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हतारी वंदन से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता को मिल रही नई उड़ान

रायपुर  महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उन्हें अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की जरूरतों में सहयोग करने और आर्थिक निर्णयों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भागीदारी का अवसर दे रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाले विकास को विकसित भारत 2047 की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया है। उनका विजन है कि महिलाएं केवल विकास की लाभार्थी न रहें, बल्कि विकास की नेतृत्वकर्ता और भागीदार बनें। वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और शासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका इसी सोच को आगे बढ़ाती है। इसी व्यापक सोच का जमीनी प्रभाव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सारबहरा की कविता चक्रधारी के जीवन में भी दिखाई देता है। कविता महतारी वंदन योजना की हितग्राही हैं। उन्होंने बताया कि योजना की 31वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। उनके लिए यह राशि रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। तीज-त्योहार से पहले खाते में राशि आने से बढ़ी खुशी कविता चक्रधारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि तीज-त्योहार के समय घर-परिवार की कई छोटी-छोटी जरूरतें सामने आती हैं। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचना उनके लिए विशेष रूप से मददगार है। त्योहार से पहले राशि मिलने से उनकी खुशी और भी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि इस सहायता से आवश्यक घरेलू खर्चों को पूरा करने में सुविधा होती है और परिवार की जरूरतों में भी सहयोग मिल पाता है। आर्थिक सहायता से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास कविता ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में अपनी आवश्यकताओं को लेकर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम होने से महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण केवल किसी एक परिवार की स्थिति को बेहतर नहीं करता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जब महिला अपने खर्च और आवश्यकताओं को लेकर निर्णय लेने में सक्षम होती है, तो परिवार के आर्थिक प्रबंधन में भी उसकी भूमिका मजबूत होती है। कविता जैसी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे परिवारों के जीवन में दिखाई देता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। महिला सशक्तिकरण से विकसित भारत की ओर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन में नारी शक्ति को विकसित भारत की निर्माण यात्रा का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। महिला नेतृत्व वाले विकास की यह अवधारणा महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उन्हें विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। योजना से जुड़ी कविता चक्रधारी की कहानी यह दर्शाती है कि आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं के दैनिक जीवन में सुविधा के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त होने पर कविता चक्रधारी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित ऐसी योजनाओं से उन्हें नियमित आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं। कविता के चेहरे की खुशी और उनके शब्दों में व्यक्त संतोष सेवा संकल्प अभियान की उस भावना को सामने लाता है, जिसमें जनसेवा, जनभागीदारी और योजनाओं के जमीनी प्रभाव को केंद्र में रखा गया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल उनके जीवन में बदलाव नहीं लाता, बल्कि मजबूत परिवार, आत्मनिर्भर समाज और विकसित भारत की नींव को भी मजबूत करता है।

‘बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ के तहत शहीदों की याद में 1986 स्थानों पर जलाए गए दीये

रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के राष्ट्रसेवा एवं जनसेवा के संकल्प के लिए मनाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान को नया आयाम मिला जब गुरुवार को इस अभियान के अंतर्गत बस्तर के शहीदों की याद में 'बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पूरे बस्तर संभाग में विशेष दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बस्तर की नक्सल हिंसा से प्रभावित रही धरती पर शांति, विकास और सेवा के संकल्प के साथ 1986 स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें नक्सल हिंसा में प्रभावित एवं जनहानि वाले गांव, पुनर्वास केंद्र, शहीद स्मारक एवं प्रतिमा स्थल, नक्सल उन्मूलन अभियान में सुरक्षा जवानों को जनसमर्थन देने वाले स्थान, सुरक्षा कैंप, पुलिस थाने तथा पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे गांव शामिल रहे। अभियान का उद्देश्य बस्तर के उन क्षेत्रों में सेवा, शांति और विश्वास की रोशनी पहुंचाना रहा, जिन्होंने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। इसमें कांकेर से लेकर झीरम घाटी,  सुकमा के कोंटा और कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर भी द्वीप जलाए गए। नक्सल हिंसा के साक्षी रहे 107 गांवों में जले दीप बस्तर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ऐसे 107 गांवों में दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जहां पूर्व में बड़ी नक्सल घटनाएं हुई थीं और बड़ी संख्या में जवानों अथवा आम नागरिकों की मृत्यु हुई थी। इनमें बीजापुर के 40, सुकमा के 31, दंतेवाड़ा के 11, नारायणपुर के 11, कांकेर के 9, कोंडागांव के 3 और बस्तर जिले के 2 गांवों में दीए जलाए गए। इन गांवों में दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से हिंसा के अंधकार से शांति और विकास की ओर बढ़ते बस्तर का संदेश दिया गया। पुनर्वास केंद्रों से लेकर शहीद स्मारकों तक पहुंची दीपों की रोशनी       बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में स्थापित 9 पुनर्वास केंद्रों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें बीजापुर में 3 और सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर में एक-एक पुनर्वास केंद्र शामिल हैं। इसी तरह शहीदों की स्मारक प्रतिमाओं एवं स्मृति स्थलों के समीप 177 स्थानों पर दीप जलाकर बस्तर की शांति और सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों को नमन किया गया। इनमें बीजापुर में 5, सुकमा में 12, दंतेवाड़ा में 13, नारायणपुर में 23, कांकेर में 82, कोंडागांव में 32 और बस्तर में 10 स्थान शामिल हैं। नक्सल उन्मूलन अभियान में सुरक्षा जवानों का साथ देने वाले स्थान भी हुए रोशन    अभियान के तहत उन 147 स्थानों पर भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जहां नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान सुरक्षा जवानों को स्थानीय लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। इनमें बीजापुर के 31, सुकमा के 59, दंतेवाड़ा के 6, नारायणपुर के 27, कांकेर के 5, कोंडागांव के 16 और बस्तर जिले के 3 स्थान शामिल हैं। इसके अलावा नक्सल उन्मूलन अभियान के उद्देश्य से स्थापित 393 सुरक्षा कैंपों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। बीजापुर में 130, सुकमा में 91, दंतेवाड़ा में 38, नारायणपुर में 56, कांकेर में 55, कोंडागांव में 10 और बस्तर में 13 सुरक्षा कैंपों में दीप जलाए गए। 122 थानों में भी जला सेवा और सुरक्षा का दीप    बस्तर संभाग के 122 पुलिस थानों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें बीजापुर के 22, सुकमा के 19, दंतेवाड़ा के 12, नारायणपुर के 14, कांकेर के 25, कोंडागांव के 15 और बस्तर जिले के 15 थाने शामिल हैं। यह दीप उन जवानों और पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान का प्रतीक बने, जो बस्तर में शांति एवं सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे 1,031 गांवों में भी रोशन हुआ हर घर    ‘बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ का सबसे व्यापक स्वरूप पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे, जहां नक्सलियों का डेरा रहा, ऐसे 1,031 गांवों में देखने को मिला। इन गांवों में भी दीप प्रज्ज्वलित कर शांति और विकास के नए दौर का स्वागत किया गया। इनमें बीजापुर के 593, सुकमा के 32, दंतेवाड़ा के 192, नारायणपुर के 93, कांकेर के 85, कोंडागांव के 22 और बस्तर जिले के 14 गांव शामिल हैं। सात जिलों में एक साथ जली सेवा संकल्प की ज्योति    बस्तर संभाग के सातों जिलों में आयोजित इस विशेष दीप प्रज्ज्वलन अभियान में बीजापुर में 824, दंतेवाड़ा में 273, कांकेर में 262, सुकमा में 245, नारायणपुर में 225, कोंडागांव में 99 और बस्तर जिले में 58 स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इस प्रकार संभाग में कुल 1,986 स्थानों पर सेवा संकल्प की ज्योति प्रज्वलित हुई।          बस्तर सेवा संकल्प अभियान के तहत जलाए गए ये दीप केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, बल्कि नक्सल हिंसा से शांति की ओर बढ़ते बस्तर, शहीदों के सम्मान, सुरक्षा जवानों के प्रति कृतज्ञता और विकास के नए संकल्प का प्रतीक बने। बस्तर के उन गांवों और क्षेत्रों में, जहां कभी हिंसा और भय का वातावरण रहा, दीपों की रोशनी ने यह संदेश दिया कि अब बस्तर शांति, विश्वास और विकास के नए अध्याय की ओर आगे बढ़ रहा है।

लखपति दीदी बनीं कमलेश यादव, मेहनत और स्वसहायता समूह के सहारे लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर  सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की सफलता की कहानियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मंझगवा की कमलेश यादव की कहानी भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। कभी छोटे-से व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाली कमलेश यादव आज अपनी मेहनत, हुनर और स्वसहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग के बल पर ‘लखपति दीदी‘ के रूप में नई पहचान बना रही हैं। कमलेश यादव वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हुए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आरएफ, सीआईएफ और बैंक लोन के माध्यम से वित्तीय सहयोग मिला। कमलेश ने इस सहयोग का उपयोग केवल आर्थिक सहायता के रूप में करने के बजाय इसे आय का स्थायी साधन बनाने की दिशा में लगाया। उन्होंने प्राप्त सहयोग से चिकन स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। इसके साथ ही वे सिलाई का कार्य भी कर रही हैं। व्यवसाय और हुनर के इन दोनों माध्यमों ने उनकी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कमलेश यादव की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि जब महिलाओं को संगठित होने का मंच, आर्थिक संसाधनों तक पहुंच और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकती हैं। आज कमलेश की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है। आर्थिक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी और आत्मविश्वास के साथ वे ‘लखपति दीदी‘ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के विजन से जुड़ी ऐसी कहानियां देश में महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के विजन में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना महत्वपूर्ण पहल है। लखपति दीदी‘ की अवधारणा भी ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की इसी सोच से जुड़ी है। कमलेश यादव की सफलता इस विजन के स्थानीय स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव का उदाहरण है। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय संसाधन मिले और उन्होंने अपनी क्षमता तथा मेहनत के आधार पर व्यवसाय खड़ा किया। चिकन स्टोर और सिलाई के माध्यम से आय के अलग-अलग स्रोत विकसित कर उन्होंने यह साबित किया कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को आजीविका और व्यवसाय में बदल सकती हैं।  कमलेश यादव का कहना है कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समूह के माध्यम से मिले वित्तीय सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया। वे अपनी सफलता के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिल रहा सहयोग उनके जैसे अनेक परिवारों के लिए नई उम्मीद और बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार कर रहा है। गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा कमलेश यादव की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनकी कहानी बताती है कि स्वसहायता समूह से जुड़कर महिलाएं सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकती हैं, वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर सकती हैं और अपने पारंपरिक हुनर को आय के स्थायी साधन में बदल सकती हैं। कमलेश की यात्रा सपने से शुरुआत, समूह से जुड़ाव, आर्थिक सहयोग, व्यवसाय की स्थापना और अंततः ‘लखपति दीदी‘ की पहचान तक पहुंचने की कहानी है। यह कहानी बताती है कि सही अवसर, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।  महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपने निर्णय लेने, रोजगार के साधन विकसित करने और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में एक निरंतर प्रक्रिया है।  

PAVITRA से प्रदूषण नियंत्रण होगा वैज्ञानिक और डेटा आधारित, जयपुर में अधिकारियों को दी गई तकनीकी जानकारी

जयपुर  राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की ओर से PAVITRA  भारत के लिए वायु प्रदूषण प्रबंधन एवं हस्तक्षेप उपकरण विषय पर शुक्रवार को कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, उत्सर्जन का आकलन तथा प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक एवं आंकड़ा आधारित विश्लेषण करने के संबंध में अधिकारियों को तकनीकी जानकारी दी गई। इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंडल द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के किए जा रहे विभिन्न उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर आरएसपीसीबी के।अधिकारियों ने कार्यशाला में PAVITRA की कार्यप्रणाली, आंकड़ा विश्लेषण एवं इसके व्यावहारिक उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की  PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तावित नीतिगत एवं नियंत्रण उपायों के आधार पर उत्सर्जन में संभावित कमी तथा उसके परिणामस्वरूप वायु में सूक्ष्म कण पीएम-2.5 की सांद्रता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जा सकता है। इससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। प्रस्तुति के दौरान विशेषीकृत बहु-प्रदूषक उत्सर्जन सूची—स्मॉग इंडिया— वायुमंडलीय परिवहन एवं रसायन विज्ञान आधारित मॉडल इनमैप-पवित्रा तथा आईएसआरएम-पवित्रा सहित PAVITRA के विभिन्न तकनीकी घटकों की जानकारी दी गई। बताया गया कि स्मॉग इंडिया के माध्यम से देशभर में विभिन्न प्रदूषकों के उत्सर्जन का विस्तृत आंकड़ा आधारित भौगोलिक विवरण उपलब्ध होता है, जिसे PAVITRA के माध्यम से वायुमंडलीय मॉडलिंग से जोड़कर विभिन्न हस्तक्षेपों के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकता है। कार्यशाला में PAVITRA डैशबोर्ड का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया गया। इसके माध्यम से अधिकारियों को यह समझाया गया कि किसी क्षेत्र में परिवहन, उद्योग, कृषि अवशेष जलाने, ईंधन में बदलाव तथा अन्य स्रोतों से संबंधित नियंत्रण उपायों को लागू करने की स्थिति में उत्सर्जन और पीएम-2.5 के स्तर में संभावित परिवर्तन का किस प्रकार आकलन किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA का उपयोग आधारभूत आकलन, कार्ययोजना के लिए प्राथमिकता निर्धारण, विभिन्न संभावित परिस्थितियों के आधार पर योजना निर्माण तथा क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग के लिए किया जा सकता है। इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों एवं प्रदूषण स्रोतों के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन कर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों की प्राथमिकता निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है। कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन में कमी लाने के संभावित उपायों पर भी चर्चा की गई। इनमें घरेलू क्षेत्र में एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना, घरों का विद्युतीकरण, कृषि अवशेष जलाने में कमी तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों में स्वच्छ ईंधन एवं तकनीक को अपनाना प्रमुख हैं। इन उपायों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किए जाने की प्रक्रिया भी समझाई गई। कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक आंकड़ों और वायुमंडलीय मॉडलिंग का उपयोग कर वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं को अधिक प्रभावी, लक्षित एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। PAVITRA जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म् से नीति निर्माण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी को व्यवहारिक निर्णयों से जोड़ने में सहायता मिलेगी। गौरतलब है कि, कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों में वैज्ञानिक आंकड़ों, तकनीकी मॉडलिंग एवं आधुनिक निर्णय-सहायक प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की PAVITRA परियोजना टीम द्वारा प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। ऑनसाइट प्रशिक्षण दल में PAVITRA परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. चंद्र वेंकटरामन, परियोजना प्रबंधक प्रिया अभिजीत चौधरी, शोध सहयोगी रुतुजा घाटे, शोध वैज्ञानिक डॉ. रोहित सिंह तथा शोध सहयोगी तेजस सरनाइक उपस्थित रहे। वहीं ऑनलाइन माध्यम से PAVITRA परियोजना की सह-प्रधान अन्वेषक प्रो. श्रीनिधि बालासुब्रमणियन एवं पीएचडी शोधार्थी गिरिवेंद्र प्रताप यादव ने प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्रों में सहभागिता की।

मोदी के जन्मदिन पर काशी से वडनगर रवाना हुए 250 बाइकर्स, 10 राज्यों के कार्यकर्ता होंगे शामिल

लखनऊ  भाजपा अभियानों के रथ पर चुनावी रंगमहल सजा देती है। सेवा संंकल्प अभियान के हर कार्यक्रम पर राजनीतिक संदेशों के फूल खिले हैं। पार्टी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को धार देते हुए दस राज्यों के कार्यकर्ताओं को काशी से वडगनर भेजा है जो विभिन्न लोकसभा एवं विधान सभा क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियां बताते एवं अपनी संस्कृतियों को साझा करते हुए निकलेंगे। सिक्किम, तलिलनाडु, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से काशी आकर फिर गुजरात के लिए निकले कार्यकर्ताओं के जरिए पार्टी यह संदेश भी दे रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सभी हिस्सों तक विकास पहुंचा है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई शक्ति मिली है। उधर, यात्रा के बहाने मिशन-2027 और 2029 की भी जमीन बनाई जाएगी। नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन पर भाजपा ने वाराणसी से ढाई सौ बाइकर्स को गंगाजल के साथ वडनगर भेजा है। टीम के साथ एक-एक एंबुलेस, बस और एलइडी वाहन भी चल रहा है। यूपी की दस नदियों के जल से काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद उड़ीसा, बिहार, बंगाल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, सिक्किम, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश समेत दस राज्यों के कार्यकर्ता भी यात्रा में शामिल हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर रहेगी नजर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा को यात्रा की जिम्मेदारी दी गई है। दस मार्गों से निकले कार्यकर्ता यूपी में 88 जगहों पर रात्रि विश्राम एवं चौपाल करेंगे। यहां पर राजनीतिक परिचर्चा के बहाने कार्यकर्ता यह भी जानेंगे कि क्षेत्र में कौन से चुनावी मुद्दे आकार ले रहे हैं। वह अपने राज्य की भाषा, खाद्य पदार्थ, सांस्कृतिक एवं धार्मिक प्रतीक एवं संस्थानों की विरासत भी लेकर चल रहे हैं। पिछले चार वर्ष से प्रधानमंत्री तमिल-काशी संगमम कार्यक्रम करा रहे हैं, जहां संस्कृतियों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य है। उधर, वडनगर के लिए निकली टीम 197 जगहों पर जलपान एवं संक्षिप्त संबोधन और एलइडी प्रदर्शन के लिए रुकेगी। इस दौरान टीम 826 विकासखंडों एवं 762 नगर निकायों को कवर करेगी। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्र ने बताया कि काशी और गुजरात के बीच दोनों तरफ से आने-जाने वाले कार्यकर्ता समर्पण, निष्ठा, संस्कार एवं संकल्प से भरे हुए हैं। वह चौपालों में सरकारों की उपलब्धियां बताएंगे।  

जल संरक्षण से जनभागीदारी तक, मल्हनिया जलाशय में गूंजा सेवा का संकल्प

रायपुर  ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला विकासखंड के ग्राम देवरगांव स्थित मल्हनिया जलाशय में ‘जल जन सेवा संकल्प‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, जलस्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सहभागिता रही। इस अवसर पर जल संरक्षण जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को जल के महत्व, जलस्रोतों की सुरक्षा तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और भविष्य के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। स्वच्छ जलाशय, स्वस्थ पर्यावरण का लिया संकल्प जल जन सेवा संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत मल्हनिया जलाशय एवं उसके आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। अभियान के दौरान जलाशय परिसर की साफ-सफाई करते हुए लोगों को जलस्रोतों में कचरा नहीं डालने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जलस्रोत ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण में निरंतर सहयोग करने की अपील की। जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण का अभियान ‘जल जन सेवा संकल्प‘ का उद्देश्य आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जलस्रोतों की स्वच्छता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों से जल का अनावश्यक अपव्यय रोकने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की। सेवा संकल्प अभियान में सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के माध्यम से जिले में जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक रूप दिया जा रहा है। जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ा यह आयोजन सेवा की भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मल्हनिया जलाशय में आयोजित कार्यक्रम ने लोगों को यह संदेश दिया कि जलस्रोतों और प्रकृति की सेवा भी समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जल संरक्षण जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान के माध्यम से ग्रामीणों में सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह पहल जिले में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने वाली रही।

युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर- मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप और उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के मार्गदर्शन व निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ शासन का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के अनुसूचित जनजातीय (ST) क्षेत्रों के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं में अंग्रेजी भाषा के सम्प्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 घंटे का एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।    उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने इस पहल को युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और हर योग्य विद्यार्थी को इसका लाभ मिले। ​मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार का ध्येय प्रदेश के दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी क्षमताओं से लैस करना है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम कार्यपालन समिति' का गठन किया गया है, जो इस 90-दिवसीय/घंटे के पाठ्यक्रम का संचालन और निगरानी करेगी। राष्ट्रीय गुणवत्ता सुधार एवं गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय के माध्यम से संचालित होगा। यह विशेष पाठ्यक्रम प्रदेश भर के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में संचालित किया जाएगा। इस पहल से दूरस्थ अंचलों में पढ़ने वाले युवाओं में अंग्रेजी में बातचीत करने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की झिझक दूर होगी, जिससे उन्हें रोजगार एवं उच्च शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।   ​ पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन, उच्च गुणवत्ता और प्रभावी अनुवीक्षण को सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम अनुवीक्षण समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक  आयोजित की गई। ​बैठक में समिति के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन की चरणबद्ध रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।

पंकज चौधरी ने यूपी बीजेपी संगठन में किया विस्तार, 13 नेताओं को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रदेश संगठन में प्रकोष्ठ, सोशल मीडिया से जुड़े पदों की घोषणा की है। आज जारी सूची में कुल 13 पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं। घोषणा के अनुसार ओम प्रकाश श्रीवास्तव को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक बनाया है। वहीं संतराम यादव, डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी को प्रकोष्ठ संकुल सह-संयोजक बनाया गया है। सुभाष यादुवंश को सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं गौरव वार्ष्णेय, विनीत मालवीय, अनुज चौधरी, मनोज मौर्य, निखिल सिन्हा और विवेक लवानिया को सोशल मीडिया सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयंत शिवाच, वाईके शर्मा और अभिमन्यु सिंह को सोशल मीडिया सदस्य बनाया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के हस्ताक्षर से जारी पदाधिकारी घोषणा में सभी नियुक्तियों का उल्लेख किया गया है। प्रदेश संगठन की नई टीम घोषित हुई थी इससे पहले यूपी चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी प्रदेश संगठन की नई टीम घोषित की थी। जिसमें 19 उपाध्यक्ष और 8 महामंत्री बनाए गए थे। संगठन में बड़े चेहरों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह, विधायक पूजा पाल, सुरेश राणा को प्रदेश उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई। यूपी भाजपा की 64 सदस्यीय सूची में 52 नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। नई टीम में 19 प्रदेश उपाध्यक्ष, 19 प्रदेश मंत्री, 8 प्रदेश महामंत्री और 6 मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा 6 क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, 3 कार्यालय मंत्री और 3 अन्य पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। जातीय समीकरण भी साधे गए भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को मिलाकर अब 54 लोगों की टीम हो गई है। टीम में 13 महिलाएं हैं। ओबीसी की संख्या 16 से बढ़कर 25 हो गई है। सामान्य वर्ग के 21 चेहरों को प्रदेश टीम में जगह मिली। ठाकुरों की संख्या 7 से घटकर 6 और ब्राह्मणों की संख्या 8 से घटकर 7 हो गई है। इसके अलावा 4 भूमिहार, 3 वैश्य और 1 श्रीवास्तव को जगह मिली है। अनुसूचित जाति (SC) की बात करें तो 7 लोगों को जगह दी गई है। वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) में सिर्फ इंजीनियर विद्याभूषण गोंड को जगह दी गई है। और अब सोशल मीडिया और प्रकोष्ठ संकुल संयोजक और सह-संयोजक के पदों पर नई तैनाती हुई है।

जनजातीय समुदायों के पास है देशी इलाज का समृद्ध ज्ञान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय समुदाय पुराकाल से हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक रहे हैं। इनके पास प्राकृतिक और औषधीय वनस्पतियों से जुड़ा अमूल्य देशज ज्ञान भी है। इस ज्ञान का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समाज के पास प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का सदियों पुराना अनुभव और ज्ञान है। इस अमूल्य ज्ञान-सम्पदा को संरक्षित करना जनजातीय समाज के हित साधन के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी कोशिश है कि प्रदेश के जनजातीय बंधुओं के पास उपलब्ध औषधीय पौधों, खेती-किसानी, वन एवं लोकज्ञान की गूढ़ जानकारियां व अब मौखिक परम्पराओं तक ही सीमित न रहें, बल्कि इनका वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकरण हो, ताकि यह ज्ञान अगली पीढ़ी तक भी पहुंचे। हम जनजातियों की देशज ज्ञान-सम्पदा को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और दस्तावेजीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की लगभग 21 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदाय से संबंधित है। राज्य सरकार इनके समग्र कल्याण के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जनजातीय वर्गों की वनों पर केन्द्रित जीवन संस्कृति और इनकी पारम्परिक ज्ञान-सम्पदा को संरक्षित करना भी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वन, औषधीय पौधों, खेती-किसानी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा वृहद पारम्परिक ज्ञान लंबे समय से समुदाय के अनुभवी बुजुर्गों और पारम्परिक ज्ञानधारकों के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है। यद्यपि इस ज्ञान को व्यवस्थित रूप से अभिलेखबद्ध करना एक बड़ी चुनौती है, तथापि राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने जनजातीय समुदाय के देशी ज्ञानधारक बुजुर्गों और वरिष्ठ जानकारों के सहयोग से पारम्परिक ज्ञान-सम्पदा के दस्तावेजीकरण का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था (टीआरआई-भोपाल) को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार की इस पहल के अंतर्गत जनजातीय समुदाय के परम्परागत वनवासी वैद्य, तड़वी, भुमका, बरवा, ओझा और गुनिया सहित बुजुर्ग ज्ञानधारकों तक सीधी पहुंच बनाई जा रही है। विशेष रूप से प्राकृतिक कंद-मूल (जड़ी-बूटियों) और औषधीय वनस्पतियों से सामान्य-असामान्य रोगों के अल्पावधि-दीर्घावधि उपचार से संबंधित जनजातियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे नैसर्गिक ज्ञान और इनके अनुभवों को अभिलेख रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार भी इस दिशा में आगे आई है। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय समुदाय के वैद्यों/चिकित्सकों को औषधीय पौधों, कृषि तथा वनोपज से संबंधित पारम्परिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, प्रमाणीकरण तथा इसे और भी सुदृढ़ करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलाने की एक देशव्यापी पहल शुरू की है। केंद्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में भी जनजातियों के देशी इलाज के समृद्ध ज्ञान के संरक्षण-संवर्धन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। केन्द्र सरकार चला रही ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’ उल्लेखनीय है कि जनजातीय समुदायों के पास पीढ़ियों से संरक्षित पारम्परिक चिकित्सा ज्ञान के अभिलेखीकरण के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन के तहत ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’संचालित किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य देशभर में जनजातीय समुदायों से जुड़े वैद्यों (ट्राईबल हीलर्स) का 5,000 प्रशिक्षित ‘मास्टर ट्रेनर्स' का कैडर तैयार करना है। कार्यक्रम के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे जनजातीय वैद्यों का चयन किया जा रहा है, जो अपने समुदाय में पारम्परिक उपचार पद्धतियों का अनुभव रखते हैं और आगे दूसरों को भी प्रशिक्षित कर सकें। चयन में जिलों, जनजातियों तथा उपचार विधाओं में विविधता सुनिश्चित करने पर जोर है। इस पहल से देशज चिकित्सा ज्ञान को अगली पीढ़ी तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने का मार्ग मजबूत होगा। मध्यप्रदेश की तैयारी प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम्, रीवा, ग्वालियर-चंबल, भोपाल एवं उज्जैन संभाग के कुल 34 जिलों के करीब 640 जनजातीय वैद्यों (ट्राईबल हीलर्स) को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में नामांकित कर इनकी क्षमता निर्माण के लिए विशेष प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य में वृद्धि की भी संभावना है। जून 2026 के अंत तक प्रदेश से 101 ट्राईबल हीलर्स के नाम मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग लेने के लिए केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। ट्राईबल हीलर्स के चयन की कार्यवाही चल रही है। जिलों से मांगे जा रहे हैं ट्राईबल हीलर्स के नाम राज्य शासन ने संबंधित कलेक्टर्स एवं जनजातीय कार्य विभाग के जिलाधिकारियों को ट्राईबल हीलर्स के नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारियों से मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षण लेने के लिए ऐसे जनजातीय वैद्यों/चिकित्सकों के नाम मांगे गए हैं, जो अनिवार्यत: अनुसूचित जनजाति समुदाय से हों। उनका अपने समुदाय में स्थापित प्रभाव हो और वे अन्य लोगों को प्रशिक्षित करने की स्थिति में हों। साथ ही ऐसे वैद्यों/चिकित्सकों के नाम भी मांगे गए हैं, जो उपचार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे – जड़ी-बूटी चिकित्सा (हीलिंग विथ हर्ब्स), अस्थि चिकित्सा (बोन-सेटिंग), प्रसूति कराने (मिडवाईफरी) एवं सर्पदंश उपचार (स्नेक बाइट) आदि विधाओं में विशेषज्ञ हों।  

हरियाणा में डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली रफ्तार, 82.84% ग्राम पंचायतें भारतनेट के दायरे में

चंडीगढ़  हरियाणा ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी और दूरसंचार ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रदेश की 6222 ग्राम पंचायतों में से 5154 यानी 82.84 प्रतिशत ग्राम पंचायतें भारतनेट के दायरे में आ चुकी हैं। कुल 45 हजार 130 फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन कार्यरत हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को राज्य ब्राडबैंड समिति की बैठक में भारतनेट, राइट आफ वे (आरओडब्ल्यू) नियम 2024, 5जी नेटवर्क के विस्तार तथा दूरसंचार परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न पहलों की समीक्षा की। 150 करोड़ रुपये का मिला प्रोत्साहन चालू वित्त वर्ष में पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (एसएएससीआइ) के तहत राज्य के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन निर्धारित किया गया है। यह प्रोत्साहन दूरसंचार क्षेत्र में छह सुधार लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़ा है। 31 मार्च तक लंबित सभी आरओडब्ल्यू आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है, जिससे अधिकतम 22.5 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन का प्रविधान है। 150 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज में आरओडब्ल्यू नियमों के क्रियान्वयन संबंधी आदेशों के लिए 45 करोड़ रुपये, राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल के लिए 22.5 करोड़ रुपये, पुराने लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए अधिकतम 22.5 करोड़ रुपये, औसत निपटारा अवधि को 45 दिन या उससे कम करने के लिए 7.5 करोड़ रुपये, भारतनेट अनुपालन के लिए 37.5 करोड़ रुपये तथा बिजली क्षेत्र से संबंधित आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए 15 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। मुख्य सचिव ने आरओडब्ल्यू आवेदनों की औसत निपटारा अवधि 45 दिन या उससे कम करने के लिए आवश्यक कदम तेजी से उठाने के निर्देश दिए। आवेदनों और दूरसंचार ढांचे को मिलेगी गति इस दौरान उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय दूरसंचार समितियों को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी चर्चा हुई। इन समितियों की नियमित त्रैमासिक बैठकें आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि जिलों में आरओडब्ल्यू आवेदनों तथा दूरसंचार ढांचे से संबंधित मामलों का स्थानीय स्तर पर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। भूमिगत दूरसंचार एवं अन्य बुनियादी ढांचे को खुदाई के दौरान होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ‘काल बिफोर यू डिग’ प्रणाली के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया गया। वर्तमान में हरियाणा के विभिन्न विभागों के 1204 उपयोगकर्ता इस प्रणाली पर पंजीकृत हैं। समिति ने सरकारी भवनों तथा अन्य उपयुक्त सरकारी संपत्तियों पर 5जी स्माल सेल, रूफटाप साइट, पोल और फाइबर नेटवर्क के विस्तार को सुविधाजनक बनाने के उपायों पर भी विचार किया। इसके अलावा दूरसंचार टावरों पर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रगति की समीक्षा की गई। स्मार्ट मीटर से दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए हरित ऊर्जा की मुक्त पहुंच को सुगम बनाने के साथ-साथ संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतों में बिजली की खपत और बिलिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी सहायता मिलेगी।