प्राकृतिक तरीके से अपनी त्वचा को जवां और चमकदार बनाए रखना चाहते हैं तो इसका हल आपके किचन में ही छिपा है. समय से पहले आने लगा है बुढ़ापा? खाएं ये फूड्स सही पोषण न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि त्वचा के कोलेजन को बढ़ाकर झुर्रियों को दूर रखने में भी मदद करता है. यहां हम आपको ऐसे 5 सुपरफूड्स की जानकारी दे रहे हैं जो आपकी त्वचा को लंबे समय तक जवान बनाए रखने में मदद करते हैं. 1. पपीता पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और पपेन नामक एंजाइम से भरपूर होता है. यह मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा में लचीलापन (Elasticity) लाने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से फाइन लाइंस कम होती हैं. 2. ब्लूबेरी और जामुन बेरीज विटामिन C और एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत हैं. ये त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदूषण से होने वाले डैमेज से बचाती हैं, जिससे त्वचा ढीली नहीं पड़ती. 3. नट्स और सीड्स बादाम, अखरोट और अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन E पाया जाता है. ये तत्व त्वचा की नमी को बरकरार रखते हैं और प्राकृतिक चमक प्रदान करते हैं, जिससे झुर्रियां जल्दी नहीं आतीं. 4. पालक और हरी सब्जियां पालक में क्लोरोफिल, विटामिन C और आयरन भरपूर मात्रा में होता है. यह शरीर में कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है, जो त्वचा को टाइट रखने और झुर्रियों को रोकने के लिए सबसे जरूरी प्रोटीन है. 5. एवोकाडो एवोकाडो में हेल्दी फैट्स और विटामिन A होता है. यह त्वचा की गहराई से मरम्मत करता है और स्किन सेल्स को पोषण देता है जिससे चेहरा फ्रेश और यंग दिखता है.

वॉट्सऐप जैसा फीचर अब जीमेल में, एक क्लिक में काम हो जाएगा, यूज करने का तरीका जानें

 नई दिल्ली गूगल ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसमें जीमेल यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन का सपोर्ट मिलेगा. यह सपोर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर मिलेगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी मिलता है।  एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स को सेंसटिव ईमेल भेजने के लिए सिक्योरिटी लेयर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर या एक्सटेंशन की जरूरत नहीं होगी. ईमेल सुरक्षित तरीके से रिसीवर तक पहुंच जाएगा।  एंड टू एंड एनक्रिप्शन क्या होता है?  एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, असल में एक तरह का डिजिटल सिक्योरिटी लॉक सिस्टम है. इस टेक्नोलॉजी का यूज करने पर डेटा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के अलावा अन्य कोई शख्स ईमेल या मैसेज को बीच में डिकोड नहीं कर पाएगा।  सीधे शब्दों में समझें तो आप किसी बक्से को भेजते हैं, जिसमें सोना-चांदी है. ऐसे लोग उसमें ताला लगा देते हैं और चाबी सिर्फ रिसीवर के पास है. एंड टू एंड एनक्रिप्शन कुछ ऐसे ही काम करता है।  गूगल ने जीमेल के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस तक एक्सपेंशन का ऐलान किया है. एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स अब सीधे Gmail मोबाइल ऐप की मदद से एन्क्रिप्टेड ईमेल लिख, भेज और पढ़ सकेंगे।  इन यूजर्स को मिलेगी सुविधा  एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन गूगल वर्क स्पेस के एंटरप्राइज यूजर्स को मिलेगी, जिनके पास क्लाइंट-साइड एनक्रिप्शन कैपिबिलटीज है. इसके लिए पहले एडमिन कंसोल के जरिए एंड्रॉयड और आईओएस सपोर्ट को एक्टिवेट करना होगा, उसके बाद ही यूजर्स इसका एक्सेस कर पाएंगे।  गूगल बता चुका है कि अपडेट रैपिड रिलीज और शेड्यूल रिलीज दोनों डोमेन के लिए लाइव हो चुका है. एक बार मोबाइल पर एंड टू एंड इनक्रिप्शन की सुविधा मिलने के बाद यूजर्स कहीं से भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर पाएंगे. पहले एन्क्रिप्टेड ईमेल के लिए डेस्कटॉप या थर्ड-पार्टी टूल्स की जरूरत होती थी। 

भारत में मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ीं, यूजर्स पर पड़ेगा असर

स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. भारत में एक बार फिर मोबाइल फोन महंगे हो रहे हैं और इस बार दो बड़ी कंपनियों Motorola और Nothing ने अपने कई स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा दी है. हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों ने अपने पॉपुलर मॉडल्स के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसका सीधा असर आम यूजर्स की जेब पर पड़ने वाला है. Motorola और Nothing ने बढ़ाईं कीमतें सबसे पहले बात Motorola की करें तो कंपनी ने अप्रैल 2026 से अपने कुछ चुनिंदा मॉडल्स की कीमत बढ़ाई है. रिपोर्ट्स के अनुसार Moto G35, Moto G57 Power और Edge 60 Fusion जैसे स्मार्टफोन्स अब पहले से महंगे हो गए हैं. इन डिवाइसेज की कीमत में लगभग 1000 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है. पहले जो फोन एक तय बजट में आसानी से मिल जाते थे, अब वही मॉडल थोड़ा ज्यादा खर्च करवाएंगे. यह बढ़ोतरी सिर्फ प्रीमियम फोन्स तक सीमित नहीं है. Motorola ने अपने बजट और मिड-रेंज सेगमेंट को भी महंगा किया है. यानी जो यूजर्स 15 से 25 हजार रुपये के बीच फोन खरीदने की सोच रहे थे, उन्हें अब अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा. खास बात यह है कि यह बदलाव नए स्टॉक के साथ लागू हो रहा है, इसलिए कई ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर कीमतें अलग-अलग भी दिख सकती हैं. अब बात Nothing की करें तो कंपनी ने भी अपने नए और पॉपुलर मॉडल्स की कीमत में बदलाव किया है. Nothing Phone 2a और Phone 3a Lite जैसे स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ने की खबर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकी कीमत में करीब 2000 से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. यानी जो फोन पहले 20 से 22 हजार रुपये के आसपास मिल रहा था, अब उसकी कीमत 23 से 26 हजार रुपये तक जा सकती है. क्यों हो रहे हैं स्मार्टफोन्स महंगे? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अचानक स्मार्टफोन्स इतने महंगे क्यों हो रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कंपोनेंट्स की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी. खासतौर पर RAM और स्टोरेज जैसे पार्ट्स की कीमतें बढ़ गई हैं. AI टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से मेमोरी चिप्स की डिमांड काफी बढ़ गई है, जिससे सप्लाई पर दबाव पड़ा है और कीमतें ऊपर चली गई हैं. हालांकि कंपनियां AI के नाम पर ज्यादा मार्जिन कमाने के लिए भी तेजी से फोन महंगे कर सकती हैं. क्योंकि ये एक परसेप्शन बन चुका है कि AI की वजह से चिप शॉर्टेज हो रही है. इसके अलावा ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें भी एक बड़ी वजह हैं. कई देशों में मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है. साथ ही रुपये की कमजोरी ने भी इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ा दी है. यही कारण है कि सिर्फ Motorola और Nothing ही नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियां भी धीरे-धीरे अपने स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ा रही हैं. क्या कहते हैं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स? इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. कंपनियों के लिए कम कीमत में ज्यादा फीचर्स देना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में या तो यूजर्स को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे या फिर कम फीचर्स के साथ समझौता करना पड़ेगा. इस पूरे बदलाव का असर सीधे तौर पर कस्टमर्स पर पड़ने वाला है. जो लोग नया फोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, उनके लिए यह सही समय हो सकता है कि वे जल्दी फैसला लें. क्योंकि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में वही फोन और महंगे हो सकते हैं.

गूगल का ऐलान: अब Gmail ईमेल होंगे और ज्यादा सुरक्षित

गूगल ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसमें जीमेल यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन का सपोर्ट मिलेगा. यह सपोर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर मिलेगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी मिलता है.   एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स को सेंसटिव ईमेल भेजने के लिए सिक्योरिटी लेयर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर या एक्सटेंशन की जरूरत नहीं होगी. ईमेल सुरक्षित तरीके से रिसीवर तक पहुंच जाएगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन क्या होता है? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, असल में एक तरह का डिजिटल सिक्योरिटी लॉक सिस्टम है. इस टेक्नोलॉजी का यूज करने पर डेटा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के अलावा अन्य कोई शख्स ईमेल या मैसेज को बीच में डिकोड नहीं कर पाएगा. सीधे शब्दों में समझें तो आप किसी बक्से को भेजते हैं, जिसमें सोना-चांदी है. ऐसे लोग उसमें ताला लगा देते हैं और चाबी सिर्फ रिसीवर के पास है. एंड टू एंड एनक्रिप्शन कुछ ऐसे ही काम करता है. गूगल ने जीमेल के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस तक एक्सपेंशन का ऐलान किया है. एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स अब सीधे Gmail मोबाइल ऐप की मदद से एन्क्रिप्टेड ईमेल लिख, भेज और पढ़ सकेंगे. इन यूजर्स को मिलेगी सुविधा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन गूगल वर्क स्पेस के एंटरप्राइज यूजर्स को मिलेगी, जिनके पास क्लाइंट-साइड एनक्रिप्शन कैपिबिलटीज है. इसके लिए पहले एडमिन कंसोल के जरिए एंड्रॉयड और आईओएस सपोर्ट को एक्टिवेट करना होगा, उसके बाद ही यूजर्स इसका एक्सेस कर पाएंगे. गूगल बता चुका है कि अपडेट रैपिड रिलीज और शेड्यूल रिलीज दोनों डोमेन के लिए लाइव हो चुका है. एक बार मोबाइल पर एंड टू एंड इनक्रिप्शन की सुविधा मिलने के बाद यूजर्स कहीं से भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर पाएंगे. पहले एन्क्रिप्टेड ईमेल के लिए डेस्कटॉप या थर्ड-पार्टी टूल्स की जरूरत होती थी.