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चूरू: जगुआर फाइटर जेट क्रैश में दोनों पायलट शहीद, जांच के आदेश जारी

चूरू राजस्थान के चूरू ज़िले में इंडियन एयरफोर्स का जगुआर ट्रेनर विमान ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई. इस घटना को लेकर भारतीय वायुसेना ने गहरा दुख जताया है. साथ ही हादसे की वजह का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (आंतरिक जांच) के आदेश दे दिए गए हैं. ये जांच इस बात की विस्तृत समीक्षा करेगी कि विमान दुर्घटनाग्रस्त कैसे हुआ. भारतीय वायुसेना ने X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि वह इस कठिन समय में शोकाकुल परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है. वायुसेना ने कहा कि हम बहादुर पायलटों की शहादत को सलाम करते हैं और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं. जोरदार धमाके के बाद उठी आग की लपटें प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्लेन का मलबा एक खेत में मिला है, साथ ही मानव अंग भी बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं. हादसे के तुरंत बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि एक जोरदार धमाका सुनाई दिया, इसके बाद धुआं और आग की लपटें उठती देखीं. ग्रामीणों ने खेतों में लगी आग को बुझाने की कोशिश भी की. दोपहर 1:25 बजे हुआ हादसा स्थानीय पुलिस अधिकारी कमलेश ने बताया कि विमान दोपहर करीब 1:25 बजे गिरा. हादसे के बाद जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं. साथ ही सेना की राहत और जांच टीम के भी जल्द ही घटनास्थल पर पहुंचने की उम्मीद है. वहीं, भारतीय वायुसेना ने कहा कि हादसे के वक्त विमान ट्रेनिंग पर था.  भारतीय वायुसेना ने दी ये जानकारी भारतीय वायुसेना ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक यह दुर्घटना उस समय हुई जब लड़ाकू विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था। इस दुर्घटना में दोनों पायलटों को गंभीर चोटें आईं। किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वायुसेना इस दुखद घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करती है और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई है। हादसे के बाद कैसा था मंजर राजस्थान में वायुसेना के कई अड्डे हैं, जिनमें जोधपुर और बीकानेर में प्रमुख प्रतिष्ठान हैं। घटना के तुरंत बाद इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने बताया कि आसमान से तेज़ आवाज़ सुनाई दी, जिसके बाद खेतों से आग और धुआं उठता दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया कि दुर्घटना के कारण आस-पास के खेतों में आग लग गई, जिसे उन्होंने खुद बुझाने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी ने कही ये बात जिला कलेक्टर अभिषेक सुराना और पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचे। सेना का एक बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुंच गया है। दुर्घटना के सही कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। सेना अपनी प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद आधिकारिक बयान जारी करेगी। स्थानीय पुलिस अधिकारी राजलदेसर कमलेश ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि विमान दोपहर करीब 1.25 बजे भनोदा गांव के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। उन्होंने बताया कि दुर्घटनास्थल के पास मानव शरीर के अंग मिले हैं। प्लेन क्रैश होने के बाद क्या होता है     बता दें कि किसी भी प्लेन क्रैश के बाद सबसे पहले इमरजेंसी सर्विस को एक्टिव कर दिया जाता है।           उस एरिया को पुलिस सील कर देती है और किसी को भी उस जगह पर जाने की इजाजत नहीं होती है। कोई भी घटनास्थल तक नहीं जा सकता है।            इसके बाद एजेंसियां विमान हादसे की जांच करती हैं और मलबे का निरीक्षण करती हैं।            इसके बाद फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जैसे उपकरणों की खोज की जाती है, जिससे कि यह पता लगाने की कोशिश की जा सके कि विमान क्यों क्रैश हुआ था। क्रैश हुए विमान के मलबे का क्या होता है ?      विमान हादसे के बाद उसका मलबा दूर तक जाकर गिरता है।            अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में प्लेन क्रैश होकर बिल्डिंग पर जा गिरा था और उसका आधा हिस्सा बिल्डिंग पर था और बाकी का हिस्सा जमीन पर गिरा था।           मलबे में से ब्लैकबॉक्स खोजने की कोशिश की जाती है।           सबसे पहले तो मलबे का इस्तेमाल जांच में किया जाता है, लेकिन उसके बाद उसे ऐसे ही नहीं छोड़ दिया जाता है।            जो भी एजेंसियां उस विमान दुर्घटना की जांच करती हैं, वे मलबे में जो पुर्जे काम के होते हैं, उनको खोलकर अलग कर लेती हैं।           इसके बाद लैब में उनकी जांच की जाती है, जिससे कि यह देखा जा सके कि वे दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं या नहीं।           जो भी काम का मलबा नहीं होता है, उसको नीलाम कर दिया जाता है।   5 महीने में तीसरा हादसा बता दें कि पिछले 5 महीने में तीसरी बार जगुआर प्लेन दुर्घटना का शिकार हुआ है. इससे पहले 7 मार्च को अंबाला में और 2 अप्रैल को गुजरात के जामनगर में जगुआर ट्रेनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. अंबाला में पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा था, लेकिन जामनगर हादसे में एक पायलट की मौत हो गई थी. सीएम भजनलाल ने जताया दुख राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी हादसे पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का दुखद समाचार प्राप्त हुआ. घटना के तुरंत बाद से प्रशासन अलर्ट मोड पर है और राहत-बचाव कार्य के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति दें.

लापता चार मासूम बच्चों की पानी भरे गड्ढे में मिली लाश

मेजा/प्रयागराज मेजा इलाके के बेदौली गांव से लापता चार मासूम बच्चों की बुधवार सुबह घर से कुछ ही दूरी पर पानी भरे गड्ढे में लाश उतराती हुई मिली तो सनसनी फैल गई। चारों बच्चों में दो भाई-बहन हैं। बाकी दो पड़ोसी हैं। सूचना पर मौके पर एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय के साथ मेजा थाना अध्यक्ष राजेश उपाध्याय पहुंच गए। चारों बच्चों के शव को पहले सीएचसी रामनगर ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। घर में कोहराम मचा हुआ है।   मेजा थाना क्षेत्र के बेदौली गांव के आदिवासी बस्ती के ज्यादातर लोग गांव में स्थित ईंट भट्ठा या मनरेगा में मजदूरी का काम करते हैं। उनकी बस्ती के पास ही ईंट भट्ठा संचालित होता है। ईंट भट्ठा संचालक द्वारा मिट्टी निकालने के चक्कर में बड़ा गड्ढा कर दिया गया है। जिसमें बारिश का पानी भरा हुआ है। मंगलवार शाम तीन बजे बस्ती के लोग मनरेगा के काम में चले गए थे। शाम पांच जब बस्ती के लोग घर आए तो हीरा आदिवासी का बेटा हुनर (5), हीरा आदिवासी की बेटी वैष्णवी (3), संजय आदिवासी का बेटा खेसारी लाल (5) और विमल आदिवासी का बेटा कान्हा (5) वर्ष घर से लापता थे। इन चारों बच्चों की खोजबीन पूरी बस्ती के लोग काफी देर तक किए लेकिन कुछ भी पता नहीं चल सका। मेजा पुलिस ने रात में ही चारों बच्चों के लापता होने पर गुमशुदगी दर्ज कर खोजबीन शुरू की थी, लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। बुधवार सुबह छह बस्ती के लोगों की निगाह ईंट भट्ठा के बगल पानी भरे गड्ढे पर गई तो वहां पर चारों मासूम बच्चों की लाश उतरती हुई दिखी। ऐसे में सनसनी फैल गई। घर में कोहराम मच गया। बस्ती के लोगों ने चारों बच्चों की उतराती हुई लाश को बाहर निकाल लिया। सूचना पर एसीपी मेजा, एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप यादव सहित कई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक चारों बच्चे खेलते खेलते पानी भरे गड्ढे में चले गए। जिससे चारों मासूम बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने चारों बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसडीएम मेजा ने बताया की चारों बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए सहायता के रूप में दिया जाएगा। मेजा थाना क्षेत्र के बेदौली गांव में पानी में डूबने से जिन चार बच्चों की मौत हुई है उसमें दो बच्चे सगे भाई बहन हैं। यह बच्चे हीरा आदिवासी के हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।  घटना के बाद बस्ती में कोहराम मचा हुआ। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। परिवार के लोगों से घटना के बारे में जानकारी ली।  

माधव को आज बड़ी सौगात मिली, खदान खोदी और पहले ही दिन पहली ही बार में हीरा मिलने के साथ ही उसकी किस्मत भी चमक उठी

 पन्ना मध्य प्रदेश में हीरे उगलने वाली नगरी पन्ना की धरती कब किसकी किस्मत पलट दे और कब किसे रंक से राजा बना दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ  देखने को मिला, जब माधव आदिवासी नाम के सामान्य मजदूर की किस्मत पलट गई और वह अचानक लखपति बन गया। पन्ना की कृष्णा कल्याणपुर पट्टी की उथली खदान में मजदूरी करने वाले आदिवासी युवक माधव को आज उस वक्त बड़ी सौगात मिली, जब उसने किस्मत आजमाने के लिए पहली बार खदान खोदी और पहले ही दिन पहली ही बार में हीरा मिलने के साथ ही उसकी किस्मत भी चमक उठी। इस मजदूर ने  खदान की खुदाई चालू की थी और पहले ही दिन उसे 11 कैरेट 95 सेंट का उज्ज्वल किस्म का बेशकीमती हीरा मिल गया। 40 लाख रुपए से भी ज्यादा है कीमत इस बारे में जानकारी देते हुए हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि माधव को मिला हीरा बेहद साफ और कीमती है, साथ ही उन्होंने बताया कि इस हीरे की अनुमानित कीमत 40 लाख रुपए से भी ज्यादा आंकी जा रही है। हीरा मिलने के बाद माधव मजदूर ने इसे नियम के अनुसार पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कर दिया। पटेल ने आगे की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अब यह हीरा आगामी नीलामी में जाएगा और नीलामी की रकम में से 12.5% रॉयल्टी काटकर बाकी रकम माधव को दी जाएगी। माधव को मिले इस हीरे से ना केवल एक साधारण आदिवासी मजदूर की जिंदगी बदल जाएगी, बल्कि इसके साथ ही उसने अपने हौसले और मेहनत से वहां काम कर रहे अपने जैसे लाखों मजदूरों के मन में भी इसी तरह की उम्मीदें जगा दी हैं। पन्ना की धरती से हर दिन ऐसे चुनिंदा भाग्यशाली लोगों की झोली में हीरे डालकर उनके सपने पूरे करती है।

छत्तीसगढ़ राज्य को डीएमएफ संबंधी उत्कृष्ट कार्यों के लिए भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा किया गया सम्मानित

रायपुर  भारत सरकार के खान मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। आज नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक दिवसीय “नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप” के दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री पी. दयानंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। खान मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना द्वारा नेशनल डीएमएफ पोर्टल में समस्त राज्यों के डीएमएफ से संबंधित डेटाबेस का संधारण किया जा रहा है। डीएमएफ के ऑडिट रिपोर्ट का राज्य डीएमएफ पोर्टल एवं नेशनल डीएमएफ पोर्टल में 90 प्रतिशत डेटाबेस पूर्णतः अपलोड किए जाने पर छत्तीसगढ़ राज्य को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को मॉडल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और अन्य राज्यों को भी डेटा अपलोडिंग, पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन के अनुकरण की सलाह दी गई। उल्लखेनीय है कि नेशनल डीएमएफ  कार्यशाला का आयोजन प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना एवं डीएमएफ की प्रभावशीलता को बढ़ाने और खनन क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से सचिव, संचालक एवं खनन प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, अधोसंरचना एवं आजीविका जैसे विविध क्षेत्रों में समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य में अब तक 16,506 करोड़ रुपये की लागत से 1,01,313 विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 70,318 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य शासन द्वारा डीएमएफ के क्रियान्वयन में पारदर्शी और जनहितकारी दृष्टिकोण को अपनाते हुए, प्रत्येक जिले में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों की योजना और निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। यह नीति न केवल भौतिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण को भी लक्ष्य में रखती है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव, खनिज साधन विभाग श्री पी. दयानंद, संचालक श्री रजत बंसल के साथ बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा, कोरबा, रायगढ़ एवं दंतेवाड़ा जिलों के कलेक्टर्स एवं डीएमएफ के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भजनलाल बोले – अंतिम पायदान के व्यक्ति के सशक्तीकरण के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से समर्पित

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश के हर व्यक्ति-हर परिवार को सशक्त और समृद्ध बनाते हुए उनकी सेवा करना हमारी सरकार का सर्वोच्च ध्येय है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा इसी दिशा में हमारा एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरे समर्पण और निष्ठा से काम कर रही है। शर्मा मंगलवार को बीकानेर में श्रीडूंगरगढ़ के गुसांईसर बड़ा गांव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल शिविर के अंतर्गत आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान से ही देश-प्रदेश का समग्र विकास संभव है। उनकी इस भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने वंचितों को वरीयता देते हुए अपनी नीति एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा इसी रूपरेखा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिविर में हो रहे तत्परता से कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में 24 जून से 9 जुलाई तक चलने वाले इस पखवाड़े के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, युवा, महिला एवं मजदूर सहित सभी वर्गाें को लाभान्वित किया जा रहा है। इन शिविरों में नामांतरण, बंटवारे, रास्ते के प्रकरण, पशु टीकाकरण, पानी टंकियों की सफाई, लीकेज मरम्मत, बिजली के झूलते तारों का दुरूस्तीकरण जैसे कई जरूरत के काम तत्परता से किए जा रहे हैं। जिनसे आमजन को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं। महिलाओं-युवाओं के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध राज्य सरकार श्री शर्मा ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य की डबल इंजन की सरकार प्रदेश में हर वर्ग और हर क्षेत्र का विकास तेजी से कर रही है। महिला कल्याण को प्रमुख प्राथमिकता देते हुए नीतियों एवं योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ो प्रोत्साहन योजना, मेधावी छात्राओं को साइकिल वितरण, कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना आदि के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। श्री शर्मा ने कहा कि युवाओं के रोजगार के सपने को पूरा करने के लिए राज्य सरकार कृतसंकल्पित है। हमने डेढ़ वर्ष के अल्प कार्यकाल में 69 हजार पदों पर नियुक्तियां दी है और लगभग 1 लाख 88 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल में पेपरलीक का एक भी प्रकरण सामने नहीं आया है।   किसानों के कल्याण के लिए उठाए महत्वपूर्ण कदम मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए गोपाल क्रेडिट कार्ड और किसान सम्मान निधि जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाया। साथ ही, किसानों की मांग के अनुरूप मूंगफली की खरीद के लिए निर्धारित समय को भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए हम रामजल सेतु लिंक परियोजना (ईआरसीपी) और यमुना जल समझौता पर तेजी से कार्य कर रहे हैं। साथ ही, हमने इंदिरा गांधी और गंगनहर परियोजना के विकास कार्य के लिए भी 4 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। वहीं, हम किसानों को वर्ष 2027 तक दिन के समय में बिजली उपलब्ध कराने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। जरूरतमंद का हो रहा आर्थिक सशक्तिकरण श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने पंडित दीनदयाल गरीबी मुक्त गांव योजना की पहल की है जिसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों को बीपीएल श्रेणी से बाहर निकाला जाएगा। इसके अंतर्गत पांच हजार गांवों को बीपीएल मुक्त किया जा रहा है। वहीं, 10 हजार गांवों में बीपीएल परिवारों का सर्वे और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में लाभान्वितों का दायरा बढ़ाते हुए 51 लाख पात्र परिवारों को जोड़ा है। हमारी सरकार बनाएगी श्रीडूंगरगढ़ में ट्रोमा सेंटर इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्रीडूंगरगढ़ में ट्रोमा सेंटर के निर्माण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए भी आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बिना बजट के ट्रोमा सेंटर की घोषणा की थी। श्री शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते और उन्होंने सिंधु जल समझौते को निरस्त कर कड़ा संदेश दिया। समारोह में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी, ताराचंद सारस्वत, विश्वनाथ मेघवाल, अंशुमान सिंह भाटी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन

अनूपपुर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर श्रीमती माया विश्वलाल के निर्देशानुसार नालसा (बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 एवं नालसा (डीएडब्ल्यूएन-नशा मुक्त भारत के लिए नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता और कल्याण मार्गदर्शन) योजना, 2025 के संबंध में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमगवां, सरस्वती शिशु मंदिर अमगवां, शासकीय हाईस्कूल मौहरी, सोनम सिंधु शिशु पूर्व मा. विद्यालय मौहरी एवं शासकीय पूर्व मा.वि. सेन्दुरी में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविरों में न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर विनोद कुमार वर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी बृजेश पटेल, पैरालीगल वालेंटियर सहित विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण, विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं योजना शारीरिक और मानसिक अपरिपक्वता के आधार पर बच्चों को विशेष देखभाल और सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे या कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे विशेष रूप से कमजोर होते है और उन्हें विशेष सुरक्षा और सहायता की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, यह योजना ऐसे बच्चों के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं को नेविगेट करने में मदद करने के लिए बच्चों के अनुकूल कानूनी सेवाओं तक पहुंच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी  बृजेश पटेल ने डीएडब्ल्यूएन-नशा मुक्त भारत के लिए नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता और कल्याण मार्गदर्शन योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना नशा मुक्त भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना, नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना, नशा पीड़ितों को उपचार और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना एवं एक स्वस्थ और नशा मुक्त समाज का निर्माण करना है।    

जांजगीर चांपा में कुएं में पानी के ऊपर तैरती मिली सीलबंद सरकारी दवाइयां, पशु चिकित्सा विभाग का कारनामा

जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पशु चिकित्सा विभाग ने बीमार पशुओं के लिए मिली सरकारी दवाइयों को कुएं में डाल दिया। यहां कुएं में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां पानी के ऊपर तैरती मिली हैं। बताया जा रहा है कि शासन से मिली लाखों की दवाइयों को पशु पालकों को बांटने के बजाए कुएं में फेंक दिया गया है। माना जा रहा है कि यहां दवाई खरीदी में हुई गड़बड़ियों को छिपाने के लिए ऐसा किया गया है। हालांकि, अब मामला सामने आने पर अधिकारी जांच कराने का दावा कर रहे हैं। दरअसल, पशु पालकों की सुविधा और जानवरों के इलाज के लिए हर साल शासन करोड़ों रुपए खर्च करती है। पशुओं के लिए निशुल्क दवा वितरण की योजना भी है। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य शासन से दवाइयों की सप्लाई की जाती है। इसके अलावा जिला स्तर पर भी दवाइंयों की खरीदी की जाती है। ताकि, पशु पालकों के लिए दवाइयों की कमी न हो। बताया जा रहा है कि जिले में पशु चिकित्सा विभाग से मिली सरकारी दवाइयों के अलावा जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर दवाइयों की खरीदी कर ली गई थी। इन दवाइयों का वितरण सरकारी अस्पतालों में किया जाना था। इनमें ऐसी दवाइयों की खरीदी कर ली गई, जिसका जिले में कोई उपयोग ही नहीं है। यही वजह है कि खरीदी के बाद दवाइयां कार्यालय में पड़ी रह गई और एक्सपायरी हो गई। पशु चिकित्सा विभाग के परिसर में है कुआं जिला मुख्यालय के कचहरी चौक में पशु चिकित्सा विभाग का दफ्तर है। यहां परिसर में ही कुआं है। आमतौर पर कुएं पर लोगों की नजर नहीं पड़ती। क्योंकि, अब लोग कुएं के पानी का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में बारिश के बाद अचानक कुएं में पानी भरा तब उसमें से विभाग द्वारा सप्लाई की जाने वाली सरकारी दवाइयों का जखीरा तैरते मिला। बारिश का पानी ऊपर आने के बाद दवाइयां भी पानी के ऊपर आ गई।   कुएं को बनाया सरकारी दवाई खपाने का अड्डा विभाग के जानकारों का कहना है कि पशु चिकित्सा विभाग में इस तरह का खेल हर साल किया जाता है। अगर, कुएं की सही तरीके से तलाशी ली जाए तो वहां लाखों रुपए कीमती दवाइंया मिलेगी और अफसरों का कारनामा उजागर हो जाएगा। विभाग के अफसर कमीशन के चक्कर में मनमाने तरीके से दवाइयों की खरीदी करते हैं। साल भर तक दवाइयां कार्यालय में पड़ी-पड़ी एक्सपायर हो जाती हैं फिर नए सिरे से खरीदी करने के लिए इसे कुएं में डाल दिया जाता है।

महानदी उफान पर, अमेठी एनीकट पुल पूरी तरह जलमग्न, आवाजाही ठप

बलौदाबाजार-भाटापारा बलौदा बाजार जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण महानदी का जलस्तर बढ़ गया है। जुलाई के पहले सप्ताह में आमतौर पर शांत रहने वाली महानदी इस बार लबालब भर चुकी है। क्षेत्र में नदी का जलस्तर सामान्य से 10 से 15 फीट तक ऊपर पहुंच गया है, जिससे अमेठी एनीकट पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया है। अमेठी एनीकट से होकर कसडोल विकासखंड और महासमुंद जिले की ओर जाने वाले राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पुल के डूब जाने से दोनों तरफ बसे ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। जानकारी के अनुसार, जलस्तर में तेजी से हुई वृद्धि के चलते एनीकट पर लगभग 3 से 4 फीट तक पानी बह रहा है। फिलहाल क्षेत्र में बाढ़ जैसी कोई गंभीर स्थिति नहीं बनी है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है और लोगों से नदी के किनारे जाने से परहेज करने की अपील की गई है। प्रशासन ने जलस्तर में और वृद्धि की संभावना को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को भी अलर्ट मोड में रखा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित राहत व बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

उत्तर प्रदेश के 22 पीसीएस अधिकारियों को आईएएस सेवा में किया पदोन्नत, आदेश जारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के 22 पीसीएस अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) काडर में पदोन्नति दे दी गई है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की अधिसूचना के क्रम में इस संबंध में उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, सहारनपुर के अपर आयुक्त भानु प्रताप यादव, यूपीएसएसएससी के परीक्षा नियंत्रक विधान जायसवाल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव राजेश कुमार सिंह, सिद्धार्थनगर के सीडीओ बलराम सिंह, यीडा के विशेष कार्याधिकारी शैलेंद्र कुमार भाटिया, यूपीपीएससी के उप सचिव देवी प्रसाद पाल, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की सचिव अंजू लता, दिव्यांगजन सशक्तीकरण निदेशालय के संयुक्त निदेशक जयनाथ यादव, अपर निदेशक (प्रशासन) कृषि तथा अपर मेला अधिकारी कुंभ मेला दयानंद प्रसाद को पदोन्नति दी गई है। इसी तरह से यूपीपीएससी के उप सचिव विनोद कुमार गौड़ व विवेक कुमार श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक मंडी परिषद सचिन कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व हाथरस बसंत अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वाराणसी वंदिता श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अयोध्या महेंद्र कुमार सिंह,, अपर जिलाधिकारी प्रशासन बिजनौर विनय कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन मुरादाबाद गुलाब चंद्र, सदस्य वक्फ न्याायधिकरण लखनऊ राम सुरेश वर्मा , अपर जिलाधिकारी प्रशासन गाजियाबाद रण विजय सिंह, अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) गौतमबुद्धनगर राजेश कुमार, उप निदेशक मंडी योगेंद्र कुमार और अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा निदेशालय नीलम को भी आईएएस काडर में पदोन्नति दे दे गई है। इन सभी अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ वेतनमान में तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा गया है।

डॉ. यादव बोले– गुरु ही हैं वह दीपक जो अंधकार से निकालकर दिखाते हैं ज्ञान का रास्ता

10 जुलाई गुरू पूर्णिमा पर विशेष अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं गुरूः मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरु अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश डॉ. यादव बोले– गुरु ही हैं वह दीपक जो अंधकार से निकालकर दिखाते हैं ज्ञान का रास्ता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुरू हमें अज्ञानता के अधंकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरू को ईश्वर के समान माना गया है। गुरू का शिक्षा का प्रकाश ही जीवन को सही दिशा दिखाते हैं। इस दिन शिष्य अपने गुरूओं का पूजन करते हैं, उनके चरण वंदन कर आशीर्वाद लेते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में 10 जुलाई से 2 दिवसीय गुरू पूर्णिमा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गुरू पूर्णिमा उत्सव कार्यक्रम में जिले के स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं प्रबुद्ध नागरिकों, गुरूजनों एवं साधु-संतों की भागीदारी रहेगी। गुरू पूर्णिमा का दिन गुरू-शिष्य परंपरा की समृद्ध विरासत के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने दिन का है। प्रदेश में अनेक शिक्षक हैं जिन्होंने अपने उल्लेखनीय कार्य से विद्यार्थियों के साथ समाज में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मध्यप्रदेश में सिंगरौली की एक शिक्षिका ने अनोखी पहल कर शिक्षा का प्रकाश घर-घर तक पहुँचाया। सिंगरौली के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैढ़न में पदस्थ माध्यमिक शिक्षिका सुऊषा दुबेने एक स्कूटी को ‘चलती-फिरती लाइब्रेरी’ में बदलकर मोहल्लों और गांवों में बच्चों तक किताबें पहुँचाईं। बच्चों ने उन्हें प्यार और आदर से किताबों वाली दीदी कह कर सम्मान दिया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीअपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कर चुके हैं। सुऊषा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्कूलों के बच्चे ताजे कमल के फूल लेकर घर आये, बच्चों की भावना को समझकर उनका भरोसा बनाये रखने के लिए मैने अपने अध्यापन को क्लास-रूम से बाहर निकाल कर चलता-फिरता पुस्तकालय बना दिया। इससे बच्चे खुश हो गये उन्हें खुश देख कर मुझे बच्चों को निरंतर पढ़ाई से जोड़े रखने के लिये स्कूटी पर चलता-फिरता पुस्तकालय जारी रखने की प्रेरणा मिली। वे बताती है कि मैंने गांव-गांव जाकर बच्चों को रीडिंग हेबिट्स से जोड़े रखा है मेरे लिये वह गौरव का क्षण था जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस प्रयास का जिक्र अपने मासिक कार्यक्रम "मन की बात" में किया। सुऊषा ने बताया, “इसके बाद मैने गांवों में स्वच्छता-जागरुकता के लिये साबुन बैंक बनाया। मेरे पुस्तकालय से जुड़े बच्चों ने अपने जन्मदिन के मौके पर साबुन दान करना शुरू किया, तब लगा कि शिक्षा से संस्कार के साथ आदतें भी बदली जा सकती हैं। बच्चों का उत्साह मुझे आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करता है। सैंकड़ों बच्चों पर सफल प्रयोग सीहोर जिले के भैरूंदा तहसील (नसरूल्लागंज) के माध्यमिक शिक्षक संतोष कुमार धनवारे ने अपने क्षेत्र के अनेक बच्चों पर सफल प्रयोग किया। वे बताते हैं कि शिक्षक के रूप में छात्रों का जीवन संवारने और भविष्य बनाने के लिये वह लगातार प्रयास करते रहे हैं। बच्चों के लिये सपनों की डायरी, टीचिंग लर्निंग मटेरियल, फ्लैश कार्ड और पोर्ट फोलियो तैयार किये हैं। धनवार ने बताया कि जिन सरकारी स्कूलों में उनकी पदस्थापना रही वहां वे अपने कामों के साथ बच्चों के साथ घुल-मिल गये। उन्होंने बच्चों के अलावा पालकों के साथ भी संवाद कायम रखा। उनके सिखाने की कला ने टाटा ट्रस्ट के पराग द्वारा प्रकाशित पत्रिका में उनका उल्लेख किया गया। संतोष बताते हैं कि उन्होंने अपने पदस्थापना वाले स्कूल में चित्रकला, रंगरोगन और कला कौशल के साथ खुद के खर्चे पर विद्यालय का वातावरण बदला। उनके इस काम के फलस्वरूप उनके पदस्थापना वाले स्कूल में विकास के लिये शासन ने 5 लाख रूपये की राशि प्रदान की। उनके पढ़ाये बच्चे आज अपने जीवन के अलग-अलग क्षेत्र में लगातार सफलता पा रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं। एक अच्छा शिक्षक अपने परिश्रम से उन्हें एक अच्छे सांचे में ढाल सकता है।