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झारखंड और नेपाल के डोनरों से जुड़ा किडनी तस्करी का खेल, कानपुर पुलिस ने ओटी टेक्नीशियन और मैनेजर को दबोचा

कानपूर कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपियों का नेटवर्क आसपास के जिलों में फैला है। पुलिस को उन्नाव और जालौन में इससे जुड़े कुछ सुराग मिले हैं। गुरुवार को पुलिस की टीमें भेजी गई हैं। गुर्दा प्रत्यारोपण के खेल में उन्नाव के एक डॉक्टर और जालौन के नर्सिंगहोम संचालक का नाम सामने आया है। घटना में जेल गया शिवम अग्रवाल मूलरूप से जालौन का रहने वाला है। कानपुर के लगभग 10 नर्सिंगहोम के नाम आने के बाद उन्नाव और उरई के कुछ नर्सिंगहोम भी शक के दायरे में आ गए हैं। वहां के मरीजों को शहर लाया गया है या यहां से प्रत्यारोपण के बाद गुर्दा रोगियों की वहां के निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है, इसकी जांच शुरू हो गई है। आरोपी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ जुड़े उन्नाव के एक डॉक्टर का नाम सामने आया है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। रावतपुर पुलिस एनसीआर के डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, डॉ. अनुराग, डॉ. वैभव की तलाश कर रही है। इनमें से एक डॉक्टर उन्नाव का रहने वाला बताया जा रहा है। वह उन्नाव के निजी अस्पतालों के सर्जन से लंबे समय से संपर्क में है। पुलिस को दोनों के संबंधों के साक्ष्य मिले हैं। उरई के नर्सिंगहोम संचालक के भी इस खेल में शामिल होने की जानकारी हुई है। दोनों जिलों से कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। अब तक हुई जांच में केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल का एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल के बारे में भी जानकारी मिली है। वह मूलरूप से जालौन का रहने वाला है। उसके परिजन और रिश्तेदारों की और जानकारी जुटाई जा रही है।   शहर के बड़े और नामी नर्सिंगहोम में कुछ दिन पहले हुआ था किडनी ट्रांसप्लांट किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण में शहर के बड़े और नामी नर्सिंगहोम का नाम सामने आया है। यहां कुछ दिन पहले ही गुर्दा प्रत्यारोपित हुआ था। यह जानकारी पुलिस को गुरुवार को गिरफ्तार हुए ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार से पूछताछ में हुई है। दोनों ने अधिकारियों को बताया है कि यह नर्सिंगहोम रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक बना हुआ है। रोजाना काफी संख्या में मरीज आते हैं। कई छोटे-बड़े ऑपरेशन भी होते हैं। पुलिस ने नर्सिंगहोम के दो स्टाफ को हिरासत में लिया है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार दोनों ओटी टेक्नीशियन हैं। राजेश कुमार का प्रमोशन हो गया है। उसे ओटी मैनेजर बना दिया गया है। उसका वेतन 70 हजार महीना है जबकि कुलदीप को 42 हजार रुपये मिलते हैं। दोनों डॉ. रोहित के संपर्क में थे। डॉ. रोहित एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं। उसका संबंध सर्जन डॉ. अली और डॉ. सैफ के साथ में है। दोनों ने पैरामेडिकल स्टाफ अखिलेश और शैलेश के बारे में भी बताया है। ये सभी गाजियाबाद के वैशाली क्षेत्र के बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं। ये कई बार शहर आ चुके हैं। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में लगा दी गई हैं। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम ब्रांच की टीमें भी सक्रिय हैं। किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े आरोपियों का नेटवर्क सिर्फ एनसीआर ही नहीं कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। डॉक्टरों की टीम करने आई थी दो ट्रांसप्लांट डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि डॉक्टरों की दोनों टीम रविवार देर रात दो किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए आई थी लेकिन एक ही करके चली गई थी। यह जानकारी दोनों ओटी टेक्नीशियन ने पूछताछ में दी है। दोनों ने झारखंड और नेपाल के दो डोनरों की जानकारी दी है। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लग गई हैं। जिस रोगी को किडनी लगानी थी, वह भी शहर के नर्सिंगहोम में उपचाराधीन है  शुक्रवार को उनके परिजनों से जानकारी जुटाई जाएगी।  किडनी ट्रांसप्लांट मामले में कुछ अन्य जिलों के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ के शामिल होने के सुराग मिले हैं। उन जिलों में टीमें भेजी गई हैं। आरोपियों के संपर्क में आए लोगों की और जानकारी जुटाने के साथ नेटवर्क खंगाला जा रहा है।- एसएम कासिम आबिदी, डीसीपी पश्चिमी जोन कानपुर  

इंसानियत की मिसाल, खुद गोद ली गई माँ ने भारत के बीमार बच्चे को अपनाकर निभाया ममता का रिश्ता

झुंझुनू झुंझुनूं से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो भावुक करने वाली है। एक इटालियन दंपती ने उस डेढ़ साल के मासूम बच्चे को गोद लिया है जिसके दिल में जन्म से ही छेद है। बच्चे की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद इस दंपती ने एक पल भी नहीं सोचा और उसे अपनाने का फैसला कर लिया। इटालियन दंपती ने लिया गोद यह फैसला न सिर्फ उस मासूम की ज़िंदगी बदलने वाला है बल्कि यह इंसानियत और बेशर्त मोहब्बत की एक अनमोल मिसाल भी बन गया है।यह बच्चा करीब डेढ़ साल पहले अपनी नन्ही सी उम्र में प्रीमैच्योर हालत में पालना गृह में छोड़ दिया गया था। जांच के दौरान जब उसके दिल में छेद का पता चला तो उसकी देखभाल शिशु गृह में ही शुरू की गई। इस नाज़ुक बच्चे को एक परिवार की सख्त ज़रूरत थी और आखिरकार वह ज़रूरत उस दंपती ने पूरी की जो हज़ारों मील दूर से उसके लिए चले आए।बच्चे को गोद लेने की पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के तहत संपन्न हुई। चार महीने तक चला दस्तावेजीकरण शिशु गृह के सुपरिटेंडेंट अंकित कुमार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय गोद लेने की प्रक्रिया काफी लंबी और पेचीदा होती है। इस मामले में करीब चार महीने तक गहन जांच और दस्तावेज़ीकरण चला, लेकिन सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस मासूम को उसका नया परिवार मिल गया। इस पूरी कहानी में सबसे भावुक करने वाला पहलू यह है कि बच्चे को गोद लेने वाली माँ खुद भी करीब 35 साल पहले कोलकाता से एक इटालियन परिवार द्वारा गोद ली गई थीं। भारत से उनका यह गहरा भावनात्मक रिश्ता ही था जिसने उन्हें यहीं से बच्चा गोद लेने के लिए प्रेरित किया और वह भी ऐसा बच्चा जिसे सबसे ज्यादा प्यार और देखभाल की दरकार थी। दंपती ने बताया कि 2017 में शादी के बाद से ही उनके मन में किसी बच्चे को गोद लेने की चाहत थी। उनके लिए बच्चे की बीमारी कभी रुकावट नहीं बनी। उनका कहना है कि वे उसे बस भरपूर प्यार देना चाहते हैं और एक ऐसा भविष्य जहां वह सुरक्षित और खुशहाल रहे। इस मासूम के आने से उनका परिवार पूरा हो गया है।  

प्रेम प्रसंग बना जानलेवा, युवक की हत्या कर जिंदा दफनाया—5 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर अभनपुर थाना क्षेत्र में मिले अज्ञात शव के अंधे कत्ल का पुलिस ने सुलझा लिया है। मुख्य आरोपित श्याम सुंदर सोनी समेत कुल पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपित अब भी फरार है। जांच में सामने आया है कि प्रेम प्रसंग के चलते युवक नितेश बत्रा (29 वर्ष) की हत्या कर उसे जिंदा ही मुरूम गड्ढे में दफना दिया गया था। मुरूम गड्ढे में मिला था शव, हाथ-पैर बाहर निकले थे मामले का राजफाश करते हुए ग्रामीण एसपी स्वेता श्रीवास्तव सिंहा ने बताया कि 21 मार्च को ग्राम भरेंगाभाठा के पास सड़क किनारे मुरूम गड्ढे में एक अज्ञात युवक का शव दफन मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। शव का एक हाथ और पैर बाहर दिखाई दे रहा था। पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की टीम मौके पर पहुंची और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को निकाला गया। डॉक्टरों की रिपोर्ट में सामने आया कि मृतक के गले पर गंभीर चोट पहुंचाई गई थी और उसे अधमरी हालत में गड्ढे में दफन किया गया, जिससे मिट्टी सांस नली में जाने के कारण उसकी मौत हो गई। इस आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। गुमशुदगी से जुड़ा मामला, ऐसे हुई पहचान जांच के दौरान थाना माना में दर्ज गुमशुदगी के एक केस से मृतक का मिलान किया गया। कपड़ों, टैटू और अन्य पहचान के आधार पर स्वजनों को बुलाया गया, जिन्होंने शव की पहचान नितेश बत्रा (29) निवासी माना के रूप में की। प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ विवाद, फिर बना हत्या का कारण पुलिस पूछताछ में राजफाश हुआ कि आरोपित श्याम सुंदर सोनी और सावित्री साहू के बीच प्रेम संबंध था। नितेश बत्रा अक्सर सावित्री को परेशान करता था। 16 मार्च की रात जब नितेश सावित्री के घर के पास पहुंचा, तब श्याम सुंदर सोनी से उसका विवाद हो गया। इसी दौरान आरोपितों ने मिलकर नितेश की पिटाई की। ऑटो में घुमाकर कई जगह की मारपीट, फिर दफनाया आरोपितों ने पहले लकड़ी और हाथ-मुक्कों से मारपीट की, फिर उसे ऑटो में बैठाकर अलग-अलग जगहों पर ले गए। रास्ते में उसकी स्कूटी को पुलिया के नीचे फेंक दिया गया। बाद में सुनसान जगह ले जाकर गमछे से गला दबाया गया और बेहोश होने पर मुरूम खदान में दफना दिया गया। तकनीकी जांच और सीसीटीवी से मिली सफलता घटना स्थल ब्लाइंड स्पॉट होने के बावजूद पुलिस ने कई किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपितों तक पहुंची। मुखबिर की सूचना पर टीम ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया। ये आरोपित हुए गिरफ्तार पुलिस ने श्याम सुंदर सोनी (21), सुमित कोसले (21), सावित्री साहू (21) और दो विधि के साथ संघर्षरत बालकों को गिरफ्तार किया है। मामले में माईकल सैनी नामक एक आरोपित फरार है, जिसकी तलाश जारी है। आरोपितों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त ऑटो, लकड़ी और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं।  

हज यात्रियों को साथ रखने होंगे 3000 रियाल, डिजिटल होगी कुर्बानी की प्रक्रिया और ठगी रोकने को बना ‘नुसुक मसार’ पोर्टल

जयपुर  मुकद्दस हज यात्रा पर जाने वाले जायरीनों के लिए इस बार सफर की राह थोड़ी अलग होगी। 21 अप्रैल से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव कुर्बानी की प्रक्रिया को लेकर किया गया है। अब कोई भी हाजी निजी स्तर पर जानवर खरीदकर कुर्बानी नहीं दे सकेगा। इस बार पूरी व्यवस्था को डिजिटल और सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है। जेब में रखने होंगे 3000 रियाल, खाना बनाने पर रोक इस बार हज यात्रियों के लिए एक और महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि उन्हें अपने साथ कम से कम 3000 सऊदी रियाल की व्यवस्था करके ले जानी होगी। हज के दौरान इस बार यात्रियों को खुद खाना बनाने की इजाजत नहीं होगी। यह राशि उनके खाने-पीने, होटल के छोटे-मोटे खर्चों और अन्य निजी जरूरतों के लिए अनिवार्य की गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे कैंपों में आग लगने का खतरा कम होगा और सफाई बनी रहेगी। ठगी और जालसाजी पर लगेगा लगाम? अक्सर देखा जाता था कि मक्का में कुर्बानी के नाम पर जायरीन के साथ धोखाधड़ी होती थी। कुछ जालसाज एक ही जानवर की अलग-अलग एंगल से फोटो दिखाकर कई लोगों से पैसे ऐंठ लेते थे। इसी 'फोटो वाली ठगी' और गंदगी को रोकने के लिए सऊदी अरब सरकार ने नुसुक मसार पोर्टल अनिवार्य कर दिया है। अब कुर्बानी के लिए केवल आधिकारिक 'अदाही प्रोजेक्ट' के माध्यम से ही ऑनलाइन जानवर बुक किए जा सकेंगे। जिन यात्रियों ने फॉर्म में कुर्बानी की सहमति दी है, उन्हें अब हज कमेटी के जरिए ही निर्धारित राशि जमा करानी होगी। 6 अप्रैल है 'डेडलाइन': आखिरी किस्त जमा करना जरूरी शेखावाटी के हज सेवक सुभाषचन्द्र वर्मा के अनुसार, जयपुर एम्बार्केशन पॉइंट से जाने वाले यात्रियों के लिए तीसरी और अंतिम किस्त जमा कराने की तारीख बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी गई है। तीसरी किस्त के रूप में 17,290 रुपये जमा कराने होंगे। हज यात्रा का कुल खर्च लगभग 3.52 लाख रुपये है, जिसे तीन किश्तों में जमा करना होता है। यदि 6 अप्रैल तक भुगतान नहीं हुआ, तो फ्लाइट कन्फर्मेशन रद्द हो सकती है। पेमेंट के तरीके: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प यात्री Haj Suvidha ऐप या वेबसाइट के जरिए नेट बैंकिंग/क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। ऑफलाइन विकल्प के लिए एसबीआई या यूनियन बैंक की शाखाओं में चालान जमा कराया जा सकता है। इसके लिए 'यूनिक बैंक रेफेरेंस नंबर' होना अनिवार्य है।

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच दिल्ली में ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बवाना और अलीपुर में 100 सिलेंडर जब्त

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों में दिखने लगा है. ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में भी रेखा गुप्ता की सरकार सतर्क हो गई है. दिल्ली में LPG गैस सिलेंडर की कालाबाजारी को रोकने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट ने एक कंट्रोल रूम तैयार किया है, जहां लोग सीधे शिकायत कर सकते हैं. अगर किसी को गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की जानकारी मिलती है, तो वह 8383824659 नंबर पर शिकायत कर सकता है. खास बात यह है कि शिकायत करने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी. सरकार ने हाल ही में बवाना और अलीपुर इलाके में ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 100 गैस सिलेंडर जब्त किए गए. इससे साफ है कि कालाबाजारी पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है. केंद्र सरकार ने भी कमर्शियल कंज्यूमर्स के लिए 70 फीसदी सिलेंडर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. दिल्ली में रोजाना करीब 6300 कमर्शियल सिलेंडर दिए जा रहे हैं, ताकि सप्लाई बनी रहे और लोगों को दिक्कत न हो. अब सरकार का फोकस साफ है कि सप्लाई को स्थिर रखना और कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाना. ऐसे समय में लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कहीं गड़बड़ी दिखे तो तुरंत जानकारी दें. बता दें कि अमेरिका इजरायल ने साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. इस हमले के बाद दुनिया के कई मुल्कों पर ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा. इससे भारत भी अछूता नहीं रहा. देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिसमें लोग गैस सिलेंडर के लिए लाइन में लगते हुए दिखे. वहीं, सरकार ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी.

RPSC को मिली बड़ी राहत, 2.21 लाख ओवरएज अभ्यर्थियों के अरमानों पर फिरा पानी और सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित किया अपना आदेश

जयपुर  राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2025 की परीक्षा से महज दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। शुक्रवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की स्पेशल वेकेशन बेंच ने अपने पिछले आदेश में बड़ा संशोधन किया है। कोर्ट के इस 'यू-टर्न' ने जहां राजस्थान लोक सेवा आयोग को राहत दी है, वहीं हजारों ओवरएज अभ्यर्थियों के सपनों पर पानी फेर दिया है। क्या था गुरुवार का आदेश और क्यों बदला? गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यापक आदेश जारी करते हुए SI भर्ती-2021 के उन सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी थी, जो ओवरएज होने के कारण 2025 की भर्ती का फॉर्म नहीं भर पाए थे। इस आदेश से करीब 2.21 लाख नए अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन, RPSC ने शुक्रवार को अदालत में गुहार लगाई कि परीक्षा 5 और 6 अप्रैल को प्रस्तावित है। आयोग ने तर्क दिया कि 7.5 लाख अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी हो चुके हैं और परीक्षा केंद्रों पर पूरी तैयारी है। इस अंतिम घड़ी में 2.21 लाख नए लोगों से फॉर्म भरवाना और उन्हें परीक्षा में बैठाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। अब किसे मिलेगा मौका? सुप्रीम कोर्ट ने RPSC की दलीलों को वाजिब मानते हुए अपने आदेश को सीमित कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह लाभ अब केवल मुख्य याचिकाकर्ता सूरजमल मीणा और उन 713 अभ्यर्थियों तक ही सीमित रहेगा जिन्होंने पहले हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिन अभ्यर्थियों ने अब तक कोर्ट में याचिका दायर नहीं की थी, उन्हें इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने दोटूक कहा- 'एक व्यक्ति दूसरे के लिए राहत की मांग नहीं कर सकता।' RPSC ने कोर्ट को बताया कि 713 याचिकाकर्ताओं को पहले ही प्रवेश पत्र जारी किए जा चुके हैं, वे परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। अभ्यर्थियों में मायूसी, RPSC ने ली चैन की सांस आयोग की ओर से अधिवक्ता राजेश सिंह चौहान ने पक्ष रखते हुए बताया कि बिना तैयारी के इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को शामिल करना पूरी परीक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर सकता था। इधर, हजारों ऐसे अभ्यर्थी जो गुरुवार के आदेश के बाद किताबों की धूल झाड़कर तैयारी में जुटे थे, वे अब इस 'मॉडिफाई' आदेश से ठगे से महसूस कर रहे हैं। राजस्थान में 5 और 6 अप्रैल को दो चरणों में होने वाली इस परीक्षा पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। अब यह साफ हो गया है कि केवल वही लोग मैदान में होंगे जिनके पास वैध एडमिट कार्ड हैं और जो कानूनी लड़ाई का हिस्सा रहे हैं। पुलकित सक्सेना

ऑपरेशन पर सवाल: ब्रेन सर्जरी के बाद पेट पर चीरा, परिजनों का बवाल—अस्पताल में पुलिस तैनात

सतना शहर के प्रियंवदा बिरला अस्पताल में एक महिला के ऑपरेशन के बाद गंभीर लापरवाही के आरोपों ने पूरे शहर को झकझोर दिया। ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद जब महिला को घर ले जाया गया, तो उसके पेट पर भी चीरा मिलने से स्वजनों के होश उड़ गए। इस खुलासे के बाद शुक्रवार को अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ, जो घंटों तक चलता रहा और स्थिति संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ यह है घटनाक्रम सभापुर थाना क्षेत्र के ग्राम माजन निवासी 60 वर्षीय जमुनिया साकेत को 29 मार्च को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि की और 1 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया। स्वजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद महिला को होश तक नहीं आया, बावजूद इसके शुक्रवार सुबह अस्पताल ने उसे छुट्टी दे दी। लेकिन घर पहुंचने के बाद जब स्वजनों ने पट्टियां हटाईं, तो महिला के पेट पर भी सर्जरी जैसा गहरा चीरा दिखाई दिया। इस अप्रत्याशित स्थिति ने स्वजनों को स्तब्ध कर दिया और उन्होंने तुरंत इसे गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही मानते हुए अस्पताल का रुख किया। लेकिन स्वजन जब बिरला अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर के छुट्टी पर होने की बात कह उसे एडमिट करने से अस्पताल प्रबंधन ने इंकार कर दिया। इसके बाद अस्पताल पहुंचे स्वजन और ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर गलत इलाज और लापरवाही के आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान अस्पताल स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई की भी स्थिति बनी। आरोप है कि सुरक्षा गार्डों ने महिलाओं के साथ अभद्रता और मारपीट भी की। सूचना पर पहुंचे दो थानों के प्रभारी सूचना मिलते ही कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कोतवाली थाना प्रभारी रवीन्द्र द्विवेदी समेत अन्य थानों की पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। इसके बावजूद करीब तीन घंटे तक अस्पताल परिसर में तनाव बना रहा। कांग्रेस नेता बैठे धरने पर घटना की सूचना पर कांग्रेस नेता रितेश त्रिपाठी भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर समर्थन जताया। परिजन अस्पताल प्रबंधन पर तीन लाख रुपये लेने के बावजूद उचित इलाज न देने का आरोप लगा रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऑपरेशन पूरी तरह चिकित्सा मानकों के अनुरूप किया गया है और सभी प्रोटोकॉल का पालन हुआ है। पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जमात रजा-ए-मुस्तफा के महासचिव फरमान मियां की समाजसेवा का डंका, अब सरकारी परीक्षा के सवालों में मिली जगह

लखनऊ उत्तर प्रदेश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं UPSSSC और UPPCS के हालिया प्रश्नपत्रों में फरमान हसन खान उर्फ फरमान मियां का नाम आने से प्रदेशभर में चर्चा तेज है. जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां सामाजिक, धार्मिक और जनसेवा कार्यों के लिए चर्चित हैं तथा कई सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं.  उत्तर प्रदेश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं UPSSSC और UPPCS के हालिया प्रश्न पत्रों में फरमान हसन खान उर्फ फरमान मियां का नाम शामिल होने के बाद प्रदेश भर में इसकी चर्चा शुरू हो गई है. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच यह विषय तेजी से फैल रहा है. फरमान मियां 108 साल पुरानी संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफ़ा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. वे काजी–ए–हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा ख़ान के दामाद हैं तथा आला हजरत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक भी हैं. समाजसेवा के क्षेत्र में उनके नेतृत्व में समय-समय पर मेडिकल कैंप, जरूरतमंदों के लिए उपचार छात्रो के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता और राहत कार्य आयोजित किए गए हैं. विशेष रूप से गरीब मरीजों के इलाज और सर्जरी की व्यवस्था जैसे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सराहा गया है. उनके इन्हीं कार्यों के लिए उन्हें भारत गौरव रत्न सम्मान से नवाजा जा चुका है. इसके अलावा स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और मानवाधिकार से जुड़े अभियानों में योगदान के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होना उसकी व्यापक पहचान का संकेत माना जाता है. ऐसे में फरमान मियाँ का उल्लेख प्रदेश स्तर पर एक चर्चा का विषय बन गया है. फिलहाल, इसको लेकर अभ्यर्थियों और आम लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन यह साफ है कि यह मुद्दा परीक्षा जगत में खास दिलचस्पी का कारण बना हुआ है.  

तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी, झारखंड के 13 जिलों में शनिवार को बिगड़ेगा मौसम का हाल

  रांची झारखंड में मौसम लगातार करवट ले रहा है. शुक्रवार को दिनभर आंशिक बादल छाए रहे और शाम होते-होते रांची और कोडरमा में तेज हवा के साथ बारिश हुई. इससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन आने वाले दिनों में मौसम और बदलने वाला है. 4 से 6 अप्रैल तक येलो अलर्ट मौसम विभाग ने 4 अप्रैल से 6 अप्रैल तक राज्य में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है. इस दौरान कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है. इन जिलों में बारिश और तेज हवा की चेतावनी शनिवार को पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बारिश हो सकती है. इसके साथ ही 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है. रविवार-सोमवार को और तेज होगा असर मौसम विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को भी कई इलाकों में बारिश और गरज के साथ बादल छाए रहेंगे. इस दौरान हवा की रफ्तार बढ़कर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. अप्रैल में टूट सकता है गर्मी का रिकॉर्ड मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, अप्रैल में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. पिछले 10 वर्षों में 2016 में अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, जो इस बार टूट सकता है. इस महीने के पहले सप्ताह में बारिश से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन दूसरे और तीसरे सप्ताह में तापमान तेजी से बढ़ेगा और महीने के अंत तक हीट वेव की स्थिति बन सकती है. तापमान का हाल पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक 5 मिमी बारिश रामगढ़ में हुई. वहीं, सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री सरायकेला में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री गुमला में रिकॉर्ड किया गया.

बाबा साहेब की प्रतिमा का अनावरण कर राजभर का सपा पर तीखा हमला, बोले- अखिलेश न पूरी तरह हिंदू बन पा रहे न मुसलमान

मऊ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मऊ जिले के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र स्थित कसारी गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क की प्रतिमा का अनावरण किया. इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए और पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव की दादरी रैली पर पलटवार किया. राजभर ने सपा प्रमुख पर धार्मिक पहचान को लेकर स्पष्ट न होने का आरोप लगाया. उन्होंने खुद को एक ऐसा नेता बताया जो गरीबों के हक के लिए मुख्यमंत्री और अधिकारियों से भी भिड़ सकता है. खुद को बताया 'बेहया' नेता मंच से जनता को संबोधित करते हुए राजभर ने अपनी कार्यशैली पर बेबाकी से बात की. उन्होंने कहा, "हम बहुत बेहया नेता हैं. बेहया उस पौधे की तरह है जो पोखरी में थोड़ा भी हो तो फैल जाता है. मेरा नाम सुनते ही अधिकारी काम कर देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यह हल्ला करेगा." उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जनता के न्याय के लिए डीएम, मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव, किसी से भी लड़ने को तैयार रहते हैं. राजभर ने कहा कि वह मनबढ़ नहीं हैं, बल्कि बाबा साहेब के संविधान की ताकत से गरीबों को न्याय दिला रहे हैं. अखिलेश की धार्मिक पहचान पर सवाल राजभर ने अखिलेश यादव की दादरी रैली पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश जी न तो पूरी तरह हिंदू बन पा रहे हैं और न ही मुसलमान. उन्होंने कहा, "अखिलेश कभी नमाज पढ़ने जाते हैं तो कभी सेवई खाने, लेकिन मंदिर जाने से कतराते हैं. वह पहले यह तय करें कि वह नमाजी हैं या मंदिर वाले." राजभर के मुताबिक, अखिलेश अयोध्या और मथुरा जाने से परहेज करते हैं, जबकि जनता अब उनकी हकीकत समझ चुकी है. गुर्जर समाज को बताया 'कट्टर हिंदू' दादरी में गुर्जर समाज के समर्थन के दावे पर राजभर ने कहा कि गुर्जर समाज कट्टर हिंदू है और वह भगवान राम व कृष्ण को मानता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का दावा खोखला है क्योंकि सोशल मीडिया पर गुर्जर समाज द्वारा सपा के बहिष्कार के वीडियो मौजूद हैं. राजभर ने कहा कि राजा मिहिर भोज की मूर्ति को गंगाजल से धोए जाने के सवाल पर अखिलेश जवाब नहीं दे पाए. उनके अनुसार, लाखों यादव और मुसलमान अब भाजपा के साथ हैं. विपक्षी गठबंधन को बताया 'दगे हुए कारतूस' एनडीए की मजबूती का दावा करते हुए राजभर ने कहा कि उनके गठबंधन में जयंत चौधरी, अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद जैसे नेताओं के पास वोट दिलाने की ताकत है. वहीं, समाजवादी पार्टी के पास केवल 'दगे हुए कारतूस' बचे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का कोई भी नेता सामाजिक न्याय समिति या रोहिणी आयोग की रिपोर्ट पर बात नहीं कर रहा है, सब केवल अपना टिकट पक्का करने के जुगाड़ में लगे हैं.