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हरियाणा के हिसार में पशुओं के लिए खुला देश का पहला ब्लड बैंक, शुरू हुआ जीव संजीवनी अभियान

हिसार. सामाजिक सरोकारों को जनभागीदारी से जोड़ने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण ने मंगलवार को पशु कल्याण के क्षेत्र में देश की पहली अनूठी पहल का सूत्रपात किया। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के सहयोग से ‘जीव संजीवनी’ महाअभियान शुरू किया गया, जिसके तहत हिसार में देश का पहला संगठित पशु रक्तदान शिविर लगा। इसका उद्देश्य भविष्य में पशुओं का स्वैच्छिक रक्तदाता नेटवर्क विकसित करना है। शिविर के पहले दिन चार श्वानों और एक भैंस ने रक्तदान कर इस नई पहल का हिस्सा बनने का संदेश दिया। उपचार के समय रक्तदाता की तलाश होती है बड़ी चुनौती विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं, बड़े ऑपरेशनों, प्रसव संबंधी जटिलताओं, एनीमिया, चीचड़ जनित रोगों और अत्यधिक रक्तस्राव की स्थितियों में पशुओं को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन देश में अब तक पशुओं के लिए संगठित रक्तदाता व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी थी। ऐसे में कई बार उपचार के दौरान उपयुक्त रक्तदाता की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। महाअभियान के शुभारंभ अवसर पर लुवास के कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि पशुओं के लिए रक्तदाता का उपलब्ध न होना काफी समय से बड़ी चुनौती रहा है। लुवास में सुरक्षित रखा जाएगा रक्त एकत्रित रक्त को लुवास में सुरक्षित रूप से किया जाएगा संरक्षित लुवास में उपलब्ध ब्लड बैंक सुविधा के माध्यम से एकत्रित रक्त को सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर गंभीर रूप से बीमार पशुओं के उपचार में उसका उपयोग किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया गया तो भविष्य में देशभर में पशु रक्तदान की संगठित व्यवस्था विकसित हो सकती है। लुवास में पहले से उपलब्ध है पशु ब्लड बैंक लुवास में पशुओं के लिए ब्लड बैंक की सुविधा संचालित है, जहां सुरक्षित परिस्थितियों में रक्त को लगभग 40 दिन तक संरक्षित रखा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर यह रक्त दुर्घटना, सर्जरी, प्रसव जटिलताओं और बीमारियों से जूझ रहे पशुओं के उपचार में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार संगठित रक्तदाता नेटवर्क विकसित होने से हजारों पशुओं को समय पर उपचार मिल सकेगा।

मतदाता सूची अपडेट अभियान कल से शुरू, पंजाब में 24,453 BLO करेंगे डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन

चंडीगढ़. पंजाब राज्य में मतदाता सूची को अपडेट और अधिक सटीक बनाने के लिए 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत राज्यभर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह अभियान 24 जुलाई तक चलेगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बुधवार को पंजाब भवन में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संचालित की जाएगी, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए। 2 करोड़ मतदाताओं का डेटा अपडेट होगा मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, राज्य के 24,453 बीएलओ अगले एक महीने तक घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे, उनका सत्यापन करेंगे और फिर उन्हें वापस एकत्र करेंगे। इस दौरान पंजाब के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा। इसके साथ ही मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। अनिंदिता मित्रा ने बताया कि अभियान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए दावे और आपत्तियां 2 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे। 28 सितंबर तक होगा आपत्तियों का निपटारा प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा, जबकि 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। जिन मतदाताओं की मैपिंग अब तक नहीं हो सकी है, उनकी सूची सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा कर दी गई है। चुनाव आयोग ने सभी दलों से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग देने की अपील की। चुनाव आयोग का मानना है कि इस विशेष अभियान से मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन होगी, जिससे आगामी चुनावों में पात्र मतदाता बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी पर सख्ती, तहसील की सहायक ग्रेड-02 को कलेक्टर ने किया सस्पेंड

कोरबा. जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दंडाधिकारी कटघोरा के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें तहसील कार्यालय कटघोरा में नकल जारी करने के एवज में आवेदक किशन कुमार से अवैध राशि की मांग किये जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के समर्थन में एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की गई थी। मामले की जांच और परीक्षण के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा निर्धारित किया गया है।

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला, झूला पुल की लोडिंग तार की कड़ी टूटी

 ओंकारेश्वर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर को ममलेश्वर से जोड़ने वाले प्रमुख झूला पुल की लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने से मंगलवार देर रात पुल से आवाजाही को बंद कर दिया गया है। बुधवार सुबह प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर ताला लगा दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर को जोड़ने वाले इस पुल की कड़ी टूटने से पुल की अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुल का एक हिस्सा हल्का झुका हुआ भी नजर आ रहा है। इससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है। इसी के मद्देनजर पुल को आवाजाही के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है। नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है और तकनीकी जांच के बाद ही पुल को दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता है। रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में भी महाशिवरात्रि से पहले पुल में तकनीकी खराबी सामने आई थी। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में दूसरी बार खराबी आने से इसके रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पांच दिन पहले इसी पुल से गुजरी थीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विदित हो कि पांच दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इसी झूला पुल से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करने के लिए गुजरी थीं। गनीमत रही कि उस दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई। उनके दौरे के बाद यह घटना सामने आई है। रखरखाव में लापरवाही या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की एक कड़ी टूटने के बाद अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पुल का एक हिस्सा हल्का झुक भी गया है। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में वर्ष 2023 के बाद दूसरी बार तकनीकी खराबी सामने आई है। इसके बावजूद समय पर व्यापक मरम्मत और सुरक्षा ऑडिट नहीं होना चिंता का विषय है। तीन वर्ष पूर्व महाशिवरात्रि पर पुल की केबल टूटने से करीब दो माह तक आवाजाही बंद रही थी। तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पुल पर भार कम करने के लिए इसके उपर लगा टीन का शेड हटवा दिया था। हैंडओवर पर एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच खींचतान सूत्रों के अनुसार लंबे समय से झूला पुल को नगर परिषद को हैंडओवर करने का मामला लंबित है। एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से रखरखाव प्रभावित होने की बात भी सामने आती रही है। सवाल यह है कि आखिर पुल की नियमित निगरानी और मरम्मत की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है। जब तक यह स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। फिलहाल एनएचडीसी ही इसका रखरखाव कर रही है। बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा इंतजाम कमजोर ओंकारेश्वर में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के चलते आने वाले समय में यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है। ऐसे में झूला पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की नियमित तकनीकी जांच,लोड क्षमता का परीक्षण और वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सिंहस्थ पर फोकस, लेकिन स्थानीय व्यवस्थाएं उपेक्षित प्रशासन का पूरा ध्यान सिंहस्थ की तैयारियों पर केंद्रित है, लेकिन स्थानीय बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी अब सामने आने लगी है। नर्मदा पर बना यह झूला पुल तीर्थयात्रियों की जीवनरेखा हैए इसलिए इसके रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत स्थानीय लोगों का मानना है कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन और ओंकारेश्वर जैसी संवेदनशील धार्मिक नगरी के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल प्रोबेशनरी आइएएस अधिकारी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यहां अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती समय की आवश्यकता है। पिछले करीब चार साल से पुनासा एसडीएम के पद पर प्रशिक्षु आइएएस की लर्निंग स्कूल बना हुआ है। यहां के एसडीएम के पास ही ओंकारेश्वर जैसी महत्वपूर्ण जगह का प्रभार भी रहता है। इधर ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट में लंबे समय से रिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ;सीईओद्ध के पद पर भी योग्य और अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति शीघ्र की जानी चाहिएए ताकि विकास कार्यों, सुरक्षा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का बेहतर समन्वय हो सके। नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि पुल की मरम्मत शुरू कर दी गई है और तकनीकी परीक्षण के बाद ही इसे दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता हैए लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय रहते स्थायी और जिम्मेदार समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में कलेक्टर ऋषव गुप्ता और पुनासा एसडीएम पकंज वर्मा से वस्तु स्थिति जाने के लिए फोन लगाने पर चर्चा नहीं हो सकी  

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना रायपुर, प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है। सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला             योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी – गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।  केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना         केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है। पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प           मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया। ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी           ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी – जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण          पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके। 1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ           योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।  उप मुख्यमंत्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी  मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

सचखंड एक्सप्रेस में तकनीकी खराबी, पानीपत स्टेशन पर फटा प्रेशर पाइप; दूसरा इंजन भेजा गया

पानीपत. अमृतसर से हजरत निजामुद्दीन जा रही सचखंड एक्सप्रेस बुधवार को पानीपत जंक्शन पर तकनीक खराबी हो गई। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही इंजन का प्रेशर पाइप फट गया, जिसके कारण ट्रेन को तत्काल रोकना पड़ा। तकनीकी खराबी के चलते ट्रेन करीब डेढ़ घंटे तक प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन के इंजन में प्रेशर पाइप फटने की सूचना मिलते ही तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि पाइप में आई खराबी के कारण इंजन का संचालन सुरक्षित रूप से संभव नहीं था। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने समालखा स्टेशन से दूसरा इंजन मंगाने का निर्णय लिया। ट्रेन के लंबे समय तक खड़े रहने से सबसे अधिक परेशानी जनरल कोच में सफर कर रहे यात्रियों को हुई। भीषण गर्मी और उमस के बीच कोचों में बैठे यात्रियों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई यात्री प्लेटफॉर्म पर उतरकर छांव और पानी की व्यवस्था तलाशते नजर आए। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के रुकने के कारण उनकी आगे की यात्रा प्रभावित हुई है और उन्हें गंतव्य तक पहुंचने में देरी होगी। रेलवे कर्मियों ने यात्रियों को स्थिति की जानकारी देते हुए धैर्य बनाए रखने की अपील की। स्टेशन पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि वैकल्पिक इंजन के पहुंचने के बाद उसे ट्रेन से जोड़ा जाएगा और सभी आवश्यक तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही ट्रेन को आगे रवाना किया जाएगा। इस दौरान पानीपत जंक्शन पर अन्य ट्रेनों के संचालन पर भी आंशिक प्रभाव देखने को मिला।

SC आयोग में रवनीत बिट्टू की पेशी, कहा- बयान पर खेद है, पहले ही मांग चुका हूं माफी

चंडीगढ़. केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू बुधवार को पंजाब एससी आयोग के समक्ष पेश हुए। जातिसूचक टिप्पणी मामले में बिट्टू ने अपने वकीलों के माध्यम से आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि घटना के दौरान उनके मुंह से निकले शब्द कानूनी तौर पर पूरी तरह गलत थे और इसके लिए वह पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। बिट्टू ने आयोग को बताया कि विवाद वाले दिन हालात बेहद तनावपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने संबंधित वीडियो अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट से भी डिलीट कर दी थी। बिट्टू के मुताबिक, उन्हें सबसे पहले संगरूर में एक एसपी रैंक के अधिकारी ने रोका था। उस अधिकारी ने बताया था कि भाजपा नेता ओंकार सिंह को बलिया थाने में हिरासत में रखा गया है। आरोप- रवनीत बिट्‌टू साथ हुई बदसलूकी उन्होंने कहा कि वह तुरंत बलिया थाने पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि ओंकार को संगरूर ले जाया गया है। बिट्टू ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई और कुछ ऐसे शब्द कहे गए, जिससे वह आहत हुए। बिट्टू के अनुसार, जब वह दोबारा संगरूर पहुंचे तो वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उनका रास्ता रोकते हुए कहा कि ओंकार धूरी में हैं। इसके बाद वह धूरी पहुंचे, जहां एक एसएचओ रैंक के अधिकारी ने उनकी गाड़ी के सामने वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां भी उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। व्यवाहर के कारण भावुक हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुलिस के व्यवहार और तनावपूर्ण माहौल के कारण वह भावुक हो गए थे। उन्होंने आयोग के समक्ष दोहराया कि यदि उनके मुंह से कोई आपत्तिजनक शब्द निकले, तो उसके लिए वह खेद व्यक्त करते हैं। बिट्टू ने कहा, “मैं उस पार्टी से आता हूं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर सम्मान दिया था।” मामला निकाय चुनाव के दिन का दरअसल, यह विवाद 26 मई 2026 को पंजाब निकाय चुनाव के मतदान के दिन शुरू हुआ था। धूरी (संगरूर) में भाजपा नेता ओंकार सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उन्हें छुड़ाने और धूरी में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान रवनीत बिट्टू और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद बिट्टू पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगे थे। आम आदमी पार्टी ने इस घटना को ‘गुंडागर्दी’ करार दिया था। मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब एससी आयोग ने बिट्टू को तलब किया था और संगरूर पुलिस से रिपोर्ट भी मांगी थी। बिट्टू को पहले 4 और 15, जून को पेश होना था, लेकिन निजी कारणों और दिल्ली में व्यस्तता के चलते वह उपस्थित नहीं हो सके थे। उस समय उनके वकील आयोग के समक्ष पेश हुए थे और आयोग अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी को उनकी व्यस्तता की जानकारी दी थी। अब बिट्टू ने आयोग के सामने व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रख दिया है।

स्कूल बसों की जांच में बड़ा खुलासा, जगदलपुर के 44 वाहन जांच से रहे नदारद

जगदलपुर. स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का विशेष जांच अभियान तेज हो गया है. परिवहन, शिक्षा विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम निजी स्कूल वाहनों की जांच कर रही है. 20 स्कूलों के 110 वाहनों की जांच का लक्ष्य तय किया गया था. लेकिन निर्धारित समय में केवल 66 वाहन ही जांच के लिए पहुंचे. 44 वाहन जांच प्रक्रिया से पूरी तरह गायब रहे. इस लापरवाही पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. आरटीओ डीसी बंजारे ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा..अनुपस्थित स्कूलों और वाहनों की सूची तैयार कर ली गई है. अब संबंधित स्कूल संचालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी है. वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. प्रशासन ने सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. आने वाले दिनों में जांच अभियान और तेज किया जाएगा.

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर पीवीटीजी गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में बढ़ी मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या रायपुर 'हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है। ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का लिया गया निर्णय              छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी। संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर आगे बढ़ रहा वन विभाग          वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है। चार वर्षों में बढ़ी हॉर्नबिल की आबादी         उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका         हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा नया आकर्षण         प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार         हॉर्नबिल सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन         रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है। वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता का केंद्र          यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ भारतीय विशाल गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। संरक्षण, विकास और पर्यटन का सफल संगम         विशेषज्ञों के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में की जा रही यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से संरक्षण आधारित आजीविका और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हॉर्नबिल सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति प्राप्त होगी। मोबाइल नंबर – 7976688165, 7566510937 वेबसाइट – : www.udantisitanaditigerreserve.in पर पर्यटक, संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब, दान राशि पहुंची 142 करोड़ रुपए

उज्जैन  महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, जिसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। यह बीते छह वर्षों में सबसे अधिक दान है और पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए ज्यादा है। मंदिर समिति के अनुसार दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए तथा गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए। लड्‌डू की बिक्री 65 करोड़ की वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी दान किए हैं। गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दान कक्ष में सिली हुई जेब वाले कपड़ों में ही मिलती है एंट्री राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में दान करते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु क्यूआर कोड के माध्यम से भी ऑनलाइन दान कर रहे हैं। हर सप्ताह दान पेटियां खोली जाती हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। दान की गणना की फोटोग्राफी कराई जाती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है। दान की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्हें बिना जेब वाले कपड़े या सिली हुई जेब वाले परिधान पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे। दान बढ़ा तो खर्च भी दोगुना हुआ श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले महाकाल मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो विस्तार के बाद बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर समिति के कुल 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, गोशाला तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती है। मासिक खर्च भी बढ़कर 5 करोड़ से ज्यादा इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि, श्रावण मास, नागपंचमी सहित अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त व्यय किया जाता है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह हो गया है।