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प्रदूषण से बेहाल राजधानी, लेकिन कृत्रिम वर्षा अब भी अधर में

नई दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बहुत खराब स्तर पर पहुंच गया है। हवा की बहुत कम गति और पटाखों के कारण पलूशन के स्तर में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली और उसके समीपवर्ती इलाकों में धुंध छाई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दीवाली के दिन यानी रविवार शाम 4 बजे एक्यूआई 345 दर्ज किया गया। दिल्ली का एक्यूआई मंगलवार को रात 10 बजे 344 अंक रिकॉर्ड किया गया। दिल्ली कृत्रिम बारिश का इंतजार कर रही है लेकिन इसके लिए भी एक मौसम का अनुकूल होना जरूरी है। कृत्रिम बारिश की तैयारी लेकिन किस बात का इंतजार? दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में पलूशन को काबू करने के लिए दिल्ली सरकार कृत्रिम बारिश कराने पर काम कर रही है। लेकिन ऐसा तभी किया जाएगा जब मौसम विभाग (IMD) बादलों और नमी की उपयुक्त स्थिति देखते हुए इसकी मंजूरी देगा। माना जा रहा है कि मौसम विभाग दिल्ली में कृत्रिम बारिश के लिए मंजूरी तभी देगा जब बादलों की आवाजाही भरपूर दिखेगी। दिल्ली एनसीआर से रूठे बदरा मौसम विभाग की मानें तो मौजूदा वक्त में दिल्ली एनसीआर से बादल रूठे हुए हैं। इस हफ्ते बादलों के आने की संभावनाओं के बारे में भी दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में कृत्रिम बारिश के लिए अनुकूल मौसम का इंतजार है। मौसम विभाग भी इसकी मंजूरी तभी देगा जब परिस्थितियां अनुकूल हों। अन्यथा यह प्रयास बेकार जाएगा। मजबूत पश्चिमी विक्षोभ से ही उम्मीद मौसम विभाग के अनुसार, ताजा पश्चिमी विक्षोभ बेहद कमजोर है। इसका मैदानी इलाकों पर प्रभाव नहीं देखा जाएगा। ऐसे में राहत के लिए दिल्ली का इंतजार बढ़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत पश्चिमी विक्षोभ से ही दिल्ली एनसीआर में बारिश की उम्मीदें लगाई जा सकती हैं। ऐसे में नजरें मौसम के रुख पर रहेंगी। बादलों का इंतजार इससे पहले दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंज़िंदर सिंह सिरसा ने भी कृत्रिम बारिश पर सरकार की योजना को दोहराया। लेकिन उनका कहना भी साफ था कि दिल्ली में कृत्रिम बारिश तभी कराई जा सकती है जब आसमान में बादलों की मौजूदगी हों। क्यों नहीं करा रहे कृत्रिम बारिश? सिरसा ने कहा कि लोग हमसे पूछ रहे हैं कि हम क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश क्यों नहीं करा रहे हैं? मैं बताना चाहता हूं कि जब बादल आते हैं तब कृत्रिम बारिश कराई जाती है। ऐसे में जिस दिन बादल आएंगे हम कृत्रिम बारिश करा देंगे। ऐसे में अब दिल्ली पलूशन से निजात के लिए बादलों का इंतजार कर रही है। 675 पर PM2.5 का लेवल दिल्ली में मंगलवार को दिवाली के बाद बीते चार वर्षों में सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई। दिवाली की रात प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा और PM2.5 का लेवल 675 तक पहुंच गया। दिवाली के एक दिन बाद इसकी एक्यूआई रेड जोन में पहुंच गई। दिवाली को शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 345 के साथ बेहद खराब श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया जबकि 2024 में यह 330, 2023 में 218, 2022 में 312 और 2021 में 382 रहा। दिल्ली में मंगलवार को एक्यूआई सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक 350 से ऊपर रहा।

मुख्यमंत्री यादव का निर्देश: किसानों के लिए भावांतर योजना प्रक्रिया को बनाएं पूरी तरह सुगम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों के हित में भावांतर योजना प्रारंभ की गई है, जिसका चहुंओर स्वागत हो रहा है। प्रदेश में तीन गुना से अधिक पंजीयन योजना में हुए हैं। कुल 9.36 लाख किसानों ने पंजीयन करवाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजना की संपूर्ण प्रक्रिया में किसानों को कोई असुविधा न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में किसानों से सोयाबीन खरीदी के लिए लागू की गई भावांतर योजना के संबंध में मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि भावांतर योजना में प्रदेश में सात जिले उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा और सागर ऐसे हैं जहां 50-50 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवाया है। इसी तरह 21 जिलों से 10-10 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में किसानों को मंडियों और उपमंडियों में सोयाबीन विक्रय के लिए आवश्यक तैयारियां पूर्ण की जाएं। योजना से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां किसानों को प्रदान की जाएं। इस माह किए गए योजना के प्रचार का ही अच्छा परिणाम है कि बड़ी संख्या में पंजीयन हुए हैं। ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से किसानों के पंजीकृत बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भावांतर राशि का भुगतान निर्धारित अवधि में किया जाए, साथ ही भुगतान के संबंध में किसान को एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाए। मंडियों में की गईं तकनीकी और मानव संसाधन व्यवस्थाएं बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक सोयाबीन की विक्रय अवधि रहेगी। ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन के बाद मंडी पोर्टल में ई-मंडी पोर्टल पर सभी कार्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से किए गए हैं। सभी मंडियों और उप मंडियों में तकनीकी एवं मानव संसाधन की व्यवस्था की गई है। मंडी स्तरीय कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी हुआ है। प्रवेश गेट और प्रांगण की सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक मंडी में हेल्प डेक्स भी बनाई गई है। कलेक्टर्स और कमिश्नर्स के साथ ही कृषि सचिव द्वारा बैठकों में भावांतर योजना के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक अन्य बैठक में प्रदेश के किसानों के हित में सोलर पंप योजना के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत विचार-विमर्श किया। नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा प्रदेश में किसानों के लिए सोलर पम्प स्थापना अभियान के संबंध में की जा रही कार्यवाही का विवरण दिया गया। अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव के मार्गदर्शन में जशपुर-बस्तर में 4 नए महाविद्यालयों के लिए 132 पद मंजूर

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित 4 नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन महाविद्यालयों की स्थापना फरसाबहार (जिला-जशपुर), करडेगा (जिला-जशपुर), नगरनार (जिला-बस्तर) तथा किलेपाल (जिला-बस्तर) में की जाएगी। मुख्यमंत्री की इस पहल से जशपुर एवं बस्तर जैसे जनजाति बहुल एवं भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब उनके इलाके में ही उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। दूरस्थ अंचलों की बेटियों और बेटों को अब कॉलेज की पढ़ाई के लिए अब अपने घरों से दूर अन्यत्र नही जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा की पहुंच हर इलाके में हो, इसके लिए राज्य सरकार शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ बना रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है और सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि इन चारों महाविद्यालयों के लिए कुल 132 पदों (प्रति महाविद्यालय 33 पद) के सृजन की स्वीकृति के साथ ही कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति भी राज्य शासन ने दे दी है। स्वीकृत पदों में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ाधिकारी, सहायक ग्रेड-1 एवं प्रयोगशाला कर्मी आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय की इस पहल से आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं की शिक्षा, रोजगार एवं कौशल वृद्धि के अवसर बढ़ेंगे। प्रदेश में समान और संतुलित शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी।

MP में किसानों के लिए खुशखबरी! कोदो-कुटकी अब MSP पर खरीदी जाएगी — ऐतिहासिक फैसला घोषित

भोपाल  पहली बार कोदो और कुटकी फसलों का उपार्जन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की नीति लागू की गई है। राज्य शासन ने कोदो और कुटकी उत्पादक किसानों के हित में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इन फसलों के उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो गया है, जो 24 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन केन्द्र स्थापित उपसंचालक कृषि ने बताया कि विकासखण्ड सीधी में किसानों की सुविधा के लिए गांधीग्राम और चौफाल कोठार, विकासखण्ड रामपुर नैकिन के लिए कुडिया, बघवार तथा कंधवार, विकासखण्ड मझौली के लिए ताला, मझौली, विकासखण्ड सिहावल के लिए अमिलिया, बघोर एवं विकासखण्ड कुसमी के लिए टमसार में पंजीयन केन्द्र स्थापित किए गए हैं। इन्हीं समितियों के माध्यम से किसानों से उपार्जन किया जाएगा। दोनों फसलों पर बोनस भी मिलेगा उप संचालक कृषि डॉ. राजेश सिंह चौहान ने बताया कि शासन द्वारा कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2500 रूपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3500 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त किसानों को दोनों फसलों पर 1000 रूपये प्रति क्विंटल बोनस भी मिलेगा। अधिकारियों ने किसानों से अधिक संख्या में पंजीयन कराने की अपील की। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और योजना की जानकारी प्राप्त की।

राज्य सरकार गौसेवा और गौवंश संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग देने को तत्पर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव की हार्दिक मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि आज पूरे प्रदेश में गोवर्धन पूजा हर्षोल्लास से की जा रही है। हर घर, हर गौ-शाला, हर गांव, वृंदावन है और हम सब गोपाल बन गए हैं। हमारी हर परम्परा और उत्सव में प्रकृति के प्रति आदर और समाज के प्रति उत्तदायित्व समाहित है। गोवर्धन पूजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। हमारी संस्कृति ने हमें छोटी से छोटी चीज प्रदान करने वालों के प्रति भी आभार करना सिखाया है। आज हम प्रकृति के उसी दाता स्वरूप को प्रणाम कर रहे हैं। आज के दिन गोवर्धन और गौवंश की पूजा कर हम संसार को प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन संवर्धन का संदेश देते हैं। यह सनातन संस्कृति की देन है। यह वास्तव में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का उत्सव है। यह हमें स्मरण कराता है कि धरती पर जो भी है, उसके साथ सामंजस्य ही जीवन है। गोवर्धन पूजा 'जियो और जीने दो' के विचार और उपलब्ध खाद्य सामग्री एवं संसाधनों को समाज के साथ मिल-बांटकर साझा करने का प्रतीक है। हमारी संस्कृति और परम्पराओं को बचाए रखने की हम सबकी जिम्मेदारी है। राज्य सरकार द्वारा गोवर्धन पूजा का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित गोवर्धन पूजा के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। विश्व, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की महत्ता को पुन: कर रहा है स्वीकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौमाता सनातन संस्कृति की आत्मा है। गौमाता के दुग्ध से हमारे शरीर को अमृत मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपालों की सेना बनाकर पशुधन की रक्षा के लिए बृजवासियों को प्रेरित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने लोक संस्कृति एवं सामान्य जनजीवन को बनाए रखने के लिए बाल्यावस्था में अद्भुत लीलाओं से समाज को चमत्कृत कर प्रेरित किया। भगवान श्रीकृष्ण के गोपाल स्वरूप में यह संदेश निहित है कि जो गाय पाले वो गोपाल है। गाय के दूध, गोबर और गौ-मूत्र की महिमा अब वैज्ञानिक रूप से सिद्ध होने लगी है। कैंसर जैसी भयंकर बीमारी में भी गौ-उत्पाद प्रभावी हैं, यह भी सिद्ध हुआ है कि गोबर से लिपे घरों पर विकिरण का प्रभाव कम होता है। खेती में गोबर की खाद की महत्ता से सभी लोग परिचित ही हैं। इसी का परिणाम है कि विश्व, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की महत्ता को पुन: स्वीकार कर रहा है। सनातन संस्कृति के प्रत्येक त्यौहार में निहित है कई संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परम्पराओं में बेहतर जीवन के कई सूत्र समाहित हैं। योग और आयुर्वेद के सिद्धांत इसी के प्रमाण है। सनातन संस्कृति के प्रत्येक त्यौहार में कोई न कोई संदेश निहित है। राज्य सरकार ने ऐसे त्यौहारों को समाज के साथ मिलकर मनाने की पहल की है, जिन त्यौहारों में संस्कार और संदेश निहित हैं। प्रदेश में समाज के साथ परम्परानुसार मिल-जुलकर त्यौहार मनाने का यह दूसरा वर्ष है। गोवर्धन पूजा फसल कटने और नई फसल की शुरूआत का समय है। इस घड़ी को उत्साह और उल्लास के साथ मनाने से समाज में नई ऊर्जा का संचार होता है। गोवर्धन पर अन्नकूट का आयोजन भी इसी आनंद का भाग है। गौवंश संरक्षण के लिए समाज भी आए आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पशुपालन से दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में देश के दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है, इसे 20 प्रतिशत तक ले जाना हमारा लक्ष्य है। हम मध्यप्रदेश को देश का प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। गौवंश के बेहतर आहार के लिए गौशालाओं को मिलने वाली राशि 20 रूपए से बढ़ाकर 40 रूपए प्रति गौवंश किया गया है। गौशालाओं से दूध के साथ गौ-मूत्र और गोबर की उपलब्धता के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकार के साथ समाज को भी गोवंश संरक्षण में सहयोग देने के लिए प्रेरित किया। गौवंश संरक्षण सनातन संस्कृति की धारा का सशक्त करने में भी सहायक होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जो भी व्यक्ति गौपालन करना चाहता है, गौशाला चलाना चाहता है या गौशाला संचालन में सहयोग करना चाहता है, उन सभी को सहयोग देने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। गोवर्धन पर्वत की मंत्रोच्यार के साथ की पूजा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवर्धन पूजा के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में रवीन्द्र भवन में वैदिक मंत्रोच्यारों के बीच गोवर्धन पूजा कर प्रकृति के प्रति मनुष्य के समर्पण को अभिव्यक्त किया। गोवर्धन पर्वत की उपस्थित अतिथियों द्वारा पूजा के बाद आरती भी की गई। इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम स्थल पर साफा पहनाकर स्वागत किया गया। परंपरागत वाद्य यंत्रों पर झूमते युवाओं ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अगवानी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौवंश को दुलारा और पशु आहार खिलाया। अन्नकूट की परम्परा के अंतर्गत नया अन्न चढ़ाकर प्रसाद का थाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भेंट किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को 56 भोग का थाल भेंट किया गया।

सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक सम्पन्न, हादसों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का आदेश

एमसीबी छत्तीसगढ़ परिवहन मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन के सभा कक्ष में छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में  उप मुख्यमंत्री अरूण साव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, विधायक अनुज शर्मा, सचिव सह परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश, सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. कमलप्रीत सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रदीप गुप्ता, प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक के प्रारंभ में सचिव परिवहन विभाग एस. प्रकाश ने उपस्थित अधिकारियों का स्वागत करते हुए पूर्व बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। इसके पश्चात्  संजय शर्मा, अध्यक्ष अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) ने विभागवार समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के जनवरी से अगस्त तक प्रदेश में कुल 10,431 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.23% अधिक है। घायलों की संख्या 9,132 रही जो 8.64% की वृद्धि को दर्शाती है, वहीं 4,770 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई जो 2.51% अधिक है। वहीं मंत्री कश्यप ने इस चिंताजनक वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनसंख्या के आधार पर दुर्घटनाओं का तुलनात्मक विश्लेषण करें तथा रोकथाम हेतु ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों द्वारा दुर्घटनाओं में कमी लाने के सफल उपायों को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूली, कॉलेज एवं कोचिंग संस्थानों में छात्र केवल हेलमेट पहनकर ही प्रवेश करें। हाईवे और रिंग रोड पर बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि राज्य के 33 जिलों में जिला सड़क सुरक्षा समितियों की 264 निर्धारित बैठकों के मुकाबले केवल 108 बैठकें आयोजित हुईं, जिसे माननीय मंत्री ने गंभीरता से लेते हुए फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए और बैठक की जानकारी MORTH पोर्टल पर अपलोड कर समीक्षा सुनिश्चित की जाए। प्रदेश में सड़क सुरक्षा प्रवर्तन कार्यों के अंतर्गत पुलिस विभाग ने जनवरी से अगस्त 2025 के दौरान 6,03,283 प्रकरणों में 26.95 करोड़ रुपए का शमन शुल्क वसूला, वहीं परिवहन विभाग ने 5,55,666 चालानी प्रकरणों से 115.54 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त की। पुलिस विभाग की यह कार्रवाई पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक रही। राज्य में वर्ष 2019 से अब तक चिन्हित 1000 ब्लैक स्पॉट में से 887 का सुधार कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि 113 स्थानों पर कार्य शेष है। मंत्री ने शेष ब्लैक स्पॉटों के सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार 4273 चिन्हित जंक्शनों में से 3148 का सुधार कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 1125 स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि ट्रक ले-बाय के 55 में से 42 पूर्ण हो चुके हैं, बस ले-बाय के 558 में से 374 तैयार हैं तथा 11 में से 7 रेस्ट एरिया कार्य पूर्ण हैं। मंत्री ने निर्देश दिए कि शेष कार्यों को तत्काल गति दी जाए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के त्वरित उपचार हेतु ट्रामा सेंटर्स और एम्बुलेंस सुविधाओं की जानकारी दी गई। रायपुर और सिमगा में ट्रामा स्टेब्लाइजेशन सेंटर प्रारंभ हो चुके हैं जबकि अन्य केंद्र निर्माणाधीन हैं। मंत्री ने निर्देश दिए कि शेष केंद्रों को शीघ्र प्रारंभ किया जाए और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस इलाज योजना के तहत तत्काल लाभ मिले, यह सुनिश्चित किया जाए। शिक्षा विभाग ने बताया कि सड़क सुरक्षा विषयक सामग्री को पहली से दसवीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में संशोधित कर आगामी सत्र 2025-26 से लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मंत्री ने स्कूलों में निबंध, वाद-विवाद, चित्रकला, क्विज, रैली और नुक्कड़ नाटक जैसे जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। सड़क सुरक्षा माह के दौरान  NSS] NCC और भारत स्काउट-गाइड के स्वयंसेवकों को जन-जागरूकता अभियानों में शामिल करने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में बताया गया कि ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से अब तक 32,326 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और राज्य के आठ स्थानों पर ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर संचालित हैं, जहां अब तक 1,97,295 वाहनों का परीक्षण किया गया। मंत्री ने निर्देश दिए कि नए वाहन विक्रेता प्रशिक्षण के बाद ही वाहन विक्रय करें और यातायात नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही वाहनों में स्पीड लिमिट डिवाइस और डैशबोर्ड कैमरा की जांच नियमित रूप से की जाए। नगरीय प्रशासन विभाग के कार्यों पर संतोष व्यक्त किया गया और शेष कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि  iRAD और  eDAR पोर्टल में एंट्री समय पर नहीं हो रही है, इसे सभी विभाग गंभीरता से लेकर समाधान करें। स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की गई कि वह अपने पेशेंट एंट्री रजिस्टर को इस पोर्टल से जोड़े। बैठक के अंत में मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सड़क सुरक्षा परिषद का उद्देश्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर दुर्घटनाओं में कमी लाना है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के चार स्तंभ अभियांत्रिकी, प्रवर्तन, शिक्षा/जनजागरूकता और आकस्मिक उपचार के बीच तालमेल को और सशक्त बनाया जाए। 

मतदान करने वाले हर बिहारवासी के लिए खुशखबरी! चुनाव आयोग ने घोषित किया छुट्टी का नियम

नई दिल्ली  भारत निर्वाचन आयोग बिहार विधानसभा चुनाव और 8 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों की तारीखों की घोषणा कर चुका है। मतदान के दिन सभी कर्मचारियों को सवेतन अवकाश देने का आदेश जारी किया गया है। आयोग ने कहा कि यह कदम मतदाताओं को अपने वोट का इस्तेमाल करने में आसानी प्रदान करने के लिए उठाया गया है। बिहार में पहला चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी। इसके अलावा सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव भी 11 नवंबर को ही होंगे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत हर कर्मचारी, चाहे वह किसी व्यवसाय, उद्योग या अन्य प्रतिष्ठान में काम करता हो, मतदान के दिन सवेतन अवकाश पाने का हकदार है। इस दौरान उनकी तनख्वाह में कोई कटौती नहीं होगी। अगर कोई नियोक्ता इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक कर्मचारी भी इस सुविधा के हकदार हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग अपने मतदान क्षेत्र से बाहर अन्य जगहों पर नौकरी करते हैं, लेकिन अपने मूल मतदान क्षेत्र में वोटर हैं, उन्हें भी मतदान के दिन सवेतन अवकाश मिलेगा। इससे वे अपने वोट डालने के लिए समय निकाल सकेंगे। यह नियम सुनिश्चित करता है कि हर मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का पूरा मौका मिले। निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे इस नियम का सख्ती से पालन कराएं। इसके लिए सभी नियोक्ताओं और संबंधित विभागों को जरूरी हिदायतें जारी की जाएं। आयोग का मकसद है कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुगम हो, ताकि हर नागरिक बिना किसी परेशानी के वोट डाल सके। बिहार में इस घोषणा से कर्मचारियों और दैनिक मजदूरों में खुशी की लहर है। आयोग ने नियोक्ताओं से अपील की है कि वे इस अवकाश का लाभ देने में सहयोग करें ताकि लोकतंत्र मजबूत हो। यह कदम मतदान प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जब आसमान में गिरी अग्निबाणों की वर्षा — हिंगोट युद्ध ने दोहराई सदियों पुरानी शौर्यगाथा

महू-गौतमपुरा दीपावली के बाद का दिन मालवा अंचल के लिए खास होता है, जब गौतमपुरा का मैदान जंग के अखाड़े में बदल जाता है। मंगलवार को परंपरा, आस्था और साहस का संगम बने इस ऐतिहासिक हिंगोट युद्ध की शुरुआत शाम करीब साढ़े पांच बजे भगवान देवनारायण की पूजा और जयकारों के साथ हुई। खारचा मैदान में आयोजित इस युद्ध में एक ओर थे गौतमपुरा के योद्धा और दूसरी ओर रूणजी के जांबाज। सिर पर पगड़ी, हाथ में ढाल और झोले में भरी सैकड़ों हिंगोटें लेकर योद्धाओं ने एक-दूसरे पर अग्निबाण की तरह प्रहार किए। जैसे ही दोनों दलों के प्रमुखों ने संकेत दिया, आसमान में आग की लपटें उठीं और हिंगोटें धमाके के साथ उड़ने लगीं। करीब एक घंटे तक चले इस युद्ध में दोनों दलों ने सैकड़ों हिंगोटें छोड़ीं। धुएं से घिरे मैदान में योद्धा आग की परछाइयों जैसे दिख रहे थे। हजारों दर्शक बने गवाह गौतमपुरा, रूणजी, महू, देपालपुर और इंदौर से हजारों लोग इस अद्भुत नजारे को देखने पहुंचे। दर्शकों के लिए नगर परिषद ने सुरक्षा घेरे बनाए और 200 से अधिक पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर और फायरब्रिगेड मौके पर तैनात रहे। ढाई सौ साल पुरानी परंपरा स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह परंपरा करीब 250 साल पुरानी है। माना जाता है कि मुगलों के हमलों से बचाव के लिए हिंगोटों का इस्तेमाल किया जाता था। धीरे-धीरे यह आत्मरक्षा का तरीका धार्मिक और सामाजिक उत्सव में बदल गया। यहां योद्धा जीत-हार के लिए नहीं, बल्कि परंपरा निभाने के लिए लड़ते हैं। गौतमपुरा में भी परंपरा का उत्साह युद्ध की वर्षों पुरानी परंपरा निभाते हुए मंगलवार को गौतमपुरा में हिंगोट युद्ध हुआ है। सबसे पहले भगवान देवनारायण की पूजा करने के बाद रलायता मार्ग स्थित खारचा क्षेत्र में एक ओर से तुर्रा और दूसरी ओर कलंगी दल के योद्धा खड़े हुए। योद्धा एक हाथ में अपने बचाव के लिए ढाल लिए थे। कंधे पर टंगा हुआ एक बैग व झोला, जिसमें शस्त्र की तरह रखे हुए ढेर सारी हिंगोट थी। जैसे ही दोनों दलों के प्रमुख ने युद्ध का आगाज किया, दोनों ओर से अग्निबाणों की तरह हिंगोट फेंकना शुरू हुई। 36 योद्धा घायल करीब डेढ़ घंटे तक चले युद्ध के अंत तक दोनों दलों के 36 योद्धा घायल हुए। इसमें दो गंभीर घायल हुए, जिन्हें इंदौर रेफर किया पंरतु वह खतरे से बाहर हैं। अन्य को प्राथमिक उपचार देकर घर भेजा गया। इस दौरान मंच पर विधायक मनोज पटेल, नगर परिषद अध्यक्ष गगन बाहेती, नगर परिषद उपाध्यक्ष राजा जागीरदार, समस्त पार्षदगण, जिला व मंडल स्तर के पदाधिकारी उपस्थित रहे। वहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

रौशनी के त्योहार पर छाई त्रासदी: दिवाली में आगजनी से 41 घायल, सैकड़ों को इलाज की जरूरत

भोपाल दीपावली के जश्न के बीच प्रदेश में हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। बीते दो दिनों में प्रदेशभर में 41 लोग पटाखों से झुलसे, जबकि 1000 से अधिक लोग सड़क हादसों में घायल हुए। सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं झाबुआ जिले में दर्ज की गईं, जहां 67 एक्सीडेंट केस रिपोर्ट हुए। यह जानकारी मंगलवार को एम्बुलेंस सेवा 108 की रिपोर्ट में सामने आई। दिवाली के दिन दोगुनी हुई झुलसने की घटनाएं रिपोर्ट के अनुसार, 19 अक्टूबर को प्रदेशभर में 13 बर्न केस दर्ज हुए थे, जिनमें से तीन केस देवास से थे। लेकिन दिवाली के दिन यानी 20 अक्टूबर को यह संख्या दो गुना से अधिक बढ़कर 28 हो गई। विदिशा में चार और रीवा में तीन केस सबसे अधिक दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर मामले बच्चों और युवाओं के हैं, जिन्होंने बिना निगरानी के पटाखे जलाए। इससे आंखों, चेहरे और हाथों में जलने की चोटें आईं। झाबुआ बना सबसे बड़ा हादसा जोन दो दिनों में झाबुआ में 67 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। यहां अधिकतर हादसे तेज़ रफ़्तार, नशे में वाहन चलाने और रात्रिकालीन भीड़भाड़ के कारण हुए। वहीं, इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में भी कई हादसे सामने आए। जेपी अस्पताल में आए मामूली केस संजय जैन, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल भोपाल ने बताया कि दिवाली की रात चार से पांच मरीज पटाखों से झुलसने के मामले में अस्पताल आए थे। इनमें से कोई भी केस सीरीयस नहीं था। सभी को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई। किसी को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी।

बेमेतरा में घर-घर पहुँच रहा नल से जल, हर घर नल, हर घर जल के सपने को साकार कर दिखाया

रायपुर बेमेतरा में घर-घर पहुँच रहा नल से जल कभी पानी के लिए कतारें और हैंडपंपों पर भीड़ बेमेतरा की पहचान हुआ करती थी, परंतु अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। राज्य सरकार के सतत प्रयासों और योजनाबद्ध कार्यान्वयन से जिले ने “हर घर नल, हर घर जल” के सपने को साकार कर दिखाया है। वर्ष 2000 में बेमेतरा जिले में मात्र 3,857 हैंडपंप थे, जबकि 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 7,139 हो गई है। नलजल योजनाओं की संख्या भी 32 से बढ़कर 127 तक पहुँच चुकी है, जिनसे 32,278 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन मिले हैं। वहीं, विद्युत विहीन ग्रामों में 142 सोलर ड्यूल पंपों की स्थापना से सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति संभव हुई है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 719 योजनाएँ स्वीकृत की गईं, जिनमें से 378 योजनाएँ पूर्ण होकर 1,34,010 घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। साथ ही 251 ग्रामों को ‘हर घर जल रिपोर्टेड’ और 206 ग्रामों को ‘हर घर जल प्रमाणित’ घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से 372 ग्रामों में सामूहिक जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अब तक जिले में कुल 1,54,836 ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। पिछले 25 वर्षों में बेमेतरा ने जल प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज जिले के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुँच रहा है।