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क्या बच पाएंगी निमिषा प्रिया? भारत ने यमन में चलाए कूटनीतिक प्रयास तेज़ किए

केरल  केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया की यमन में फांसी की सजा भले ही कुछ समय के लिए टल गई हो, लेकिन खतरा अभी बरकरार है। भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद 16 जुलाई को दी जाने वाली फांसी को स्थगित कर दिया गया और अब दोनों परिवारों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने पर बातचीत हो रही है। भारत सरकार ने गुरुवार को निमिषा प्रिया के मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा है कि उसने वकील समेत कई तरह की व्यवस्था की है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि इस मामले में भारत कुछ मित्र देशों की सरकारों से भी संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निमिषा मामले पर कहा, ''यह एक संवेदनशील मामला है और भारत सरकार इस मामले में हर संभव मदद की पेशकश कर रही है। हमने कानूनी सहायता प्रदान की है और परिवार की सहायता के लिए एक वकील नियुक्त किया है। हमने नियमित रूप से कांसुलर यात्राओं की भी व्यवस्था की है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए स्थानीय अधिकारियों और परिवार के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में हैं।" सरकार ने आगे कहा कि हाल के दिनों में निमिषा प्रिया के परिवार को दूसरे पक्ष के साथ आपसी सहमति से समाधान निकालने के लिए और समय देने के लिए ठोस प्रयास किए गए। इसकी वजह से यमनी अधिकारियों ने सजा की तामील को स्थगित कर दिया, जो 16 जुलाई, 2025 को दी जानी थी। विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, "हम मामले पर लगातार नजर रख रहे हैं और हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। हम कुछ मित्र देशों की सरकारों के संपर्क में भी हैं।" बता दें कि निमिषा प्रिया केरल की रहने वाली थी। वह कई साल पहले यमन गई थी, जहां पर बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी के साथ उसने एक क्लीनिक खोली थी। बाद में तलाल ने निमिषा को परेशान करना शुरू कर दिया और उसे अपनी पत्नी बताने लगा। कई दिनों तक उत्पीड़न झेलने के बाद निमिषा ने जब वापस अपना पासपोर्ट मांगा तो उसने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद निमिषा ने तलाल से पासपोर्ट लेने के लिए उसे सिर्फ बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन नशीली दवा ज्यादा हो गई और इससे उसकी मौत हो गई। बाद में निमिषा को हत्या का दोषी माना गया और उसे फांसी की सजा सुनाई गई।  

आतंकी हमले पर ओवैसी का तीखा बयान, बोले: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा लें नैतिक जिम्मेदारी

संभाजीनगर पहलगाम आतंकी हमले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि अब जिम्मेदारी तो इस हमले की मनोज सिन्हा ने ले ली है, उन्हें अब इस्तीफा भी दे देना चाहिए। AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा कि चूंकि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा विफलता की जिम्मेदारी ली है। इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के नांदेड़ में पत्रकारों से कहा कि वह संसद के आगामी मॉनसून सत्र में मोदी सरकार से 22 अप्रैल को पहलगाम के पास बैसरन में हुए आतंकी हमले पर जवाब मांगेंगे, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी उस बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसने पहलगाम हमले के बाद भारत के आतंकवाद-विरोधी रुख और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखने के लिए बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और अल्जीरिया की यात्रा की थी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हाल में एक अखबार को दिए साक्षात्कार में स्वीकार किया कि पहलगाम हमला खुफिया विफलता के कारण हुआ और वह इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। इसी को लेकर ओवैसी ने कहा कि अब उन्हें इस्तीफा भी दे देना चाहिए। इस बारे में पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा,‘अगर उन्होंने (जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने) जिम्मेदारी ली है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पहलगाम में 26 भारतीयों को उनका धर्म पूछकर बेरहमी से मार डाला गया क्योंकि वे हिंदू थे। अगर उपराज्यपाल को इतनी पीड़ा हो रही है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘26 लोगों की हत्या उनका धर्म पूछकर कर दी गई और आप (जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल) यह बात तब कह रहे हैं जब आपका कार्यकाल समाप्त होने वाला है।’ संसद में उठाएंगे मसला, पूछेंगे आतंकी कैसे पहुंचे? ओवैसी ने कहा, ‘हम मोदी सरकार से पूछेंगे कि पहलगाम हमले के लिए कौन जिम्मेदार है। इस हमले के लिए कौन जवाबदेह है? आतंकवादी वहां कैसे पहुंचे और मौके पर पुलिस सुरक्षा क्यों नहीं थी? हम आगामी संसद सत्र में सरकार से ये सवाल पूछेंगे।’ उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा में चूक के कारण हुआ और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।  

जेलेंस्की ने सौंपी बागडोर, ट्रंप से समझौता कराने वाली मंत्री बनीं यूक्रेन की प्रधानमंत्री

वाशिंगटन  रूस के खिलाफ युद्ध में चौथे साल में प्रवेश करने जा रहे यूक्रेन में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं। वोलोदोमिर जेलेंस्की ने यूक्रेन की वित्त मंत्री यूलिया स्विरीडेन्को को प्रमोट करते हुए देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। वह 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद यूक्रेन की पहली नई प्रधानमंत्री बनी हैं। दरअसल, यूलिया ने अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण मिनरल डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभाई थी, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने युद्ध से थके राष्ट्र को नई ऊर्जा देने और घरेलू हथियार उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट में बड़े फेरबदल की शुरुआत की है। इसी के तहत उन्होंने मौजूदा प्रधानमंत्री डेनिस शमीहाल को रक्षा मंत्री बनाने और वित्त मंत्री स्विरीडेन्को को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। हालांकि यूक्रेन के भीतर इस बदलाव को किसी बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में नहीं देखा जा रहा, क्योंकि शमीहाल की तरह स्विरीडेन्को भी राष्ट्रपति के वफादार अधिकारियों में शामिल हैं। मिनरल डील की बड़ी भूमिका यूलिया स्विरीडेन्को अमेरिका और यूक्रेन के बीच महत्वपूर्ण खनिज समझौते की वार्ताकार रही हैं, जिसे ट्रंप प्रशासन के साथ आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि समझौते की शर्तें यूक्रेन के हितों के अनुकूल रहें। यूक्रेन और अमेरिका में रक्षा सहयोग और आर्थिक पुनर्निर्माण को लेकर वे लगातार पश्चिमी साझेदारों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों में यूक्रेन का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। यूक्रेन के इतिहास में सबसे लंबे समय तक के पीएम रहे शमीहाल इससे पहले डेनिस शमीहाल ने मंगलवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। वह 4 मार्च 2020 से प्रधानमंत्री पद पर थे और यूक्रेन के सबसे लंबे समय तक कार्यरत पीएम रहे हैं। हालांकि उन्हें कैबिनेट से बाहर नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें रक्षा मंत्री बनाया जा रहा है। यह मंत्रालय युद्धकाल में सबसे बड़े बजट और रणनीतिक महत्व वाला विभाग है। वे रुस्तम उमेरोव की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल आंतरिक अस्थिरता और रक्षा खरीद व्यवस्था में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरा रहा। आलोचकों का कहना है कि उनके कार्यकाल में मंत्रालय में बदइंतजामी और कुप्रबंधन की समस्याएं बनी रहीं।  

पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश टीटीपी के निशाने पर, भारत की सीमाओं पर बढ़ी निगरानी

ढाका पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) लंबे समय से आतंक मचा रहा है। कई आतंकी घटनाओं में तहरीक-ए-तालिबान का नाम सामने आ चुका है। अब पाकिस्तान के बाद यह आतंकी संगठन बांग्लादेश में अपनी उपस्थिति को बढ़ा रहा है, जिसकी वजह से भारत के सामने भी नई टेंशन खड़ी हो गई है। दरअसल, इन दिनों टीटीपी बांग्लादेश में आतंक फैलाने के लिए नए लड़ाकों की भर्ती में लगा हुआ है। पाकिस्तान के साथ-साथ भारत बांग्लादेश के साथ भी अपनी सीमा को साझा करता है और अगर दोनों पड़ोसी देशों में टीटीपी भविष्य में आतंकी घटनाओं को अंजाम देता है तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत की सुरक्षा के लिए भी टीटीपी खतरा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में कम से कम दो टीटीपी के रिक्रूटर्स के बांग्लादेश से अफगानिस्तान वाया पाकिस्तान जाने के सबूत मिले हैं। इसमें से एक का अप्रैल महीने में पाकिस्तानी सेना ने एनकाउंटर भी कर दिया। पिछले महीने जून में मलेशिया ने भी 36 बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकियों से संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद बांग्लादेश में टीटीपी के पैर पसारने की अटकलें तेज होने लगीं। मूल रूप से टीटीपी पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बॉर्डर से ऑपरेट करता है और वहीं से पाकिस्तान में धमाकों को अंजाम देता है। अब बांग्लादेश में भी पैर पसारने की कोशिश में लगा हुआ है। पिछले साल अगस्त महीने में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश में उग्रवाद बढ़ा है। जुलाई में ही बांग्लादेश की एंटी टेरिरिज्म यूनिट ने दो लोगों जिनके नाम शमीम महफूज और मोहम्मद फोजल को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि दोनों के संपर्क टीटीपी से थे। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के अनुसार, बांग्लादेशी अधिकारी खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए जा रहे अभियानों के जरिए इस खतरे को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बांग्लादेश पुलिस द्वारा 2017 में स्थापित एटीयू, उन्नत खुफिया रणनीतियों का उपयोग करके ऐसे खतरों को लक्षित करता है। ये गिरफ्तारियां बांग्लादेशी डिजिटल आउटलेट द डिसेंट की मई में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद हुई हैं, जिसमें खुलासा हुआ था कि कम से कम आठ बांग्लादेशी नागरिक वर्तमान में अफगानिस्तान में टीटीपी के सदस्य के रूप में सक्रिय हैं।  

यूक्रेनी ड्रोन से सुरक्षा के लिए रूस ने अपनाए सख्त कदम, मोबाइल-नेटवर्क बंद करने की पुष्टि

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सरकारी आवास क्रेमलिन की तरफ से यह बात कही गई है कि यूक्रेन के ड्रोन अटैक से बचने के लिए इंटरनेट बंद किया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेमलिन ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन से उत्पन्न खतरों से लोगों की सुरक्षा के लिए रूस में कभी-कभी मोबाइल इंटरनेट बंद करने का फैसला उचित है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव इंटरनेट आउटेज ट्रैकिंग सेवा Sboi.rf द्वारा इस हफ़्ते रूस के दर्जनों क्षेत्रों में अस्थिर इंटरनेट की सूचना दिए जाने के बाद इंटरनेट आउटेज के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे। पेसकोव ने कहा कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों को रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर अधिकारी मोबाइल इंटरनेट बंद कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुश्मन को मात देने के लिए रणनीतिक कदम उठाने पड़ते हैं। रात भर रूस के 11 अलग-अलग इलाकों में ड्रोन हमले इस बीच, रूसी अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यूक्रेनी ड्रोनों ने रात भर रूस के 11 अलग-अलग इलाकों में हमले किए, जिनमें आवासीय इमारतों को नुकसान पहुँचा है और कई नागरिक घायल हुए हैं। इसके अलावा यूक्रेनी ड्रोनों ने हवाई अड्डों पर भी हमले किए हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वायु रक्षा बलों ने देश भर में और क्रीमिया के कब्जे वाले क्षेत्र में 122 ड्रोनों को रोककर नष्ट कर दिया। सबसे ज़्यादा संख्या में 43 ड्रोन ब्रांस्क और 38 ड्रोन कुर्स्क क्षेत्रों में मार गिराए गए। चार अपार्टमेंट क्षतिग्रस्त, कई बच्चे घायल अधिकारियों के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन अटैक में कम से कम चार अपार्टमेंट क्षतिग्रस्त हो गए हैं।अधिकारियों के अनुसार, वोरोनिश शहर में ड्रोन के टुकड़े एक आवासीय इमारत से टकराए, जिससे तीन बच्चे घायल हो गए। 2009 और 2013 में पैदा हुए इन लड़कों के सिर में चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 2009 में पैदा हुई एक लड़की के हाथ और पैर में चोटें आईं और उसका घटनास्थल पर ही इलाज किया गया। मॉस्को में अटैक नाकाम बेलगोरोड क्षेत्र के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैडकोव के अनुसार, स्मोरोडिनो गाँव में एक निजी घर पर एक ड्रोन ने विस्फोटक गिराया, जिससे एक महिला की मौत हो गई। उधर मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने कहा कि वायु रक्षा बलों ने राजधानी की ओर बढ़ रहे तीन ड्रोनों को मार गिराया है। किसी भी तरह के नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।  

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: महामारी के दौरान दर्ज केसों से तबलीगी जमात के 70 लोग बरी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में तबलीगी जमात से जुड़े 70 भारतीय नागरिकों के खिलाफ दर्ज 16 मामलों को खारिज कर दिया है। इन लोगों पर ये मामले वहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल विदेशी लोगों की गुपचुप मेजबानी करने के आरोप में दर्ज किए गए थे। इस मामले में फैसला सुनाते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा, 'सभी आरोपपत्र खारिज किए जाते हैं।' इन 70 भारतीय लोगों के खिलाफ कुल 16 FIR दर्ज की गई थीं, जिन्हें उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की गई थी। इस मामले में अधिवक्ता आशिमा मंडला और मंदाकिनी सिंह ने अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। इन 70 लोगों पर आरोप था कि कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान तबलीगी जमात से जुड़े इन लोगों ने 190 से ज्यादा विदेशियों को निजामुद्दीन मरकज में पनाह दी थी। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि आरोपियों ने विदेशी नागरिकों को पनाह देकर देशव्यापी लॉकडाउन और अन्य निषेधाज्ञाओं का उल्लंघन किया था। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने मार्च 2020 में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशी लोगों की मेजबानी करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिकाओं का विरोध किया था और कहा था कि आरोपी स्थानीय निवासियों ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए निज़ामुद्दीन मरकज़ में आए लोगों को शरण दी थी।  

मौलवी की मौजूदगी में नाम परिवर्तन, युवक ने पत्नी पर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का लगाया आरोप

कर्नाटक  कर्नाटक में धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का एक मामला सामने आया है। खबर है कि यहां एक युवक के आरोप हैं कि उसकी पत्नी ने धर्म बदलने पर मजबूर किया है। साथ ही आरोप हैं कि ऐसा नहीं करने पर रेप का केस करने की धमकी देती थी। उन्होंने पत्नी के परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने BNS यानी भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विशाल कुमार गोकावी नाम के शख्स ने बताया है कि वह तीन सालों से तहसीन हुस्मानी के साथ रिलेशन में हैं। उन्होंने बताया कि दोनों ने नवंबर 2024 में शादी को रजिस्टर करा लिया था। उनके आरोप हैं कि शादी के बाद हुस्मानी ने उसपर दोबारा मुस्लिम रीति रिवाज से शादी करने का दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, शांति बनाए रखने के लिए विशाल ने सहमति दे दी और अप्रैल 2025 में मुस्लिम रीति रिवाज से शादी कर ली। अब विशाल का दावा है कि शादी समारोह के दौरान बगैर बताए उनका नाम बदल दिया गया। उन्होंने कहा है कि बगैर जाने एक मौलवी ने समारोह के दौरान धर्म परिवर्तन करा दिया। खबर है कि विवाह समारोह का वीडियो भी सामने आया है। विशाल ने कहा कि इसके बाद 5 जून को उनका परिवार हिंदू रीति रिवाजों से शादी की तैयारी कर रहा था, जिसपर हुस्मानी ने सहमति जता दी थी, लेकिन बाद में परिवार के दबाव में आकर इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया है कि पत्नी ने चेतावनी दी थी कि अगर धर्म नहीं बदला, तो वह उसके खिलाफ केस कर देगी। विशाल के आरोप हैं कि हुस्मानी ने मां बेगम बानो के साथ मिलकर उसे नमाज पढ़ने और जमात में जाने के लिए भी मजबूर किया।  

जांच में चौंकाने वाला खुलासा: फ्यूल सप्लाई खुद पायलट ने रोकी, उठे कई सवाल

अहमदाबाद  12 जून को अहमदाबाद से लंदन रवाना हुआ एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान, टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है, लेकिन विवाद का केंद्र अब तकनीकी खराबी या मानवीय भूल नहीं, बल्कि अमेरिकी मीडिया की भूमिका बनता जा रहा है। क्या बोइंग को बचाने भारतीय पायलट को फंसाया जा रहा है? अमेरिका के प्रमुख अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एएआईबी (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की शुरुआती रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि क्रैश से पहले फ्यूल कंट्रोल स्विच को फ्लाइट के कप्तान ने खुद बंद किया था। लेकिन भारत की रिपोर्ट में ऐसी कोई बात दर्ज नहीं है। यह दावा भारतीय एविएशन एक्सपर्ट्स, पायलट संगठनों और रिपोर्टिंग एजेंसियों के लिए चौंकाने वाला है। भारत की AAIB रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि स्विच को बंद किसने किया या कैसे हुआ, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस दिशा में उंगली उठाकर बोइंग की छवि को बचाने का प्रयास करता दिख रहा है। उस दिन क्या हुआ था? एयर इंडिया का ड्रीमलाइनर AI171, 12 जून को अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुआ था। टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद, विमान की स्पीड और थ्रस्ट अचानक गिरने लगी। कॉकपिट में सीनियर कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर मौजूद थे। सभरवाल ने कुंदर से पूछा – “फ्यूल स्विच कटऑफ में क्यों है?” जवाब मिला – “मैंने नहीं किया।” इसी से यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या तकनीकी खामी की वजह से स्विच ऑफ हो गया? क्या कहती है प्रारंभिक जांच? दोनों इंजनों को फ्यूल सप्लाई मिलनी बंद हो गई, जिससे विमान को पावर नहीं मिली और वह तेजी से नीचे गिरा। हादसे के बाद जब मलबा जांचा गया, तो दोनों फ्यूल स्विच कट पोजिशन में थे। इससे ऐसा लगता है कि शायद इंजनों को रीस्टार्ट करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्लेन के टेकऑफ के तुरंत बाद रैम एयर टरबाइन (RAM) बाहर निकल आया था, जो दिखाता है कि विमान की मुख्य पावर पूरी तरह से फेल हो चुकी थी।   अमेरिकी मीडिया का पक्षपात? भारतीय एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में बोइंग कंपनी की पहले से ही साख पर सवाल खड़े हो चुके हैं – खासकर 737 MAX हादसों के बाद। अब 787 ड्रीमलाइनर की ये घटना बोइंग के लिए और भी बड़ा झटका बन सकती थी, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए पायलटों को जिम्मेदार ठहराने की रणनीति अपनाई जा रही है।  पायलट संघ ने जताई कड़ी नाराजगी भारत के फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने इस पर कड़ा बयान जारी करते हुए कहा: “बिना जांच पूरी हुए, किसी पायलट पर दोष मढ़ना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। इससे न केवल पायलट की छवि को नुकसान होता है, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक आघात पहुंचता है।” FIP ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाए और मीडिया को संयम बरतना चाहिए।  

सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता से की कड़ी पूछताछ, होटल जाने को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली शादी के झूठा वादा कर बलात्कार से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की की अग्रिम जमानत बरकरार रखी है। वहीं, आरोप लगाने वाली महिला को लताड़ लगाई है। शीर्ष न्यायालय ने महिला के विवाहेतर संबंध पर सवाल उठाए हैं। महिला ने याचिका दाखिल कर आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, याचिका पर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने महिला को चेताया है कि विवाहित होते हुए पति के अलावा किसी और शख्स से संबंध बनाए जाने के चलते उसपर भी मुकदमा चलाया जा सकता है। साथ ही कहा है कि उसने विवाह के बाहर रिश्ता बनाकर अपराध किया है। महिला की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील ने कहा कि शख्स महिला के साथ शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाता रहा। इसपर कोर्ट ने महिला से कहा, 'आप एक शादीशुदा महिला हैं और आपके दो बच्चे हैं। आप मेच्योर हैं और आप समझते हैं कि जो रिश्ता आप बनाने जा रहे हैं वह शादी के बाहर बना रहे हैं।' वकील ने यह भी कहा कि शख्स ने महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए कई बार होटल बुलाया था। कोर्ट ने कहा, 'आप उसके अनुरोध पर बार-बार होटल क्यों गए थे? आप अच्छी तरह से जानते हैं कि आपने भी शादी के बाहर शारीरिक संबंध रखकर अपराध किया है।' पूरा केस समझें महिला और आरोपी शख्स की मुलाकात साल 2016 में सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। तब से ही दोनों रिलेशन में हैं। महिला के आरोप थे कि उसने साथी के दबाव में आकर पति से तलाक लिया था, जिसपर फैमिली कोर्ट ने भी 6 मार्च को मुहर लगा दी थी। तलाक के तुरंत बाद महिला ने उससे शादी करने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया। इस बात से खफा होकर महिला ने बिहार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाए कि शख्स ने उसके साथ शादी का झूठा वादा कर यौन उत्पीड़न किया है। बाद में जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो पटना हाईकोर्ट ने शख्स को जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने पाया था कि महिला के तलाक के बाद से ही दोनों किसी शारीरिक गतिविधियों में नहीं रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: होटल जाने की बात पर महिला की मंशा पर उठाए सवाल

नई दिल्ली  शादी के झूठा वादा कर बलात्कार से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की की अग्रिम जमानत बरकरार रखी है। वहीं, आरोप लगाने वाली महिला को लताड़ लगाई है। शीर्ष न्यायालय ने महिला के विवाहेतर संबंध पर सवाल उठाए हैं। महिला ने याचिका दाखिल कर आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, याचिका पर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने महिला को चेताया है कि विवाहित होते हुए पति के अलावा किसी और शख्स से संबंध बनाए जाने के चलते उसपर भी मुकदमा चलाया जा सकता है। साथ ही कहा है कि उसने विवाह के बाहर रिश्ता बनाकर अपराध किया है। महिला की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील ने कहा कि शख्स महिला के साथ शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाता रहा। इसपर कोर्ट ने महिला से कहा, 'आप एक शादीशुदा महिला हैं और आपके दो बच्चे हैं। आप मेच्योर हैं और आप समझते हैं कि जो रिश्ता आप बनाने जा रहे हैं वह शादी के बाहर बना रहे हैं।' वकील ने यह भी कहा कि शख्स ने महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए कई बार होटल बुलाया था। कोर्ट ने कहा, 'आप उसके अनुरोध पर बार-बार होटल क्यों गए थे? आप अच्छी तरह से जानते हैं कि आपने भी शादी के बाहर शारीरिक संबंध रखकर अपराध किया है।' पूरा केस समझें महिला और आरोपी शख्स की मुलाकात साल 2016 में सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। तब से ही दोनों रिलेशन में हैं। महिला के आरोप थे कि उसने साथी के दबाव में आकर पति से तलाक लिया था, जिसपर फैमिली कोर्ट ने भी 6 मार्च को मुहर लगा दी थी। तलाक के तुरंत बाद महिला ने उससे शादी करने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया। इस बात से खफा होकर महिला ने बिहार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाए कि शख्स ने उसके साथ शादी का झूठा वादा कर यौन उत्पीड़न किया है। बाद में जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो पटना हाईकोर्ट ने शख्स को जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने पाया था कि महिला के तलाक के बाद से ही दोनों किसी शारीरिक गतिविधियों में नहीं रहे हैं।