samacharsecretary.com

आधार कार्ड की ये गलती बन सकती है बड़ी परेशानी!

कई लोगों को अपने आधार कार्ड की याद तभी आती है, जब बैंक में KYC करवानी हो, नया अकाउंट खोलना हो, मोबाइल नंबर अपडेट करना हो या किसी सरकारी योजना का फायदा लेना हो. लेकिन यहीं एक बड़ी समस्या छिपी होती है. कई आधार कार्ड में छोटी-छोटी गलतियां सालों तक नजर ही नहीं आतीं. रोजमर्रा के काम तो चलते रहते हैं, लेकिन जैसे ही दोबारा KYC वेरिफिकेशन या किसी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच होती है, यही मामूली गलती अचानक बड़ी परेशानी बन सकती है. अगर आपके आधार कार्ड में दर्ज जानकारी और बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद डिटेल्स मेल नहीं खाते हैं, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. इसलिए समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर लेना बेहतर रहता है. नाम का मेल न होना बढ़ा सकता है मुश्किलें आधार और बैंक खाते में नाम का मेल न होना सबसे आम समस्याओं में से एक है. अगर आपके आधार कार्ड पर लिखा नाम बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नाम से अलग है, तो KYC या अकाउंट वेरिफिकेशन के दौरान परेशानी आ सकती है. कई बार यह अंतर बहुत छोटा होता है, जैसे नाम की स्पेलिंग में मामूली गलती, मिडिल नेम का छूट जाना, कहीं पूरे नाम की जगह सिर्फ इनिशियल्स का इस्तेमाल होना या फिर सरनेम अलग तरीके से दर्ज होना. आमतौर पर लोग इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन KYC जांच के दौरान यही वजह रुकावट बन सकती है. आधार से जुड़ा पुराना नंबर कर सकता है जरूरी कामों में रुकावट आजकल आधार से जुड़ी ज्यादातर सेवाएं OTP के जरिए ही पूरी होती हैं. चाहे आधार डाउनलोड करना हो, डिटेल्स अपडेट करनी हो, e-KYC करवानी हो या फिर अपनी पहचान वेरिफाई करनी हो, हर जगह OTP उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है जो आधार से लिंक होता है. समस्या तब आती है जब लोग अपना मोबाइल नंबर बदल तो लेते हैं, लेकिन उसे आधार में अपडेट करना भूल जाते हैं. शुरुआत में सब कुछ नॉर्मल लगता है, लेकिन जैसे ही किसी जरूरी काम के लिए OTP की जरूरत पड़ती है, पता चलता है कि OTP उस पुराने नंबर पर जा रहा है जो अब उनके पास है ही नहीं. डेट ऑफ बर्थ, जेंडर समेत इन डिटेल्स को जरूर चेक करें अगर आपके आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ गलत है, तो आगे चलकर यह छोटी सी गलती बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. खासकर तब, जब आपके आधार की जानकारी PAN कार्ड, बैंक खाते, बीमा पॉलिसी या इनवेस्टमेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स से मैच न करे. ऐसे सिचुएशन में वेरिफिकेशन का प्रोसेस अटक सकता है या उसमें देरी हो सकती है. सिर्फ डेट ऑफ बर्थ ही नहीं, जेंडर या अन्य पर्सनल डिटेल्स में हुई गलती भी मुश्किलें खड़ी कर सकती है.

45°C गर्मी में फोन खतरे में! ये गलती मत करना

देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी लोगों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों के लिए भी चुनौती बन गई है. तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के बाद स्मार्टफोन यूजर्स को नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. फोन का जरूरत से ज्यादा गर्म होना, चार्जिंग का अचानक रुक जाना, बैटरी का तेजी से खत्म होना और कैमरा ऐप का अपने आप बंद हो जाना जैसी समस्याएं अब आम होती जा रही हैं. कई लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार ओवरहीटिंग स्मार्टफोन के कई अहम पार्ट्स को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है. गर्मी में फोन क्यों करने लगता है धीमा काम? जब स्मार्टफोन का तापमान लगातार बढ़ता है तो उसका सिस्टम खुद को सुरक्षित रखने के लिए प्रदर्शन कम कर देता है. तकनीकी भाषा में इसे थर्मल थ्रॉटलिंग कहा जाता है. इस स्थिति में प्रॉसेसर अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं करता, जिससे फोन की स्पीड कम हो जाती है. ऐप्स धीरे खुलते हैं, गेमिंग का अनुभव खराब होता है और कई बार फोन हैंग भी होने लगता है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तापमान में रहने से बैटरी की हेल्थ तेजी से गिर सकती है, जिसका असर फोन की कुल लाइफ पर पड़ता है. धूप से आने के तुरंत बाद चार्जिंग करना पड़ सकता है भारी कई लोग बाहर से लौटते ही फोन को चार्जर से जोड़ देते हैं. यही आदत कई बार सबसे बड़ी गलती साबित होती है. यदि फोन पहले से गर्म है और उसी समय चार्जिंग शुरू कर दी जाए तो बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. चार्जिंग के दौरान भी बैटरी गर्म होती है. ऐसे में पहले से गर्म डिवाइस में तापमान और बढ़ सकता है. यही वजह है कि कई स्मार्टफोन सुरक्षा कारणों से गर्म होने पर चार्जिंग स्पीड कम कर देते हैं या चार्जिंग अस्थायी रूप से रोक देते हैं. कार में फोन छोड़ना बन सकता है महंगा सौदा गर्मी के मौसम में बंद कार के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है. ऐसे माहौल में स्मार्टफोन छोड़ना जोखिम भरा साबित हो सकता है. अत्यधिक तापमान बैटरी को फुला सकता है, डिस्प्ले पर दाग या लाइनें ला सकता है और कैमरा सेंसर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है. कई मामलों में फोन अचानक बंद हो जाता है या दोबारा चालू होने में समस्या आने लगती है. इसलिए वाहन पार्क करते समय स्मार्टफोन को हमेशा अपने साथ रखना बेहतर विकल्प है. फोन गर्म हो जाए तो क्या करें? अगर आपका स्मार्टफोन जरूरत से ज्यादा गर्म महसूस हो रहा है तो सबसे पहले उसे सीधी धूप से हटाएं. चार्जिंग बंद करें और कैमरा, वीडियो रिकॉर्डिंग या भारी ऐप्स का इस्तेमाल कुछ समय के लिए रोक दें. फोन का कवर हटाने से भी गर्मी तेजी से बाहर निकलने में मदद मिलती है. हालांकि एक गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. कई लोग फोन को ठंडा करने के लिए फ्रिज में रख देते हैं या बर्फ के संपर्क में ले आते हैं. अचानक तापमान बदलने से फोन के अंदर नमी बन सकती है, जो सर्किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकती है. ये छोटे बदलाव भी बचा सकते हैं आपका स्मार्टफोन गर्मी के मौसम में बैटरी सेवर मोड का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे बैकग्राउंड में चल रही कई प्रक्रियाएं सीमित हो जाती हैं. डार्क मोड भी बैटरी की खपत कम करने में मदद करता है, जिससे फोन अपेक्षाकृत कम गर्म होता है. इसके अलावा जहां 5जी नेटवर्क कमजोर हो, वहां 5जी बंद करके 4जी का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है. कमजोर सिग्नल वाले क्षेत्रों में फोन लगातार नेटवर्क खोजता रहता है, जिससे बैटरी और प्रॉसेसर दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. सिर्फ बैटरी नहीं, पूरे फोन की उम्र पर पड़ता है असर लगातार ओवरहीटिंग का प्रभाव केवल बैटरी तक सीमित नहीं रहता. समय के साथ प्रोसेसर की क्षमता प्रभावित हो सकती है, डिस्प्ले की गुणवत्ता खराब हो सकती है और कैमरा सेंसर की कार्यक्षमता भी कम हो सकती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ गर्मियों में स्मार्टफोन को सामान्य तापमान पर रखने और उपयोग के दौरान सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.

Motorola Edge 70 Pro+ भारत में 4 जून को होगा लॉन्च, दमदार फीचर्स लीक

अगर आप Motorola के नए स्मार्टफोन का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. कंपनी जल्द ही भारत में Motorola Edge 70 Pro+ लॉन्च करने जा रही है. लॉन्च से पहले ही इसके कई बड़े फीचर्स सामने आ चुके हैं. हाल ही में यह फोन एक बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर देखा गया, जहां इसके प्रोसेसर समेत कई जरूरी डिटेल्स सामने आईं. आइए जानते हैं इस फोन में हमें क्या खास देखने को मिलने वाला है. फोन में मिलेगा MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर Motorola Edge 70 Pro+ को लेकर कंपनी लगातार नई जानकारियां सामने ला रही है. अब इसके कुछ दमदार फीचर्स भी कन्फर्म हो गए हैं. यह स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर के साथ आएगा, जो 4nm टेक्नोलॉजी पर बना है. कंपनी का दावा है कि फोन ने AnTuTu बेंचमार्क पर 24 लाख से ज्यादा का स्कोर हासिल किया है. इसके साथ ही फोन में 16GB तक LPDDR5x RAM का सपोर्ट भी मिलेगा. 4,600 sq mm का बड़ा वेपर कूलिंग चैंबर हीटिंग को कंट्रोल में रखने के लिए Motorola Edge 70 Pro+ में 4,600 sq mm एरिया वाला बड़ा वेपर कूलिंग चैंबर दिया जाएगा, जो लंबे समय तक यूज के दौरान फोन को ठंडा रखने में मदद करेगा. इसमें 6,500mAh की बड़ी बैटरी मिलेगी, जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 2 दिन से ज्यादा का बैकअप दे सकती है. चार्जिंग के लिए इसमें 90W फास्ट वायर्ड चार्जिंग और 15W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलेगा. कैसे होगा डिस्प्ले? फोन में 6.8 इंच का 1.5K Extreme AMOLED डिस्प्ले दिया जाएगा, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 5,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस के साथ आएगा. स्क्रीन की सेफ्टी के लिए Corning Gorilla Glass 7i का प्रोटेक्शन भी मिलेगा. Motorola का दावा है कि Edge 70 Pro+ को IP68 और IP69 रेटिंग मिली है. साथ ही MIL-810H सर्टिफिकेशन इसे रोजमर्रा के कठिन इस्तेमाल के लिए और भी भरोसेमंद बनाता है. सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह स्मार्टफोन Android 16 बेस्ड Hello UI पर चलेगा. कंपनी इसके लिए 3 साल तक Android अपडेट्स और 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा कर रही है. कैमरा फोन के पीछे ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जाएगा, जिसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा Sony LYT-710 सेंसर के साथ आएगा. खास बात यह है कि इसमें 3.5-डिग्री ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) मिलेगा. इससे फोटो और वीडियो ज्यादा शार्प और स्टेबल नजर आएंगे. इसके अलावा, फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा भी होगा. कंपनी का दावा है कि यह कैमरा 50x तक डिजिटल जूम सपोर्ट करेगा. कब होगा लॉन्च? Motorola Edge 70 Pro+ को भारत में 4 जून को लॉन्च किया जाएगा. लॉन्च के बाद यह स्मार्टफोन Flipkart के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. डिजाइन की बात करें तो फोन को तीन शानदार कलर ऑप्शन (Pantone Chicory Coffee, Pantone Stormy Sea और Pantone Zinfandel) में पेश किया जाएगा. इसमें स्कल्प्टेड वुड, ट्विल-इंस्पायर्ड और सैटिन-लक्स जैसी यूनिक फिनिश देखने को मिलेंगे.  

क्या सच में तेल लगाने से बढ़ते हैं बाल? जानें डर्मेटोलॉजिस्ट की राय

भारत में बालों में तेल लगाने की परंपरा सालों पुरानी है. अक्सर कहा जाता है कि नियमित तेल मालिश से बाल तेजी से लंबे और घने होते हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? डर्मेटोलॉजिस्ट्स और इंटरनेशनल रिसर्च के मुताबिक, बालों में तेल लगाने से सीधे तौर पर नए बाल उगने या उनकी ग्रोथ स्पीड बढ़ने का पक्का वैज्ञानिक सबूत अभी तक नहीं मिला है. हालांकि कुछ तेल स्कैल्प को हेल्दी रखने, बालों को टूटने से बचाने और ड्रायनेस कम करने में जरूर मदद कर सकते हैं. यानी तेल बालों को मजबूत दिखा सकता है लेकिन इसे जादुई हेयर ग्रोथ इलाज मानना सही नहीं होगा. तेल बालों को कैसे फायदा पहुंचाता है? हेयर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऑयलिंग का सबसे बड़ा फायदा मॉइश्चर और प्रोटेक्शन है. अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, हेयर ऑयलिंग स्कैल्प को हाइड्रेट रखने और बालों को टूटने से बचाने में मदद कर सकती है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑलिव ऑयल और दूसरे नेचुरल ऑयल बालों को मुलायम और कम फ्रिजी बना सकते हैं, लेकिन इससे बाल तेजी से बढ़ेंगे, इसका मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण अभी नहीं है. डर्मेटोलॉजिस्ट क्या कहते हैं? कई डर्मेटोलॉजिस्ट मानते हैं कि तेल बालों की क्वालिटी बेहतर कर सकता है, लेकिन हेयर ग्रोथ का मुख्य रोल जेनेटिक्स, हार्मोन, डाइट और हेल्थ का होता है. अमेरिकन ब्यूटी मैग्जीन Allure के मुताबिक, कैस्टर ऑयल को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हुआ कि इससे बाल तेजी से बढ़ते हैं. कैस्टर ऑयल बालों को शाइनी बना सकता है, लेकिन हेयर ग्रोथ बढ़ाने के दावों के पीछे मजबूत रिसर्च नहीं है. कौन-से तेल थोड़ी मदद कर सकते हैं? कुछ रिसर्च में रोजमेरी ऑयल को लेकर पॉजिटिव रिजल्ट जरूर मिले हैं. रोजमेरी ऑयल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर कर सकता है और कुछ मामलों में हेयर फॉल कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि किसी भी तेल को “मैजिक हेयर ग्रोथ सॉल्यूशन” नहीं माना जाना चाहिए. सही डाइट, प्रोटीन, आयरन, नींद और स्ट्रेस कंट्रोल भी उतने ही जरूरी हैं. ज्यादा तेल लगाना भी नुकसानदायक डॉक्टर्स का कहना है कि जरूरत से ज्यादा तेल लगाने से स्कैल्प में गंदगी, डैंड्रफ और फंगल इन्फेक्शन की समस्या बढ़ सकती है. कई बार भारी तेल पोर्स ब्लॉक कर देते हैं, जिससे स्कैल्प पर पिंपल्स या खुजली हो सकती है. इसलिए हफ्ते में 1-2 बार हल्की मालिश और सही तरीके से शैंपू करना बेहतर माना जाता है.

RBI ला रहा ‘किल स्विच’, एक क्लिक में बंद होंगे बैंक ट्रांजैक्शन

डिजिटल पेमेंट्स ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. खासकर पिछले कुछ वर्षों में फर्जी पुलिस कॉल, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड जैसी घटनाओं ने लाखों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक ऐसे सुरक्षा सिस्टम पर काम कर रहा है जो किसी भी संदिग्ध स्थिति में बैंकिंग ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकता है. इसे ‘किल स्विच’ नाम दिया गया है. अगर यह सुविधा लागू होती है तो यूजर्स को अपने खाते की सुरक्षा पर पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है. क्या है आरबीआई का ‘किल स्विच’ सिस्टम? ‘किल स्विच’ एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर होगा, जिसकी मदद से कोई भी ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेगा. यदि किसी व्यक्ति को लगे कि वह साइबर ठगी का शिकार बन सकता है या उसके खाते से अनधिकृत लेनदेन होने का खतरा है, तो वह बैंकिंग ऐप के जरिए एक बटन दबाकर सभी वित्तीय गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा. इसका उद्देश्य फ्रॉड के दौरान होने वाले नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोकना है, ताकि अपराधियों को पैसा ट्रांसफर करने का मौका न मिले. डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट नाम का साइबर अपराध तेजी से सामने आया है. इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं. फर्जी दस्तावेज, नकली गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है. ऐसे मामलों में कई लोग अपनी जीवनभर की बचत गंवा चुके हैं. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और आरबीआई नये सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं. सभी डिजिटल पेमेंट्स के लिए आयेगा ऑन-ऑफ फीचर आरबीआई सिर्फ किल स्विच तक सीमित नहीं रहना चाहता. केंद्रीय बैंक सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट माध्यमों के लिए स्विच ऑन-स्विच ऑफ सुविधा लाने की संभावना भी तलाश रहा है. इस व्यवस्था के तहत ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम निकासी और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन जैसी सेवाओं को कभी भी बंद या चालू कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज यूपीआई का उपयोग नहीं करता है, तो वह इसे बंद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ सेकंड में दोबारा सक्रिय कर सकता है. ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा नियंत्रण और सुरक्षा वर्तमान में कई बैंक कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए ऑन-ऑफ सुविधा देते हैं, जिससे ग्राहक अपने कार्ड को सुरक्षित रख पाते हैं. आरबीआई अब इसी मॉडल को पूरे डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम तक विस्तार देने पर विचार कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आयेगी, बल्कि ग्राहकों का डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा. साथ ही यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे. डिजिटल पेमेंट्स का भविष्य और नयी सुरक्षा रणनीति भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल हो चुका है. यूपीआई ट्रांजैक्शन लगातार नये रिकॉर्ड बना रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा को मजबूत बनाना समय की जरूरत बन गया है. किल स्विच और ऑन-ऑफ बैंकिंग कंट्रोल जैसी सुविधाएं आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बना सकती हैं. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या डिजिटल फ्रॉड की आशंका होने पर यूजर तुरंत अपने खाते को सुरक्षित मोड में डाल सकेगा और आर्थिक नुकसान से बच सकता है.

महाभारत काल में लंबी उम्र का रहस्य, भीष्म-द्रोणाचार्य कैसे रहते थे इतने दीर्घायु?

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में बदलते लाइफस्टाइल के कारण भारतीयों का शरीर धीरे धीरे बीमारियों का घर बनता जा रहा है. जिसके कारण भारतीयों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी कुल 60 से 70 साल रह गई है. लेकिन, क्या आपको पता है कि महाभारत काल में लोग आज के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में कई लोग 80-90 साल से भी ज्यादा जिए थे. कुछ मान्यताओं के मुताबिक यह भी बताया गया है कि उस समय दिन और साल की गणना आज के समय से अलग थी, जिससे उस युग का रहस्य और भी बढ़ जाता है. महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, भगवान कृष्ण भी 100 साल से ज्यादा जिए थे. उनकी लंबी उम्र का कारण आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, योग और सात्विक आहार था. वहीं, आज के समय में भी पूरी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो 100 साल से ज्यादा जीते हैं. उनकी लाइफस्टाइल भी इन्हीं चीजों पर निर्भर करती है. इसी काल में कई महान योद्धा हुए, जिनमें खासतौर पर द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह अपनी लंबी उम्र के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. कहते हैं कि भीष्म पितामह को तो इच्छामृत्यु का वरदान मिला हुआ था. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने करीब 20 दिन तक प्राण नहीं त्यागे थे और फिर अपनी इच्छा से देह त्याग दिया था. लंबी उम्र जीने के पीछे के सीक्रेट गुरु द्रोणाचार्य गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य की लंबी उम्र का श्रेय उनके योग, व्यायाम, युद्ध-कला और सादगी भरे जीवन को जाता है. द्रोणाचार्य युद्ध-कला के महान आचार्य थे और कौरव-पांडव के गुरु भी थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अच्छा आहार लेते थे. इसी वजह से उनका शरीर मजबूत रहता था. भीष्म पितामह वहीं भीष्म पितामह, जिनकी उम्र अलग-अलग ग्रंथों में 110 से 120 साल के बीच बताई गई है. उन्होंने अपना पूरा जीवन एक ऋषि की तरह सख्त अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीया था. भीष्म पितामह का सादा जीवन भी उनकी सेहत बनाए रखने में बड़ा कारण माना जाता है. उस समय खानपान में प्राकृतिक और शुद्ध चीजों को ज्यादा महत्व दिया जाता था. जो लंबी उम्र के लिए फायदेमंद मानी जाती थीं. इसके अलावा, इनका आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना भी इनकी फिटनेस का राज था. कहा जाता है कि दोनों ही योद्धाओं ने कठिन अभ्यास और बढ़िया अनुशासन के कारण इतनी लंबी उम्र पाई थी. वे अपने कर्तव्यों को पूरी लगन से निभाते थे. दोनों एक हर दिन के तय दिनचर्या का पालन करते थे, जिससे उनका शरीर फिट और मन साफ रहता था. क्या खाते थे भीष्म पितामह? महाभारत ग्रंथ के अनुसार, भीष्म पितामह सात्विक आहार लेते थे. उनके खाने में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और दूध-घी जैसी चीजें शामिल थीं. कहा जाता है कि भीष्म बहुत नियंत्रित तरीके से भोजन करते थे और कभी भी जरूरत से ज्यादा नहीं खाते थे. यह आदत उन्हें स्वास्थ्य रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करती थी. इन्हीं मान्यताओं के अनुसार पता चलता है कि भीष्म पितामह नॉन वेज नहीं खाते थे. ये थीं दिनचर्या माना जाता है कि महाभारत काल में लोग साफ-सुथरे माहौल, अच्छे लाइफस्टाइल और शारीरिक अनुशासन की वजह से लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में लोग 100 साल की उम्र में भी उतने ही फिट रहते थे, जितने आज के समय में 70 साल के लोग होते हैं. इसी तरह एक और महान ऋषि थे वेदव्यास, जिन्हें महाभारत का रचयिता माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, उनकी उम्र करीब 130 साल तक बताई जाती है. वेदव्यास का जन्म सत्यवती और ऋषि पराशर से हुआ था, और उनके जन्म से जुड़ी एक अनोखी और प्रसिद्ध कहानी भी सुनने को मिलती है. पांडवों की क्या थी उम्र? वैसे तो पांडवों की उम्र का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. लेकिन, पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर की 90 से 100 साल तक जिए थे. वहीं, भीम इनसे 1 से 2 साल छोटे थे, अर्जुन 3 से 4 साल छोटे थे और नकुल-सहदेव अर्जुन से 10 से 15 छोटे थे. महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर की उम्र करीब 70 से 75 साल की थी. युद्ध के बाद, पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल तक शासन किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्वर्ग की यात्रा शुरू की थी. धृतराष्ट्र की क्या उम्र थी? महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, धृतराष्ट्र का जन्म नियोग प्रथा से हुआ था, जिसमें ऋषि वेदव्यास ने राजा विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद उन्हें जन्म दिया. वे पांडु और विदुर के बड़े भाई थे. माना जाता है कि महाभारत युद्ध के समय उनकी उम्र करीब 90-100 साल के बीच थी. इससे इस बात अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय दुर्योधन और उसके भाई-बहन करीब 50-60 साल के थे. युद्ध के बाद धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती के साथ लगभग 15 साल तक हस्तिनापुर में रहे. इसके बाद वे जंगल में चले गए (वनवास ले लिया), जहां 2-3 साल बाद जंगल में लगी आग में उनकी मृत्यु हो गई बताई जाती है. महाभारत काल में एक साल कितने समय का होता था? जानकारी के मुताबिक, महाभारत काल में साल की गणना चंद्र और सूर्य दोनों के आधार पर होती थी, यानी समय को चांद और सूरज दोनों के हिसाब से माना जाता था. चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता था, जिसमें 12 महीने होते थे. उस वक्त का हर महीना लगभग 29-30 दिन का माना जाता है. इस साल को सौर वर्ष के साथ संतुलित रखने के लिए बीच-बीच में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता था, जिसे अधिक मास कहा जाता है.

गर्मियों में ग्लोइंग स्किन के लिए चंदन, गुलाब जल और खीरे के आसान उपाय

 गर्मियों में स्किन का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है. तेज धूप, पसीना और उमस की वजह से चेहरा डल और बेजान नजर आने लगता है. ऐसे में लोग इससे बचने के लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स या पार्लर का सहारा लेते हैं. लेकिन घर में मौजूद कुछ नेचुरल चीजों की मदद से भी आप गर्मियों में अपनी स्किन को हेल्दी, फ्रेश और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं. आइए जानते हैं गर्मियों में स्किन की देखभाल के लिए कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय. चंदन चंदन को स्किन के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें ठंडक पहुंचाने और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं जो धूप से झुलसी चेहरे को राहत देने में मदद करते हैं. यह सनबर्न, टैनिंग, हीट रैशेज और एक्स्ट्रा ऑयल की समस्या को कम करने में भी असरदार माना जाता है. गर्मियों में स्किन को हेल्दी और फ्रेश रखने के लिए आप चंदन पाउडर में गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर फेस पैक के तौर पर लगा सकते हैं. फिर 15 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धोकर मॉइश्चराइजर लगा लें. गुलाब जल गुलाब जल का इस्तेमाल सदियों से भारतीय स्किनकेयर में किया जाता रहा है. यह चेहरे को ठंडक देने के साथ उसे रिफर्श भी रखता है. गुलाब जल स्किन का PH बैलेंस बनाए रखने, पोर्स टाइट करने और रेडनेस कम करने में मदद करता है. गर्मियों में आप गुलाब जल को फ्रिज में रखकर टोनर के तौर पर चेहरे पर स्प्रे कर सकते हैं. इससे चेहरे पर तुरंत फ्रेशनेस महसूस होती है. खीरा खीरा गर्मियों में त्वचा के लिए सबसे फायदेमंद चीजों में से एक माना जाता है. इसमें भरपूर पानी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. यह चेहरे की सूजन, डार्क सर्कल्स और सनबर्न को कम करने में भी असरदार है. आप खीरे का रस चेहरे पर लगा सकते हैं या फिर एलोवेरा जेल के साथ इसका फेस मास्क बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. दही दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स और लैक्टिक एसिड चेहरे को एक्सफोलिएट करने में मदद करते हैं. यह चेहरे को ठंडक देने के साथ उसे सॉफ्ट और हाइड्रेटेड बनाए रखने में मदद करता है. दही सन टैन कम करने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाने में भी फायदेमंद माना जाता है. गर्मियों में सादे दही को चेहरे और गर्दन पर लगभग 15 मिनट लगाकर रखें, फिर ठंडे पानी से धो लें.

हाई ब्लड प्रेशर बना बड़ा खतरा, AIIMS विशेषज्ञ ने बताया हार्ट अटैक से बचने का आसान फॉर्मूला

नई दिल्ली  भारत का हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से पीड़ित है। शहरी क्षेत्र के हर तीसरे और ग्रामीण क्षेत्र के हर चौथे व्यक्ति को हाई बीपी है। देश में यह तेजी से बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है। यही वजह है कि यह तेजी से बढ़ती गैर-संचारी (संक्रामक) बीमारियों में शामिल है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच (एनएफएचएस-पांच) के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 24 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने उच्च रक्तचाप की जानकारी तक नहीं होती। दिल्ली जैसे महानगरों में बदलती जीवनशैली, तनाव, अधिक नमक व जंक फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधि में कमी और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों का खतरा अधिक दिल्ली पर आधारित हालिया अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों में प्री-हाइपरटेंशन और उच्च रक्तचाप के मामले सामने आए हैं, विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पुरुषों में इसका खतरा अधिक पाया गया। एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ  डाॅ. ने बताया कि हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली यह बीमारी अधिकांशत: बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाती रहती है और ज्यादातर पीड़ित इससे अनजान रहते हैं। डाॅ.  के अनुसार भारत में 30 करोड़ से अधिक वयस्क हाई बीपी से पीड़ित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चौथा और शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा व्यक्ति हाई पीबी से प्रभावित है। हर साल करीब 16 लाख लोगों की जान इसके कारण जाती है। यह टीबी से होने वाली मौत से कई गुना अधिक है। डाॅके अनुसार यदि लोगों का ब्लड प्रेशर औसतन सिर्फ दो अंक भी कम हो जाए, तो हर साल एक लाख से 1.6 लाख तक मौतों को रोका जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140 से घटकर 138 हो जाए, तो इसे दो अंक (ब्लड प्रेशर नापने वाली इकाई एमएमएचजी) की कमी माना जाएगा। ऐसा होने पर देश में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है। दिल, दिमाग और किडनी पर भारी पड़ रहा हाई ब्लड प्रेशर अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता सामंथा ओ'कोनेल के मुताबिक, सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोगों में बीमारी के प्रति जागरूकता, इलाज और नियंत्रण, तीनों ही बेहद कमजोर हैं। यह समस्या केवल गरीब देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित देशों में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। आज हाइपरटेंशन हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का सबसे बड़ा कारण है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज्यादातर मामलों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। इंसान अंदर ही अंदर बीमार होता रहता है और उसे पता तब चलता है जब पानी सिर से ऊपर गुजर जाता है। यहां तक कि जांच के बाद भी इसे नियंत्रित करना आसान नहीं होता। कई बार डॉक्टर इलाज से जुड़े नवीनतम दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर पाते, जबकि मरीज नियमित रूप से दवाएं लेने और लंबे समय तक जीवनशैली में बदलाव बनाए रखने में संघर्ष करते हैं। अध्ययन में एक और चिंताजनक पहलु यह सामने आया है कि 2020 में दुनिया भर में हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित 20 फीसदी से भी कम लोगों का रक्तचाप नियंत्रित था। अमीर देशों में नियंत्रण की दर 40.2 फीसदी रही, जबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति कहीं ज्यादा बदतर है, जहां महज 13.6 फीसदी मरीज ही इसे कंट्रोल कर पा रहे हैं। अध्ययन की वरिष्ठ शोधकर्ता कैथरीन मिल्स का कहना है भले ही इस दिशा में कुछ प्रगति हुई हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर रक्तचाप पर अभी भी बेहद कम नियंत्रण है। विडम्बना यह है कि प्रभावी दवाएं और इलाज मौजूद होने के बावजूद दुनिया इस बीमारी को काबू में नहीं कर पा रही। एशिया और अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित 119 देशों के 60 लाख से ज्यादा वयस्कों के आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन अब तक के सबसे व्यापक विश्लेषणों में से एक माना जा रहा है। नतीजे दर्शाते हैं कि 2020 तक दक्षिण अमेरिका, कैरिबियन और उप-सहारा अफ्रीका में हाइपरटेंशन की दर सबसे अधिक थी। वहीं कुल मरीजों की संख्या के लिहाज से पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र पहले स्थान पर रहे, जबकि दक्षिण एशिया दूसरे स्थान पर रहा। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कमजोर और समृद्ध देशों के बीच असमानता लगातार बढ़ रही है। 2000 में अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर वाले 70 फीसदी लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे थे, जो 2020 तक बढ़कर 83 फीसदी हो गए हैं। उच्च रक्तचाप से जूझ रहे हैं भारत में 30 फीसदी से ज्यादा वयस्क विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी रिपोर्ट 'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन हाइपरटेंशन 2025' से पता चला है कि भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। मतलब की देश की 30 फीसदी से ज्यादा वयस्क आबादी इस समस्या से जूझ रही है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें से महज 39 फीसदी (8.22 करोड़) ही जानते हैं कि वो इस समस्या से पीड़ित हैं, जबकि करीब 83 फीसदी मरीजों यानी 17.3 करोड़ से ज्यादा का रक्तचाप नियंत्रित नहीं है। मतलब कि देश में हाई ब्लड प्रेशर के 17 फीसदी मरीजों में ही रक्तचाप नियंत्रित है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसपर किए अध्ययन में खुलासा किया है कि देश में करीब 34 फीसदी लोग प्री-हाइपरटेंशन का शिकार हैं। वहीं यदि देश में जिलों के आधार पर देखें तो यह आंकड़ा 15.6 फीसदी से 63.4 फीसदी दर्ज किया गया है। सच कहें तो देश में जिस तरह से खानपान की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है और जीवनशैली बदल रही है, उसके चलते स्वास्थ्य से जुड़ी अनगिनत समस्याएं पैदा हो रही हैं, ऊपर से तनाव यह सभी मिलकर भारतीयों को अंदर ही अंदर घुन की तरह खाए जा रहे हैं। कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता आर्थिक बोझ विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर अब महज स्वास्थ्य से जुड़ा संकट नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक चुनौती भी बनता जा रहा है। कमजोर देशों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पहले ही संक्रामक रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य … Read more

पूरी दुनिया में ठप पड़ा ChatGPT, यूजर्स के अटके काम; हिस्ट्री और लॉगिन में आ रही दिक्कत

नई दिल्ली OpenAI का AI चैटबॉट ChatGPT इस समय भारत समेत दुनिया भर में अचानक ठप हो गया। इस प्लेटफॉर्म के अचानक डाउन होने से हजारों यूजर्स प्रभावित हुए हैं। यूजर्स को लॉगिन, जवाब मिलने और पुरानी चैट को लोड करने में परेशानी आ रही, जिससे कई लोगों का काम बीच में ही रुक गया। ऑनलाइन आउटेज मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर अमेरिका में 4,300 से अधिक यूजर्स ने AI प्लेटफॉर्म के साथ समस्याओं की सूचना दी है। वहीं, भारत में अब तक लगभग 470 शिकायतें दर्ज की गई हैं। लगभग 85%, लोगों ChatGPT का यूज करने में परेशानी हो रही है, जबकि 6 प्रतिशत ने लॉगिन में समस्या बताई है। शेष 6 प्रतिशत ने वेबसाइट के साथ समस्याओं की जानकारी दी है। शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे से ही यूजर्स को चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दफ्तर का काम कर रहे प्रोफेशनल्स, कोडिंग सीख रहे इंजीनियर्स और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र जैसे ही अपने सवालों के जवाब के लिए चैटजीपीटी पर गए, उन्हें केवल एक खाली स्क्रीन या फिर एरर मैसेज दिखाई देने लगे। डाउनडिटेक्टर के अनुसार, भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद से सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलीं। चैटजीपीटी ठप होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और लोगों ने अपनी-अपनी दिक्कतों को लेकर शिकायतों की बाढ़ ला दी। OpenAI ने भी माना है कि उनके सिस्टम में गड़बड़ी आई है। कंपनी ने अपने स्टेटस पेज पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ यूजर्स को बातचीत करने या जवाब पाने में दिक्कत हो सकती है। कंपनी ने बताया कि उन्होंने समस्या को कम करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और वे इस सुधार पर लगातार नजर रख रहे हैं। यूजर्स को हो रही ये परेशानी चैटजीपीटी डाउन होने पर यूजर्स को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है: जवाब नहीं मिल रहा और ऐप हो रहे क्रेश जब यूजर कोई सवाल टाइप कर रहा है तो चैटजीपीटी कोई जवाब नहीं दे रहा और स्क्रीन पर केवल ब्लिंक हुआ कर्सर या खाली जगह दिखाई दे रही है। एंड्रॉयड और आईफोन (iOS) दोनों के मोबाइल ऐप्स खुलते ही अपने आप बंद हो रहे हैं या हैंग हो जा रहे हैं। पुरानी चैट गायब और लॉगिन में समस्या स्क्रीन की बाईं तरफ (Left Side) जहां पुरानी सारी बातचीत और प्रोजेक्ट्स सेव रहते हैं, वह हिस्सा पूरी तरह खाली या सफेद दिखाई दे रहा है। कई यूजर्स अपने अकाउंट से अपने आप लॉगआउट हो गए हैं और जब वे दोबारा लॉगिन करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पेज लोड ही नहीं हो रहा है। वहीं यूजर्स का चैटजीपीटी खुल तो रहा है, लेकिन वह इतना धीमा चल रहा है कि एक छोटा सा जवाब लिखने में भी कई मिनट लगा रहा है। चैटजीपीटी के बंद होने से उन यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हुई जिनके रोज के काम इसी पर टिके हैं। चाहे पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स हों, दफ्तर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स या फिर कंटेंट क्रिएटर्स सबके काम पर अचानक ब्रेक लग गया। इससे यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि अब एआई टूल्स की निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

ऑफिस में बैठकर काम से बढ़ रहा कमर दर्द, सही पोस्टर और ब्रेक से मिल सकती है राहत

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन इससे कमर दर्द की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दिन के अंत में दर्द और जकड़न महसूस होती है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है. सही बैठने का तरीका, बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी कमर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं. 1. सही पोस्टर रखें ऑफिस में बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें. कोशिश करें कि आपके कंधे ढीले रहें और झुककर काम न करें. पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर रखें, उन्हें हवा में लटकने न दें. गलत पोस्टर में लंबे समय तक बैठने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है. 2. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना कमर दर्द का बड़ा कारण है. इसलिए हर 30-40 मिनट में 2-3 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें. इस दौरान आप खड़े होकर थोड़ा चल सकते हैं या हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है.  3. आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल करें ऑफिस में काम करते समय ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिसमें अच्छा बैक सपोर्ट हो. कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि आपके पैर आराम से जमीन पर टिक सकें. अगर कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो आप कुशन या छोटा तकिया लगाकर अपनी कमर को सपोर्ट दे सकते हैं. सही कुर्सी आपके पोस्टर को सुधारने में मदद करती है.  4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें कमर दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है. आप forward bend, back stretch और body twisting जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज मांसपेशियों की जकड़न को कम करती हैं और शरीर को लचीला बनाती हैं. दिन में 5-10 मिनट भी स्ट्रेचिंग करने से फर्क महसूस होगा. 5. गर्म सिकाई करें अगर दिनभर काम करने के बाद कमर में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो गर्म सिकाई बहुत राहत देती है. आप गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. 10-15 मिनट तक सिकाई करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है. यह एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है. 6. सही गद्दे का चुनाव करें रात में सोते समय गद्दे का सही होना भी बहुत जरूरी है. बहुत ज्यादा सॉफ्ट गद्दा आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देता, जबकि बहुत हार्ड गद्दा भी असहज हो सकता है. मीडियम फर्म गद्दा कमर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को संतुलित सपोर्ट देता है और दर्द से बचाव करता है.  7. पानी और पोषण का ध्यान रखें अक्सर लोग पानी पीने और सही खानपान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह भी कमर दर्द का एक कारण हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें, ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहें.