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अध्ययन: अमीर लोग जलवायु परिवर्तन के लिए गरीबों की तुलना में 680 गुना जिम्मेदार

नई दिल्ली वैश्विक जलवायु संकट के पीछे सिर्फ अमीरों की उपभोग की आदतें ही नहीं, बल्कि उनकी संपत्ति और निवेश भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। जारी ‘क्लाइमेट इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2025’ (Climate Inequality Report 2025) के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 1% अमीर लोग वैश्विक उपभोग-आधारित उत्सर्जन (consumption-based emissions) का 15% हिस्सा रखते हैं, लेकिन निजी पूंजी स्वामित्व से जुड़े 41% उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमीरों की संपत्ति और निवेश जलवायु परिवर्तन को गहराने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि उनके पास ऐसे निवेश हैं जो उच्च-कार्बन उद्योगों से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दशकों में जलवायु से संबंधित निवेशों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो 2050 तक वैश्विक शीर्ष 1% के हाथों में संपत्ति की हिस्सेदारी बढ़कर 46% तक पहुंच सकती है, जो फिलहाल 38.5% है। इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘Climate Change: A Capital Challenge – Why Climate Policy Must Tackle Ownership’ है। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जलवायु नीति को केवल उत्सर्जन घटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संपत्ति के स्वामित्व और निवेश की दिशा पर भी ध्यान देना आवश्यक है। क्या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक उत्सर्जन के 41% के लिए निजी पूंजी ज़िम्मेदार है, जबकि दुनिया के शीर्ष 1% अमीर लोग वैश्विक उपभोग आधारित उत्सर्जन के 15% के लिए ज़िम्मेदार हैं। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि जलवायु परिवर्तन आर्थिक असमानता को आने वाले में समय और गहरा कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर दुनिया के सबसे अमीर 1% लोग अगले दशकों में सभी ज़रूरी जलवायु निवेश करते हैं और उसके मालिक बनते हैं, तो इनकी मौजूदा संपत्ति का हिस्सा वर्तमान 38.5% से बढ़कर 2050 में 46% हो सकता है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अमीर लोग अक्सर उच्च उत्सर्जन वाले उद्योगों में शेयरधारक के रूप में नज़र आते है। अमीरों का कार्बन उत्सर्जन 14% बढ़ा, गरीबों का 27% घटा बुधवार को ही जारी जलवायु परिवर्तन पर ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट के अनुसार यूरोप के सबसे अमीर 0.1% समूह से एक व्यक्ति सबसे निचले 50% समूह के एक व्यक्ति की तुलना में 53 गुना ज़्यादा कार्बन उत्सर्जन करता है। रिपोर्ट के अनुसार 1990 के बाद से यूरोप के सबसे अमीर 0.1% लोगों ने कुल उत्सर्जन में अपने हिस्से में 14% की वृद्धि की है, जबकि निचले वर्ग के आधे लोगों ने अपने हिस्से में 27% की कटौती की है। गरीबों की तुलना में अमीर लोग 680 गुना ज़िम्मेदार दोनों रिपोर्ट्स से एक बात तो साफ हो गई है कि जलवायु परिवर्तन के लिए गरीबों की तुलना में अमीर लोग ज़्यादा ज़िम्मेदार होते हैं। डेटा पर गौर किया जाए, तो गरीबों की तुलना में अमीर लोग जलवायु परिवर्तन के लिए 680 गुना ज़िम्मेदार होते हैं।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में इंटरनेट ठप, सरकार ने 24 घंटे के ब्लैकआउट का दिया आदेश

क्वेटा  बलूचिस्तान की सरकार ने क्वेटा में 'असामान्य और गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति' के कारण शुक्रवार को मोबाइल डेटा सर्विस को निलंबित कर दिया। स्थानीय मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार यह निलंबन 24 घंटे के लिए किया गया है। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को भेजे गए एक पत्र में, बलूचिस्तान सरकार ने पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से मोबाइल डेटा सर्विस को निलंबित करने का आदेश दिया। बलूचिस्तान की सरकार ने अनुरोध किया कि संबंधित अधिकारियों को 31 अक्टूबर को क्वेटा में 3जी/4जी इंटरनेट सेवाओं को 24 घंटे के लिए निलंबित करने का निर्देश दिया जाए। पत्र में कहा गया है, "कानून-व्यवस्था की स्थिति और खतरे की आशंकाओं के कारण, क्वेटा जिले में 3जी और 4जी सेवाओं को बंद करना आवश्यक है।" इससे पहले बलूच सरकार ने अगस्त में 'सुरक्षा कारणों' का हवाला देते हुए मोबाइल डेटा सेवाओं को निलंबित किया था। हालांकि, बलूचिस्तान उच्च न्यायालय (बीएचसी) ने मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया था। इसके ठीक दो महीने बाद फिर से बलूचिस्तान में 24 घंटे के लिए सेवा निलंबित की गई है। अगस्त में इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के कारण बलूचिस्तान में शिक्षा, ऑनलाइन व्यवसाय और मीडिया रिपोर्टिंग में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अधिकारियों ने कहा था कि यह निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों पर, खासकर पाकिस्तान में राष्ट्रीय दिवस समारोहों के आसपास बढ़ते तनाव को देखते हुए लिया गया था। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों, व्यवसायियों, पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी। ऑनलाइन कक्षाओं में जुड़े छात्रों ने कहा था कि वे डिस्कशन में शामिल नहीं हो पा रहे थे और न ही असाइनमेंट जमा कर पा रहे थे। ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर थी, जहां छात्रों के पास पहले से ही सीमित शैक्षिक संसाधन हैं। क्वेटा, तुर्बत, खुजदार और पंजगुर के फ्रीलांसरों और उद्यमियों ने बताया था कि इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के कारण उनकी आजीविका ठप हो गई। एक व्यवसायी ने कहा, "हमारा पूरा काम इंटरनेट पर निर्भर करता है। इस बंद ने हमें वित्तीय संकट के कगार पर ला खड़ा किया है।"

शी जिनपिंग और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति आमने-सामने, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हुई बड़ी चर्चा

ग्योंगजू दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने शुक्रवार को पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। शी जिनपिंग एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण-पूर्वी शहर ग्योंगजू पहुंचे हैं। ली ने ग्योंगजू ह्वाबेक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में शी के आगमन पर उनका स्वागत किया। जैसे ही चीनी राष्ट्रपति हॉल के प्रवेश द्वार पर ली जे म्युंग के पास पहुंचे, ली ने मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया, संक्षेप में "स्वागत" कहा और फोटो सत्र के लिए हाथ मिलाया। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने शी को हॉल में ले जाते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि यहां तक आना आपके लिए बहुत असुविधाजनक नहीं रहा होगा।" ली ने अन्य अतिथियों का भी स्वागत किया, जिनमें जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट, रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक और संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के युवराज खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान शामिल थे। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नीली टाई और नेवी रंग का सूट पहने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति सुबह 9:15 बजे हल्की मुस्कान के साथ एपीईसी नेताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए तैयार थे। शी जिनपिंग गुरुवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर दक्षिण कोरिया पहुंचे थे। यह उनकी 11 साल में पहली दक्षिण कोरिया यात्रा है। दोनों नेताओं के बीच शनिवार को पहली शिखर वार्ता होगी। इससे पहले दिन, ली जे म्युंग ने मुक्त व्यापार व्यवस्था में बदलाव और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एपीईसी की सदस्य अर्थव्यवस्थाओं से घनिष्ठ सहयोग की अपील की। इस बैठक में 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के नेता और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। ली ने कहा, "हम सभी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।" "मुक्त व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है, जिससे व्यापार और निवेश की गति धीमी हो रही है।"

खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: पाकिस्तान तैयार कर रहा ISIS के 1,000 आतंकी, जम्मू-कश्मीर पर नजर

नई दिल्ली पाकिस्तान की सेना इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर रही है। आईएस आतंकियों को पाकिस्तानी सेना न केवल हथियार मुहैया करा रही है, बल्कि आतंकी संगठन के कमांडरों को स्पेशल ट्रेनिंग देने का काम भी कर रही है। पाकिस्तान का मकसद अपने पड़ोसियों के खिलाफ आईएसआई आतंकियों का इस्तेमाल करना है। इसके लिए पाकिस्तान ने चार शिविर स्थापित किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान धीरे-धीरे इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) के कुछ आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ सकता है। डूरंड रेखा को लेकर अफगान तालिबान के साथ तनाव बढ़ने के बाद से, पाकिस्तान और आईएसकेपी के आतंकवादियों के बीच बीते कुछ समय में नजदीकी बढ़ी है। यही कारण है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले भी किए हैं और तालिबान ने भी इसका कड़ा जवाब दिया। हाल के महीनों में, पाकिस्तान में खास तौर से आईएसकेपी के आतंकियों को प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनिंग कैंप की संख्या बढ़ाई है। खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई अफगान तालिबान पर हमले करने के इरादे से आईएसकेपी के 1,000 से ज्यादा आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रही है। वहीं भारतीय एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों को अलग-अलग प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आतंकवादियों को जमीन पर लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे तालिबान लड़ाकों का सामना कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मघाती हमलावरों के लिए भी प्रशिक्षण शिविर हैं। पाकिस्तानी सेना के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारी, इस प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल हैं। आईएसकेपी जब से अस्तित्व में आया है, तब से वह तालिबान के साथ संघर्षरत है। आईएसकेपी का मकसद अफगानिस्तान से तालिबान शासन को उखाड़ फेंककर शासन करने का है। विशेषज्ञों की मानें तो आईएसकेपी के कई सदस्यों को अफगानिस्तान से पाकिस्तान लाया जा रहा है और फिर उन्हें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के कबायली इलाकों में स्थित कैंपों में भेजा जा रहा है। अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने मोहम्मद नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। मोहम्मद की गिरफ्तारी से इस दावे की पुष्टि हो गई कि पाकिस्तान आईएसकेपी आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र बन गया है। हिरासत में लिए गए आतंकवादी ने सुरक्षा अधिकारियों को बताया कि उसने पाकिस्तान के क्वेटा में युद्ध प्रशिक्षण लिया था। जब वह फर्जी पहचान पत्र के साथ अफगानिस्तान में दाखिल हुआ था, तब उसका नाम मोहम्मद था। आईएसआई ने उसे अपने विचारों से प्रभावित करने के लिए काफी प्रयास किए थे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल आईएसकेपी का पूरा फोकस अफगानिस्तान पर है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इसका पूरे क्षेत्र पर असर पड़ सकता है। आईएसकेपी की नजर भारत पर भी है और आने वाले समय में अफगानिस्तान से बाहर भी अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर सकता है। जब आईएसकेपी की स्थापना हुई थी, तब उसका फोकस तालिबान को हराना था, हालांकि उसने यह भी साफ कर दिया था कि वह एक खिलाफत स्थापित करने में रुचि रखता है जिसमें भारत भी शामिल हो। इस आतंकी समूह ने जम्मू-कश्मीर में तनाव पैदा करने में काफी रुचि दिखाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान धीरे-धीरे आईएसकेपी के कुछ आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर भेज सकता है। आईएसआई को लगता है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के अलावा घाटी में एक और आतंकी समूह होने से उनकी लड़ाई और मजबूत हो जाएगी। जिस तरह से पाकिस्तानी सेना आतंकी संगठनों के साथ खुलकर प्रशिक्षण का काम कर रहा है, इससे भारतीय एजेंसियों के लिए एक और चिंता जरूर बढ़ गई है। अटकलें लगाई जा रही है कि आईएसकेपी सीमा से सटे इलाकों से भारतीय युवाओं को टारगेट करेगा और उनका ब्रेनवॉश करके उन्हें ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजेगा। हाल ही में हुई गणना के अनुसार, केरल के कम से कम 21 लोग देश छोड़कर अफगानिस्तान में आईएसकेपी में शामिल हो गए हैं। उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा था ताकि बाद में उन्हें भारत वापस भेजकर आतंकी हमले किए जा सकें।

राजनाथ सिंह का सख्त रुख: भारत दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र नौवहन और कानून आधारित व्यवस्था का समर्थक

नई दिल्ली भारत ने आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों की एक बैठक में काउंटर टेररिज्म का मुद्दा उठाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया में बोलते हुए कहा कि भारत आपदा राहत, आतंक-विरोधी गतिविधियों, और समुद्री सुरक्षा में योगदान देता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण चीन सागर में मुक्त नेविगेशन व अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का समर्थन करता है। मलेशिया की अध्यक्षता में 31 अक्टूबर को एक अनौपचारिक बैठक हुई, जिसमें भारत और आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि वह आपदा राहत, काउंटर टेररिज्म, और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। साथ ही कहा गया कि दक्षिण चीन सागर में मुक्त नेविगेशन तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन महत्वपूर्ण है। इस तरह से भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री अधिस्वीकृति, एवं बहुपक्षीय रक्षा संवाद की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लिया। बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को मलेशिया पहुंचे, जहां वे आगामी दो दिनों तक विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। जहां राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रियों के एक सम्मेलन का हिस्सा बने, वहीं वे कई देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर रहे हैं। यह वार्ता मलेशिया में ही हो रही है। इसी क्रम में राजनाथ सिंह आसियान-प्लस सदस्य देशों के अपने समकक्ष से भी मुलाकात कर रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ही कुआलालंपुर, मलेशिया में मलेशिया के रक्षा मंत्री मोहम्मद खालिद नोरदिन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ से भी मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान 10 वर्षीय ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों के बीच हुए इस करार को भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ के साथ बैठक बेहद सार्थक रही। हमने 10 वर्षों के ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए हैं। यह हमारे पहले से मजबूत रक्षा सहयोग में एक नए युग की शुरुआत करेगा। राजनाथ सिंह का कहना है कि यह फ्रेमवर्क भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम को नीतिगत दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि यह हमारे बढ़ते रणनीतिक सामंजस्य का प्रतीक है और साझेदारी के नए दशक का शुभारंभ करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा सहयोग भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारी साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

PM मोदी का सम्मान भाषण: आर्य समाज ने भारत को एकता और स्वाभिमान का मार्ग दिखाया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन- 2025' में भाग लिया। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती की 150वीं जयंती पर आर्य समाज के योगदान और उनके विचारों को नमन करते हुए कहा कि आर्य समाज ने पिछले डेढ़ सौ वर्षों से राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज जब आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष हो रहे हैं, तो समाज और देश स्वामी दयानंद सरस्वती जी के महान विचारों को इस विराट स्वरूप में नमन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज अपनी स्थापना से लेकर आज तक एक प्रबल राष्ट्रभक्त संस्था रही है, जिसने सदैव भारतीयता की भावना को जीवित रखा है। आर्य समाज ने विदेशी विचारधाराओं, विभाजनकारी मानसिकता और सांस्कृतिक प्रदूषण के हर दुष्प्रयास को खुलकर चुनौती दी है। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती को एक 'युगद्रष्टा महापुरुष' बताते हुए कहा कि स्वामी दयानंद ने समाज में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना। उन्होंने उस सोच को चुनौती दी, जिसने नारी को घर की चौखट तक सीमित कर रखा था। स्वामी दयानंद ने महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए आर्य समाज के विद्यालयों में बेटियों के लिए शिक्षा की शुरुआत की। जालंधर में आरंभ हुआ कन्या विद्यालय आगे चलकर कन्या महाविद्यालय बन गया और ऐसे ही संस्थानों में पढ़ी लाखों बेटियां आज राष्ट्र की नींव को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के जिन कार्यों का ऋण देश पर है, उनमें एक महान कार्य देश की गुरुकुल परंपरा को जीवित रखना भी है। एक समय गुरुकुलों की ताकत से ही भारत ज्ञान-विज्ञान के शिखर पर था। गुलामी के दौर में इस व्यवस्था पर जान-बूझकर प्रहार किए गए। इससे हमारे संस्कार नष्ट हुए, नई पीढ़ी कमजोर हुई। आर्य समाज ने आगे आकर ध्वस्त होती गुरुकुल परंपरा को बचाया। प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं की प्रगति के उदाहरण देते हुए कहा कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी दो दिन पहले ही हमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने राफेल फाइटर प्लेन में उड़ान भरी। इसमें उनकी साथी बनीं, स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह। आज हमारी बेटियां फाइटर जेट उड़ा रही हैं और ड्रोन दीदी बनकर आधुनिक कृषि को भी बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज भारत सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए एक अहम ग्लोबल एडवोकेट के तौर पर उभरा है। स्वामी विवेकानंद की वेदों की समझ को अपनाने की अपील की तरह ही, भारत अब इंटरनेशनल लेवल पर वैदिक सिद्धांतों और जीवनशैली को अपनाने की वकालत कर रहा है। इस विजन को आगे बढ़ाने के लिए, देश ने मिशन लाइफ लॉन्च किया है।

चुनाव से पहले बड़ा झटका: यूनुस की रणनीति फेल, विरोध की लहर तेज़

ढाका  बांग्लादेश में अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच चुनावी मौसम के आने से पहले नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी दोनों पर जुलाई चार्टर के कार्यान्वयन पर 'अप्रासंगिक बहस' में शामिल होने का आरोप लगाया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, एनसीपी ने यह भी आरोप लगाया कि इसने प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया और फरवरी 2026 के चुनाव पर अनिश्चितता पैदा कर दी है। बांग्लादेश के एक प्रमुख अखबार ने गुरुवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान एनसीपी के मुख्य समन्वयक नसीरुद्दीन पटवारी के हवाले से कहा, "जनमत संग्रह पहले होगा या बाद में, यह जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी के बीच एक बेतुका विवाद है। हम (एनसीपी) इस बहस में शामिल नहीं होंगे।" एनसीपी की युवा शाखा 'जातियो जुबोशोक्ति' की एक अन्य संगोष्ठी को संबोधित करते हुए, पटवारी ने कहा, "हमें अभी भी जुलाई चार्टर की सिफारिशों का कोई समाधान नहीं मिला है, हमें प्रस्तावों का कोई समाधान नहीं मिला है, न ही हमें आदेश के संबंध में कोई समाधान मिला है।" उन्होंने जनमत संग्रह का मुद्दा बार-बार उठाने के लिए जमात की भी आलोचना की। एनसीपी नेता ने सवाल किया, "अगर आप जनमत संग्रह का सवाल या चुनाव से पहले तारीख तय करने की बात कर रहे हैं, तो क्या इसका उद्देश्य ज्यादा सीटें हासिल करना है, या कोई और वजह है?" एनसीपी नेता ने जोर देकर कहा कि अगर जनमत संग्रह होता है और उसका नतीजा 'हां' आता है, तो यह बांग्लादेश की जनता की जीत होगी, जमात की नहीं। उन्होंने आगे कहा, "इसलिए, हम जमात-ए-इस्लामी से यह दिखावा बंद करने का आह्वान करते हैं।" उन्होंने राष्ट्रीय संकट के समय जमात और बीएनपी पर मिलकर देश को अनिश्चितता की ओर धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर दिया, "हम जमात से जनमत संग्रह को लेकर जनता में दहशत न फैलाने का आह्वान करते हैं। इसके बजाय, हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि असहमति की प्रक्रिया के संबंध में हम कैसे समाधान निकाल सकते हैं, कैसे आदेश जारी किए जा सकते हैं।" इसके अलावा, एनसीपी नेता ने टिप्पणी की कि बांग्लादेश राष्ट्रीय सहमति आयोग के माध्यम से बीएनपी का असहमति पत्र वास्तव में एक धोखा था। जुलाई चार्टर पर बढ़ते राजनीतिक मतभेद के बीच, बीएनपी ने हाल ही में एनसीसी पर जुलाई चार्टर पर अपनी अंतिम सिफारिशों के जरिए लोगों और राजनीतिक दलों को 'धोखा' देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने असहमति पत्रों को शामिल करके इसमें तत्काल सुधार की मांग की। दूसरी ओर, जमात ने मांग की कि जुलाई चार्टर में उल्लिखित संवैधानिक सुधारों पर जनमत संग्रह चुनाव से पहले कराया जाए, भले ही इसके लिए चुनाव स्थगित करना पड़े। जिन पार्टियों ने पहले शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए यूनुस के साथ सहयोग किया था, वे अब सुधार प्रस्तावों को लेकर आपस में भिड़ गई हैं।

रोहित आर्य का अजीबो-गरीब ड्रामा: पटाखों की आवाज़ पर बोला ‘फायरिंग चल रही है’!

मुंबई  मुंबई के पवई में बंधक संकट के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने अहम भूमिका निभाई। वह अपनी पोती के साथ ऑडिशन के लिए आई थी, जहां 50 वर्षीय रोहित आर्य नाम के शख्स ने 17 बच्चों को बंधक बना लिया था। पुलिस और दमकल विभाग बाहर बच्चों को सुरक्षित निकालने की तैयारी में जुटे थे। अंदर मंगला पाटणकर कैद बच्चों की रक्षा में लगी हुई थीं। उन्हें कांच के टुकड़ों से सिर पर चोट लगी है और वे फिलहाल अस्पताल में इलाज करा रही हैं।   अस्पताल के बिस्तर से मंगला पाटणकर ने बंधक संकट की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि रोहित आर्य ने कुछ बच्चों को उनके पास छोड़ा और बाकी को ऊपर ले गया। कुछ देर बाद वह फिर नीचे आया और मुझे भी बाकी बच्चों के साथ ऊपर आने को कहा। ऊपर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि बच्चों को कुछ सिखाया नहीं जा रहा था। वहां खिड़कियों पर काले पर्दे लगे थे। लगता था कि उसने पहले से योजना बनाई थी। उसने 4 बच्चों से उनके माता-पिता को फोन करवाया और प्रत्येक से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। आर्य लगातार कहता रहा कि उसे अभी 4 करोड़ रुपये चाहिए और उसने बंधकों को धमकी दी कि इमारत में बम रखा है। बच्चों के घरवालों ने किए फोन मंगला पाटनकर ने कहा कि आर्य पूरे समय स्वीट व्यवहार कर रहा था, लेकिन काफी ड्रामा भी कर रहा था। उसने दिवाली के पटाखे फोड़े और हमें बताया कि बाहर गोलीबारी हो रही है ताकि हम बाहर न निकलें। पाटणकर ने कहा, 'मुझे फोन आया कि बाहर बंधक संकट की खबर है तो मैंने बताया कि बच्चे मेरे साथ सुरक्षित बैठे हैं।' उन्होंने संदेह जताया कि संस्थान की एक अन्य कर्मचारी भी इस प्लान में शामिल थी क्योंकि वह डरी हुई नहीं लग रही थी। पाटनकर ने बच्चों, खासकर लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित की और बाहर इंतजार कर रहे चिंतित माता-पिता को उनके बच्चों की तस्वीरें भेजीं। 2 करोड़ रुपये बकाए का दावा रोहित आर्य ने वेब सीरीज के ऑडिशन के बहाने 17 बच्चों को बंधक बनाया था। कुछ समय बाद उसने एक वीडियो पोस्ट किया और कहा कि महाराष्ट्र शिक्षा विभाग में उसका 2 करोड़ रुपये बकाया है। 3.5 घंटे चले इस बंधक संकट का नाटकीय अंत हुआ, जब पुलिस ने पाइप से चढ़कर बच्चों को बचाया। एक अन्य पुलिसकर्मी बाथरूम की खिड़की से स्टूडियो में घुसा। इस दौरान एक बच्चे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे आर्य को गोली मारकर गिरा दिया गया और उसने दम तोड़ दिया।

बिहार-बंगाल के वोटरों के लिए बड़ी खबर: अब इस एक दस्तावेज़ से बनेगा वोटर कार्ड

कोलकाता चुनाव आयोग ने बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया से तैयार होने वाली नई मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए एक और दस्तावेज को मान्यता प्रदान की है। आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम बंगाल में गत एसआइआर (2002) से तैयार मतदाता सूची में शामिल नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता अथवा किसी निकट संबंधी का नाम बिहार में इसी साल हुए एसआइआर से तैयार मतदाता सूची में शामिल है तो उसे वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से कटने न पाए, इसलिए यह पहल की गई है। बिहार वोटर लिस्ट अब बंगाल में मान्य मालूम हो कि चुनाव आयोग ने SIR के तहत भारतीय नागरिकता के सत्यापन के लिए जो दस्तावेज निर्धारित किए हैं, उनमें केंद्र अथवा राज्य सरकार के कर्मचारी के तौर पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनभोगी होने पर इससे संबंधित परिचय पत्र, एक जुलाई, 1987 से पहले बैंक, डाकघर, एलआइसी अथवा स्थानीय प्रशासन की ओर से दिया गया कोई दस्तावेज शामिल है।   इन दस्तावेजों को किया गया शामिल  इसके अलावा जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, बंगाल शिक्षा बोर्ड की दसवीं (माध्यमिक) अथवा उससे उच्च शिक्षा संबंधी प्रमाणपत्र, राज्य सरकार के उपयुक्त प्राधिकरण की ओर से दिया गया निवास स्थल का प्रमाणपत्र, फारेस्ट राइट सर्टिफिकेट, जाति प्रमाणपत्र, किसी भी नागरिक की राष्ट्रीय पंजी, स्थानीय प्रशासन की ओर से दी गई पारिवारिक पंजी व जमीन अथवा घर के कागजात को भी शामिल किया गया है। वहीं आधार को सिर्फ पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। मतदाता सूची में आसानी अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों के नाम 2002 की मतदाता सूची होंगे, उन्हें इनमें से कोई दस्तावेज जमा करना नहीं पड़ेगा। जिनके नाम नहीं होंगे, वे 2002 की बंगाल की मतदाता सूची के साथ अब 2025 की बिहार की मतदाता सूची में अपने माता-पिता अथवा निकट संबंधी का नाम शामिल होने को प्रमाणित करके अपना नाम नई मतदाता सूची में शामिल करवा पाएंगे।  

बांग्लादेश की बड़ी गलती? दुबई से भारत का चावल खरीदकर दे रहा दोगुना दाम, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

ढाका  मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश सरकार का प्रमुख बनने के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंधों में खटास आ गई। इसके बाद भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ कई कड़े ऐक्शन लिए। अब बांग्लादेश को महंगे दाम में चावल खरीदना पड़ रहा है। वह अब दुबई के जरिए भारत का ही चावल महंगी कीमत पर लेना पड़ रहा है। बांग्लादेश के फूड डिपार्टमेंट ने भी कन्फर्म किया है कि वह जो चावल दुबई से खरीद रहा है, वह असल में भारतीय ही है। ऐसे में बांग्लादेश के हैरान एक्सपर्ट्स ने भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर में भारत का चावल, भारत के बजाए दुबई से क्यों खरीदा जा रहा। यह तो पैसों की बर्बादी है।   जब पूछा गया कि चावल सीधे भारत से इंपोर्ट क्यों नहीं किया जाता, तो एक अधिकारी ने भारत के साथ ट्रेड डेफिसिट का हवाला देते हुए कहा कि सीधे इंपोर्ट को बायपास करने से इम्बैलेंस को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिलती है। बांग्लादेश की मिनिस्ट्री ऑफ फूड के एक प्रपोजल के मुताबिक, एडवाइजरी काउंसिल ऑन गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट ने म्यांमार और दुबई से कुल 100,000 टन चावल खरीदने को मंजूरी दी है। बांग्लादेश की फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि 50,000 टन पारबॉयल्ड चावल म्यांमार से और 50,000 टन नॉन-बासमती पारबॉयल्ड चावल दुबई से आएगा, जिसकी कुल कीमत TK 4,462,380,570 (323 करोड़ रुपये) होगी। देशकाल न्यूज के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के तहत, बांग्लादेश सरकार ने पैकेज-2 के तहत एक इंटरनेशनल ओपन टेंडर के जरिए 50,000 टन नॉन-बासमती पारबॉयल्ड चावल के इम्पोर्ट को मंजूरी दी है। चावल दुबई में M/s Credent One FZE से USD 355.99 प्रति टन के हिसाब से खरीदा जाएगा, जिसकी कीमत TK 2,169,047,070 होगी। इस बीच, 50,000 टन पारबॉयल्ड चावल म्यांमार से गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट बेसिस पर USD 376.50 प्रति टन के हिसाब से इम्पोर्ट किया जाएगा, जिसकी कीमत TK 2,293,261,500 होगी। दुबई अपना लगभग सारा चावल इंपोर्ट करता है, जिसमें ज्यादातर भारत से आता है। दुबई का जेबेल अली पोर्ट एक बड़ा री-एक्सपोर्ट हब है, जो अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों में चावल भेजता है। Credent One FZE जैसी कंपनियां भारतीय बासमती और नॉन-बासमती चावल की बड़ी इंपोर्टर हैं। अतिरिक्त पैसा खर्च कर रही यूनुस सरकार वहीं, बांग्लादेश के जानकारों के अनुसार, दुबई के जरिए चावल इंपोर्ट करने पर एक्स्ट्रा खर्च आ रहा है, जो जनता के पैसे की बर्बादी है। दुबई चावल बनाने वाला देश नहीं है, बल्कि वह भारत से चावल इंपोर्ट करके उसे फिर से एक्सपोर्ट करता है। हालांकि भारत से सीधे चावल इंपोर्ट करने का मौका है, लेकिन किसी इंटरमीडियरी कंपनी के जरिए खरीदने के फैसले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। खाद्य विभाग में प्रोक्योरमेंट डिवीजन के डायरेक्टर, मोहम्मद मोनिरुज्जमां ने बताया, ‘सप्लायर का ऑफिस दुबई में है। अगर मीडिया में यह रिपोर्ट आती है कि चावल दुबई से आता है, तो हम क्या कह सकते हैं? चावल का सोर्स भारत है।’