samacharsecretary.com

धार में इमामबाड़ा सील, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; शहरभर में पुलिस बल की तैनाती

धार   धार शहर के हटवाड़ा इलाके में स्थित इमामबाड़े को लेकर प्रशासन ने अहम कदम उठाते हुए मुस्लिम समाज से खाली करा लिया गया है। बुधवार तड़के 4 बजे कार्रवाई करते हुए भवन पर लोहे का गेट ओर ताला लगाकर इसे सील किया गया। साथ ही, पीडब्ल्यूडी विभाग को सुपुर्द किया गया है। एसडीएम के आदेश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक सतर्कता है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किये गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। इमामबाड़े का कब्जा दिलवाने के बाद प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी अब पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंप दी है। इस कार्रवाई को लेकर शहरभर में चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस-प्रशासन की इस सक्रियता की बातें करते नजर आ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रहा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। साथ ही, प्रशासन सोशल मीडिया पर भी अलर्ट है। अफवाहें या भ्रामक खबरें फैलने से रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। PWD विभाग की निगरानी में रहेगा इमामबाड़ा इस मामले में अधिकारी साफ कर चुके हैं कि, सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की गलत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इमामबाड़ा पीडब्ल्यूडी विभाग की देखरेख में रहेगा और पुलिस-प्रशासन लगातार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है।

सरकारी चरागाह भूमि पर आवंटन पर रोक, हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर लीज की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे आज हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी भूमि है और इसे चरागाह के रूप में आरक्षित किया गया है. राजस्व प्राधिकारियों ने तथ्यात्मक आधार पर सही निर्णय लिया है और हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है. क्या है मामला बेमेतरा जिले के ग्राम धानगांव निवासी बनवाली दास ने 0.94 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने के लिए लीज देने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 1998 से उक्त भूमि पर काबिज है और उसके पास खेती के लिए कोई अन्य जमीन नहीं है. इसी आधार पर उसने कलेक्टर बेमेतरा को आवेदन दिया था. प्रशासनिक स्तर पर खारिज कलेक्टर ने 2014 में यह आवेदन खारिज कर दिया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपील आयुक्त दुर्ग और पुनरीक्षण राजस्व मंडल रायपुर के पास भी अपील दायर की, लेकिन दोनों ही स्तर पर उसकी मांग अस्वीकार कर दी गई. हाईकोर्ट का फैसला इन आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी भूमि है और इसे चरागाह (गाय-भैंस चराई) के लिए आरक्षित किया गया है. इस आधार पर कोर्ट ने राजस्व प्राधिकारियों के आदेश को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.

जंगली हाथियों के हमले में ग्रामीण घायल, फसल और संपत्ति को भारी नुकसान

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर मनेंद्रगढ़ वन मंडल के ग्राम पंचायत कछौड़ में हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। करीब 12 हाथियों का झुंड, जिसमें दो शावक भी शामिल हैं, गांव में विचरण कर रहा है। हाथियों के हमले में एक ग्रामीण युवक की मौत हो गई। वहीं गांव के तीन घरों को भी क्षतिग्रस्त किया और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह दल वर्तमान में बिहारपुर वन परिक्षेत्र में विचरण कर रहा है। वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए है और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों को वन विभाग द्वारा जंगल की ओर न जाने और सतर्क रहने की अपील की गई है। घटना से प्रभावित परिवारों को प्राथमिक स्तर पर सहायता पहुंचाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। यह पूरा मामला मनेंद्रगढ़ वन मंडल का है, जहां हाथियों के दल के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

बघेल ने उठाए सवाल: सरकार ने कैसे बनाई 14 मंत्रियों वाली नई टीम?

रायपुर मुख्यमंत्री साय के मंत्रिमंडल का विस्तार आखिरकार हो गया है, लेकिन 14 मंत्रियों की नियुक्ति ने राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे कानून के उल्लंघन का मामला बताया है और सवाल उठाया है कि क्या सरकार को इतनी बड़ी मंत्रिपरिषद बनाने की अनुमति मिली थी। इसको लेकर भूपेश बघेल ने सीएम साय से जवाब भी मांगा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साय सरकार में 14 मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2003 में बने कानून के मुताबिक विधानसभा सदस्यों की संख्या में 15% तक ही मंत्री बन सकते हैं। जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो मैंने भारत सरकार को पत्र लिखा था। छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20% तक करने की मांग की गई थी। इसके पीछे छत्तीसगढ़ का भौगोलिक रूप से बड़ा होना और विधानसभा परिषद न होने का तर्क दिया था। लेकिन पत्र का कोई जवाब नहीं आया और न ही अनुमति मिली। ऐसे में अब सवाल उठ रहा साय सरकार को अनुमति कब मिली ? बिना अनुमति अगर 14 मंत्री बनाए गए तो यह अवैधानिक है। मुख्यमंत्री साय को इसका जवाब देना चाहिए। हरियाणा की तर्ज पर हुआ मंत्रिमंडल का विस्तार हरियाणा में भी 90 विधायक हैं। हरियाणा में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। इस लिहाज से हरियाणा के फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ में भी लागू करते हुए 3 और मंत्री बनाए गए हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से 13 मंत्री ही बनते आ रहे थे। नियमों के तहत विधायकों की संख्या के आधार पर 15 प्रतिशत ही मंत्री बन सकते हैं, इसलिए 90 विधायकों में 13.5 मंत्री के तहत मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री बनाए गए हैं। बता दें कि आज राज्यपाल रमेन डेका ने सुबह 10:30 बजे राजभवन में गजेन्द्र यादव, राजेश अग्रवाल एवं गुरू खुशवंत साहेब को मंत्री पद की शपथ दिलाई। गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग सौंपा गया है। गुरु खुशवंत साहेब को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सौंपा गया है।

गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे।  विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।

धर्म परिवर्तन विवाद: इंदौर में बहू पर पति को मुस्लिम बनाने का आरोप, परिजनों ने पुलिस में दी शिकायत

इंदौर  इंदौर जिला न्यायालय ने एक बहू के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मंगलवार को मामला दर्ज किया है। आरोप है कि विवाह के बाद महिला ने हिंदू पति और ससुराल पक्ष पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी। शादी के कुछ दिनों बाद ही बढ़ने लगे विवाद मरीमाता क्षेत्र की एक युवती का विवाह अप्रैल 2022 में एरोड्रम इलाके के युवक से हुआ था। ससुराल पक्ष के अनुसार, महिला विवाह के बाद केवल 15–20 दिन ही घर पर रही। इस दौरान वह अपने मुस्लिम मित्रों के प्रभाव में आकर मुस्लिम धर्म की इबादत करने लगी। परिवार का आरोप है कि बहू दरगाह जाकर ताबीज, भभूत और फल लाकर जबरदस्ती पति को खिलाने लगी। जब धर्म परिवर्तन के लिए पति ने मना किया तो महिला ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने की धमकी दी। पति और सास पर दबाव, 10 लाख की मांग ससुराल वालों ने बताया कि एक दिन बहू ने अपनी अलमारी से सभी जेवर निकाल लिए और कहा कि वह "अल्लाह के सजदे" में जा रही है। उसने पति से भी साथ चलने का दबाव बनाया। 17 मार्च 2024 को महिला अपने मायके वालों और दोस्तों के साथ घर आई और 10 लाख रुपए की मांग की। इसी दौरान उसने पति को धर्म बदलने का दबाव बनाकर धमकाया। ससुराल पक्ष ने पुलिस को बुलाया, लेकिन महिला और उसके साथी मौके से चले गए। पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं परिवार ने वर्ष 2024 में ही पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। एरोड्रम थाने में मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद भी बहू लगातार ससुराल पर दबाव बनाती रही। अदालत ने लिया संज्ञान, बहू को नोटिस थक हारकर परिवार ने एडवोकेट डॉ. रुपाली राठौर और कृष्ण कुमार कुन्हारे के माध्यम से जिला न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया। अदालत को दी गई जानकारी में पीड़ित पति और सास ने बहू की धमकियों और जबरदस्ती का पूरा ब्यौरा दिया। महिला एवं बाल विकास अधिकारी की गोपनीय जांच रिपोर्ट में भी बहू द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की पुष्टि हुई। इसके आधार पर अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज कर बहू को नोटिस जारी किया है। 

हाईवे पर आफत: मथुरा में केमिकल टैंकर पलटते ही लगी भीषण आग, कई किलोमीटर तक दिखीं लपटें

मथुरा जिले के जयपुर बरेली हाईवे पर बुधवार सुबह एक केमिकल से भरा टैंकर मनोहरपुर गांव के पास बेकाबू होकर पलट गया। पलटने के बाद केमिकल से भरे टैंक फट गए। जिससे भीषण आग लग गई। धमाके की आवाज और आग की लपटे देखकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। टैंकर राया की ओर से नेशनल हाईवे की तरफ जा रहा था। लोगों ने दमकल विभाग को सूचना दी। इसके बाद दमकल की पांच गाड़ियां और रिफाइनरी की टीम में मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे एफएसओ किशन सिंह और फायरमैन शकीरा झुलस गए। लगातार भड़क रही आग दमकल अधिकारी ने बताया कि टैंकर में केमिकल भरा होने के कारण से आग लगातार भड़क रही है। उस पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो रहा है। टैंकर में कुल चार टैंक थे। जिनमें से एक फट चुका है। जबकि बाकी टैंको में भी धमाका होने का खतरा बना हुआ है। आग को काबू में करने के लिए दमकल विभाग पुलिस और रिफाइनरी की टीम में लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टैंकर पलटने और उसमें धमाका होने की आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई दी। आग की लपटे और धुंआ दूर से ही दिखाई दे रहा था। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आग पर काबू पाने के लिए प्रयास किया जा रहे हैं। हादसे के चलते हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात है।

स्वयं सहायता समूहो ने हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए दो करोड़ झण्डे तैयार करने मे किया योगदान

  लखनऊ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व व निर्देशन मे हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने व  स्वयं  सहायता समूहो  की दीदियो की आमदनी बढ़ाने के लिए समूहो की दीदियो को झण्डा तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी दी गयी थी, जिसका बखूबी निर्वहन किया गया। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अभियान के अंतर्गत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को कुल 2 करोड़ झण्डो को तैयार कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके अंतर्गत 75 जनपदों में 2 करोड़ तिरंगों का निर्माण सफलतापूर्वक किया गया है, इसके लिए कुल 40 करोड़ रुपये की धनराशि जनपदों में वितरित की जानी है, जिसमें से महिला समूहों को लगभग 10 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होगी। यह न केवल उनके लिए आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा, बल्कि उन्हें दीर्घकालिक रूप से आजीविका अर्जित करने में भी सहायता करेगा। यह पहल न केवल राष्ट्रीय गौरव को प्रबल करने वाली सिद्ध हुई, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम रही। SHG की सामूहिक भागीदारी ने हर घर तिरंगा अभियान को जनपद स्तर पर सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने में अहम भूमिका निभाई। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक श्रीमती दीपा रंजन ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनपदों की महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सक्रिय रूप से जोड़ा गया। जिलास्तर पर SHG की महिलाओं द्वारा तिरंगा सिलाई का कार्य किया गया, जिससे उन्हें आजीविका के अवसर प्राप्त हुए और समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित हुई।

राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में विभिन्न विषयों पर दिया जा रहा है प्रशिक्षण

लखनऊ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व व निर्देशन में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान बख्शी का तालाब, लखनऊ में विभिन्न सरकारी, अर्धसरकारी  विभाग /संस्थाओ के अधिकारियों व कर्मचारियों व  रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें और अधिक दक्ष व सक्षम बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ द्वारा महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू के संरक्षण व  प्र0अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के मार्ग निर्देशन में संस्थान प्रांगण में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 18- 22 अगस्त, तक   भारत सरकार के लगभग 18 मंत्रालयों के 77 सहायक अनुभाग अधिकारियों हेतु, " विलेज अटैचमेंट कार्यक्रम " विषयक पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम,  18-20 अगस्त,2025 की अवधि में, ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम के अन्तर्गत, सम्बन्धित प्रतिभागियों हेतु, " लोक- ओ एस पर आन लाइन ट्रांजैक्शन विषयक " प्रशिक्षण कार्यक्रम, दिनांक 18-20 अगस्त, 2025 तक , क्षेत्रीय/जिला प्रशिक्षण केन्द्रों के अधिकारियों/ कर्मचारियों हेतु, " राज्य स्तरीय ई-आफिस ट्रेनिंग मैनेजमेंट, मानव सम्पदा एवं जेम पोर्टल विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम " दिनांक 18-20 अगस्त,2025 की अवधि में, विभिन्न विभागों के सम्बन्धित अधिकारियों हेतु, " ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन – जलवायु जनित आपदाओं के अनुकूलन का समावेशीकरण " विषयक राज्य स्तरीय तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा दिनांक 20-22 अगस्त 2025 की अवधि में, आई सी डी एस, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास तथा पंचायतीराज विभाग के क्षेत्र पंचायत व ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारियों हेतु, " पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता आधारित सहभागी कार्यक्रम" विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।        महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में आज उपर्युक्त पांच प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से तीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समापन समारोह, राज्य स्तरीय प्रबुद्ध अतिथि वार्ताकारों यथा – डा० किशन वीर सिंह शाक्य, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पूर्व वरिष्ठ सदस्य लोक सेवा आयोग उ०प्र० तथा संयुक्त सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग उ०प्र० शासन की गरिमामई उपस्थिति में आयोजित किया गया।         डा० किशन वीर सिंह शाक्य द्वारा जातक कथाओं व पंचतंत्र की कथाओं के माध्यम से प्रासंगिक उदाहरणों को उद्धृत करते हुए प्रतिभागी अधिकारियों/कर्मचारियों को अभिप्रेरित किया। सूचना प्रौद्योगिकी के विषय में मुख्य रूप से अर्जुन देव भारती , संयुक्त सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग उ०प्र० शासन द्वारा साइबर सिक्योरिटी प्लान के विषय में विस्तार से बताया गया।        अध्यक्षीय उद्बोधन के अन्तर्गत महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू द्वारा प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि हम लोग जहां पर भी हैं और चाहे जिस पद पर कार्यरत हैं, तो अपनी सीमाओं और दायित्वों का ज्ञान होना आवश्यक है। हम सम्पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ तभी कार्य कर सकते हैं, जब हम मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होंगे। इसलिए आवश्यक यह है कि शारीरिक प्रबंधन हमारा प्राकृतिक रूप से अनुकूल हो , तभी मानसिक प्रबंधन अत्यधिक सक्षम होगा। ऋषि मुनियों की परम्पराओं का भी उल्लेख किया। कहा कि विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से हम सभी को आदर्श कर्मयोगी बनने की आवश्यकता है।        कार्यक्रम का संचालन डा० नवीन कुमार सिन्हा द्वारा किया गया तथा संस्थान के उप निदेशक डा० बी एल मौर्य द्वारा सभी को  धन्यवाद ज्ञापित किया गया।  आयोजन एवं प्रबंधन के दृष्टिगत संस्थान की उप निदेशक सरिता गुप्ता, सहायक निदेशक डॉ राजकिशोर यादव, डा० सीमा राठौर, डा० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, डा० विनीता रावत, डा० शिवबचन सिंह यादव, डा० अल्का शर्मा, सहायक निदेशक संजय कुमार, सहायक निदेशक डा० वरूण चतुर्वेदी, आपदा प्रबंधन सलाहकार कुमार दीपक, उपेन्द्र कुमार दूबे , मो० शाहरूख तथा मोहम्मद शहंशाह का उल्लेखनीय योगदान रहा है।

अन्नदाताओं के हित में सख्त हुई योगी सरकार, अब नहीं चलेगी खाद की काला बाजारी

लखनऊ योगी सरकार ने एक बार फिर साफ किया है कि प्रदेश में कहीं भी उर्वरकों की दिक्कत या कमी नहीं है. किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है. सरकार ने खाद के अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है. कृषि विभाग ने सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी दी. खरीफ सत्र 2024 में इस अवधि (18 अगस्त) तक 36.76 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हुई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 42.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री की जा चुकी है. कालाबाजारी करने वालों को कड़ी चेतावनी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से अपील की कि खाद का भंडारण न करें. जितनी आवश्यकता है, उतना खाद लें, जब-जब आवश्यकता है, तब-तब खाद लें. हर जनपद में शिकायत प्रकोष्ठ है. किसी भी परेशानी की स्थिति में अवगत कराएं. मुख्यमंत्री ने उर्वरक की ओवररेटिंग, कालाबाजारी करने वालों को कड़ी चेतावनी भी दी है. उन्होंने जनपद में तैनात अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करने, किसानों से संवाद स्थापित करने और समस्याओं का निस्तारण करने का निर्देश दिया है. कृषि विभाग ने बताया कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है. इस साल अधिक हुआ खाद का वितरण प्रदेश में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अभी तक अधिक खाद वितरण किया जा चुका है. विगत वर्ष 27.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया वितरण हुआ था, इस वर्ष अभी तक 31.62 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है. डीएपी 2024 में वितरण 5.28 लाख मीट्रिक टन का रहा, इस वर्ष यह बिक्री 5.38 लाख मीट्रिक टन हुई. एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटेशियम मिश्रण) का वितरण विगत वर्ष 2.07 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष 2.39 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है. एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) 0.25 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष इस वर्ष 0.46 लाख मीट्रिक टन वितरित हुआ. वहीं एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का वितरण 2024 में 1.91 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष किसानों को 2.79 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है. खाद की उपलब्धता यूरियाः 18 अगस्त तक प्रदेश में 37.70 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता रही. इसमें से 31.62 लाख मीट्रिक टन की खरीद किसानों द्वारा की जा चुकी है. डीएपी: 18 अगस्त तक 9.25 लाख मी. टन की उपलब्धता रही, जिसमें से 5.38 लाख मी. टन की खरीद किसानों ने कर ली है. एनपीके: 18 अगस्त तक 5.40 लाख मी. टन की उपलब्धता रही. इसमें से 2.39 लाख मीट्रिक टन की खरीद किसानों ने कर ली. 4.37 लाख मीट्रिक टन अधिक यूरिया की बिक्री खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य पूर्ण हो गया है. मुख्य फसल धान में टॉप-ड्रेसिंग के लिए प्रतिदिन औसतन 49564 मी.टन यूरिया की खपत-बिक्री हो रही है. गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष 16.04% (मात्रा 4.37 लाख मी०टन) अधिक यूरिया उर्वरक की बिक्री हुई है.