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21 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम? बिहार के इन जिलों में बारिश और वज्रपात की चेतावनी

पटना बिहार में मानसून पूरी तरह एक्टिव है। पिछले तीन दिनों से पटना समेत कई इलाकों में बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी युक्त हवाएं राज्य के ऊपर सक्रिय हैं, जिससे बारिश की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश के ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण की भी पुष्टि की गई है। मौसम अगले पांच से सात दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, तापमान में किसी विशेष बदलाव के आसार नहीं हैं। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, पटना, गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, नवादा, मधुबनी, दरभंगा, जमुई, नालंदा, अरवल, जहानाबाद, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, समस्तीपुर में अलगे एक से तीन घंटे तक बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इधर, पटना समेत कई इलाकों में मंगलवार सुबह से ही बारिश हो रही है। जानिए, किस क्षेत्र में किस तारीख को बारिश के आसार     उत्तर पश्चिम बिहार (पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान)- 16 और 17 सितंबर को अनेक स्थानों पर बारिश के आसार हैं। वहीं 18 से 21 सितंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश के आसार हैं।     विज्ञापन     उत्तर मध्य बिहार (मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर): – 16 और 19 सितंबर तक  अनेक स्थानों पर बारिश के आसार हैं।     उत्तर पूर्व बिहार (सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा): 18 और 19 सितंबर तक अनके स्थानों पर बारिश के आसार हैं।     दक्षिण पश्चिम बिहार (भोजपुर, बक्सर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल)- 16 से 17 सितंबर तक अनेक स्थानों पर बारिश के आसार हैं।     दक्षिण मध्य बिहार (गया, जहानाबाद, पटना, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय):-  17  और 18 सितंबर को अनेक स्थानों पर बारिश के आसार हैं।     दक्षिण पूर्व बिहार ( भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, खगड़िया): – 17 से 18 सितंबर तक अनेक स्थानों पर बारिश के आसार हैं। जानिए, किस जिले में कितना रहा अधिकतम तापमान मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है। वहीं, न्यूनतम तापमान भी अगले 5 दिनों तक सामान्य बना रहेगा। पिछले 24 घंटे में पटना में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस, गया में 31.8 सेल्सियस, भागलपुर में 32.3 डिग्री सेल्सियस, पूर्णिया 33.4 डिग्री सेल्सियस, दरभंगा में 31.8 डिग्री सेल्सियस, बक्सर में 31 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

स्कूल के बाहर से नर्सरी छात्र का अपहरण, 6 घंटे में पुलिस ने बच्चे को छुड़ाया

पश्चिमी चंपारण बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के लौरिया थाना क्षेत्र स्थित व्यासपुर के एक निजी विद्यालय से अपहृत नर्सरी के छात्र को पुलिस ने गोरखपुर से सकुशल बरामद कर लिया है। छह वर्षीय आर्यन कुमार के अपहरण की सूचना सोमवार दोपहर उसके पिता अनुप कुमार श्रीवास्तव ने दी थी। शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। विद्यालय के शिक्षक से मिली जानकारी के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने बच्चे के बारे में पूछताछ की थी। जांच के क्रम में यह सामने आया कि अपहरणकर्ता पीले रंग की टी- शर्ट पहने हुए था और स्कूल के बाहर से ही बच्चे को लेकर चला गया। पश्चिम चंपारण के वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ विवेक दीप के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के साथ- साथ मानवीय इनपुट के जरिए आरोपी की पहचान की गई। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पता चला कि आरोपी रामनगर स्टेशन से अवध असम एक्सप्रेस से गोरखपुर गया है। तत्काल गोरखपुर पुलिस, रेल जीआरपी और वरिष्ठ रेल अधिकारियों की मदद से बच्चे और आरोपी की जानकारी साझा की गई। गोरखपुर पुलिस और रेल जीआरपी की तत्परता से कार्रवाई करते हुए छात्र को छह घंटे के अंदर सुरक्षित बरामद कर लिया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बेतिया पुलिस टीम छात्र को लेकर वापस लौट आई है और आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस ने छह घंटे के अंदर गोरखपुर से बरामद कर लिया।

मध्यप्रदेश में कोदो-कुटकी की MSP पर खरीदी का आगाज़, 15 सितंबर से रजिस्ट्रेशन शुरू

 जबलपुर  मध्य प्रदेश सरकार पहली बार किसानों से कोदो-कुटकी खरीदेगी। इसकी शुरुआत जबलपुर के कुंडम तहसील से हो रही है। 15 सितंबर से सरकार को फसल बेचने वाले किसानों का पंजीयन शुरू हो गया है। कुंडम तहसील में करीब सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने कोदो-कुटकी की खेती की है।सीएम ने कहा कि इस कृषि उत्‍पाद को देश के साथ-साथ विदेश में भी पहुंचाया जाएगा. उन्‍होंने धान उत्‍पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 हजार रुपये बोनस देने की बात भी कही. प्रशासन ने यह जिम्मा कृषि विभाग को सौंपा है। जिसके बाद विभाग, किसानों से फसल खरीदने के लिए एफपीओ चयनित करेगा। पहले चरण में सिर्फ एक एफपीओ, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को यह काम दिया जाएगा। कृषि विभाग के उपसंचालक डॉ. एसके निगम ने बताया कि खरीदी में प्रदेश सरकार पारंपरिक पब्लिक-प्रोक्योरमेंट यानी धान, गेहूं जैसी खरीदी नहीं करेगा, बल्कि सरकार इसमें केवल व्यवस्था का समन्वय करेगी, जबकि खरीदे गए अनाज का भुगतान अन्न फेडरेशन कंपनी, भोपाल द्वारा किया जाएगा। राघवेंद्र सिंह (कलेक्टर जबलपुर) के अनुसार, इस बार जिले के कुंडम तहसील में किसानों से कोदो और कुटकी की खरीदी करने जा रहे हैं। एफपीओ के माध्यम से खरीदी होगी, जिसके लिए पंजीयन सोमवार से शुरू हो गया है। सरकार हर एक किलो पर 10 रुपये का समर्थन मूल्य भी देगी। देश में पहली बार ऐसा हो रहा यह देश में संभवत: पहली बार हो रहा है कि सरकार अनाज की खरीदी किए बगैर किसानों को बोनस देने जा रही है। सरकार का बोनस देने का मकसद प्रदेश में आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक किसानों को कोदी-कुटकी की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गत 3 जनवरी को जबलपुर में हुई कैबिनेट की बैठक में रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई थी। योजना में मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहन देने और किसानों से उचित दाम पर इसकी समरीदी का कार्य किया जाना है। बैठक में मिलेट्स का उत्पादन करने वाले किसानों को प्रति किलो 10 रुपए प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद सरकार ने मिलेट्स की खरीदी से लेकर इसके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग व मार्केटिंग के लिए मिलेट्स फेडरेशन का गठन किया। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में कोदो- कुटकी की बुवाई की गई है। मिलेट्स फेडरेशन को राजस्व विभाग से इसका फाइनल आंकड़ा मिलना बाकी है। इस तरह कोदो-कुटकी के रकबे के आधार पर सरकार किसानों को प्रति विटेयर 3900 रुपए के हिसाब से करीब 40 करोड़ का बोनस देगी। सचिव कृषि विभाग एम, सेलवेदन का कहना है कि जल्द ही किसानों के खाते में बोनस की राशि ट्रांसफर की जाएगी। इसकी तैयारी की जा रही है।

रैपिड मेट्रो संचालन की जिम्मेदारी GMRL को सौंपने की प्रक्रिया शुरू, अब तक 62 लाख यात्रियों ने किया सफर

गुरुग्राम हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड (एचएमआरटीसी) ने गुरुग्राम रैपिड मेट्रो को दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) से गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल रैपिड मेट्रो का संचालन और रखरखाव डीएमआरसी और जीएमआरएल संयुक्त रूप से कर रहे हैं। प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए संयुक्त समितियों का गठन किया गया है और समय-सीमा तय कर दी गई है ताकि यात्रियों की सेवाओं में किसी प्रकार का व्यवधान न आए और हस्तांतरण सुरक्षित रूप से पूरा हो। यात्रियों और प्रदर्शन का आंकड़ा सोमवार को एचएमआरटीसी की 62वीं बोर्ड बैठक में बताया गया कि गुरुग्राम रैपिड मेट्रो ने अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच 62.49 लाख यात्रियों को सेवा दी। यह संख्या पिछले साल की तुलना में 13.59 प्रतिशत अधिक है। किराया राजस्व में भी 11.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। एचएमआरटीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. चंद्रशेखर खरे ने बताया कि परिचालन व्यय में 6.33 प्रतिशत की कमी आई, जिससे वित्तीय स्थिति मजबूत हुई। गैर-किराया स्रोतों से आय भी बढ़ी और 21.11 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल 15.56 करोड़ रुपये थी। वित्तीय और विज्ञापन आय में बढ़ोतरी मेट्रो वायाडक्ट और पिलर्स पर 22 विज्ञापन स्थलों की ई-नीलामी से 58.34 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व की उम्मीद है। इसमें एचएमआरटीसी का हिस्सा 35 करोड़ रुपये से अधिक रहेगा। बैठक में क्षेत्र में चल रही अन्य मेट्रो और रैपिड रेल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की गई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने दिल्ली-रोहतक और गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा/ग्रेटर नोएडा नमो भारत कॉरिडोर की डीपीआर पर काम शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी। भविष्य की परियोजनाएं और लागत दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर का विस्तार 103.02 किमी से बढ़ाकर 136.30 किमी किया गया है, जिसमें 17 स्टेशनों की बजाय अब 21 स्टेशन शामिल होंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 33,051.15 करोड़ रुपये है, जिसमें हरियाणा का हिस्सा लगभग 7,472.11 करोड़ रुपये है। यह निवेश प्रदेश के वित्तीय और आर्थिक लाभ को बढ़ाने में मदद करेगा। बैठक में परिवहन, नगर एवं ग्राम आयोजना और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और परियोजनाओं की समय पर प्रगति सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

मानसून की विदाई के बीच इन जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी

जयपुर राजस्थान में इस बार करीब 2 महीने तक एक्टिव रहे मानसून में औसत से काफी ज्यादा बारिश हुई। कई जिलों में अच्छी बारिश के चलते लोगों को बड़ी राहत मिली लेकिन प्रदेश के कई हिस्सों में यह आफत बनकर बरसी। लगातार हुई बारिश के चलते ज्यादातर तालाब और बांध भी ओवरफ्लो हो गए। हनुमानगढ़, अजमेर सहित कई जिलों में लोगों के घर तक बह गए लेकिन अब राजस्थान में मानसून की विदाई होना शुरू हो चुकी है। सीमावर्ती क्षेत्र जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर से मानसून विदाई ले चुका है। साथ ही जोधपुर और नागौर के भी कुछ हिस्सों से भी मानसून की विदाई हो चुकी है। अब आगामी दिनों में पूरे प्रदेश से मानसून विदाई लेगा। ऐसे में बारिश की गतिविधियां भी न के बराबर रहेंगी। बता दें कि प्रदेश में इस बार 10 सितंबर तक मानसून एक्टिव रहा था, जिसके चलते लगातार कई दिनों तक अलग-अलग जिलों में तेज बारिश हुई थी। 10 सितंबर के बाद मानसून पर ब्रेक सा लग गया। कुछ ही इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। हालांकि आज झालावाड़, बारां, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कल 17 सितंबर को कोटा, बारां, झालावाड़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में यहां हल्की बूंदाबांदी से लेकर सामान्य दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके बाद प्रदेश में बारिश का कोई भी अलर्ट नहीं है। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा बताते हैं कि वैसे तो राजस्थान में मानसून की विदाई 17 सितंबर के नजदीक शुरू होती है लेकिन इस बार मानसून की विदाई पहले ही होना शुरू हो चुकी है। प्रदेश में लगातार उत्तर-पश्चिमी हवाओं का दबाव बढ़ाने की वजह से मानसून की विदाई पहले हो रही है। अब आगामी दिनों में प्रदेश में मौसम साफ रहने पर दोपहर के तापमान में तो बढ़ोतरी होगी ही। इसके साथ ही यहां सुबह और रात के समय हल्की ठंडक होना भी शुरू हो जाएगी। बात करें प्रदेश के तापमान की तो अजमेर में 33.5, जयपुर में 34.8, सीकर में 35, कोटा में 34.6, उदयपुर में 32.5,जोधपुर में 34.4 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।

युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर ठोस कार्ययोजना बनाएं: टंकराम वर्मा की अधिकारियों को हिदायत

रायपुर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने आज नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर उच्च शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता सुधार एवं राज्य की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों से कहा कि छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा को आधुनिक, नवाचारी और युवाओं के भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजनाओं पर अमल जरूरी है। मंत्री वर्मा ने बैठक में स्टेट हायर एजुकेशन प्लान (SHEP) का निर्माण, नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत, रूसा की प्रिपरेटरी ग्रांट एवं डडम्त् मद से प्रशिक्षण कार्यक्रम, राज्य उच्चतर शिक्षा योजना अंतर्गत भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य निर्धारण तथा संस्थागत विकास योजनाओं (IDP) के अनुरूप बजट अनुमान शामिल आदि विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजनाएं तैयार की जाएं, विशेषकर बस्तर और सरगुजा जैसे जनजाति बहुल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के विस्तार और नवाचार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने ‘नियद नेल्ला नार’ जैसे विशेष कार्यक्रमों और वन-औषधियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने हेतु विशेष कार्यक्रम, उच्च शिक्षा का डिजिटाइजेशन एवं डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास तथा साथी, समर्थ, एमओओसी, स्वयं, स्वयं प्रभा जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बल दिया। बैठक में स्टार्टअप, इनक्यूबेशन, इंटर्नशिप, पेटेंट और विश्व स्तरीय शोध को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक पहल करने पर सहमति बनी। अंत में, राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की गुणवत्ता सुधार हेतु नीतिगत निर्णय लेने की रूपरेखा तय की गई। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ. संतोष देवांगन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

पीने के पानी की किल्लत से गांव में फैली बीमारियाँ, प्रशासन बेखबर

लंबी  लंबी हल्के के गांव मिठड़ी बुद्धगिर के वार्ड एक में दर्जनों परिवारों के लिए साफ पानी की कमी दशक से भी अधिक समय से गंभीर चुनौती बनी हुई है। पानी सप्लाई पाइपों की गलत लेवलिंग के कारण 12 साल से वॉटर वर्क्स का पानी यहां नहीं पहुंचा। मजबूरीवश लोग सबमर्सिबल पंपों से 950 टीडीएस से अधिक वाला दूषित ज़मीन का पानी पी रहे हैं। दूषित पानी का सबसे बड़ा असर ग़रीब परिवारों पर पड़ा है। 70 वर्षीय जसदेव कौर को दूषित पानी पीने से गठिया की बीमारी हो गई और उनके हाथ-पांव टेढ़े-मेढ़े हो चुके हैं। अन्य परिवार भी त्वचा और बालों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी मध्य, लगभग 10 लाख रुपये की ग्रांट बीडीपीओ दफ़्तर लंबी में एक साल से पड़ी है, लेकिन स्थानीय आम आदमी पार्टी के दो धड़ों के बीच टकराव के कारण यह रुकी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक धड़ा ज़िद पर अड़ा है कि ग्रांट तभी जारी होगी, जब अकाली सरपंच, मंत्री की हाज़री लगाएगा। इस राजनीतिक अड़ंगे ने ग़रीब परिवारों की स्वास्थ्य व और दोनों को बर्बाद कर दिया है। लोगों को रोज़ाना 30-50 रुपये का आरओ पानी ख़रीदना पड़ता है और महीने में कई बार 1,000 रुपये प्रति टैंकर पानी मंगवाना पड़ता है। वार्ड निवासी अमनदीप कौर, बलदेव कौर, सरबजीत कौर और अन्य ने कहा कि ग़रीबी के साथ पानी की समस्या दोहरा नरक बन गई है। विधवा वीरपाल कौर ने बताया कि वह दो दिव्यांग पुत्रों का दुख झेल रही है। उसे पहले रोज़ाना घरों में झाड़ू-पोचा करना पड़ता है और बाद में पानी के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। भोली नामक महिला ने बताया कि पानी सप्लाई न आने के कारण उसने 8 हज़ार रुपये का कर्ज़ लेकर घर में बोरवेल लगवाना पड़ा है। भाकियू एकता उगराहां के नेता दलजीत सिंह व तरसेम सिंह ने आरोप लगाया कि पाइपों की बिगड़ी लेवलिंग के कारण यहां कभी पानी नहीं पहुंच सका, जबकि सरकारी ग्रांट होने के बावजूद नई पाइपलाइन नहीं डलवाई जा रही। वॉटर वर्क्स से बिना फ़िल्टर पानी सप्लाई 10 लाख रुपये की ग्रांट न लगने के कारण वॉटर वर्क्स का फ़िल्टर मीडिया फेल हो चुका है। इस वजह से गांव को बिना फ़िल्टर किया पानी ही सप्लाई किया जा रहा है। वार्डवासियों ने इस मुद्दे पर हाल ही में बीडीपीओ दफ़्तर लंबी के बाहर धरना भी दिया था।

आरपीएफ जवान को अंतिम सलामी, सड़क हादसे में मौत के बाद शव गृह ग्राम भेजा गया

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही ड्यूटी खत्म कर मोटरसाइकिल से खोंगसरा से वापस पेंड्रारोड लौट रहे आरपीएफ के जवान की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई. आरपीएफ ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर मृत जवान के शव को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिला स्थित गृह ग्राम के लिए रवाना किया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. जानकारी के अनुसार, 36 वर्षीय राम आसरे सरोज सोमवार को ड्यूटी खत्म करने के बाद मोटरसाइकिल से खोंगसरा से वापस पेंड्रारोड लौट रहे था, इसी दौरान रास्ते में स्वराज माजदा की ठोकर से सिर पर गंभीर चोट लगी. आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों ने जवान को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पोस्टमार्टम के बाद दिवंगत जवान को आरपीएफ ने मंगलवार को गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद उत्तरप्रदेश के प्रयागराज जिले स्थित गृह ग्राम के लिए रवाना किया गया. घटना से मृतक के परिजन जहां सदमे में हैं, वहीं स्थानीय आरपीएफ में मातम छा गया है.

युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री

संत कबीर के नाम पर उत्तर प्रदेश में स्थापित होंगे वस्त्र एवं परिधान पार्क: मुख्यमंत्री युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री बुनकरों की अपेक्षाओं को जानने-समझने के लिए हर जिले में हो संवाद, सस्ती बिजली और पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के की जरूरत: मुख्यमंत्री निवेश सारथी पोर्टल पर मिले हैं 659 प्रस्ताव, 15,431 करोड़ निवेश और 1 लाख से अधिक रोजगार अवसर का अनुमान प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित होगा, सहायक इकाइयों व सीईटीपी की होगी अनिवार्यता युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा: मुख्यमंत्री प्रदेश से 2023-24 में 3.5 अरब डॉलर का वस्त्र और परिधान निर्यात, देश के कुल निर्यात में 9.6% योगदान प्रदेश में वस्त्र क्षेत्र से 22 लाख लोगों को रोजगार, जीडीपी में 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र में निजी निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए विभिन्न जिलों में वस्त्र एवं परिधान पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक हथकरघा और वस्त्र उत्पादों की समृद्ध धरोहर वाला राज्य है, जिसकी क्षमता का सही उपयोग होने पर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वस्त्र एवं परिधान का वैश्विक बाजार वर्ष 2030 तक 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और भारत इसमें 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ते देशों में है। ऐसे परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की भागीदारी इस क्षेत्र में निर्णायक सिद्ध हो सकती है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि माना और यही भाव इस योजना का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के माध्यम से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा। बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष वस्त्र एवं परिधान निर्यातक राज्यों में शामिल है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है। इस क्षेत्र का प्रदेश की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत योगदान है, जबकि राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार पाने वाले लगभग 22 लाख लोग इससे जुड़े हैं। वाराणसी, मऊ, भदोही, मिर्जापुर, सीतापुर, बाराबंकी, गोरखपुर और मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टरों ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय परिधान मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। अधिकारियों ने बताया कि निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के लिए लगभग 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। कुल निवेश मूल्य 15,431 करोड़ रुपये आंका गया है और इसके फलस्वरूप लगभग 1,01,768 रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इनमें प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना अनिवार्य होगी। साथ ही बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयों के विकास की भी व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश प्रस्तावों को शीघ्र गति से क्रियान्वित करने हेतु भूमि की पहचान और विकास कार्य को तेज़ किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अथवा नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा, ताकि निवेशकों को समयबद्ध और सुगम सुविधाएं प्राप्त हों। सरकार की ओर से पार्कों तक सड़क, विद्युत और जलापूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को इस योजना का मुख्य लक्ष्य बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क योजना न केवल निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगी बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र एवं परिधान मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान भी दिलाएगी। बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम बुनकरों की उत्पादन लागत कम करने, आय बढ़ाने और परंपरागत वस्त्र उद्योग को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बुनकरों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बुनकर, परिश्रम और परंपरा के प्रतीक हैं। उनके हाथों से बना कपड़ा पूरे विश्व में पहचान रखता है। सरकार बुनकरों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है। बुनकरों से संवाद बनाकर उनकी अपेक्षाओं को जानने और समझने की आवश्यकता है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग द्वारा प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्यवाही के भी निर्देश दिए।

जनगणना कार्य के चलते स्थानांतरण पर अस्थायी प्रतिबंध, राजस्थान सरकार का आदेश

जयपुर   आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। जनगणना कार्य में नियुक्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का कार्य पूर्ण होने से पहले स्थानान्तरण नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया में निरंतरता और सटीकता बनाए रखने के लिए कार्मिकों का उसी पद पर रहना अनिवार्य है। यदि बीच में तबादले होते हैं तो डेटा संग्रहण और कार्य प्रणाली पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सभी कार्मिक अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाते हुए निर्धारित समय तक उसी स्थान पर बने रहेंगे, ताकि जनगणना का कार्य सुचारू और सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सके। राज्य स्तरीय समन्वय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न राजस्थान में प्रस्तावित जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य स्तरीय समन्वय समिति की पहली बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के 19 विभागों के प्रशासनिक सचिवों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने कहा कि यह बैठक आगामी फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना की प्रारंभिक तैयारी है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में की जाएगी, जिससे तहसील और गांव स्तर का सटीक डेटा उपलब्ध होगा। यह डेटा भविष्य की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का आधार बनेगा। एक जनवरी के बाद नहीं बदलेगी प्रशासनिक सीमाएं 31 दिसम्बर 2025 तक ही प्रशासनिक सीमाओं में परिवर्तन मान्य होगा। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से मार्च 2027 तक किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्वीकार्य नहीं होगा। अत: विभागों को 1 दिसम्बर 2025 से पहले इस प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने इसे एक राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए सभी विभागों से समन्वयपूर्वक कार्य करने का आह्वान किया। जनगणना का पहला चरण: मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मई-जून 2026 में जनगणना का पहला चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का किया जाएगा। गर्मी की तीव्रता को देखते हुए प्रगणकों एवं सुपरवाइजर्स को ओआरएस और प्राथमिक दवाओं के किट उपलब्ध कराने के निर्देश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को दिए गए। नए गांवों में 47 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का गृह मंत्रालय के जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने कहा कि ग्राम, नगर, तहसील और जिला स्तर की सीमाएं समय रहते स्थिर की जाएं। ताकि सटीकता बनी रहे। उन्होंने बताया कि भारत में बनी कुल नई तहसीलों में राजस्थान का 18 प्रतिशत और नए गांवों में 47 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए सीमाओं के निर्धारण का कार्य शीघ्र पूरा होना आवश्यक है। फरवरी 2027 में चलेगा जनगणना का दूसरा चरण उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी 2027 में जनगणना का दूसरा चरण जनसंख्या गणना का शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती और कार्यरत कार्मिकों का स्थानांतरण रोकने के निर्देश दिए गए। राज्य के नोडल अधिकारी एवं प्रमुख शासन सचिव, आयोजना एवं सांख्यिकी भवानी सिंह देथा ने अवगत कराया कि अब तक सभी तैयारियां निर्धारित समय में पूरी की गई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केन्द्र सरकार की समय सारणी के अनुसार जनगणना-2027 समय पर सम्पन्न होगी और राजस्थान देश की सबसे सटीक एवं डिजिटल जनगणना में अहम योगदान देगा।