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खून से लाल हुई अमेरिका की धरती: युवक का तांडव, अपने ही परिवार और पादरी सहित 6 को मारी गोली

वाशिंगटन अमेरिका के मिसिसिपी राज्य के एक ग्रामीण इलाके में 24 वर्षीय युवक ने तीन अलग-अलग स्थानों पर छह लोगों की हत्या कर दी। मृतकों में उसका पिता, भाई, दो रिश्तेदार, एक गिरजाघर के पादरी और पादरी के भाई शामिल हैं। आरोपी डारिका एम. मूर को शुक्रवार देर रात लगभग बारह बजे से पहले सीडरब्लफ में एक पुलिस नाके पर गिरफ्तार किया गया। इससे पहले स्थानीय, राज्य और संघीय एजेंसियों के दर्जनों अधिकारी उत्तर-पूर्वी मिसिसिपी क्षेत्र में तैनात कर दिए गए थे। मूर को सोमवार को अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। क्ले काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी स्कॉट कोलम ने कहा कि वह मृत्युदंड की मांग करेंगे। क्ले काउंटी के शेरिफ एडी स्कॉट ने कहा कि साक्ष्यों और गवाहों से स्पष्ट है कि मूर अकेला हमलावर था और किसी अन्य के घायल होने की सूचना नहीं है। जांचकर्ता अभी उससे पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन हमले के पीछे की मंशा स्पष्ट नहीं है। जांचकर्ताओं के अनुसार, मूर ने शुक्रवार को सबसे पहले पश्चिमी क्ले काउंटी में अपने परिवार के एक अस्थायी मकान में अपने पिता ग्लेन मूर (67), भाई क्विंटन मूर (33) और एक रिश्तेदार विली एड गाइन्स (55) की हत्या की।   इसके बाद वह अपने भाई का ट्रक लेकर एक रिश्तेदार के घर गया, जहां उसने जबरन अंदर घुसकर यौन अपराध का प्रयास किया और सात साल की बच्ची की गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में वह एक छोटे-से चर्च में पहुंचा, जहां उसने पादरी बैरी ब्रैडली और उनके भाई सैमुअल ब्रैडली की हत्या कर दी। चार घंटे से अधिक समय बाद उसे पुलिस ने पकड़ लिया।  

हिंदू किसान की हत्या से पाकिस्तान में उबाल, सड़कों पर उतरा जनाक्रोश

पेशावर पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक जमींदार ने अपनी जमीन पर झोपड़ी बनाने के कारण 23 वर्षीय हिंदू किसान की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद हिंदू समुदाय ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। बदीन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कमर रजा जसकानी ने बताया कि पुलिस ने शनिवार रात हैदराबाद से मकान मालिक सरफराज निजामानी और उसके सहयोगी जफरुल्लाह खान को गिरफ्तार कर लिया। बदीन जिले के तलहार गांव में आश्रय के लिए निजामानी की जमीन पर एक झोपड़ी बनाने के आरोप में चार जनवरी को कैलाश कोहली को गोली मार दी गई थी।   जसकानी ने कहा, ‘‘आरोपी के घटनास्थल से फरार होने और भूमिगत हो जाने के बाद इस मामले में एक विशेष टीम का गठन किया गया था लेकिन हमने आखिरकार उसे कल रात हैदराबाद के फतेह चौक इलाके से गिरफ्तार कर लिया।'' कोहली की हत्या के बाद हिंदू समुदाय में आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने इसके विरोध में प्रदर्शन किए। निजामानी नहीं चाहता था कि कोहली उसकी जमीन पर झोपड़ी बनाए। गोली लगने से घायल कोहली ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस संबंध में उनके भाई पून कुमार कोहली ने प्राथमिकी दर्ज कराई जिसके बाद पुलिस टीम का गठन किया गया।   सिंध में हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए एक कल्याणकारी ट्रस्ट चलाने वाले शिव काची ने कहा, ‘‘हिंदू समुदाय द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से बनाए गए जन दबाव के कारण आरोपी की गिरफ्तारी हुई। बदीन में सैंकड़ों लोग विरोध प्रदर्शनों और धरनों के लिए एकत्रित हुए थे। सिंध के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) जावेद अख्तर ओधो ने कोहली के पिता को फोन करके गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन खत्म हुए।'' काची ने निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद जताई ताकि हिंदू समुदाय भयानक अपराधों से सुरक्षित रहे और अधिकारियों पर उनका विश्वास बहाल हो सके।  

ब्रिटेन में भड़का ईरान विरोध, दूतावास पर लगा झंडा उतारकर किया गया विरोध प्रदर्शन

लंदन ईरान में सुलग रहा जनआक्रोश अब सीमाओं को पार कर चुका है, और दुनिया के बड़े शहरों में इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। ईरानी प्रदर्शनों की आग अब यूरोप तक फैल गई है। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक प्रदर्शनकारी ने ईरानी दूतावास की इमारत से ईरान का राष्ट्रीय ध्वज उतारकर फाड़ दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान संकट की गूंज और तेज हो गई है। यह घटना उस समय हुई जब लंदन में बड़ी संख्या में ईरानी प्रवासी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सरकार-विरोधी समर्थक सड़कों पर उतरकर तेहरान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ईरान में जनता की आवाज़ को गोलियों, गिरफ्तारियों और इंटरनेट बंदी के ज़रिये दबाया जा रहा है।   प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक प्रदर्शनकारी दूतावास की बालकनी के पास पहुंचा और वहां लगा ईरानी झंडा उतारकर फाड़ दिया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे ईरानी शासन के खिलाफ प्रतीकात्मक विद्रोह के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाही मुर्दाबाद”, “खामेनेई हटाओ” और “ईरान को आज़ादी दो” जैसे नारे लगाए। कई लोगों ने हाथों में ईरान में मारे गए प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े पोस्टर भी पकड़ रखे थे।ब्रिटिश पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि किसी बड़े टकराव की खबर नहीं है, लेकिन सुरक्षा कारणों से ईरानी दूतावास के आसपास पुलिस बल बढ़ा दिया गया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दूतावास की सुरक्षा में कोई चूक तो नहीं हुई।   विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि ईरान में जारी आंदोलन अब केवल घरेलू मुद्दा नहीं रहा। यूरोप, कनाडा और अमेरिका में बसे ईरानी समुदाय लगातार अपने देशों की सरकारों से तेहरान पर दबाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान में अब तक सैकड़ों प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और हजारों को हिरासत में लिया गया है। इंटरनेट और संचार सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वास्तविक हालात सामने आना मुश्किल हो गया है। लंदन में दूतावास से झंडा फाड़े जाने की घटना को ईरानी शासन के लिए एक कूटनीतिक शर्मिंदगी माना जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे प्रदर्शन बढ़ते रहे, तो ईरान पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव और गहरा सकता है।

पश्चिम बंगाल में BLO ने की आत्महत्या, स्कूल के कमरे में फंदे से लटका मिला शव

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) स्कूल के एक कमरे में फंदे से लटके मिले। परिवार का सीधा आरोप है कि एसआईआर के अत्यधिक कार्यभार और दोहरी जिम्मेदारियों ने उन्हें इतना तोड़ दिया कि उन्होंने अपनी जान दे दी। रानीतला पुलिस थाने के एक अधिकारी के अनुसार, मृतक की पहचान हमीमुल इस्लाम (47 वर्ष) के रूप में हुई है। वे पैकमरी चार कृष्णपुर बॉयज प्राइमरी स्कूल में शिक्षक थे और खारिबोना ग्राम पंचायत के अंतर्गत पुरबा अलापुर गांव में एक मतदान केंद्र पर बीएलओ के रूप में तैनात थे। मृतक के परिवार ने बताया कि हमीमुल शनिवार सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन दोपहर तक वापस नहीं लौटे। काफी तलाश के बाद शनिवार रात को विद्यालय परिसर के एक कमरे में उनका शव फंदे से लटका हुआ मिला।   इसके बाद घटना की जानकारी स्थानीय थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि शिक्षक और बीएलओ की दोहरी जिम्मेदारियों से उत्पन्न भारी कार्यभार के कारण हमीमुल गंभीर तनाव में थे। परिवार का दावा है कि हाल के हफ्तों में एसआईआर से जुड़े कार्यों को पूरा करने का दबाव बहुत बढ़ गया था। हमीमुल के बड़े भाई फरमान-उल-कलाम ने आरोप लगाया कि एसआईआर के कर्तव्यों को पूरा करने का दबाव उनकी भाई की क्षमता से कहीं अधिक था। शायद इसी कारण उन्होंने फंदे से लटकर जान दे दी। दूसरी ओर इसको लेकर अब सियासत भी शुरू हो गई है। भगबंगोला के तृणमूल कांग्रेस विधायक रियाज हुसैन सरकार ने परिवार से मुलाकात की और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर प्रक्रिया में जल्दबाजी कर रहा है, जिसके कारण बीएलओ पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमीमुल इस्लाम को बहुत अधिक कार्य सौंपे गए थे, जिनमें मानचित्रण और मानचित्रण हटाने जैसे काम शामिल थे।

घर में वारदात: परिवार को बेहोश कर लूट, पूजा खेडकर का नौकरानी पर शक

पुणे आईएएस की नौकरी से हाथ धो चुकी ने पूजा खेडकर ने अपनी नौकरानी पर लूटपाट का आरोप लगाया है। पूजा खेडकर का दावा है कि नौकरानी ने उन्हें और उनके माता-पिता को बेहोश दिया। इसके बाद घर से कीमती चीजें चोरी करके भाग गई। खेडकर ने शनिवार रात इस बारे में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुणे पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है। बता दें कि फर्जी डॉक्यूमेंट्स मामले में पूजा खेडकर को आईएएस की नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद से उनका नाम लगातार विवादों में रहा है।   नेपाल की थी घरेलू सहायिका पूजा खेडकर ने पुलिस को बानेर रोड स्थित अपने परिवार के बंगले पर शनिवार देर रात हुई इस कथित घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि हाल ही में काम पर रखी गई नेपाल की निवासी घरेलू सहायिका ने उन्हें और उनके माता-पिता (मनोरमा एवं दिलीप खेडकर) को नशीली दवाएं देकर बेहोश कर दिया तथा उन्हें बांधकर उनके मोबाइल फोन और कुछ कीमती सामान लेकर फरार हो गई। पूजा खेडकर ने दावा किया कि वह किसी तरह खुद को मुक्त कर पाईं और दूसरे फोन का इस्तेमाल करके पुलिस को सूचित किया। पुलिस को विवरण का इंतजार अधिकारी ने बताया कि खेडकर ने टेलीफोन पर घटना की सूचना दी, लेकिन अब तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई है और न ही चोरी हुए अन्य सामान के बारे में विवरण दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। खेडकर दंपति के खिलाफ पिछले साल नवी मुंबई में सड़क पर झगड़े के बाद एक ट्रक चालक के अपहरण के सिलसिले में एक मामला दर्ज किया गया था। पूजा खेडकर पर 2022 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षण का लाभ लेने के लिए आवेदन में तथ्यों को छुपाने का आरोप है, लेकिन उन्होंने अपने खिलाफ सभी आरोपों का खंडन किया है।  

आतंकी मसूद अजहर का नया ऑडियो जारी, सुसाइड बॉम्बरों की धमकी के बाद भारत सतर्क

वाशिंगटन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का एक सनसनीखेज ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में वह भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए दावा कर रहा है कि उसके पास हजारों सुसाइड बॉम्बर तैयार हैं, जो किसी भी क्षण हमला करने के लिए बेताब हैं। तो वैश्विक मीडिया दहल जाएगा… अजहर ने डराने वाले लहजे में कहा कि एक हजार से अधिक आत्मघाती हमलावर उस पर भारत में घुसपैठ की अनुमति देने का दबाव बना रहे हैं। उसने चेतावनी दी कि यदि हमलावरों की असली संख्या उजागर हुई, तो वैश्विक मीडिया दहल जाएगा। यह ऑडियो स्पष्ट करता है कि प्रतिबंधित संगठन अभी भी बड़ी आतंकी साजिश रचने में जुटा है।   'ऑपरेशन सिंदूर' से टूटी कमर और बौखलाहट विशेषज्ञों का मानना है कि मसूद अजहर की यह धमकी उसकी बढ़ती बौखलाहट का नतीजा है। दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में जैश-ए-मोहम्मद को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई में अजहर के कई करीबी रिश्तेदार और चोटी के कमांडर मारे गए थे। जानकारों के अनुसार, जब कोई आतंकी संगठन भारी दबाव में होता है, तो वह अपने कैडर्स का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसे ऑडियो संदेश जारी करता है। जांच के घेरे में 'साजिश' और सुरक्षा की तैयारी फिलहाल यह ऑडियो सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में जैश के पास इतनी बड़ी संख्या में फिदायीन हमलावर हैं या यह केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है? हालांकि, ऑडियो की गंभीरता को देखते हुए देश की सुरक्षा में तैनात शीर्ष कमान ने निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित घुसपैठ या हमले को नाकाम किया जा सके।  

जंग की धमकी तेज: ईरान बोला– अमेरिकी हमले पर इजराइल समेत सैन्य बेस होंगे निशाने पर, प्रदर्शनकारियों को फांसी

ईरान ईरान में इस्लामी शासन को चुनौती देते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं। राजधानी तेहरान, दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद और कई अन्य इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। ईरान में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं पूरी तरह बंद हैं, जिससे वास्तविक हालात की जानकारी बाहर पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। विदेशों में आशंका जताई जा रही है कि सूचना ब्लैकआउट का फायदा उठाकर ईरानी सुरक्षा बल निर्मम कार्रवाई कर सकते हैं। इसी बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ ने अमेरिका और इजरायल को सीधी धमकी दी। संसद में “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारों के बीच उन्होंने कहा,“अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इजरायल और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने हमारे वैध लक्ष्य होंगे।” क़ालीबाफ ने यह भी कहा कि ईरान सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खतरे के संकेत मिलते ही पहले भी हमला कर सकता है। हालांकि किसी भी युद्ध का अंतिम फैसला 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथ में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कहा है कि अमेरिका ईरान के लोगों के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप से खेल मत खेलिए, वह जो कहते हैं, करके दिखाते हैं।”   मीडिया और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को ईरान पर हमले के सैन्य विकल्प सौंपे गए हैं, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। तेहरान के पुनाक इलाके में हजारों लोग सड़कों पर मोबाइल की रोशनी जलाकर प्रदर्शन करते दिखे, जबकि मशहद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। कूड़ेदानों में आग लगाई गई और सड़कों को जाम किया गया। मशहद में स्थित इमाम रज़ा दरगाह के कारण वहां के प्रदर्शन शासन के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों और उनकी मदद करने वालों को “ईश्वर का दुश्मन” माना जाएगा  यह आरोप मृत्युदंड तक ले जा सकता है। ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को तब शुरू हुए थे, जब ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख से नीचे चली गई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव में पहले से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था ने आग में घी का काम किया।

‘पिंक कोकीन’ से दहशत: अमेरिका में उभरा खतरनाक नशा, खाते ही शरीर का रंग बदलने का दावा

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई चल रही है। कैरेबियन में ड्रग बोट्स पर हमले, वेनेजुएला जैसे देशों पर सैन्य ऑपरेशन, और बड़े पैमाने पर जब्तियां। लेकिन फिर भी अमेरिका में नया खतरनाक ड्रग पिंक कोकीन (जिसे तुसी या Tuci भी कहते हैं) क्लबों और पार्टियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Axios की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग अब बड़े शहरों से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है, और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।   पिंक कोकीन आखिर है क्या? असल में यह कोकीन नहीं है, बल्कि एक खतरनाक कॉकटेल है यानी कई नशीले पदार्थों का मिश्रण। मुख्य रूप से इसमें केटामाइन (डिसोसिएटिव) और एमडीएमए (एक्सटेसी) होते हैं। जांच में अक्सर मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स, फेंटानिल जैसे घातक तत्व भी मिलते हैं। ऊपर से इसे आकर्षक बनाने के लिए गुलाबी फूड कलरिंग मिलाई जाती है, जो देखने में 'कूल' लगता है। यही वजह है कि हर बैच अलग होता है। कोई हल्का लगता है, तो कोई सीधे जान ले लेता है। ओवरडोज होने पर सांस रुक सकती है, दिल की धड़कन बिगड़ सकती है, और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से नीला पड़ना ( Cyanosis) जैसी स्थिति आ सकती है। यह ड्रग नहीं, जहर है दरअसल, हाल के महीनों में अमेरिका के कई बड़े शहरों जैसे लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में पिंक कोकीन से जुड़े छापे और चेतावनियां जारी हुई हैं। 2025 में न्यूयॉर्क में एक तस्करी केस में पिंक कोकीन के साथ दर्जनों हथियार जब्त किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 तक कई मौतें इससे जुड़ी पाई गईं। बताया जा रहा है कि 2024 की शुरुआत से अब तक चार राज्यों में कम से कम 18 मामले सामने आए, जिनमें ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। कहां से शुरुआत? अब सवाल उठता है कि इसकी शुरुआत कहां से हुई? बताया जाता है कि इसकी शुरुआत कोलंबिया से मानी जाती है, जहां इसे क्लब और पार्टी ड्रग के तौर पर पेश किया गया। वहां इसे 2सी (एक साइकेडेलिक ड्रग) से प्रेरित होकर 'तुसी' नाम दिया गया और गुलाबी रंग को ब्रांडिंग बना दिया। धीरे-धीरे यह लैटिन अमेरिका से अमेरिका और यूरोप तक फैल गया। एक्सपर्ट का कहना है कि पिंक कोकीन अब सिर्फ एक ड्रग नहीं, बल्कि एक 'कॉन्सेप्ट' बन चुका है। तस्करों को किसी फिक्स सप्लाई की जरूरत नहीं है, जो भी नशे उपलब्ध हों, उन्हें मिलाकर नया बैच तैयार कर देते हैं। यह कैसे बन जाता है जानलेवा? रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा यह है कि पिंक कोकीन का कोई सीधा इलाज या एंटीडोट नहीं है। डॉक्टर और फर्स्ट रिस्पॉन्डर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं, जब तक नशा शरीर से बाहर न निकल जाए। कई बार जान बचाना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब यह ड्रग सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण इलाकों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

चीन से पाक तक जुड़े तार, ताइवानी सरगना निकला डिजिटल ठगी का मास्टरमाइंड; 100 करोड़ की ठगी उजागर

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।   कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं। यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं। फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए। जांच और गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई। सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे। ताइवानी कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साजिश फॉरेंसिक जांच से खुलासा हुआ कि SIM बॉक्स डिवाइस ताइवानी नागरिकों द्वारा सप्लाई और कॉन्फिगर किए गए थे। इनका समन्वय एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए किया जा रहा था। पुलिस ने रणनीतिक जाल बिछाकर ताइवान के नागरिक आई-त्सुंग चेन (30) को भारत बुलाया और 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, चेन इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था और कथित तौर पर ताइवान-आधारित अपराधी गिरोह के लिए काम कर रहा था, जिसका नेतृत्व गैंगस्टर शांगमिन वू करता है। पाकिस्तान, क्रिप्टो और दक्षिण भारत तक फैला नेटवर्क जांच आगे बढ़ने पर मोहाली (पंजाब) में SIM बॉक्स हब मिला, जहां से सरबदीप सिंह और जसप्रीत कौर को गिरफ्तार किया गया। दोनों पहले कंबोडिया स्थित स्कैम कॉल सेंटर्स में काम कर चुके थे। आरोप है कि एक पाकिस्तानी हैंडलर इस नेटवर्क को फंडिंग और दिशा-निर्देश दे रहा था। जांच में पाकिस्तान-ऑरिजिन IMEI नंबरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिसे पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता मान रही है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल का खुलासा हुआ, जहां से दिनेश के. को गिरफ्तार किया गया। वहीं मुंबई के मलाड इलाके से एक और SIM बॉक्स सेटअप बरामद हुआ और अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी विस्तृत और अत्याधुनिक था। जांच में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों और बाकी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों की तलाश जारी है। यह मामला भारतीय नागरिकों के खिलाफ भय और आतंक के नाम पर चलाए गए संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध को उजागर करता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और ऐसी धमकियों पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की है।

देशभर में टेरर का नेटवर्क: 6 गैंग का मास्टरमाइंड असली रहमान डकैत सूरत में दबोचा गया

सूरत रहमान डकैत की दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है… इस एक डायलॉग ने फिल्म धुरंधर में निभाए एक किरदार ने अक्षय खन्ना को सदा के लिए लोगों का दीवाना बना दिया है। लोगों को फिल्म से ही मालूम चला कि पाकिस्तान के लियारी में खौफ का दूसरा नाम रहे रहमान की कितनी दहशत थी,लेकिन हम आपसे कहें कि भारत में भी एक रहमान डकैत है, तो शायद आप चौंक जाएं। गुजरात के सूरत में पुलिस को कई राज्यों तक फैले नेटवर्क और गैंग चलाकर खतरनाक वारदात को अंजाम देने वाले रहमान डकैत को गिरफ्तार किया है। रहमान डकैत का नाम असल में राजू ईरानी ऊर्फ आबिद अली उर्फ रहमान डकैत है। एमपी का ये खतरनाक अपराधी सूरत क्राइम ब्रांच ने बकायदा भारत के असल अपराधी रहमान डकैत की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि सूरत सिटी क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय इरानी गैंग के सरदार आबिद अली उर्फ राजू उर्फ रहमान डकैत को सूरत में किसी वारदात को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। वह कई राज्यों में अपराध करने के लिए जाना जाता है। यह एक 'इरानी गैंग' है जो अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है, यानी यह गैंग एक से अधिक राज्यों में अपराध करता है। बता दें कि राजू ईरानी उर्फ रहमान डकैत असल में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का रहने वाला है। सूरत क्राइम ब्रांच के डीसीपी भावेश रोजिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि रहमान डकैत सूरत में किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से आया था, हमें जैसे ही सूचना मिली हमने उसे पकड़ लिया। कई चौंकाने वाले खुलासे पुलिस की पूछताछ में इस खतरनाक अपराधी के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी राजू ईरानी भोपाल के ‘ईरानी डेरा’ इलाके से अपना पूरा नेटवर्क चलाता है। वह अपने भाई जाकिर अली के साथ मिलकर इस पूरे गिरोह को संभालता है। इनके नीचे 6 से ज्यादा अलग-अलग गैंग काम कर रहे हैं, जो देश के 14 राज्यों में सक्रिय हैं। राजू ईरानी फिलहाल 6 से अधिक राज्यों की पुलिस की तलाश में है और उसके खिलाफ 10 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं। राजू उर्फ रहमान डकैत खुद अपराध करने कम जाता था। वह एक मैनेजर की तरह यह तय करता था कि कौन सी गैंग किस राज्य में जाएगी और क्या काम करेगी। यह गिरोह ज्यादातर सीनियर सिटीजन (बुजुर्गों) को अपना शिकार बनाता था। कभी खुद को पुलिस या CBI अफसर बताकर लोगों को डराते और उनके गहने उतरवा लेते थे। रास्ते में फर्जी चेकिंग के बहाने लोगों की नकदी और जेवर लूट लेते थे। लूट के अलावा यह गिरोह जमीनों पर कब्जा करने, अवैध हथियार रखने और चोरी का सामान बेचने जैसे कामों में भी शामिल है।