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स्कूलों में रोजाना उपस्थिति और अन्य गतिविधियों की फोटो खिंच हो रही मॉनीटरिंग

–    सुदूर क्षेत्र के स्कूलों पर शैक्षणिक गतिविधियों की फोटोग्राफी से की जा रही है ऑनलाइन निगरानी –    पहली तीन घंटियों में गणित, विज्ञान और हिंदी या अंग्रेजी की रीडिंग को मिली प्राथमिकता –    20, 21 एवं 22 अगस्त को राज्य के सभी 38 जिलों के तीन-तीन स्कूलों की कराई गई रैंडम फोटोग्राफी      पटना, शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में अनुशासन के साथ शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं। इनका सही से अनुपालन हो रहा है या नहीं, इसे रोजाना परखा भी जा रहा है। सभी स्कूलों में सुबह लगने वाली एसेंबली एवं प्रार्थना का फोटोग्राफ मांगवाया जाता है। किस स्कूल में क्या गतिविधि हो रही है, इसका फोटोयुक्त प्रमाण चुनिंदा स्कूलों से मंगवाया जाता है। स्कूलों का चयन रैंडम तरीके से किया जाता है। इससे किसी स्कूल को यह जानकारी नहीं होती है कि उससे कब फोटो की मांग होगी। किसी स्कूल का नंबर कभी भी आ सकता है। इस कारण सभी स्कूल अलर्ट मुद्रा में रहते हैं और रोजाना पूरी शिदद्त से रूटीन पालन करते हैं। इससे सभी स्कूलों की जमीनी सच्चाई सामने आ जाती है।   शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ के स्तर से स्कूलों की चुस्त मॉनीटरिंग के लिए यह पूरी व्यवस्था विकसित की गई है। स्कूलों में चलने वाली शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों की निगरानी के लिए औचक फोटोग्राफ मंगवाना शुरू किया है। इन फोटो में संबंधित स्थान का आक्षांस एवं देशांश के अलावा समय समेत अन्य सभी जरूरी बातें अंकित होती हैं। इससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी स्कूलों में विभाग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है या नहीं। विभाग ने विगत 20, 21 और 22 अगस्त को राज्य के सभी 38 जिलों के तीन-तीन स्कूलों का रैंडम तरीके से चयन कर इनमें होने वाली गतिविधियों से सम्बंधित तस्वीरें मंगवा कर समुचित समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि इन स्कूलों में विभाग के दिशा-निर्देश के अनुसार गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था। अगर किसी स्कूल में सुबह निर्धारित समय की गतिविधि नहीं दिखती है, तो उसका कारण उस विद्यालय के प्रमुख को लिखित में बताना पड़ता है। किसी तरह की लापरवाही सामने आने पर उचित कार्रवाई भी की जाती है। डॉ. एस सिद्धार्थ के इन प्रयासों से सूबे के स्कूलों की पूरी सूरत ही बदल गई है।        सरकारी स्कूलों में छात्रों के आने का समय सुबह 9:30 बजे निर्धारित किया गया है। इसी समय शिक्षक को उपस्थित होकर बच्चों के साथ चेतना सत्र की पूरी अवधि में सक्रिय रहना अनिवार्य है। विद्यालय में पढ़ाई के दौरान शिक्षक और बच्चे दोनों का फोटोग्राफ लेकर सुरक्षित रखा जा रहा है। विभागीय पदाधिकारियों के स्तर से फोटो मांगे जाने पर उसे उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। बता दें कि इसे लेकर शिक्षा विभाग ने इसी वर्ष 4 अगस्त को एक अहम निर्देश जारी किया था, जिसका उद्देश्य राज्य के सरकारी स्कूलों में अनुशासन को सुदृढ़ बनाना और शिक्षकों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है।        यह आदेश शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों, अन्य संबंधित कार्यक्रम पदाधिकारियों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र लिखकर कई तरह के दिशा-निर्देश दिए हैं। इस पत्र के माध्यम से सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विद्यालयों में बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति समय पर हो और स्कूल में अनुशासन का माहौल बना रहे। इस अनुशासन के जरिए शिक्षकों पर पूरी निगरानी रखी जाएगी।         डॉ. एस सिद्धार्थ के इस लिखित आदेश के अनुसार, स्कूलों में लाउडस्पीकर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। स्कूल शुरू होने से 15 मिनट पहले राष्ट्रगान बजाया जा रहा है। चेतना सत्र शुरू होने से पहले स्कूल का मेन गेट बंद कर दिया जाता है और देर से आने वाले छात्रों को अगले दिन स्कूल में प्रवेश नहीं दिये जाने का नियम बनाया गया है। आधे घंटे के चेतना सत्र में प्रार्थना, बिहार राज्य गीत, राष्ट्रगीत, सामान्य ज्ञान, तर्क ज्ञान, शब्द ज्ञान और प्रेरक कहानियां सुनाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इस दौरान बच्चों के नाखून, बाल और यूनिफॉर्म की जांच भी की जा रही है। स्कूल की पहली तीन घंटियों में गणित, विज्ञान और हिंदी या अंग्रेजी की रीडिंग को प्राथमिकता दी जानी है, ताकि बच्चों में गणित कौशल, वैज्ञानिक नवाचार और वाक् कौशल विकसित हो सके।

पंजाब-हिमाचल को जोड़ते पुल पर बंद की गई आवाजाही! लोग परेशान

हाजीपुर  भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड द्वारा पौंग डैम से 74995 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद ब्यास दरिया पर बने एक महत्वपूर्ण रियाली मंड पुल को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। पानी का तेज बहाव और उच्च जलस्तर पुल के ढांचे पर दबाव डाल रहा है, जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यह पुल जो पंजाब हिमाचल को जोड़ता है। वर्तमान में भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पुल के दोनों ओर बैरिकेड लगा दिए हैं और लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। पुल की मरम्मत और सुरक्षा का आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजा गया है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए पौंग बांध से टर्बाइनों और स्पिलवे गेट के माध्यम से कुल 74995 क्यूसेक पानी शाह नहर बैराज में छोड़ा जा रहा है। शाम 6 बजे पौंग डैम झील में पानी की आवक 39 हजार 549 क्यूसेक नोट की गई और डैम का जलस्तर 1383.43 फीट दर्ज किया गया। शाह नहर बैराज से 63 हजार 270 क्यूसेक पानी ब्यास दरिया में और 11500 क्यूसेक पानी मुकेरियां हायडल नहर में छोड़ा जा रहा है। जलस्तर में अचानक वृद्धि से ब्यास नदी के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पंजाब के गुरुदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर और कपूरथला जिलों के निवासियों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और सभी आवश्यक कदम उठा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। 

बिहार के गांवों में तराशे जा रहे हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी

–    राज्य के कुल 8053 में से 7467 में खेल क्लबों के गठन के लिए चुनाव सम्पन्न –    154 नगर पंचायतों में से 140 में गठित हो चुके हैं खेल क्लब –    सभी ग्रामीण स्टेडियम में खेल की आधारभूत संरचनाओं के साथ उपलब्ध होंगी स्तरीय खेल प्रशिक्षक की सुविधाएं        पटना, बिहार सरकार राज्य में व्विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को तराशने का अभियान शुरू कर दिया है। खिलाड़ियों की क्षमतावर्द्धन और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए राज्य के हर ग्राम पंचायत से लेकर नगर पंचायतों में खेल क्लबों के गठन की प्रक्रिया लगभग हो चुकी है। इसके साथ ही, प्रखंडस्तर पर आउटडोर स्टेडियम का निर्माणकार्य भी तेजी से चल रहा है। इन स्टेडियमों में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल, हॉकी समेत कई अन्य खेलों के न केवल आयोजन की बल्कि इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को निखारने की सभी सुविधाएं शामिल हैं। इन क्लबों और स्टेडियमों में होने वाली खेल गतिविधियों में 14 से 45 वर्ष आयुवर्ग के खिलाड़ियों को शामिल किया जा रहा है। इन सभी ग्रामीण स्टेडियमों में विभिन्न खेलों के लिए न सिर्फ बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी बल्कि विभिन्न खेलों से जुड़े प्रशिक्षकों को बी यहाँ तैनात किया जा रहा है। ताकि खिलाड़ियों की प्रतिभा को तराशा जा सके। खेल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के सभी 38 जिलों के कुल 8053 ग्राम पंचायतों में से 7467 ग्राम पंचायतों में खेल क्लबों के गठन के लिए चुनाव सम्पन्न करा लिए गए हैं। जबकि शेष 586 ग्राम पंचायतों में क्लब के गठन के लिए चुनाव प्रक्रिया शीघ्र ही सम्पन्न कर ली जाएगी। इसी तरह, राज्य के कुल 154 नगर पंचायतों में से 140 नगर पंचायतों में भी क्लबों के गठन के लिए चुनाव सम्पन्न हो चुका है। शेष 14 नगर पंचायतों में भी यह अपने अंतिम चरण में है। विगत बुधवार को खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव बी राजेंदर ने विभाग की समीक्षा बैठक में अपने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शेष बचे सभी ग्राम व नगर पंचायतों के खेल क्लब के पदधारकों के चुनाव व चयन का कार्य पूर्ण कर उन पंचायतों को चिन्हित किया जाए, जहां क्लबों के पदाधिरियों के पद  रिक्त हैं। उन्होंने इसकी सूची विभाग को अविलंब उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस बैठक में खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री राजेंदर ने राज्य के सभी 534 प्रखंडों में बन रहे आउटडोर स्टेडियम के निर्माण की भी समीक्षा की। जिसमें पाया गया कि राज्य के 534 में से 257 प्रखंडों में स्टेडियम का निर्माणकार्य पूर्ण कर लिया गया है।    जबकि 46 प्रखंडों में स्टेडियम का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने समीक्षा बैठक में पाया कि २९ प्रखंडों में स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। जबकि दस प्रखंड स्तरीय स्टेडियम का निर्माण कार्य फिलहाल अपूर्ण है। उन्होंने ऐसे अधूरे व अनिर्मित स्टेडियम का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने के लिए बिहार राज्य भवन निर्माण निगम और संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया है।

इत्र की खुशबू और आध्यात्मिक सर्किट से महका उत्तर प्रदेश पर्यटन

पुरी में आईएटीओ सम्मेलन में उत्तर प्रदेश बना आकर्षण का केंद्र विगत साढ़े 8 वर्षों में योगी सरकार ने पर्यटन को दिया नया आयाम कन्नौज के इत्र और अयोध्या के दीपोत्सव ने सम्मेलन में बटोरीं सुर्खियां  2030 तक यूपी को भारत का सबसे विविध पर्यटन गंतव्य बनाने का लक्ष्य आस्था, संस्कृति और आधुनिकता का संगम है उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ धाम, श्रीराम मंदिर व कुंभ से अंतरराष्ट्रीय पहचान इको-टूरिज्म, वेलनेस और परफ्यूम टूरिज्म पर मुख्यमंत्री का फोकस लखनऊ/पुरी (ओडिशा), मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी विशेष पहचान बनाई है। ओडिशा के पुरी में चल रहे भारतीय पर्यटन ऑपरेटर संघ (आईएटीओ) के 40वें वार्षिक सम्मेलन में उत्तर प्रदेश चर्चा का मुख्य केंद्र रहा। 22 से 25 अगस्त तक आयोजित इस सम्मेलन का विषय “रीजुवेनेट इनबाउंड @2030” है और इसमें लगभग 1000 प्रतिनिधि (टूर ऑपरेटर, ट्रैवल मीडिया, होटल उद्योग और नीति निर्माता) शामिल हुए हैं। सम्मेलन के पहले ही दिन उत्तर प्रदेश पर्यटन का स्टॉल सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना, जहां कन्नौज की सैकड़ों साल पुरानी इत्र बनाने की परंपरा, काशी-अयोध्या-प्रयागराज का आध्यात्मिक त्रिकोण और दीपोत्सव व रंगोत्सव जैसे भव्य सांस्कृतिक आयोजनों की झलक प्रस्तुत की गई। विशेष रूप से कन्नौज के इत्र और परफ्यूम टूरिज्म ने प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे विविधतापूर्ण पर्यटन गंतव्य स्टॉल का उद्घाटन ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रावती परिदा ने किया। सम्मेलन में भाग लेते हुए पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आईएटीओ सम्मेलन हमारे लिए बड़ा अवसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे विविधतापूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाया जा रहा है। कन्नौज का इत्र, दीपोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजन और धार्मिक धरोहर हमारे पर्यटन की खास पहचान हैं। हमारा लक्ष्य है कि 2030 तक यहां आने वाला हर पर्यटक यूपी की संस्कृति और आध्यात्मिकता से गहरा जुड़ाव महसूस करे। पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल अपनी धरोहर और स्मारकों को दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां नई पर्यटन सुविधाएं, निजी निवेश और नए अनुभवों पर भी तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि नदी पर्यटन, वेलनेस, एग्रो टूरिज्म और परफ्यूम टूरिज्म जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे प्रदेश आने वाले पर्यटकों को एक संपूर्ण अनुभव मिलेगा। यूपी टूरिज्म पर विशेष चर्चा सम्मेलन के पहले दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नेटवर्किंग सत्रों में रामायण सर्किट, वाराणसी के रिवरफ्रंट और दुधवा-बुंदेलखंड के इको-टूरिज्म पर विशेष चर्चा हुई। इन चर्चाओं ने यह साफ किया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन केवल धार्मिक धरोहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक और सतत पर्यटन मॉडल की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन ने बीते वर्षों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण, अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण, प्रयागराज में कुंभ का सफल आयोजन, मथुरा-वृंदावन में विकास कार्य, नए हवाईअड्डों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है। आज यूपी में आने वाला हर पर्यटक यहां की आस्था, संस्कृति और आधुनिकता का संगम देखता है।  यूपी का प्रयास, पर्यटक न केवल यादें, बल्कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिकता से जुड़ाव की भावना भी लेकर जाए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आईएटीओ सम्मेलन हमें उत्तर प्रदेश को भारत के सबसे बहुमुखी पर्यटन स्थल के रूप में प्रस्तुत करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है। कन्नौज में इत्र पर्यटन से लेकर दीपोत्सव जैसे विश्वस्तरीय सांस्कृतिक उत्सवों तक, हम ऐसे अनुभव निर्मित कर रहे हैं जो विरासत को नवीनता के साथ जोड़ते हैं। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्ष 2030 तक, उत्तर प्रदेश आने वाला प्रत्येक पर्यटक न केवल यादें, बल्कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिकता से जुड़ाव की भावना भी लेकर जाए। अगले दो दिन तक जारी रहेगा कार्यक्रम अगले दो दिनों तक उत्तर प्रदेश पर्यटन सम्मेलन में अपने कार्यक्रम जारी रखेगा और निवेशकों व साझेदारों को प्रदेश में पर्यटन की नई संभावनाएं दिखाएगा। यह सम्मेलन साबित करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश न केवल भारत के पर्यटन का भविष्य गढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। इस अवसर पर पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के महानिदेशक सुमन बिल्ला, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की चेयरमैन नीलू शर्मा और उत्तर प्रदेश पर्यटन के अधिकारी मौजूद थे।

हरियाणा के खिलाड़ियों की हुई मौज, इस गांव में बनेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

रोहतक  हरियाणा के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी आई है। रोहतक के गांव खरावड़ में आधुनिक सुविधा से लैस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। इसके बनने से गांव के खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए कहीं बाहर या फिर प्राइवेट एकेडमी में नहीं जाना होगा। जानकारी के मुताबिक खरावड़ ग्राम पंचायत गांव में ही आधुनिक सुविधाओं से लैस स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का निर्माण करवाने जा रही है। इसके लिए पंचायत ने 2.02 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार कर HSRDC को भेज दिया है। जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। 

मंत्री ए.के. शर्मा की अध्यक्षता में नगर विकास विभाग की वर्चुअल समीक्षा बैठक संपन्न

सामान्य जल भराव व बाढ़ प्रभावित जनपदों में जलस्तर कम होने के साथ ही सभी क्षेत्रों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जाए 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और अपशिष्ट निस्तारण पर जोर अगले 3 महीने व्यापक सफाई अभियान करने के निर्देश संचारी रोग फैलने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई नगरों के आसपास कूड़े के पहाड़ और गलियों में परंपरागत कूड़े के ढेर अब नगरों की शब्दावली से होंगे दूर बड़े निकाय छोटे निकायों का कूड़ा लेकर उन्हें प्रोसेस करें बाढ़ प्रभावित जिलों में फ्लड मैन्युअल बनाने के निर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन से दो अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा चलाया जाए :मंत्री   के शर्मा लखनऊ, नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री  ए.के. शर्मा की अध्यक्षता में नगर विकास विभाग की वर्चुअल समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जल स्तर कम होते ही स्वच्छता अभियान चलाने, बाढ़ प्रभावित जिलों में नगर विकास विभाग द्वारा अपना फ्लड मैन्युअल बनाने एवं प्रधानमंत्री जी के जन्मदिन से दो अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा चलाए जाने के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान मंत्री शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही नगर निकायों में व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाए।उन्होंने अगले तीन महीने तक व्यापक स्वच्छता अभियान चलाए जाने के दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में संचारी रोग फैलने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए प्रत्येक अधिकारी एवं निकायकर्मी इसकी विशेष निगरानी रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में लापरवाही बरती गई और संचारी रोग फैलने की स्थिति उत्पन्न हुई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। मंत्री शर्मा ने सभी बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए फ्लड मैनुअल तैयार करने के निर्देश दिए ताकि बाढ़ प्रबंधन एवं राहत कार्य समयबद्ध और प्रभावी ढंग से किए जा सके। उन्होंने कहा कि अक्सर अधिकारियों के स्थानांतरण होते रहते हैं, फ्लड मैन्युअल से किसी भी अधिकारी को बाढ़ की चुनौतियों से निपटने के लिए अग्रिम कार्य योजना बनाने एवं आवश्यक कार्यवाही करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नगर विकास मंत्री ने सामान्य जल भराव के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी जनपदों के अधिकारी सामान्य जल भराव वाले क्षेत्रों में जाएं, वहां कारण पता करें और ऐसे स्थाई उपाय करें कि भविष्य में वहां जल भराव की स्थिति उत्पन्न ना हो।इसके साथ ही संपूर्ण कार्य का डॉक्यूमेंटेशन भी करें।उन्होंने लखनऊ विधानसभा परिसर का उदाहरण देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया की जो भी उपाय हो वह स्थाई और ऐसे हो कि अगले वर्ष वहां जल भराव किसी भी कीमत पर ना हो। इसके अतिरिक्त, नगर विकास मंत्री ने स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष बल देते हुए कहा कि सभी नगर निकाय यह सुनिश्चित करें कि 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हो तथा 100% अपशिष्ट निस्तारण की व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में लखनऊ मॉडल को अपनाते हुए सभी नगर निकाय प्रभावी ढंग से कार्य करें।बैठक में नगर विकास मंत्री ने यह भी कहा कि स्वच्छता और अपशिष्ट निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार के लिए तकनीक और नवीन उपायों का उपयोग किया जाए। नगर विकास मंत्री ने कहा की नगरों के पास आसपास कूड़े के पहाड़ और गलियों में परंपरागत कूड़े के जो देर हैं अब नगरों के शब्दावली से दूर होने चाहिए उन्होंने बड़े निकायों को छोटे निकायों का कूड़ा लेकर प्रोसेस करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे अपने-अपने स्तर से स्वच्छता अभियान में सहयोग करें और कूड़ा इधर-उधर न फेंके।नगर विकास मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन से दो अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा चलाए जाने के निर्देश दिए। बैठक में वाराणसी,प्रयागराज के साथ ही विभिन्न जिलों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी दी।मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की शहरी निकायों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए।इस बैठक में राजधानी लखनऊ से वरिष्ठ अधिकारी अजय कुमार शुक्ला,अनुज झा,ऋतु सुहास सहित सभी संबंधित जिलों के अधिकारी वर्चुअल जुड़े रहे।

31 अगस्त को भागीदारी भवन में आयोजित होगा ‘विमुक्त जाति दिवस’

– सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश में सामाजिक समावेश को बढ़ावा दे रही राज्य सरकार – विमुक्त जातियों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित कर रही है योगी सरकार लखनऊ, योगी सरकार समाज के हाशिए पर रहे विमुक्त जाति समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में 31 अगस्त को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में ‘विमुक्त जाति दिवस’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से विमुक्त जाति समुदाय के लोग हिस्सा लेंगे, जो सामाजिक समावेश और सशक्तीकरण का प्रतीक होगा। ‘विमुक्त जाति दिवस’ का ऐतिहासिक महत्व है। 31 अगस्त 1952 को भारत सरकार ने अंग्रेजों द्वारा थोपे गए काले कानून ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ को समाप्त किया था, जिसने कई समुदायों को अपराधी घोषित कर उनके अधिकार छीन लिए थे। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार इस दिन को ‘विमुक्त जाति दिवस’ के रूप में मनाकर इन समुदायों को सम्मान और नई पहचान दे रही है। योगी सरकार विमुक्त जातियों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित कर रही है। इसके तहत विमुक्त जाति के लोगों को पट्टे पर भूमि आवंटन की सुविधा भी प्रदान की जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने विमुक्त जातियों के लिए समावेशी विकास को प्राथमिकता दी है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाएं इन समुदायों को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और आवासीय योजनाओं के माध्यम से इनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि विमुक्त जाति के लोग समाज की मुख्यधारा में शामिल हों और उनके बच्चे उच्च शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बनाएं। यह कार्यक्रम न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा, बल्कि विमुक्त जातियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगा। योगी सरकार की यह पहल विमुक्त जाति समुदाय के लिए नई आशा और अवसरों का प्रतीक है, जो उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रोटोकॉल विवाद में फंसे यूपी मंत्री का बेटा, निजी सचिव को पद से हटाया गया

लखनऊ योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह को प्रोटोकॉल दिलाने का पत्र जारी करना मंत्री के निजी सचिव को महंगा पड़ा। इस मामले नाराजगी जताते हुए स्वतंत्रदेव सिंह ने अपने निजी सचिव आनंद शर्मा को हटा दिया है। कहा जा रहा है कि मंत्री की बिना जानकारी में लाए निजी सचिव द्वारा यह पत्र जालौन के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जारी किया गया था। हालांकि इस मामले के तूल पकड़ने और मीडिया में आने के बाद आनंद शर्मा ने पत्र को फर्जी करार दिया। बता दें कि मंत्री पुत्र अभिषेक सिंह को जालौन में आयोजित तिरंगा यात्रा में भाग लेने जाना था। कोई आधिकारिक पद न होने के बावजूद मंत्री के निजी सचिव द्वारा जालौन के डीएम-एसपी को मंत्री पुत्र को प्रोटोकॉल दिलाने के लिए पत्र जारी कर दिया गया था। यह पत्र गत दिवस वायरल हो गया था। शुक्रवार को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह द्वारा बिना जानकारी में लाए इस तरह का पत्र जारी करने पर पद से हटा दिया। विपक्ष साध रहा था निशाना जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बेटे को प्रोटोकॉल देने को लेकर जारी हुए पत्र के वायरल होते ही विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया था। सपा और कांग्रेस के नेता इस पर सवाल खड़े कर रहे थे। 14 अगस्त को मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के निजी सचिव आनंद कुमार द्वारा जालौन के डीएम और एसपी को भेजे गए पत्र में अभिषेक सिंह को स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के दिन प्रोटोकॉल दिए जाने का उल्लेख था। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया था। इसके बाद सवाल उठाया जाने लगा कि आखिर किस आधार पर मंत्री के परिवार के किसी सदस्य को प्रशासनिक प्रोटोकॉल दिया जा सकता है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को तत्काल घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता विश्वविजय सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा- ‘वंशवाद को लेकर सर्वाधिक शोर मचाने वाली भाजपा के सरकार में अब मंत्री पुत्र को भी प्रोटोकॉल! जलशक्ति मंत्री के पुत्र को बिना किसी पद पर रहते प्रोटोकॉल देना यूपी भाजपा सरकार के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।’ सोशल मीडिया पर कई अन्य लोगों ने यह पत्र साझा करते हुए सवाल उठाए थे।  

अब दूसरे राज्यों में भी नहीं बच पाएंगे बिहार के गुनेहगार! STF ने दबोचे 64 कुख्यात

अब किसी कोने में नहीं छिप पाएंगे अपराधी, बिहार पुलिस का ऑपरेशन जारी पटना,  बिहार में अपराध करके दूसरे राज्यों में छिपने वाले अपराधियों के दिन अब लद गए हैं। इस साल जनवरी से अब तक पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने देशभर के कई राज्यों से 64 कुख्यात और इनामी अपराधियों को दबोचा है। सबसे ज्यादा 14 अपराधी दिल्ली से पकड़े गए, जबकि पश्चिम बंगाल से 9 की गिरफ्तारी हुई है। यहां से दबोचे गए 64 कुख्‍यात एडीजी (अभियान एवं मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने बताया कि भगोड़े अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। संगठित आपराधिक गिरोहों का सफाया STF की प्राथमिकता है। उन्होंने खुलासा किया कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश और गुजरात 7-7 अपराधी, झारखंड से 6, हरियाणा से 5, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से 4-4, हिमाचल और पंजाब से 2-2 समेत राजस्थान, गोवा, उड़ीसा, उत्तराखंड, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर से भी अपराधियों को पकड़ा गया है। नक्‍सल पड़े कमजोर, अपराधियों पर फोकस एडीजी मुख्‍यालय कुंदन कृष्णन ने बताया कि बिहार में नक्सली हिंसा अब कमजोर पड़ चुकी है। जिसके बाद STF का फोकस अपराधी गिरोहों और उनकी सप्लाई चेन तोड़ने पर है। यही वजह है कि इस साल अब तक 857 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 752 था। बताते चलें 2024 में 44 नक्सली गिरफ्तारी हुई। ज‍बकि इस साल अब तक 101 नक्सली पकड़े जा चुके हैं। इनामी बदमाशों की गिरफ्तारियां STF ने कई बड़े इनामी अपराधियों को दबोचा है। एडीजी मुख्‍यालय और अभियान ने बताया कि इनामी बदमाशों की लिस्‍ट में बुटन चौधरी, 2 लाख का इनामी बदमाश था। जिसे महाराष्ट्र के उदवंतनगर से 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। दिल्‍ली से सुबोध सिंह को दबोचा गया। यह इंटर-स्टेट सोना लुटेरा था। जिसे 5 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। विकास उर्फ जॉन राइट भी इनामी बदमाश था। इस पर 2 लाख का इनामी घोषित था। जिसे दिल्‍ली से गिरफ्तार किया गया। वहीं, 1 लाख के इनामी नक्सली राजेश यादव को महाराष्ट्र से पकड़ा गया और मनीष नाम के 50 हजारी अपराधी को दिल्ली के पहाड़गंज से दबोचा गया। मनीष सीवान-गोपालगंज का नामी बदमाश था। ऑपरेशन में जवानों को मिली सर्वोच्‍च गति एडीजी कृष्णन ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के ऑपरेशन में STF के कई जवानों ने जान गंवाई है। गुजरात के सूरत में ऑपरेशन के दौरान हुए हादसे में दारोगा मुकुंद मुरारी, जेसी विकास कुमार, जेसी जीवधारी कुमार, दारोगा संतोष कुमार और मिथिलेस पासवान की मौत हो गई थी। जिन्‍होंने पुलिस सेवा के दौरान सर्वोच्‍च गति प्राप्‍त की।

बधाई के बहाने 1 लाख की मांग, हिसार में किन्नरों पर कार्रवाई, पुलिस आई बीच

हिसार  हिसार में पुलिस कर्मचारी के घर पोता होने पर बधाई मांगने पहुंचे किन्नरों द्वारा एक लाख रुपए का शगुन मांगने पर हंगामा हो गया। परिवार ने 5 हजार से ज्यादा रकम न देने से मना कर दिया, जबकि किन्नर 1 लाख रुपए लेने पर अड़े रहे। विवाद बढ़ने पर किन्नरों ने ऊंची आवाज में बोलना शुरू कर दिया। मामला अधिक उलझता देख परिवार ने डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को देख किन्नरों के तेवर ढीले पड़ गए। 2 घंटे तक चले हंगामे के बाद में किन्नर परिवार की मर्जी से दो हजार रुपए पैसे लेने पर राजी हो गए। जानकारी के मुताबिक यह मामला हिसार के गांव शिकारपुर का है। गांव के रहने वाले पुलिस हवलदार सतबीर घोड़ेला के परिवार में 6 दिन पहले पोते का जन्म हुआ था। आज इसकी खबर किन्नरों को चली तो वे बधाई मांगने पहुंच गए। सतबीर के बेटे प्रवीण ने बताया कि घर में आते ही किन्नरों ने मंगल गीत गाने शुरू कर दिए। यह देख आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। परिवार ने भी किन्नरों का स्वागत किया, मगर मंगल गीतों के बाद जब बधाई देने का वक्त आया तो किन्नरों ने एक लाख रुपए की मांग रख दी जिसे सुनकर परिवार के होश उड़ गए। परिवार ने पहले  5 हजार और दो सूट देने की बात कही थी।  प्रवीण ने किन्नरों को बताया कि हमारे खेत पानी में डूबे हुए हैं और अभी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बाद किन्नरों ने 51 हजार देने की बात कही। प्रवीण के मुताबिक जब वो नहीं माने तो मजबूर होकर मुझे डायल 112 बुलानी पड़ी। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और मामले की जानकारी ली। पुलिसकर्मी संदीप कुमार ने बताया कि परिवार का आरोप था कि किन्नर जबरदस्ती कर रहे हैं और मान नहीं रहे। उधर पुलिस को देख किन्नरों के तेवर भी ढीले पड़ गए। पुलिसकर्मियों के समझाने पर किन्नर परिवार की मर्जी से पैसे लेने पर राजी हो गए। वहीं इस मामले में किन्नरों ने कहा कि यह परिवार नौकरी पेशे वाला परिवार है, इसलिए यहां हमने 11000 रुपए मांगे। गांव में गरीब घरों में हम 200 से 300 रुपए भी लेते हैं। परन्तु यह परिवार नहीं माना। बाद में परिवार ने जो खुशी से दिया, हमने ले लिया।