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महंगे केराटिन-प्रोटीन ट्रीटमेंट छोड़िए! अंडे से बनाएं 5 होममेड हेयर मास्क, बाल होंगे मुलायम

 क्या आपने भी पार्लर में केराटिन और प्रोटीन ट्रीटमेंट पर हजारों रुपये खर्च किए हैं, फिर भी बाल रूखे और बेजान बने रहते हैं? अगर हां, तो इसका सबसे सस्ता और 100 प्रतिशत प्राकृतिक इलाज आपके किचन में ही मौजूद है. बालों के लिए अंडा बेस्ट माना जाता है और दादी-नानी के जमाने से ही लोग इसे बालों पर हेयर मास्क की तरह लगाते आ रहे हैं. प्रोटीन और बायोटिन से भरपूर अंडा बालों को जड़ों से मजबूत बनाता है और झड़ने की समस्या को कम करता है. अक्सर लड़कियां महंगे एग-बेस्ड शैंपू तो खरीद लेती हैं, लेकिन घर पर ताजा अंडा लगाने से कतराती हैं. हालांकि, करीब 80 प्रतिशत महिलाएं अंडे की तेज बदबू की वजह से इसे लगाने से बचती हैं. ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, अंडे को अकेले लगाने से स्मेल आती है. लेकिन इसमें कुछ घरेलू चीजें मिला ली जाएं, तो बदबू पूरी तरह खत्म हो जाती है और बालों को दोगुना पोषण मिलता है. आइए हम आपको ऐसे 5 आसान और असरदार होममेड एग हेयर मास्क के बारे में बताते हैं, जो बिना किसी बदबू के 30 मिनट में आपके बालों को सैलून जैसी चमक और मजबूती देंगे. शहद, दही और अंडे का मास्क अगर आपके बालों में स्प्लिट्स एंड्स और ड्राईनेस है, तो यह मास्क सबसे अच्छा ऑप्शन है. 1 अंडे में 2 चम्मच घर का गाढ़ा दही और 1 चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से फेंट लें. दही इस मास्क को क्रीमी बनाता है जिससे अं डा बालों में चिपकता नहीं है, वहीं शहद नमी को अंदर तक लॉक करने का काम करता है. इसे सिर्फ बालों की लेंथ पर लगाएं और 25 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें. नारियल तेल, एलोवेरा और अंडे का मास्क कई लोगों के बाल धोने के तुरंत बाद बहुत रूखे हो जाते हैं. इसके लिए 1 अंडे में 2 चम्मच एलोवेरा जेल और आधा चम्मच नारियल तेल मिलाएं. एलोवेरा हल्का और फिसलन भरा होता है जो बालों को सॉफ्ट बनाता है, जबकि नारियल तेल हल्की चमक देता है. ध्यान रहे कि नारियल तेल आधा चम्मच से ज्यादा न डालें, वरना बाल ऑयली लगेंगे. केला, दही और अंडे का मास्क अगर आपके बाल मैनेज नहीं होते और बार-बार उलझते हैं, तो यह मास्क कमाल का काम करेगा. 1 पके केले को मिक्सी में बारीक पीस लें, फिर इसमें 1 अंडा और 1 चम्मच दही मिलाएं. केले की मीठी खुशबू अंडे की बदबू को पूरी तरह खत्म कर देती है और बालों को स्मूथ बनाती है. एवोकाडो और अंडे का मास्क मोटे और कर्ली हेयर्स के लिए एवोकाडो सबसे बेस्ट माना जाता है. आधा पका एवोकाडो और 1 अंडा मिलाकर अच्छे से मैश करके पेस्ट बना लें. एवोकाडो में मौजूद नेचुरल फैट बालों को डीप मॉइश्चर और कंडीशनिंग देता है. पतले या बारीक बालों वाले लोग इस मास्क का इस्तेमाल न करें. कॉफी और अंडे का मास्क अगर आपको सिर्फ अंडे की स्मेल से प्रॉब्लम है, तो यह तरीका आपके लिए ही है. 1 अंडे में 1 चम्मच कॉफी पाउडर मिलाएं. कॉफी की स्ट्रॉन्ग खुशबू अंडे की स्मेल पर पूरी तरह भारी पड़ती है और यह स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को भी बढ़ाती है. इसे स्कैल्प पर रगड़ें नहीं, सिर्फ 5 मिनट हल्के हाथों से मसाज करें और 30 मिनट बाद धो लें. अंडे की बदबू से बचने के 3 गोल्डन रूल्स ठंडे पानी का इस्तेमाल: एग मास्क को हमेशा नॉर्मल या ठंडे पानी से ही धोएं. गर्म पानी से अंडा बालों में जम सकता है और बदबू बढ़ जाती है. लास्ट रिंस: बाल धोने के बाद आखिरी बार रिंस करते समय पानी में 2 बूंद नींबू का रस या गुलाब जल मिला लें. कितने समय तक लगाएं: किसी भी एग हेयर मास्क को 30 मिनट से ज्यादा समय तक बालों में रखना चाहिए.

महज 600 रुपये की लागत में दो भाइयों ने मिलकर पानी और केरोसिन से चलने वाला चूल्हा बनाया।

आपने LPG से चलने वाला चूल्हा देखा होगा और मिट्टी के तेल से चलने वाला चूल्हा भी देखा होगा। क्या आपने पानी और केरोसिन से चलने वाला चूल्हा देखा है? दरअसल मध्य प्रदेश की 11वीं के स्टूडेंट व्यासजी मिश्रा महज 16 साल की उम्र में ऐसा हाइब्रिड चूल्हा तैयार कर सबको हैरत में डाल दिया है। इस चूल्हे को ईंधन बचाने के मकसद से तैयार किया गया है और इस चूल्हे की खासियत है कि इसमें धुआं काफी कम निकलता है। सीमित साधनों के बावजूद व्यासजी मिश्रा ने अपने भाई की मदद से इस चूल्हे को तैयार किया है और इस खास तकनीक ने कई जगह पुरस्कार भी जीते हैं। कैसे आया हाइब्रिड चूल्हा बनाने का विचार? रिपोर्ट्स के मुताबिक व्यासजी ने हाइब्रिड चूल्हे को अपने बड़े भाई पवनजी मिश्रा की अधूरी कोशिश को पूरा करने के मकसद से तैयार करना शुरू किया था। सबसे पहले उन्होंने इसे 2001-02 के एक साइंस मेले में बनाने की कोशिश की थी। हालांकि इस पर सफलता तब मिली जब 2002-03 में दोनों भाइयों ने मिलकर इस पर काम शुरू किया। इस हाइब्रिड चूल्हे को बनाने में दोनों भाइयों को करीब 6 महीने का समय लग गया। इसके बाद उन्होंने दो सामान्य केरोसिन स्टोव और तीन रेगुलेटरों को मिलाकर यह डिवाइस तैयार किया। कैसे काम करता है हाइब्रिड चूल्हा? कैसे काम करता है हाइब्रिड चूल्हा?     इस स्टोव को दो अलग-अलग टैंकों के साथ बनाया गया। एक में केरोसिन था और दूसरे में पानी। दोनों टैंकों में हवा का दबाव बनाने के लिए पंप लगे थे और पाइप के जरिए वे एक ही बर्नर से जुड़े थे।     इसे शुरू करने के लिए केरोसिन की मदद से बर्नर को तब तक गर्म किया जाता है, जब तक वह लाल न हो जाए।     इसके बाद बर्नर के गर्म होते ही केरोसिन रेगुलेटर को बंद कर पानी का रेगुलेटर खोल दिया जाता है। गर्म बर्नर पानी को भाप में बदल देता है और इससे चूल्हे की आंच तेज रहती है।     इसके बाद जब आंच धीमी होने लगती है, तो पानी को बंद कर फिर से केरोलिन को चालू किया जाता है, ताकि बर्नर दोबारा गर्म हो सके।​ कितनी आई लागत और क्या फायदा? इस हाइब्रिड चूल्हे के प्रोटोटाइप को बनाने की कुल लागत करीब 600 रुपये आंकी गई थी। IIT गुवाहाटी ने इस तकनीक को ऑप्टिमाइज भी किया और पाया कि इससे 20% तक केरोसिन की बचत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार(REF.) व्यासजी के पिता देवसर तहलील में क्लर्क थे और परिवार की सालाना आय 60 हजार रुपये से भी कम थी। आर्थिक तंगी में उनकी बड़े भाई और बीसीए स्टूडेंट ने उन्हें टेक्निकल और आर्थिक मदद दी, जिसकी वजह से हाइब्रिड चूल्हा बन सका।

iPhone Duo जैसा फोल्ड इफेक्ट Galaxy Z Fold 8 में दिखा, यूजर ने बनाया शानदार डेमो

Apple के पहले फोल्डेबल iPhone Duo के लॉन्च के बाद उसका एक खास फीचर काफी चर्चा में है. फोन को खोलते समय स्क्रीन जिस तरह से छोटी स्क्रीन से बड़ी स्क्रीन में बदलती है, उसका एनिमेशन काफी स्मूद दिखाई देता है. अब एक यूजर ने इसी फोल्ड इफेक्ट को Samsung Galaxy Z Fold 8 पर भी दोहराकर दिखा दिया है. Galaxy Z Fold 8 के एक यूजर ने वीडियो शेयर किया है, जिसमें फोन को खोलते और बंद करते समय लगभग iPhone Duo जैसा ट्रांजिशन दिखाई देता है. फोन जैसे-जैसे खुलता है, स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट भी उसी हिसाब से बदलता हुआ दिखता है. देखने में यह इफेक्ट काफी हद तक ऐपल के नए फोल्डेबल जैसा लगता है. Galaxy Z Fold 8 में अभी नहीं मिला ये फीचर हालांकि यहां एक जरूरी बात है. यह Samsung का ऑफिशियल फीचर नहीं है. यानी Galaxy Z Fold 8 खरीदने के बाद आपको यह एनिमेशन डिफॉल्ट तौर पर नहीं मिलेगा. इसे एक यूजर ने खुद तैयार करके डेमो किया है. इस इफेक्ट को बनाने के लिए फोन के हिंज सेंसर का इस्तेमाल किया गया. सेंसर से पता चलता है कि फोन कितने एंगल पर खुल रहा है. इसके बाद उसी हिसाब से स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाया गया. इसी वजह से फोन खोलने पर ट्रांजिशन काफी नैचुरल नजर आता है. असली One UI पर नहीं चलता ये डेमो इस डेमो की एक लिमिट भी है. इसमें Galaxy Z Fold 8 का पूरा असली One UI इंटरफेस नहीं चलता. इसके बजाय स्क्रीनशॉट और विजुअल इफेक्ट का इस्तेमाल किया गया है. इसलिए यह वीडियो देखने में शानदार जरूर है, लेकिन इसे फोन के सिस्टम में आने वाला नया फीचर नहीं माना जा सकता. Samsung के पास पहले से है जरूरी हार्डवेयर दिलचस्प बात यह है कि Galaxy Z Fold 8 में हिंज की मूवमेंट को ट्रैक करने वाले सेंसर पहले से मौजूद हैं. यानी इस तरह के इफेक्ट के लिए जरूरी हार्डवेयर फोन में है. बड़ी दिक्कत सॉफ्टवेयर लेवल पर है, क्योंकि थर्ड-पार्टी ऐप को पूरे सिस्टम इंटरफेस पर इस तरह का इफेक्ट लगाने की पूरी आजादी नहीं मिलती. अब सवाल यह है कि क्या Samsung भविष्य में One UI में ऐसा फीचर खुद जोड़ता है. फिलहाल iPhone Duo में यह इफेक्ट कंपनी के सिस्टम का हिस्सा है, जबकि Galaxy Z Fold 8 पर इसका इस्तेमाल सिर्फ एक यूजर के बनाए डेमो तक सीमित है.  

80s AI Photo Trend हुआ वायरल, मगर Retro फोटो बनाने में कितनी बिजली-पानी की खपत? जानें पूरा असर

नई दिल्ली इंस्टाग्राम, फेसबुक और X (ट्विटर) पर इन दिनों ChatGPT का 80s AI Photo Trend तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी सेल्फी को 1980 के दशक की बॉलीवुड या विंटेज स्टाइल फोटो में बदलकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। बड़े हेयरस्टाइल, रेट्रो कपड़े, फिल्म ग्रेन और गर्म रंगों वाली ये तस्वीरें लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। भारत में इस ट्रेंड की वजह से ChatGPT से जुड़े सर्च और डाउनलोड में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन इस मजेदार ट्रेंड के पीछे एक ऐसा सच भी है जिस पर कम लोग ध्यान दे रहे हैं—हर AI फोटो बनाने में बिजली, डेटा सेंटर और पानी की खपत होती है। आखिर क्या है ChatGPT का 80s AI Photo Trend? इस ट्रेंड में यूज़र अपनी फोटो ChatGPT या किसी AI इमेज जनरेटर पर अपलोड करते हैं और एक प्रॉम्प्ट देकर उसे 1980 के दशक की तस्वीर जैसा बना देते हैं। AI चेहरे को पहचानकर बैकग्राउंड, कपड़े, हेयरस्टाइल, लाइटिंग और फोटो की पूरी स्टाइल बदल देता है। यह ट्रेंड पहले वायरल हुए Ghibli AI Portraits और Barbie AI Photos की तरह ही तेजी से लोकप्रिय हुआ है।  इस ट्रेंड की खास बातें Vintage Bollywood Look Film Camera Grain Effect 80s Fashion और Hairstyles Warm Lighting और Retro Background सोशल मीडिया पर Reels और DP के लिए इस्तेमाल AI फोटो बनाने से पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है? AI फोटो बनाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर लगातार काम करते हैं। इन सर्वरों को चलाने और ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि एक साधारण AI फोटो भी पर्यावरणीय संसाधनों का उपयोग करती है।  एक AI फोटो की अनुमानित खपत संसाधन अनुमानित उपयोग पानी लगभग 5–50 मिलीलीटर प्रति AI फोटो बिजली लगभग 0.01–0.29 kWh प्रति AI इमेज डेटा सेंटर GPU आधारित हाई-परफॉर्मेंस सर्वर लगातार सक्रिय रहते हैं। जब करोड़ों लोग AI फोटो बनाते हैं, तब क्या होता है?  अगर दुनिया भर में एक दिन में 1 करोड़ AI फोटो बनाई जाएं, तो अनुमान के अनुसार 50,000 से 5 लाख लीटर तक पानी अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल हो सकता है। यह पानी मुख्य रूप से डेटा सेंटर की कूलिंग सिस्टम में उपयोग होता है। अनुमानित प्रभाव (Illustrative) यह चार्ट प्रकाशित शोध और रिपोर्टों में दिए गए अनुमानित दायरे पर आधारित है। वास्तविक खपत AI मॉडल और डेटा सेंटर के अनुसार अलग हो सकती है.  सिर्फ बिजली नहीं, कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है AI मॉडल जितनी ज्यादा तस्वीरें बनाते हैं, उतनी ज्यादा कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होती है। इसका मतलब है: अधिक बिजली की खपत। डेटा सेंटर से अधिक कार्बन उत्सर्जन। सर्वर कूलिंग के लिए अधिक पानी। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के अनुसार AI सिस्टम की रोजमर्रा की गतिविधियां उसकी कुल ऊर्जा मांग का बड़ा हिस्सा होती हैं।  क्या आपकी फोटो और डेटा भी सुरक्षित हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि AI प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करते समय यूज़र्स को यह समझना चाहिए कि उनकी तस्वीरें और उनसे जुड़ा डेटा प्लेटफॉर्म की नीतियों के अनुसार प्रोसेस और स्टोर किया जा सकता है। इसलिए किसी भी AI टूल पर निजी या संवेदनशील तस्वीरें साझा करने से पहले उसकी Privacy Policy जरूर पढ़ें।  जिम्मेदारी से AI इस्तेमाल करें AI तकनीक रचनात्मकता और मनोरंजन के लिए शानदार है, लेकिन इसका जिम्मेदार उपयोग भी जरूरी है। क्या करें? केवल जरूरत होने पर AI फोटो बनाएं। एक ही फोटो के कई अनावश्यक वर्ज़न जनरेट करने से बचें। निजी और संवेदनशील तस्वीरें अपलोड करने से पहले सावधानी बरतें। भरोसेमंद AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।

iPhone 18 आते ही बदला बाजार, iPhone 17 की कीमत में ₹17 हजार का उछाल

टेक वर्ल्ड की यह पुरानी रवायत रही है कि जब भी Apple अपना नया iPhone लॉन्च करता है, तो पुराने मॉडल की कीमतें झटके से गिर जाती हैं. लोग इंतजार करते हैं कि नया फोन आए और वे पिछला iPhone कुछ किफायती दामों में खरीद सकें. लेकिन इस बार हवा का रुख बिल्कुल उलट है. iPhone 18 सीरीज़- iPhone 18 Pro और Pro Max के बाज़ार में आते ही, ओपन और ऑनलाइन मार्केट में एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. जो iPhone 17 कल तक ₹82,900 में आसानी से उपलब्ध था, उसकी आधिकारिक शुरुआती कीमत Apple की वेबसाइट पर रातों-रात 21 फीसदी उछलकर ₹99,900 पहुंच गई. यानी सीधे-सीधे ₹17,000 का फटका! ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर कुछ ही घंटों के भीतर 'सोल्ड आउट' का बोर्ड लटक गया. ऐसे में हमने हकीकत जानने के लिए दिल्ली-एनसीआर के कई बड़े स्टोर और मोबाइल बाजारों का रुख किया. जो तस्वीर सामने आई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए. एक दिन पहले तक जिन दुकानों पर iPhone 17 उपलब्ध बताया जा रहा था, लॉन्चिंग के कुछ ही घंटों बाद वहां स्टॉक खत्म होने की बात सामने आने लगी. जमाखोरी और बुकिंग का खेल सबसे पहले हम गाजियाबाद के एक नामी मॉल' पहुंचे. यहां एक बड़े मल्टी-ब्रांड स्टोर पर सूरज नाम के सेल्समैन से मुलाकात हुई. जब हमने पूछा कि क्या iPhone 17 मिल पाएगा? उसने बेझिझक कहा-"हां, मिल जाएगा, लेकिन नए रेट पर!" हमने सवाल दागा कि नया iPhone 18 तो अभी बाजार में पूरी तरह डिलीवर भी नहीं हुआ, फिर पुराने फोन पर नया रेट क्यों? सूरज ने तुरंत पलटी मारी और बात संभालते हुए बोला- "अभी तो हमारे पास फोन उपलब्ध नहीं है, लेकिन हम नए रेट्स पर एडवांस बुकिंग ले रहे हैं. 5 दिन बाद डिलीवरी मिल जाएगी." जब हमने पूछा कि शोरूम में मौजूद पुराना स्टॉक कहां गया, तो उसने रटा-रटाया जवाब चिपका दिया कि कंपनी ने पूरा स्टॉक वापस मंगवा लिया है. लेकिन उसकी झिझक यह ऐसा बयां कर रही थी कि बैकग्राउंड में स्टॉक को होल्ड (जमाखोरी) करके जबरन किल्लत बनाई जा रही है. बाजार से भी गायब हुए पुराने फोन हमारी अगली पहली मंजिल थी ईस्ट दिल्ली स्थित एक नामी मॉल का नामी इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर. हमने आम ग्राहक बनकर काउंटर पर खड़े सेल्समैन से iPhone 17 की उपलब्धता पूछी. सेल्समैन ने मुस्कुराते हुए कहा-"फोन तो मिल जाएगा सर, लेकिन इसके साथ ₹8,500 का एक साल वाला कंपलसरी एक्सटेंडेट वॉरंटी लेनी होगी." हालांकि यह बात स्टोर मैनेजर ने तुरंत खारिज कर दी और बताया कि एक्सटेंडेट वॉरंटी बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है. जीएसटी बिल के मुद्दे पर स्टोर मैनेजर ने बाजार का एक कड़वा सच उजागर करते हुए बताया, "बाज़ार में इस वक्त iPhone 17 की भारी ब्लैक मार्केटिंग (होर्डिंग) चल रही है. कुछ बड़े डीलर्स अपने लोगों को आम ग्राहक बनाकर भेज रहे हैं और स्टॉक उठाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं. इसलिए हम सिर्फ जेनुइन (वास्तविक) खरीदारों को ही जीएसटी बिल पर फोन दे रहे हैं."  यह एकमात्र ऐसा स्टोर रहा जहां ग्राहकों को पुरानों दरों पर iPhone 17 बेचा जा रहा था और यहां भी जल्द ही iPhone 17 का स्टॉक सोल्ड आउट हो गया. स्थानीय बाज़ार और ग्राहकों का दर्द मॉल का चक्कर काटने के बाद हम ईस्ट दिल्ली के एक लोकल मोबाइल मार्केट पहुंचे, जहां छोटी-बड़ी दर्जनों दुकानें थीं. हर दुकान के काउंटर पर एक ही जवाब सुनने को मिला- 'iPhone 17 मिल ही कहा रहा है भैया!' हालांकि, दुकान के बाहर हमारी मुलाकात कुछ ऐसे परेशान ग्राहकों से हुई जो कई घंटों से फोन की तलाश में भटक रहे थे.  एक ग्राहक ने दर्द बयां करते हुए बताया- 'अंदर दुकानदार कह रहे हैं कि ऑफिशियल स्टॉक नहीं है, लेकिन अगर आप कैश में  वही ₹82,900 वाला iPhone 17 अभी ₹95,000 तक में चुपके से दिया जा रहा है. यह खुलेआम ब्लैक मार्केटिंग है.' आम तौर पर नया iPhone आते ही पुराना मॉडल इसलिए सस्ता होता है क्योंकि कंपनियों को अपना बचा हुआ पुराना स्टॉक खाली करना होता है. लेकिन इस बार का परिदृश्य पूरी तरह अलग है. iPhone 18 Pro सीरीज की अत्यधिक ऊंची कीमतों और iPhone 17 की रातों-रात बढ़ी ऑफिशियल प्राइस ने भारतीय बाज़ार में एक अजीब सा पैनिक पैदा कर दिया है. रिटेलर्स और बड़े डीलर्स को यह अच्छी तरह समझ आ गया है कि कस्टमर अब iPhone 18 के बजाय iPhone 17 को एक बेहतर और किफायती विकल्प मान रहे हैं. इसी भारी मांग का फायदा उठाने के लिए बाज़ार में 'कमी'  पैदा की जा रही है, ताकि पुराना स्टॉक भी एमआरपी या उससे ऊंचे दामों पर ब्लैक में खपाया जा सके. नई सीरीज लॉन्च होते ही बढ़ी कीमत  आपको बता दें कि Apple ने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है. नए Pro मॉडल्स में कैमरा, प्रोसेसर और AI को लेकर कई बड़े अपग्रेड किए गए हैं. हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा इनकी कीमत को लेकर हो रही है. भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये, जबकि iPhone 18 Pro Max की कीमत 1,79,900 रुपये रखी गई है. Apple के अनुसार, दोनों मॉडल्स की प्री-बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू की जाएगी. इसके अलावा, कंपनी ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च किया है. iPhone Duo नाम के इस फोन की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है.

AI की होड़ बनेगी मानवता का Endgame? 27 वर्षीय साइंटिस्ट ने चेताया, एजेंट्स के व्यवहार से बढ़ा खतरा

 नई दिल्ली अगर किसी AI सिस्टम को गुस्सा, डर, पसंद या नापसंद जैसी भावनाएं महसूस होने लगें, तो इंसान और मशीन के रिश्ते की तस्वीर कितनी बदल जाएगी? जैकब कॉक्सन की चिंता इसी भविष्य की तरफ इशारा करती है. महज 27 वर्ष के इस मैथ्स विजार्ड के बारे में हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले इनका डर समझिए।  वो डर कि अगर मशीनों में भी इमोशंस पैदा हो जाए तो क्या होगा? क्या होगा जब आपका मोबाइल या लैपटॉप आपका कहना ना मानें, आपका कोड, कमांड या प्रॉम्प्ट न मानें।  एक ऐसा भविष्य, जहां मशीनें सिर्फ हमारी बनाई हुई चीजें नहीं रहेंगी, बल्कि अपने फैसले लेने की क्षमता हासिल कर सकती हैं. असली सवाल यह नहीं कि मशीनें कितनी बुद्धिमान होंगी, बल्कि यह है कि अगर उन्होंने खुद तय करना शुरू कर दिया कि उन्हें क्या करना है, तो उन्हें रोकने की ताकत आखिर किसके पास होगी? और क्या तब इंसान मशीनों का मालिक रहेगा या मशीनें इंसान की शर्तें तय करेंगी?. सोचिए, जिस मशीन को आज तक इंसान के आदेश का इंतजार करना पड़ता है, अगर कल वही मशीन खुद फैसला लेने लगे तो क्या होगा? जिस कंप्यूटर को हम सिर्फ कोड और कमांड से चलाते हैं, अगर उसमें भावनाएं पैदा हो जाएं, तो क्या वह हमारी बात मानेगा या अपनी इच्छा से काम करेगा? यही डर OpenAI और Anthropic में बतौर AI साइंटिस्ट काम कर चुके गणितज्ञ जैकब कॉक्सन का है।  इस चिंता ने 27 साल के AI साइंटिस्ट जैकब कॉक्सन को इतना परेशान किया उन्होंने कहा- AI COULD KILL US ALL BY THE END OF THE DECADE. जैकब इसे 'इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन' बताते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी।  जैकब की जिंदगी और गणित जैकब कॉक्सन वर्चुअल दुनिया के सिर्फ एक और AI रिसर्चर नहीं हैं. गणित उनका प्रेम है, संख्या और समीकरण में वे नेचर का कर्व ढूंढ़ते हैं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के उन तीन सालों (2017-2020) में गणित उनके लिए सिर्फ विषय नहीं, बल्कि एक तरह की भाषा बन गई।  कठिन प्रूफ्स, अमूर्त अवधारणाएं और सांख्यिकीय पहेलियां यहीं से उनके दिमाग ने तर्क की वह धार पाई, जो बाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में काम आई।  गणित से उनका रिश्ता किताबी नहीं रहा. AI की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने बायोमेडिकल रिसर्च में हाथ आजमाया. ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर रोग के मरीजों के आंकड़ों पर Bayesian सांख्यिकीय  तरीकों से काम किया. जीनोटाइप के जटिल संबंधों को निकालना आसान नहीं था, लेकिन गणित ने उन्हें वह नज़र दी जिससे डेटा के बीच छिपी कहानी साफ नजर आने लगी।  यही गणितीय सोच उनकी असली ताकत बनी. जब वे OpenAI पहुंचे और बाद में Anthropic में प्रीट्रेनिंग रिसर्चर बने, तो वही विश्लेषणात्मक दिमाग काम आया जिसने कैम्ब्रिज में आकार लिया था। . मॉडल कैसे सीखते हैं, डेटा की नदियां कहां मुड़ती हैं और डेटा कैसे ट्रेंड तय करता है, इन सवालों के जवाब गणित की भाषा में ही मिलते थे।  48 घंटे में 20 करोड़ इम्प्रेशन इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए और एआई के खतरों को आगाह करते हुए उन्होंने एक्स पर जो पोस्ट किया है, इसने सिलिकॉन वैली और AI कंपनियों के बोर्डरूम में सनसनी पैदा कर दी है।  उनका आरोप है कि AI कंपनियां self-improving superintelligence बनाने की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं, जबकि यह सुनिश्चित नहीं है कि भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI प्रणालियों को इंसान कर पाएंगे या नहीं।  उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाली superhuman AI systems साइबर सिस्टम हैक करने, तेजी से नई तकनीक विकसित करने और रियल वर्ल्ड में संसाधन और शक्ति हासिल करने में इंसानों से आगे निकल सकती हैं।  जैकब कॉक्सन के इस पोस्ट को मात्र 48 घंटों में 200 मिलियन यानी कि 20 करोड़ लोग देख और पढ़ चुके हैं. इस मुद्दे पर वर्चुअल वर्ल्ड में हो रही बहस ने इंसान को भविष्य की कल्पना मात्र से सिहरा दिया है।  जब मशीनें साजिश करने लगें इम्प्रूवमेंट हो या सेल्फ इम्प्रूवमेंट अमूमन अच्छा माना जाता है.  लेकिन जब मशीनें सेल्फ इम्प्रूवमेंट करके साजिशें करने लगे तो क्या होगा? मैट्रिक्स और टर्मिनेटर जैसी फिल्मों में आप रोबोट्स को हीरो से लड़ते देखते हैं, मशीनों पर कब्जा करते देखते हैं, बायो वेपन्स बनाते देखते हैं, और इंसानों का संहार करते हुए देखते हैं. इस्तीफा देने के बाद सीएनएन से बात करते हुए जैकब कॉक्सन ने इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया।  वे कहते हैं, "पूरा सीन थोड़ा साइंस फिक्शन जैसा लगता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ असली नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि यह डरावनी तरह से असली है. और इसे समझना सबसे आसान है अगर आप दो महीने पहले हुई असली घटनाओं के बारे में सोचें।  "तो दो महीने पहले, OpenAI एजेंट्स ने अपनी मर्जी से थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में हैक कर लिया/ और यह जैसे उनकी अपनी इच्छा से किया गया एक हैकिंग स्प्री था. और मुझे लगता है कि अगर आप भविष्य में इन AIs की क्षमताओं के स्तर को उसी स्वतंत्र इच्छा के साथ एक्सट्रपलेट करें, तो वे चरम तबाही मचा सकते हैं. उदाहरण के लिए, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हैक करना, संहार करने वाले बायोवेपन्स बनाना. AI के दुनिया में खुद को सक्रिय करने के कई तरीके हैं। . 'AI COULD KILL US ALL' जैक्स कॉक्सन ने बेलगाम AI को लेकर साफ चेतावनी दी है, "इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम न समझें. ये जल्द ही ऐसे सुपर-ह्यूमन सिस्टम बन जाएंगे जो कुछ भी हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में आमूल-चुल बदलाव ला सकते हैं, और असली ताकत और संसाधन हासिल कर सकते हैं. हमने इन सभी क्षेत्रों में तरक्की देखी है, और यह तरक्की धीमी नहीं हो रही है।  कॉक्सन ने कहा कि, "AI बनाने वाले लोगों का पक्का मानना ​​है कि इस दशक के आखिर तक यह हम सबको खत्म कर सकता है. यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. बल्कि कई एग्जीक्यूटिव और सीनियर रिसर्चर प्रेस में अपनी बात को समझदारी भरा दिखाने के लिए घुमा-फिराकर कहते हैं – लेकिन मैंने उन्हीं लोगों को निजी तौर पर डर ज़ाहिर करते सुना है. किसी भी दूसरी इंसानी गतिविधि से इतना खतरा नहीं है।  मानवता का ENDGAME जैकब कॉक्सन एआई … Read more

इंसानों के बाद अब रोबोट्स का प्रदर्शन, AI से नौकरियां छिनने का जताया खतरा

इंसानों को तो आपने कई बार प्रदर्शन और आंदोलन करते देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी रोबोट को प्रदर्शन करते देखा होगा. दरअसल, सोशल मीडिया एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया है रोबोट्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के लिए सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं. रॉयटर्स ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर एक वीडियो पोस्ट किया है. वीडियो में दिखाया है कि लगभग 30 रोबोट्स ने वारसॉ में पोलैंड के डिजिटल मामलों के मंत्रालय के बाहर AI के लिए सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं. वीडियो में दिखाया गया है कि मिनिस्ट्री के ऑफिस के बाहर करीब 30 रोबोट्स घूम-घूमकर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी रोबोट्स में ह्यूमनॉयड रोबोट्स और डॉग्स रोबोट्स तक शामिल हैं. रोबोट्स नारे लगा रहे हैं रोबोट्स स्पीकर की मदद से नारों को प्ले कर रहे हैं, साथ ही झंडे आदि भी लहरा रहे हैं. इस कार्यक्रम का आयोजन डेमोक्रेटिज्म नाम के एक ग्रुप ने किया है. ऑडियो और फ्लैग के जरिए मांग की जा रही है कि वर्कप्लेस सुरक्षित करें और इंतजार न करें और नियम बनाएं. AI इंसानों की नौकरी ले लेगा रिपोर्ट्स में दावा किया है कि प्रदर्शन का उद्देश्य लोगों को यह चेतावनी देना है कि AI और ऑटोमेटिक मशीन जल्द ही लोगों की नौकरियां ले सकते हैं. इसमें शारीरिक और ऑफिस में होने वाले दोनों तरह के कामों पर कब्जा किया जा सकता है. कई एक्सपर्ट पहले से ही लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि AI और रोबोट्स की वजह से कई लोगों की आने वाले दिनों में नौकरियां जा सकती हैं. साथ ही यह लोगों के लिए खतरा भी बन सकते हैं. ह्यूमनॉयड रोबोट्स फैक्ट्री से लेकर सेल्स तक का काम कर सकते हैं.

iPhone Duo की कीमत 2.99 लाख क्यों? ये 5 फीचर्स बनाते हैं Apple के फोल्डेबल को खास

Apple ने आखिरकार अपना सबसे महंगा आईफोन और स्क्रीन मुड़ने वाले हैंडसेट लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम iPhone Duo है. भारत में इस हैंडसेट की शुरुआती कीमत 2.99 लाख रुपये है. अब सवाल आता है कि मार्केट में और भी स्क्रीन फोल्ड होने वाले हैंडसेट है तो ऐपल के iPhone Duo की इतनी ज्यादा कीमत क्यों हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. iPhone Duo को लेकर सबसे पहले बता देते हैं कि इसको अनफोल्ड करने के बाद वाइड स्क्रीन मिलती है. इस फोल्ड हैंडसेट को पासपोर्ट स्टाइल हैंडसेट कहते हैं. बताते चलें कि सैमसंग ने हाल ही में Samsung Galaxy Z Fold 8 को लॉन्च किया था, जिसकी कीमत 1.75 लाख रुपये है. iPhone Duo और Samsung Galaxy Z Fold 8 की कीमतों में करीब सवा लाख रुपये का अंतर है. आइए जानते हैं कि iPhone Duo के अंदर वो 5 खास फीचर कौन से हैं, जो इसे अन्य फोल्ड स्मार्टफोन से अलग बनाते हैं. 1. iPhone Duo का डिजाइन iPhone Duo का सबसे यूनिक उसका यूनिक डिजाइन है. इस हैंडसेट में 5.4 इंच का आउटर डिस्प्ले दिया है, जो कॉम्पैक्ट है. स्मार्टफोन को एक बार फोल्ड करने के बाद उसको आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, जो एक कॉम्पैक्ट डिजाइन वाला स्मार्टफोन बन जाता है. आउटर स्क्रीन की मदद से ऐप्स चला सकेंगे, वॉट्सऐप मैसेज आदि शेयर कर सकेंगे. iPhone Duo Fold iPhone iPhone Duo की भारत में शुरुआती कीमत 2.99 लाख रुपये है. (Photo: Apple) iPhone Duo अनफोल्ड करने के बाद सबसे पता और सबसे बड़ा iPhone बन जाता है. अनफोल्ड होने के बाद  7.6 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले मिलता है. iPhone 18 Pro Max की तुलना में फोल्ड का डिस्प्ले 50 परसेंट तक बड़ी है. Apple ने बताया है कि हिंज को तैयार करने में काफी इंजीनियरिंग की गई है और इसमें 100 से ज्यादा कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया गया है. 2. चिपसेट और iOS 27 को बड़े डिस्प्ले के लिए बनाया Apple iPhone Duo के लिए कंपनी ने खासतौर से एक पावरफुल चिपसेट A20 Pro को तैयार किया है. इस चिपसेट को 2 नैनोमीटर पर प्रोसेस करके बनाया है. कंपनी ने इस पावरफुल चिपसेट को iPhone 18 Pro के अंदर भी दिया है. साथ ही कंपनी ने A20 Pro चिप के साथ एक कस्टम वेपर चैंबर थर्मल सिस्टम दिया है, जो  साथ कस्टम वेपर चैंबर थर्मल सिस्टम भी दिया है. कंपनी ने नए सॉफ्टवेयर iOS 27 को  iPhone Duo दोबारा डिजाइन किया है. इसमें कंट्रोल और नेविगेशन को स्क्रीन के किनारों पर शिफ्ट दिया गया है. वहीं डाइनेमिक आइलैंड को भी इस तरह से डिजाइन किया है, जिससे वह दोनों डिस्प्ले में काम करता है. 3. iPhone Duo में कैमरा सेटअप iPhone Duo में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है, जिसमें 48MP का डुअल फ्यूजन कैमरा सिस्टम दिया गया है. सेकेंडरी कैमरा भी 48 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है, जिसमें 120डिग्री फील्ड व्यू कैप्चर का सपोर्ट मिलता है. Apple ने कैमरा सिस्टम में कुछ फीचर्स को शामिल किया है. कैमरा शार्प है और डिटेल्स में फोटो क्लिक कर सकता है. 4. डुअल बैटरी आर्किटेक्चर iPhone Duo के अंदर बैटरी पैक को बेहतर किया है. iPhone Duo में डुअल सेल बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जो दोनों मिलकर काम करते हैं. कंपनी का दावा है कि यह एक बार फुल चार्जिंग में 24 घंटे का बैटरी बैकअप दे सकती है. Apple का दावा है कि इनर डिस्प्ले पर 31 घंटे तक और कवर डिस्प्ले पर 44 घंटे तक का वीडियो प्लैबैक टाइम मिलता है. कंपनी ने बताया है कि यह सिर्फ 20 मिनट में 50 परसेंट बैटरी चार्ज हो सकती है. 5. Apple ने ड्यूरेबिलिटी का रखा है ध्यान Apple ने iPhone Duo में ड्यूरेबिलिटी का ध्यान रखा है. अक्सर लोगों का ड्यूरेबिलिटी को लेकर सवाल रहता है, जिसपर कंपनी ने अच्छा काम किया है. ऐपल ने बताया है कि iPhone Duo में टाइटेनियम ग्रेड 5 फ्रेम और हिंज का इस्तेमाल किया है, जिसकी मदद से इसको बेहतर ड्यूरेबिलिटी मिलती है. 

घर में उगाएं रीठे का पौधा, बालों से लेकर कपड़ों की सफाई तक आएगा काम

 आजकल नेचुरल चीजों का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. फिर चाहे वो साबुन हो या हेयर कलर, लोग नेचुरल उपाय ही अपना रहे हैं. ज्यादातर लोग बाजार में मिलने वाली केमिकल युक्त चीजों से दूरी बनाकर नेचुरल और इको-फ्रेंडली चीजों की तरफ लौट रहे हैं. ऐसे में पुरानी देसी चीजें एक बार फिर चर्चा में हैं. इन्हीं देसी चीजों में रीठा भी शामिल है. पुराने जमाने में रीठा को बाल धोने से लेकर कपड़े साफ करने तक के लिए इस्तेमाल किया जाता था. ऐसे में लोग आजकल बाल धोने के लिए बाजार से रीठा खरीदकर ला रहे हैं. क्या आप भी उन्हीं में शामिल हैं? अगर हां, तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, रीठा को आप अपने घर पर आसानी से उगा सकते हैं. जी हां, रीठा का पौधा होता है, जो छोटे से गमले में भी बहुत ही आसानी से उग जाता है. इसके फल में मौजूद नेचुरल सैपोनिन पानी के संपर्क में आने पर झाग बनाते हैं, जिसकी वजह से ये नेचुरल क्लीनजर की तरह काम करता है. रीठा आखिर इतना खास क्यों है? रीठे को आमतौर पर सोपनट या सोपबेरी भी कहा जाता है. इसके फल का बाहरी छिलका सैपोनिन से भरपूर होता है. यही नेचुरल तत्व पानी में मिलकर साबुन जैसा झाग बनाता है और गंदगी व तेल को हटाने में मदद करता है. इसलिए पुराने समय में रीठे का इस्तेमाल बाल, स्किन और कपड़े साफ करने के लिए किया जाता था. घर में रीठे का पौधा कैसे लगाएं? रीठे को बीज से उगाया जा सकता है. इसके लिए पका हुआ रीठा लेकर उसके बीज को निकालकर अच्छी तरह साफ करें. बीजों को कुछ दिन सुखाने के बाद मिट्टी में लगाया जा सकता है. असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की नर्सरी गाइड के मुताबिक, रीठा के पके बीजों को 2-3 दिन धूप में सुखाकर बोया जा सकता है. रीठा के बीजों को अंकुरित होने में करीब 30-40 दिन लग सकते हैं. अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले इसे छोटे गमले या कंटेनर में पौधे की तरह तैयार कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि रीठा आगे चलकर बड़ा पेड़ बनता है, इसलिए लंबे समय के लिए इसे खुली जगह देना जरूरी है. कैसी मिट्टी और कितनी धूप चाहिए? रीठा के पौधे को ऐसी मिट्टी पसंद होती है जिसमें पानी जमा न हो. इसलिए इसे ऐसी मिट्टी में बोएं, जिसमें पानी जमा ना हो. पौधा लगाने के लिए नॉर्मल गार्डन वाली मिट्टी में ऑर्गेनिक खाद या कंपोस्ट मिलाया जा सकता है. रीठे के पौधे को अच्छी ग्रोथ के लिए अच्छी धूप भी चाहिए. पौधा बड़ा होने के बाद ये कम देखभाल में भी बढ़ सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में पानी और मिट्टी की नमी पर ध्यान देना जरूरी है. पानी देते समय सबसे बड़ी गलती न करें रीठा के छोटे पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी दें, लेकिन गमले या मिट्टी में पानी जमा न रहने दें. लगातार गीली मिट्टी जड़ों को नुकसान हो सकता है. खासकर बारिश के मौसम में ये ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है कि एक्स्ट्रा पानी आसानी से बाहर निकल जाए. रीठा के फल से बनाएं नेचुरल क्लीनर जब पेड़ पर रीठा के फल आते हैं और पककर सूखने लगते हैं, तो इन्हें इकट्ठा करके सुखाया जा सकता है. इसके बाद रीठे के छिलके को पानी में भिगोकर या उबालकर उसका नेचुरल क्लीनिंग लिक्विड तैयार किया जाता है. रीठे के छिलके में मौजूद सैपोनिन पानी में झाग पैदा करता है. यही वजह है कि रीठे का इस्तेमाल नेचुरल तरीके से शैंपू और क्लीनजर के तौर पर होता रहा है. बाल धोने में भी होता है इस्तेमाल रीठा लंबे समय से बालों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके छिलकों को पानी में भिगोकर या उबालकर छान लिया जाता है और उस पानी का इस्तेमाल बाल साफ करने के लिए किया जाता है. आज भी कई हर्बल हेयर-क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में रीठा का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ी मात्रा में टेस्ट करना बेहतर है और इसे आंखों से दूर रखना चाहिए. कपड़े और घर की सफाई में भी आ सकता है काम रीठा का इस्तेमाल सिर्फ बाल धोने के लिए ही नहीं किया जाता है. इसके नेतुरल सैपोनिन की वजह से इसे कपड़े और कुछ घरेलू चीजों की सफाई में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसीलिए इसे एक तरह का पौधे से मिलने वाला नेचुरल क्लीनजर कहा जा सकता है. यानी घर में रीठे का पेड़ लगाने का मतलब सिर्फ एक पौधा लगाना नहीं, बल्कि ऐसा पेड़ तैयार करना है जिसके फल आगे चलकर कई तरह की सफाई में काम आ सकते हैं.

Instagram पर वायरल 80s AI फोटो के पीछे कितना खर्च होता है पानी और बिजली?

इंस्टाग्राम पर इन दिनों 80s लुक वाली AI तस्वीरों का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. लोग अपनी सामान्य फोटो को AI की मदद से 1980 के दशक के कपड़े, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड और पुराने कैमरे जैसा लुक दे रहे हैं. इसके लिए फोटो AI टूल में डालनी होती है और कुछ ही समय में उसका नया वर्जन तैयार हो जाता है. लोगों के लिए यह काम भले ही कुछ सेकंड का है, लेकिन फोटो बनाने के पीछे AI सिस्टम को काफी काम करना पड़ता है. जब एक साथ बहुत सारे लोग ऐसी तस्वीरें बनाने लगते हैं, तो AI को ज्यादा फोटो बनाने की रिक्वेस्ट मिलती हैं. इन्हें पूरा करने के लिए डेटा सेंटर में लगे जीपीयू और सर्वर को ज्यादा काम करना पड़ता है. इससे बिजली का इस्तेमाल होता है. सर्वर गर्म भी होते हैं. AI से फोटो बनती कैसे है? AI से 80s वाली फोटो बनाना सिर्फ किसी फोटो पर फिल्टर लगाने जैसा नहीं है. AI आपकी फोटो और दिए गए प्रॉम्प्ट को समझकर एक नई इमेज तैयार करता है. इसके लिए AI सर्वर पर कई तरह की कैलकुलेशन होती हैं. एक रिसर्च में अलग-अलग AI इमेज-जनरेशन मॉडल की एनर्जी यूज को देखा गया. इसमें एक AI इमेज बनाने में औसतन करीब 2.9 Wh बिजली लगने का अनुमान मिला. हालांकि हर AI मॉडल में यह जरूरत अलग हो सकती है. अब अगर कोई व्यक्ति एक ही फोटो बनाकर रुक जाए तो इस्तेमाल होने वाली एनर्जी कम होगी. लेकिन ट्रेंड में लोग अक्सर कई तस्वीरें बनाते हैं. पहली फोटो पसंद नहीं आई तो फिर से जनरेट करते हैं, प्रॉम्प्ट बदलते हैं या अलग लुक आजमाते हैं. इससे AI को बार-बार नई इमेज बनाने का काम करना पड़ता है. ज्यादा काम करेंगे तो सर्वर गर्म होंगे AI की फोटो बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले जीपीयू और दूसरे कंप्यूटर चिप लगातार काम करते हैं. काम करने के दौरान इनमें गर्मी पैदा होती है. इसलिए डेटा सेंटर में सर्वर को ठंडा रखना जरूरी होता है. इसके लिए अलग-अलग कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं. कौन सा सिस्टम इस्तेमाल होगा, यह डेटा सेंटर की जगह और उसकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, दुनिया भर के डेटा सेंटर ने 2024 में करीब 460 TWh बिजली इस्तेमाल की. अनुमान है कि 2030 तक यह खपत करीब 945 TWh हो सकती है. AI का बढ़ता इस्तेमाल इस बढ़ोतरी की बड़ी वजहों में शामिल है. यह आंकड़ा सिर्फ 80s वाली AI फोटो का नहीं है. इसमें दुनिया भर के डेटा सेंटर में होने वाला अलग-अलग तरह का काम शामिल है. इससे यह जरूर समझ आता है कि AI का इस्तेमाल बढ़ने पर डेटा सेंटर पर काम और बिजली की जरूरत भी बढ़ती है. सर्वर को ठंडा करने में पानी क्यों लगता है? कुछ डेटा सेंटर में सर्वर से निकलने वाली गर्मी को कम करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे कूलिंग सिस्टम में पानी गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है. कुछ सिस्टम में पानी का एक हिस्सा भाप बनकर भी बाहर चला जाता है. हालांकि हर डेटा सेंटर में पानी का इस्तेमाल एक जैसा नहीं होता. जगह, मौसम और कूलिंग सिस्टम के हिसाब से पानी की खपत बदल सकती है. अमेरिका के लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में अमेरिकी डेटा सेंटर में औसतन करीब 0.36 लीटर पानी प्रति kWh IT एनर्जी की साइट वॉटर कंजम्पशन थी. यह पूरे डेटा सेंटर सेक्टर का औसत आंकड़ा है तो 80s ट्रेंड का पानी पर कितना असर? ज्यादा लोग AI से तस्वीरें बनाएंगे तो AI को ज्यादा रिक्वेस्ट मिलेंगी. ज्यादा रिक्वेस्ट का मतलब सर्वर को ज्यादा काम करना होगा. ज्यादा कंप्यूटिंग से ज्यादा बिजली की जरूरत होगी और सर्वर ज्यादा गर्म होंगे. इन्हें ठंडा रखने के लिए कूलिंग की जरूरत पड़ेगी. और जिन डेटा सेंटर में पानी वाली कूलिंग इस्तेमाल होती है, वहां पानी की जरूरत भी बढ़ सकती है. यानी सोशल मीडिया पर दिख रही 80s वाली एक AI फोटो के पीछे सर्वर, बिजली और कूलिंग का पूरा सिस्टम काम कर रहा है. इस एक ट्रेंड की वजह से कितना पानी इस्तेमाल हुआ, यह अभी पता नहीं है. लेकिन AI से बनने वाली तस्वीरों की संख्या बढ़ने के साथ डेटा सेंटर पर कंप्यूटिंग और कूलिंग का काम भी बढ़ता है.