samacharsecretary.com

10 अगस्त को रक्षा मंत्री करेंगे रेल कोच फैक्ट्री का शिलान्यास, एमपी को मिलेगा नया औद्योगिक केंद्र

 भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वदेशी की भावना को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर न केवल उत्पाद तैयार किए जाएंगे, बल्कि निर्यात भी होगा। इसी स्वदेशी की भावना को साकार करते हुए रायसेन के उमरिया ग्राम में 60 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 1,800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ब्रह्मा परियोजना (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग) का भूमिपूजन एवं शिलान्यास 10 अगस्त को औबेदुल्लागंज के दशहरा मैदान पर होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। यहां रेल कोच, मेट्रो कोच आदि का निर्माण कर देश में आपूर्ति के साथ विदेशों में भी निर्यात किया जाएगा। इसी क्रम में 25 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी धार में पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन करेंगे। पार्क में आने वाले उद्योगों से एक लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। 1500 से अधिक लोगों को रोजगार यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल में पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि उमरिया ग्राम आयोजित होने वाले कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल होंगे। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वर्चुअल शामिल होंगे। इस परियोजना से 1,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। यहां वंदे भारत-अमृत भारत, मेट्रो कोच का निर्माण किया जाएगा। इस उद्योग से भोपाल और रायसेन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छोटे उद्योगों भी विकसित होंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। धार से विदेशों में भी होंगे वस्त्र निर्यात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि धार के पास वस्त्र उद्योग पर केंद्रित पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन 25 अगस्त को करने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आएंगे। यहां रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की 2,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से जनजातीय अंचल के एक लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। धार, झाबुआ, रतलाम और निमाड क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों को काटन का उचित दाम भी मिलेगा। यहां से विदेशों में भी वस्त्र निर्यात किए जाएंगे। सशस्त्र बलों के जवानों को बहनें भेजेंगी राखी मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में लगातार चौथे वर्ष हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। इसमें 12 अगस्त तक पूरे प्रदेश में तिरंगे पर केंद्रित कार्यक्रम होंगे। 13 से 15 अगस्त तक हम सभी को घर, कार्यालयों और वाहनों पर तिरंगा लगाना है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए सशस्त्र बलों के जवानों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के उद्देश्य से उन्हें राखियां भेजी जाएंगी। स्कूलों में तिरंगे से जुड़ी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। अभियान में एक करोड़ तिरंगे की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के भोपाल में होने वाले मुख्य कार्यक्रम को प्रत्येक जिले में स्क्रीन पर लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। मंत्री प्रभार के जिलों में शामिल होंगे।

दस्तावेजों का पेपरलेस ई-पंजीयन करने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर 10 अक्टूबर 2024 को राज्य स्तर पर शुरू किए गए संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर ने मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। इस अभिनव पहल को वर्ष 2025 का ‘राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार’ में ‘स्वर्ण’ श्रेणी का सम्मान प्राप्त हुआ है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा यह पुरस्कार "Government Process Re-engineering by use of technology for Digital Transformation" श्रेणी में प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों, वाणिज्यिक कर विभाग, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि “संपदा 2.0 ने मध्यप्रदेश को डिजिटल भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में देश में अग्रणी बनाया है। यह पहल न केवल पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाएगी, बल्कि लोगों को बिना कार्यालय आए, सुरक्षित और सरल तरीके से पंजीयन सुविधा उपलब्ध कराएगी। यह हमारे डिजिटल और सुशासन के संकल्प का महत्वपूर्ण कदम है।” भूमि प्रबंधन में विभाग की एक ऐतिहासिक पहल : उप मुख्यमंत्री देवड़ा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इस उपलब्धि को भूमि प्रबंधन में विभाग की एक ऐतिहासिक पहल बताया और प्रदेशवासियों को बधाई दी। प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग एवं महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक ने भी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने दस्तावेजों का पूर्णत: पेपरलेस ई-पंजीयन प्रारंभ किया है। भारतीय स्टाम्प अधिनियम के अंतर्गत लगभग 140 प्रकार के दस्तावेजों में से 75 दस्तावेजों का वीडियो के-वाई-सी के माध्यम से फेसलेस पंजीयन संभव हुआ है, जिसमें उप-पंजीयक कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं रहती। यह प्रक्रिया इम्परसनेशन एवं भूमि संबंधी विवादों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी। संपदा 2.0 में जीआईएस तकनीक सहित अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब कोई भी व्यक्ति कहीं से भी, कभी भी, www.sampada.mpigr.gov.in पोर्टल के माध्यम से ई-स्टांप प्राप्त कर सकता है। इसके मोबाइल ऐप से राज्य की किसी भी क्षेत्र की गाइडलाइन दरें तत्काल देखी जा सकती हैं। पूर्ववर्ती संपदा 1.0 की तुलना में संपदा 2.0 में पक्षकारों और संपत्ति की पहचान आधार ई-ओथ एवं ई-केवाईसी के माध्यम से की जाती है, संपत्ति का विवरण संबंधित विभाग से सीधे एकीकृत कर लिया जाता है और दस्तावेज का प्रारूपण स्वचलित रूप से विधिक आवश्यकताओं सहित तैयार होता है। दस्तावेजों पर ई-साइन अथवा डिजिटल साइन से हस्ताक्षर किए जाते हैं और पंजीयन पूर्ण होते ही ईमेल और व्हाट्सऐप पर उपलब्ध हो जाते हैं। यह सम्मान 28वें नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस में प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार की घोषणा केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे एवं पुष्टिकरण की तीन-स्तरीय प्रक्रिया के बाद की गई है।  

नौरादेही जंगल में बढ़ेगा रोमांच, बाघों के साथ दौड़ेंगे अफ्रीकन चीते, बाड़ा बनाने के लिए तैयारियां शुरु

सागर   मध्य प्रदेश का वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, एक ऐसा जंगल है जहां बाघों की दहाड़ गूंजती है, हिरणों की छलांगें दिखती हैं और पेड़ों की छांव में सैकड़ों कहानियां छुपी हैं. लेकिन अब इस जंगल की पहचान और भी खास होने वाली है. क्योंकि यहां आने वाले हैं अफ्रीका से आए मेहमान, यानी रफ्तार के सौदागर चीते.वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम ने नौरादेही का दौरा किया उन्होंने यहां के मोहली, सिंगपुर और झापन रेंज में करीब 600 वर्ग किलोमीटर का इलाका चुना जहां चीतों का नया घर बनाया जाएगा. मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व के रूप में वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व भले ही नया हो, लेकिन जल्द ये पूरे देश में मशहूर होने वाला है. क्योंकि यहां बाघों की आबादी तो बढ़ ही रही है, वहीं दूसरी तरफ वहां अफ्रीकन चीतों का नया बसेरा बसने वाला है. पिछले दिनों मई माह में चीता प्रोजेक्ट से जुडे़ विशेषज्ञों के दल ने नौरादेही का दौरा किया था और चीतों को बसाने की संभावनाओं के साथ-साथ चीतों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाने के निर्देश दिए थे. इसी सिलसिले में प्रबंधन द्वारा तैयारियां तेज कर दी गयी है. यहां चीतों के लिए बाड़ा बनाने के लिए प्रबंधन ने योजना बनाने का काम शुरू कर दिया है. मई में विशेषज्ञों के दौरे के बाद चीतों को बसाने हरी झंडी देश में बसाए जा रहे चीतों के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को नोडल एंजेसी बनाया गया है. मई महीने की शुरूआत में एंजेसी के विशेषज्ञों ने नौरादेही टाइगर रिजर्व का तीन दिनों का दौरा किया था. जिनमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के डीआईजी डॉ. वी बी माथुर और डब्ल्यूआईआई के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी के साथ दौरा किया था. उसके बाद 19 मई 2025 को नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन को चिट्ठी लिखकर चीता बसाने के लिए तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं. ये व्यवस्थाएं करने कहा विशेषज्ञों ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने नौरादेही टाइगर रिजर्व के मोहली, सिंगपुर और झापन रेंज में चीतों को बसाने के लिए कहा है. ये करीब 600 वर्ग किमी का एरिया होगा, जहां चीतों को बसाया जाएगा. यहां पर टाइगर रिजर्व प्रबंधन को ये तैयारियां करने कहा गया है. बाड़ा बनाने की तैयारियों में लगा नौरादेही प्रबंधन जहां तक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की बात करें, तो उन्होंने नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन के लिए डेढ साल का समय इन तैयारियों को पूरा करने के लिए कहा है. माना जा रहा है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरूआत में यहां चीतों की शिफ्टिंग की जाएगी. इस लिहाज से यहां अन्य काम तेजी से शुरू हो गए हैं. बाघ की दहाड़ से टकराएगी चीतों की रफ्तार  अब चीतों के लिए बाड़ा बनाने की तैयारी करने कहा गया है. इसके लिए नौरादेही टाइगर रिजर्व की एक टीम जल्द कूनो नेशनल पार्क पहुंचेगी और वहां बाड़ा बनाने की जानकारी और प्रशिक्षण लेगी. क्योंकि वन्यप्राणियों को अलग-अलग तरह के बाडे़ बनाए जाते हैं और चीतों के लिए किस तरह बनाना होगा, इसके लिए टीम को कूनो भेजा जाएगा. चीतों के लिए क्यों खास है नौरादेही टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व नौरादेही टाइगर रिजर्व है. यह तीन जिलों सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले में फैला हुआ है. इसका कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर है. जिसमें 1414 वर्ग किमी कोर एरिया और 925.12 किमी का बफर एरिया है. इस विशाल वनक्षेत्र में बडे़-बडे़ घास के मैदान है और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है. क्योंकि जिन गांवों का विस्थापन हो रहा है, वहां खेती की जगह पर प्रबंधन द्वारा घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के लिए बड़े घास के मैदान हैं. घास के मैदान ज्यादा होने से शाकाहारी जानवर बहुत हैं यहां शाकाहारी प्राणी होने से चीतों को शिकार करने में आसानी होगी. 600 वर्ग किमी क्षेत्र में बसेंगे अफ्रीकन चीते      चीतों ने खुद किया मनपसंद लंच का इंतजाम, बाड़े में आराम फरमाते सामने आया वीडियो     श्योपुर के थाने में रिपोर्ट लिखाने पहुंचे चीते, कूनो पार्क की आवोहवा से हैं नाखुश     एमपी के खेतों की खाक छान रहे चीते, अच्छी लग रही आजादी, कूनो जाने का नहीं मन सबसे पहले नौरादेही में हुआ था चीता बसाने के लिए सर्वे जहां तक चीतों की बसाहट की बात करें, तो नौरादेही जब वन्यजीव अभ्यारण्य हुआ करता था. तब 2010 में यहां पर चीतों को बसाने के लिए डब्ल्यूआईआई (Wildlife Institute of India) ने यहां सर्वेक्षण किया था. उस वक्त भी मोहली, सिंहपुर और झापन को चीतों की बसाहट के लिए अनूकूल माना गया था. जानकारों के मुताबिक, ये तीनों रेंज चीतों की बसाहट के लिए आदर्श हैं. करीब 600 वर्ग किमी में फैली इन तीनों रेंज में बडे़ और लंबे ग्रासलैंड है. जो चीतों के लिए काफी उपयुक्त माने जाते हैं. क्या कहना है प्रबंधन का नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. ए ए अंसारी बताते हैं कि, ''हम लोगों को चीता के लिए शुरूआत करनी है. हमें कहां फेसिंग करनी है, कहां चीतों के लिए कौन से बाडे़ बनाने हैं, अभी हम लोगों को जैसे निर्देश मिलेगा, तो हम लोग उसी अनुसार यहां पर काम शुरू करेंगे. जो तीन रेंज मोहली, सिंगपुर और झापन के लगभग 600 वर्ग किमी क्षेत्र में चीतें बसाएं जाएंगे.'' ''बाड़े को लेकर हमें जैसे निर्देश होंगे, वैसे हम आगे काम करेंगे. वन्यप्राणियों के लिए कई तरह के बाडे़ बनाए जाते हैं. एक क्वारनटाइन बाड़ा होता है, जब वन्यप्राणी बाहर से आते हैं, वहां करीब 20 दिन के लिए उन्हें रखा जाता है. एक एसआरव्ही बाड़ा होता है. हमें जिस तरह के बाडा बनाने के निर्देश मिलेंगे, हम वहां वैसा काम शुरू करेंगे.

एमपी सदन में गूंजे नाराजगी के सुर, बीजेपी विधायकों ने सरकार की खोली पोल

 भोपाल मध्य प्रदेश बीजेपी में सब ठीक है? ये सवाल, बीजेपी विधायकों के सवाल से ही खड़े हो रहे हैं। दरअसल, विधानसभा के सत्र में जिस तरह के सवाल बीजेपी के विधायकों ने उठाए, उसकी उम्मीद तो सरकार को नहीं थी। एक दर्जन से अधिक विधायकों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर सत्तापक्ष की मुश्किलें बढ़ा दी। इस दौरान कानून व्यवस्था लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक न पहुंचना, जैसे मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। विपक्षी की तरह सवाल किए बीजेपी विधायक सदन में बीजेपी विधायक, सत्ता पक्ष में विपक्षी MLA की तरह सवाल कर रहे थे। विधायकों के तेवर देख सरकार पूरी तरह से बैक फुट पर आ गई। वहीं विपक्षी विधायक फ्रंट फुट पर सियासी बल्लेबाजी करने लगे, और तीखे सवाल पूछने लगे। कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी के अपने ही विधायक संतुष्ट नहीं हैं, तो साफ है सरकार जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रही। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। आम आदमी को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं कांग्रेस विधायक के आरोपों पर प्रेदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यही कारण है इसके विधायक जनता के मुद्दों को उठाते हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस सकारात्मक राजनीति करने और जनहित में सहयोग करने की सलाह दी। बीजेपी के इन विधायकों ने उठाए सवाल बता दें कि सदन में सवाल उठाने वाले बीजेपी विधायकों में वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव भी है। उन्होंने आदिवासियों को दिए गए पट्टों पर कब्जे का मुद्दा उठाया है। उमाकांत शर्मा ने सरकारी जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण और उनके न हटाए जाने पर चिंता जताई। वहीं गायत्री राजे पवार ने उज्जैन की शिप्रा नदी में फैक्ट्रियों के दूषित पानी का मामला उठाकर सरकार को सकते में डाल दिया। इन विधायकों के अलावे संजय पाठक ने खाद वितरण में अनियमितताओं, आशीष शर्मा ने लव जेहाद की बढ़ती घटनाओं, रमेश खटीक ने बिजली बिलों में ब्याज माफी न होने, नीना वर्मा ने शांति समितियों के गठन में देरी और भूपेंद्र सिंह ने गिरते भूजल स्तर पर ठोस नीति की मांग कर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।

आज से रक्षाबंधन स्पेशल ऑफर, यूपी में महिलाओं को मुफ्त बस सफर

लखनऊ रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिलाओं के लिए एक खास सौगात दी है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा प्रदान करने का ऐलान किया है। यह सुविधा 9 अगस्त की सुबह 6 बजे से 10 अगस्त की रात 12 बजे तक लागू रहेगी। इस दौरान महिलाएं राज्य परिवहन की सभी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। इस योजना के तहत न केवल महिलाएं, बल्कि उनके साथ एक सहयात्री भी मुफ्त में यात्रा कर सकेगा। यह पहल रक्षाबंधन के त्योहार को और खास बनाने के लिए की गई है, ताकि महिलाएं अपने भाइयों और परिवारजनों से मिलने के लिए आसानी से यात्रा कर सकें। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अधिकारियों ने बताया कि यह सुविधा सभी प्रकार की बसों, जैसे साधारण, एसी, और जनरथ बसों में उपलब्ध होगी। यात्रा के दौरान किसी भी तरह के टिकट की आवश्यकता नहीं होगी। महिलाओं को बस में चढ़ते समय अपनी पहचान सत्यापित करने के लिए कोई दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे यात्रा और भी सुगम होगी। इससे पहले, चार अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह ऐलान कर दिया था कि उनकी सरकार रक्षाबंधन बंधन के मौके पर प्रदेश की बहन-बेटियों को बस का मुफ्त सफर देने जा रही है। यह कदम रक्षाबंधन को देखते हुए उठाया जा रहा है, ताकि उन्हें अपने भाई के घर में जाने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। सीएम योगी ने स्पष्ट किया था कि हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि रक्षाबंधन के मौके पर प्रदेश की बहन-बेटियों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो। बता दें कि रक्षाबंधन के मौके पर बस का मुफ्त सफर देने की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, जिसका सिलसिला अब तक जारी है। प्रदेश सरकार के मुताबिक, 1.23 करोड़ महिलाएं इसका फायदा उठा चुकी हैं। वहीं, इस दौरान परिवहन निगम ने टिकटों के रूप में 101 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च खुद वहन किया। साथ ही, परिवहन निगम ने सभी बस चालकों और परिचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे इस अवधि में महिलाओं और उनके सहयात्रियों को पूरी सुविधा और सम्मान के साथ यात्रा कराएं।  

कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया: दिल्ली के पीतमपुरा रेस्टोरेंट में परिधान संबंधी कोई रोक नहीं

नई दिल्ली दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि पीतमपुरा के उस रेस्टोरेंट ने अपनी नीति बदल ली है, जहां पहले भारतीय परिधान में लोगों को प्रवेश से रोका गया था। अब रेस्टोरेंट में किसी भी परिधान में आने वाले लोगों को प्रवेश की अनुमति होगी। यह कदम सभी ग्राहकों के प्रति समान व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में बताया कि पीतमपुरा के रेस्टोरेंट ने अपनी नीति बदल ली है और अब किसी भी परिधान, विशेष रूप से भारतीय परिधानों में आने वाले लोगों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। रेस्टोरेंट संचालकों ने भारतीय परिधान में आने वाले ग्राहकों का स्वागत करने का आश्वासन दिया है। साथ ही रक्षाबंधन के अवसर पर भारतीय परिधान में आने वाली बहनों को डिस्काउंट भी दिया जाएगा। इससे पहले कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो को रिपोस्ट कर पीतमपुरा के रेस्टोरेंट में भारतीय परिधानों पर रोक की घटना को अस्वीकार्य बताया था। कपिल मिश्रा ने बताया था कि इस मामले को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गंभीरता से लिया और अधिकारियों को जांच व त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। कपिल मिश्रा के पोस्ट के बाद रेस्टोरेंट संचालकों ने अपनी गलती स्वीकार की। रेस्टोरेंट के निदेशक नीरज अग्रवाल ने एक वीडियो में स्पष्ट किया कि उनके यहां किसी भी परिधान में आने वाले ग्राहकों पर कोई पाबंदी नहीं है और सभी का स्वागत है। टुबाटा रेस्टोरेंट के मालिक नीरज अग्रवाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हमारे यहां पर किसी भी परिधान में आए लोगों को रोका नहीं जाता है, सभी का स्वागत किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साड़ी, शूट में आई महिलाओं को रोका नहीं जाता है। सभी परिवार के साथ आएं। यहां आने से पहले रजिस्ट्रेशन करा लेंगे तो वेटिंग की समस्या नहीं होगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बारे में कहा कि यह 3 अगस्त का वीडियो है। उस दिन ज्यादा भीड़ थी। कुछ हुआ होगा। लेकिन, हम सभी का स्वागत करते हैं। मैं दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी रेस्टोरेंट में आने के लिए आमंत्रित करता हूं और उनका स्वागत करता हूं। रेस्टोरेंट मैनेजर ने भी माना कि यह गलतफहमी थी, यहां परिधान के आधार पर किसी को नहीं रोका जाता। इसके अतिरिक्त, रक्षाबंधन के अवसर पर रेस्टोरेंट ने भारतीय परिधान में आने वाली महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत डिस्काउंट की घोषणा की है। बताते चलें कि टुबाटा रेस्टोरेंट को लेकर जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उस वीडियो में एक शख्स द्वारा दावा किया गया कि वह इस रेस्टोरेंट में आए थे। चूंकि, वह भारतीय परिधान में थे, इसीलिए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। जबकि दूसरी ओर कम कपड़े पहने लोगों को रेस्टोरेंट में जाने दिया गया था।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा- पीएम मोदी के नेतृत्व में देश अपनी स्वतंत्रता के ‘अमृत काल’ में प्रवेश कर रहा है

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश अपनी स्वतंत्रता के 'अमृत काल' में प्रवेश कर रहा है। अमृत काल में 'हर घर तिरंगा' अभियान 2025, राष्ट्रीय ध्वज को हर भारतीय के घर तक पहुंचाने वाला एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन है। यह हमारी साझा पहचान, स्वतंत्रता और एकता का एक भव्य उत्सव है, जो तिरंगे की भावना से ओत-प्रोत है। यह केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के सामूहिक गौरव और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतिनिधित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से 'हर घर तिरंगा' अभियान 2025 में पूरे उत्साह, गर्व और देशभक्ति की भावना के साथ बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। यह अभियान 2 अगस्त से शुरू हुआ है जो 15 अगस्त 2025 तक चलेगा। यह देश की स्वतंत्रता और एकता का एक राष्ट्रव्यापी उत्सव है, जो हमारे गौरवशाली राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे की भावना से ओत-प्रोत है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के अहम भाग के रूप में शुरू हुआ। यह अभियान अब एक शक्तिशाली जन आंदोलन बन चुका है, जिसमें पूरे भारत और दुनिया भर के भारतीय ले रहे हैं। इसका लक्ष्य प्रत्येक नागरिक में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान को प्रगाढ़ करना है। तिरंगा, एक अद्वितीय और सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में, एक शक्तिशाली एकीकृत शक्ति के रूप में कार्य करता है। यह अभियान प्रभावी ढंग से देशवासियों में अपनेपन की सामूहिक भावना को बढ़ावा देगा। 'हर घर तिरंगा' अभियान के इस वर्ष के 3 शक्तिशाली चरण इस वर्ष 'हर घर तिरंगा' अभियान 2 अगस्त से शुरू होकर तीन शक्तिशाली चरणों में चलेगा, जिसमें जागरूकता निर्माण और जन जुड़ाव पर जोर दिया जाएगा। इस वर्ष के अभियान का विषय स्वैच्छिक कार्यों, नागरिक गौरव, स्वच्छता अभियान और हमारे सशस्त्र बलों तथा पुलिस कर्मियों के प्रति कृतज्ञता पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। यह झंडा फहराने से आगे बढ़कर सक्रिय नागरिकता को बढ़ावा देता है। अभियान में तिरंगा-प्रेरित कला, संगीत समारोह, प्रदर्शनियाँ, रैलियाँ, पुलिस कर्मियों और सैनिकों को राखियाँ और पत्र भेजना, क्विज़ और देशभक्ति फिल्मों की स्क्रीनिंग सहित कई प्रेरक कार्यक्रम और गतिविधियाँ शामिल हैं। अभियान के चरण और प्रमुख गतिविधियाँ अभियान में पहले चरण 8 अगस्त तक जागरूकता बढ़ाने और तिरंगे की भावना को जन-जन तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें विद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा पर केंद्रित रंगोली निर्माण, प्रमुख स्थानों पर तिरंगे के इतिहास और महत्व पर आधारित प्रदर्शनी, पुलिस कर्मियों और सैनिकों को राखियाँ और पत्र भेजना, शासकीय भवनों पर तिरंगा रौशनी से प्रकाशित करना आदि गतिविधियां हुईं। दूसरे चरण में 9 अगस्त से 12 अगस्त तक लोगों के बीच सामुदायिक जुड़ाव और सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें तिरंगा महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम और तिरंगा रैलियाँ प्रमुख रूप से आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तिरंगा क्विज का आयोजन किया जाएगा। अंतिम और तीसरा चरण, 13 से 15 अगस्त तक, व्यक्तिगत स्तर पर देशभक्ति के प्रदर्शन पर केंद्रित रहेगा। इसमें घरों पर झंडा फहराना और तिरंगे के साथ सैल्फी अपलोड करना शामिल है। अभियान में भाग लेने के सरल तरीके 'हर घर तिरंगा' अभियान में भाग लेना सरल और सभी के लिए खुला है। प्रदेशवासी तीन मुख्य तरीकों से इस राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं :      स्वयंसेवक बनें: harghartiranga.com पर पंजीकरण करें और तिरंगे का संदेश अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय तक पहुंचाएं। दूसरों को सही ढंग से झंडा फहराने में मदद करें और तिरंगा सैल्फी साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।      राष्ट्रीय ध्वज फहराएं: अपने घर, दुकान, कार्यालय और अन्य स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज खरीदें और प्रदर्शित करें। ध्वज संहिता का पालन करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।      तिरंगे के साथ सेल्फी अपलोड करें: राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपनी सेल्फी क्लिक करें और इसे harghartiranga.com पर अपलोड करें। अपने पलों को ऑनलाइन #HarGharTiranga और #HarGharTiranga2025 का उपयोग करके साझा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, हमारे देश की आत्मा, हमारे बलिदानों का प्रतीक और हमारी साझा आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय पर्व में पूरे उत्साह और गौरव के साथ शामिल हों, अपने घरों पर तिरंगा फहराएं, स्वयंसेवक बनें, और तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी साझा कर इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बनें। हर तिरंगा, हर हाथ जो इसे उठाएगा, भारत के विचार को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारी सामूहिक देशभक्ति का प्रतीक है। आइए, हम सब मिलकर 'हर घर तिरंगा' अभियान को सफल बनाएं।  

एमपी की दो नगर परिषदों में फिर से भगवा रंग, बीजेपी ने हासिल किया अध्यक्ष पद

भोपाल BJP- एमपी में भगवा दल ने फिर परचम लहराया है। प्रदेश की दो नगर परिषदों में बीजेपी के अध्यक्ष बने हैं। दोनों ही अध्यक्ष महिलाएं हैं। कटनी जिले की नगर परिषद विजयराघवगढ़ में बीजेपी की राजेश्वरी दुबे अध्यक्ष चुनी गई हैं वहीं कैमोर नगर परिषद में बीजेपी की ही पलक ग्रोवर अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। पार्टी की नवनिवार्चित नगर परिषद अध्यक्षों को बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बधाई दी है। इससे पहले कटनी जिले की दोनों नगर परिषदों के अध्यक्ष पद के लिए पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा की गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिलाध्यक्ष दीपक टण्डन ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विजयराघवगढ़ से राजेश्वरी दुबे व कैमोर से पलक ग्रोवर को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया। नगर परिषद अध्यक्षों के इस्तीफों के कारण पद रिक्त थे कटनी की कैमोर तथा विजयराघवगढ़ में नगर परिषद अध्यक्षों के इस्तीफों के कारण पद रिक्त थे जिस पर आज निर्वाचन हुआ। दोनों जगहों पर एक ही नामांकन दाखिल होने की उम्मीद थी और आखिरकार वही हुआ भी, दोनों अध्यक्षों का सर्वसम्मति से निर्वाचन हुआ। नगर परिषदों में चुनाव को लेकर गहमागहमी बनी रही। निर्वाचन प्रक्रिया आज करीब 12 बजे से प्रारम्भ हुई। कलेक्‍टर दिलीप कुमार यादव ने नगर परिषद कैमोर में निर्वाचन हेतु पीठासीन अधिकारी एसडीएम विजयराघवगढ़ महेश मंडलोई को बनाया। वहीं नगर परिषद विजयराघवगढ़ के लिए पीठासीन अधिकारी संयुक्त कलेक्टर संस्कृति मुदित लटोरिया बनाई गईं। पीठासीन अधिकारियों को पूरी चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न कराकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। परिषद के नोटिस बोर्ड पर एक प्रति प्रदर्शित करने का निर्देश अध्यक्ष के चुनाव को देखते हुए कैमोर और विजयराघवगढ़ नगर परिषदों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सभी निर्वाचित पार्षदों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस और आदेश की प्रतियां तामील करने को कहा गया था। इस संबंध में पावती प्राप्त करने और संबंधित परिषद के नोटिस बोर्ड पर एक प्रति प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया।

ईमानदारी और निष्ठा से निभाई गई जिम्मेदारी देती है सकारात्मक परिणाम – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने IIM रायपुर के सुशासन फेलोशिप छात्रों से आत्मीय संवाद में साझा किए अपने अनुभव जीवन के अनुभवों से सिखाए सुशासन के गुर, विद्यार्थियों के जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों के दिए प्रेरक उत्तर जब मुख्यमंत्री ने कहा – “मैं पहले आप बच्चों का नाना हूँ, बाद में मुख्यमंत्री” रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ईमानदारी और निष्ठा से निभाई गई जिम्मेदारी हमेशा सकारात्मक परिणाम देती है। जनसेवा में ईमानदारी और समर्पण के साथ लगे रहने  पर जनता का स्नेह और आशीर्वाद अवश्य ही प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री श्री साय आज मंत्रालय महानदी भवन के पंचम तल स्थित नवनिर्मित सभागार में आयोजित ‘मुख्यमंत्री सुशासन संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन IIM रायपुर में अध्ययनरत मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के विद्यार्थियों के साथ हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें सुशासन की बारीकियों से अवगत कराया और उनके प्रश्नों के प्रेरणादायक उत्तर दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की है। प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है, जिससे सभी फाइलें डिजिटलीकृत हो रही हैं। इससे शासन की कार्यप्रणाली पारदर्शी बनी है और फाइलों की ट्रैकिंग भी सहज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा भ्रष्टाचार के सभी मार्गों को बंद करने की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले, यही असली सुशासन है। योजनाएं सोच-समझकर बननी चाहिए, क्योंकि इसके पीछे जनता की गाढ़ी कमाई लगती है। जब योजनाएं जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से क्रियान्वित होती हैं, तभी आमजन को उसका सीधा लाभ मिलता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुशासन फेलोशिप के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उनके जिज्ञासु सवालों के बेझिझक और प्रेरणाप्रद उत्तर दिए। आरंग के फेलो हर्षवर्धन ने जब मुख्यमंत्री से उनके ग्राम बगिया के पंच से लेकर मुख्यमंत्री बनने के सफर की सबसे महत्वपूर्ण सीख पूछी, तो मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने राजनीतिक और पारिवारिक संघर्षों को साझा करते हुए कहा – "बहुत कम उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मैं पंच भी बनूंगा, लेकिन जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा से निभाया।" उन्होंने आगे कहा – “ईमानदारी और निष्ठा से जब कार्य करते हैं, तो सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। मैंने कभी कर्तव्यपथ नहीं छोड़ा, और जनसेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। जनता ने मुझे पंच, सरपंच, विधायक, सांसद, राज्य मंत्री और अब मुख्यमंत्री तक का दायित्व सौंपा।” बिलासपुर के फेलो मनु पांडेय ने जब यह पूछा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने में छत्तीसगढ़ की क्या भूमिका होगी, तो मुख्यमंत्री ने बताया – "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसमें छत्तीसगढ़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2014 से पहले भारत अर्थव्यवस्था में दसवें स्थान पर था, जो अब चौथे स्थान पर पहुंच गया है। हमने भी विकसित छत्तीसगढ़ के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया है। वर्तमान में हमारी जीएसडीपी 5 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है।" मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह लक्ष्य कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक ठोस योजना है, जिसे हम अवश्य प्राप्त करेंगे।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक सम्पन्न राज्य है – यहाँ लोहा, टिन, लिथियम, बॉक्साइट, सोना और हीरे जैसे बहुमूल्य खनिजों के भंडार हैं। राज्य का 44% भूभाग वनों से आच्छादित है, जहां सैकड़ों प्रकार के लघु वनोपज हैं। यहाँ की उर्वरा मिट्टी और मेहनतकश लोग ही छत्तीसगढ़ की असली ताकत हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा – “आप जैसे युवाओं के संकल्प और कौशल से हम विकसित छत्तीसगढ़ जरूर बनाएंगे।” जब मुख्यमंत्री ने कहा – “मैं पहले आप बच्चों का नाना हूँ, बाद में मुख्यमंत्री” संवाद के दौरान फेलो भास्कर सिदार ने एक ऐसा प्रश्न किया, जिसका उत्तर सुनकर पूरा सभागार हर्ष और आत्मीयता से भर गया। भास्कर ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह रायगढ़ के ग्राम बांसडांड का निवासी है और जब उसने अपने पिता का नाम बताया, तो मुख्यमंत्री ने तुरंत उसके परिवार को पहचान लिया। मुख्यमंत्री ने कहा – “मैं तुम्हारे घर भी गया हूँ। तब तुम बहुत छोटे थे।” उन्होंने आगे बताया – “तुम्हारे नानाजी, स्वर्गीय प्रेम सिंह सिदार, लैलूंगा से विधायक थे और मैंने उनके साथ काम किया है।” इस पर भास्कर ने मुस्कराते हुए पूछा – “क्या मैं आपको नानाजी कह सकता हूँ?” मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया – “मैं पहले आप बच्चों का नाना हूँ, बाद में मुख्यमंत्री।” मुख्यमंत्री के इस जवाब पर सभागार तालियों और हंसी से गूंज उठा। यह क्षण मुख्यमंत्री श्री साय की सहजता, आत्मीयता और जनता से गहरे जुड़ाव का प्रमाण था। फेलोशिप का उद्देश्य – भविष्य के उत्तरदायी सुशासक तैयार करना कार्यक्रम में सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने फेलोशिप योजना की रूपरेखा पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को गवर्नेंस की उच्च स्तरीय शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर एक दक्ष एवं उत्तरदायी प्रशासनिक पीढ़ी तैयार करना है।  

तिरंगा आत्मगौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि “हर घर तिरंगा” केवल सिर्फ एक अभियान नहीं, यह हमारे आत्मगौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर देशभक्ति की भावना को सशक्त करें। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान हमें हमारी आज़ादी के संघर्ष, बलिदान और समर्पण की याद दिलाता है। तिरंगा केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, उम्मीदों और संकल्पों का प्रतीक है। हम सब मिलकर तिरंगे के नीचे एकजुट हों और अपने राष्ट्र को समर्पित भाव से प्रगति की ओर अग्रसर करें।