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RBI का DEA Fund: 10 साल से निष्क्रिय खातों का पैसा ऐसे करें वापस क्लेम

नई दिल्ली क्या आपके या आपकी फैमिली के किसी मेंबर का पुराना बैंक अकाउंट लंबे टाइम से यूज नहीं हुआ है? या फिर किसी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की मैच्योरिटी के बाद उसकी रकम को किसी ने भी क्लेम नहीं किया है, तो ऐसे मामलों में आपका ये डिपाजिट हमेशा के लिए गायब नहीं होता बल्कि आप इस पैसे को वापस पा सकते हैं। जी हां, भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के पास ऐसी रकम को सुरक्षित रखने की खास व्यवस्था है और सही प्रोसेस अपनाकर इसे दोबारा हासिल किया जा सकता है। RBI ने ऐसे निष्क्रिय और बिना दावे वाले एकाउंट्स की रकम को संभालने के लिए Depositor Education and Awareness यानी DEA Fund बना रखा है। मई 2014 में शुरू किए गए इस फंड में उन एकाउंट्स का पैसा ट्रांसफर किया जाता है, जो लगातार 10 साल तक इनएक्टिव हैं या जिनकी जमा राशि पर कोई दावा नहीं किया गया है कब 'अनक्लेम्ड डिपॉजिट' बन जाती है आपका पैसा? RBI के रूल्स के अनुसार अगर किसी सेविंग्स या करंट अकाउंट में 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं होता या किसी FD की मैच्योरिटी के 10 साल बाद तक रकम नहीं निकाली जाती, तो उस पैसे को इस Unclaimed Deposit में रखा जाता है। इसके बाद बैंक उस राशि को DEA Fund में भेज देता है। हालांकि सबसे अच्छी बात ये है कि बैंक अकाउंट होल्डर या उसके कानूनी उत्तराधिकारी बाद में भी इस रकम को ले सकते हैं। ब्याज वाले अकाउंट के मामले में लागू रूल्स के मुताबिक ब्याज भी दिया जाता है। UDGAM Portal से कैसे ढूंढे अपना भुला हुआ पैसा? इस काम को आसान बनाने के लिए RBI ने UDGAM यानी Unclaimed Deposits-Gateway to Access Information पोर्टल काफी पहले लॉन्च किया था। आज आप इस पोर्टल के जरिए एक ही जगह पर कई बैंक अकाउंट में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट की डिटेल्स देख सकते हैं। सबसे पहले तो इसके लिए आपको अपना नाम और मोबाइल नंबर एंटर करके रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा। इसके बाद अकाउंट होल्डर का नाम, बैंक का नाम और PAN, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या जन्मतिथि जैसी डिटेल्स देकर सर्च करना होगा। अगर आपके पास इनमें से कोई डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं है तो भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। आप अकाउंट होल्डर का एड्रेस एंटर करके भी सर्च कर सकते हैं। कैसे वापस मिलेगा Unclaimed पैसा? अनक्लेम्ड पैसा वापस लेने के लिए सबसे पहले तो अकाउंट होल्डर या कानूनी उत्तराधिकारी को संबंधित बैंक में दावा करना होगा। इसके बाद बैंक वेरिफिकेशन प्रोसेस को पूरा करेगा। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ग्राहक को रकम और लागू ब्याज दिया जाएगा। क्लेम करना है काफी आसान     सबसे पहले अपने बैंक की किसी भी ब्रांच में जाएं।     आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे KYC डाक्यूमेंट्स के साथ क्लेम फॉर्म जमा करें।     डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होने के बाद बैंक आपकी राशि वापस कर देगा। किन अकाउंट का पैसा DEA Fund में जाती है? दरअसल DEA Fund में सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, FD, RD, कैश क्रेडिट अकाउंट, अनक्लेम्ड डिमांड ड्राफ्ट, बैंकर चेक, NEFT क्रेडिट बैलेंस, प्रीपेड कार्ड बैलेंस और कई तरह के अन्य इनएक्टिव अकॉउंटस की राशि इसमें शामिल की जाती है।  

घर पर बनाएं केमिकल-फ्री फेस वॉश, स्किन को दें नेचुरल ग्लो और साफ़ निखार

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बाहरी धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन की वजह से हमारी स्किन अपनी नेचुरल ग्लो खोटी चली जा रही है. वैसे तो हम सभी अपने चेहरे की सफाई करने के लिए फेस वॉश या फिर एक क्लींजर का इस्तेमाल करते ही हैं, लेकिन कई बार इनमें मौजूद केमिकल्स हमारी स्किन को फायदा पहुंचाने की जगह पर नुकसान ज्यादा पहुंचा देते हैं. आपको भले ही एक हफ्ते या फिर एक महीने में इन केमिकल्स का असर अपनी स्किन पर देखने को न मिले, लेकिन एक समय के बाद आपको इन केमिकल्स की वजह से हुआ नुकसान जरूर दिखाई देगा. अगर आप अपने चेहरे को एक नेचुरल तरीके से साफ करना चाहते हैं, तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की होने वाली है. आज हम आपको आपके घर और किचन में ही मौजूद कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल करके आप एक नेचुरल और ज्यादा सुरक्षित फेस वॉश आसानी से खुद ही तैयार कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं घर पर नेचुरल फेस वॉश बनाने और उसे इस्तेमाल करने का सबसे आसान तरीका. बेसन और हल्दी का फेस वॉश हमारे घरों में बेसन का इस्तेमाल सदियों से चेहरे को निखारने के लिए किया जाता रहा है. बेसन स्किन की गहराई से सफाई करता है और एक्स्ट्रा ऑयल को रिमूव करने में मदद भी करता है वहीं, हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल क्वालिटीज पिंपल्स को दूर रखते हैं. इसे बनाने के लिए एक कटोरी में दो चम्मच बेसन लें और उसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं. अब इसमें ड्राई स्किन के लिए जरूरत के अनुसार कच्चा दूध या ऑयली स्किन के लिए गुलाब जल मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. यह सिंपल सा पेस्ट चेहरे की गंदगी को पूरी तरह साफ कर देता है. एलोवेरा और शहद का फेस वॉश अगर आपकी स्किन बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव या ड्राई है, तो एलोवेरा और शहद का कॉम्बिनेशन आपके लिए सबसे अच्छा साबित हो सकता है. एलोवेरा स्किन को ठंडक और फ्रेशनेस देता है, जबकि शहद मॉइस्चर को लॉक करके चेहरे को नैचुरली ग्लोइंग बनाता है. इसे बनाने के लिए दो चम्मच फ्रेश एलोवेरा जेल में एक चम्मच प्योर शहद मिलाएं और दोनों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें. इस मिश्रण को आप चाहें तो एक छोटे कंटेनर में बनाकर फ्रिज में दो से तीन दिनों के लिए रख भी सकते हैं. ओट्स और दही का फेस वॉश धूप के कारण अगर चेहरे पर टैनिंग हो गई है या स्किन बेजान लग रही है, तो ओट्स और दही का फेस वॉश बेहतरीन तरीके से काम करता है. ओट्स आपकी स्किन को साफ करता है और दही में मौजूद लैक्टिक एसिड दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले ओट्स को पीसकर उसका पाउडर बना लें और फिर एक चम्मच ओट्स पाउडर में एक से दो चम्मच फ्रेश दही मिलाएं. इन दोनों ही चीजों को अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें. यह आपकी स्किन की डेड सेल्स को हटाने में बहुत असरदार है. इस्तेमाल करने का सही तरीका घर पर बने इस नेचुरल फेस वॉश का इस्तेमाल करना बेहद आसान है. सबसे पहले अपने चेहरे को सादे पानी से गीला कर लें. इसके बाद तैयार किए गए पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और उंगलियों की मदद से गोल-गोल घुमाते हुए 1 से 2 मिनट तक हल्की मसाज करें. अब चेहरे को साफ पानी से धो लें और किसी साफ तौलिए से थपथपाकर सुखाएं. चेहरा धोने के तुरंत बाद चेहरे पर थोड़ा सा मॉइस्चराइजर या गुलाब जल जरूर लगाएं ताकि मॉइस्चर बनी रहे. नेचुरल फेस वॉश के फायदे घर के बने फेस वॉश पूरी तरह से केमिकल-फ्री और सल्फेट-फ्री होते हैं, जिससे स्किन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. ये आपके बजट में फिट बैठते हैं और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता. इन्हें रोजाना इस्तेमाल करने से चेहरे का नेचुरल ग्लो वापस आता है और स्किन अंदर से हेल्दी भी रहती है.

डैमेज बालों के लिए दही और शहद से नेचुरल हेयर मास्क

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पॉल्यूशन और केमिकल लोडेड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते-करते हमारे बाल बेजान और ड्राई हो जाते हैं. जब बाल डैमेज हो जाते हैं तो रिपेयर करने के लिए अक्सर हम महंगे ट्रीटमेंट लेते हैं या फिर हेयर स्पा का सहारा लेते हैं. अगर आपके बाल डैमेज हो चुके हैं और आप इन्हें नेचुरल तरीके से रिपेयर करना चाहते हैं, तो इसके लिए जितनी भी जरूरी चीजें चाहिए वे आपके किचन में ही मौजूद हैं. जब आप इन चीजों का इस्तेमाल करके हेयर मास्क बनाते हैं तो इससे आपके बालों को डीप नरिशमेंट मिलती है और वे पहले से काफी ज्यादा हेल्दी भी लगने लगते हैं. तो चलिए जानते हैं ऐसी कुछ चीजों के बारे में जिनका इस्तेमाल करके आप काफी आसानी से और मिनटों में ही एक असरदार हेयर मास्क तैयार कर सकते हैं. ड्राई बालों के लिए दही और शहद का मास्क अगर आपके बाल बहुत ज्यादा ड्राई और बेजान हो गए हैं, तो दही और शहद का मास्क आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है. दही में लैक्टिक एसिड होता है जो स्कैल्प को साफ करता है, जबकि शहद एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है जो बालों की मॉइस्चर को एब्जॉर्ब करके उन्हें सॉफ्ट बनाता है. इस मास्क को बनाने के लिए आधा कप फ्रेश दही लें और उसमें दो चम्मच शहद मिला लें. अब इन दोनों ही चीजों को अच्छी तरह मिक्स करके पेस्ट बना लें. अब इसे अपने स्कैल्प से लेकर बालों की पूरी लंबाई तक लगाएं. इसे करीबन 30 मिनट तक इसे लगा रहने दें और फिर किसी माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें. हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करने से बाल बेहद सॉफ्ट और शाइनी हो जाते हैं. मजबूत बालों के लिए अंडा और ऑलिव ऑयल अगर आप बालों के टूटने और झड़ने की समस्या से परेशान हैं, तो ऐसे में आपको अंडे और ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करके एक हेयर मास्क तैयार कर लेना चाहिए. अंडे में प्रोटीन की मात्रा बहुत ही ज्यादा पायी जाती है, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है. वहीं, ऑलिव ऑयल आपके बालों को अंदर से न्यूट्रिशन देता है. इसे बनाने के लिए एक कटोरी में एक अंडा तोड़ें और फिर इसमें दो चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाएं. इस मिश्रण को अच्छी तरह फेंट लें और फिर इसे अपने बालों में लगाएं और 20 से 25 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद बालों को ठंडे पानी और शैंपू से धो लें. इस बात का ख्याल रखें कि अंडा लगाने के बाद कभी भी गर्म पानी का इस्तेमाल न करें, नहीं तो अंडे की महक बालों से नहीं जाएगी. शाइनी और स्मूद बालों के लिए केला और नारियल तेल अगर आपको मालूम नहीं है तो बता दें पके हुए केले में आपको भरपूर मात्रा में पोटैशियम, नेचुरल ऑयल और विटामिन्स मिल जाते हैं, जो आपके बालों के ड्राइनेस को दूर करके उन्हें सिल्की बनाते है. नारियल तेल बालों को न्यूट्रिशन देकर उन्हें टूटने से बचाता है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए एक पका हुआ केला लें और उसे अच्छी तरह मैश कर लें ताकि उसमें कोई गांठ न रहे. अब इसमें एक से दो चम्मच नारियल का तेल मिलाएं. इस पेस्ट को अपने बालों पर लगाएं और कम से कम 30 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर नॉर्मल पानी से ही अपने बालों को अच्छी तरह से धो लें. यह मास्क नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है और बालों को गजब की शाइन देता है.

वीकेंड थेरेपी: नींद, डिजिटल डिटॉक्स और नेचर से तनाव कम करने के आसान तरीके

 सोमवार से लेकर शुक्रवार या फिर शनिवार तक हम सभी एक भागदौड़ भरी जिंदगी जीते हैं. ऑफिस के कामों को खत्म करना और घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के चक्कर में हम सिर्फ फिजिकली ही नहीं बल्कि मेंटली भी पूरी तरह से थक जाते हैं. इस समय हम सिर्फ वीकेंड का इंतजार करते हैं क्योंकि इसी एक या दो दिनों के दौरान हम खुद को रिलैक्स करने के लिए कुछ कर पाते हैं. वीकेंड पर हमारे अंदर बहुत कुछ करने की इच्छा तो होती है लेकिन फिर भी हम इसे सोने या फिर सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में ही बर्बाद कर देते हैं, जिस वजह से हमारी थकान दूर नहीं हो पाती है. अगर आप सच में इस वीकेंड खुद को रिलैक्स और रिफ्रेशिंग फील करना चाहते हैं, तो आपको वीकेंड थेरेपी जरूर अपनानी चाहिए. आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ आसान कामों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें इस वीकेंड करके आप अपने शरीर और दिमाग को पूरी तरह से रिलैक्स्ड फील करवा सकते हैं. तो चलिए इनके बारे में जानते हैं विस्तार से. सही तरीके से पूरा करें नींद का कोटा पूरे हफ्ते सुबह जल्दी उठने के चक्कर में हमारी नींद अधूरी रह जाती है. वीकेंड पर आप अपनी इस अधूरी नींद को पूरा कर सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप दोपहर के 12 बजे तक सोते रहें. ऐसा करने से शरीर में सुस्ती और बढ़ जाती है और साथ ही दिमाग भी थका हुआ महसूस करने लगता है. आप रोज के समय से सिर्फ एक या दो घंटा ज्यादा सो सकते हैं. एक अच्छी और गहरी नींद आपके दिमाग के सेल्स को शांत करती है और आपको मेंटल पीस देती है. डिजिटल डिटॉक्स भी है बेहद जरूरी आज के समय में हम हर समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन से चिपके रहते हैं. सोशल मीडिया की रील्स और ऑफिस के ई-मेल्स हमारे दिमाग को कभी शांत नहीं होने देते. वीकेंड पर कम से कम 4 से 5 घंटे के लिए अपने फोन को खुद से दूर रखें. ऐसा करने को डिजिटल डिटॉक्स करना कहते हैं. जब आप स्क्रीन से दूरी बनाएंगे, तो आपकी आंखों को आराम मिलेगा और दिमाग का स्ट्रेस भी कम होगा. नेचर के साथ बिताएं थोड़ा समय कंक्रीट के जंगलों और बंद कमरों से बाहर निकलकर थोड़ी फ्रेश ऑक्सीजन लेना भी बहुत जरूरी है. वीकेंड की सुबह या शाम को किसी नजदीकी पार्क में जाएं. हरी घास पर नंगे पैर चलें, पौधों को देखें और लंबी सांसें लें. नेचर के बीच रहने से शरीर में हैप्पी हार्मोन्स बढ़ते हैं, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी दूर होती है. यह आपके शरीर को नेचुरली रीचार्ज करने का सबसे अच्छा तरीका है. अपनी पसंद का कोई काम करना भागदौड़ भरी इस जिंदगी में हम अक्सर अपनी उन हॉबीज को भूल जाते हैं जो हमें खुशी देती थीं. इस वीकेंड अपने उस पुराने शौक को फिर से जगाने की कोशिश करें. चाहे वह शौक पेंटिंग करने का हो, कोई अच्छी किताब पढ़ने का हो, गार्डनिंग करने का हो या फिर म्यूजिक सुनने का. जब आप अपनी पसंद का काम करते हैं, तो दिमाग का सारा स्ट्रेस गायब हो जाता है और अंदर से एक नई पॉजिटिव एनर्जी का अहसास होता है. खुद को दें रिलैक्सिंग मसाज या बाथ हफ्ते भर की थकान के कारण मसल्स में खिंचाव और दर्द होने लगता है. शरीर को आराम देने के लिए आप वीकेंड पर गुनगुने पानी से नहा सकते हैं या फिर हल्के तेल से शरीर की मसाज कर सकते हैं. इसके अलावा गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर पैर डुबोकर बैठने से भी बहुत आराम मिलता है. इससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सारी फिजिकल थकावट भी पल भर में दूर हो जाती है. अपनों के साथ दिल खोलकर बातें करें अकेलेपन और काम के प्रेशर से भी आपको मेंटल स्ट्रेस हो सकती है. वीकेंड का कुछ समय अपने परिवार, बच्चों या दोस्तों के साथ बिताएं. उनके साथ बैठकर चाय पीते हुए अपनी पुरानी यादें ताजा करें या हंसी-मजाक करें. अपनों के साथ खुलकर बात करने और हंसने से मन का बोझ हल्का होता है. यह एक ऐसी थेरेपी है जो किसी भी दवाई से ज्यादा असरदार है.

iPhone 15 vs iPhone 16: कीमत घटने के बाद कौन सा iPhone 2026 में ज्यादा सही?

भारत में आईफोन (iPhone) खरीदने का सपना देखने वालों के लिए 2026 दिलचस्प साल बन गया है. एक तरफ iPhone 15 की कीमत लॉन्च के मुकाबले काफी कम हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ iPhone 16 भी अब पहले जितना महंगा नहीं रहा. ऐसे में दोनों मॉडल्स के बीच कीमत का अंतर पहले की तुलना में काफी घट गया है. यही वजह है कि कई खरीदार इस दुविधा में हैं कि कम पैसे बचाकर iPhone 15 लेना समझदारी होगी या फिर थोड़ा ज्यादा खर्च करके iPhone 16 खरीदना बेहतर फैसला साबित होगा. अगर आप भी नया iPhone लेने की योजना बना रहे हैं, तो दोनों फोन्स के बीच का अंतर समझना जरूरी है. कीमत कम हुई तो मुकाबला हुआ और दिलचस्प कुछ समय पहले तक iPhone 16 को प्रीमियम विकल्प माना जाता था, जबकि iPhone 15 बजट के हिसाब से बेहतर डील माना जाता था. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. ऑनलाइन सेल, बैंक ऑफर और एक्सचेंज डील्स की वजह से दोनों डिवाइसेज की कीमतों में अंतर कम हो गया है. यही कारण है कि अब फैसला सिर्फ कीमत पर नहीं, बल्कि लंबे समय तक मिलने वाली वैल्यू और फीचर्स पर भी निर्भर करता है. कई खरीदारों के लिए यह तय करना आसान नहीं है कि अतिरिक्त रकम खर्च करने का फायदा वास्तव में मिलेगा या नहीं. प्रॉसेसर में है सबसे बड़ा अंतर दोनों स्मार्टफोन देखने में काफी हद तक एक जैसे लगते हैं, लेकिन अंदर की ताकत अलग है. iPhone 15 में ए16 बायोनिक चिपसेट मिलता है, जबकि iPhone 16 में नया ए18 प्रॉसेसर दिया गया है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में दोनों फोन शानदार परफॉर्मेंस देते हैं. सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग, मल्टीटास्किंग और गेमिंग जैसे काम दोनों डिवाइसेज आसानी से संभाल लेते हैं. हालांकि आने वाले वर्षों में नए फीचर्स और सॉफ्टवेयर अपडेट्स के मामले में iPhone 16 को बढ़त मिल सकती है. जो लोग 4 से 5 साल तक एक ही फोन इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है. कैमरा क्वाॅलिटी में दोनों हैं दमदार फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए अच्छी खबर यह है कि दोनों स्मार्टफोन्स में 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा मिलता है. इससे हाई-क्वाॅलिटी फोटो और वीडियो कैप्चर किये जा सकते हैं. iPhone 16 में कैमरा सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए कुछ सुधार किए गए हैं, लेकिन सामान्य यूजर के लिए दोनों फोन्स के बीच का अंतर बहुत बड़ा महसूस नहीं होगा. अगर आप पुराने iPhone या किसी एंड्रॉयड फोन से अपग्रेड कर रहे हैं, तो दोनों ही डिवाइस कैमरा के मामले में बड़ा सुधार साबित हो सकते हैं. बैटरी और रोजमर्रा का अनुभव बैटरी लाइफ के मामले में iPhone 16 को उसके नए प्रॉसेसर का फायदा मिलता है. बेहतर पावर एफिशिएंसी की वजह से यह थोड़ी लंबी बैटरी लाइफ देने में सक्षम है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि iPhone 15 कमजोर है. सामान्य उपयोग में यह भी पूरे दिन आराम से साथ निभा सकता है. दोनों फोन्स में यूएसबी-सी पोर्ट, डायनामिक आइलैंड और प्रीमियम बिल्ड क्वाॅलिटी जैसे फीचर्स मौजूद हैं. यानी दैनिक उपयोग का अनुभव दोनों में काफी स्मूद और फ्लैगशिप स्तर का मिलता है. किसके लिए सही है iPhone 15 और किसे लेना चाहिए iPhone 16? अगर आपका मकसद कम बजट में Apple इकोसिस्टम में एंट्री लेना है, तो iPhone 15 अभी भी सबसे आकर्षक विकल्पों में से एक है. इसमें वे लगभग सभी जरूरी फीचर्स मिल जाते हैं जिनकी आम यूजर को जरूरत होती है. वहीं अगर आप लेटेस्ट हार्डवेयर चाहते हैं, भविष्य में आने वाले एआई फीचर्स का फायदा उठाना चाहते हैं और लंबे समय तक फोन बदलने का इरादा नहीं है, तो iPhone 16 ज्यादा समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है. कुल मिलाकर फैसला कीमत के अंतर पर निर्भर करेगा. यदि iPhone 15 काफी कम कीमत में उपलब्ध है, तो यह 2026 में भी सबसे वैल्यू-फॉर-मनी iPhones में शामिल रहेगा. लेकिन अगर दोनों मॉडल्स के बीच अंतर बहुत कम है, तो iPhone 16 पर थोड़ा अतिरिक्त खर्च भविष्य के लिए बेहतर निवेश साबित हो सकता है.

200MP कैमरे वाला Samsung Galaxy S26 Ultra सस्ता हुआ, जानें फीचर्स और कीमत

सैमसंग गैलेक्सी एस 26 अल्ट्रा, एक फ्लैगशिप ग्रेड का स्मार्टफोन है. इस हैंडसेट में पावरफुल परफॉर्मेंस, 200 मेगापिक्सल का कैमरा और कई अच्छे फीचर्स मिलते हैं. सैमसंग ने कुछ महीने पहले ही इस हैंडसेट को लॉन्च किया है और अब इस पर 15 हजार रुपये बचाने का मौका मिल रहा है. Samsung Galaxy S26 Ultra को भारत में 1,39,999 रुपये में लॉन्च किया था. ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐमेजॉन इंडिया पर इसको 1,30,999 रुपये में लिस्ट किया है, जिसमें 9 हजार रुपये का फ्लैट डिस्काउंट मिल रहा है. सैमसंग के इस हैंडसेट पर 9 हजार रुपये सीधे बचाने का मौका मिल रहा है. वहीं, 6 हजार रुपये का इंस्टैंट बैंक डिस्काउंट भी मिल रहा है, जिसके लिए चुनिंदा बैंक के कार्ड का यूज करना होगा. ऐसे में यूजर्स को पूरे 15 हजार रुपये तक बचाने का मौका मिलेगा. Samsung Galaxy S26 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स Samsung Galaxy S26 Ultra में कई कमाल के फीचर्स दिए गए हैं. इसमें 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया है. साथ ही इसमें 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस, 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो और 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस दिया गया है. Samsung Galaxy S26 Ultra का डिस्प्ले Samsung Galaxy S26 Ultra में 6.9 इंच का डायनेमिक LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले पैनल का इस्तेमाल किया गया है. कॉर्निंग गोरिल्ला आर्मर 2 ग्लास प्रोटेक्शन दी गई है. Samsung Galaxy S26 Ultra का प्रोसेसर Samsung Galaxy S26 Ultra में क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन 8 इलाइट जेन 5 (3nm) चिपसेट का यूज किया है. साथ इसमें 5000 mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 60W फास्ट चार्जर मिलता है. इसमें रिवर्स और वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है.

सिर्फ पानी से बाल धोना कितना सही? जानें ‘नो-शैम्पू’ ट्रेंड के फायदे और नुकसान

बिना शैंपू के सिर्फ पानी से बाल धोना (Water-Only Hair Washing) आजकल एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है, जिसे 'नो-शू मूवमेंट' भी कहा जा रहा है. लोग केमिकल से बचने के लिए इसे अपना रहे हैं, लेकिन क्या यह वाकई बालों के लिए फायदेमंद है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ पानी से सिर धोने से धूल-मिट्टी तो साफ हो सकती है, लेकिन बालों में जमा एक्स्ट्रा ऑयल (Sebum) और डर्ट पूरी तरह साफ नहीं होते. ऑयल और पानी का कॉम्बिनेशन न मिलने के कारण स्कैल्प पर चिपचिपाहट बनी रहती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.   क्या कहते हैं विदेशी एक्सपर्ट्स और रिसर्च? हेल्थलाइन के अनुसार, शैंपू न लगाने से स्कैल्प के नेचुरल ऑयल्स सुरक्षित रहते हैं जिससे बाल कम ड्राई होते हैं. लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि पानी अकेले तेल को ब्रेकडाउन नहीं कर सकता. बालों में जमा नेचुरल ऑयल (सीबम) और हेयर प्रोडक्ट्स के केमिकल पानी से नहीं निकलते. इसके लिए शैंपू में मौजूद सर्फेक्टेंट्स यानी क्लींजिंग एजेंट्स की जरूरत होती है. सिर्फ पानी से बाल धोने के फायदे हेल्थकेयर रिसर्च फर्म Hims के मुताबिक, अगर आप बिना शैंपू के बाल धोते हैं तो इसके कुछ फायदे भी हैं. केमिकल्स से बचाव: शैंपू में मिलने वाले सल्फेट और पैराबेंस जैसे हार्ड केमिकल्स से बाल बच जाते हैं. कम ड्राइनेस: जो लोग बहुत ज्यादा शैंपू करते हैं, उनके बाल रूखे हो जाते हैं. पानी से धोने पर बालों की नेचुरल नमी बनी रहती है. सस्ता ऑप्शंस: यह पूरी तरह से फ्री है और प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल कम होने से पर्यावरण को भी फायदा होता है. स्कैल्प इन्फेक्शन और डैंड्रफ का खतरा सिर्फ पानी के इस्तेमाल से फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं. हेयर केयर और ट्राइकोलॉजी एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब बालों से तेल साफ नहीं होता तो स्कैल्प के पोर्स बंद हो जाते हैं. इससे स्कैल्प पर गंदगी जमा होने लगती है जो आगे चलकर डैंड्रफ, तेज खुजली और हेयर फॉल का कारण बन सकती है. जिन लोगों के बाल पतले या बहुत ऑयली हैं उनके बाल सिर्फ पानी से धोने पर ज्यादा चिपचिपे और बेजान दिखने लगते हैं. क्या है सही तरीका? एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आपको पूरी तरह शैंपू बंद करने की जरूरत नहीं है. आप हफ्ते में 1 या 2 बार माइल्ड या सल्फेट-फ्री शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं. बीच के दिनों में बालों को फ्रेश रखने के लिए केवल सादे पानी से रिंस (Rinse) किया जा सकता है. इससे बालों का नेचुरल ऑयल बैलेंस भी नहीं बिगड़ेगा और स्कैल्प भी पूरी तरह क्लीन और हेल्दी रहेगी.

ग्लोइंग स्किन का राज: घर पर बनाएं कोलेजन बढ़ाने वाली हेल्दी ड्रिंक

 हर कोई चाहता है कि वह खूबसूरत दिखे और स्किन हमेशा ग्लोइंग नजर आए. लेकिन अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत खान-पान, प्रदूषण और स्किन की सही देखभाल न करने की वजह से स्किन अपनी चमक खोने लगती है. साथ ही, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेजन का बनना भी कम हो जाता है, जिससे झुर्रियां, रूखापन और स्किन की इलास्टिसिटी कम होने लगती है. कोलेजन एक तरह का प्रोटीन होता है जो स्किन, बाल, नाखून और जोड़ों को मजबूत और हेल्दी रखने में मदद करता है. अगर शरीर में इसका लेवल सही रहे तो स्किन ज्यादा टाइट और यंग दिखती है. ऐसे में डाइट में कुछ हेल्दी चीजें शामिल करके कोलेजन को बढ़ाया जा सकता है. आज हम आपको एक ऐसी हेल्दी ड्रिंक के बारे में बताएंगे जो आपके शरीर में कोलेजन की मात्रा को बढ़ाकर ग्लोइंग स्किन पाने में आपकी मदद कर सकती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 1 कप ताजा संतरे का रस 1/2 कप स्ट्रॉबेरी 1/2 कप अनानास 1 चम्मच चिया सीड्स 1 चम्मच शहद 1 कप पानी या नारियल पानी कोलेजन ड्रिंक घर पर बनाएं कैसे?     सबसे पहले स्ट्रॉबेरी को अच्छे से धो लें और उसके डंठल हटा दें. फिर अनानास को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें.     अब एक ब्लेंडर लें और उसमें संतरे का रस, स्ट्रॉबेरी, अनानास, चिया सीड्स और शहद डाल दें. जरूरत के हिसाब से इसमें पानी या नारियल पानी भी मिला लें.     अब सभी चीजों को अच्छे से ब्लेंड करें जब तक मिश्रण पूरी तरह स्मूद और एक जैसा न हो जाए.     तैयार ड्रिंक को एक गिलास में निकाल लें. चाहें तो इसमें बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें और पी लें. क्यों फायदेमंद है यह ड्रिंक? इस ड्रिंक में मौजूद संतरा और स्ट्रॉबेरी विटामिन C से भरपूर होते हैं जो शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करते हैं. अनानास डाइजेशन को बेहतर करता है और स्किन हेल्थ को सपोर्ट करता है. चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो स्किन को हेल्दी रखता है और सूजन कम करता है. वहीं शहद शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करता है और नारियल पानी हाइड्रेशन बनाए रखता है. अगर इसे रोजाना लिया जाए तो स्किन ज्यादा फ्रेश, हेल्दी और ग्लोइंग नजर आ सकती है.

Artificial Intelligence बन रही जल संकट की वजह? डेटा सेंटरों की खपत पर वैश्विक प्रदर्शन तेज

 नई दिल्ली दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्रेज जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके खतरनाक असर भी सामने आने लगे हैं. कई देशों में एंटी एआई प्रोटेस्ट जमीन पर देखने को मिल रहे हैं। यूएन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल उर्जा, पानी और जमीन जैसे संसाधनों पर बड़ा दबाव डाल रहा है. यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मामला नहीं है, बल्कि अब यह पर्यावरण और फ्यूचर की स्थिरता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।  अगर सिर्फ बिजली की बात करें तो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटर करीब 945 टेरावॉट-आवर बिजली खपत कर सकते हैं. यह आंकड़ा समझने के लिए इसे आसान तरीके से समझिए।  एक देश के बराबर बिजली की खपत!  945 टेरावॉट-आवर बिजली का मतलब है जापान जैसे पूरे देश की सालाना बिजली खपत के बराबर. यानी जो बिजली एक पूरा विकसित देश इस्तेमाल करता है, उतनी बिजली सिर्फ AI और डेटा सेंटर खा जाएंगे. यह ग्लोबल बिजली खपत का करीब 3 प्रतिशत तक हो सकता है।  अब इसे और आसान भाषा में समझें तो अगर एक आम भारतीय घर साल भर में जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उसी बिजली में हजारों घर चल सकते हैं. लेकिन उतनी ही बिजली AI के सर्वर कुछ ही सेकंड में इस्तेमाल कर देते हैं जब लाखों लोग एक साथ AI से सवाल पूछ रहे होते हैं। पहले बिजली फैक्ट्री, घर और ट्रांसपोर्ट में खर्च होती थी. अब एक बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया खा रही है, जो दिखती नहीं लेकिन असर बहुत बड़ा डालती है।  लेकिन असली संकट पानी है. Earth.Org की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक AI डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी खपत कर सकते हैं. यह पानी सर्वर को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होता है, क्योंकि AI मॉडल्स को चलाने वाले चिप्स बेहद ज्यादा गर्म होते हैं।  1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी अब इस आंकड़े को समझना जरूरी है. 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी का मतलब है करीब 1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी. यानी जितना पानी भारत जैसे देश की पूरी आबादी को चाहिए, उतना पानी सिर्फ मशीनों को ठंडा रखने में खर्च हो सकता है।  अगर इसे और आसान तरीके से समझें तो सोचिए एक शहर में रोज पानी की किल्लत होती है, लोग टैंकर मंगाते हैं, पानी बचाने की अपील होती है. वहीं दूसरी तरफ डेटा सेंटर लाखों लीटर पानी सिर्फ अपने सर्वर को ठंडा रखने में खर्च कर रहे हैं. यानी एक तरफ इंसान पानी के लिए जूझ रहा है और दूसरी तरफ मशीनें वही पानी इस्तेमाल कर रही हैं।  अब इस मुद्दे पर सिर्फ एक्सपर्ट ही नहीं, आम लोग भी विरोध करने लगे हैं. खासकर अमेरिका में AI डेटा सेंटर के खिलाफ विरोध तेजी से बढ़ रहा है।  अमेरिका में डेटा सेंटर्स का विरोध रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कई शहरों में लोगों ने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का विरोध किया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है पानी और बिजली की भारी खपत. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन डेटा सेंटर की वजह से उनके इलाके में पानी की कमी और बिजली पर दबाव बढ़ सकता है।  कुछ जगहों पर तो प्रोजेक्ट्स को रोकना भी पड़ा. अमेरिका में पिछले साल करीब 200 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स विरोध के चलते या तो रोक दिए गए या देरी का शिकार हुए. यह दिखाता है कि यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अब यह पब्लिक इश्यू बन चुका है।  लोगों को डर है कि कंपनियां उनके संसाधनों का इस्तेमाल करके AI चला रही हैं, लेकिन उसका फायदा आम जनता को उतना नहीं मिल रहा. खासकर पानी की कमी वाले इलाकों में यह चिंता और ज्यादा गहरी है।  यूनाइटेड नेशन्स से जुड़ी रिपोर्ट्स में भी साफ चेतावनी दी गई है कि AI का यह बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर पानी, जमीन और क्लाइमेट तीनों पर दबाव बना रहा है. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से पानी की कमी है, वहां डेटा सेंटर का विस्तार बड़ी समस्या बन सकता है।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI की ज्यादातर बिजली खपत ट्रेनिंग में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में होती है. IEA के विश्लेषण के मुताबिक करीब 80 से 90 प्रतिशत ऊर्जा खपत ‘इंफेरेंस’ में होती है, यानी जब आप और हम AI से सवाल पूछते हैं।  मतलब हर बार जब आप ChatGPT से सवाल पूछते हैं, फोटो बनाते हैं या AI वीडियो जनरेट करते हैं, तो उसके पीछे सर्वर चालू होते हैं, बिजली खर्च होती है और उन्हें ठंडा रखने के लिए पानी भी लगता है. यानी AI जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, उतना ही ज्यादा संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा।  इसका कोई समाधान है? टेक कंपनियां अब ग्रीन एनर्जी, रीसायकल पानी और नए कूलिंग सिस्टम पर काम कर रही हैं. कई कंपनियां दावा करती हैं कि वे अपने डेटा सेंटर को सोलर या विंड एनर्जी से चलाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन असली चुनौती यह है कि AI की डिमांड इतनी तेजी से बढ़ रही है कि ये प्रयास पीछे छूट सकते हैं।  आज AI हमारी जिंदगी आसान बना रहा है, लेकिन अगर यही टेक्नोलॉजी भविष्य में पानी और बिजली की कमी की वजह बन जाए, तो यह एक नई समस्या पैदा कर सकती है. AI का फ्यूचर जितना स्मार्ट दिखता है, उसका पर्यावरण पर असर उतना ही गंभीर होता जा रहा है।  क्या दुनिया AI और नेचर के बीच बैलेंस बना पाएगी, या फिर टेक्नोलॉजी की यह रफ्तार हमें एक नए संकट की तरफ ले जा रही है? 

सफेद, ब्राउन या रेड राइस: सेहत के लिए कौन सा चावल सबसे बेहतर?

भारत के लगभग हर घर में चावल के बिना लंच या डिनर अधूरा रहता है और इसके लिए लोग चावल को किसी न किसी रूप में अपने खाने में शामिल करते हैं. लेकिन जब बात हेल्थ की आती है तो अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि सफेद, ब्राउन या रेड राइस में से कौन सा ऑप्शंस चुनें. कोई सफेद चावल को ब्लड शुगर बढ़ाने वाला मानता है तो कोई ब्राउन राइस को अच्छा मानते हैं. इसके साथ ही मार्केट में रेड राइस का भी ट्रेंड जोरों पर है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि सेहत के लिए कौन सा चावल अधिक फायदेमंद है. प्रोसेसिंग से बदल जाती है न्यूट्रिशन वैल्यू न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर सीमा गुलाटी के अनुसार, इन तीनों ही चावलों की अपनी खासियत और न्यूट्रिशन वैल्यू है. सफेद चावल रिफाइन और प्रोसेस किया जाता है जिससे इसकी बाहरी परत पूरी तरह निकल जाती है. इस वजह से चावल में सिर्फ स्टार्च वाला हिस्सा ही बचता है और इसके विपरीत ब्राउन राइस में केवल ऊपरी छिलका हटाया जाता है जिससे इसके न्यूट्रिएंट्स और फाइबर बरकरार रहते हैं. वहीं रेड राइस में भी उसकी बाहरी परत बनी रहती है जिसके कारण इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अच्छी होती है. शुगर स्पाइक और कैलोरी सफेद चावल में फाइबर कम होने के कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है इसलिए यह शरीर में ग्लूकोज लेवल को तुरंत बढ़ा देता है. यही वजह है कि राजमा-चावल या बिरयानी खाने के बाद अचानक सुस्ती आने लगती है. दूसरी ओर ब्राउन और रेड राइस स्लो बर्न फूड हैं जो धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करते हैं और शुगर को कंट्रोल में रखते हैं. वैसे 100 ग्राम पके हुए सफेद चावल में करीब 130 कैलोरी होती है जबकि ब्राउन और रेड राइस में लगभग 110 कैलोरी होती है. न्यूट्रिएंट्स के मामले में कौन सा चावल बेस्ट? सफेद, ब्राउन और रेड राइस तीनों ही वैरायटी मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन से भरपूर होते हैं. हेल्थशॉर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रेड राइस में मौजूद एंथोसायनिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट इसे खास लाल रंग देता है जो हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने और सूजन को कम करने में मदद करता है. WebMD का कहना है कि लाल चावल में मौजूद कंपाउंड बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने में मदद करते हैं. हालांकि, सफेद चावल भी पूरी तरह खराब नहीं है और यह पचाने में सबसे आसान होता है. कौन सा चावल खाएं? अगर आपको डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या नहीं है और आप आसानी से पचने वाला खाना चाहते हैं तो लिमिट में सफेद चावल खा सकते हैं. लेकिन यदि आपका गोल ज्यादा फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स वाले चावल खाना हैा तो ब्राउन या रेड राइस बेहतर ऑप्शंस हैं. यदि घर में केवल सफेद चावल ही बनता है तो प्लेट को बैलेंस करने के लिए उसमें फाइबर से भरपूर सब्जियां और दाल की मात्रा बढ़ा दें.