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राजिम कुंभ कल्प 2026: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने संतों से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद लिया

रायपुर. राजिम कुंभ कल्प 2026: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने त्रिवेणी संगम पर संतों से की भेंट, बिहान दीदियों द्वारा बनाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का चखा स्वाद प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने राजिम कुंभ कल्प 2026 के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम के तट पर पहुंचकर विभिन्न अखाड़ों, पीठों से पधारे पूज्य धर्माचार्यों, संतों एवं लाखों श्रद्धालुओं से आत्मीय भेंट की। उन्होंने कुंभ की सभी व्यवस्थाओं का सघन निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मंत्री अग्रवाल ने कुंभ स्थल पर विभिन्न अखाड़ों के पूज्य संतों से भेंट कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। संतों ने कुंभ की भव्यता की सराहना करते हुए राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने श्रद्धालुओं से भी बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं तथा तत्काल समाधान के निर्देश दिए।  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के स्टॉल पर पहुंचे मंत्री अग्रवाल ने स्वयं समूह की दीदियों से बातचीत की। उन्होंने दीदियों द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसे चीला, फरा और ठेठरी का स्वाद लिया तथा उनकी कुशलता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। अग्रवाल ने कहा कि बिहान दीदियों की मेहनत से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि राजिम कुंभ जैसे वैश्विक आयोजन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर भी विश्व पटल पर चमक रही है।  मंत्री ने बांस और लकड़ी से बनी आदिवासी कलाकृतियों के स्टॉल पर जाकर स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की। उन्होंने मूर्तियों, शोपीस और उपयोगी वस्तुओं की बारीकी से सराहना की तथा उनके उत्साहवर्धन के लिए खरीदारी भी की। अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार राजिम कुंभ के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करेगी। मंत्री अग्रवाल ने राजिम कुंभ स्थल पर बनाई गई रामवनगमन पथ की जीवंत प्रतिकृति का भी निरीक्षण किया। छत्तीसगढ़ के पौराणिक राम वनगमन मार्ग को चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाती यह प्रतिकृति श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अग्रवाल ने प्रतिकृति की बारीकी और कलात्मकता की प्रशंसा की। राजिम कुंभ कल्प 2026 की अन्य व्यवस्थाओं जैसे पानी की आपूर्ति, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधा, यातायात और सुरक्षा का जायजा लेते हुए मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने सुनिश्चित किया कि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस अवसर पर विधायक रोहित साहू, गरियाबंद कलेक्टर बी एस उइके, एसडीएम विशाल महाराणा, गरियाबंद जिला प्रशासन व पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।  राजिम कुंभ कल्प 2026 छत्तीसगढ़ की सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक बन चुका है, जहां लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर स्नान कर रहे हैं। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक-आर्थिक उत्सव के रूप में चमक रहा है।

सूरजकुंड मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने 90 हजार दर्शकों का मोहा मन

फरीदाबाद. अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में मंगलवार को खिली धूप के साथ शिल्पकारों के चेहरे भी खिल गए। सुबह से ही माैसम साफ होने की वजह से प्रत्येक गेट से दर्शक प्रवेश करते हुए नजर आए। कार्य दिवस होने के बावजूद स्टाल से लेकर फूड कोर्ट तक दर्शक खाते पीते हुए खरीदारी करते हुए दिखाई दिए। युवाओं ने विदेशी कलाकारों के साथ सेल्फी ली तो बुजुर्ग हरियाणा के अपना घर को देखते हुए नजर आए। पूर्वोतर के राज्यों के स्टाल पर भी दर्शकों ने खरीदारी की। शाम के समय मेला परिसर में निकलने वाले कार्निवल में दर्शक कलाकारों के साथ जमकर झूमे। मेला प्रबंधन की माने तो मंगलवार को मेले में 35 हजार दर्शक पहुंचे। अभी तक तीन दिनों में कुल 90 हजार दर्शक मेला देखने आ चुके हैं। मुख्य चौपाल पर गूंजा वंदे मातरम मंगलवार काे मुख्य चौपाल पर अफ्रीकाी देश काबो वर्दे के कलाकारों ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को अपनी शैली में गाकर माहौल देश भक्तिमय कर दिया। उनकी प्रस्तुति को मुख्य चौपाल पर मौजूद प्रत्येक दर्शक ने तालियां बजा कर दाद दी। इससे पूर्व कजाकिस्तान की महिला कलाकारों के नृत्य एवं गायन ने पर्यटकों को खूब मनोरंजन किया। चौपाल की दर्शकदीर्घा में बैठे भले ही कजाकी गीतों के बोल समझ न आ रहे हो, लेकिन उनका जोशीला म्यूजिक और गीत पर्यटकों को उत्साह से भर रहा था। पर्यटक अपने ही स्थान पर झूम रहे थे। वहीं मंगलवार को बृज के हाली के रसिया ने भी पर्यटकों का खूब मनोरंजन किया। अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में मिस्त्र की झलक अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में पार्टनर देश मिस्र की कला को प्रदर्शित करने के लिए विशेष स्टाल लगाए गए हैं। जिनके माध्यम से मेले में आए पर्यटकों को थीम कंट्री की संस्कृति की झलक दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्टाल नंबर तीन पर शिल्पकार सनर हासनीन द्वारा प्रदर्शित उत्पाद पर्यटकों को काफी पसंद आ रहे हैं। उनके स्टाल पर हैंडमेड फैब्रिक से बने कपड़े, खजूर के पेड़ के रेशों से बनी पारंपरिक टोकरियां, ऊन से तैयार पारंपरिक मिस्र के कालीन और वार सज्जा की वस्तुएं उपलब्ध है,जो मेले में आए पर्यटकों को खूब लुभा रहे है। पर्यटक इन उत्पादों की जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं। बहुरूपियों के साथ दर्शक खिंचवा रहे फोटो मेला परिसर में रावण, यमराज, पीके, गब्बर सिंह और जोकर के वेश में बहुरूपिये घूमते देखे जा सकते हैं। मेले में पहुंचने वाले पर्यटकों में उनके साथ सेल्फी का विशेष उत्साह दिखाई देता है। इन बहुरूपियों के आसपास में पर्यटकों की भीड़ नजर आती है। पर्यटक इन बहुरूपियों के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं।

बाघ गणना की तैयारी तेज, कोटा परियोजना मंडल में हुआ विशेष प्रशिक्षण

रायपुर. अखिल भारतीय बाघ गणना पर कोटा परियोजना मण्डल में विशेष प्रशिक्षण आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक की प्रेरणा एवं क्षेत्रीय महाप्रबंधक बिलासपुर के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय बाघ गणना से संबंधित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम कोटा परियोजना मण्डल द्वारा आयोजित की गयी। यह प्रशिक्षण विगत दिवस शिवतराई विश्राम गृह में निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आयोजित की गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बाघों की संख्या का वैज्ञानिक आंकलन, उनके आवास एवं गतिविधियों की पहचान तथा क्षेत्र में पाए जाने वाले अन्य मांसाहारी एवं शाकाहारी वन्यप्राणियों की गणना की आधुनिक विधियों से कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना था। प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाघों की पहचान, पगमार्क, मल एवं खरोंच के निशानों के माध्यम से उपस्थिति की पुष्टि, कैमरा ट्रैप तकनीक का व्यावहारिक उपयोग, फील्ड डाटा संग्रहण एवं निगरानी की आधुनिक प्रणालियों की जानकारी दी गई। साथ ही हिरण, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर जैसे शाकाहारी वन्यप्राणियों तथा तेंदुआ जैसे अन्य मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना की वैज्ञानिक पद्धतियों पर भी प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से बाघों की वास्तविक संख्या, उनके शिकार प्रजातियों की उपलब्धता तथा वन्यजीव संरक्षण की स्थिति का आंकलन कैसे किया जाता है। इससे वन अधिकारियों को संरक्षण योजनाओं के निर्माण एवं प्रभावी रणनीति तय करने में सहायता मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से बाघ संरक्षण को सशक्त बनाने, अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा वन्यजीव प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण में मण्डल प्रबंधक, कोटा उपमण्डल प्रबंधक, परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी, सहायक परियोजना क्षेत्रपाल, क्षेत्ररक्षक एवं चौकीदारों ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बाघ संरक्षण एवं वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पहल सिद्ध होगा।

क्वांटम भौतिकी के जनक आचार्य बोस को विज्ञान केंद्र में दी गई श्रद्धांजलि

रायपुर. आचार्य बोस के शोध कार्य से प्रेरित होकर अल्बर्ट आइंस्टीन ने उनके सिद्धांतों को बढ़ाया आगे: प्रोफेसर शिव कुमार पाण्डेय भारत के महान वैज्ञानिक आचार्य सत्येन्द्रनाथ बोस जी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर पूर्व कुलपति डॉ. एस.के. पाण्डेय थे। प्रोफेसर डॉ. एस.के. पाण्डेय ने विस्तृत व्याख्यान में बताया कि आचार्य सत्येन्द्रनाथ बोस के सम्पूर्ण जीवन-वृत्त पर प्रकाश डालते हुए उनके बाल्यकाल, शिक्षा, शैक्षणिक जीवन एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों का क्रमबद्ध एवं प्रेरणादायी विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में आचार्य बोस के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए बोसदृआइंस्टीन सांख्यिकी की अवधारणा को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। व्याख्यान के दौरान उन्होंने बोसॉन की संकल्पना, उनकी विशेषताओं तथा आधुनिक भौतिकी में उनकी भूमिका को उदाहरणों के माध्यम से विस्तारपूर्वक स्पष्ट किया। उन्होंने यह भी बताया कि आचार्य बोस के शोध कार्य से प्रेरित होकर अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया गया, जिसके परिणामस्वरूप बोस-आइंस्टीन संघनन जैसी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अवधारणा का विकास हुआ, जिसका उपयोग आज आधुनिक भौतिकी, क्वांटम अनुसंधान एवं उन्नत प्रौद्योगिकियों में किया जा रहा है।  कार्यक्रम का शुभारंभ साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में आचार्य सत्येन्द्रनाथ बोस के वैज्ञानिक योगदान, उनकी मौलिक सोच तथा युवा पीढ़ी के लिए उनके प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में शासकीय विद्यालय दलदल सिवनी एवं बी.पी. पुजारी स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। इसके साथ ही बी.एड., डी.एड. विज्ञान विषय के शिक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रायपुर के अतिरिक्त संचालक से जे.पी. रथ, सहित छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भी उपस्थिति रही।

फरवरी में तापमान बढ़ने से पंजाब के किसानों की गेहूं फसल पर संकट

चंडीगढ़. मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया है कि फरवरी महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक और वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, विशेषकर उत्तर-पश्चिम भारत में, जिसमें पंजाब भी शामिल है। इस सूचना के बाद कृषि विशेषज्ञों और किसानों में फसलों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसम रबी फसलों, विशेषकर गेहूं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। फरवरी में गेहूं की बल्ली में दाना बनना शुरू होता है और इस समय यह दूध जैसे तरल पदार्थ के रूप में होता है। यदि तापमान औसत से अधिक रहा, तो यह दाना सूख सकता है, जिससे दाने का आकार छोटा होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि ऐसा हुआ, तो यह चौथी बार होगा जब पंजाब के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पंजाब में औसतन धान की पैदावार 185 लाख टन होती है, लेकिन पिछले वर्ष बाढ़ और चाइनीज वायरस के कारण यह घटकर 156 लाख टन रह गई। पंजाब में हेक्टेयर पर धान की औसत पैदावार 6,624 किलो है, जबकि पिछले वर्ष यह 5,722 किलो प्रति हेक्टेयर रही।

बिहार में मद्य निषेध और रजिस्ट्रेशन विभाग का बजट बढ़ा

पटना. बिहार विधानसभा में आज वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया. सरकार का कहना है कि वह सभी वर्गों का सम्मान करते हुए लोगों का जीवन आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है. इस बार बिहार का बजट 3 लाख 47 करोड़ रुपये से ज्यादा का है, जो पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी बड़ा है. सरकार के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और बिहार भी दूसरे राज्यों के मुकाबले तेजी से आगे बढ़ रहा है.  2026-27 के लिए बिहार का कुल बजट 3,47,589.76 करोड़ रुपये है, जो पिछले साल से करीब 30,694 करोड़ ज्यादा है. बजट का मकसद बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत और हर क्षेत्र में विकसित राज्य बनाना है. केंद्र सरकार से मिले सहयोग से राज्य की कई विकास योजनाओं को गति मिली है. सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है. योजना का फोकस प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करना, 1 करोड़ रोजगार देना और महिलाओं को सशक्त बनाना है.  1.56 करोड़ से ज्यादा महिलाओं वाले स्व-सहायता समूहों को पहले 10,000 रुपये मिल चुके हैं, आगे कारोबार बढ़ाने के लिए 2 लाख तक मदद मिलेगी.  अनुसूचित जाति के 94 लाख गरीब परिवारों को सूक्ष्म उद्यमी बनाने की योजना है. कृषि, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में आय बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है. हर प्रखंड में डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर जोर है. जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि बेहतर इलाज जिले में ही मिल सके. 5 नए एक्सप्रेस-वे और बिजली ढांचे के विस्तार से बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी. शहरी गरीबों के लिए बड़ी संख्या में बहुमंजिला पक्के घर बनाए जाएंगे. बुजुर्गों को घर पर स्वास्थ्य सेवाएं और जन्म-मृत्यु जैसी सुविधाएं देने की योजना है. 2004-05 में 23,885 करोड़ से बढ़कर बजट अब 3.47 लाख करोड़ पहुंच गया है, जो राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता दिखाता है. कुल खर्च में 35.14% राजस्व और 64.86% पूंजीगत व्यय है, यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा जोर. पुराने कर्ज चुकाने के लिए 22,664.83 करोड़ रुपये रखे गए हैं. कुल कर राजस्व 2,85,277.12 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. राज्य अपने करों से करीब 65,800 करोड़ रुपये कमाएगा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा GST का होगा. बजट में राजकोषीय घाटा 39,111.80 करोड़ रुपये (लगभग 2.99%) है, जो तय सीमा के अंदर है.

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर. उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज मंत्रालय में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।  

UN में भारत की आवाज: केंद्रीय राज्यमंत्री ने साझा किया ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य

धार   संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत की ओर से महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश के धार जिले से सांसद सावित्री ठाकुर ने सामाजिक न्याय, समावेशन एवं सतत विकास से जुड़े वैश्विक विषयों पर भारत का सशक्त पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, भारत का विकास दृष्टिकोण 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' की भावना पर आधारित है, जिसमें समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सांसद सावित्री ठाकुर ने महिलाओं, बच्चों, वंचित वर्गों, दिव्यांगजनों और कमजोर तबकों के सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, नीतिगत पहलों और नवाचारों को साझा किया। मंत्री ठाकुर ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत' का संकल्प सिर्फ आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा, समान अवसर, लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा के साथ हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। महिला सशक्तिकरण, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देगा मंत्री ठाकुर ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भारतीय दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अपने समावेशी विकास के अनुभवों को विश्व समुदाय के साथ साझा कर वैश्विक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत मानता है कि सतत और समावेशी विकास ही विश्व शांति, स्थिरता और समृद्धि का आधार है। अंत में मंत्री ठाकुर ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के मंच पर सामाजिक विकास के वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा और मानव कल्याण को केंद्र में रखकर वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देगा।  

सीएम विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग, विकास से जुड़े अहम फैसले

रायपुर. मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – मंत्रिपरिषद की बैठक मादक पदार्था की रोकथाम की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के गठन हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में प्रावधानित 100 नवीन पदों की  स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव एवं कोरबा जिला शामिल हैं।  मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा अंतर्गत एस.ओ.जी. (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन के लिए प्रावधानित 44 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है। एसओजी का काम किसी भी बड़ी या अचानक हुई घटना में तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को संभालना और आतंकी हमला या गंभीर खतरे को जल्दी खत्म करना होता है। एसओजी एक खास तरह की प्रशिक्षित टीम होती है, जिसे ऐसे खतरनाक कामों के लिए तैयार किया जाता है।  मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न एयरपोर्ट एवं हवाई पट्टियों में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया तथा इसके संचालन के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पायलट प्रशिक्षण की सुविधा के लिए राज्य में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी। विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह संस्थान उपयोगी होगा। इससे एयरक्राफ्ट रिसाइकिलिंग, हेलीकॉप्टर बंकिंग तथा एयरो स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित होगी। फ्लाइट ट्रेनिग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना निजी सहभागिता से किया जाएगा।  मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 का अनुमोदन किया गया। इस नीति से स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ-साथ इन्क्यूबेटर्स एवं अन्य हितधारकों का विकास होगा। छत्तीसगढ़ को देश में एक प्रमुख नवाचार केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में सुधार होने से राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इन कॉलोनियों में खुले भू-खंड, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियां इसमें शामिल नहीं होंगी। अभी इन कॉलोनियों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कॉलोनियों के रखरखाव के लिए निवासियों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है। एक ओर वे नगर निगम को संपत्ति कर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गृह निर्माण मंडल को भी रखरखाव शुल्क देना पड़ता है। इन कॉलोनियों के हस्तांतरण से नगरीय निकायों द्वारा यहां पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं दी जा सकेंगी और कॉलोनीवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी। मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों तथा निगम मंडल के कार्यालयों के लिए नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा एक वृहद बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है और यहां विभागों को स्पेस आबंटित किया जाएगा, ताकि भूमि का पूर्ण उपयोग किया जा सके।  मंत्रिपरिषद द्वारा सिरपुर एवं अरपा क्षेत्र में सुनियोजित विकास और विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित क्षेत्र में शासकीय भूमि के आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को प्रदान किया गया है।  गौरतलब है कि सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य संबंधित नदी तटीय क्षेत्रों का योजनाबद्ध और समग्र विकास करना है। इसके लिए मास्टर प्लान के क्रियान्वयन, भूमि नियोजन एवं नगर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है। विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय भूमि का आबंटन जरूरी था। वर्तमान में दोनों प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए शासकीय भूमि का आबंटन रु. 1/- प्रीमियम एवं भू-भाटक पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, भूमि आबंटन के अधिकार संबंधित जिला कलेक्टरों को दिया गया है।  मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति‘‘ को प्रदेश में लागू किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया।  छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति के अनुसार राज्य शासन के सभी विभाग, उपक्रम एवं स्वायत्त संस्थाएं केवल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुमोदित क्लाउड सेवा प्रदाताओं या भारत में स्थित सुरक्षित डेटा सेंटर एवं डिजास्टर रिकवरी सेंटर से ही क्लाउड सेवाएं लेंगी। किसी विशेष या असाधारण आवश्यकता के लिए राज्य क्लाउड परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।  नीति के तहत कम प्राथमिकता वाले एप्लिकेशन एवं आर्काइव डेटा का क्लाउड माइग्रेशन वर्ष 2027-28 तक तथा उच्च प्राथमिकता सेवाओं का माइग्रेशन 2029-30 तक किया जाएगा। सभी नए एप्लिकेशन क्लाउड-नेटिव तकनीक पर विकसित किए जाएंगे।  कैबिनेट ने इस नीति में भविष्य में आवश्यक संशोधन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अधिकृत किया है। इस नीति से आईटी ढांचे में लागत में कमी, संचालन में दक्षता, बेहतर साइबर सुरक्षा, आपदा के समय सेवाओं की निरंतरता तथा नागरिक सेवाओं की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विस्तार देने के लिए मोबाइल टावर योजना का अनुमोदन किया गया है। भौगोलिक विषमता और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने से शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। इस योजना से मोबाइल टावर स्थापना हेतु चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाएगा।  मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत चयनित मोबाइल नेटवर्क विहीन बसाहटों में टावर की स्थापना की जाएगी। डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, ई गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना से सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार होगा विशेष कर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में संचार सुविधा उपलब्ध होने से प्रशासनिक कार्य में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। मोबाइल टावर योजना के लागू होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आपातकालीन सेवाएं … Read more

‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री ने पोस्टर किया लॉन्च

रायपुर. विश्व आर्द्रभूमि दिवस  के अवसर पर बीते दिनों मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में ‘वुमेन फॉर वेटलैण्ड्स ’ अभियान के पोस्टर का अनावरण किया,इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आर्द्रभूमि एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण हेतु चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना की। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि जल ही जीवन है और आर्द्रभूमियां मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति को इस पवित्र अभियान से जोड़ना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी कदम है। मुख्यमंत्रीसाय ने यह भी कहा कि “नदियां, तालाब, कुएं, पोखर और आर्द्रभूमियां केवल जल-स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी प्रकृति की पहचान हैं। इन्हें बचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।” प्रज्ञा निर्वाणी चला रहीं व्यापक जन-जागरण अभियान ‘वूमेन फॉर वैटलैंड्स ’ अभियान की संस्थापक एवं  महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रज्ञा निर्वाणी द्वारा प्रदेशभर में आर्द्रभूमि संरक्षण हेतु निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, इस अभियान के अंतर्गत तालाब, नहर, कुएं, नदियों एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए महिलाओं को संगठित किया जा रहा है। प्रज्ञा निर्वाणी ने मुख्यमंत्री को नवागढ़ स्थित गिधवा-परसदा-नगधा पक्षी विहार क्षेत्र को रामसर साइट घोषित करने हेतु ज्ञापन भी सौंपा, मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि “महिलाएं प्रकृति की प्रथम संरक्षक हैं,यदि मातृशक्ति आगे आएगी तो जल-स्रोतों का संरक्षण जन-आंदोलन बन जाएगा।” पोस्टर अनावरण कार्यक्रम के दौरान प्रसन्ना अवस्थी, प्राची शर्मा, प्रणीता शर्मा, आरविका अवस्थी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।