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नवजात की मृत्यु: जानिए इस परिस्थिति में श्राद्ध करना चाहिए या नहीं

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म किए जाते हैं जिससे हमारे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. श्राद्ध कर्म, पिंडदान और तर्पण करने से मृतक की आत्मा तृप्त होती है. साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है जो 21 सितंबर यानी सर्वपितृ अमावस्या की तिथि तक चलेंगे. पितृपक्ष के दौरान सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है. हर तिथि का अपना अलग श्राद्ध होता है. लेकिन क्या नवजात शिशु का श्राद्ध कर्म कर सकते हैं, और अगर कर सकते हैं तो नवजात शिशु के श्राद्ध कर्म के क्या नियम हैं जानते हैं. बच्चों का श्राद्ध कब करना चाहिए? अगर बच्चे के आयु 6 वर्ष से कम है और उसका निधन हो जाता है तो बच्चा का श्राद्ध उसकी मृत्यु तिथि पर ही किया जाता है. नवजात शिशु की मृत्यु के बाद, श्राद्ध (पिंडदान) के बजाय तर्पण किया जाता है. तर्पण एक विशिष्ट कर्मकांड है जो प्रेत योनि में फंसे शिशु को मोक्ष दिलाने में मदद करता है. तर्पण क्यों किया जाता है? जब कोई बच्चा नवजात शिशु की मृत्यु के बाद प्रेत योनि में अटक जाता है. तर्पण के बाद शिशु पितृ बनता है और मोक्ष प्राप्त करता है. अगर नवजात शिशु की किसी कारण से मृत्यु हो जाती है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति करना जरूरी होता है.नवजात शिशु का केवल तर्पण किया जाता है और नवजात शिशु का पिंडदान ना करें. किस तिथि पर होता है बच्चों का श्राद्ध ? पितृपक्ष के दौरान अगर किसी की तिथि ज्ञात ना हो तो उसका तर्पण त्रयोदशी तिथि के दिन कर सकते हैं. ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. गर्भावस्था में शिशु के श्राद्ध के नियम? गर्भावस्था के दौरान किसी कारण से अजन्मी संतान की मृत्यु माता के गर्भ में हो जाती है तो शास्त्रों के अनुसार उसका श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है.

किस्मत बदलना है आसान: पानी की बोतल रखें इस दिशा में

वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो घर, ऑफिस और अन्य स्थानों पर ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करके जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने में मदद करता है। पानी, जो जीवन का आधार है, वास्तु में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर घर में पानी की बोतल रखने का स्थान और तरीका वास्तु के अनुसार सही होना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और नकारात्मकता से बचा जा सके। पानी का संबंध जीवन, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य से है। पानी की बोतल घर के विभिन्न कोनों में रखी जाती है लेकिन अगर इसे गलत दिशा या स्थान पर रखा जाए, तो इससे घर में ऊर्जा असंतुलित हो सकती है। गलत जगह पानी रखना तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और आर्थिक संकट ला सकता है। इसलिए वास्तु में पानी की बोतल रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करके आप घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रख सकते हैं। उत्तर और पूर्व दिशा: वास्तु के अनुसार पानी की बोतल घर में उत्तर या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। ये दिशाएं धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की ऊर्जा लाती हैं। दक्षिण-पश्चिम दिशा से बचें: पानी की बोतल को कभी भी दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं भारी ऊर्जा रखती हैं और यहां पानी रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परिवार में झगड़े और असंतोष हो सकता है। दक्षिण-पूर्व दिशा में भी न रखें: यह दिशा अग्नि तत्व की होती है, इसलिए यहां पानी की बोतल रखना अशुभ माना जाता है। पानी की बोतल की स्थिति और साफ-सफाई घर में पानी की बोतल हमेशा साफ और स्वच्छ पानी से भरी होनी चाहिए। गंदा या खराब पानी न रखें क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। बोतल को ढककर रखें: बोतल को अच्छे से ढककर रखें ताकि उसमें कोई धूल या कीट न पड़ें। खुले पानी को भी खुली जगह पर नहीं रखना चाहिए। पानी को रोजाना बदलें: पानी को नियमित रूप से बदलना चाहिए। पुराना पानी घर में अशुभता ला सकता है। साफ बोतल का प्रयोग करें: प्लास्टिक की बोतल की बजाय ग्लास या स्टील की बोतल का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। प्लास्टिक से निकलने वाली हानिकारक गैसें घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकती हैं। पानी की बोतल को रखने का सही स्थान घर के मुख्य द्वार के पास उत्तर या पूर्व दिशा में पानी की बोतल रखना शुभ होता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। किचन के पास न रखें: पानी की बोतल को रसोई या किचन के पास दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि किचन में अग्नि का प्रभाव होता है। बेडरूम में सीमित मात्रा में रखें: बेडरूम में बहुत ज्यादा पानी की बोतल नहीं रखें। अगर रखनी हो तो सिर के पास नहीं, बल्कि कमरे के उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। बाथरूम के बाहर रखें: बाथरूम के अंदर पानी की बोतल रखना अशुभ माना जाता है। यदि जरूरी हो तो बाथरूम के बाहर साफ और अच्छी जगह पर ही रखें।

आज का राशिफल: 12 सितंबर को इन राशियों पर बरसेगा भाग्य, सूर्य देगा साथ

मेष राशि- मेष राशि वालों आज का दिन आपके जीवन में खुशियां लेकर आने वाला है। आप चीजों में जल्दबाजी करने की इच्छा महसूस कर रहे होंगे। अपना समय लेना और धैर्य बनाए रखना महत्वपूर्ण है। अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहें। वृषभ राशि- आज के दिन आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा। करियर तौर पर रचनात्मक योजना बनाएं ताकि आप विकास की ओर बढ़ सकें। आपको विनम्र और ईमानदार रहना चाहिए। आपकी प्रतिभा आपके काम आएगी। मिथुन राशि- आज के दिन आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा लेकिन आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। हेल्दी डाइट लेना जरूरी है। आपको मानसिक शांति पाने के लिए मेडिटेशन करना चाहिए। टीम वर्क पर ध्यान दें। कर्क राशि- आज के दिन आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। अपने करियर और निजी जीवन को एक साथ संतुलित करने का प्रयास करें। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें ताकि आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित कर सकें। सिंह राशि- आज के दिन आप अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जा सकते हैं। अगर आप शादी के बारे में सोच रहे हैं तो आपको आर्थिक और इमोशनल तौर पर सोच-विचार करने की जरूरत है। आगे की एक नई यात्रा के लिए तैयार हो जाएं। कन्या राशि- आज के दिन आप किसी रिसकी इनवेस्टमेंट की ओर बढ़ सकते हैं, जो आपकी वित्तीय स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है। सोच समझकर धन से जुड़े फैसले लें। अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जानने के लिए साथ में कुछ अच्छा समय बिताना बेहतर होगा। तुला राशि- आज के दिन छोटी बचत से शुरुआत करें। क्या आप अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति को मैनेज करने में सक्षम हैं? इस बात पर गौर करें। आपका निजी और व्यावसायिक जीवन संतुलित रहेगा। लाइफ में रोमांस बढ़ाने पर फोकस करें। वृश्चिक राशि- आज के दिन तनाव कम लें। बचत करने की कोशिश करें क्योंकि यह आपके वर्तमान आय के स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा। अगर आप अपने रिश्ते को लेकर बहुत गंभीर हैं तो शादी के बारे में सोचने का यह समय शुभ है। धनु राशि- आज के दिन अपने फाइनेंस को संभालना मुश्किल हो सकता है। आपके सभी काम पूरे होंगे। आपको कुछ नया करने का मौका भी मिलेगा। दूसरी ओर, आपको अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखने की जरूरत है। मकर राशि- आज के दिन बचत जरूर करें। अगर आप अपनी इन्कम को अनावश्यक खर्चों में बर्बाद करेंगे तो आप इमर्जेंसी परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाएंगे। आपको जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। कुंभ राशि- आज के दिन कुंभ राशि की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। स्टॉक एक्स्पर्ट्स के साथ बात-चीत करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है। अपने पार्टनर के साथ उन मुद्दों पर बात करें, जो आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर रहे हैं। मीन राशि- मीन राशि के लोगों आज के दिन आपका साथी यह ध्यान रखेगा कि आप जीवन में खुश और संतुष्ट रहें। आपका करियर केंद्र स्तर पर रहने वाला है। नई चुनौतियों का सामना करें क्योंकि इससे सफलता मिलेगी। आपको रोमांचक अवसर मिल सकते हैं।

वास्तु के अनुसार पानी की बोतल रखकर बदलें अपनी किस्मत, जानें सही दिशा और जगह

वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो घर, ऑफिस और अन्य स्थानों पर ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करके जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने में मदद करता है। पानी, जो जीवन का आधार है, वास्तु में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर घर में पानी की बोतल रखने का स्थान और तरीका वास्तु के अनुसार सही होना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और नकारात्मकता से बचा जा सके। पानी का संबंध जीवन, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य से है। पानी की बोतल घर के विभिन्न कोनों में रखी जाती है लेकिन अगर इसे गलत दिशा या स्थान पर रखा जाए, तो इससे घर में ऊर्जा असंतुलित हो सकती है। गलत जगह पानी रखना तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और आर्थिक संकट ला सकता है। इसलिए वास्तु में पानी की बोतल रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करके आप घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रख सकते हैं। उत्तर और पूर्व दिशा: वास्तु के अनुसार पानी की बोतल घर में उत्तर या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। ये दिशाएं धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की ऊर्जा लाती हैं। दक्षिण-पश्चिम दिशा से बचें: पानी की बोतल को कभी भी दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं भारी ऊर्जा रखती हैं और यहां पानी रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परिवार में झगड़े और असंतोष हो सकता है। दक्षिण-पूर्व दिशा में भी न रखें: यह दिशा अग्नि तत्व की होती है, इसलिए यहां पानी की बोतल रखना अशुभ माना जाता है। पानी की बोतल की स्थिति और साफ-सफाई घर में पानी की बोतल हमेशा साफ और स्वच्छ पानी से भरी होनी चाहिए। गंदा या खराब पानी न रखें क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। बोतल को ढककर रखें: बोतल को अच्छे से ढककर रखें ताकि उसमें कोई धूल या कीट न पड़ें। खुले पानी को भी खुली जगह पर नहीं रखना चाहिए। पानी को रोजाना बदलें: पानी को नियमित रूप से बदलना चाहिए। पुराना पानी घर में अशुभता ला सकता है। साफ बोतल का प्रयोग करें: प्लास्टिक की बोतल की बजाय ग्लास या स्टील की बोतल का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। प्लास्टिक से निकलने वाली हानिकारक गैसें घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकती हैं। पानी की बोतल को रखने का सही स्थान घर के मुख्य द्वार के पास उत्तर या पूर्व दिशा में पानी की बोतल रखना शुभ होता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। किचन के पास न रखें: पानी की बोतल को रसोई या किचन के पास दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि किचन में अग्नि का प्रभाव होता है। बेडरूम में सीमित मात्रा में रखें: बेडरूम में बहुत ज्यादा पानी की बोतल नहीं रखें। अगर रखनी हो तो सिर के पास नहीं, बल्कि कमरे के उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। बाथरूम के बाहर रखें: बाथरूम के अंदर पानी की बोतल रखना अशुभ माना जाता है। यदि जरूरी हो तो बाथरूम के बाहर साफ और अच्छी जगह पर ही रखें।

मां की सवारी और संकेत: इस बार क्या लेकर आएंगी देवी माता?

शारदीय नवरात्रि को हिंदू धर्म में बहुत खास और महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है. माता रानी हर साल अलग वाहन पर सवार होकर आती हैं. साल 2025 में मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान का वाहन क्या रहेगा, और किस प्रकार से शुभ और अशुभ फल प्रदान करेगा ,जानें इससे जुड़ी जानकारी. हर बार मां दुर्गा के पृथ्वी पर आगमन और प्रस्थान की सवारी अलग होती है. साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025, सोमवार के दिन से हो रही है. इस दिन घटस्थापना के साथ नवरात्रि का पवन उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाएगा. साल 2025 में मां दुर्गा का आगमन हाथ पर होगा. मां दुर्गा का आगमन मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान को दिन और वार के हिसाब से तय किया जाता है. माता का हाथी या गज पर आगमन बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है अगर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं तो यह सुख-समृद्धि, व्यापार और कृषि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. अगर मां दुर्गा का आगमन रविवार, सोमवार के दिन होता है तो यह कृषि, धन-धान्य के लिए शुभ होता है. मां दुर्गा का प्रस्थान साथ ही माता रानी के प्रस्थान की बात करें तो माता रानी नर यानी मनुष्य के कंधे पर प्रस्थान करेंगी. माता रानी का प्रस्थान गुरुवार के दिन 2 अक्टूबर को होगा. जो सुख, शांति, व्यापार में वृद्धि और पड़ोसी देशों से अच्छे संबंधों का प्रतीक है. माता रानी का आगमन पर हाथी और प्रस्थान मनुष्य के कंधे पर शुभ प्रभाव डालेगा. इसे कुल मिलाकर सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति का प्रतीक माना जा है. इसका कोई प्रमुख अशुभ प्रभाव नहीं है; बल्कि यह आने वाले समय में शुभ फलदायक माना जाता है.

धनवान बनने के रहस्य: 3 आदतें जो जल्दी बनाती हैं इंसान को अमीर

भारत के इतिहास में कई ऐसे प्रकांड विद्वान हुए जिनका लोहा आज भी माना जाता है। जनमानस के बीच उनकी बातें आज भी उतना महत्व रखती हैं कि लोग जरूरत पड़ने पर उनका ही अनुसरण करते हैं। इन्हीं विद्वानों में से एक थे आचार्य चाणक्य, जिन्हें जीवन के हर एक क्षेत्र के बारे में अद्भुत ज्ञान था। इसी ज्ञान को लोगों से साझा करने के लिए उन्होंने अपनी नीतियां लिखीं, जिनमें जीवन के हर एक पहलू को मानों खोलकर रख दिया। उन्होंने जीवन में सफलता कैसे पाई जाए, इसपर भी बहुत विस्तार में लिखा। आज उन्हीं की नीतियों से हम आपको व्यक्ति की ऐसी तीन आदतों के बारे में बता रहे हैं जो उसे कम उम्र में ही सफलता के उच्च शिखर पर पहुंचाने की ताकत रखती हैं। आचार्य के मुताबिक जिन लोगों में ये आदतें होती हैं, वो कम उम्र में भी धनवान बन जाते हैं। तो चलिए जानते हैं वो आदतें क्या हैं। जो समझें समय का सही महत्व आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति समय का महत्व समझ जाता है, उसे तरक्की करने से कोई नहीं रोक सकता। हर इंसान को गिनकर चौबीस घंटों का ही समय मिलता है, जहां कोई इन्हें यूं ही बर्बाद कर देता है तो कोई इन चौबीस घंटों में भी बहुत कुछ बड़ा कर जाता है। आचार्य के मुताबिक मानव जीवन का हर एक क्षण बहुत कीमती होता है। जो इसका सही मोल समझ जाए, वो बहुत ही कम समय में कामयाबी का उच्च शिखर हासिल कर लेता है। मेहनत से ना भागने वाले लोग आचार्य चाणक्य के अनुसार सफलता पाने का एक ही सूत्र है और वो है कड़ी मेहनत करना। जो व्यक्ति जीवन भर मेहनत से भागता आया है, उसकी सफलता भी उससे उतनी ही कोसों दूर भागती है। अपनी नीति में आचार्य कहते हैं कि मेहनती इंसान से तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न रहती हैं। हालांकि मेहनत का मतलब गधा मजदूरी बिल्कुल भी नहीं है। सही दिशा में किया गया प्रयास ही सफलता की ओर ले जाता है। जिस व्यक्ति में शुरू से ही मेहनत से ना भागने वाला गुण होता है, वो कम समय में ही तरक्की हासिल कर लेता है। जो जान लें वाणी का सही इस्तेमाल आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति की वाणी यानी उसकी जुबान भी उसकी सफलता में बड़ी अहम भूमिका निभाती है। जिस व्यक्ति को वाणी का खेल आता हो, वो अपने लिए रास्ता निकाल ही लेता है। आचार्य कहते हैं कि मीठा बोलने वाला तो अपने दुश्मनों को भी दोस्त बना लेता है। किस समय पर क्या बोलना उचित रहेगा यह जाने वाले और अपनी वाणी पर संयम रखने वाले लोग, विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल मोड़ लेते हैं। ऐसे लोग बाकी लोगों के मुकाबले जीवन में ज्यादा और जल्दी सफल होते हैं।  

घर में सुख-समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु हिनट्स, तस्वीरें बनेंगी लकी चार्म

अगर आप अपने घर में वास्तु नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे आपके घर में सुख-समृद्धि का माहौल बना रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी बना रहता है। वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि आपको घर में किस तरह की तस्वीरें  लगाने से फायदा मिल सकता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में। कहां लगाएं घोड़ों की पेंटिंग वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में 7 दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर लगाना काफी शुभ माना जाता है। वास्तु में इस तस्वीर को लगाने के लिए दक्षिण दिशा को सबसे उत्तम माना गया है। माना जाता है कि यह तस्वीर घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार को बढ़ाती है। साथ ही इससे घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बना रहता है। वास्तु शास्त्र में यह भी माना गया है कि प्राकृतिक दृश्य जैसे पहाड़, झरने, हरे-भरे खेतों आदि की तस्वीर भी घर में लाना काफी शुभ माना गया है। इन तस्वीरों को लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और खुशहाली आती है। वास्तु शास्त्र में कुछ पशु-पक्षियों की फोटो या पेंटिंग भी घर में लाना काफी शुभ माना गया है। हंस को शांति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में घर में हंस की तस्वीर लगाने से आपको धन-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। इसी के साथ आप उड़ते हुए पक्षियों की तस्वीर भी अपने घर में लगा सकते हैं। देवी-देवताओं की तस्वीरें आपने अधिकतर घरों में देवी-देवताओं की तस्वीर लगी देखी होगी। वास्तु की दृष्टि से भी इस काफी शुभ माना गया है। वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और अन्य देवी-देवताओं की तस्वीर घर में लगाने से सुख-समृद्धि और शांति आती है। न लगाएं ऐसी तस्वीरें वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी तस्वीरें भी बताई गई हैं, जो घर में लगाना बिल्कुल भी शुभ नहीं होता। जैसे कि हिंसक जानवर, डूबता हुआ सूरज और जहाज आदि की तस्वीर भी लगाने से बचना चाहिए, वरना आपको बुरे परिणाम मिल सकते हैं।  

इस बार नवरात्रि की 9 नहीं, 10 दिन होंगी उत्सव की धूम

साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार के दिन से हो रही है. शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है. इन दिनों मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. हर दिन किसी न किसी देवी को समर्पित होता है. इस दौरान आराधना से इंसान के जीवन के सारे दुख-दर्द और कष्ट मिट जाते हैं. साल 2025 में नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलेंगे. 1 अक्टूबर को महानवमी है और 2 अक्टूबर को दशहरा या विजयदशमी के साथ इस पर्व का समापन होगा. इसी दिन मां दुर्गा का विसर्जन भी किया जाएगा. साल 2025 में बनेगा दुर्लभ संयोग साल 2025 में नवरात्रि पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस बार नवरात्रि 9 नहीं, बल्कि 10 दिनों की होगी. ऐसे में एक अतिरिक्त दिन किस बात का संकेत दे रहा है, यह जानना रोचक है. 9 नहीं, 10 दिन के होंगे नवरात्र साल 2025 में शारदीय नवरात्र 9 नहीं, बल्कि 10 दिनों के होंगे. नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से होगी. 24 और 25 सितंबर को तृतीया तिथि का व्रत रखा जाएगा. इस बार तृतीया तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिसके कारण शारदीय नवरात्रि में एक दिन की वृद्धि होगी. नवरात्रि में बढ़ती हुई तिथि का महत्व     नवरात्रि में बढ़ती हुई तिथि को शुभ माना जाता है, जबकि घटती हुई तिथि को अशुभ माना जाता है. नवरात्रि में बढ़ती हुई तिथि शक्ति, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है.     शारदीय नवरात्रि का पर्व हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है, जो चंद्रमा के बढ़ने का प्रतीक माना गया है. इस समय को अत्यंत सकारात्मक और शक्ति-विकास का कारण माना जाता है.     बढ़ती हुई तिथि नई शुरुआत, सृजन और प्रगति का प्रतीक है। इस दौरान की गई साधना फलदायी मानी जाती है. शारदीय नवरात्रि का महत्व शारदीय नवरात्रि में उपवास, ध्यान और मां दुर्गा की आराधना करने से भक्त अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

इंदिरा एकादशी 2025: महत्व, पूजा नियम और सही समय जानें, 16 या 17 सितंबर का फिक्स टाइम

हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है. सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी की अपनी धार्मिक मान्यता होती है. पितृपक्ष में आने वाली एकादशी को बेहद पवित्र माना गया है. इस एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा पितरों को समर्पित होती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. कब है इंदिरा एकादशी 2025 द्रिक पंचांग के अनुसार इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 17 सितंबर, बुधवार को रखा जाएगा. एकादशी तिथि की शुरूआत सुबह 12 बजकर 21 मिनट से होगी और इसका समापन रात 11 बजकर 39 मिनट पर होगा. इस दिन व्रत रखा जाएगा और पारण अगले दिन यानी 18 सितंबर को किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, 18 सितंबर को सुबह 06:07 से 08:34 बजे के बीच स्नान-ध्यान कर पूजा-पाठ के बाद व्रत खोल सकते हैं. इंदिरा एकादशी का महत्व इंदिरा एकादशी को श्राद्ध एकादशी भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और तर्पण करने से जातक के पापों का नाश होता है और उनके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसा करने से साधक को सुख-समृद्धि और शांति मिलती है. माना जाता है कि इस व्रत को करने वाला जातक सांसारिक सुखों का आनंद लेने के बाद अंत में बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है. पूजन विधि इस व्रत की पूजा विधि भी विशेष मानी गई है. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. पितरों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करें. इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर दीपक जलाएं. उन्हें पीले फूल और मिठाई अर्पित करें क्योंकि पीला रंग श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है. इसके बाद पूजा सामग्री चढ़ाकर व्रत कथा सुनें और अंत में विष्णुजी की आरती कर प्रसाद बांटें. पितरों की शांति के लिए करें इन चीजों का दान पितरों की शांति और संतुष्टि के लिए इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन घी, दूध, दही और अन्न का दान करने से घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है. साथ ही जरूरतमंदों को भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

महालक्ष्मी व्रत के दिन जरूर करें ये काम, धन की देवी होंगी प्रसन्न

माना जाता है कि जो भी साधक महालक्ष्मी व्रत (Mahalakshmi Vrat 2025) को सच्ची श्रद्धा से करता है, उसे धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही इस समय व्रत करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है। ऐसे में आप महालक्ष्मी व्रत के आखिरी दिन कुछ खास उपाय कर सकते हैं, जिससे देवी लक्ष्मी की कृपा आपके व आपके परिवार के ऊपर बनी रहती है। इस तरह करें पूजा महालक्ष्मी व्रत के आखिरी दिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करें। इसके लिए सबसे पहले स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद एक चौकी पर साफ लाल कपड़ा बिछाएं और माता लक्ष्मी की मूर्ति या फिर चित्र स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी और नवग्रहों का पूजन करें। अब मां लक्ष्मी को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं और पूजा में एक कल कलश स्थापिक करें। इसके लिए कलश में जल, सुपारी, हल्दी, अक्षत, कमल गट्टा और पंच पल्लव डालकर उसपर नारियल रखें और चुनरी लपेटकर स्थापित करें। महालक्ष्मी जी का शृंगार करें और उन्हें पूजा में सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित करें। पूजा में कमल, दूर्वा, अक्षत, रोली, धूप, दीप, फल, मिठाई और दक्षिणा आदि चढ़ाएं। अंत में देवी लक्ष्मी की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें। जरूर करें ये उपाय महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन देवी लक्ष्मी की विधिवत रूप से पूजा करने के बाद एक कच्चे सूत में 16 गांठ लगाएं। इस दौरान महालक्ष्मी नमः मंत्र का जाप करते रहें। अब इस गांठ पर कुमकुम और अक्षत लगाकर देवी के चरणों में अर्पित कर दें। पूजा संपन्न होने के बाद इस सूत्र को अपने दाहिने हाथ में बांधें। इस उपाय को करने से साधक को धन संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। आप इस 16 गांठ वाले धागे को अपनी तिजोरी में भी रख सकते हैं, जिससे शुभ परिणाम मिलते हैं। करें इन मंत्रों का जप 1. श्री लक्ष्मी बीज मंत्र – ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।। 2. लक्ष्मी प्रा​र्थना मंत्र – नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।। 3. श्री लक्ष्मी महामंत्र – ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।