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विकसित भारत जीरामजी योजना से सेंड फिल्टर निर्माण ने दी भूजल को संजीवनी

रायपुर “जल है तो जीवन है”—यह पंक्तियाँ धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत मुल्ले के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था की बुनियाद बन चुकी हैं। वर्षा आधारित इस क्षेत्र में जल की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प के साथ 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत विकसित भारत जीरामजी योजना से जल स्रोतों में सेंड फिल्टर (Sand Filter) का सफल निर्माण कराया गया है। यह पहल वर्षा एवं सतही जल के कुशल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है। प्राकृतिक छनन तकनीक से बहते पानी का जतन ​वर्षाकाल में खेतों और गलियों से बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को उपयोगी बनाने के उद्देश्य से गाँव में सेंड फिल्टर की स्थापना की गई है। इस संरचना में रेत और प्राकृतिक छनन माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जो जल के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, गाद और अन्य ठोस अशुद्धियों को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे स्वच्छ जल जमीन के भीतर समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। सीमित संसाधनों में तैयार यह छोटी संरचना भविष्य की जल संपदा को सुरक्षित करने की एक मजबूत नींव साबित हो रही है। 52 हजार की लागत में दोहरा लाभ: जल संरक्षण के साथ रोजगार ​ग्राम मुल्ले में इस सेंड फिल्टर का निर्माण 52 हजार रुपये की स्वीकृत लागत से सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसमें सामग्री के लिए 41 हजार रुपये तथा मजदूरी के लिए 11 हजार रुपये निर्धारित थे। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर कुल 52 हजार रुपये व्यय हुए, जिसमें से 10,500 रुपये मजदूरी मद में खर्च किए गए। इस कार्य की सबसे खास बात यह रही कि इसमें गाँव के ही श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आय का साधन प्राप्त हुआ। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि प्रधान ग्राम मुल्ले की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर जल की उपलब्धता पर निर्भर है। ऐसे में सेंड फिल्टर के ज़रिए भूजल स्तर में सुधार होने से आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को निरंतरता मिलेगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर किसानों की आय और फसल उत्पादन पर पड़ेगा। बदलाव की बयार: 'आज का संरक्षण, कल की सुरक्षा' इस पहल ने ग्रामीणों की सोच में भी बड़ा बदलाव लाया है। अब गाँव के लोग वर्षा जल को केवल एक तात्कालिक जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संजोने योग्य प्राकृतिक धरोहर मान रहे हैं। मुल्ले गाँव का यह प्रयास यह संदेश देता है कि जल सुरक्षा की जंग केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाओं से ही नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी से किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से भी जीती जा सकती है। आज सहेजी जा रही यही एक-एक बूंद आने वाले कल में गाँव की जीवनरेखा बनेगी।

योगी सरकार की तत्परता से अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव तेज, जिलों में फील्ड पर उतरा प्रशासन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों से संवाद कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश राहत आयुक्त के अनुसार 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। क्षतिग्रस्त मकानों की सूचना पर मदद में जुटा प्रशासन अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से प्रदेश में 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। मकान क्षति के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस संबंध में प्रशासन मदद उपलब्ध कराने में जुट गया है। फसल क्षति का तत्काल आकलन अधिकारियों को फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण और आकलन कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था व पात्र परिवारों को आवास योजनाओं का लाभ दिलाने को भी कहा गया है। फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। राहत सामग्री और अनुमन्य सहायता राशि का वितरण प्राथमिकता के आधार पर करने और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करने को कहा गया है। रेस्क्यू अभियान लगातार जारी जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों को आवश्यक सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन ने आमजन से जलभराव, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा नदियों-नालों के तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। आपातकालीन सहायता के लिए राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की भी अपील की गई है।

बहराइच की 198 ग्राम पंचायतों में बन रहीं डिजिटल लाइब्रेरी, QR स्कैन करते ही दर्ज होगी उपस्थिति

बहराइच  जिले के 14 विकास खंडों के 198 ग्राम पंचायतों में तैयार की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की हाजिरी अब क्यूआर कोड से लगेगी। विद्यार्थी के क्यूआर कोड स्कैन करते ही उसकी उपस्थिति दर्ज हो जाएगी और इसकी जानकारी सीधे शासन स्तर तक पहुंचेगी। इससे लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उपस्थिति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। जिले में डिजिटल लाइब्रेरियों को आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। अंदर आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के साथ साज-सज्जा कराई गई है, जो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगी। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित किताबें भी रखी गई हैं। प्रत्येक लाइब्रेरी में कम से कम 25 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। बड़ी लाइब्रेरियों में एक साथ करीब 50 विद्यार्थी बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए क्यूआर कोड लगाया गया है। विद्यार्थी के स्कैन करते ही उसकी हाजिरी दर्ज हो जाएगी। इससे लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और इसकी निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। व्यवस्था की देखरेख जिला पंचायत राज अधिकारी के मार्गदर्शन में की जा रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 7.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। डिजिटल लाइब्रेरियों की स्थापना का काम चल रहा है। यहां पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों की हाजिरी भी लगेगी। इसके लिए क्यूआर कोड लगाया जाएगा। लाइब्रेरी स्थापित होने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से लाइव प्रसारण के माध्यम से इन सभी का उद्घाटन भी किया जा सकता है। -चंद्रभान सिंह, डीपीआरओ।  

मंत्री परमार ने बच्चों एवं माताओं से किया आत्मीय संवाद

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार के मुख्य आतिथ्य में "सेवा संकल्प अभियान" के अंतर्गत शाजापुर जिले के शुजालपुर के फ्रीगंज राघवगंज आंगनवाड़ी केंद्र 20/1 में “आंगन मिलन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं कन्या पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थितजनों को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम के 138वें संस्करण एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उद्बोधन का एलईडी के माध्यम से सीधा प्रसारण हुआ। कार्यक्रम में मंत्री  परमार ने आंगनवाड़ी केंद्र में उपस्थित नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं माताओं के साथ आत्मीय संवाद किया। इस दौरान मंत्री  परमार ने माताओं एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं दैनिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी भी ली। मंत्री  परमार ने बच्चों के साथ समय बिताया तथा उनकी गतिविधियों में सहभागिता की। इस दौरान बच्चों की मासूमियत और उत्साह ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चो को खिलोने की किट वितरित की गई । मंत्री  परमार ने कहा कि बच्चे हमारे समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं। उनके स्वस्थ शरीर, संस्कारित मन और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रारंभिक वर्षों में विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और संस्कारों से जोड़ने का कार्य किया जाता है। मंत्री  परमार ने कहा कि आंगनवाड़ी केवल बच्चों की देखभाल और पोषण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है। बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार के साथ समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। जब समाज संवेदनशील होकर बच्चों और माताओं के साथ खड़ा होता है, तो सेवा की भावना और अधिक मजबूत होती है। मंत्री  परमार ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सेवा और सहभागिता की भावना को मजबूत करने का प्रयास है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदना और सहयोग पहुंचाना तथा जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है। मंत्री  परमार ने माताओं से भी बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पौष्टिक आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य देखभाल तथा अच्छे संस्कार अत्यंत आवश्यक हैं। बच्चों के प्रारंभिक विकास में माता-पिता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने केंद्र में संचालित गतिविधियों तथा बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उपस्थित माताओं ने भी बच्चों से जुड़े विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम में बच्चों के साथ आत्मीय वातावरण में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। जिला कार्यक्रम अधिकारी  संजय त्रिपाठी ने बताया कि “आंगन मिलन” कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों से जनभागीदारी को जोड़ना, बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा माताओं और बच्चों के साथ आत्मीय संवाद के माध्यम से सेवा एवं संवेदना की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में बच्चों की मुस्कान और माताओं के स्नेह के बीच सेवा के संकल्प को दोहराया गया। उपस्थितजनों ने कहा कि समाज के नन्हे बच्चों के स्वस्थ, संस्कारित और उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसे आयोजन जनभागीदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से आंगनवाडी केन्द्रों को गोद लेने के लिये आहवान किया। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा दीदी का भी सम्मान किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बच्चों के चेहरे पर मुस्कान, माताओं के मन में विश्वास और प्रत्येक आंगन में खुशहाली का संकल्प निरंतर आगे बढ़ाने की भावना कार्यक्रम में देखने को मिली। इस अवसर पर जिले का नवाचार "घर में पकायेगे घर का खायेंगे" अंतर्गत पोषण प्रदर्शनी लगाई गई एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसका मत्री  एवं अतिथियों द्वारा अवलोकन किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष शुजालपुर  बबीता परमार, डॉ. रवि पांडे, सेवा संकल्प अभियान जिला प्रभारी  नरेन्द्र सिंह यादव,  देवेन्द्र सिसोदिया,  देवेन्द्र तिवारी, अंजू खत्री,  युवराज रामडिया,  योगेश शिवहरे, अनुविभागीय अधिकारी शुजालपुर  अंकिता पाटकर, प्रभारी परियोजना अधिकारी शुजालपुर  ममता परमार सहित जनप्रतिनिधिगण, पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक, महिलाऐं, बच्चे उपस्थित रहे।  

‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर आयुर्वेद को जनकल्याण से जोड़ें : राज्यपाल पटेल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि मन की बात से प्रेरणा लेकर आयुर्वेद को जनकल्याण से जोड़ें, क्योंकि आने वाला समय आयुर्वेद का है। आवश्यकता उसके ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन, प्रकृति संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आयुर्वेद को केवल उपचार तक सीमित नहीं रखें। उसके ज्ञान से रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद महाविद्यालय को शिक्षा, शोध, सेवा और जन-जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाने का केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य का संबंध केवल दवा से नहीं, बल्कि स्वच्छता, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, योग, व्यायाम और सकारात्मक सोच से भी है। राज्यपाल  पटेल पं. खुशीलाल शासकीय (स्वशासी) आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान के रजत जयंती सभागार में रविवार को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रसारण से पूर्व श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के नागरिकों से संवाद का नवाचार है, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रेरक कार्य और अनुभव सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम सामान्य नागरिकों के छोटे प्रयासों और जन भागीदारी की उपयोगी पहल को सामने लाकर समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा देता है। जागरूक नागरिक अपने स्तर पर निरंतर प्रयासों से समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं। ‘मन की बात’ यह संदेश देती है कि समाज में बदलाव केवल बड़े प्रयासों से नहीं, बल्कि छोटे और निरंतर कार्यों से भी संभव है। उन्होंने उदाहरण दिया कि किसी गांव में एक विद्यार्थी भी स्वास्थ्य जागरूकता का छोटा अभियान शुरू कर अनेक परिवारों तक उसका प्रभाव पहुंचा सकता है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि आधुनिक समय में जीवनशैली से जुड़ी अनेक चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और अनुशासित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मन और सक्रिय बुद्धि का निर्माण होता है। उन्होंने संतुलित आहार, मिलेट के सेवन, पर्याप्त पानी पीने, नियमित व्यायाम और कम तेल के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया। कोविड के दौरान गिलोय की महत्ता को बताते हुए अधिकांश पेड़-पौधों में औषधीय गुण होने की बात कही। जन औषधि केंद्रों से दवाएँ लेने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया। बताया कि देश में 25 हजार केंद्र बनाने का लक्ष्य है, जिनमें 19 हजार केंद्र स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गांवों और जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों तथा पारंपरिक उपचार से जुड़ा व्यापक ज्ञान उपलब्ध है। इस ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टि से समझना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से स्थानीय ज्ञान, वन औषधियों और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के अध्ययन तथा शोध के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की आधारशिला हैं। शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि आयुष विभाग द्वारा जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित शिक्षा, शोध, उपचार और योग की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति, संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो स्वास्थ्य और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। आभार प्रदर्शन आयुक्त आयुष मती आर. उमा महेश्वरी ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल का शॉल, फल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। अतिथियों द्वारा भगवान धनवंतरी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण

रायपुर  कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय पहल अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पोषण की चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़ने वाली इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ में सितंबर माह को पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य मुनगा के पौधे को घर-घर पहुंचाने के साथ उसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति परिवारों को जागरूक करना है। मुनगा या सहजन छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध है। पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व के साथ ही औषधीय गुणों से युक्त है। मुनगा को अपने भोजन में पौष्टिक आहार के रूप में शामिल करने की पहल बेहतरीन है। मुनगे के पेड़ को पेड़ तेजी से बढ़ता है और अपेक्षाकृत कम देखभाल की जरूरत होती है। मुनगा पोषण, औषधीय गुणों एवं हरियाली के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पौधा माना गया है। स्थानीय भोजन और पोषण से जोड़ते हुए राज्य सरकार ने इसे कुपोषण के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनाया है। खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण के लिए ध्यान केंद्रित कर ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान चलाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों को इस अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, जहां पोषण जागरूकता के साथ परिवारों को मुनगा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर में विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों एवं जनमानस के घरों के लिए व्यापक तौर पर मुनगे के पौधे का वितरण किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधें का वितरण का किया गया है। जिलों में क्रमशः बस्तर जिले में 25,244, कांकेर जिले में 43,071, दंतेवाड़ा में 7,056, नारायणपुर में 21,224, बीजापुर में 15699, सुकमा में 4,835, कोंडागांव में 31983, सरगुजा में 43754, कोरिया में 19022, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 11939, सूरजपुर में 64599, बलरामपुर में 27107, जशपुर जिले में 1,62271 पौधे लगाएं गए है। इसी प्रकार रायपुर जिले में 23948, महासमुंद में 6420, धमतरी में 48833, बलौदाबाजार में 28398, गरियाबंद में 10527, दुर्ग में 42474 राजनांदगांव जिले में 3480, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 21991, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 39222, कबीरधाम में 75776, बेमेतरा में 19575, बालोद में 50933, बिलासपुर में 14965, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 43007, जांजगीर-चांपा में 57653, सक्ती में 6425, कोरबा में 1,01,002, रायगढ़  में 41,776, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 9,824, मुंगेली जिले में 6,518 पौधे लगाएं गए है। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध पौधे को पोषण अभियान का माध्यम बनाया गया है। यानी घर के आंगन में लगा एक पौधा परिवार के भोजन में पोषण बढ़ाने के साथ कुपोषण के खिलाफ जागरूकता का भी जरिया बने। ‘हर घर मुनगा’ को केवल पौधरोपण अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए पौधरोपण, पोषण जागरूकता, आंगनबाड़ी सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उज्जैन में शुरू हुई पीएम ई-बस और दर्शन सेवा, महाकाल लोक से CM डॉ. यादव ने किया शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को प्रदेश में सुगम, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को गति देते हुए श्री महाकाल लोक के अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर में पीएम ई-बस सेवा तथा उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शक्ति पथ, महाकाल लोक से बसों को झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने राजाराम रिसोर्ट तक यात्रा भी की। इस अवसर पर वेदपाठी बटुकों के द्वारा वेद मंत्रों का वाचन किया गया और डमरू वादन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मैं भगवान श्री महाकालेश्वर को प्रणाम करता हूं। आज उनकी नगरी में एक अद्भुत अलग प्रकार का दिन है। एक के बाद एक शहर को रोज एक नई सौगात मिल रही है । रोज नए प्रकार के विकास के कीर्तिमान बन रहे हैं। 21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें चला करती थीं, फिर किसी कारण से सार्वजनिक परिवहन बसों को बंद करना पड़ा। हमने वह अभाव आज पूरा किया है। राज्य परिवहन निगम की बसें एक राज्य से दूसरे राज्य जाएंगी। शहर के अंदर  नगरीय स्तर पर भी बसें चलाई जाएंगी । उज्जैन में धार्मिक पर्यटन केंद्र के लिए 10 बसों की सौगात मिल रही है।  हम सब इसमें यात्रा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा प्रदेशवासियों का सफर सुगम बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं ई-बस सेवा का शुभारंभ किया गया है। उज्जैन में यह सेवा श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नगरवासियों को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। कार्यक्रम में सांसद श्री अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, डॉ लता वानखेड़े, महापौर श्री मुकेश टटवाल, मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री ओम जैन, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, श्री संजय अग्रवाल, श्री विवेक जोशी, श्री राजेंद्र भारती, श्री जगदीश पांचाल, श्री प्रभुलाल जाटवा, एडीजी श्री राकेश गुप्ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह,कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट, नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा, सीईओ स्मार्ट सिटी श्री संदीप सोनी, अधीक्षण यंत्री श्री के ही मालवीय एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उज्जैन दर्शन मार्ग उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से प्रारंभ होकर महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर, सिद्धवट मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड एवं उज्जैन रेलवे स्टेशन होते हुए पुनः मेघदूत वन पार्किंग पर समाप्त होगा। इसका शुल्क 200 रुपये मात्र होगा। यात्री यूपीआई के माध्यम से पेमेंट कर सकेंगे। यह बसें पूर्ण रूप से जीरो एमिशन रहेंगी , इनसे पॉल्यूशन बिल्कुल नहीं होगा और यह इलेक्ट्रिकल चार्ज होंगी। यह मार्ग उज्जैन के प्रमुख मंदिरों एवं पौराणिक स्थलों को एक श्रृंखला में जोड़ेगा। उज्जैन दर्शन रूट की कुल लंबाई 27.01 किलोमीटर है। बस संचालन की व्यवस्था यात्री निर्धारित स्टॉप पर बस से उतरकर संबंधित मंदिर या दर्शनीय स्थल का दर्शन कर सकेंगे तथा दर्शन पूर्ण होने के बाद उसी स्टॉप से अगली उपलब्ध उज्जैन दर्शन बस में यात्रा जारी रख सकेंगे। निर्धारित वैधता अवधि के दौरान एक ही टिकट पर यात्री मार्ग के विभिन्न स्टॉप से बस में चढ़ और उतर सकेंगे। सभी प्रमुख मंदिरों एवं दर्शनीय स्थलों के निकट निर्धारित बस स्टॉप बनाए जाएंगे। यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा न करनी पड़े, इसके लिए बसों का संचालन नियमित अंतराल पर किया जाएगा। प्रत्येक प्रमुख स्थल पर दर्शन एवं भ्रमण के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा। यह सेवा मेघदूत वन पार्किंग से प्रारंभ होकर प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ते हुए उज्जैन रेलवे स्टेशन तक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को एक ही सेवा से प्रमुख दर्शन स्थलों तक पहुंचने में सुविधा होगी। आधुनिक सुविधाएं बसों में लाइव सीसीटीवी, जीपीएस आधारित लाइव ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग तथा यूपीआई/डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए बसों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। बस में डिजिटल असिस्टेंट सह उज्जैन दर्शन गाइड भी उपलब्ध रहेंगे, जो प्रमुख मंदिरों, दर्शनीय स्थलों, मार्ग एवं दर्शन संबंधी आवश्यक जानकारी देंगे। प्रमुख दर्शन स्थल एवं मान्यता महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक एवं उज्जैन का अधिष्ठाता देव स्थल है। यहाँ की भस्म आरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है। महाकाल लोक शिव पुराण की कथाओं एवं शिव-स्वरूपों को मूर्तियों, स्तंभों और भित्तिचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करता है। हरसिद्धि माता उज्जैन की प्राचीन शक्तिस्थली हैं। क्षिप्रा नदी के पवित्र घाटों पर स्नान एवं पूजा-अर्चना की मान्यता है। ऋणमुक्तेश्वर महादेव में पूजा से विभिन्न ऋणों से मुक्ति की मान्यता जुड़ी है। भर्तृहरि गुफाएँ राजा भर्तृहरि की तपस्या एवं नाथ संप्रदाय की साधना परंपरा से जुड़ी हैं। गढ़ कालिका मंदिर की मान्यता महाकवि कालिदास से जुड़ी हुई है। काल भैरव उज्जैन के रक्षक देवता माने जाते हैं। सिद्धवट पितृ कर्मों के लिए विशेष तीर्थ है। अंगारेश्वर एवं मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह संबंधी मान्यताओं से जुड़े हैं। सांदीपनि आश्रम वह स्थल है जहाँ मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण, बलराम एवं सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी। भूखी माता, चिंतामण गणेश, अष्ट विनायक, शनि नवग्रह एवं इस्कॉन मंदिर भी इस मार्ग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। नगर की अन्य बस मार्ग व्यवस्था उज्जैन शहर में सुगम परिवहन के अंतर्गत कुल 12 मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जिनमें तपोभूमि से पानबिहार, उज्जैन रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, कानीपुरा से अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट से तपोभूमि, देवास गेट से ताजपुर, देवास गेट से नए आरटीओ कार्यालय, महाकाल चौराहा से अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट से नानाखेड़ा, अवंतिका विश्वविद्यालय से नानाखेड़ा, देवास गेट से मुरलीपुरा, तपोभूमि से नजरपुर तथा उज्जैन दर्शन मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों से नगर के प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक क्षेत्रों को बस सेवा से जोड़ा गया है। यह सेवा श्रद्धालुओं को महंगे निजी परिवहन पर निर्भरता घटाते हुए सुविधाजनक, किफायती और सुरक्षित दर्शन यात्रा उपलब्ध कराएगी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के दृष्टिगत उज्जैन में सुगम आवागमन की यह व्यवस्था नगरवासियों एवं देश-विदेश से आने वाले भक्तों दोनों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल से की भेंट

रायपुर  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल से आज नया रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत और अनूठी आस्था के प्रतीक रामनामी समुदाय के सदस्यों ने आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर मंत्री  अग्रवाल ने रामनामी समुदाय की आस्था, परंपरा, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर समुदाय के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामनामी समुदाय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समुदाय की आस्था, परंपराएं और जीवनशैली हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखने का कार्य करती हैं। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की उपलब्धि नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और रामनामी समाज की जीवंत विरासत का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इस फिल्म के माध्यम से रामनामी समाज की विशिष्ट पहचान, उनकी आस्था और सांस्कृतिक जीवन को देशभर में पहचान मिली है। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता, जीवंतता और जनजीवन से गहरा जुड़ाव है। यहां की लोक परंपराएं, जनजातीय एवं लोक कलाएं, आस्था से जुड़ी परंपराएं और समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। रामनामी समाज की परंपराएं इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा उन्हें व्यापक मंच उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्री  अग्रवाल ने रामनामी समुदाय के सदस्यों से बातचीत के दौरान उनकी परंपराओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाज की विशिष्ट पहचान से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में समाज और समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर रामनामी समुदाय के सदस्यों ने डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को मिले राष्ट्रीय सम्मान के लिए प्रसन्नता व्यक्त की और मंत्री  राजेश अग्रवाल के प्रति आभार जताया। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।

निर्यात में यूपी का नया रिकॉर्ड, राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ी रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) के सकारात्मक परिणाम प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में तेजी से दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश से बोतलबंद मदिरा का निर्यात 55.2 लाख अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष जुलाई के 29.1 लाख डॉलर की तुलना में 89.7 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि इसी अवधि में देश का समग्र निर्यात 25.7 प्रतिशत बढ़ा। यानी उत्तर प्रदेश की निर्यात वृद्धि राष्ट्रीय वृद्धि की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना रही। जुलाई में राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की मासिक हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया।  व्हिस्की-वोदका के निर्यात ने पकड़ी तेज रफ्तार प्रदेश के निर्यात प्रदर्शन में व्हिस्की और वोदका की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जुलाई में व्हिस्की के निर्यात में 78.8 प्रतिशत, जबकि वोदका के निर्यात में 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। मात्रा के लिहाज से प्रदेश का निर्यात 230 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 90 प्रतिशत रही। इससे प्रदेश की निर्यात क्षमता और बाजार विस्तार की बढ़ती गति का संकेत मिलता है। 4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई। नई इकाइयों से निवेश और किसानों को भी लाभ नीति के सकारात्मक प्रभाव से प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद संयंत्रों के पुनर्जीवन का सिलसिला भी तेज हुआ है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है, जबकि एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक भी पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। नीति में यह भी प्राविधान है कि जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी। कांच, पैकेजिंग से परिवहन तक बढ़े अवसर आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि देशभर में बोतलबंद मदिरा के निर्यात में जुलाई में 11.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने इसी अवधि में 55.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। बोतलबंद निर्यात में प्रदेश की राष्ट्रीय हिस्सेदारी भी 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई। निर्यात में वृद्धि का असर केवल आसवनी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गन्ना, शीरा और अनाज से जुड़ी पश्च संबद्धता के साथ कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात भी पूरा हुआ, जिससे पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। यह राशि अलग शुल्क वर्गीकरण के कारण उपरोक्त आंकड़ों के अतिरिक्त है। यूपी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान उत्तर प्रदेश की निर्यात नीति का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स विभिन्न राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा समेत विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना की गई और इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया। राष्ट्रीय आदर्श नीति में उत्तर प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

भजनलाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना, गहलोत बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त को देना चाहिए इस्तीफा

जयपुर जयपुर समेत पूरे प्रदेश में रविवार के दिन भी राजनीतिक पारा अपने चरम पर रहा। आम तौर पर छुट्टी का दिन माने जाने वाले रविवार को राज्य के सियासी गलियारों में वार-पलटवार का दौर पूरे जोर-शोर से चला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और मनगढ़ंत तथ्य फैलाने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं, मुख्यमंत्री के इन बयानों के सामने आने के कुछ ही देर बाद, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभालते हुए जोरदार पलटवार किया, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। CM भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर हमला भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दल सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा, "जो लोग जनता द्वारा बार-बार नकारे जा चुके हैं, वे अपनी चुनावी हार को छिपाने के लिए अक्सर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला बोलते हैं। कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर (SIR) को लेकर पूरी तरह एक झूठा नैरेटिव गढ़ा है।" उन्होंने याद दिलाया कि 26 सितंबर को आयोग द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि सभी चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिए हैं। सीएम भजनलाल ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि हार के बाद दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय उन्हें अपनी राजनीतिक गतिविधियों और जनता के बीच काम करने पर ध्यान देना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए : गहलोत मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही देर बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक लंबा-चौड़ा बयान जारी कर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गहलोत ने अपने पोस्ट में लिखा कि पहले कभी ऐसी स्थिति आने पर सभी राजनीतिक दल मिलकर समाधान की बात करते थे, लेकिन अब ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव आयोग के भीतर से ही सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि वे पिछले दो सालों से देश को आगाह कर रहे थे और आज उनकी बातें सच साबित हो रही हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं और भाजपा नेताओं द्वारा उनका बचाव यह साबित करता है कि दोनों के बीच मिलीभगत है। उन्होंने सीधे तौर पर मांग की कि मौजूदा हालात को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को खुद अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर छिड़ी जंग इस ताज़ा सियासी टकराव ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान की मुख्य राजनीतिक पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के बीच वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष किसी भी दिन थमने वाला नहीं है। एक तरफ सत्ताधारी पार्टी जहाँ संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बचाने और विपक्ष के दुष्प्रचार को बेनकाब करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी गर्माहट और अधिक बढ़ने के पूरे आसार हैं।