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घर पर बनाएं डायमंड फेशियल ग्लो मास्क, ओट्स और बादाम से पाएँ नेचुरल चमकदार स्किन

 हर कोई चाहता है कि उसकी स्किन साफ, सॉफ्ट और ग्लोइंग दिखे लेकिन कोई जरूरी नहीं कि इसके लिए हर बार पार्लर जाना जरूरी नहीं है. आपकी किचन में मौजूद कुछ चीजें भी ग्लोइंग स्किन पाने में आपकी मदद कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर नेचुरल चीजों से  डायमंड फेशियल ग्लो मास्क बनाना बताएंगे जो स्किन से जुड़ीं समस्याओं को कम कर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करेगा. इस फेस मास्क को घर पर बनाना और लगाना दोनों ही बेहद आसान है. तो आइए जानते हैं घर पर डायमंड फेशियल ग्लो मास्क कैसे बना सकते हैं और इसे लगाने का सही तरीका क्या है. डायमंड फेशियल ग्लो मास्क घर पर कैसे बनाएं ? डायमंड फेशियल ग्लो मास्क बनाने के लिए 1 चम्मच ओट्स, 1 चम्मच चिया सीड्स, 1 चम्मच चावल 4 बादाम एक आउल में निकाल लें. इसके बाद इसमें पर्याप्त मात्रा में दूध डालें और इन्हें रातभर के लिए भिगोकर रख दें. फिर अगली सुबह इन सभी चीजों को अच्छे से पीसकर एक स्मूद पेस्ट बना लें. इस फेस पैक का इस्तेमाल कैसे करें? तैयार किए गए पेस्ट को चेहरे पर लगाने से पहले अच्छी तरह से साफ कर लें. फिर चेहरा सुखने के बाद इस पेस्ट को स्किन पर समान रूप से लगाएं. इसे 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें, ताकि यह स्किन में अच्छे से एब्जॉर्ब हो जाए. जब यह थोड़ा सूख जाए तो हल्के हाथों से मसाज करते हुए इसे हटाएं और फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. इस फेस मास्क के क्या फायदे हैं? डायमंड फेशियल ग्लो मास्क स्किन के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद ओट्स, चिया सीड्स, चावल और बादाम स्किन को गहराई से साफ करने में मदद करते हैं और डेड स्किन को हटाते हैं, जिससे चेहरा साफ और स्मूद नजर आता है. दूध चेहरे को नमी देता है और उसे सॉफ्ट बनाता है. इस फेस मास्क के रेगुलर इस्तेमाल से स्किन को पोषण मिलता है, दाग-धब्बे हल्के होते हैं और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है. साथ ही, यह स्किन को फ्रेश और हेल्दी दिखाने में भी मदद करता है, जिससे चेहरा ज्यादा दमकता हुआ नजर आता है.  

18 किलो वजन कम करने का आसान तरीका: मिंडी कलिंग की फिटनेस जर्नी ने सबको चौंकाया

हॉलीवुड एक्ट्रेस और राइटर मिंडी कलिंग अपने जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर चर्चा में हैं. 40 साल की मिंडी ने जिस तरह से करीब 18 किलो वजन कम किया है वो काफी आसान है और कोई भी उनके तरीके को फॉलो कर सकता है. अक्सर लोग सेलिब्रिटीज के वेट लॉस को किसी जादुई पिल्स या क्रैश डाइट से जोड़कर देखते हैं लेकिन मिंडी की कहानी पूरी तरह अलग है. उन्होंने बिना डाइटिंग के सिर्फ लाइफस्टाइल को बदलकर अपना वजन कम किया है. आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन सा तरीका है जिसने मिंडी को इतना फिट बना दिया है. डाइट नहीं, पोर्शन कंट्रोल डेली मेल के मुताबित, मिंडी कलिंग ने अपनी पसंद का खाना पूरी तरह से नहीं छोड़ा. उनका कहना है कि वह आज भी वह सब खाती हैं जो उन्हें पसंद है, बस उसकी मात्रा (Portion Size) कम कर दी है. मिंडी का कहना है, 'अगर मैं खुद पर पाबंदी लगाती हूं तो वह मेरे लिए काम नहीं करता इसलिए मैं सब खाती हूं लेकिन कम खाती हूं. मैंने प्रोसेस्ड फूड और शुगर को कम कर दिया है और हाइड्रेशन पर खास ध्यान देती हूं. मैं सुबह 7 बजे से पहले ही करीब 1.5 लीटर पानी पी लेती हूं जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है.' हफ्ते में 32 किलोमीटर वॉक मिंडी का सबसे बड़ा फिटनेस मंत्र मूवमेंट है. वह जिम में घंटों पसीना बहाने के बजाय एक्टिव रहने की कोशिश करती हैं. वह हर हफ्ते करीब 32 किलोमीटर पैदल चलने या हाइकिंग करने का टारगेट रखती हैं. मिंडी के मुताबित,वह छोटे-छोटे समय का भी इस्तेमाल करती हैं जैसे बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद 3-4 किलोमीटर वॉक करना या फोन पर बात करते हुए टहलना. इसके अलावा वह हफ्ते में 3 दिन सुबह जल्दी उठकर जॉगिंग और योग भी करती हैं. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और रिसर्च? हेल्थ एक्सपर्ट्स मिंडी के इस वेट लॉस तरीके को सबसे कारगर मानते हैं. मायो क्लिनिक के एक्सपर्ट के मुताबिक, वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट के मुकाबले धीरे-धीरे लाइफस्टाइल में बदलाव करना ज्यादा टिकाऊ होता है. रिसर्च बताती है कि पैदल चलना न केवल कैलोरी बर्न करता है बल्कि यह हार्ट हेल्थ और मेंटल क्लैरिटी के लिए भी बेहतरीन है. बोल्ट फॉर्मेसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना 30-60 मिनट की तेज वॉक कैलोरी डेफिसिट पैदा करने का सबसे सुरक्षित और साइंटिफिक तरीका है जो बिना किसी साइड इफेक्ट के वजन घटाने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिंडी की तरह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो का मेल बॉडी कंपोजिशन को सुधारने में मदद करता है.    

सितंबर 2026 से कुछ स्मार्टफोन्स में नहीं चलेगा WhatsApp, जानें कौन से होंगे प्रभावित

मुंबई  आजकल डिजिटल दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि पुराने फोन और सॉफ्टवेयर को बनाए रखना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. इसी बीच व्हाट्सएप ने एक बड़ा ऐलान किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल सितंबर से कंपनी पुराने एंड्रॉयड वर्जन वाले फोनों पर अपना सपोर्ट बंद करने वाली है. अभी व्हाट्सएप एंड्रॉयड 5.0 और उसके ऊपर वाले डिवाइस पर चलता है, लेकिन 8 सितंबर 2026 से सिर्फ एंड्रॉयड 6.0 या उससे नए वर्जन वाले स्मार्टफोन ही ऐप इस्तेमाल कर पाएंगे।  इसका मतलब है कि एंड्रॉयड 5.0 और 5.1 वाले फोन यूज़र्स को सितंबर के बाद मैसेजिंग, कॉल्स या कोई नई सुविधा नहीं मिलेगी. कंपनी ने नए फीचर्स को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया है, क्योंकि पुराने सिस्टम पर नई चीजों को चलाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में प्रभावित यूज़र्स को ऐप के अंदर ही अलर्ट दिखने शुरू हो गए हैं. व्हाट्सएप सलाह दे रहा है कि वो अपना चैट हिस्ट्री बैकअप जरूर कर लें. बैकअप गूगल ड्राइव या फोन की मेमोरी में सेव किया जा सकता है, ताकि नया फोन लेने पर पुरानी बातों को भी आसानी से रिस्टोर किया जा सके।  भारत समेत कई देशों में पड़ेगा असर यह बदलाव भारत, ब्राजील, साउथ-ईस्ट एशिया और अफ्रीका जैसे इलाकों में ज्यादा असर डालेगा, जहां अभी भी बहुत से लोग पुराने स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल करते हैं. इन फोन्स को अक्सर सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं मिलते, इस कारण नई जरूरतों को पूरा करना उनके लिए संभव नहीं हो पाता. जो लोग व्हाट्सएप जारी रखना चाहते हैं, उन्हें एड्रॉयड 6.0 या उससे ऊपर वाले एंड्रॉयड फोन को खरीदना जरूरी होगा. यह नियम व्हाट्सएप मैसेंजर और व्हाट्सएप बिजनेस दोनों पर लागू होगा।  हालांकि, अगर आप पुराने आईओएस वर्ज़न वाला आईफोन यूज़ करते हैं, तो आपके ऊपर व्हाट्सएप के इस बदलाव का कोई असर नहीं होगा. iOS 15.1 या उसके बाद वाले वर्ज़न और iPadOS 15.1 या नए वाले डिवाइस पर व्हाट्सएप बिना किसी रुकावट चलता रहेगा. इसी बीच एक और अच्छी ख़बर आई है कि व्हाट्सएप एंड्रॉयड यूजर्स के लिए नोटिफिकेशन बबल्स फीचर लाने की तैयारी कर रहा है. फेसबुक मैसेंजर पर यह सुविधा पहले से उपलब्ध है, जहां चैट एक छोटे फ्लोटिंग बबल के रूप में दिखती है।  इससे यूज़र्स को दूसरे ऐप्स में काम करते हुए भी मैसेज पढ़ने में और रिप्लाई करने में आसानी होती है. अब इस फीचर को व्हाट्सएप पर भी लाया जा रहा है. हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप का बबल फीचर अभी बीटा टेस्टिंग में नहीं आया है, लेकिन जल्द ही उपलब्ध होने की उम्मीद है. इससे एंड्रॉयड फोन पर मल्टीटास्टिंग और ज्यादा आसान हो जाएगी।   

दिल्ली में अब बिना PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा फ्यूल

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदुषण बड़ी समस्या बन चुकी है। सालों से इस समस्या पर काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है। दरअसल, अब सरकार ने इसे लेकर एक सख्त कदम उठाया है। दरअसल, गाड़ियों से जुड़ा एक नया सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली के अंदर फ्यूल पंप केवल उन्हीं गाड़ियों को फ्यूल देंगे, जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट होगा जरूरी होगा। जिन गाड़ियों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें न केवल पेट्रोल, डीजल या CNG देने से मना कर दिया जाएगा, बल्कि उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। अब किसी भी तरह के फ्यूल के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इस नए कदम को प्रदूषण-रोधी एक स्थायी पहल बना दिया गया है। इसका मतलब है कि ये जांचे पूरे साल चलती रहेंगी। अगर आपका PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है, तो इससे आपको देरी का सामना करना पड़ सकता है या फिर आपके इंश्योरेंस क्लेम को भी खारिज किया जा सकता है। कई इंश्योरेंस कंपनियां प्रदूषण उत्सर्जन के नियमों का पालन करने की उम्मीद करती हैं। इसके बिना क्लेम मिलने में देरी हो या फिर क्लेम को पूरी तरह से खारिज भी किया जा सकता है। परिवहन विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस जैसी एजेंसियां इन नियमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आपकी गाड़ी के पास वैलिड PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं है और आप उसे लेकर पास के पेट्रोल पंप पर जाते हैं, तो इसके नतीजे आम जुर्माने से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। 'सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989' के तहत, अधिकारी मौके पर ही चालान काट देंगे। यह काम या तो कोई ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कर सकता है या फिर किसी ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। जुर्माने की रकम 10,000 रुपए या उससे ज्यादा होने की उम्मीद है। ऐसे बनवाएं PUC सर्टिफिकेट PUC सर्टिफिकेट की मदद से ये पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना पॉल्युशन कर रही है। दिल्ली-NCR में आपके पास ये सर्टिफिकेट होना बहुत जरूरी है, क्योंकि पॉल्युशन को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस उन गाड़ियों पर कड़ी निगरानी रखती है जो पॉल्युशन फैलाती हैं। PUC सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाता है जब PUC सेंटर पर चेकिंग के दौरान गाड़ी तय सीमा के दायरे में पाई जाए। अगर आपकी गाड़ी प्रदूषण करती है, तो गाड़ी की रिपेयरिंग या ट्यूनिंग कराने के लिए कहा जाता है। ट्रांसपोर्ट विभाग ने दिल्‍ली के कई पेट्रोल पंप और वर्कशॉप पर पॉल्युशन चेकिंग सेंटर की लिस्ट जारी की है। लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें। PUC सर्टिफिकेट को लेकर कानून एक समय के बाद कार का PUC सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपके पास PUC सर्टिफिकेट नहीं है, या फिर एक्सपायर हो चुका है तो मोटर वीइकल्‍स एक्ट, 1988 की धारा 190(2) के तहत चालान काटा जाता है। इसमें 10,000 रुपए का जुर्माना या 6 महीने की जेल या फिर दोनों हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट विभाग अपनी तरफ से PUC सर्टिफिकेट ना होने पर गाड़ी के ओनर का लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड भी कर सकता है। यदि PUC सर्टिफिकेट होने के बाद भी गाड़ी पॉल्युशन ज्यादा कर रही है, तब 7 दिन के अंदर नया PUC सर्टिफिकेट लेना होगा।

भारत में टॉप 5 सुरक्षित 7-सीटर कारों की पूरी लिस्ट

  देश में पिछले कुछ सालों के दौरान 7-सीटर कार सेगमेंट में सबसे ज्यादा तरक्की देखने को मिली है। वहीं, इन कारों में अब सेफ्टी भी काफी बेहतर मिलने लगी है। इस सेगमेंट में सस्ते मॉडल से लेकर कई प्रीमियम मॉडल शामिल हैं। हाल के दिनों में ग्राहकों के बीच एक और ट्रेंड देखने को मिला है। दरअसल, 7-सीटर कारों की बिक्री बढ़ने की वजह यह है कि ये कारें बड़े भारतीय परिवारों के लिए काफी प्रैक्टिकल होती है। वहीं, अब ये अफॉर्डेबल कीमत पर मिल जाती हैं। हम यहां पर ऐसी ही 5 7-सीटर कारों के बारे में बता रहे हैं, जो सेफ्टी के हिसाब से काफी शानदार भी हैं। पसंदीदा मॉडल्स पर सीमित समय की शानदार डील 1. टाटा सफारी पिछले कुछ सालों में टाटा भारत की सबसे पॉपुलर और लीटिंग कार कंपनियों में से एक बन गई है। उनकी गाड़ियों की लाइनअप में कई गाड़ियां शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर SUV हैं। उनकी मौजूदा फ्लैगशिप गाड़ी सफारी है। यह एक 7-सीटर SUV है, जो अपने लुक्स और फीचर्स की वजह से ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय है। भारत NCAP क्रैश टेस्ट इसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.08 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 44.54 पॉइंट मिले। सफारी दो इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। इसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन, जो 170 PS की पावर और 280 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। वहीं, 2.0-लीटर टर्बो डीजल इंजन, जो 170 PS की पावर और 350 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। पेट्रोल और डीजल, दोनों ही वर्जन मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑप्शन के साथ उपलब्ध हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 13.29 लाख रुपए है। 2. टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस टोयोटा ने भी भारत की सबसे सुरक्षित 7-सीटर कारों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। कंपनी इनोवा हाईक्रॉस को पेट्रोल और 'स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड' दोनों ही वर्जन में पेश करती है। इनोवा और इनोवा क्रिस्टा के बाद, यह देश की सबसे पॉपुलर MPV में से एक है। उम्मीद है कि अगले साल इनोवा हाईक्रॉस, क्रिस्टा की जगह पूरी तरह से ले लेगी। इसके अलावा, टोयोटा फ्लीट मार्केट के लिए इनोवा हाईक्रॉस का एक और भी ज्यादा अफॉर्डेबल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वर्जन लाने की योजना भी बना रही है। इनोवा हाईक्रॉस की शुरुआती एक्स-शोरूम 18.70 लाख रुपए है। सेफ्टी के लिए इसे भी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.47 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 45 पॉइंट मिले। 3. मारुति सुजुकी इनविक्टो मारुति इनविक्टो असल में इनोवा हाईक्रॉस का ही एक रीबैज्ड वर्जन है। यह थोड़ी ज्यादा अफॉर्डेबल है क्योंकि मारुति इसमें हाईक्रॉस में मिलने वाले सभी फीचर्स नहीं देती है। इनविक्टो की एक्स-शोरूम कीमत 24.97 लाख रुपए से शरू होती है। हाईक्रॉस की तरह ही, इनविक्टो को भी भारत NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.43 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 45 पॉइंट मिले। 4. महिंद्रा स्कॉर्पियो N महिंद्रा अपनी मजबूत SUVs के लिए जानी जाती है और स्कॉर्पियो N भी इससे अलग नहीं है। यह एक लैडर-फ्रेम SUV है जो काफी हद तक ऑफ-रोडिंग कर सकती है और सड़क पर भी अच्छा परफॉर्म करती है। यह पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। सिर्फ कुछ चुनिंदा डीजल वैरिएंट में ही 4×4 मिलता है। महिंद्रा स्कॉर्पियो N के फेसलिफ्ट पर भी काम कर रही है और इसे टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है। स्कॉर्पियो N की शुरुआती कीमत 13.49 लाख रुपए से शुरू होती है। ये 7-सीटर SUV भी एक मजबूत गाड़ी है। इसे ग्लोबल NCAP में 5-स्टार रेटिंग मिली है। इसे एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 34 में से 29.25 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 28.93 पॉइंट मिले। 5 महिंद्रा XUV 7XO महिंद्रा की XUV 7XO भी देश की सबसे सुरक्षित 7-सीटर मानी जाती है। हालांकि, 7XO के लिए कोई ऑफिशियल क्रैश टेस्ट स्कोर उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अभी तक इसका टेस्ट नहीं किया गया है। यह असल में XUV700 का ही एक अपडेटेड वर्जन है, जिसका टेस्ट ग्लोबल NCAP ने पहले किया था। दोनों गाड़ियां मैकेनिकल और बनावट के हिसाब से एक जैसी हैं। इनमें मुख्य अंतर सिर्फ कॉस्मेटिक अपडेट और कुछ एक्स्ट्रा फीचर्स का है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 13.66 लाख रुपए से शुरू है। बता दें कि ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में महिंद्रा XUV700 को एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 17 में से 16.03 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 41.66 पॉइंट मिले।

शरीर के वजन के अनुसार दैनिक जल आवश्यकता कैसे निर्धारित करें

देश में गर्मी ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है और कई हिस्सों में तापमान मई शुरू होने से पहले ही 40-42 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. ऐसे में गर्मी का दौर शुरू होते ही सबसे पहली सलाह यही मिल रही है कि खूब पानी पियो. लेकिन खूब पानी का मतलब क्या है? वैसे हम सालों से सुनते आ रहे हैं कि दिन में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन मॉडर्न साइंस इस नियम से अलग बताता है. असल में पानी की जरूरत हर इंसान की बॉडी, एक्टिविटी और उसके वजन आदि के हिसाब से अलग-अलग होती है. यदि आप जरूरत से कम पानी पीते हैं तो थकान और सिरदर्द होगा और अगर बिना सोचे-समझे बहुत ज्यादा पी लेते हैं तो यह किडनी पर बोझ डाल सकता है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि किसे कितना पानी पीना चाहिए? आज हम आपको कितना पानी पीना चाहिए, इस बारे में एक नया फॉर्मूला बताएंगे जो आपके वजन से कैलकुलेट होता है. वजन के हिसाब से कैसे तय करें पानी की मात्रा? यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी की रिपोर्ट के मुताबिक, हाइड्रेशन के लिए कोई 'वन साइज फिट्स ऑल' नियम नहीं होता और यह पूरी तरह आपके बॉडी मास पर निर्भर करता है. रिसर्च एक बेहद सरल फॉर्मूला बताती हैं जिससे आप घर बैठे जान सकते हैं कि आपके शरीर को कितने लीटर पानी की जरूरत है. अपना वजन (किलोग्राम में) ÷ 30 = कुल लीटर. उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 60 किलो है, तो उसे 30 से भाग देने पर 2 आता है. यानी आपको दिन भर में कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए. वहीं अगर किसी का वजन 90 किलो है, तो उसे कम से कम 3 लीटर पानी की जरूरत होगी. गर्मी में बढ़ जाती है पानी की जरूरत मायो क्लिनिक के मुताबिक, यह फॉर्मूला एक बेसलाइन यानी बुनियादी जरूरत बताता है. लेकिन जब पारा 40 डिग्री के पार हो, तो गणित थोड़ा बदल जाता है. मेयो क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, अगर आप धूप में बाहर निकलते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, तो पसीने के जरिए निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई के लिए आपको हर आधे घंटे की एक्टिविटी पर करीब 350 मिली एक्स्ट्रा पानी पीना चाहिए. साथ ही यदि आप कैफीन (चाय-कॉफी) ज्यादा लेते हैं तो आपको और भी ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है क्योंकि कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट करता है. सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें अक्सर लोग तब पानी पीते हैं जब गला सूखने लगता है. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक 'चेतावनी' मानते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) की एक स्टडी बताती है कि प्यास लगना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले ही 1-2 प्रतिशत डिहाइड्रेट हो चुका है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़े-थोड़े समय पर पानी पीते रहें. सही हाइड्रेशन न केवल आपकी एनर्जी लेवल को बनाए रखता है, बल्कि यह वजन घटाने और स्किन को ग्लोइंग बनाने में भी मददगार साबित होता है.

घर पर बनाएं कोरियन स्टाइल राइस जेल, पाएं नेचुरल ग्लो

गर्मी बढ़ रही है और इसका सीधा असर हमारी स्किन पर भी पड़ता है. एक समय के बाद अपनी स्किन का खास ध्यान रखना होता है,  वरना कम उम्र में ही स्किन लटक जाती है और चेहरे पर झुर्रियां पड़नी शुरू हो जाती है. अगर स्किन का खोया हुआ निखार  वापस पाना चाहते हैं तो यह कोरियन स्किन सीक्रेट आपके काम आ सकता है. कोरियन लोगों की स्किन हर कोई चाहता है और वो लोग भी स्किन के लिए सबसे ज्यादा चावल का ही इस्तेमाल करते हैं. अगर आप नेचुरल तरीके से अपनी स्किन को ग्लोइंग और हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो घर पर बना राइस जेल एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को नमी देते हैं, दाग-धब्बों को हल्का करते हैं और स्किन को सॉफ्ट बनाते हैं. आइए  इसे बनाने और इस्तेमाल करने का आसान तरीका जानते हैं.   इंग्रेडिएंट्स     ½ कप कच्चा सफेद चावल       1 बड़ा चम्मच ताजा एलोवेरा जेल     2 बड़े चम्मच ग्रीन टी (ठंडी)     1 छोटा चम्मच कच्चा शहद     1 विटामिन E कैप्सूल का तेल     ½ छोटा चम्मच ग्लिसरीन     1 बड़ा चम्मच फर्मेंटेड राइस वॉटर     1 बड़ा चम्मच खीरे का रस घर पर राइस जेल बनाने का तरीका     सबसे पहले चावल को दो बार धो लें. फिर दो कप पानी में 15 मिनट तक उबालें, जब तक पानी का कलर दूधिया न हो जाए.     उसके बाद इसे गैस से उतार लें और ठंडा करने के लिए छोड़ दीजिए, ठंडा होने के बाद इसे मिक्सर में डालकर ब्लेंड करें.     मिक्सर में पीसने के बाद पेस्ट को आप मलमल के कपड़े या छलनी से छान लें. फिर मिक्सर को करीब 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दीजिए.     जब यह पेस्ट गाढ़ा हो जाए तब इसमें एलोवेरा जेल, ग्रीन टी, शहद, विटामिन E तेल, ग्लिसरीन, राइस वॉटर और खीरे का रस मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें.     राइस जेल बनकर तैयार हो जाएगा, तो आप उसे साफ कांच के जार में भरें और ऊपर से एयरटाइट बंद कर दें.     आप चाहें तो इसे फ्रिज में भी रख सकते हैं और यह एक हफ्ते तक आसानी से चल जाएगा.       रोजाना राइस जेल का कैसे करें इस्तेमाल     राइस जेल को अपने चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले आप अपने फेस को अच्छी तरह से पानी से धो लें. उसके बाद ही राइस जेल को अपने फेस पर अप्लाई करें.     राइस जेल को आप अपने हल्के हाथों से थपथपाकर लगाएं, ताकि वो स्किन में अच्छी तरह से ब्लेंड हो जाए. उसके कुछ समय बाद आप सनस्क्रीन या नाइट क्रीम लगा सकते हैं.     रात को सोने से ठीक पहले इस जेल को लगाना ज्यादा सही होता है, क्योंकि पूरी रात यह स्किन में गहराई से काम करता है.     वैसे तो आप इसे रोज रात को इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ज्यादा ड्राई स्किन वाले इसको दो बार लगा सकते हैं.  

AI से सपनों पर कंट्रोल का दावा! स्टार्टअप ने लॉन्च किए अनोखे वियरेबल डिवाइस

AI की मदद से लेटर, कोटिंग और कैलकुलेशन आदि तक कराई जा सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की मदद से अपने सपनों को भी कंट्रोल किया जा सकता है. ये दावा एक स्टार्टअप प्रोफेटिक AI ने किया है. स्टार्टअप ने अपने वियरेबल डिवाइस लॉन्च किए हैं, जिनको लेकर दावा किया है कि आप क्या सपने में देखना चाहते हैं, इस डिवाइस की मदद से कंट्रोल किया जा सकती है. इनकी शुरुआती कीमत $449 (लगभग 42,300 रुपये) है. स्टार्टअप ने दो नए वियरेबल डिवाइस को पेश किया है, जिनके नाम डुअल और फेस है. ये आम लोगों के सपने देखने के तरीके को बदलने का काम करते हैं. वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है इन वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है, जिनसे एक तार जुड़ा होता है. कंपनी के पोर्टल पर लिस्ट डिवाइस देखने में एक जैसे लगते हैं. ये डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम को ट्रिगर कर सकते हैं, जो एक ऐसी स्थिति होती है, जब आप जानते हैं कि आपप सपना देख रहे हैं और उसको कंट्रोल किया जा सकता है. यह कैसे काम करता है? X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर प्रोफेटिक AI ने बताया कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करते हैं. ये डिवाइस सिर के जरिए सुरक्षित अल्ट्रासोनिक ऊर्जा को प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स तक भेजते हैं और फ्रंटोपैरिएटल नेटवर्क को एक्टिव कर देते हैं. ये सिस्टम आमतौर पर सपने देखते समय डिएक्टिव रहते हैं, जिससे ल्यूसिड अवेयरनेस की कमी होती है. स्टार्टअप का दावा है कि इस नेटवर्क को एक्टिव करके ये डिवाइस उस गतिविधि को संतुलित करने में मदद करते हैं. Prophetic Pulse में इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) सेंसर भी लगे हैं, जिनका उपयोग मेंटल एक्टिविटी को समझने में किया जाता है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क का स्टार्टअप Neuralink भी अपने ब्रेन इम्प्लांट चिप्स में EEG सेंसर का उपयोग करती है. ये टेक्नोलॉजी ट्रांस्क्रानियल फोक्स्ड अल्ट्रा साउंड पर और AI आधारित है. डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम जनरेट कर सकते हैं और सपनों की याददाश्त, स्पष्टता और कंट्रोल को बेहतर बना सकते हैं. इसकी कीमत कितनी होगी? ऑफिशियल पोर्टल पर Prophetic Dual की कीमत 449 अमेरिकी डॉलर (लगभग 43,200 रुपये) है. इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक शुरू होगी. Prophetic Phase की कीमत 1,299 डॉलर  (करीब 1,22,000 रुपये) होगी और इसकी डिलीवरी 2027 के मध्य से शुरू होगी.

सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता चलन,मेडिकल जरूरत या बड़ा बिज़नेस?

आज के दौर में मातृत्व का अनुभव कुदरती प्रक्रिया से हटकर व्यापारिक मोड़ ले चुका है। चिकित्सा जगत में अब प्रसूता को एक सामान्य महिला के बजाय मरीज की तरह देखा जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो भोपाल जैसे बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा सर्जरी के जरिए दुनिया में आ रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ का डर दिखाकर प्रसव जैसी स्वाभाविक प्रक्रिया को एक गंभीर बीमारी की तरह पेश किया जा रहा है, जिससे सामान्य डिलीवरी का चलन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। प्राइवेट अस्पतालों मे भर्ती होते ही शुरू होता खेल निजी अस्पतालों में जैसे ही कोई गर्भवती महिला दाखिल होती है, वहां के माहौल में एक मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का संचार शुरू कर दिया जाता है। वार्ड से लेकर लेबर रूम तक ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं कि घबराए हुए परिजन सुरक्षा के नाम पर सिजेरियन के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। यही वजह है कि पिछले एक दशक में प्रदेश के भीतर सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाले जन्मों की संख्या दोगुनी हो गई है, जो सीधे तौर पर व्यापारिक मानसिकता की ओर इशारा करती है। WHO के चौकाने वाले आंकड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का अनुपात 45 प्रतिशत के पार जा चुका है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत के आसपास है। ये भिन्नताएं सवाल खड़ा करती हैं कि क्या अस्पताल बदलने मात्र से चिकित्सा की आवश्यकताएं भी बदल जाती हैं? यह विरोधाभास साफ करता है कि प्रसव का तरीका अब मां की सेहत से ज्यादा अस्पताल के मुनाफे और डॉक्टर की सुविधा पर निर्भर करने लगा है। परिवार में ऐसे बनाते है डर प्रसव के इस पूरे ‘बाजार’ को समझना हो तो उन परिवारों की कहानी देखनी होगी, जिनसे सामान्य स्थिति होने के बावजूद सिजेरियन की सहमति ली गई। अक्सर डॉक्टर तर्क देते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी में बहुत समय लगेगा और ऑपरेशन करना ज्यादा सुरक्षित और त्वरित विकल्प है। बच्चे की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की भावनाएं इतनी प्रबल होती हैं कि वे भारी-भरकम बिल के सामने सवाल पूछना भूल जाते हैं। एक सिजेरियन प्रसव का औसत खर्च 85 हजार से एक लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह पूरा क्षेत्र करोड़ों के कारोबार में तब्दील हो गया है। सिजेरियन डिलीवरी में पैसों का खेल भारत में सिजेरियन (C-Section) प्रसव की दर अब 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 10-15 प्रतिशत के मानक से कहीं अधिक है। साल 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हुए कुल प्रसवों में से लगभग 54 लाख बच्चे ऑपरेशन के जरिए हुए। यदि एक ऑपरेशन का खर्च एक लाख रुपये माना जाए, तो यह 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक का एक संगठित ‘सी-सेक्शन बाजार’ बन चुका है। अकेले राजधानी भोपाल में ही इस माध्यम से करोड़ों का राजस्व पैदा हो रहा है। महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं; डॉक्टर के अपने तर्क दूसरी ओर, विशेषज्ञ और डॉक्टर अपनी दलील देते हुए कहते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और देर से होने वाली शादियां इसकी बड़ी वजह हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं हैं और चिकित्सा संबंधी जोखिमों से बचने के लिए सिजेरियन का चुनाव किया जा रहा है। शहरी जीवन में बढ़ता तनाव, भय और शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाहत जैसे सामाजिक कारण भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं। परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही परामर्श बेहद जरूरी- एक्स्पर्ट्स विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के प्रति महिलाओं के मन में बैठे डर को दूर करने की आवश्यकता है। गर्भावस्था के दौरान सही सलाह, भावनात्मक सहयोग और धैर्य की कमी के कारण महिलाएं ऑपरेशन का रास्ता चुनती हैं। यदि परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी और मानसिक मजबूती दी जाए, तो इस बढ़ते हुए ‘सर्जरी कल्चर’ पर अंकुश लगाया जा सकता है।  

गर्मियों में अंडा खाना सुरक्षित या नहीं? एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सच

 भारत के कई हिस्सा में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है और सुबह 7 बजे से ही गर्माहट समझ आने लगी है. ऐसे में गर्मी के मौसम में अक्सर लोग खान-पान को लेकर सचेत रहते हैं ताकि उनका डाइजेशन और सेहत सही रहे. लेकिन जो लोग रोजाना अंडे खाते हैं, उन लोगों को भी चिंता होने लगती है कि रोजाना अंडा खाएं या नहीं? अंडा जिसे सुपरफूड माना जाता है, उसे लेकर एक बड़ा भ्रम यह है कि इसकी तासीर गर्म होती है और गर्मियों में इसे खाने से पेट खराब या शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? हार्वर्ड हेल्थ और इंटरनेशनल रिसर्च डेटा के अनुसार, अंडा गर्मियों में भी उतना ही सुरक्षित है जितना सर्दियों में, बस शर्त यह है कि उसे खाने का तरीका सही होना चाहिए. तो आइए जान लीजिए कि इस तपती गर्मी में आपको अंडे का सेवन कैसे करना चाहिए. गर्मियों में अंडे और शरीर की गर्मी का सच हॉवर्ड न्यूट्रिशन सोर्स के अनुसार, अंडा विटामिन D और कोलीन का बेहतरीन सोर्स है. अगर आप इसे सही हाइड्रेशन यानी पर्याप्त पानी के साथ लेते हैं, तो यह शरीर में गर्मी पैदा नहीं करता. अक्सर माना जाता है कि अंडे खाने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंडे में हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन और अमीनो एसिड होते हैं जिन्हें पचाने के लिए शरीर को अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है. इस प्रोसेस को थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड कहा जाता है. क्या है अंडा खाने का सबसे सही समय? ऑस्ट्रेलिया एग्स की रिपोर्ट बताती है कि सुबह अंडा खाने से दिनभर एनर्जी बनी रहती है और बार-बार भूख नहीं लगती. दरअसल, गर्मी के मौसम में मेटाबॉलिज्म दोपहर और रात के समय थोड़ा धीमा हो जाता है इसलिए इस समय भारी भोजन को पचाना मुश्किल होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अंडों का सेवन सुबह के नाश्ते में करना सबसे बेहतर रहेगा. सुबह शरीर का मेटाबॉलिज्म सबसे अधिक होता है जिससे अंडे का प्रोटीन आसानी से पच जाता है. दोपहर की कड़ी धूप या रात को सोने से ठीक पहले अंडा खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. गर्मियों में इन 2 बातों का रखें ख्याल गर्मियों में सबसे बड़ा खतरा साल्मोनेला (Salmonella) बैक्टीरिया का होता है. अधिक तापमान में अंडे जल्दी खराब हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अंडों को फ्रिज में 4°C से कम तापमान पर स्टोर करें. इसके अलावा गर्मियों में भारी तेल-मसाले वाले ऑमलेट या एग करी के बजाय उबले हुए अंडे या कम तेल वाली पोच्ड एग को प्राथमिकता दें. अंडे को इसे खीरे, पुदीने या ताजी सब्जियों के सलाद के साथ खाएं ताकि शरीर का हाइड्रेशन लेवल बना रहे. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, किसी स्वस्थ व्यक्ति गर्मियों में भी रोज 1 से 2 अंडे सुरक्षित रूप से खा सकता है.