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घर में उगाएं रीठे का पौधा, बालों से लेकर कपड़ों की सफाई तक आएगा काम

 आजकल नेचुरल चीजों का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. फिर चाहे वो साबुन हो या हेयर कलर, लोग नेचुरल उपाय ही अपना रहे हैं. ज्यादातर लोग बाजार में मिलने वाली केमिकल युक्त चीजों से दूरी बनाकर नेचुरल और इको-फ्रेंडली चीजों की तरफ लौट रहे हैं. ऐसे में पुरानी देसी चीजें एक बार फिर चर्चा में हैं. इन्हीं देसी चीजों में रीठा भी शामिल है. पुराने जमाने में रीठा को बाल धोने से लेकर कपड़े साफ करने तक के लिए इस्तेमाल किया जाता था. ऐसे में लोग आजकल बाल धोने के लिए बाजार से रीठा खरीदकर ला रहे हैं. क्या आप भी उन्हीं में शामिल हैं? अगर हां, तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, रीठा को आप अपने घर पर आसानी से उगा सकते हैं. जी हां, रीठा का पौधा होता है, जो छोटे से गमले में भी बहुत ही आसानी से उग जाता है. इसके फल में मौजूद नेचुरल सैपोनिन पानी के संपर्क में आने पर झाग बनाते हैं, जिसकी वजह से ये नेचुरल क्लीनजर की तरह काम करता है. रीठा आखिर इतना खास क्यों है? रीठे को आमतौर पर सोपनट या सोपबेरी भी कहा जाता है. इसके फल का बाहरी छिलका सैपोनिन से भरपूर होता है. यही नेचुरल तत्व पानी में मिलकर साबुन जैसा झाग बनाता है और गंदगी व तेल को हटाने में मदद करता है. इसलिए पुराने समय में रीठे का इस्तेमाल बाल, स्किन और कपड़े साफ करने के लिए किया जाता था. घर में रीठे का पौधा कैसे लगाएं? रीठे को बीज से उगाया जा सकता है. इसके लिए पका हुआ रीठा लेकर उसके बीज को निकालकर अच्छी तरह साफ करें. बीजों को कुछ दिन सुखाने के बाद मिट्टी में लगाया जा सकता है. असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की नर्सरी गाइड के मुताबिक, रीठा के पके बीजों को 2-3 दिन धूप में सुखाकर बोया जा सकता है. रीठा के बीजों को अंकुरित होने में करीब 30-40 दिन लग सकते हैं. अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले इसे छोटे गमले या कंटेनर में पौधे की तरह तैयार कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि रीठा आगे चलकर बड़ा पेड़ बनता है, इसलिए लंबे समय के लिए इसे खुली जगह देना जरूरी है. कैसी मिट्टी और कितनी धूप चाहिए? रीठा के पौधे को ऐसी मिट्टी पसंद होती है जिसमें पानी जमा न हो. इसलिए इसे ऐसी मिट्टी में बोएं, जिसमें पानी जमा ना हो. पौधा लगाने के लिए नॉर्मल गार्डन वाली मिट्टी में ऑर्गेनिक खाद या कंपोस्ट मिलाया जा सकता है. रीठे के पौधे को अच्छी ग्रोथ के लिए अच्छी धूप भी चाहिए. पौधा बड़ा होने के बाद ये कम देखभाल में भी बढ़ सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में पानी और मिट्टी की नमी पर ध्यान देना जरूरी है. पानी देते समय सबसे बड़ी गलती न करें रीठा के छोटे पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी दें, लेकिन गमले या मिट्टी में पानी जमा न रहने दें. लगातार गीली मिट्टी जड़ों को नुकसान हो सकता है. खासकर बारिश के मौसम में ये ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है कि एक्स्ट्रा पानी आसानी से बाहर निकल जाए. रीठा के फल से बनाएं नेचुरल क्लीनर जब पेड़ पर रीठा के फल आते हैं और पककर सूखने लगते हैं, तो इन्हें इकट्ठा करके सुखाया जा सकता है. इसके बाद रीठे के छिलके को पानी में भिगोकर या उबालकर उसका नेचुरल क्लीनिंग लिक्विड तैयार किया जाता है. रीठे के छिलके में मौजूद सैपोनिन पानी में झाग पैदा करता है. यही वजह है कि रीठे का इस्तेमाल नेचुरल तरीके से शैंपू और क्लीनजर के तौर पर होता रहा है. बाल धोने में भी होता है इस्तेमाल रीठा लंबे समय से बालों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके छिलकों को पानी में भिगोकर या उबालकर छान लिया जाता है और उस पानी का इस्तेमाल बाल साफ करने के लिए किया जाता है. आज भी कई हर्बल हेयर-क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में रीठा का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ी मात्रा में टेस्ट करना बेहतर है और इसे आंखों से दूर रखना चाहिए. कपड़े और घर की सफाई में भी आ सकता है काम रीठा का इस्तेमाल सिर्फ बाल धोने के लिए ही नहीं किया जाता है. इसके नेतुरल सैपोनिन की वजह से इसे कपड़े और कुछ घरेलू चीजों की सफाई में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसीलिए इसे एक तरह का पौधे से मिलने वाला नेचुरल क्लीनजर कहा जा सकता है. यानी घर में रीठे का पेड़ लगाने का मतलब सिर्फ एक पौधा लगाना नहीं, बल्कि ऐसा पेड़ तैयार करना है जिसके फल आगे चलकर कई तरह की सफाई में काम आ सकते हैं.

Instagram पर वायरल 80s AI फोटो के पीछे कितना खर्च होता है पानी और बिजली?

इंस्टाग्राम पर इन दिनों 80s लुक वाली AI तस्वीरों का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. लोग अपनी सामान्य फोटो को AI की मदद से 1980 के दशक के कपड़े, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड और पुराने कैमरे जैसा लुक दे रहे हैं. इसके लिए फोटो AI टूल में डालनी होती है और कुछ ही समय में उसका नया वर्जन तैयार हो जाता है. लोगों के लिए यह काम भले ही कुछ सेकंड का है, लेकिन फोटो बनाने के पीछे AI सिस्टम को काफी काम करना पड़ता है. जब एक साथ बहुत सारे लोग ऐसी तस्वीरें बनाने लगते हैं, तो AI को ज्यादा फोटो बनाने की रिक्वेस्ट मिलती हैं. इन्हें पूरा करने के लिए डेटा सेंटर में लगे जीपीयू और सर्वर को ज्यादा काम करना पड़ता है. इससे बिजली का इस्तेमाल होता है. सर्वर गर्म भी होते हैं. AI से फोटो बनती कैसे है? AI से 80s वाली फोटो बनाना सिर्फ किसी फोटो पर फिल्टर लगाने जैसा नहीं है. AI आपकी फोटो और दिए गए प्रॉम्प्ट को समझकर एक नई इमेज तैयार करता है. इसके लिए AI सर्वर पर कई तरह की कैलकुलेशन होती हैं. एक रिसर्च में अलग-अलग AI इमेज-जनरेशन मॉडल की एनर्जी यूज को देखा गया. इसमें एक AI इमेज बनाने में औसतन करीब 2.9 Wh बिजली लगने का अनुमान मिला. हालांकि हर AI मॉडल में यह जरूरत अलग हो सकती है. अब अगर कोई व्यक्ति एक ही फोटो बनाकर रुक जाए तो इस्तेमाल होने वाली एनर्जी कम होगी. लेकिन ट्रेंड में लोग अक्सर कई तस्वीरें बनाते हैं. पहली फोटो पसंद नहीं आई तो फिर से जनरेट करते हैं, प्रॉम्प्ट बदलते हैं या अलग लुक आजमाते हैं. इससे AI को बार-बार नई इमेज बनाने का काम करना पड़ता है. ज्यादा काम करेंगे तो सर्वर गर्म होंगे AI की फोटो बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले जीपीयू और दूसरे कंप्यूटर चिप लगातार काम करते हैं. काम करने के दौरान इनमें गर्मी पैदा होती है. इसलिए डेटा सेंटर में सर्वर को ठंडा रखना जरूरी होता है. इसके लिए अलग-अलग कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं. कौन सा सिस्टम इस्तेमाल होगा, यह डेटा सेंटर की जगह और उसकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, दुनिया भर के डेटा सेंटर ने 2024 में करीब 460 TWh बिजली इस्तेमाल की. अनुमान है कि 2030 तक यह खपत करीब 945 TWh हो सकती है. AI का बढ़ता इस्तेमाल इस बढ़ोतरी की बड़ी वजहों में शामिल है. यह आंकड़ा सिर्फ 80s वाली AI फोटो का नहीं है. इसमें दुनिया भर के डेटा सेंटर में होने वाला अलग-अलग तरह का काम शामिल है. इससे यह जरूर समझ आता है कि AI का इस्तेमाल बढ़ने पर डेटा सेंटर पर काम और बिजली की जरूरत भी बढ़ती है. सर्वर को ठंडा करने में पानी क्यों लगता है? कुछ डेटा सेंटर में सर्वर से निकलने वाली गर्मी को कम करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे कूलिंग सिस्टम में पानी गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है. कुछ सिस्टम में पानी का एक हिस्सा भाप बनकर भी बाहर चला जाता है. हालांकि हर डेटा सेंटर में पानी का इस्तेमाल एक जैसा नहीं होता. जगह, मौसम और कूलिंग सिस्टम के हिसाब से पानी की खपत बदल सकती है. अमेरिका के लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में अमेरिकी डेटा सेंटर में औसतन करीब 0.36 लीटर पानी प्रति kWh IT एनर्जी की साइट वॉटर कंजम्पशन थी. यह पूरे डेटा सेंटर सेक्टर का औसत आंकड़ा है तो 80s ट्रेंड का पानी पर कितना असर? ज्यादा लोग AI से तस्वीरें बनाएंगे तो AI को ज्यादा रिक्वेस्ट मिलेंगी. ज्यादा रिक्वेस्ट का मतलब सर्वर को ज्यादा काम करना होगा. ज्यादा कंप्यूटिंग से ज्यादा बिजली की जरूरत होगी और सर्वर ज्यादा गर्म होंगे. इन्हें ठंडा रखने के लिए कूलिंग की जरूरत पड़ेगी. और जिन डेटा सेंटर में पानी वाली कूलिंग इस्तेमाल होती है, वहां पानी की जरूरत भी बढ़ सकती है. यानी सोशल मीडिया पर दिख रही 80s वाली एक AI फोटो के पीछे सर्वर, बिजली और कूलिंग का पूरा सिस्टम काम कर रहा है. इस एक ट्रेंड की वजह से कितना पानी इस्तेमाल हुआ, यह अभी पता नहीं है. लेकिन AI से बनने वाली तस्वीरों की संख्या बढ़ने के साथ डेटा सेंटर पर कंप्यूटिंग और कूलिंग का काम भी बढ़ता है.  

भाग्यश्री का ब्यूटी सीक्रेट: चेहरे पर लगाती हैं मलाई, जानें क्या हैं फायदे

उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं. स्किन पहले के मुकाबले ड्राई, डल और कम इलास्टिक नजर आ सकती है. ऐसे में मॅच्योर स्किन को एक्स्ट्रा मॉइश्चर और केयर की जरूरत होती है. बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री भी अपनी फिटनेस और नेचुरल ब्यूटी को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं. 57 साल की उम्र में भी उनकी स्किन पर नजर आने वाला ग्लो कई लोगों का ध्यान खींचता है. भाग्यश्री अपनी फिटनेस और ब्यूटी का खास ख्याल रखती हैं और हाल ही में उन्होंने अपने मॉर्निंग स्किनकेयर रिचुअल से जुड़ा एक आसान सा सीक्रेट शेयर किया है, जिसे आप भी आसानी से अपने घर पर फॉलो कर सकती हैं. हमारी रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें हमारी स्किन के लिए किसी जादू से कम नहीं होती है और ऐसी ही एक चीज भाग्यश्री भी अपने चेहरे रोजाना सुबह लगाती हैं. आइए आपको भाग्यश्री का ब्यूटी सीक्रेट बताते हैं. भाग्यश्री चेहरे पर लगाती हैं मलाई भाग्यश्री ने अपने इस ब्यूटी रिचुअल को मजेदार अंदाज में शेयर करते हुए कहा, 'कान्हा ने खाया माखन और हमने लगाई मलाई!' यानी चेहरे की देखभाल के लिए महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय वह दूध की मलाई जैसे आसान घरेलू उपाय को भी अपनी रूटीन में जगह देती हैं. खासतौर पर मॅच्योर स्किन के लिए मॉइश्चराइजिंग बेहद जरूरी है, क्योंकि उम्र के साथ स्किन का नेचुरल ऑयल कम हो सकता है और ड्राइनेस बढ़ सकती है. चेहरे पर मलाई लगाने से क्या होता है? दूध से बनी मलाई में फैट होता है, जो त्वचा को मुलायम और मॉइश्चराइज महसूस कराने में मदद कर सकता है. वहीं दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन की ऊपरी लेयर पर मौजूद डेड स्किन को हल्के तौर पर हटाने में मदद कर सकता है. इससे स्किन कुछ समय के लिए ज्यादा सॉफ्ट और फ्रेश नजर आ सकती है. इसके अलावा ठंडी मलाई या ठंडे दूध का इस्तेमाल स्किन को ठंडक और सुकून देने वाला एहसास भी दे सकता है. खासकर जब स्किन रूखी या खिंची-खिंची महसूस हो रही हो, तब यह एक सिंपल होम केयर रिचुअल हो सकता है. ऐसे करें इस्तेमाल अगर आप भी इसे ट्राई करना चाहती हैं तो चेहरे को पहले अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद ताजी मलाई की बहुत पतली लेयर चेहरे पर लगाएं. कुछ मिनट हल्के हाथों से मसाज करें और करीब 5 से 10 मिनट बाद चेहरे को नॉर्मल पानी से धो लें. इसके बाद अपनी स्किन टाइप के हिसाब से मॉइश्चराइजर और दिन में सनस्क्रीन लगाना न भूलें. इस बात का रखें ध्यान हालांकि, हर स्किन पर घरेलू नुस्खे एक जैसा असर नहीं करते. अगर आपकी स्किन बहुत ऑयली, एक्ने-प्रोन या सेंसिटिव है, तो चेहरे पर मलाई लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. किसी तरह की एलर्जी या जलन महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.

घर पर बनाएं एलोवेरा हर्बल साबुन, चेहरे को मिलेगा नेचुरल निखार

साबुन का इस्तेमाल हर घर में रोज ही होता है. खासकर चेहरे धोने के लिए हम साबुन को दिन में 2 बार तो जरूर यूज करते हैं लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर साबुनों में कठोर केमिकल्स, सल्फेट और आर्टिफिशियल खुशबू होती है जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को छीनकर उसे रूखा और बेजान बना देते हैं. ऐसे में क्या हो अगर आप घर पर ही अपने फेस के लिए नेचुरल साबुन तैयार कर लें. जी हां बिना किसी केमिकल के अपनी त्वचा को साफ, मुलायम और चमकदार बनाना चाहते हैं तो घर पर ताजे एलोवेरा से बना हर्बल साबुन एक बेहतरीन विकल्प है. एलोवेरा में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और नमी देने वाले गुण त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं, दाग-धब्बों को हल्का करते हैं और चेहरे पर एक प्राकृतिक और दूधिया निखार लाते हैं. यहां हम आपको ये साबुन बनाने का आसान तरीका बता रहे हैं. होममेड एलोवेरा साबुन के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें ताजी एलोवेरा की पत्ती का जेल – 1/2 कप सोप बेस (ग्लिसरीन या गोट मिल्क सोप बेस) – 200 ग्राम विटामिन E कैप्सूल – 2 गुलाब जल – 1 बड़ा चम्मच बादाम का तेल या नारियल तेल – 1 छोटा चम्मच सिलिकॉन सोप मोल्ड (साबुन जमाने का सांचा) बनाने की विधि एलोवेरा जेल तैयार करें: ताजे एलोवेरा के पत्ते से चम्मच की मदद से जेल निकालें और इसे मिक्सी में पीसकर स्मूथ पेस्ट बना लें. सोप बेस पिघलाएं: सोप बेस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. अब एक बर्तन में पानी उबालें और उस पर दूसरा बर्तन रखकर (डबल बॉयलर मेथड) सोप बेस को पूरी तरह पिघला लें. सामग्री मिलाएं: पिघले हुए सोप बेस में पिसा हुआ एलोवेरा जेल, विटामिन E का तेल, गुलाब जल और बादाम का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. मोल्ड में ढालें: तैयार मिश्रण को सिलिकॉन सोप मोल्ड में डालें. (अगर मोल्ड न हो तो किसी प्लास्टिक के छोटे डिब्बे में हल्का तेल लगाकर इस्तेमाल कर सकते हैं). सेट होने दें: साबुन को 2 से 3 घंटे के लिए सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें या 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. साबुन के सख्त होने पर इसे मोल्ड से बाहर निकालें. आपका 100% नेचुरल एलोवेरा हर्बल सोप इस्तेमाल के लिए तैयार है.

अब AI खुद करेगा आपके रोजमर्रा के काम! Meta ने लॉन्च किया Muse, ईमेल, ट्रैवल बुकिंग और शॉपिंग तक होगा ऑटोमेटिक

 नई दिल्ली हर दिन के काम को आसान बनाने के लिए मेटा ने नया ऑटोनोमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट लॉन्च किया है. यह AI आपके कई काम खुद कर सकता है. जैसे ईमेल भेजना, गाड़ी बेचने के लिए लिस्ट करना और कहीं घूमने जाने के लिए टिकट बुक करना।  मेटा इस नए ऐप के साथ नॉर्मल एआई से हटकर कुछ करना चाहता है. कंपनी ऐसी AI तैयार कर रही है, जो सिर्फ जवाब देने के बजाय आपके लिए काम भी कर सके. इसकी मदद से रोज के कई काम आसानी से किए जा सकते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे मे।  जानिए Meta Muse AI क्या है? मेटा का नया एआई एक पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट है. इसे हर दिन के काम को ऑटोमेट करने के लिए बनाया गया है. इसकी मदद से कई ऐसे काम किए जा सकते हैं, जिन्हें करने में ज्यादा समय लगता है।  यह नॉर्मल चैटबॉट की तरह नहीं है. दूसरे एआई ऐप्स आमतौर पर आपके सवालों के जवाब दे सकते हैं, लेकिन खुद से कोई ऐप खोलकर मैसेज करना या कई स्टेप वाला काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं होता. वहीं, मेटा का Muse खास तौर पर ऐसे कामों को ऑटोमेट करने के लिए बनाया गया है. यूजर को सिर्फ टास्क देना होता है और एआई उसे पूरा करने की कोशिश करता है।  जानिए कैसे आ सकता है काम Muse AI आपके सवालों के जवाब देने के साथ-साथ कई दूसरे काम भी कर सकता है. जैसे कोई फॉर्म पूरा करना, वेबसाइट पर ब्राउजिंग करना, कोई चीज खरीदना, इमेज बनाना और डॉक्यूमेंट तैयार करना.इसकी मदद से यूजर को कई छोटे-छोटे काम खुद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एआई इन कामों को अपने तरीके से पूरा करने में मदद कर सकता है।  जानिए कैसे कर पाता है टास्क आसानी से जो एआई खुद से किसी काम को पूरा कर सकता है, उसे एजेंटिक AI कहा जाता है. मेटा का Muse भी एक एजेंटिक AI है, जिसे यूजर के काम को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया है।  जब आप इसे कोई टास्क देते हैं, तो यह काम पूरा करने के लिए जरूरी बिल्ट-इन स्किल्स को चेक करता है. इसके बाद उन्हीं स्किल्स की मदद से टास्क पूरा करने की कोशिश करता है. इसके साथ दूसरे ऐप्स की कनेक्टिविटी भी मिलती है, जिसकी मदद से यह कई स्टेप वाले काम कर सकता है।  फ्री में कर सकते हैं इस्तेमाल Meta Muse AI का इस्तेमाल फ्री में किया जा सकता है. इसे Apple App Store या Google Play Store से डाउनलोड किया जा सकता है. हालांकि, फ्री इस्तेमाल के साथ कुछ यूसेज लिमिट भी देखने को मिल सकती है। 

फोन में इंटरनेट नहीं फिर भी कर पाएंगे UPI पेमेंट, इस खास कोड से ऑफलाइन ट्रांजैक्शन का आसान तरीका जानें

 नई दिल्ली कई बार ऐसी सिचुएशन आ जाती है, जब आपके पास कैश नहीं होता और UPI पेमेंट करने के लिए इंटरनेट नहीं चल रहा होता है. कई बार डेटा प्लान खत्म हो जाता है या डेटा लिमिट पूरी हो जाती है. ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप बिना इंटरनेट के भी UPI पेमेंट कर सकते हैं।  बहुत कम लोगों को इस तरीके के बारे में पता है. आज हम आपको इसके दो तरीके बताने वाले हैं. पहला तरीका एक मैनुअल कोड के जरिए है और दूसरा ऑफलाइन चलने वाले ऑटोमेशन सिस्टम के जरिए. तो आइए जानते हैं बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट कैसे किया जा सकता है।  जानिए कैसे करें ऑफलाइन पेमेंट, कुछ आसान स्टेप्स में अगर आप ऐसी जगह फंस जाते हैं, जहां इंटरनेट सही से काम नहीं कर रहा है, तो आप एक खास कोड की मदद से बिना इंटरनेट के पेमेंट कर सकते हैं. कोड वाला तरीका. इस तरीके में *99# कोड आपकी मदद कर सकता है. इसके लिए आपको अपना डायल पैड खोलना है, जहां आप फोन नंबर डालते हैं. यहां *99# डायल करके कॉल करना है।  इसके बाद आपको अपनी भाषा चुननी होगी. फिर मांगी गई जानकारी दर्ज करनी होगी. इसके बाद आपको पैसे भेजने के ऑप्शन को चुनना है. आप जिस व्यक्ति को पैसे भेजना चाहते हैं, उसका मोबाइल नंबर, UPI ID या बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी डाल सकते हैं. इसके बाद आपको जितने पैसे भेजने हैं, वह अमाउंट डालना होगा और अपना UPI PIN दर्ज करना होगा. इसके बाद आपका पेमेंट हो जाएगा।  ऑटोमेटिक तरीका, QR स्कैन करके करें ऑफलाइन पेमेंट अगर आप बिना इंटरनेट के दुकान पर लगे QR कोड को स्कैन करके पेमेंट करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक और तरीका है. इसमें आपको मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती।  यह तरीका Jio SIM पर काम नहीं करता है. दूसरे नेटवर्क के SIM पर यह काम कर सकता है. इसके लिए आपको pwa.offpayapp.com वेबसाइट पर जाकर इसे इंस्टॉल करना होगा. इसके बाद यह सिस्टम आपके लिए ऑफलाइन पेमेंट की प्रक्रिया को आसान बना देता है।  मैनुअल तरीके में आपको नंबर, UPI ID या दूसरी जानकारी डालनी पड़ती है. वहीं, इस तरीके में आप QR कोड स्कैन करके पेमेंट की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं और सीधे पेमेंट ऑप्शन तक पहुंच सकते हैं। 

अलसी के बीज से बनाएं नेचुरल जेल, स्किन से लेकर बालों तक आएगा निखार

सुंदर, चमकदार त्वचा और मुलायम, लंबे बाल पाने के लिए अक्सर लोग महंगे पार्लर ट्रीटमेंट, केराटिन और केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं. लेकिन कुछ समय बाद इन केमिकल्स का असर खत्म होते ही स्किन और बाल फिर से बेजान नजर आने लगते हैं. अगर आप बिना एक पैसा फालतू खर्च किए पूरी तरह नेचुरल और असरदार तरीका ढूंढ रहे हैं, तो अलसी के बीज का जेल आपके लिए एक वरदान है. ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर अलसी का जेल न सिर्फ चेहरे की झुर्रियों व दाग-धब्बों को दूर कर त्वचा पर 'कोरियन ग्लास स्किन' जैसा ग्लो लाता है, बल्कि बालों को नेचुरल केराटिन जैसा स्मूथ, सिल्की और मजबूत भी बनाता है. आइए जानते हैं घर पर ही आसानी से अलसी का जेल बनाने का तरीका और इसके इस्तेमाल की सही विधि. सामग्री अलसी के बीज : 1/2 कप पानी: 2 कप एलोवेरा जेल: 1 बड़ा चम्मच (ऑप्शनल – अतिरिक्त नमी के लिए) विटामिन E कैप्सूल: 1 (ऑप्शनल – ग्लो और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए) छानने के लिए: सूती कपड़ा या बारीक छलनी बनाने की सही और आसान विधि अलसी और पानी को उबालें: एक पैन में 2 कप पानी और 1/2 कप अलसी के बीज डालकर मीडियम आंच पर गरम होने रखें. जेल बनने तक पकाएं: मिश्रण को चम्मच से चलाते रहें. लगभग 7 से 10 मिनट में पानी उबलने लगेगा और अलसी के बीज एक सफेद झागदार, चिपचिपे जेल में बदलने लगेंगे. कंसिस्टेंसी चेक करें: जब पानी का टेक्सचर अंडे की सफेदी जैसा गाढ़ा और तार छोड़ने वाला हो जाए तो तुरंत गैस बंद कर दें. (मिश्रण को ज्यादा गाढ़ा न होने दें, वरना छानने में परेशानी होगी). गरम में ही छानें: मिश्रण के थोड़ा ठंडा होते ही (पूरी तरह ठंडा होने से पहले) इसे किसी सूती कपड़े या मलमल के कपड़े में डालें और निचोड़कर एक साफ कटोरी में जेल अलग कर लें. एक्स्ट्रा न्यूट्रिशन जोड़ें: तैयार जेल में 1 चम्मच एलोवेरा जेल और 1 विटामिन E कैप्सूल का ऑयल मिलाकर अच्छे से व्हिस्क करें. स्टोर करें: इस तैयार अलसी के जेल को एक साफ कांच के जार में भरकर फ्रिज में रखें. आप इसे 10 से 15 दिनों तक आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इस्तेमाल करने का सही तरीका त्वचा के लिए (Skin Care): साफ चेहरे पर कॉटन या उंगलियों की मदद से इस जेल को लगाएं और 20 मिनट के लिए छोड़ दें. जब जेल सूखकर त्वचा खिंची-खिंची महसूस होने लगे, तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें. यह नेचुरल बोटॉक्स की तरह काम करता है. बालों के लिए (Hair Care): बालों को सेक्शन में बांटकर जड़ों से लेकर सिरों तक इस जेल को अच्छे से लगाएं. 45 मिनट से 1 घंटे तक बालों में लगा रहने दें, फिर किसी माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें. बाल एकदम सीधे, चमकदार और सॉफ्ट हो जाएंगे.

WhatsApp ने पुराने Android फोन्स से खत्म किया सपोर्ट, इन मोबाइल्स पर नहीं चलेगा ऐप

नई दिल्ली WhatsApp ने बड़ा ऐलान कर दिया है और बताया है कि कई पुराने स्मार्टफोन से सपोर्ट बंद किया जा चुका है. Wabetainfo ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 8 सितंबर 2026 से पुराने स्मार्टफोन से सपोर्ट बंद किया जा चुका है।  जो स्मार्टफोन Android 5.0 और 5.1 पर काम करते हैं, उनपर से WhatsApp का सपोर्ट बंद किया जा चुका है. जब  Android 5.0 और 5.1 पर काम करने वाले स्मार्टफोन यूजर्स जैसे ही मैसेजिंग ऐप को ओपन करेंगे, उसको ऐप के अंदर नोटिफिकेशन्स अलर्ट मिलेगा।  जो स्मार्टफोन Android 5.0 और 5.1 पर काम करते हैं, उनके पास एक ऑप्शन है कि वे अपने हैंडसेट को लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) वर्जन के साथ अपडेट कर लें. अगर न्यू अपडेट अवेलेबल नहीं है तो यूजर्स को न्यू हैंडसेट खरीदना चाहिए।  WhatsApp ने अप्रैल में कर दिया था ऐलान WhatsApp ने इस साल अप्रैल में ही ऐलान कर दिया था कि पुराने हैंडसेट से सपोर्ट बंद होने जा रहा है. अब कंपनी ने सपोर्ट बंद कर दिया है. अब वॉट्सऐप मिनिमम एंड्रॉयड 6.0 मार्शमैलो को सपोर्ट करेगा।  भारत  समेत कई देशों में पुराने हैंडसेट मौजूद  Wabetainfo ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत समेत पाकिस्तान, ब्राजील आदि कई देश हैं, जहां पर अभी भी बड़े स्तर पर पुराने डिवाइसों का इस्तेमाल किया जाता है. वे पुराने डिवाइस Android 5 या उससे भी पुराने ओएस वर्जन पर काम करते हैं।  WhatsApp पुराने एंड्रॉयड वर्जन से सपोर्ट क्यों बंद करता है?  WhatsApp लगातार न्यू फीचर्स जारी करता है और हर बार नए फीचर्स कुछ एंड्रॉयड वर्जन के साथ ही कंपेटेबल होते हैं. बहुत से फीचर्स ज्यादा पुराने एंड्रॉयड ओएस पर सपोर्ट नहीं करते हैं. एंड्रॉयड 5.0 या उससे पुराने ओएस से वॉट्सऐप ने सपोर्ट बंद कर दिया है। 

BSNL ने हरियाणा में मचाई धूम, नए यूजर्स जोड़ने में Jio-Airtel को छोड़ा पीछे

सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) कम कीमत में लोगों को कई तरह की सर्विस देती है. इसकी मदद से आम लोग कम कीमत में अच्छी कनेक्टिविटी का फायदा उठा सकते हैं. टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की लेटेस्ट सब्सक्रिप्शन रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 के महीने में BSNL ने हरियाणा में दूसरे प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है. इस दौरान BSNL के साथ सबसे ज्यादा नए यूजर्स जुड़े हैं. आइए जानते हैं पूरी डिटेल. जानिए हरियाणा में BSNL के यूजर्स कैसे बढ़े BSNL के यूजर्स जून 2026 में 46,49,224 थे. जुलाई 2026 के आखिर तक इनकी संख्या बढ़कर 47,17,784 हो गई.इस तरह जुलाई के महीने में BSNL के साथ कुल 68,560 नए मोबाइल सब्सक्राइबर्स जुड़े. नए यूजर्स जुड़ने के मामले में BSNL हरियाणा में सबसे आगे रहा. Jio क्यों रहा पीछे? देशभर में जिओ के सबसे ज्यादा मोबाइल यूजर्स हैं, लेकिन हरियाणा में जुलाई के दौरान कंपनी नए यूजर्स जोड़ने के मामले में BSNL से पीछे रही. रिपोर्ट के मुताबिक, जिओ के मोबाइल सब्सक्राइबर्स 82,70,811 से बढ़कर 83,08,319 हो गए. यानी जुलाई 2026 में Jio के साथ सिर्फ 37,508 नए यूजर्स जुड़े. जानिए Airtel ने कितने नए यूजर्स जोड़े Airtel के सब्सक्राइबर्स की संख्या भी हरियाणा में बढ़ी है. कंपनी के यूजर्स 79,38,962 से बढ़कर 79,64,101 हो गए. इस तरह जुलाई 2026 में एयरटेल के साथ 25,139 नए यूजर्स जुड़े. हालांकि, नए यूजर्स जोड़ने के मामले में Airtel भी BSNL से काफी पीछे रहा. यह सवाल सबसे ज्यादा दिलचस्प है कि आखिर BSNL के साथ इतनी तेजी से लोग क्यों जुड़ रहे हैं? इसकी एक बड़ी वजह कम कीमत वाले रिचार्ज प्लान माने जा सकते हैं. प्राइवेट कंपनियों के महंगे होते प्लान के बीच BSNL कई यूजर्स को किफायती विकल्प देता है. इसके अलावा कंपनी लगातार 4G नेटवर्क का विस्तार कर रही है और कई इलाकों में अपनी कनेक्टिविटी बेहतर कर रही है. ग्रामीण और छोटे शहरों में भी BSNL की मजबूत मौजूदगी है. यही वजह है कि जो लोग कम कीमत में मोबाइल सेवा चाहते हैं, उनके लिए BSNL फिर से एक आकर्षक विकल्प बन रहा है.

Samsung India में बड़ी छंटनी, TV और होम अप्लायंसेज बिजनेस से 100 अधिकारियों की नौकरी गई

Samsung India ने अपने एम्प्लॉइज को लेकर बड़ा फैसला लिया है. कंपनी ने अपने टीवी और होम अप्लायंसेज बिजनेस में करीब 80 से 100 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अलग-अलग बैच में एम्प्लॉइज की छंटनी कर रही है. इसमें डायरेक्टर, टीम लीड, ब्रांच मैनेजर और एरिया मैनेजर जैसे पदों पर काम करने वाले लोग भी शामिल हैं. कंपनी के इस फैसले के पीछे बढ़ता कॉस्ट और कमजोर सेल्स बड़ी वजह बताई जा रही है. पिछले कुछ समय में मेमोरी चिप की कीमत काफी बढ़ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी कीमत दोगुने से ज्यादा हो चुकी है. इससे टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ गया है. इसके अलावा रुपये में आई कमजोरी का भी असर सैमसंग पर पड़ा है. इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स महंगे होने से कंपनी के लिए प्रोडक्ट बनाने की कॉस्ट बढ़ गई है. ऐसे में कंपनी के लिए कम कीमत पर प्रोडक्ट बेचकर पहले जैसा प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. और एम्प्लॉइज पर पड़ सकता है असर अभी तक जो छंटनी सामने आई है, वह मुख्य रूप से टीवी और होम अप्लायंसेज बिजनेस में हुई है. लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे भी कुछ एम्प्लॉइज की नौकरी जा सकती है. सैमसंग के इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस की सेल्स और मार्केटिंग टीम में करीब 550 से 600 अधिकारी हैं. इस टीम के करीब 25 फीसदी एम्प्लॉइज पर असर पड़ सकता है. इसमें कंपनी के डायरेक्ट एम्प्लॉइज के साथ ऑफ-रोल एम्प्लॉइज भी शामिल हैं. नौकरी से हटाए जा रहे एम्प्लॉइज को कंपनी की तरफ से सर्वेंस दिया जा रहा है. कर्मचारियों को करीब तीन महीने की सैलरी के साथ हर साल की सर्विस के बदले एक महीने की एक्स्ट्रा सैलरी दी जा रही है. स्मार्टफोन बिजनेस में फिलहाल छंटनी नहीं सैमसंग के स्मार्टफोन बिजनेस को फिलहाल इस छंटनी से अलग रखा गया है. कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले फेस्टिव सीजन और दिवाली के दौरान स्मार्टफोन की सेल्स में तेजी आ सकती है. हालांकि, स्मार्टफोन मार्केट भी इस समय पूरी तरह मजबूत नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्मार्टफोन सेल्स वॉल्यूम में सालाना करीब 11 से 12 फीसदी की गिरावट देखी गई है. सैमसंग इंडिया अपने खर्च को कम करने के लिए कुछ रीजनल ऑफिस को भी एक साथ करने की तैयारी में है. कंपनी का फोकस ज्यादा कॉस्ट वाले कामों को कम करने और अपने ऑपरेशंस को आसान बनाने पर है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिवाली के बाद टीवी और होम अप्लायंसेज बिजनेस में वर्कफोर्स को लेकर और बदलाव हो सकते हैं. यानी आने वाले समय में कुछ और एम्प्लॉइज पर इसका असर पड़ सकता है. फिलहाल सैमसंग इंडिया का पूरा बिजनेस खराब स्थिति में नहीं है. कंपनी की ओवरऑल परफॉर्मेंस मजबूत बनी हुई है. ऐसे में इस छंटनी को खास तौर पर टीवी और होम अप्लायंसेज बिजनेस में बढ़ती कॉस्ट, कम सेल्स और प्रॉफिट मार्जिन को बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.