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बैतूल में आईएसबीटी का प्रपोजल भेजने के निर्देश, आयुक्त नगरीय प्रशासन ने बैतूल में विभागीय योजनाओं की समीक्षा

भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने शुक्रवार को बैतूल में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बैतूल से नागपुर सहित महाराष्ट्र के अनेक स्थानों के लिये बड़ी संख्या में बसें जाती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए यहां अंतर्राज्यीय बस स्टैंड की आवश्यकता ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राज्यीय बस स्टैंड में सभी आधुनिक व्यवस्थाओं का प्रावधान रखा जाएगा। बैठक में नगरीय प्रशासन एवं आवास की योजनाओं की समीक्षा की गई। इस मौके पर बैतूल कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी भी उपस्थित थे। आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि बैतूल जिले में निर्धन और मध्यम वर्ग के लोगों के लिये एलआईजी, एमआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास के प्रस्ताव नागरिकों से लिये जाएं। एफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट में सब्सिडी एक लाख 80 हजार का देने का प्रावधान है। पर्यावरण को सुरक्षित और मानव अनुकूल बनाने के लिये ई-चार्जिंग व्हीकल स्टेशन बनाने के प्रस्ताव तैयार करने के लिये भी कहा गया। राजस्व वसूली में तेजी लाएं आयुक्त श्री भोंडवे ने बैठक में मौजूद जिले के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को कर वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निकायों में गुड गवर्नेंस के लिए फेस रीडिंग अटेंडेंस को सुनिश्चित किया जाएं। स्ट्रीट लाइट के बिल कम करने के लिए एलईडी पेटर्न को अधिक से अधिक विकसित किया जाए। बैठक में विधायक एवं सांसद निधि के किये जाने वाले कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने शहरी परियोजना अधिकारी कार्यालय में ई-ऑफिस के संचालन की तारीफ की। बैठक में नवाचार पर चर्चा नगरीय प्रशासन आयुक्त श्री भोंडवे ने छिन्दवाड़ा में शहरी विकास योजनाओं का स्‍‍थल निरीक्षण किया। उन्होंने वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट और अटल वाटिका का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि आगामी विकास कार्यों का एक्शन प्लान तैयार किया जाएं। आयुक्त ने छिन्दवाड़ा एवं पांडुर्णा जिले की 17 नगरीय निकायों की विकास योजना की समीक्षा की।  

श्रमायुक्त संगठन एवं श्रम विभाग ई-आफिस पूर्णतः लागू करने वाले अग्रणी विभागों में शामिल

भोपाल राज्य शासन द्वारा सुशासन को सुदृढ करने की दिशा में एक महत्यपूर्ण पहल करते हुए श्रम विभाग में ई-ऑफिस परियोजना द्वारा कार्यप्रणाली को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। यह डिजिटल परिवर्तन विभाग के मंत्रालय के साथ श्रमायुक्त संगठन के सभी संभागीय एवं जिला कार्यालयों, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संचालनालय एवं उनके जिला स्तरीय कार्यालयों, विभाग के अधीनस्थ मंडल कार्यालयों, संचालनालय कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएँ सहित सभी मैदानी कार्यालयों में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और समयवद्ध बनाना है। ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से अब विभागीय पत्राचार, फाइलों का संचालन, अनुमोदन एवं निगरानी आदि सभी कार्य डिजिटल माध्यम से संपादित किए जा रहे हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली में पारंपरिक फिजिकल फाइलों की आवश्यकता लगभग समाप्त हो गई है। प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के लिये सभी मैदानी कार्यालयों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, इसके बाद विभाग ने यह अनिवार्य कर दिया कि सभी शासकीय कार्य केवल ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से ही संचालित किए जाए। इस डिजिटल पहल से कार्यों की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा फाइलों की निगरानी और निपटान की प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली बन गई है। विभागीय कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा स्वयं श्रम विभाग के सचिव और श्रमायुक्त स्तर से की जा रही है, जिससे कार्यो की गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। इससे ना केवल अधिकारियों-कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना विकसित हुई है, बल्कि सेवाओं की गुणवता में भी सुधार देखने को मिल रहा है। राज्य शासन की इस पहल से श्रम विभाग डिजिटल गवर्नेस की दिशा में एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जो अन्य विभार्गो के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगा।  

18 अगस्त की परीक्षा रद्द करने के लिए छात्र संगठनों का कॉलेज में विरोध प्रदर्शन

कोटा राजस्थान के कोटा में सरकारी महाविद्यालय की समस्याओं से झूझ रहे छात्रों के समर्थन में एबीवीपी और एनएसयूआई की ओर से प्रदर्शन किया गया। छात्र-छात्राओं ने गेट बंद कर महाविद्यालय प्रशासन को घेरा और मांगों को पूरा करने के लिए ज्ञापन सैंपा। इसके पहले छात्रों ने काॅलेज परिसर में ही धरना दे दिया और प्रशासन को मौके पर ही बुलाने की मांग पर अड़ गए। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा। वहीं, महाविद्यालय में प्रदर्शन और हंगामें की आशंका को देखते हुए पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया। छात्र नेताओं का कहना है कि काॅलेज में परीक्षा शुरू हो चुकी है, लेकिन रिजल्ट जारी न होने से स्टूडेंट्स असमंजस में हैं। कोटा विश्वविद्यालय ने यूजी प्रथम, थर्ड पीजी सेमेस्टर के अभी तक परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए और आगामी सेमेस्टर शुरू कर दिए। जिससे स्टूडेंट्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि कोटा विश्वविद्यालय के 18 अगस्त के पेपर को स्थगित किया जाए, क्योंकि 17 तारीख को पटवारी का पेपर है। सभी पीजी स्टूडेंट्स ने पटवारी का एग्जाम देने जाएंगे। मानसिक तनाव में कि हमारा सेंटर दूसरे जिले में आया तो एग्जाम में समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। इस मांग को लेकर पहले भी काॅलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक मांगों को नहीं माना गया है। वहीं, दूसरी तरफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राजकीय महाविद्यालय परिसर में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कालेज प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। जिस पर कॉलेज प्रशासन ने सभी मांगों के समाधान का आश्वासन दिया। छात्र नेताओं ने बताया कि महाविद्यालय की बिल्डिंग कई जगह से जर्जर हो चुकी है। प्लास्टर गिरने से यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी भी घायल हुए हैं। कई बार कॉलेज प्रशासन को इससे अवगत कराया गया, लेकिन उसके बाद भी हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। छात्रों का कहना है कि कॉलेज परिसर में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। एनसीसी की भी ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ अन्य की गतिविधि में भाग नहीं ले पा रहे हैं।  

आरडीएसएस अंतर्गत पश्चिम मप्र का 78वां सब स्टेशन ऊर्जीकृत

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि शासन की महत्वपूर्ण योजना आरडीएसएस अंतर्गत पश्चिम मप्र का 78वां सब स्टेशन रतलाम जिले के सांगाखेड़ा (आलोट) में शुक्रवार को ऊर्जीकृत किया गया। इस ग्रिड की लागत लगभग दो करोड़ करोड़ रूपये है। इससे करीब दो हजार घरेलू एवं कृषि क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। आरडीएसएस अंतर्गत रतलाम जिले में सांगाखेड़ा समेत अन्य स्थानों राजाखेड़ी, बरखेड़ी, गुर्जर बर्डिया, आम्बा, बड़ायला माताजी, नायन, भाटखेड़ी मिलाकर कुल 8 सब स्टेशन तैयार हुए हैं। इंदौर और उज्जैन जिले में 11-11 सब स्टेशन तैयार हुए हैं। वहीं अन्य जिलों मंदसौर, आगर, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, शाजापुर, आगर, देवास, झाबुआ इत्यादि जिलों में 2 से 8 सब स्टेशन ऊर्जीकृत होकर विद्युत आपूर्ति सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप सिंह ने बताया कि आरडीएसएस अंतर्गत इन 5 एमवीए क्षमता के ग्रिडों से कंपनी क्षेत्र मालवा निमाड़ की विद्युत वितरण क्षमता में 390 एमवीए की बढ़ोत्तरी हुई है।  

रक्षाबंधन हमारी संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक मूल्यों को सशक्त करने वाला त्योहार : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

सरकार पूरी निष्ठा के साथ भाई की तरह निभा रही है प्रदेश की बहनों और माताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने समस्त प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी हैं। उपमुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह पर्व हमारी संस्कृति की आत्मा को अभिव्यक्त करता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और आपसी जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह पर्व हमें नारी सम्मान, सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में और प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ और ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ जैसी योजनाएं बहनों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी द्वारा लाड़ली बहनों को 1500 रूपये राशि दी गई है, यह उनकी मातृशक्ति के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह निर्णय बहनों के आर्थिक आत्मबल को बढ़ाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जैसे भाई अपनी बहनों के प्रति जिम्मेदार होता है, वैसे ही सरकार भी प्रदेश की बहनों और माताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों, विशेषकर सभी बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की कामना की है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तामोट, रायसेन में 416 करोड़ की औद्योगिक इकाइयों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार प्रदेश में अब निरंतर हो रहा है उद्योगों का लोकार्पण और भूमिपूजन भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वदेशी अभियान के जरिए हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत और बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रायसेन जिले में हो रहा औद्योगिक निवेश मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को एक नया आयाम देगा। यह न केवल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा, बल्कि यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और गतिशील भी बनायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रायसेन जिले के ग्राम तामोट में 416 करोड़ रुपये की लागत वाली नवीन औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 300 करोड़ रू लागत से 12 हैक्टेयर में 06 नवीन औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन हुआ और 116 करोड़ रू लागत की 06 इकाइयों का लोकार्पण हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी औद्योगिक परियोजनाओं से हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से स्थाई रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को साकार करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है। राज्य में स्वदेशी अभियान के तहत स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शनिवार को रक्षाबंधन है। हमारी परंपरा "यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे" जैसी है। अब दुनिया रिसर्च करके हमारी परंपराओं को जान रही है। उन्होंने कहा कि जिन अंग्रेजों ने कभी हमारे भारत पर 300 वर्ष तक शासन किया, अब हमारी कंपनियां उन्हीं को नौकरी पर रख रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश-प्रदेश को अनेकों सौगातें मिली हैं। भारतीय रेलवे ने अभूतपूर्व प्रगति की है। देश में वंदेभारत ट्रेन और मेट्रो का नेटवर्क बना है। अब भोपाल के पास उमरिया गांव में रेलवे के आधुनिक और मेट्रो ट्रेन के कोच बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 10 अगस्त को केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह बीईएमएल रोलिंग स्टॉक फैक्ट्री का भूमिपूजन करेंगे, जो मध्य भारत में ट्रेन कोचेस के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी 25 अगस्त को पीएम मित्रा पार्क का भूमिपूजन करने मध्यप्रदेश (धार) आने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज 300 करोड़ रुपये की लागत से 12 हेक्टेयर रकबे में 6 नई औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन हुआ है, जिसमें जेबीएम ऑटो, बालाजी रोटोमैक आदि शामिल हैं। इनसे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दो नई औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटन के आशय पत्र बांटे गए हैं, जिनमें लगभग 150 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश का समय बदला है। पहले जहां नाली-सड़क और बिजली के खंबे जैसे कामों का लोकार्पण होता था, वहीं अब रोजाना नये-नये उद्योगों का भूमिपूजन और लोकार्पण हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर देश के समक्ष का समय है, परन्तु भारत दुनिया के किसी देश के आगे नहीं झुकेगा। हम सदैव 'भारत प्रथम' की नीति पर चलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा हमारी अर्थव्यवस्था 15वें नम्बर से अब चौथे नम्बर पर आ गई है। हम भारत की अच्छाई और किसानों की उपज दुनिया को बांटना चाहते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को नंबर 1 बनाने का यही समय है, सही समय है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बदलते दौर में भारत का विकास परिदृश्य भी बदल रहा है। हम किसी का बुरा नहीं चाहते, लेकिन अपना स्वाभिमान भी बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव कीं। उसके बाद भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट हुई, जिसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री सुंदरलाल पटवा के प्रयासों से मंडीदीप में उद्योगों को बढ़ावा मिला। पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. श्रीमती सुषमा स्वराज, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. श्री अनंत कुमार ने तामोट में प्लास्टिक पार्क विकसित किया। हमारी सरकार ने रायसेन के लोगों को पिछले साल और अधिक सौगातें दीं। यदि कोई उद्योग स्थापित करना चाहते हैं, तो रायसेन इसके लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार बड़े उद्योगों के साथ स्टार्टअप और छोटे उद्यमों को भी प्रोत्साहित कर रही है। म.प्र. में सर्विस सेक्टर और लॉजिस्टिक सप्लाई चेन का विकास हो रहा है। टेक्सटाईल इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। मध्यप्रदेश को जल्द ही एयर कार्गो की सुविधा भी मिलेगी। प्रदेश का रोड नेटवर्क पहले ही बेहतर हुआ है। राज्य सरकार रोजगारपरक उद्योग लगाने पर प्रति श्रमिक वेतन में 5000 रुपए का अनुदान उद्योगपतियों को देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि एविएशन कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रदेश की नई नीतियों में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रति फ्लाइट 15 लाख रुपए अनुदान का प्रावधान है। भारत सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत हम प्रदेश की एयर टूरिज्म पॉलिसी पर कार्य कर रहे हैं। जबलपुर, रीवा, सीधी को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश भौगोलिक रूप से बड़ा है। इसीलिए हमारी सरकार ने गरीब, श्रमिक और जरूरतमंदों को एयर एंबुलेंस की सुविधा दी है। सरकार मानवता के प्रति लोगों को जागरुक करते हुए सड़क हादसे के घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर राहवीर योजना में 25 हजार रुपए का पुरस्कार देगी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जो निवेशकों को मेडिकल कॉलेज/अस्पताल खोलने के लिए नगण्य लीज रेंट पर जमीन दे रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योगपति अपने प्रयासों कई लोगों को रोजगार, आवास, भोजन और जरूरत से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। उद्योगपति जरूरतमंदों को रोजगार देकर बड़े पैमाने पर समाजसेवा भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई हो या छोटे उद्योग, जो हमारे प्रदेश के नागरिकों को रोजगार दे, हमारे लिए वे सभी महत्व रखते हैं। भोजपुर विधायक श्री सुरेन्द्र पटवा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश-दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगपतियों को निवेश करने के लिए मध्यप्रदेश लेकर आ रहे हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र का दिनों-दिन विस्तार हो रहा है। भोपाल के मेट्रोपोलिटन सिटी बनने का लाभ रायसेन के औबेदुल्लागंज और गौहरगंज को भी मिलेगा। … Read more

श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया फिलहाल रोक आदेश

मथुरा  सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस अध्यादेश, 2025 पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके तहत सरकार मथुरा-वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन अपने हाथों में ले रही थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस मामले को अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाएगा ताकि अध्यादेश की वैधता पर निर्णय लिया जा सके। निगरानी के लिए समिति का गठन अध्यादेश की कानूनी वैधता तय होने तक, उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति मंदिर के मामलों की निगरानी करेगी। इस समिति में जिला कलेक्टर, राज्य सरकार के अधिकारी और हरिदासी संप्रदाय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि मंदिर का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके और किसी भी पक्ष के अधिकारों का हनन न हो।   गलियारा विकास और फंड का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट ने अपने 15 मई के उस फैसले को भी वापस ले लिया है, जिसमें राज्य सरकार को गलियारा विकास परियोजना के लिए मंदिर के फंड का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान, पीठ ने राज्य सरकार द्वारा मंदिर के फंड के उपयोग की अनुमति मांगने के "गुप्त तरीके" पर कड़ी आपत्ति जताई थी।याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें : इस मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें यूपी सरकार के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि यह अध्यादेश सरकार का धार्मिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप है, जिससे मंदिर प्रबंधन की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। सरकार ने मंदिर प्रशासन को अपने नियंत्रण में लेने का कोई ठोस और मजबूत कारण नहीं बताया है। वकील संकल्प गोस्वामी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह अध्यादेश हरिदासी/सखी सम्प्रदाय के अपने धार्मिक मामलों को खुद संभालने के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ताओं का यह भी मानना है कि इस अध्यादेश से धार्मिक रीतियां और परंपराएं बदलने की कोशिश की जा रही है, जो देवता को नाराज कर सकता है और पूरे सम्प्रदाय के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर सकता है। यह मंदिर 1939 से पारंपरिक रूप से निजी प्रबंधन के अधीन है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विस्तृत आदेश जल्द ही अपलोड करेगा।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को दीं रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन के पावन पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि राखी का पर्व, भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का त्यौहार है। यह हमारी गौरवशाली संस्कृति के गरिमामय उत्कर्ष का प्रतीक है। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, पारिवारिक समरसता और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राखी के पर्व पर हमें मातृ शक्ति के सम्मान, सहयोग और सशक्तिकरण में सहभागिता का संकल्प लेना चाहिए।  

MP में अनुराग जैन की सेवावृद्धि पर फैसला नजदीक, राजौरा-बर्णवाल कतार में खड़े

भोपाल मुख्य सचिव अनुराग जैन इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्हें सेवावृद्धि मिलेगी या नहीं, इस पर फैसला जल्द होगा। यदि सरकार उन्हें रोकने का निर्णय करती है तो फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से सेवावृद्धि का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजना होगा, जो अभी तक नहीं गया है। यदि दूसरे विकल्प पर विचार किया जाता है तो फिर सबसे वरिष्ठ अधिकारी अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश कुमार राजौरा को अवसर दिया जा सकता है। वह मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव भी रहे हैं और उज्जैन संभाग के प्रभारी हैं।   अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश कुमार राजौरा वहीं, 1991 बैच के अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल भी कतार में है। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारियों में होती है। प्रदेश में मोहन यादव सरकार को 1988 बैच की वीरा राणा प्रभारी मुख्य सचिव के तौर पर मिली थीं । 31 मार्च 2024 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसके पहले आठ मार्च को सरकार ने उन्हें छह माह की सेवावृद्धि दिलाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था, जिसे स्वीकार करते हुए 30 सितंबर 2024 तक सेवावृद्धि मिल गई।   इसके बाद आईएएस संवर्ग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी 1989 बैच के अनुराग जैन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर मुख्य सचिव बनाया गया। उनके साथ-साथ अपर मुख्य सचिव राजेश कुमार राजौरा का नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम निर्णय जैन के पक्ष में हुआ। अब एक बार फिर मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई है। यदि अनुराग जैन की सेवाएं सरकार को आगे भी जारी रखना है तो फिर केंद्र सरकार को प्रस्ताव जल्द भेजना होगा। जैन की छवि ईमानदार और समय से काम कराने वाले अधिकारी की है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफल आयोजन के साथ 18 नई औद्योगिक नीतियां भी उनके समय में ही आईं। उन्हें छह माह की सेवावृद्धि मिलती है तो फरवरी 2026 तक ही वह काम कर सकेंगे। यदि सरकार दूसरे विकल्प पर काम करती है तो फिर 1990 बैच के राजेश कुमार राजौरा और 1991 बैच के अशोक बर्णवाल प्रदेश में उपलब्ध अधिकारियों में पहली पसंद होंगे। राजौरा मुख्यमंत्री के साथ काम कर चुके हैं और भरोसे के अधिकारी माने जाते हैं तो बर्णवाल भी निर्विवादित हैं। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारी की है। पर्यावरण अनुमतियों को लेकर विवाद होने के बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने उन्हें ही पर्यावरण विभाग को पटरी पर लाने का जिम्मा सौंपा था। 

MP में HSRP नंबर प्लेट बिना नहीं होंगे वाहन के कई काम, जल्द करें लगवाना जरूरी

इंदौर प्रदेश में पंजीकृत वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के लिए विशेष अभियान चलेगा। इसमें बीते छह साल में पंजीकृत हुए सभी वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट की जांच और डीलरों के यहां इसकी पेंडेंसी की पड़ताल भी की जाएगी। परिवहन कार्यालय इंदौर द्वारा सभी डीलरों के पास नंबर प्लेट की पेंडेंसी की पड़ताल की जाएगी और छूटे हुए वाहनों में नंबर प्लेट लगाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। परिवहन विभाग ने सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश जारी कर वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने के निर्देश दिए है। सभी वाहनों में HSRP नंबर प्लेट जरूरी एक अप्रैल 2019 के बाद के सभी वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाई जाना है। हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को इस आशय के आदेश दिए थे। इसके बाद परिवहन विभाग ने सभी आरटीओ को निर्देश जारी कर नंबर प्लेट लगाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इंदौर में भी वाहन डीलरों के यहां पर परिवहन विभाग की टीमें पहुंचकर पेंडेंसी की पड़ताल करेंगी। दल गठित कर संबंधित वाहन डीलरों के माध्यम से एनआईसी वाहन पोर्टल पर अद्यतन स्थिति दर्ज की जाएगी। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।   बगैर नंबर प्लेट के नहीं होंगे कार्य जिन वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट नहीं होगी, उन वाहनों के परिवहन कार्यालय में कार्य नहीं होंगे। एचएसआरपी नहीं होने पर पीयूसी प्रमाण पत्र भी नहीं बनेगा। इसके अलावा आरसी, पता बदलना, आरसी विवरण देखना, स्वामित्व बदलना, नवीन और डुप्लीकेट परमिट, फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं जारी होंगे। परिवहन विभाग की सेवाओं की जानकारी के लिए एचएसआरपी नंबर प्लेट आवश्यक होगी। परिवहन कार्यालय में प्रवेश होगा प्रतिबंधित एआरटीओ राजेश गुप्ता का कहना है कि वाहनों पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। वाहनों में यह नंबर प्लेट की पेंडेंसी की जांच वाहन डीलरों के यहां पर की जाएगी। वहीं नंबर प्लेट नहीं होने पर परिवहन कार्यालय में भी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। कार्यालय में नंबर प्लेट होने के बाद ही परिवहन कार्य हो सकेंगे।