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एम हेल्पलाइन बनी जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन-प्रशासन तक आम नागरिकों की शिकायतों की पहुंच और उनके समयबद्ध निराकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त एक शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया है।  कलेक्टर  विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अवैध रेत खनन एवं परिवहन के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। सीएम हेल्पलाइन में अवैध रेत परिवहन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर खनिज विभाग की टीम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोलबिर्रा, पथर्रा एवं मटियाडाड़ क्षेत्र में जांच एवं कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध रेत परिवहन में संलिप्त पाए गए 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया। जब्त किए गए सभी वाहनों को कोटमी चौकी में सुरक्षित रखा गया है। मामले में संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर हुई इस त्वरित कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके निराकरण की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य के आधिकारिक डिजिटल सेवा तंत्र में शिकायत पटल और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक शासकीय सेवाओं और शिकायतों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। खनिज विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रेत परिवहन पर निगरानी और शिकायतों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया को बल मिला है। जिले में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

योगी सरकार में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप बदलेंगे यूपी के आईटीआई, आठ शहरों के क्लस्टर में लागू होगा पीएम-सेतु मॉडल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रही है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को उद्योग-आधारित कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके पहले चरण में प्रदेश के आठ शहरों- कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के राजकीय आईटीआई क्लस्टरों में उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। योजना का उद्देश्य आईटीआई में दिए जाने वाले प्रशिक्षण और उद्योगों की मौजूदा व भविष्य की कौशल जरूरतों के बीच की दूरी को कम करना है। इसके लिए उद्योगों को केवल रोजगार देने वाली इकाई के बजाय प्रशिक्षण व्यवस्था के सक्रिय भागीदार के रूप में जोड़ा जाएगा। उद्योग पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मानकों को अपडेट करने, आधुनिक तकनीक और उपकरणों को शामिल करने, प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने तथा प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण तक में भूमिका निभाएंगे। इससे युवाओं को ऐसा कौशल उपलब्ध कराने पर जोर होगा, जिसकी सीधे उद्योगों में मांग है। यूपी के आठ शहरों में बनेगा इंडस्ट्री-आईटीआई इकोसिस्टम प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के क्रियान्वयन के लिए योगी सरकार ने कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के राजकीय आईटीआई क्लस्टरों को उद्योगों से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इन क्लस्टरों के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स (एआईपी) की पहचान और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार की मंशा है कि इन शहरों के औद्योगिक स्वरूप और स्थानीय स्तर पर रोजगार की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाए। इससे आईटीआई से निकलने वाले युवाओं के कौशल और स्थानीय उद्योगों की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा। एंकर इंडस्ट्री पार्टनर संभालेंगे अहम जिम्मेदारी पीएम-सेतु मॉडल की खासियत उद्योगों की सीधी भागीदारी है। प्रत्येक क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की व्यवस्था की गई है। एंकर इंडस्ट्री पार्टनर राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रशिक्षण मानकों को अपडेट करने, उद्योगों की जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम विकसित करने और प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने में भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही आधुनिक मशीनों एवं उपकरणों की उपलब्धता, प्रशिक्षकों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स, एप्रेंटिसशिप, ऑन द जॉब ट्रेनिंग, प्लेसमेंट लिंकेजेस और आरपीएल क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों में भी उद्योगों की भागीदारी होगी। यानी आईटीआई में दाखिले से लेकर प्रशिक्षण और रोजगार तक की पूरी व्यवस्था को इंडस्ट्री से जोड़ने का प्रयास होगा। 200 से अधिक कर्मचारियों वाले उद्योग बन सकेंगे भागीदार उत्तर प्रदेश में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स की पहचान के लिए उद्योगों की भागीदारी आमंत्रित की गई है। ऐसे पात्र उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), उद्योग संगठन और अन्य संस्थाएं इसमें भागीदारी कर सकती हैं, जिनमें कर्मचारियों की संख्या 200 से अधिक हो। चयन में संबंधित क्लस्टर की औद्योगिक एवं कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप उद्योग की भूमिका को महत्व दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार की कोशिश प्रत्येक क्लस्टर को वहां मौजूद उद्योगों और भविष्य में पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों के अनुरूप विकसित करने की है। ₹60 हजार करोड़ से बदलेगी देश के आईटीआई की तस्वीर पीएम-सेतु के तहत अगले पांच वर्षों में देशभर के राजकीय आईटीआई के रूपांतरण के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 30 हजार करोड़ रुपये, राज्य सरकारों की 20 हजार करोड़ रुपये और उद्योगों की हिस्सेदारी 10 हजार करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इस प्रकार निवेश में केंद्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत, राज्यों की 33 प्रतिशत और उद्योगों की करीब 17 प्रतिशत होगी। योजना के तहत देशभर में करीब 1,000 राजकीय आईटीआई को हब एंड स्पोक मॉडल से विकसित करने की परिकल्पना है। इनमें लगभग 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे। हब एंड स्पोक मॉडल से एक-दूसरे से जुड़ेंगे आईटीआई पीएम-सेतु के तहत राजकीय आईटीआई को अलग-अलग संस्थानों के बजाय क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। हब एंड स्पोक व्यवस्था में किसी भौगोलिक या औद्योगिक क्लस्टर के भीतर मौजूद संस्थानों को एक एकीकृत कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में जोड़ा जाएगा। हब आईटीआई को मजबूत बुनियादी ढांचे, आधुनिक उपकरणों, उद्योग संबंधों और प्रशिक्षक विकास सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। वहीं अन्य स्पोक आईटीआई को इससे जोड़कर प्रशिक्षण की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। इससे महंगे उपकरण, प्रयोगशालाएं, विशेषज्ञ प्रशिक्षक और अन्य संसाधन केवल एक संस्थान तक सीमित न रहकर कई आईटीआई के लिए उपयोगी हो सकेंगे। प्रशिक्षण से प्लेसमेंट तक उद्योगों की भागीदारी योगी सरकार की योजना इस मॉडल के जरिए आईटीआई प्रशिक्षण को केवल कक्षा और प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय रोजगार से सीधे जोड़ने की है। उद्योगों की भागीदारी से छात्रों को एप्रेंटिसशिप और ऑन द जॉब ट्रेनिंग के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा। उद्योग क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण की जरूरत पहचानने, पाठ्यक्रम विकसित करने और प्रशिक्षित मानव संसाधन को रोजगार देने तक की प्रक्रिया में शामिल होंगे। इससे प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं और उद्योगों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिलने की अपेक्षा है। उद्योगों के साथ संवाद बढ़ाएगी योगी सरकार प्रदेश सरकार ने संबंधित जिलों में उद्योगों और एमएसएमई की पहचान कर उनसे संवाद स्थापित करने और पीएम-सेतु में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में भी प्रक्रिया शुरू की है। जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय उद्योगों तक पहुंच बनाने और योजना से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इस पूरी कवायद का लक्ष्य प्रदेश में आईटीआई- इंडस्ट्री इकोसिस्टम को मजबूत करना है, ताकि प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और युवाओं को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराया जा सके। युवाओं के रोजगार के साथ उद्योगों को मिलेगा प्रशिक्षित मैनपावर पीएम-सेतु के माध्यम से योगी सरकार प्रदेश में औद्योगिक विकास और कौशल विकास को एक-दूसरे का पूरक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। योजना से एक ओर युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को उनकी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित मानव … Read more

यूडाइज प्लस एवं प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में डेटा के प्रभावी उपयोग की दी गई जानकारी

भोपाल  राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, यूनिसेफ एवं एनआईसी के सहयोग से 21 से 23 सितंबर तक आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित यूडाइज प्लस एवं पीजीआई इंडेक्स 2025-26 की तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों को यूडाइज प्लस में डेटा प्रविष्टि, सत्यापन एवं प्रबंधन तथा पीजीआई और पीजीआई-डी के माध्यम से शैक्षिक प्रदर्शन के विश्लेषण की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने डेटा की शुद्धता, प्रमाणिकता और समयबद्ध अद्यतन को प्रभावी शैक्षिक नियोजन के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यालयों से प्राप्त डेटा अब केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकताओं की पहचान, संसाधनों के बेहतर नियोजन और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्ययोजनाएं तैयार करने का महत्वपूर्ण आधार बनेगा। सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल ने कार्यशाला में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था में बेहतर योजना निर्माण, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और निरंतर सुधार के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब आंकडों और उनके विश्लेषण की बात हो तो UDISE+ और PGI इंडेक्स को समझना और उनका प्रभावी उपयोग सभी मैदानी अधिकारियों के लिए आवश्यक है। सचिव डॉ. संजय गोयल ने शैक्षणिक प्रबंधन में डेटा की भूमिका को रेखांकित करते हुए जिला अधिकारियों से उपलब्ध आंकड़ों को केवल रिपोर्टिंग तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने और सुधार की दिशा तय करने में उपयोग करने का आह्वान किया। कार्यशाला में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के उप महानिदेशक डॉ. पंकज के.पी. श्रेयस्कर, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र श्री हरजिन्दर सिंह, अपर मिशन संचालक सुश्री काजल जावला, समग्र शिक्षा की अपर परियोजना संचालक सुश्री नंदा भलावे कुशरे, सीनियर डायरेक्टर NIC दिल्ली श्री सबा अख़् तर एवं यूनिसेफ भारत के शिक्षा विशेषज्ञ श्री गणेश निगम, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र डॉ. अरुण सिंह सहित विभागीय अधिकारी, यूनिसेफ एवं एनआईसी के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। राज्य शिक्षा केंद्र के यूडाइस प्रभारी श्री सुमनकांत जैन और प्रशासक डॉ. राकेश दुबे ने कार्यशाला का समग्र समन्वय किया। प्रदेश में 1.20 लाख स्कूलों का डेटा स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के उप महानिदेशक डॉ. पंकज के.पी. श्रेयस्कर ने UDISE+ एवं PGI से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डेटा की गुणवत्ता, समयबद्ध प्रविष्टियों और शिक्षा क्षेत्र में आंकड़ों के व्यवस्थित उपयोग के महत्व पर बताया कि यूडाइज प्लस 2025-26 के अनुसार मध्यप्रदेश में लगभग 1.20 लाख विद्यालय, 1.53 करोड़ विद्यार्थी और 7.29 लाख शिक्षकों से संबंधित आंकड़े दर्ज हैं। डॉ. श्रेयस्कर ने कहा कि इतने व्यापक स्तर पर संकलित डेटा में छोटी-सी विसंगति भी योजना निर्माण और संसाधन नियोजन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए डेटा को वास्तविक स्थिति के अनुरूप दर्ज करने और नियमित सत्यापन करना आवश्यक है। पीजीआई से चिन्हित होंगे सुधार के क्षेत्र यूनिसेफ नई दिल्ली के शिक्षा विशेषज्ञ श्री गणेश निगम ने पीजीआई की संरचना, उद्देश्य एवं उपयोग विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने पीजीआई इंडेक्स के विभिन्न संकेतकों को समझने और उनके आधार पर जिलों और विद्यालयों की प्राथमिकताओं को चिह्नित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। यूडाइज प्लस डेटा कैप्चर फॉर्मेट 2026-27 के प्रावधानों के साथ विद्यालय, भवन, सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों, शिक्षकों एवं अन्य मानव संसाधनों से जुड़े डेटा की जानकारी दी। डॉ. गणेश निगम ने पीजीआई की संरचना और ग्रेडिंग प्रणाली पर के बारे में जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों के पीजीआई रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के प्रदर्शन का विश्लेषण कर आंकड़ों के आधार पर सुधार के क्षेत्र चिन्हित करने की प्रक्रिया समझाई गई। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के सांख्यिकी अधिकारी श्री संतन सिंह ने पीजीआई के विभिन्न डोमेन और संकेतकों की जानकारी दी, जबकि श्री जगदीश कुमार ने पीजीआई-डी 2025-26 के अंतर्गत 70 संकेतकों और 600 अंकों के आधार पर जिलेवार प्रदर्शन के आकलन की प्रक्रिया बताई। इस दौरान सीखने के परिणाम, प्रभावी कक्षा शिक्षण, अधोसंरचना एवं सुविधाएं, विद्यार्थी हितलाभ, विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं जैसे विषयों पर चर्चा हुई। यूडाइज प्लस मॉड्यूल का व्यावहारिक प्रशिक्षण NIC दिल्ली के सीनियर डायरेक्टर श्री विकास जैन एवं श्री सर्वेन्द्र तरुण द्वारा UDISE + पोर्टल का लाइव डेमो के माध्यम से उसके प्रावधान के बारे में बताया। साथ ही जिलों एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान भी किया। उन्होंने विद्यालय निर्देशिका, प्रोफाइल एवं सुविधा, शिक्षक प्रबंधन और विद्यार्थी मॉड्यूल में डेटा प्रविष्टि, अद्यतन, सत्यापन और प्रबंधन की प्रक्रिया भी समझाई। जीपीएस मैपिंग, विद्यालयों के विलय एवं बंद होने की प्रक्रिया, शिक्षक एवं विद्यार्थियों की जानकारी एवं दैनिक डेटा सिंक्रोनाइजेशन का भी प्रदर्शन किया गया। विश्वसनीय डेटा एवं सटीक विश्लेषण जरूरी संचालक राज्य शिक्षा केंद्र श्री हरजिंदर सिंह ने UDISE+ एवं PGI इंडेक्स से प्राप्त जानकारी का उपयोग विद्यालयी शिक्षा में सुधार के लिए प्रभावी ढंग से करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और परिणामों के आकलन के लिए विश्वसनीय डेटा तथा उसके विश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही और प्रमाणित डेटा बेहतर योजना, संसाधनों के प्रभावी नियोजन और लक्षित शैक्षिक सुधार का आधार है। पीजीआई एवं पीजीआई-डी रिपोर्ट का उपयोग केवल प्रदर्शन के आकलन के लिए नहीं, बल्कि सुधार के क्षेत्रों की पहचान कर साक्ष्य-आधारित कार्ययोजना तैयार करने के लिए किए जाने पर भी बल दिया गया। कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, अपर परियोजना समन्वयक, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, जिला प्रोग्रामर, विकासखण्ड एमआईएस समन्वयक सहित राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी उपस्थित रहे।  

ट्रेनिंग सेंटर बनने तक सांदीपनि विद्यालय भवन-परिसरों में होगा सेवादूतों का प्रशिक्षण

*भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आस्था का विराट पर्व है। इसके भव्य और दिव्य आयोजन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के साथ पूरी क्षमता के साथ तैयार होना होगा। यह हम सबका दायित्व है कि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित संवाद भवन में भारत स्काउट एंड गाइड के पदाधिकारियों एवं गाइड्स के साथ सिंहस्थ सेवा कार्य 2028 के संदर्भ में आयोजित एक विशेष संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि सिंहस्थ में भीड़ नियंत्रण सहित कई प्रकार की व्यवस्थाएं संभालने वाले स्काउट एंड गाइड के मास्टर ट्रेनर, सेवादूतों एवं स्वयंसेवकों के विधिवत् प्रशिक्षण के लिए भोपाल में एक अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस ट्रेनिंग सेंटर के बनने एवं इसमें प्रशिक्षण शुरू होने तक आवश्यकतानुसार सांदीपनि विद्यालय के भवनों एवं परिसरों का इस्तेमाल किया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा, भारत स्काउट एवं गाइड का मूल मंत्र है और ‘तैयार रहो’ इसका ध्येय वाक्य। स्काउट एंड गाइड ने अपने कार्य के आधार पर दुनिया में अलग ही पहचान बनाई है। पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से उज्जैन सिंहस्थ के आयोजन में इस संगठन की कार्यशाली, सामर्थ्य और समर्पण को करीब से देखा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित सिंहस्थ कराना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 सेवा-भाव, प्रबंधन क्षमता और सुशासन की व्यापक परीक्षा भी होगा। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में अपील करते हुए कहा कि इस बार आप सबको सेवा के लिए, किसी भी चुनौती और अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हमेशा की तरह तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आजादी के बाद हुए पांच सिंहस्थों में भारत स्काउट-गाइड ने सेवा के कई अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। सिंहस्थ 2028 में भीड़ प्रबंधन की चुनौती सबसे बड़ी होगी। उज्जैन सिंहस्थ में करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही है। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ-2016 में करीब 7,500 स्काउट एवं गाइड ने 10 कैंपों के जरिए सेवाएं दी थीं। इस बार 15 हजार से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवक 20 से अधिक कैंपों के माध्यम से सेवा का मोर्चा संभालेंगे। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन संस्थान के सहयोग से 100 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे। प्रदेश के हर जिले से 500 तथा उज्जैन संभाग के सभी जिलों से एक-एक हजार युवाओं को सेवादूतों के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।  स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद तेजी से धार्मिक पर्यटन बढ़ा है। इस वर्ष यहां 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारत स्काउट एंड गाइड को सिंहस्थ में सेवा के लिए तैयार हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीक एवं सोशल मीडिया के इस दौर में स्काउट एंड गाइड को इंटरनेट और सोशल मीडिया से फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए भी प्रशिक्षित होना होगा।   मध्यप्रदेश स्काउट एंड गाइड के राज्य कोषाध्यक्ष और सिंहस्थ सेवा दल के प्रभारी रहे रमेश शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 में स्काउट एंड गाइड को 30 से अधिक शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें से 20 शिविर स्काउट-गाइड के होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं सिहस्थ के पूर्व आयोजनों में सेवादूत के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसलिए ऐसे धार्मिक आयोजनों में स्काउट एंड गाइड की बड़ी भूमिका को वे बेहतर तरीके से समझते हैं। संगोष्ठी में भारत स्काउट एंड गाइड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष  अशोक अर्गल, संस्था के राज्य सचिव डॉ. प्रेम कुमार, सचिव स्कूल शिक्षा संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह सहित प्रदेश के सभी संभागों से आए सेवादूत उपस्थित थे। अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सेवादूतों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाये।

आप गिनते-गिनते थक जाएंगे, हम युवाओं को नौकरी देते-देते नहीं थकेंगे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घर छोड़ने को मजबूर किसी बेटी या घरेलू हिंसा की शिकार महिला को अब दर-दर की ठोकर नहीं खानी पड़ेगी। गोरखपुर में 100 बेड का राजकीय महिला शरणालय ऐसी महिलाओं का संबल बनेगा। आधी आबादी को सम्मान और सुरक्षा देने के साथ स्वावलंबन के पथ पर आगे बढ़ाकर विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने रोजगार को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, आप गिनते जाइए, हम नौकरी बांटते जाएंगे। आप गिनते-गिनते थक जाएंगे, हम यूपी के नौजवानों को नौकरी देते-देते नहीं थकेंगे।   मुख्यमंत्री योगी बुधवार को चरगांवा के सेमरा में 8.05 करोड़ रुपये की लागत से बने राजकीय महिला शरणालय के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शरणालय का निरीक्षण कर यहां रह रहीं महिलाओं से मुलाकात की और उनके लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं को प्रदर्शित करने वाले बोर्ड का भी अवलोकन किया।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी पढ़ाई, विवाह, सुरक्षा और स्वावलंबन तक सरकार उसके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत जन्म से स्नातक तक बेटी के लिए 25 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताब, जूते-मोजे और स्वेटर की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 1.10 करोड़ परिवारों को सालाना 12 हजार रुपये पेंशन और प्रदेश में 65 लाख गरीबों को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए गए हैं।   महिला सुरक्षा को लेकर सपा पर साधा निशाना मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में ऐसी स्थिति थी कि कहावत चल पड़ी थी, “देख सपाई, बिटिया घबराई।” बेटियों की पढ़ाई और सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहते थे। गुंडागर्दी, जमीन पर कब्जे और अराजकता का माहौल था। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, भय, गुंडागर्दी और कब्जे से मुक्त है। समाज और सरकार ने एक दिशा में काम किया तो इसके परिणाम सामने आए हैं।   उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को चुनने से अच्छी सुविधाएं मिलती हैं। कोरोना काल में निराश्रित हुए बच्चों को सरकार चार हजार रुपये प्रतिमाह सहायता दे रही है। ऐसे बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए लैपटॉप भी उपलब्ध कराए गए हैं।   साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मिशन रोजगार के तहत अब तक साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं बन रही हैं। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें बड़ी संख्या में इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। 24 हजार से अधिक स्टार्टअप के साथ उत्तर प्रदेश का युवा अब नौकरी लेने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बन रहा है।   उन्होंने कहा कि लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी के रूप में महिलाएं स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं। नारी वंदन अधिनियम के जरिए लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व का रास्ता सुनिश्चित किया गया है।   इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा शून्य पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस बच्चों को निगल जाती थी। अकेले बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब 500 बच्चों की मौत होती थी। सरकार के प्रयासों से आज मौत का आंकड़ा शून्य पर पहुंच गया है। उन्होंने गोरखपुर में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से वाराणसी की यात्रा अब करीब ढाई घंटे में पूरी हो रही है।   निराश्रित महिलाओं का संबल बनेगा शरणालय मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि घरेलू हिंसा की शिकार महिला हो या किसी कारण परिवार से बिछड़ी बेटी, बहन अथवा बुजुर्ग महिला, यह शरणालय उनका सहारा बनेगा। उन्होंने शरणालय में रह रही एक बुजुर्ग महिला का उल्लेख करते हुए कहा कि वह बोल नहीं पा रही हैं और उनके घर-पते की जानकारी नहीं है। ऐसे लोगों का संबल सरकार बनती है और उन्हें उनके वैधानिक अभिभावकों से मिलाने का प्रयास करती है। मुख्यमंत्री ने महिला कल्याण विभाग से शरणालय का बेहतर संचालन करने की अपेक्षा की।   मुख्यमंत्री योगी ने वामन जयंती की शुभकामनाएं देते हुए भगवान विष्णु के वामन अवतार का उल्लेख किया और उपस्थित लोगों को बधाई दी।   रवि किशन बोले- बहन-बेटियों के साथ खड़ी है सरकार सांसद रवि किशन शुक्ला ने कहा कि ठंड में कोई निराश्रित बेटी या बहन कहां जाएगी और उसे आश्रय कैसे मिलेगा, इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री योगी ने आठ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह शरणालय बनवाया है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश ने नई करवट ली है। कानून के राज ने माफिया और गुंडागर्दी पर अंकुश लगाया है। पहले गरीबों की जमीन पर कब्जे और रंगदारी की घटनाएं होती थीं, जबकि आज सरकार गरीबों और महिलाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी सरकार के कार्यों का उल्लेख किया।   यूपी उत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर: महेंद्रपाल पिपराइच विधायक महेंद्रपाल सिंह ने स्वागत संबोधन में कहा कि सरकार ने जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी इंसेफेलाइटिस से बड़ी संख्या में बच्चों की जान जाती थी, लेकिन सरकार के प्रयासों से इस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। युवाओं को रोजगार और बेटियों को सुरक्षा देने के संकल्प के साथ सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश की छवि से निकलकर उत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है।   बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को दिए लैपटॉप कार्यक्रम में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत अक्षिता गुप्ता, पलक चौहान, दीपिका, प्रियांशी यादव, उमरा अंजुम, आयुषी यादव, सुधीर कुमार, प्रियांशु यादव, अनीश कुमार सिंह और रुद्र प्रताप रंजन को लैपटॉप प्रदान किए गए।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम … Read more

“माँ तुझे प्रणाम” योजना के तहत भ्रमण के लिये आए युवाओं से किया संवाद

भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को भोपाल स्थित टी.टी. नगर स्टेडियम में माँ तुझे प्रणाम योजना के अंतर्गत भ्रमण के लिये ग्वालियर, अशोकनगर एवं दतिया से आए युवाओं से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा फ्लैग ऑफ कर प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के भ्रमण के लिए रवाना किया। मंत्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में विभिन्न समूहों में प्रदेश के युवाओं को प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों से जोड़ते हुए 6 जोन में (मालवा, भोपाल, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, बघेलखंड एवं महाकौशल) इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माँ तुझे प्रणाम योजना युवाओं को प्रदेश की विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इसके साथ ही इस योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष प्रदेश के युवाओं को विभिन्न समूहों में देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का भी भ्रमण कराया जाता है। 6 जोन में प्रदेश की विविध विरासत का भ्रमण योजना के अंतर्गत 06-जोन में युवाओं को विभिन्न समूहों में मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थित प्रमुख ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। मालवा जोन में महाकालेश्वर, गांधी सागर, पशुपतिनाथ, धर्मराजेश्वर, ओंकारेश्वर, मांडू एवं महेश्वर जैसे प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है। भोपाल जोन में सांची, उदयगिरि, भोजपुर, रातापानी, मानव संग्रहालय, शौर्य स्मारक, भीमबेटका, मढ़ई एवं पचमढ़ी सहित अन्य प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। ग्वालियर-चंबल जोन में ग्वालियर के फोर्ट एवं पैलेस, कूनो नेशनल पार्क, दतिया, चंदेरी एवं माधव नेशनल पार्क जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। बुंदेलखंड जोन में खजुराहो, जटाशंकर, पन्ना के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल, पन्ना टाइगर रिजर्व, ओरछा एवं नौरादेही टाइगर रिजर्व का भ्रमण कराया जाएगा। बघेलखंड जोन में मैहर, चित्रकूट, बांधवगढ़ नेशनल पार्क, महामृत्युंजय मंदिर रीवा एवं रीवा स्थित व्हाइट टाइगर सफारी सहित प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है। महाकौशल जोन में भेड़ाघाट, चौसठ योगिनी मंदिर, कान्हा नेशनल पार्क एवं पेंच नेशनल पार्क सहित अन्य प्रमुख पर्यटन एवं प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। 3 दिवसीय भ्रमण में पर्यटन एवं साहसिक गतिविधियों से होंगे परिचित माँ तुझे प्रणाम योजना के अंतर्गत युवाओं का भ्रमण तीन दिवस का होगा। इस दौरान उन्हें प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी देने के साथ ही वन विभाग द्वारा संचालित साहसिक गतिविधियों से भी परिचित कराया जाएगा। इससे युवाओं को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा, वन्यजीवन और पर्यटन की संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। ये युवा भोपाल एवं आसपास के प्रमुख स्थलों का करेंगे भ्रमण ग्वालियर, अशोकनगर एवं दतिया से आए युवा भ्रमण के दौरान भोपाल एवं आसपास के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों, जिसमें सांची, भोजपुर सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं, का भ्रमण करेंगे। इस दौरान युवा इन स्थलों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से परिचित होंगे। प्रत्येक विकासखंड से प्रतिभाशाली युवाओं का चयन योजना के अंतर्गत प्रत्येक विकासखंड से 10 प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया जाता है। इनमें NCC, NSS, खिलाड़ी, मेधावी विद्यार्थी तथा स्काउट एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े युवा शामिल होते हैं। प्रत्येक विकासखंड से 5 युवक एवं 5 युवतियों का चयन किया जाता है, जिससे युवाओं की समान एवं व्यापक सहभागिता सुनिश्चित होती है। खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा यात्रा के दौरान किराया, दैनिक भत्ता, आवास, भोजन, ट्रैक सूट सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है।  

एशियन गेम्स में मध्यप्रदेश के जय मीना ने रचा इतिहास

भोपाल  मध्यप्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ी जय मीना ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया है। जापान के आइची-नागोया में जारी 20वें एशियन गेम्स में जय मीना ने सॉफ्ट टेनिस के पुरुष एकल वर्ग में भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया। इसके साथ ही वह एशियन गेम्स के इतिहास में सॉफ्ट टेनिस में भारत को पदक दिलाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। सेमीफाइनल में जापान के ताकुया कुरोसाका से हुआ मुकाबला पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जय मीना का सामना जापान के ताकुया कुरोसाका (Takuya Kurosaka) से हुआ। जय ने मुकाबले में शानदार जुझारूपन दिखाते हुए कड़ी चुनौती पेश की। हालांकि सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही जय ने भारत के लिए कांस्य पदक पक्का कर इतिहास रच दिया। क्वार्टरफाइनल में रोमांचक जीत के बाद बनाई थी अंतिम चार में जगह जय मीना ने क्वार्टरफाइनल मुकाबले में फिलीपींस के खिलाड़ी के खिलाफ बेहद संघर्षपूर्ण मुकाबले में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। निर्णायक चरण तक पहुंचे इस मुकाबले में जय के शानदार प्रदर्शन ने उन्हें अंतिम चार में स्थान दिलाया और भारत का पदक सुनिश्चित हुआ। खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने जय मीना को ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जय मीना की उपलब्धि मध्यप्रदेश के साथ-साथ पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। सॉफ्ट टेनिस में भारत को एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाकर जय ने भारतीय खेल इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। उनकी यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। 2022 नेशनल गेम्स में जीता था स्वर्ण जय मीना ने वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने पुरुष टीम और युगल स्पर्धाओं में भी मध्यप्रदेश के पदक अभियान में योगदान दिया। वर्ष 2025 में वे पुरुष एकल के नेशनल चैंपियन बने। लगातार राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद अब उन्होंने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी रचा था इतिहास जय मीना ने वर्ष 2024 में वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में अंडर-21 मिश्रित युगल में कांस्य पदक जीतकर भी भारतीय सॉफ्ट टेनिस में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की थी। उन्होंने आध्या तिवारी के साथ मिलकर यह पदक हासिल किया था और यह विश्व चैंपियनशिप में भारत की पहली पदक विजेता जोड़ी बनी थी। देवास के स्कूल कोर्ट से शुरू हुआ सफर जय मीना का सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है। देवास के Pioneer Public School में पढ़ाई के दौरान उन्होंने पहली बार सॉफ्ट टेनिस कोर्ट देखा। शुरुआत में वे केवल खिलाड़ियों को देखने और बॉल बॉय के तौर पर मदद करने जाते थे। धीरे-धीरे इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने स्वयं खेलना शुरू किया। स्कूल और जिला प्रतियोगिताओं से आगे बढ़ते हुए उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई तथा महज 14 वर्ष की उम्र में जापान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना शुरू कर दिया था। भारतीय सॉफ्ट टेनिस के इतिहास में दर्ज हुआ नया अध्याय जय मीना का कांस्य पदक भारतीय सॉफ्ट टेनिस के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। एशियन गेम्स के मंच पर भारत के लिए इस खेल का पहला पदक जीतकर जय ने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी की यह उपलब्धि प्रदेश में तैयार हो रही प्रतिभाओं की क्षमता को भी रेखांकित करती है। 

ट्रेड शो में प्रवाहित होगी संगम नगरी के हस्तशिल्प, खानपान और परिधानों की त्रिवेणी

प्रयागराज ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (यूपीआईटीएस) 2026 में संगम नगरी प्रयागराज के उद्यमी अपनी व्यापारिक क्षमता और हुनर की धमक दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रदेश सरकार की इस पहल से प्रयागराज के स्थानीय उद्यमियों, हस्तशिल्पियों और नवाचारियों को एक बड़ा ग्लोबल मंच उपलब्ध हो रहा है। इस वृहद आयोजन में प्रयागराज जनपद की भागीदारी हर साल बढ़ रही है। इस वर्ष जिले के 10 उद्यमी यूपीआईटीएस में हिस्सा लेंगे, जिनके लिए आवंटित स्टाल में जिले के उत्पादों का डंका बजेगा। हस्तशिल्प, खानपान और परिधानों की त्रिवेणी   यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो  के चौथे संस्करण में प्रयागराज  के विभिन्न वर्गों के उद्यमियों को अवसर दिया गया है। उपायुक्त उद्योग शरद टंडन बताते हैं कि प्रयागराज से विभिन्न श्रेणियों मे इस बार दस प्रतिभागियों को अवसर दिया गया है। मेले में ओडीओपी ( एक जनपद एक उत्पाद) श्रेणी के तहत 3  इकाइयों के  स्टाल लगेंगे। इसके अलावा  एमएसएमई मे 5  इकाइयां और  'नवोदित निर्यातक' श्रेणी में  एक और ओडीओसी के लिए एक इकाई का चयन किया गया है, जिन्हें कुल 12  स्टाल  दिए गए हैं। चयनित इकाइयों मे संगम नगरी के परंपरागत हस्तशिल्प,  यहां के खानपान और परिधानों का मेल देखने को मिलेगा । * पहचान बनाएंगे परंपरागत हस्तशिल्प मूंज के उत्पाद* एक जनपद एक उत्पाद की श्रेणी में चयनित मूंज के उत्पादों को ट्रेड शो मे खास पहचान मिलेगी। इस श्रेणी के अंतर्गत प्रयागराज में मूंज के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उत्पाद बनाने वाली इकाई 'द परफेक्ट बाजार' का चयन किया गया है । ‘द परफ़ैक्ट बाजार' के पार्टनर पवन कुमार मिश्रा बताते हैं कि उन्हें ट्रेड शो के हॉल नंबर 10 मे स्टाल मिला है। उनकी इकाई अलग -अलग श्रेणियों में एक दर्जन से अधिक तरह के उत्पाद के स्टाल यहाँ लगाएगी। उनके सभी उत्पाद ईकोफ़्रेंडली हैं और सभी  ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर पहले से उपलब्ध हैं ।  खानपान में पैक्ड समोसे के जायके का बिखरेगा स्वाद उत्तर प्रदेश के समृद्ध व्यंजनों की विरासत की ग्लोबल ब्रांडिंग के लिए योगी सरकार द्वारा शुरू की गई ‘एक जनपद एक व्यंजन योजना’ में चयनित उत्पाद भी यूपी आईटीएस 2026 में अपने जायके का स्वाद बिखेरेंगे। उपायुक्त उद्योग शरद टंडन का कहना है कि पहली बार यूपी आईटीएस मे ओडीओसी श्रेणी को शामिल किया गया है, जिसे वहां निःशुल्क स्टाल दिया जा रहा है। इस श्रेणी के लिए 11 आवेदन आए थे, जिसमें परम्परागत जायके में अपनी खास पहचान रखने वाले प्रयागराज के पैक्ड समोसे को जगह मिली है। ओडीओसी श्रेणी में चयनित प्रयागराज के बलुआ घाट स्थित मुंडा स्नैक्स के पैक्ड समोसे का जायका इंटरनेशनल ट्रेड शो में जा रहा  है। मुंडा स्नैक्स के प्रतिनिधि अमित यादव का कहना है कि वैसे तो देशी घी, पनीर और ड्राई फ्रूट्स से बने उनके समोसे अपने लज़ीज जायके के लिए मशहूर हैं, लेकिन ट्रेड शो में मूल जायके को बनाए रखने के उनका ड्राई मसाला समोसा जा रहा है। इसके 5  हजार से अधिक ड्राई पीस ट्रेड शो के लिए ले जा रहे हैं | इसकी पैकिंग पर भी खास ध्यान दिया गया है, क्योंकि इसे घर पर 15 दिन रखा जा सकता है । इसके अलावा  खानपान की श्रेणी में ही केशरी गृह उद्योग , इकावा एग्रो और श्याम डेयरी उत्पादों को भी जगह मिली है। विशिष्ट परिधानों और फ्रैगनेंस का मेल इस बार  ट्रेड शो के लिए चयनित उद्यमियों में हुनर की विविधता भी देखने को मिलेगी। इस बार परिधान और इत्र की इकाइयों का चयन किया गया है। परिधान की श्रेणी में तीन उद्यमी हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें पुष्पांजलि की मिली मेहरोत्रा, अकील एम्ब्रायडरी के अकील अहमद और पवन मिश्रा ग्रामोद्योग के पवन मिश्रा शामिल है।  इस श्रेणी के उद्यमी खादी, कॉटन, एम्ब्रॉयडरी और हैंड प्रिंटिंग में अपने हुनर का जादू बिखेरेंगे। पहली बार whiffhaus fragrance इकाई को इसमें जगह मिली है। एमएसएमई श्रेणी के अंतर्गत चयनित इस इकाई के प्रतिनिधि अनवर आजम कहते हैं कि परंपरा और आधुनिकता से जुड़ी 60 तरह की खुशबू के इत्र ट्रेड शो मे अपनी महक बिखेरेंगे ।

अटारी स्थित बॉटनिकल गार्डन का होगा पुनर्विकास; पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं और नए आकर्षण

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की प्राकृतिक धरोहरों को संवारने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ी परियोजना पर कार्य कर रही है। रायपुर के अटारी स्थित प्रसिद्ध नंदनवन को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत नए और आकर्षक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इस कायाकल्प योजना पर लगभग 50 करोड़ रूपए की लागत आएगी। मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना के प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण किया गया। जिसका नंदन वन पीपीपी समिति द्वारा अनुमोदन किया गया। बैठक में नंदनवन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और इसे पर्यावरण व पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में चर्चा की गई। पीपीपी मॉडल पर आधारित योजना के अंतर्गत नंदनवन को आधुनिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता ली जाएगी। बॉटनिकल गार्डन का पुनर्विकास, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से संवारा जाएगा। परिसर में पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, स्वच्छ सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए नए आकर्षण और गतिविधियां जोड़ी जाएंगी। सुशासन नीति के तहत राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए पर्यटन के क्षेत्र को नई गति दे रही है। नंदनवन का यह पुनर्विकास प्रकृति, पर्यावरण और आधुनिक जन-सुविधाओं का एक बेहतरीन संगम साबित होगा, जिससे स्थानीय व बाहरी पर्यटकों के अनुभव में बड़ा सुधार आएगा। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, पीसीसीएफ  अरूण कुमार पांडेय, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य  आशीष भट्ट, वित्त विभाग सहित समीति के अन्य सदस्य एवं अन्य विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए।

नेवता भोज में दिखी सामाजिक समरसता की मिसाल, एक साथ बैठे बैगा पुजारी, जनप्रतिनिधि और अधिकारी

रायपु सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सामाजिक सहभागिता और समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नेवता भोज’ का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मल्टीपर्पस स्कूल पेंड्रा के असेंबली हॉल में आयोजित नेवता भोज में आयुर्वेद दिवस पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर एवं कार्यशाला में शामिल बैगा पुजारियों, ग्रामीणजनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से भोजन किया। सामूहिक भोज के इस आयोजन ने समानता, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का सकारात्मक संदेश दिया। नेवता भोज के दौरान जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैगा पुजारियों और ग्रामीणों ने एक साथ भोजन कर सामाजिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया। एक ही पंक्ति में साथ बैठकर भोजन करने की यह पहल सामाजिक दूरी को कम करने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद एवं आत्मीयता बढ़ाने का माध्यम बनी। कार्यक्रम में विधायक  प्रणव कुमार मरपच्ची, जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, कलेक्टर  विजय दयाराम के., पुलिस अधीक्षक  मनोज खिलारी, वनमंडलाधिकारी  कुमार निशांत, जिला पंचायत सीईओ  मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, बैगा पुजारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। नेवता भोज की विशेषता यह रही कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन किया। इससे आपसी अपनत्व और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के साथ यह संदेश भी गया कि सामूहिक सहभागिता से सामाजिक समरसता को और मजबूत किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान बैगा पुजारियों एवं ग्रामीणजनों की सहभागिता ने आयोजन को स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से भी जोड़ा। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ उनके सामूहिक रूप से भोजन करने से संवाद और सहभागिता का वातावरण बना। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सामाजिक सद्भाव और एकजुटता को मजबूत करने वाले ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत आयोजित नेवता भोज का उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता की भावना को बढ़ावा देना है। सेवा संकल्प अभियान के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने इस उद्देश्य को सामाजिक संवाद और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सामने रखा। नेवता भोज के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि समाज की वास्तविक शक्ति आपसी सहयोग, सम्मान, समानता और सहभागिता में निहित है। जब जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बैगा पुजारी और ग्रामीण एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, तो यह केवल भोजन का आयोजन नहीं रहता, बल्कि आपसी विश्वास और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर बन जाता है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह नेवता भोज सामाजिक समरसता, सामुदायिक भावना और जनभागीदारी को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में सामने आया। सामूहिक भोज में सभी वर्गों की सहभागिता ने ‘साथ चलें, साथ बढ़ें’ की भावना को मजबूत करते हुए समानता, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।