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प्रेमानंद महाराज बोलें- आसपास के लोग हमेशा आलोचना कर डिमोटिवेट करते हैं?

नई दिल्ली. आजकल का जीवन बहुत तेज है और सफलता के लिए मेहनत कर रहे लोगों को अक्सर आसपास के लोग आलोचना करके डिमोटिवेट कर देते हैं। रिश्तेदार, दोस्त या सहकर्मी नकारात्मक बातें कहकर मन को तोड़ देते हैं। ऐसे में मन उदास हो जाता है और आगे बढ़ने का जोश कम हो जाता है। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज अपने सत्संगों में बार-बार इस समस्या का समाधान बताते हैं। महाराज जी कहते हैं कि आलोचना करने वाले लोग खुद जल रहे होते हैं, तुम्हें जलने की जरूरत नहीं। राधा नाम जपो और अपना काम करते रहो। आलोचना से डिमोटिवेट होना छोड़ दो। महाराज जी के उपदेश से जानते हैं क्या करें। आलोचना को दिल से ना लगाएं प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जो आपकी आलोचना करता है, वह आपके बारे में सोचकर अपना समय बर्बाद कर रहा है। ऐसे में आप अपना समय क्यों बर्बाद करेंगे? आलोचना करने वाले लोग अपनी कमजोरी छिपाने के लिए दूसरों को नीचा दिखाते हैं। महाराज जी सलाह देते हैं कि ऐसी बातों को दिल से ना लगाएं। मुस्कुराकर सुन लें और आगे बढ़ जाएं। अगर कोई कहे 'तुम कुछ नहीं कर पाओगे' तो मन में कहें 'राधे राधे, मैं कर लूंगा।' आलोचना को कानों से सुनकर दिल से निकाल दें। इससे मन मजबूत रहेगा और डिमोटिवेशन नहीं होगा। राधा नाम जप महाराज जी का सबसे बड़ा उपाय है राधा नाम जप। वे कहते हैं 'आलोचना से परेशान होने पर राधे-राधे जपें। राधा नाम में इतनी शक्ति है कि कोई नकारात्मक बात आपको छू नहीं सकती है।' जब कोई आलोचना करे तो मन में 'राधे राधे' जपें। इससे मन शांत रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। महाराज जी बताते हैं कि नाम जप से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान की कृपा मिलती है। रोज 108 बार या जितना हो सके राधा नाम जपें। आलोचना करने वाले खुद थक जाएंगे, लेकिन आपका जोश बना रहेगा। अपना काम ईमानदारी से करते रहें प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि आलोचना करने वाले को जवाब अपनी सफलता से दें। अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करते रहें। दिखावा ना करें, बस चुपचाप आगे बढ़ें। महाराज जी उदाहरण देते हैं कि जो लोग आलोचना करते हैं, वे खुद असफल होते हैं। आप सफल हो जाएंगे, तो वे खुद चुप हो जाएंगे। आलोचना से डिमोटिवेट होने की बजाय उसे प्रेरणा बनाएं। महाराज जी कहते हैं कि भगवान सब देख रहे हैं। मेहनत का फल जरूर मिलेगा। अपना फोकस काम पर रखें, तो डिमोटिवेशन नहीं होगा। भक्ति और सत्संग से मन मजबूत बनाएं महाराज जी सलाह देते हैं कि आलोचना से परेशान हो, तो रोज सत्संग सुनें और भक्ति करें। राधा-कृष्ण की भक्ति करें, हनुमान चालीसा पढ़ें। सत्संग सुनने से मन में सकारात्मकता आती है और आलोचना का असर कम होता है। महाराज जी कहते हैं कि जब मन भगवान में लग जाता है, तो दुनिया की बातें छोटी लगने लगती हैं। भक्ति से मन इतना मजबूत हो जाता है कि आलोचना छू नहीं पाती है। परिवार और भगवान पर फोकस करें, तो डिमोटिवेशन दूर हो जाएगा। प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, आलोचना करने वाले खुद जल रहे हैं, आपको जलने की जरूरत नहीं है। राधा नाम जपें, मेहनत करें और मन शांत रखें। आलोचना से डिमोटिवेट होना छोड़ देंगे, तो जीवन में सफलता और सुख आएगा।

मकर संक्रांति विशेष: सूर्य देव को अर्घ्य देते समय न करें ये भूल, वरना नहीं मिलेगा शुभ फल

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘उत्तरायण’ की शुरुआत माना जाता है. इस दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के साथ-साथ सूर्य उपासना का विधान है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और कष्टों का निवारण होता है. लेकिन, अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है. सूर्य देव को अर्घ्य देने का तरीका ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर साफ या लाल रंग के वस्त्र धारण करें. तांबे के लोटे का प्रयोग: सूर्य को जल देने के लिए हमेशा तांबे के पात्र का ही उपयोग करें. अन्य धातुओं (जैसे प्लास्टिक या स्टील) का उपयोग वर्जित है. जल में मिलाएं ये चीजें: लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल फूल, कुमकुम, अक्षत (सादे चावल) और थोड़ा काला तिल जरूर डालें. मकर संक्रांति पर तिल का विशेष महत्व है. अर्घ्य देने की मुद्रा: दोनों हाथों से लोटे को पकड़कर अपने सिर के ऊपर ले जाएं और धीरे-धीरे जल की धार छोड़ें. दृष्टि का ध्यान: जल गिरते समय आपकी दृष्टि जल की धार के बीच से सूर्य देव पर होनी चाहिए. इससे निकलने वाली किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं. परिक्रमा: अर्घ्य देने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर तीन बार क्लॉकवाइज (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें. भूलकर भी न करें ये गलतियां ! पैरों में जल गिरना: सबसे बड़ी गलती यह होती है कि अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर पड़ते हैं. इससे बचने के लिए किसी गमले या बड़े बर्तन में जल अर्पित करें और बाद में उसे पौधों में डाल दें. देर से अर्घ्य देना: मकर संक्रांति पर दोपहर में अर्घ्य देना लाभकारी नहीं माना जाता. कोशिश करें कि सूर्योदय के एक घंटे के भीतर ही जल अर्पित कर दें. बिना जूते-चप्पल के रहें: अर्घ्य देते समय पैर नंगे होने चाहिए. जूते या चप्पल पहनकर सूर्य देव को जल देना अपमानजनक माना जाता है. मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य उपासना, पुण्य संचय और आत्मशुद्धि का महापर्व माना जाता है. यह पर्व उस शुभ क्षण का प्रतीक है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं.धार्मिक दृष्टि से इसे देवताओं का दिन और सकारात्मक ऊर्जा का आरंभ माना गया है. भगवान सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि देव के घर जाते हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है. इस दिन खिचड़ी का दान करना और तिल-गुड़ का सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है.

Shattila Ekadashi 2026 Date: षटतिला एकादशी 13 या 14 जनवरी को मनेगी?

नई दिल्ली. हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन तिल का दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। षटतिला एकादशी 2026 डेट और टाइम वैदिक पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी व्रत 14 जनवरी को किया जाएगा और अगले दिन यानी 15 जनवरी को व्रत का पारण किया जाएगा। माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन – 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर षटतिला एकादशी 2026 व्रत पारण का टाइम एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। 15 जनवरी को व्रत का पारण करने का समय सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक है। द्वादशी तिथि पर मंदिर या गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान जरूर करना चाहिए। षटतिला एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़ें धारण करें। मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति को स्थापित करें। श्रीहरि को चंदन, पीले फूल, माला अर्पित करें। दीपक जलाकर आरती करें। मंत्रों का जप करें। पंजीरी और पंचामृत आदि का भोग लगाएं। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रभु से कामना करें। इन बातों का रखें ध्यान एकादशी के दिन चावल और तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें।  इसके अलावा काले रंग के कपड़े धारण न करें। किसी से वाद-विवाद न करें। तुलसी के पत्ते न तोड़े। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। घर और मंदिर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करें। ऐसा माना जाता है कि व्रत कथा का पाठ न करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। 

लाइफ में कामयाबी का फॉर्मूला: पर्सनैलिटी में शामिल करें ये खास बातें

सक्सेज होना तो सभी चाहते हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है सही दिशा में कदम बढ़ाना। लगातार मेहनत और बार-बार प्रयास। लेकिन कड़ी मेहनत और बार-बार प्रयास कहां किए जाएं ये भी पता होना जरूरी है। कुछ लोग इसलिए सफल नहीं हो पाते क्योंकि उनके व्यक्तित्व में कमी होती है। अगर आप के अंदर ये कमियां हैं तो इन्हें दूर कर अपनी पर्सनैलिटी को और भी ज्यादा निखारा जा सकता है। साथ ही लाइफ में सफलता हासिल करने में भी मदद मिलेगी। अच्छा श्रोता बनना है जरूरी हमेशा अपनी बात रखने के साथ दूसरों की बातें सुनना भी जरूरी होता है। कई बार हम लोगों को ध्यान से ना सुनकर लाइफ के जरूरी लेसन मिस कर देते हैं। इसलिए हमेशा धैर्य से सुनने की कोशिश करें। किताबें पढ़ें और इंटरेस्ट बढ़ाएं किताबें पढ़ने से केवल नया ज्ञान ही नही मिलता बल्कि ये आपको नई चीजों को जानने समझने और उसमे इंटरेस्ट बढ़ाने में भी मदद करता है। इससे आपका नॉलेज बढ़ेगा और आपकी पर्सनैलिटी में चार चांद लगेंगे। नए लोगों से मिलें हमेशा नयी जगह जाने और नये लोगों से मिलने को लेकर खुद को रोकना नहीं चाहिए। जितना नये लोगों से मिलेंगे आपको अपने बारे में और भी ज्यादा समझ आएगी। नये लोगों से मिलते वक्त आपकी बॉडी लैंग्वेज, सुनने की क्षमता, समझने की क्षमता और आपकी नॉलेज का भी टेस्ट होता है। जो कि पर्सनैलिटी को निखारने में मदद करता है। दूसरों की इज्जत है जरूरी आपको भले ही लगे कि आपको बहुत सारी नॉलेज है लेकिन इसका मतलब नहीं कि आप दूसरों का सम्मान ना करें। या उनके ज्ञान को कम समझें। खुद बातों, विचारों पर टिके रहना और दूसरों को सम्मान देना आपकी पर्सनैलिटी को और भी निखारेगा। दूसरों को सपोर्ट करें जब भी आप लो फील करते हैं तो किसी ना किसी की मदद चाहते हैं। उसी तरह से हमेशा दूसरों को सपोर्ट करने और इनकरेज करने का काम करें।  

एकादशी व्रत 2026: जनवरी में कौन सी एकादशी कब है, यहां देखें पूरी जानकारी

सनातन धर्म की हर तिथि पावन और विशेष होती है. हर तिथि पर किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित व्रत और पूजन किया जाता है. ऐसी ही पावन तिथि है एकादशी. ये तिथि हर माह में दो बार पड़ती है. पहली बार कृष्ण और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में. एकादशी की तिथि जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है. हर एकादशी पर व्रत और श्री हरि का पूजन किया जाता है. एकादशी का व्रत बहुत विशेष होता है. साल में 24 एकादशी व्रत पड़ते हैं. एकादशी व्रत को करने से जीवन के संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि बढ़ती है. मृत्यु के बाद मोक्ष और वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है. साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस माह में कब कौन सी एकादशी का व्रत रखा जाएगा? षटतिला एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, आज से माघ माह की शुरुआत हो चुकी है. इस माह के कृष्ण पक्ष में षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन मकर संक्रांति का पर्व भी रहेगा. जया एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर जया एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को दोपहर 04 बजकर 35 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 29 जनवरी को 01 दोपहर 55 मिनट पर होगा. ऐसे में 29 जनवरी को जया एकादशी व्रत रखा जाएगा. अवश्य रखें व्रत से जुड़ी इन बातों का ध्यान एकादशी के दिन घर और मंदिर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस दिन चावल और तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. अन्न-धन और अन्य चीजों का दान करना चाहिए. भगवान विष्णु के भोग में तुलसी के पत्ते डालने चाहिए. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर ही करना चाहिए.

जनवरी 05, 2026 राशिफल: आज जानें आपकी राशि का हाल

मेष राशि- इस समय आपके अंदर काम करने की अच्छी ऊर्जा रहेगी। जो काम लंबे समय से टलते आ रहे थे, उन्हें निपटाने का मन बनेगा। आप खुद को पहले से ज्यादा एक्टिव और आत्मविश्वासी महसूस करेंगे। हालांकि कभी-कभी जल्दबाज़ी या गुस्सा नुकसान करा सकता है, इसलिए थोड़ा ठहरकर सोचना जरूरी है। घर के मामलों में आपकी बात मानी जाएगी, लेकिन सबको साथ लेकर चलना बेहतर रहेगा। पैसों में धीरे-धीरे सुधार होगा और सेहत भी सामान्य रहेगी, बस नींद और खान-पान का ध्यान रखें। वृषभ राशि- आप इस समय शांति और स्थिरता चाहेंगे। बेवजह की भागदौड़ या झंझट से दूर रहना ही आपको सुकून देगा। परिवार के साथ समय बिताने से मन हल्का रहेगा। काम में चीजें धीरे चलेंगी, लेकिन सही दिशा में जाएंगी। पैसों के मामले में सोच-समझकर फैसले लें, फालतू खर्च से बचें। रिश्तों में अगर थोड़ा झुककर बात करेंगे तो माहौल और बेहतर हो जाएगा। सेहत ठीक रहेगी, बस आलस्य हावी न होने दें। मिथुन राशि- इस समय आपका दिमाग काफी तेज चलेगा। नई बातें सीखने, लोगों से मिलने और बातचीत करने का मन रहेगा। दोस्तों या पुराने संपर्कों से कोई अच्छा मौका मिल सकता है। काम में आइडिया अच्छे आएंगे, बस ध्यान रखें कि एक साथ बहुत कुछ न पकड़ लें। रिश्तों में बातों से गलतफहमी भी हो सकती है, इसलिए साफ़ बोलना ज़रूरी है। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी और सेहत भी सामान्य, बस मोबाइल और स्क्रीन से थोड़ा ब्रेक लें। कर्क राशि- आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रहेंगे। छोटी-छोटी बातें दिल पर लग सकती हैं, इसलिए खुद को संभालकर रखें। परिवार और घर से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छे से निभाएंगे। काम में धीरे-धीरे लेकिन पक्की प्रगति होगी। पैसों को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, बस खर्च पर नजर रखें। सेहत में हल्की थकान महसूस हो सकती है, इसलिए आराम को नजरअंदाज न करें। सिंह राशि- इस समय आपका आत्मविश्वास काफी मजबूत रहेगा। लोग आपकी बातों को ध्यान से सुनेंगे और आपकी सलाह को महत्व देंगे। कामकाज में पहचान और तारीफ मिल सकती है। बस ध्यान रखें कि आत्मविश्वास अहंकार में न बदले। रिश्तों में थोड़ा प्यार और अपनापन दिखाएंगे तो संबंध और मजबूत होंगे। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी और सेहत भी अच्छी, बस ज्यादा तनाव न लें। कन्या राशि- जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें संभाल भी अच्छे से लेंगे। मेहनत का फल मिलने लगेगा, भले थोड़ा समय लगे। काम में स्थिरता रहेगी और भरोसा बढ़ेगा। घर और काम दोनों जगह संतुलन बनाकर चलना ज़रूरी है। पैसों में स्थिति मजबूत रहेगी और सेहत सामान्य, बस खुद को ज्यादा थकाएं नहीं। तुला राशि- आप इस समय प्रैक्टिकल रहेंगे और चीज़ों को सही तरीके से संभालना चाहेंगे। अटके हुए काम निपटाने के लिए यह अच्छा समय है। काम में आपकी मेहनत और समझदारी साफ़ दिखेगी। पैसों में धीरे-धीरे सुधार होगा और खर्चों पर कंट्रोल रहेगा। रिश्तों में छोटी बातों को लेकर ज़्यादा सोचने से बचें। सेहत के मामले में खुद पर ज्यादा दबाव न डालें और आराम के लिए भी समय निकालें। वृश्चिक राशि- आप अलग सोच रखेंगे और अपने तरीके से काम करना चाहेंगे। नए आइडिया और नई योजनाएं दिमाग में आएंगी। दोस्तों या नेटवर्क से फायदा हो सकता है। बस जिद या टकराव से बचें। पैसों में स्थिति ठीक रहेगी। सेहत के लिए नींद और आराम पर ध्यान देना जरूरी है। धनु राशि- आप संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन कभी-कभी मन थोड़ा उलझ सकता है। रिश्तों में साफ और खुलकर बात करना फायदेमंद रहेगा। काम में धैर्य रखें, जल्दबाजी नुकसान दे सकती है। पैसों में स्थिति सामान्य रहेगी, न बहुत फायदा न बहुत नुकसान। सेहत में थोड़ा उतार-चढ़ाव रह सकता है, इसलिए अपनी दिनचर्या ठीक रखें। मकर राशि- आपके अंदर गहराई से सोचने की क्षमता बढ़ेगी। कोई पुराना मुद्दा या उलझन सुलझ सकती है। काम में फोकस अच्छा रहेगा, लेकिन भावनाओं पर कंट्रोल रखना जरूरी है। भरोसेमंद लोगों के साथ ही अपनी बातें साझा करें। पैसों के मामले में संभलकर चलें। सेहत में सुधार के संकेत हैं, बस तनाव को खुद पर हावी न होने दें। कुंभ राशि- मन थोड़ा खुला-खुला रहेगा और कुछ नया करने की इच्छा होगी। यात्रा या किसी नई योजना की शुरुआत हो सकती है। काम में सीखने को मिलेगा और आगे के रास्ते साफ होते दिखेंगे। पैसों में धीरे-धीरे सुधार होगा। सेहत के मामले में खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है। मीन राशि- आप भावनात्मक और कल्पनाशील रहेंगे। किसी अपने की बात दिल को छू सकती है। काम में शुरुआत थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन बाद में सुधार आएगा। खुद पर भरोसा रखें और बेवजह की चिंता छोड़ें। पैसों में संतुलन बना रहेगा। ध्यान, शांति और थोड़ा अकेला समय आपको मानसिक सुकून देगा।

घर में हाथी की मूर्ति रखने से क्या होते हैं फायदे? जानिए वास्तु के नियम

वास्तु में हाथी की मूर्तियों का क्या महत्व है? जानिये कैसे हाथी देता है शुभ परिणाम – वास्तु शास्त्र में जानवरों की मूर्तियों और तस्वीरों का अपना एक खास महत्व होता है। इनमें हाथी को बेहद शुभ और शक्तिशाली माना गया है। प्राचीन काल से ही हाथी को सौभाग्य, शक्ति, ज्ञान, स्थिरता और राजसी ठाट-बाट का प्रतीक माना जाता रहा है। वास्तु के अनुसार, घर या दफ्तर में हाथी की मूर्ति रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कई तरह के शुभ परिणाम मिलते हैं। वास्तु में हाथी का महत्व समृद्धि और धन का प्रतीक: हाथी को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसलिए घर में हाथी की मूर्ति, खासकर चांदी या पीतल की मूर्ति रखना धन और समृद्धि को आकर्षित करता है। इसे घर की उत्तर दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। शक्ति और स्थिरता: हाथी अपनी विशालता और दृढ़ता के लिए जाना जाता है। इसकी मूर्ति घर में स्थिरता और शक्ति प्रदान करती है। यह परिवार के सदस्यों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने में मदद करता है। इसे कार्यस्थल पर रखने से कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। ज्ञान और बुद्धि: सफेद हाथी को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना गया है। छात्रों या शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी स्टडी टेबल पर सफेद हाथी की छोटी मूर्ति रखनी चाहिए। इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में बेहतर परिणाम मिलते हैं। सौभाग्य और सुरक्षा: घर के मुख्य द्वार पर हाथी के जोड़े की मूर्ति लगाना शुभ माना जाता है। यदि उनकी सूंड ऊपर की ओर उठी हो तो यह सौभाग्य और सफलता का प्रतीक होता है। यह घर को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता: बेडरूम में चांदी के हाथी का जोड़ा रखने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और मधुरता आती है। यह उनके बीच के संबंधों को मजबूत करता है और आपसी समझ को बढ़ाता है। सही दिशा और सामग्री का चुनाव धातु: चांदी या पीतल के हाथी धन और समृद्धि के लिए उत्तम माने जाते हैं। लकड़ी: लकड़ी के हाथी शांति और स्थिरता के लिए अच्छे होते हैं। दिशा- उत्तर: धन और करियर में वृद्धि। मुख्य द्वार: सौभाग्य और सुरक्षा। बेडरूम: दांपत्य जीवन में सुख। स्टडी रूम: ज्ञान और एकाग्रता।

माघ मेले में श्रद्धालु तंबुओं में रहकर करते हैं कठिन नियमों का पालन

नई दिल्ली. प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) का आयोजन हर बार धूमधाम और भक्ति भाव से किया जाता है। संगम तट पर कड़ाके की ठंड के बीच हजारों श्रद्धालु छोटे-छोटे तंबुओं में रहकर कठिन नियमों का पालन करते हुए साधना करते हैं, जिसे 'कल्पवास' कहा जाता है। पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलने वाली इस साधना का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर लोग अपना घर-बार छोड़कर एक महीने के लिए यहां क्यों आते हैं? आइए जानते हैं कल्पवास के पीछे का धार्मिक महत्व और इसके नियम, जो इस प्रकार हैं – क्या है 'कल्पवास' का अर्थ? कल्पवास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। 'कल्प' जिसका मतलब है समय का एक चक्र और 'वास' का मतलब है निवास स्नान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संगम के तट पर एक महीने तक निवास करने से व्यक्ति का मानसिक और आध्यात्मिक कायाकल्प होता है। पुराणों में कहा गया है कि कल्पवास करने से साधक को पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष की ओर आगे बढ़ता है। कल्पवास का धार्मिक महत्व पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में कल्पवास की महिमा के बारे में बताया गया है। देवताओं का निवास – ऐसा माना जाता है कि माघ महीने में सभी देवी-देवता संगम तट पर निवास करते हैं। ऐसे में यहां रहकर पूजा-अर्चना करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। आत्म-शुद्धि – कल्पवास केवल नदी किनारे रहना नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि की प्रक्रिया है। कहा जाता है कि इस दौरान गंगा स्नान और सात्विक जीवन जीने से शरीर और मन दोनों पवित्र होते हैं। मोक्ष की प्राप्ति – ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से कल्पवास पूर्ण करते हैं, उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। कल्पवासी के कठिन नियम    कल्पवासी पूरे दिन में केवल एक बार फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं।     इनके लिए दिन में तीन बार गंगा स्नान और पूजा-पाठ करना जरूर होता है।     कल्पवासी पलंग या बिस्तर का त्याग कर जमीन पर पुआल या साधारण चटाई बिछाकर सोते हैं।     इस दौरान झूठ बोलना, क्रोध करना, निंदा करना और सुख-सुविधाओं की वस्तुओं का त्याग करना होता है।     इस दौरान अपने तंबू में अखंड दीप जलाना और दिनभर प्रवचन व सत्संग में समय बिताना होता है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं।

04 जनवरी राशिफल: नए साल की शुरुआत में जानें आपकी राशि का हाल

मेष राशि- आज आपके अंदर ऊर्जा रहेगी, लेकिन जरूरी है कि आप उसे सही दिशा में लगाएं। एक साथ बहुत कुछ करने से बेहतर है कि कोई एक जरूरी काम चुनें और उसे पूरा करें। ऑफिस या घर में बातचीत से कई अटकी बातें सुलझ सकती हैं। गुस्से में बोले गए शब्द नुकसान कर सकते हैं, इसलिए शांत रहना आपके फायदे में रहेगा। शाम के समय परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताने से मन हल्का होगा। वृषभ राशि- आज का दिन भले ही थोड़ा धीमा लगे, लेकिन भरोसेमंद रहेगा। पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं। घर के काम हों या रिश्ते, सब कुछ आराम से निपटेगा। किसी अपने से खुलकर बात करने से अंदर का तनाव कम होगा। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान लगे तो खुद को आराम दें। रात को नींद अच्छी आएगी। मिथुन राशि- आज दिमाग काफी एक्टिव रहेगा और बात करने का मन ज्यादा करेगा। दोस्तों या सहकर्मियों से बातचीत में कोई अच्छा आइडिया मिल सकता है। काम में बार-बार दिशा बदलने से बचें। प्रेम और रिश्तों में साफ और सीधी बात रखें, इससे गलतफहमी नहीं होगी। शाम तक अपने काम को लेकर संतोष महसूस करेंगे। कर्क राशि- आज मन शांत और संतुलित रहेगा। परिवार के साथ जुड़ाव महसूस होगा और घर का माहौल अच्छा रहेगा। कामकाज की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन दिशा सही रहेगी। पैसों में फालतू खर्च से बचें। भावनाओं में बहकर फैसले लेने से बचें, तभी दिन सुकून देगा। सिंह राशि- आज आत्मविश्वास अच्छा रहेगा और आपकी बात को महत्व भी मिलेगा। ऑफिस में आपकी राय सुनी जा सकती है। लेकिन ध्यान रखें कि आत्मविश्वास अहंकार में न बदले। रिश्तों में थोड़ा झुकना और सामने वाले को समझना जरूरी रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस ज्यादा भागदौड़ से बचें। कन्या राशि- आज जिम्मेदारियों का बोझ महसूस हो सकता है, लेकिन आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी। ऑफिस और घर दोनों जगह संतुलन बनाना जरूरी रहेगा। सेहत को नजरअंदाज न करें, थोड़ा आराम भी जरूरी है। रात तक संतोष और स्थिरता महसूस होगी। तुला राशि- आज जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें संभालने में सक्षम रहेंगे। काम में ध्यान रखें, क्योंकि छोटी सी लापरवाही परेशानी बन सकती है। रिश्तों में साफ-साफ बातचीत करें, मन में बात दबाकर न रखें। शाम के समय राहत और सुकून महसूस होगा। वृश्चिक राशि- आज सोचने और समझने का दिन है। पैसों और रिश्तों में सावधानी रखना जरूरी रहेगा। काम में धीरे-धीरे लेकिन पक्के कदम उठाएं। किसी पुराने दोस्त से बातचीत हो सकती है, जो मन को अच्छा लगेगी। दिन सीख देने वाला रहेगा। धनु राशि- आज संतुलन बनाकर चलने का दिन है। काम और निजी जीवन दोनों में तालमेल जरूरी रहेगा। पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें। प्रेम जीवन में मधुरता बनी रहेगी और बातचीत से रिश्ता मजबूत होगा। दिन के अंत में मन हल्का और खुश रहेगा। मकर राशि- आज भावनाएं थोड़ी गहरी रह सकती हैं। किसी बात को लेकर मन में उलझन हो सकती है, लेकिन गुस्से या जिद से बचें। काम में धैर्य रखें, मेहनत का फल मिलेगा। किसी अपने से दिल की बात साझा करने से राहत मिलेगी। सेहत का ध्यान रखें। कुंभ राशि- आज मन खुला और पॉजिटिव रहेगा। नए लोगों से मिलना या कहीं जाना फायदेमंद हो सकता है। काम में नए मौके या नई जानकारी मिल सकती है। खर्च थोड़ा बढ़ सकता है, इसलिए बजट का ध्यान रखें। कुल मिलाकर दिन उत्साह से भरा रहेगा। मीन राशि- आज भावनात्मक रूप से आप खुद को मजबूत महसूस करेंगे। रचनात्मक कामों में मन लगेगा और किसी अपने से जुड़ाव बढ़ेगा। खर्च सोच-समझकर करें। शाम तक मन प्रसन्न रहेगा और अंदर से संतोष महसूस होगा।

माघ मेला शुरू, जानिए इस साल के पवित्र स्नान की तारीखें और उनके पुण्य लाभ

प्रयागराज  नए साल के आगमन के साथ ही साल 2026 को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास उत्साह देखने को मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह वर्ष सूर्य ग्रह के प्रभाव वाला माना जा रहा है, ऐसे में लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और कर्मों पर सूर्य की ऊर्जा का विशेष असर पड़ने की मान्यता है। इसी शुभ संयोग के साथ वर्ष की शुरुआत में लगने वाला माघ मेला भी आरंभ होने जा रहा है। यह मेला हर साल माघ मास में आयोजित किया जाता है और इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा से मानी जाती है। माघ मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु प्रयागराज संगम पहुंचकर कल्पवास करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया स्नान, दान और तपस्या अक्षय पुण्य प्रदान करती है। प्रशासन और मेला समिति द्वारा इसकी तैयारियां बीते कई महीनों से की जा रही थीं। करीब 40 से 45 दिनों तक चलने वाला यह भव्य धार्मिक आयोजन आस्था और परंपरा का अनूठा संगम माना जाता है। आइए जानते हैं माघ मेले के दौरान कौन-कौन सी तिथियां सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जिन पर स्नान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। माघ मेला 2026 कब से कब तक रहेगा? वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत आज यानी 3 जनवरी 2025 से हो रही है। इस दिन पौष पूर्णिमा का पहला पवित्र स्नान किया जाएगा। यह मेला करीब 40 से अधिक दिनों तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के दिन होगा। इस पूरे कालखंड में कई प्रमुख स्नान पर्व, धार्मिक अनुष्ठान और त्योहार मनाए जाएंगे, जिनमें मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा विशेष महत्व रखते हैं। संगम स्नान का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यता है कि माघ मेले के दौरान संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माघ माह में किया गया स्नान, दान और जप कई गुना फल देता है। इसी कारण इस दौरान साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम तट पर निवास कर साधना, ध्यान और पूजा-पाठ करते हैं। कल्पवास और साधना का विशेष महत्व माघ मेले में कल्पवास का विशेष महत्व होता है। कल्पवासी इस पूरे माह संगम तट पर रहकर सात्विक जीवन अपनाते हैं। वे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, सूर्य उपासना, हवन, जप और ध्यान करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान की गई साधना से जन्म-जन्मांतर के बंधन समाप्त हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। संगम स्नान का धार्मिक महत्व माघ मास में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. पुराणों के अनुसार माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.यह समय दान, जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना गया है. कल्पवास का महत्व कल्पवास माघ मेले की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा है.कल्पवासी पूरे माघ मास संगम तट पर रहकर  सादा और संयमित जीवन व्यतीत करते हैं.इस दौरान वे ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं, एक समय सात्विक भोजन , भूमि पर शयन, जप, तप, ध्यान और दान, क्रोध, अहंकार और भोग से दूरी  बनाए रखते हैं शास्त्रों में कहा गया है कि एक माघ मास का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल देता है.विशेष रूप से उम्रदराज और गृहस्थ इस परंपरा का पालन करते हैं. माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां माघ मेले के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व आते हैं— 3 जनवरी – पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ) 14 जनवरी – मकर संक्रांति  21 जनवरी – मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान) 30 जनवरी – बसंत पंचमी 5 फरवरी – माघी पूर्णिमा 15 फरवरी – महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन) आस्था और संस्कृति का महापर्व माघ मेला भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है.यहां संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है. माघ मेले में इन बातों का रखें विशेष ध्यान माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। इस समय मांस-मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। छल-कपट, क्रोध और गलत शब्दों के प्रयोग से बचें। स्नान करते समय मन को शांत रखें और हंसी-मजाक न करें। पूरे समय अच्छे विचार रखें और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।