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आईआईटी इंदौर का कमाल: पांच छात्रों को मिला करोड़ों का ऑफर

इंदौर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर से बैचलर ऑफ टेक्नोलाजी (बीटेक) करने वाले पांच छात्रों को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक के सालाना पैकेज पर नौकरियां मिली हैं। संस्थान के इतिहास में यह पहला मौका है, जब बैच के इतने सारे विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ रुपये का पैकेज मिला है। इन्हें आईटी सेक्टर की कंपनियों ने जाब ऑफर किए हैं। खास बात यह है कि पिछले साल आईटी सेक्टर की स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद आईआईटी के विद्यार्थियों को अच्छे पैकेज पर कंपनियों ने रखा है। संस्थान के मुताबिक बीते साल सिर्फ एक विद्यार्थी यहां तक पहुंचा था, जबकि इस बार न्यूनतम पैकेज में भी बढ़ोतरी हुई है। एक दिसंबर 2024 से संस्थान में प्लेसमेंट का दौर शुरू हुआ है। कंपनियों का कैंपस में आना अभी जारी है। प्लेसमेंट सीजन में 150 से ज्यादा प्रमुख टेक कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) ने हिस्सा लिया है। निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने बताया संस्थान में आने वाली कंपनियों की संख्या में वृद्धि हुई है।   इन क्षेत्रों की कंपनियों ने दिए जॉब कोर इंजीनियरिंग फर्म के अलावा आइटी, आटोमोबाइल, ऊर्जा और पर्यावरण, परामर्श, फिनटेक, बैंकिंग, सेमीकंडक्टर, कंस्ट्रक्शन से कंपनियों ने अधिक जॉब ऑफर दिए हैं। पैकेज में 18 फीसद की वृद्धि बीटेक करने वाले विद्यार्थियों को 500 आफर मिले, जिसमें अभी तक 88 प्रतिशत छात्रों को नौकरियां मिल गई हैं। पिछले वर्ष की तुलना में जाब आफर में उच्चतम सैलरी पैकेज में 18 फीसद की वृद्धि हुई है। पहली बार पांच विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ की नौकरियां मिली हैं। औसत सैलरी में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। यह 27 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच गई। क्यूएस रैंकिंग सुधारने में लगेंगे पांच साल विद्यार्थियों को एक-एक करोड़ के जाब आफर जरूर मिले हैं लेकिन आईआईटी इंदौर की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में संस्थान को 556वां स्थान मिला है, जबकि वर्ष 2023 में यह 396वें स्थान पर था। बीते चार साल में रैंकिंग में 160 स्थानों की गिरावट आई है। आईआईटी इंदौर ने 34 देशों के साथ 118 एमओयू किए हैं और यहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थी तथा 220 फैकल्टी सदस्य हैं, लेकिन इसके बावजूद यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है। निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने माना है कि समस्या की पहचान हो चुकी है और सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि रिसर्च आउटपुट, पेटेंट और इनोवेशन पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संस्थान ने नई रणनीतियों पर काम शुरू किया है, जिसका असर दिखने में दो से पांच साल का समय लग सकता है। रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना, वैश्विक साझेदारी और छात्र विनिमय कार्यक्रम बढ़ाना इन प्रयासों का हिस्सा है।

राहत की बजाय संकट बनी मेट्रो! भोपाल में लोग परेशान इन 3 वजहों से

भोपाल पुराने शहर के सबसे व्यवस्त मार्गों में से एक बैरसिया पर करोंद चौराहा से सिंधी कालोनी तक मेट्रो की आरेंज लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। मेट्रो का काम करने के लिए कंपनी ने सड़क के बीचों-बीच बेरिकेड्स लगाए हैं, जिनकी वजह से सड़कों की चौड़ाई मुश्किल से 10 फिट की रह गई है। वहीं पसरा अतिक्रमण लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस वजह से हर दिन इस मार्ग पर घंटों तक लंबा जाम लग रहा है तो वहीं वर्षा के दौरान कीचड़, गड्ढे, जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके बाद भी मेट्रो प्रबंधन, नगर निगम, पुलिस, प्रशासन व्यवस्थाएं नहीं बना पा रहा है।   मेट्रो के लिए खड़े किए जा रहे हैं पिलर बैरसिया रोड पर मेट्रो की आरेंज रेल लाइन के पिलर खड़े किए जा रहे हैं। जिसके लिए यहां पर बेरिकेड्स लगाकर गड्ढों की खोदाई करने के साथ ही पिलर तक खड़े करने का काम चल रहा है। इस काम के शुरू होते ही कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नगर निगम, प्रशासन, पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों की चौड़ाई यदि कम हो गई है तो अतिरिक्त पट्टी बनाई जाए। सड़क किनारे व फुटपाथ पर पसरे ठेले, दुकानों के अवैध अतिक्रमण को प्रमुखता से हटाया जाए। जिससे वाहनों को आवागमन में समस्या न हो और जाम की स्थिति निर्मित न हो। कलेक्टर के निर्देश पर भी नहीं हुई कोई व्यवस्था कलेक्टर के निर्देश पर भी जिम्मेदार अधिकारी कोई व्यवस्था नहीं बना पाए हैं। नतीजतन इस मार्ग से हर दिन गुजरने वाले एक लाख से अधिक वाहन चालकों को जाम की समस्या से रूबरू होना पड़ रहा है। सड़क खोदाई कर मरम्मत तक नहीं की मेट्रो रेल लाइन के कार्य के दौरान करोंद से लेकर सिंधी कालोनी तक सड़क की खोदाई की गई थी लेकिन इसकी दोबारा से मरम्मत नहीं की गई है। वर्षा के दौरान उखड़ी सड़क पर जलभराव की स्थिति बनती है, गड्ढों से वाहनों को गुजरने में समय लगता है।ऐसे में यह लापरवाही भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती है। अतिक्रमण की बनी परेशानी बीच रास्ते में खड़े रहते हैं ई रिक्शा करोंद चौराहा, डीआइजी बंगला, काजी कैंप और सिंधी कालोनी क्षेत्र में मुख्य सड़क पर जगह कम बची है। इसके बाद भी यहां पर ई रिक्शा, ऑटो और आपे चालक अपना कब्जा जमाए रहते हैं। करोंद चौराहा के चारों तरफ इनका अतिक्रमण है, जिससे दो व चार पहिया वाहनों को निकलने के लिए जगह ही नहीं बचती है। फुटपाथ पर दुकान व ठेले वालों का कब्जा सड़क पर जाम की स्थिति निर्मित न हो इसके लिए अतिरिक्त पट्टी बनाई जानी थी लेकिन कुछ ही जगह बनाई गई थी। यह भी सफल नहीं हुई, क्योंकि करोंद चौराहा से लेकर सिंधी कालोनी तक फुटपाथ पर अवैध दुकानदारों व ठेले वालों ने अपना कब्जा जमा रखा है। वर्षा में उखड़ चुकी है सड़क इन पर पुलिस, प्रशासन, नगर निगम अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। सामांनतर रोड भी खस्ता हाल बैरसिया रोड पर यदि जाम लगता है तो लोग छोला फ्लाईओवर समानांतर रोड से होकर आवागमन कर सकते हैं लेकिन यह भी खस्ता हाल हो गई है। वर्षा में सड़क उखड़ चुकी है तो वहीं दुकानदारों, ठेले वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। करोंद मंडी मार्ग होने से इस पर भी जाम लग जाता है। लोग बोले सुबह-शाम रहती है आफत लांबाखेड़ा रहवासी विवेक गौर कहा कहना है कि करोंद चौराहा तक दो पहिया वाहन लेकर जाने से पहले भी सोचना पड़ता है। हालात यह हैं कि इतना लंबा जाम लग जाता है कि जेल रोड तक पहुंचने में ही आधे से एक घंटे तक लग जाते हैं। वहीं करोंद में एडवोकेट कृष्णा शर्मा ने कहा कि मेट्रो का कार्य तेजी से किया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार लोगों ने न तो सड़कें चौड़ी की और न ही इन पर पसरा अतिक्रमण हटाया है। यही कारण है कि आमजन हर दिन परेशान हो रहे हैं।  

उज्जैन का सुपर लीग श्रेणी में सम्मानित होना गर्व का विषय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार में मध्यप्रदेश एक बार फिर से गौरवान्वित होगा। उन्होंने बताया कि आगामी 17 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा मध्यप्रदेश के आठ शहरों को स्वच्छता की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने इस उपलब्धि पर सभी स्वच्छता कर्मी, नगरीय निकायों के महापौर, अध्यक्ष, पार्षद, अधिकारी और कर्मचारियों सहित नागरिकों को बधाई दी है। सुपर स्वच्छ लीग श्रेणी में इंदौर आठवीं बार होगा सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर शहर को स्वच्छता के लिए सुपर स्वच्छ श्रेणी लीग में आठवीं बार सम्मानित किया जाएगा। इंदौर पूर्व में सात बार देश के स्वच्छतम शहर का पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। विगत वर्षों में श्रेष्ठ प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर स्वच्छ लीग पुरस्कार इस वर्ष इंदौर को दिया जाएगा। उज्जैन को 3 से 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में स्वच्छ लीग पुरस्कार प्राप्त होगा, जो गर्व का विषय है। इसी प्रकार 20 हजार से कम आबादी वाले नगरों की श्रेणी में बुधनी नगर को भी सम्मानित किया जाएगा। देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में सम्मानित होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल प्राकृतिक सुंदरता के अलावा स्वच्छता के क्षेत्र में भी आदर्श बना है और इस आधार पर देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में सम्मानित होगा। विभिन्न श्रेणियों में ग्वालियर, देवास, शाहगंज और जबलपुर भी पुरस्कृत किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के इस मापदंड के आधार पर अपने घर, मोहल्ले, कॉलोनी और नगर को स्वच्छ रखें और इस आदर्श जीवन शैली को दुनिया के बीच प्रदर्शित करने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को नई दिल्ली से दुबई रवाना होने से पहले यह संदेश प्रदेशवासियों के नाम जारी किया।  

ग्वालियर से श्योपुर तक विस्तार, अगस्त में सबलगढ़ और साल के अंत तक श्योपुर तक पहुंचेगी ट्रेन

ग्वालियर उत्तर मध्य रेलवे द्वारा ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के तहत अगस्त माह में सबलगढ़ तक मेमू ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में यह ट्रेन कैलारस तक संचालित हो रही है, जबकि उससे आगे ट्रैक बिछाने और स्टेशनों के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। प्रयागराज स्थित मुख्यालय के अधिकारियों ने हाल ही में इस रूट का निरीक्षण किया है। अब रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) से फाइनल निरीक्षण कराया जाएगा। उनकी हरी झंडी मिलने के बाद अगस्त में मेमू ट्रेन सबलगढ़ तक दौड़ाई जाएगी। सबलगढ़ तक विद्युतीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है और इसे जुलाई के अंत तक पूरा करने की संभावना है। श्योपुर तक प्रोजेक्ट में हुई देरी ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज लाइन का पूरा निर्माण कार्य मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पहले यह काम दिसंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अब लक्ष्य बढ़ाकर दिसंबर 2026 कर दिया गया है। वीरपुर तक ट्रैक निर्माण कार्य अगस्त 2025 तक पूरा करने और ट्रेन संचालन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्वालियर के उप मुख्य अभियंता आकाश यादव और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ हाल ही में समीक्षा बैठक हुई, जिसमें कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। रेलवे ट्रैक के लिए भूमि अधिग्रहण और भवनों के मुआवजे के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया भी जारी है। यात्रियों को होगा सीधा लाभ सबलगढ़ से मुरैना की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। फिलहाल यात्रियों को जौरा और मुरैना तक पहुंचने के लिए 50 से 70 रुपये तक का किराया और अधिक समय खर्च करना पड़ता है। मेमू ट्रेन शुरू होने से किराया भी कम होगा और समय की बचत भी होगी। आठ नए स्टेशन भी बनेंगे इस प्रोजेक्ट के तहत पुल-पुलियों के साथ आठ नए स्टेशन भी बनाए जाएंगे। ये स्टेशन हैं: वीरपुर, श्यामपुर, इकडोरी, टर्राकला, सिरोनीरोड, खोजीपुरा, दुर्गापुरी, गिरधपुर और श्योपुर।

इंदौर-निजामुद्दीन वंदे भारत ट्रायल की तैयारी, इस स्पीड से दौड़ेगी हाईटेक ट्रेन

इंदौर  जुलाई में इंदौर-निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस का परीक्षण हो सकता है। यह प्रक्रिया पलवल (हरियाणा) से मथुरा स्टेशन (87 किमी) के बीच होगी। इस हिस्से में कवच प्रणाली भी लगी है। इस ट्रेन का पांच से सात मिनट तक आगरा कैंट में ठहराव होगा। छह महीने पहले इंदौर से वंदे भारत की मांग उठी थी। रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। इसी बीच कवच की उपयोगिता की जांच भी की जाएगी। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि नया रैक नई दिल्ली आ चुका है। जल्द ही इंदौर-निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के दौरान छह से आठ कोच लगाए जाएंगे। फिलहाल परीक्षण की तारीख नहीं हुई है। रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद ट्रायल होगा। ट्रेन की अधिकतम गति 160 किमी प्रतिघंटा होगी। औसत गति 120 से 130 किमी प्रतिघंटा तक होगी।   इंदौर और दिल्ली के बीच यात्रियों को नई सुविधा मिलेगी बता दें कि फिलहाल इंदौर से नागपुर तक एक ही वंदे भारत चलाई जा रही है। ये इंदौर के प्लेटफार्म-1 से सुबह 6.10 चलकर भोपाल सुबह 9.10 बजे और नागपुर दोपहर 2.30 बजे पहुंचती है। इसी प्रकार नागपुर से दोपहर 3.20 चलकर भोपाल रात रात 8.38 बजे और इंदौर रात रात 11.50 बजे पहुंचती है। सांसद शंकर लालवानी के मुताबिक हमने छह महीने पहले केंद्रीय रेल मंत्री से इस ट्रेन की मांग की थी। इस ट्रेन के चलने से इंदौर-नई दिल्ली के बीच यात्रियों को नई ट्रेन की सुविधा मिलेगी। ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाती है प्रणाली भारतीय रेलवे द्वारा स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है, जिसका नाम कवच रखा गया है। यह प्रणाली सिग्नलों को पार करने और टक्कर से बचने जैसी मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करती है। कवच प्रणाली लोको पायलट को खतरे के संकेतों को पार करने और तेज गति से गाड़ी चलाने से रोकने में मदद करती है। खराब मौसम में भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में सहायता करती है।

नीति का इंतजार, हादसों का सिलसिला जारी: इंदौर में ई-रिक्शा बना संकट

इंदौर कुछ वर्ष पहले जब शहर में ई-रिक्शा का चलन शुरू हुआ था तो शहरवासियों को उम्मीद थी कि उन्हें आवागमन के लिए प्रदूषण रहित साधन मिल गया। न वाहन की कर्कश आवाज सुनाई देगी न इससे निकलने वाला काला धुआं नजर आएगा। ऐसा हुआ भी, लेकिन राहत के नाम पर शुरू हुई सुविधा शहरवासियों के लिए अब परेशानी का सबब बन गई है। शहर में ई-रिक्शा की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी कि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया। राजवाड़ा जैसा सघन क्षेत्र जहां पैदल चलना भी मुश्किल है वहां ये ई-रिक्शा बेखौफ होकर सड़क पर मंडराते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता। राजवाड़ा पर तो पुलिस चौकी के समीप जिम्मेदारों की आंखों के सामने ही अस्थाई ई-रिक्शा स्टैंड बन गया है। आज हालत यह है कि जिस गली, मोहल्ले, कालोनी, सड़क पर पर निकल जाओ, ई-रिक्शा ही नजर आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने के लिए आज तक कोई नीति नहीं बनी। इतना ही नहीं न तो इनके लिए कोई रूट प्लान तैयार किया गया न और न कभी किराया नियंत्रित करने का प्रयास हुआ। ऐसा नहीं कि जिम्मेदारों ने कागजों पर ई-रिक्शा को नियंत्रित करने का प्रयास न किया हो, लेकिन ये प्रयास कभी कागजों से निकलकर मैदान में नजर नहीं आए।   बाहर हजार से ज्यादा ई-रिक्शा करीब छह माह पहले महापौर ने खुद सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि राजवाड़ा क्षेत्र ई-रिक्शा मुक्त होगा, लेकिन घोषणा भी हवा में उड़ गई और कुछ नहीं हुआ। परिवहन विभाग के अनुसार शहर में वर्तमान में बारह हजार से ज्यादा ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। हाई कोर्ट खुद परिवहन विभाग, जिला प्रशासन और नगर निगम को ई-रिक्शा की वजह से शहरवासियों को हो रही परेशानी को लेकर फटकार लगा चुका है, बावजूद इसके कुछ नहीं हुआ। कुछ वर्ष पहले जब शहर में ई-रिक्शा शुरू हुए थे तो लोग उन्हें अचरज भरी नजर से देखते थे। आज हालत यह है कि ई-रिक्शा देखते ही शहरवासियों को कोफ्त होने लगती है। जहां सवारी ने हाथ दिया, वहीं रिक्शा रोक दिया 22 जुलाई को कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और निगमायुक्त को व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर बताना है कि यातायात सुधार के लिए उन्होंने क्या उपाय किए? आदेश को एक सप्ताह होने को आया है, लेकिन मजाल है शहर के यातायात में रत्तीभर भी कोई सुधार हुआ हो। जनप्रतिनिधियों का भी आलम यह है कि रोजाना नई-नई घोषणा कर रहे हैं, लेकिन शायद ही कोई घोषणा मूर्तरूप ले पाती हो। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कुंभकर्णीय नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। ई-रिक्शा चालक प्रदूषण न फैलाने के नाम पर मिली छूट का फायदा उठाकर ट्रैफिक को बद से बदतर बना रहे हैं। जहां सवारी ने हाथ दिया, वहीं रिक्शा रोक दिया, चाहे पीछे से आ रहे वाहन चालक दुर्घटना का शिकार ही क्यों न हो जाएं। पिछले साल 26 रूट तय किए गए थे राजवाड़ा पर तो मनमर्जी का आलम ये है कि भले ही दो पहिया वाहन को जाने की जगह न मिलें, लेकिन इन्हें अपने वाहन खड़े करने की इतनी जल्दी होती है कि चाहे इनके कारण वाहनों की कतार लग जाए। इन्हें अपनी हिसाब से ही चलना है। पिछले साल प्रशासन ने इन पर सख्ती कर इनके 26 रूट तय किए थे, लेकिन संचालकों के विरोध के बाद सख्ती हवा में उड़ गया। इतना ही नहीं जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस व आरटीओ ने भी अपनी जिम्मेदारी से हाथ खीच लिया है। इस अनदेखी का खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है। जनता के लिए एक अच्छी सुविधा परेशानी का सबब बन गई है।

UPSC CAPF 2024: अभ्युदय योजना के 14 छात्रों ने रचा सफलता का इतिहास

लखनऊ उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने एक बार फिर सफलता के प्रतिमान गढ़े हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 2024 की परीक्षा में योजना से जुड़े 14 अभ्यर्थियों ने सफलता का परचम लहराया है। इन अभ्यर्थियों में श्याम यादव ने ऑल इंडिया दूसरी रैंक प्राप्त कर प्रदेश और योजना दोनों का मान बढ़ाया है। यूपी के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी और कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार अभ्युदय योजना आज प्रदेश के युवाओं के सपनों को पंख दे रही है। सरकार उत्तर प्रदेश, सक्षम युवा की सोच को साकार करती मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज युवाओं के लिए एक परिवर्तनकारी पहल बन चुकी है।” समाज कल्याण अधिकारी पवन यादव ने बताया कि श्याम यादव के साथ-साथ अन्य सफल अभ्यर्थियों में प्रतीक वर्मा (रैंक 61), अभिषेक मिश्रा (77), अनूप कुमार (106), सत्यपाल सिंह यादव (133), दिव्या सिंह परिहार (166), हिमांशु मौर्या (197), मितेंद्र श्रीवास्तव (208), रोहित वर्मा (224), ललित सिंह (225), हिमांशु सिंह (297), मंगलदीप पाल (313), रुपाली सिंह (365) और शिवम आनंद (379) शामिल हैं। ऑल इंडिया सेकंड रैंक प्राप्त करने वाले श्याम यादव ने कहा, “मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से जुड़ने के बाद मुझे विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, मॉक इंटरव्यू और उत्तम स्टडी मटेरियल मिला। योजना ने मेरी दिशा भी तय की और आत्मविश्वास भी बढ़ाया।” वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई यह योजना आज प्रदेश के 75 जिलों में 166 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य आईएएस, पीसीएस, नीट, जेईई, एनडीए, सीडीएस, सीयूइटी और सीएपीएफ जैसी परीक्षाओं के लिए समाज के हर वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण कोचिंग देना है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से चल रही इस योजना से अब तक 87,000 से अधिक युवा लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें से 1,100 से ज्यादा अभ्यर्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हुए हैं। योजना को सफल बनाने में संयुक्त निदेशक सुनील कुमार विशेन, पी.के. त्रिपाठी और उपनिदेशक सुनीता यादव की भूमिका सराहनीय रही है।   

विदेश में सॉफ्टबॉल का दम दिखाएंगी छत्तीसगढ़ की शेरनियाँ

बीजापुर की चंद्रकला और जांजगीर-चांपा की शालू एशिया कप सॉफ्टबॉल चौंपियनशिप में रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार राज्य के युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, खेल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेष अवसर उपलब्ध करा रही है। छत्तीसगढ़ की बेटियाँ आज खेल के मैदान से लेकर हर क्षेत्र में अपनी मेहनत, निष्ठा और जज्बे से नया इतिहास रच रही हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग और प्रोत्साहन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बीजापुर जिले की धरती एक बार फिर खेल जगत में अपनी प्रतिभा का परचम लहराने जा रही है। जिले के आवापली गांव की होनहार खिलाड़ी चंद्रकला तेलम का चयन भारतीय सॉफ्टबॉल टीम में एशिया कप सॉफ्टबॉल चौंपियनशिप 2025 के लिए हुआ है।  जो 14 से 20 जुलाई तक शियान, चीन में आयोजित होगी। चंद्रकला के साथ ही जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ की शालू डहरिया भी भारतीय टीम का हिस्सा होंगी, जो पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है।     खास बात यह है कि भारतीय टीम के कोच के रूप में बीजापुर जिले के श्रम निरीक्षक  सोपान कर्णेवार की नियुक्ति हुई है। इससे पहले भी श्री कर्णेवार के कोचिंग में जिले के अनेक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं। भारतीय टीम का गठन कई कठिन चयन परीक्षाओं के बाद हुआ है। चंद्रकला तेलम को अनंतपुर (आंध्र प्रदेश), नागपुर, श्रीनगर एवं इंदौर में आयोजित चयन परीक्षण और विशेष कोचिंग कैंप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चुना गया है। भारतीय दल को नई दिल्ली में अंतिम प्रशिक्षण के बाद 13 जुलाई को शियान, चीन के लिए रवाना किया जाएगा।     बीजापुर और जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर ने भी टीम को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। गौरतलब है कि इस टूर्नामेंट की विजेता एवं उपविजेता टीम को वर्ल्ड कप सॉफ्टबॉल चौंपियनशिप में भाग लेने का अवसर मिलेगा।चंद्रकला और शालू डहरिया की यह उपलब्धि जिले की अन्य बेटियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा- मन लगाकर पढ़ाई करें, सरकार सभी सुविधाएँ उपलब्ध करायेगी

भोपाल  जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने रविवार को खंडवा जिले के खालवा विकासखंड के ग्राम जामनी गुर्जर स्थित कन्या शिक्षा परिसर में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें, सरकार सभी सुविधाएँ उपलब्ध करायेगी। उन्होंने छात्राओं के साथ बैठकर भोजन किया और उनकी समस्याएँ सुनी। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जिले के तीनों कन्या शिक्षा परिसरों में ब्लैक बोर्ड या ग्रीन बोर्ड के स्थान पर "डिजिटल बोर्ड" स्थापित कराए जाएंगे और कन्या शिक्षा परिसरों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्राओं को रोजगार मूलक प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, जिससे वह पढ़ाई के बाद स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि ग्राम आवलिया में संस्कृति व संस्कार का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कन्या शिक्षा परिसर के लिए बड़े वाहनों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे छात्राओं को आसपास के दर्शनीय स्थल तथा उच्च शिक्षण संस्थानों का भ्रमण भी कराया जा सके। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि जनजातीय वर्ग की छात्राओं की सुविधाओं के लिए "शालिनी ऐप" तैयार किया गया है, जिसमें छात्रावासों में प्रवेश या छात्रवृत्ति भुगतान जैसी सभी समस्याओं के निराकरण की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता है, उन्हें गांव से शहर जाकर पढ़ने के लिए कमरा किराए पर लेने के लिए सरकार आर्थिक मदद दे रही है। मंत्री डॉ. शाह ने सहायक आयुक्त को निर्देश दिए कि कन्या शिक्षा परिसर की छात्राओं को पॉलिटेक्निक कॉलेज और आईटीआई का भी भ्रमण कराया जाए, जिससे वे तकनीकी शिक्षा और रोजगार मूलक पाठ्यक्रम के बारे में जान सकें। उन्होंने कहा कि ग्राम सेल्दा में "खेल प्रशिक्षण परिसर" स्थापित किया जाएगा, जिसमें छात्राओं को उच्च स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध होगी। यहां जनजातीय छात्राओं की खेल प्रतिभा को तराशा जाएगा। इस खेल परिसर में जनजातीय बहुल गांव की छात्राएं अपनी खेल प्रतिभा को और निखार सकेंगी। मंत्री डॉ. शाह ने इस अवसर पर छात्राओं से कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रदेश के ऐसे आईएएस अधिकारी जो सरकारी छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर चुके हैं, उन्हें सरकारी छात्रावासों के भ्रमण पर भेजा जाएगा, जिससे वे छात्रवासों में रहने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित कर सकें। मंत्री डॉ. शाह ने अधीक्षक को निर्देश दिए कि छात्राओं की उनके माता-पिता से हर सप्ताह चर्चा कराते रहें, जिससे यदि कुछ समस्या या परेशानी हो तो वे अपने माता-पिता को बता सकें।  

परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2025: रायगढ़ जिला बना देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता

तीसरी, छठवीं और नवमीं सभी कक्षाओं में राष्ट्रीय औसत से बेहतर परिणाम ग्रामीण छात्रों और बालिकाओं ने दिखाया श्रेष्ठ प्रदर्शन रायपुर, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा हर चार वर्ष में आयोजित होने वाले परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2025 में रायगढ़ जिले ने राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उत्कृष्टता साबित की है। दिसंबर 2024 में आयोजित इस सर्वेक्षण में रायगढ़ जिले के 91 स्कूलों के 325 शिक्षक और 2728 विद्यार्थी शामिल हुए थे। जिले के छात्रों ने कक्षा तीसरी, छठवीं और नवमीं तीनों स्तरों पर सभी विषयों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करते हुए जिले को ‘उदित’ श्रेणी में शामिल कराया है। इस सर्वेक्षण में शासकीय, मान्यता प्राप्त अशासकीय तथा अनुदान प्राप्त विद्यालयों के विद्यार्थियों को बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से आंका गया। रायगढ़ जिले में यह अभियान कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी और सीईओ जिला पंचायत श्री जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में संचालित किया गया, जिसका परिणाम सभी स्तरों पर अत्यंत सराहनीय रहा। कक्षा तीसरी में भाषा विषय में रायगढ़ का औसत 70 प्रतिशत रहा, जो राष्ट्रीय औसत 64 प्रतिशत और राज्य औसत 59 प्रतिशत से कहीं अधिक है। गणित में भी रायगढ़ ने 68 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि राष्ट्रीय औसत 60 और राज्य औसत 57 प्रतिशत रहा। कक्षा छठवीं में भाषा में 64 प्रतिशत, गणित में 56 प्रतिशत और ‘आस-पास की दुनिया’ विषय में 59 प्रतिशत के साथ रायगढ़ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वहीं कक्षा नवमीं में भाषा विषय में 60 प्रतिशत, गणित में 39 प्रतिशत, विज्ञान में 43 प्रतिशत और सामाजिक विज्ञान में भी 43 प्रतिशत के साथ जिले ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर परिणाम दर्ज किए। इन आंकड़ों के आधार पर रायगढ़ को परख सर्वेक्षण की चार स्तरीय श्रेणी में ‘उदित वर्ग में स्थान मिला है। यह श्रेणी केवल उन जिलों को प्रदान की जाती है, जिन्होंने तीनों कक्षाओं में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया हो। रायगढ़ के साथ तीसरी कक्षा में बालोद, बलरामपुर, बीजापुर, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर और सरगुजा, छठवीं में बलरामपुर, बस्तर, बीजापुर और सरगुजा तथा नवमीं में बस्तर, बीजापुर, बिलासपुर, धमतरी और दुर्ग जिले भी इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों से यह भी सामने आया है कि रायगढ़ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों का परिणाम शहरी क्षेत्रों से बेहतर रहा। इसके अलावा, बालिकाओं का प्रदर्शन भी बालकों की तुलना में तीनों कक्षाओं में अधिक बेहतर रहा है, जो जिले में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संकेत है।