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महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार का एक्शन प्लान तैयार, खास इंतजाम किए गए

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कांवड़ यात्रा में महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर इस बार विशेष तैयारियां की हैं। सीएम योगी के निर्देश पर कांवड़ मार्गों पर 10 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। ताकि यात्रा में शामिल महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस बार कुल 66 हजार से अधिक पुलिसकर्मी यात्रा रूट पर तैनात किए गए हैं। इनमें 8 हजार से अधिक महिला सिपाही और 1,486 महिला उपनिरीक्षक शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक  इस बार यात्रा में लगभग 6 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जिनमें 60 से 70 लाख महिलाएं हो सकती हैं। महिला केंद्रित सुरक्षा मॉडल की शुरुआत सीएम योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में महिला केंद्रित सुरक्षा मॉडल अपनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेशभर में महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष हेल्प डेस्क, रात में महिला बल की तैनाती और QR (क्विक रिस्पॉन्स टीम) में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की गई है। सावन कांवड़ यात्रा में महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार की विशेष तैयारी, 10 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मी तैनात यात्रा रूट पर 150 से अधिक महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। जहां महिला कांस्टेबल न सिर्फ सहायता करेंगी, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर परामर्श भी उपलब्ध कराएंगी। साथ ही ‘शक्ति हेल्प बूथ’ के ज़रिए महिला श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन, विश्राम और मेडिकल सलाह की सुविधा दी जा रही है। मेरठ जोन में सबसे बड़ा महिला बल कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्ग मेरठ ज़ोन में सबसे अधिक महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। मेरठ, मुज़फ्फरनगर, बागपत, हापुड़ और गाजियाबाद जिलों में कुल मिलाकर 3,200 महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी पर हैं। इन जिलों में संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी के अलावा, हर कुछ किलोमीटर पर सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। सुरक्षा को और पुख़्ता करने के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी नेटवर्क की मदद से यात्रा मार्गों की निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों की भी बारीकी से मॉनिटरिंग हो रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या अव्यवस्था को समय रहते रोका जा सके। 11 जोन में 24×7 कंट्रोल रूम प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए 11 ज़ोन में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। जिनकी निगरानी महिला अधिकारियों द्वारा 24×7 की जा रही है। साथ ही, हेल्पलाइन नंबरों पर भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद रहेंगी। जिससे महिला यात्रियों को किसी भी वक्त त्वरित सहायता मिल सके।

राजधानी में 7 राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों की बैठक, तोमर बोले- समितियों की अनुशंसाओं का पालन गंभीरता से होना चाहिए

भोपाल  मप्र विधानसभा में सात राज्यों की समिति की पहली बैठक हुई। इस बैठक में मप्र के विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, यूपी के स्पीकर सतीश महाना, राजस्थान के स्पीकर वासुदेव देवनानी, हिमाचल प्रदेश के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया। पीएस बोले: जब विधानसभा नहीं चलती तब समितियां विधायिका का काम करती हैं मप्र विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया- जब विधानसभा की बैठकें नहीं हो रही होती हैं तब विधानसभा की समितियां विधायिका का काम करती हैं। ये समितियां विधायी, वित्तीय और प्रशासनिक क्षेत्र में विधायिका के कार्यपालिका पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पीएस एपी सिंह ने कहा- समिति प्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हुए अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी वर्ष सम्मेलन में एक संकल्प पारित कर विधायी एवं वित्तीय नियंत्रण की जिम्मेवारी में समितियों के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए समिति प्रणाली तंत्र पर पुर्नविचार के लिए पीठीसीन अधिकारियों की समिति का गठन की अपेक्षा की गई थी। लोकसभा अध्यक्ष और हमारे प्रदेश के स्पीकर की अध्यक्षता में यह समिति बनाई गई है। इसकी पहली बैठक आज बुलाई गई है। लोकसभा में समितियों के पास जाता है बजट बैठक में नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा- हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में संसद और विधानसभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। संसद का सत्र हो या विधानसभाओं के सत्र हों उन सत्रों में जितनी सूक्ष्म निगरानी की जरूरत होती है वह करना संभव नहीं होता। इसलिए हमारे पूर्वजों ने समितियों के गठन की प्रणाली को शुरु किया। लोकसभा की समितियों में तो बजट पर भी विचार-विमर्श होता है। जब बजट सत्र होता है तो बीच में छुट्‌टी करके सारा बजट समितियों के पास जाता है समितियां ही उस पर अध्ययन कर सुझाव देती हैं। उसके बाद वह बजट परिमार्जित होकर लोकसभा में आता है और फिर पारित किया जाता है। ठीक इसी प्रकार से विधानसभाओं में भी समितियों की प्रणाली है। समितियां निरीक्षण और भ्रमण करतीं हैं नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा- हमारे मप्र में चार वित्तीय समितियां हैं जिनका निर्वाचन होता है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए दो समितियां हैं जिनका निर्वाचन होता है। बाकी 15-16 समितियां हैं जिनमें पक्ष-विपक्ष मिलकर अध्यक्ष की ओर से नाम निर्देशित किए जाते हैं। वो समितियां भ्रमण करतीं हैं अध्ययन, निरीक्षण करतीं हैं जरूरत पड़ने पर शासन को बुलाकर विमर्श करतीं हैं। जिसमें और काम करने की जरूरत है या विधानसभा के निर्देश या सदन में दिए गए आश्वासन, अपूर्ण उत्तर, या मंत्रालयों के जनोपयोगी विषयों पर काम करती हैं। आबादी और तकनीक के उपयोग के साथ काम भी बढ़ रहा है तोमर ने कहा- समय समय पर जैसे-जैसे देश की आबादी बढ़ रही है टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ रहा है उसी प्रकार संसद और विधानसभाओं में काम भी बढ़ रहा है। उस काम की समीक्षा हो सके, काम में दक्षता आ सके इसलिए समिति प्रणाली को और ज्यादा दक्ष और प्रभावी बनाने के लिए पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में हुई पीठासीन अधिकारियों की बैठक में छोटे ग्रुप बनाने की बात आई थी। ये छोटे ग्रुप बने हैं और वो समय-समय पर अपने यहां की बेस्ट प्रेक्टिस एक दूसरे से साझा करें। सदस्य क्या महसूस करते हैं काम करते वक्त आने वाली कठनाईयों पर चर्चा करें तो आने वाले समय में उनका निराकरण हो सकेगा। समितियों की अनुशंसाओं का पालन भी गंभीरता से होना चाहिए विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा-एक बात चलती है समितियों को और काम करने की स्वायत्तता मिलनी चाहिए। कामकाज सबके सामने आना चाहिए। समितियों की अनुशंसाओं का समय सीमा में पालन होना चाहिए। ऐसे कई प्रकार के विषय आते हैं तो समिति काम करती है तो अनुशंसा का पालन भी उतनी गंभीरता से होना चाहिए। इसमें कहीं न कोई कमी होती है तो हमारी कोशिश होनी चाहिए कि इन बैठकों के माध्यम से हम राज्य और केन्द्र सरकार के ध्यान में ये बातें लाएं। आज की प्रारंभिक बैठक के बाद ये बैठकें निरंतर होती रहेंगी।

महाकाल की चांदी की पालकी यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, 1 लाख से अधिक श्रद्धालु हुए शामिल

उज्जैन  सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन में भगवान महाकाल नई पालकी में प्रजा का हाल जानने निकले। ये पहली सवारी वैदिक उद्घोष की थीम पर निकाली जा रही है। सवारी शिप्रा नदी तक जाएगी। यहां महाकाल का पूजन किया जाएगा। इसके बाद रात करीब 7 बजे पालकी मंदिर वापस आएगी। सवारी में भजन मंडलियों नाचते-गाते आगे बढ़ रही हैं। इससे पहले तड़के 2:30 बजे महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए थे। कपाट रात 10 बजे शयन आरती तक खुले रहेंगे। दाेपहर 3 बजे तक 1 लाख 15 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। इधर, खंडवा के ओंकारेश्वर में सुबह 5 बजे मंगला आरती हुई। ओंकार महाराज का फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। नैवेद्य में 56 भोग अर्पित किए गए। महाकाल को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर सभा मंडप में बाबा महाकाल का पूजन अर्चन मनमहेश स्वरूप में होने के बाद सवारी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची। यहां पर पुलिस द्वारा श्री महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।  सीएम मोहन यादव ने महाकाल के श्री चरणों में किया नमन सीएम मोहन यादव विदेश यात्रा पर हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि सावन के पहले सोमवार के पावन अवसर पर आज उज्जैन में अपने भक्तों का कुशलक्षेम जानने हेतु बाबा महाकाल भ्रमण पर धूमधाम से निकलने वाले हैं। उनके श्री चरणों में नमन एवं वंदन।  चांदी की नई पालकी में सवारी महाकाल चांदी की नई पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, करीब 10 साल बाद सवारी में नई पालकी को शामिल किया गया है। नवंबर में छत्तीसगढ़ के एक भक्त ने गुप्तदान के रूप में मंदिर समिति को यह पालकी भेंट की थी।  कई नृत्यदलों की प्रस्तुति बाबा महाकाल की सवारी में सीधी के घसिया बाजा, हरदा के ढांडल नृत्य दल,सिवनी के गुन्नूरसाई नृत्यदल आगे-आगे चलेंगे। विभिन्न जनजातियों के समुहों द्वारा भगवान श्री महाकाल की सवारी में मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी का भव्य रूप   मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशानुरूप सवारी में नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। प्रथम सवारी वैदिक उद्घोष थीम पर है।  बाबा महाकाल की सवारी के दौरान रामघाट पर वैदिक उद्घोष के लिए दत्ता अखाड़ा क्षेत्र में बटुकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सभा मंडप में शुरू हुआ पूजन अर्चन  महाकालेश्वर मंदिर के सभागृह में बाबा महाकाल के मनमहेश स्वरूप का पूजन अर्चन शुरू हो चुका है। मंदिर के शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम गुरु के द्वारा यह पूजन अर्चन किया जा रहा है। इस दौरान मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक महेश परमार के साथ ही अन्य जनप्रतिनिधि भगवान का पूजन अर्चन कर रहे हैं।  12 स्थानों से होते हुए गुजरेगी महाकाल की सवारी बाबा महाकाल की सवारी महाकाल चौराहे से शुरू होगी। इसके बाद गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी, रामघाट, मोड़  की धर्मशाला, कार्तिक चौक से होते हुए सत्यनारायण मंदिर पहुंचेगी। बाद में सवारी छत्रीचौंक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए महाकाल मंदिर वापस आएगी। यहीं पर सवारी यात्रा का समापन होगा। बाबा महाकाल के छह स्वरूप  महाकाल सवारी 2025 में बाबा महाकाल के छह स्वरूप होंगे। आज पहली सवारी निकलेगी। इसके बाद  18 अगस्त को अंतिम राजसी सवारी श्री सप्तधान मुखारविंद स्वरूप में निकाली जाएगी, जिसमें बाबा का राजसी शृंगार किया जाएगा। सभी सवारियां श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाएंगी।  सवारी में शामिल होंगे मंत्री  महाकाल की पहली सवारी में उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और पंचायत  एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल शामिल होंगे। वे महाकाल मंदिर के सभा मंडप में बाबा महाकाल का पूजन अर्चन करेंगे। पालकी को कंधा देकर नगर भ्रमण के लिए रवाना करेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचे 11 लाख श्रद्धालु  श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंच रहे हैं। 7 से 13 जुलाई 2025 के बीच 11 लाख से अधिक भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।  अचलेश्वर महादेव मंदिर को फूलों से सजाया ग्वालियर में अचलेश्वर महादेव मंदिर को फूलों से सजाया गया है। रायसेन के भोजपुर में 11 बजे तक करीब 40 हजार भक्त भोजेश्वर महादेव का दर्शन-पूजन कर चुके थे। भोपाल के बड़वाले महादेव, गुफा मंदिर, छतरपुर के जटाशंकर धाम में भी भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जा रही है। खजुराहो में भक्त 18 फीट ऊंचे मतंगेश्वर महादेव का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। नर्मदापुरम में सेठानी घाट से कांवड़ यात्रा निकाली गई। कांवड़िए नर्मदा जल लेकर पचमढ़ी जाएंगे, जहां जटाशंकर महादेव का अभिषेक करेंगे।

महंगी लेकिन असरदार: खेखसी के चमत्कारी फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप!

रायपुर बरसात का मौसम लगते ही राजधानी समेत पूरे प्रदेश में अब सबसे ताकतवर सब्जी खेखसी दिखाई देने लगी है. पौष्टिकता से भरपूर और मौसमी सब्जी होने की वजह से इसकी डिमांड बढ़ गई है. राजधानी के अलग-अलग बाजारों में खेखसी 400 रुपए प्रति किलो बिक रही है. बारिश के दिनों में यह उस जगह पर उगती है, जहां पर घने कटीले पेड़-पौधे होते हैं. यह साल में सिर्फ एक से दो महीने तक ही बाजार में दिखाई देती है. भरपूर प्रोटीन और जिंक  खेखसी पूरी तरह से ऑर्गेनिक सब्जी है. इसमें किसी भी प्रकार के कीटनाशक और रासायन का छिड़काव नहीं किया जाता. विशेषज्ञों की माने तो प्रारंभिक अनुसंधान से पता चला है कि खेखसी में प्रोटीन और जिंक प्रचुर मात्रा में होता है. इसके अतिरिक्त इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, कार्बोहाइड्रेट, कॉपर और पोटेशियम भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. ये बीमारियां होंगी दूर ऐसा माना जाता है कि खेखसी में मौजूद खनिज तत्व और औषधीय गुणों के कारण ब्लड प्रेशर, मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर चौमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है. यह सर्पदंश के बाद होने वाले नुकसान से बचाव में भी सहायक माना गया है. खेखसी लकवा, पीलिया, बवासीर, बेहोशी, बुखार, पेट के संक्रमण को खत्म करने में मदद करती है. सिरदर्द, कान का दर्द, खांसी और खुजली जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी इसके सेवन को उपयोगी माना गया है.

गेवरारोड-रायपुर ट्रेन सेवा बहाल, दो साल की परेशानी खत्म

रायपुर गेवरारोड-रायपुर-गेवरारोड पैसेंजर ट्रेन दो साल और 169 दिन के बाद एक बार फिर बहाल की जा रही है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन ने 13 डेमू और मेमू पैसेंजर ट्रेनों को बहाल करने की घोषणा की है, जिसमें गेवरारोड-रायपुर-गेवरारोड मेमू पैसेंजर भी शामिल है. यह ट्रेन 16 और 17 जुलाई से फिर से परिचालन शुरू करेगी, जिससे कोयलांचल क्षेत्र के यात्रियों समेत दिन में सफर करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी. रायपुर-गेवरारोड मेमू पैसेंजर (गाड़ी क्रमांक 68746) रायपुर रेलवे स्टेशन से दोपहर 1:50 बजे रवाना होगी और रात 7:30 बजे गेवरारोड पहुंचेगी. वहीं, अगले दिन गेवरारोड से सुबह 6:30 बजे प्रस्थान करने वाली गेवरारोड-रायपुर मेमू पैसेंजर (गाड़ी क्रमांक 68745) सुबह 11:25 बजे रायपुर पहुंचेगी. इस ट्रेन को 29 जनवरी 2023 को विभिन्न कारणों से रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद से यात्री इसे बहाल करने की मांग कर रहे थे. इस ट्रेन के शुरू होने से गेवरारोड से रायपुर तक सफर करने वाले यात्रियों के लिए पहली सुबह की गाड़ी उपलब्ध होगी. साथ ही, दिन के समय रायपुर और बिलासपुर से गेवरारोड आने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी. अभी तक रायपुर जंक्शन से कोरबा तक दिन में 10 घंटे की अवधि में कोई यात्री ट्रेन नहीं थी. सुबह 7:20 बजे लिंक एक्सप्रेस के बाद यात्रियों को शाम 6:00 बजे रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस का इंतजार करना पड़ता था, जो सफर को मुश्किल बनाता था. अब मेमू लोकल के शुरू होने से दोपहर में गाड़ी उपलब्ध होगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी. लंबे इंतजार के बाद मानी गई मांग गेवरारोड से रायपुर तक कोई सीधी यात्री ट्रेन न होने के कारण यात्रियों को कोरबा रेलवे स्टेशन तक 15-20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. केवल बिलासपुर तक चलने वाली एक गाड़ी ही उपलब्ध थी. कोयलांचल के लोगों ने लंबे समय से इस ट्रेन की बहाली की मांग की थी, जो अब पूरी हो गई है. यह कदम नियमित रूप से रायपुर और बिलासपुर से सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगा.

KGMU पहुंचें मुख्यमंत्री योगी, 900 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का किया उद्घाटन

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में सोमवार को 941 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने 92 बेड के कार्डियोलाॅजी आईसीयू भवन और 340 बेड के ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी सेंटर का लोकार्पण किया। इसके साथ ही 300 बेड की क्षमता वाले जनरल सर्जरी विभाग के नए भवन, 500 बेड वाले ट्रामा-2 भवन, नए प्रशासनिक भवन, 450 बिस्तरों की क्षमता वाला पांच मंजिला डायग्नोस्टिक सेंटर और 14 नए कमरों वाले गेस्ट हाउस शिलान्यास भी किया। इस माैके पर स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा, कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद और प्रो केके सिंह मौजूद रहे . अत्याधुनिक सुविधाओं से होंगे लैस ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में एक ही छत के नीचे आर्थोपेडिक सर्जरी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, पीडियाट्रिक सर्जरी, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जैसी सुविधाएं होंगी। सात मंजिला भवन में 220 बेड आर्थोपेडिक्स, 60-60 बेड स्पोर्ट्स और पीडियाट्रिक आर्थो, 24 HDU बेड, 8 ऑपरेशन थिएटर, और 24 प्राइवेट रूम होंगे। नए कार्डियोलॉजी ब्लॉक से लारी कार्डियोलॉजी ICU की क्षमता 84 से बढ़कर 180 बेड हो जाएगी। इसमें दो कैथ लैब, 6 ईको मशीन, 96 बेड साइड मॉनिटर, 120 सिरिंज पंप और एडवांस कार्डियोलॉजी उपकरण शामिल होंगे। हड्डी का एक छत के नीचे पूरा इलाज केजीएमयू के आठ मंजिला सेंटर फॉर आर्थोपैडिक्स एवं सुपर स्पेशिलयालिटी भवन में एक छत के नीचे डॉक्टर की सलाह, जांच व भर्ती होगी। लगभग 86 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस भवन में कुल 340 बेड होंगे। जिसमें 24 प्राइवेट रूम शामिल हैं। 24 आईसीयू बेड हैं। आठ ऑपरेशन थिएटर हैं। आठ ओपीडी रूम हैं। आर्थोपैडिक्स सर्जरी, पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक्स, स्पोर्ट मेडिसिन विभाग हैं। बोन बैंक के लिए भी स्थान तय है। रेडियोडायग्नोसिस व पैथोलॉजी सेंटर भी है। सिटी स्कैन, एक्सरे मशीन लग गई है। सस्ती दवाओं के लिए एचआरएफ काउंटर है। यहां आर्थोप्लास्ट, नी-हिप रिप्लेसमेंट आधुनिक सुविधा है। 500 बेड ट्रॉमा टू का शिलान्यास मुख्यमंत्री गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए ट्रॉमा टू का शिलान्यास करेंगे। इसमें 500 बेड होंगे। इसमें घायलों को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जाएगा। जबकि पुराने ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। पेसेन्ट यूटिलिटी काम्पेक्स भी बनेगा। इन पर करीब 296 करोड़ रुपए की लागत से ट्रॉमा-2 तैयार किया जाएगा। मौजूदा समय में ट्रॉमा सेंटर में करीब 466 बेड हैं। प्रदेश भर से मरीज आ रहे हैं। बेड फुल होने की दशा में मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। 300 बेड होंगे जनरल सर्जरी विभाग में मुख्यमंत्री जनरल सर्जरी विभाग का नवीन भवन का शिलान्यास करेंगे। 9.62 एकड़ में तैयार होने वाली बिल्डिंग में 300 बेड होंगे। रोबोटिक सर्जरी की सुविधा होगी। 315 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान है। 11 मंजिला भवन बनेगा। 12 ऑपरेशन थिएटर होंगे। जिसमें एक एडवांस रोबोटिक सर्जरी की ओटी, 11 माड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे। इसमें छह ओटी लैप्रोस्कोप सिस्टम से लैस होंगी। भवन में ऑडिटोरियम समेत अन्य सुविधाएं होंगी। 48 करोड़ रुपए की लागत से नवीन प्रशासनिक भवन बनेगा। डायग्नोस्टिक सेन्टर एवं पीआरए फैसेलिटी ब्लॉक बनेगा। इस पर करीब 48 करोड रुपए खर्च होंगे। न्यू गेस्ट हाउस का विस्तार का भी शिलान्यास करेंगे। किरकिरी के बाद बदला फैसला लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार जनरल सर्जरी विभाग की नई बिल्डिंग शताब्दी भवन के पास बनेगी। केजीएमयू प्रशासन इस भवन को दूसरी जगह शिफ्ट कराना चाह रहा था। इसको लेकर काफी पत्राचार भी किया। इससे शासन प्रशासन की काफी किरकिरी भी हुई। अधिकारियों का कहना है कि भवन की डिजाइन, नक्शा, निर्माण एजेंसी व बजट पास होने के बाद स्थान बदलने की कवायद उचित नहीं थी। इसमें समय की बर्बादी थी। नए स्थान पर भवन बनाने के लिए फिर से मिट्टी की जांच, नक्शा आदि पास कराना पड़ता। इससे निर्माण में देरी होती। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता। दो बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास मुख्यमंत्री 500 बेड वाले ट्रॉमा-2 सेंटर और 300 बेड की क्षमता वाले जनरल सर्जरी विभाग का शिलान्यास भी करेंगे। ट्रॉमा सेंटर पर 296 करोड़, जबकि जनरल सर्जरी भवन पर 315 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जनरल सर्जरी भवन में 12 ऑपरेशन थिएटर, जिनमें एक एडवांस रोबोटिक ओटी शामिल है, और दो मंजिला अंडरग्राउंड पार्किंग भी होगी।

एसटीएफ मुठभेड़ में संजीव जीवा और मुख्तार अंसारी गिरोह का शूटर शाहरुख पठान ढेर

मुजफ्फरनगर मुजफ्फरनगर में मेरठ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी कामयाबी मिली है। मेरठ स्पेशल टास्क फोर्स ने गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी जीवा और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी गिरोह के शूटर शाहरुख पठान को मुठभेड़ में मार गिराया। खालापार निवासी शाहरुख पठान ने पुलिस पर 10 से ज्यादा राउंड फायरिंग की। जवाबी फायरिंग में एसटीएफ ने शार्प शूटर शाहरुख पठान को मार गिराया। जानकारी के अनुसार, शाहरुख पठान पर एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे। एसटीएफ ने मौके से तीन पिस्तौलें बरामद कीं। 60 से ज़्यादा कारतूस और एक कार भी बरामद की गई है। पुलिस ने शाहरुख पठान के पास से एक 9 एमएम की देसी पिस्तौल भी बरामद की है। एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार ने बताया कि एक सूचना के आधार पर एसटीएफ टीम ने कार सवार बदमाश की घेराबंदी की थी। देर रात छपार क्षेत्र में बिजोपुरा तिराहे पर कार सवार बदमाश से मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में मुजफ्फरनगर जनपद के थाना खालापार के मोहल्ला खालापार निवासी शाहरुख पठान मारा गया। उससे देसी पिस्टल सहित तीन पिस्टल व 50 से अधिक कारतूस बरामद हुए।   एएसपी ने बताया कि मुठभेड़ में ढेर बदमाश के खिलाफ एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह पूर्व में पुलिस कस्टडी में हत्या भी कर चुका है। उसके बारे में अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।

झांतल का विश्वनाथ धाम: आस्था की गहराइयों में डूबा एक दिव्य तीर्थ

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के झांतल गांव में स्थित विश्वनाथ महादेव मंदिर श्रावण मास के चलते इन दिनों शिवभक्तों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तालाब के बीच खंभों पर बने इस भव्य मंदिर में भगवान विश्वनाथ साल के छह महीने जल के बीच विराजमान रहते हैं। सावन के इस पावन महीने में श्रद्धालुओं का मंदिर में दिनभर आना-जाना बना रहता है और जलाभिषेक तथा दुग्धाभिषेक की धूम मची रहती है। वर्ष भर में सावन के अंतिम सोमवार, शिवरात्रि व वैशाख शुक्ल पंचमी यहां तीन बड़े कार्यक्रम होते हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। बनेड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले इस मंदिर की शाहपुरा और बनेड़ा मुख्यालय से दूरी लगभग 20 किलोमीटर है। झांतल गांव बल्दरखा ग्राम पंचायत में आता है, जहां करीब 350 घरों की बस्ती है और सभी समाज के लोग यहां निवास करते हैं। सभी परिवारों में मंदिर के प्रति विशेष आस्था देखने को मिलती है। मन्दिर निर्माण में एक मुस्लिम कारीगर के होने और मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में उसकी भागीदारी तय होने से अब यह सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र बन गया है। झांतल विश्वनाथ महादेव मंदिर की स्थापना 22 अप्रैल 1996 को हुई थी। इसका निर्माण दो वर्ष तक चला। मंदिर का संचालन मोहनलाल शर्मा के नेतृत्व में गठित आठ सदस्यों वाले ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। यहां पहले एक छतरी बनाई गई थी, जिसमें अब राधा-कृष्ण की मूर्तियां विराजमान हैं। उसके सामने दूसरी छतरी में मां सिद्धेश्वरी देवी की प्रतिष्ठा की गई है। इन दोनों छतरियों के मध्य आंगन छोड़ते हुए शिवलिंग के रूप में भगवान विश्वनाथ महादेव अपने पूरे परिवार सहित प्रतिष्ठित किए गए हैं। विशेष बात यह है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 210 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा खंभों पर बना पुल बनाया गया है। यह पुल श्रद्धालुओं को तालाब के बीच स्थित मंदिर तक पहुंचाता है। वहीं मंदिर भी तालाब में खंभों पर खड़ा किया गया है। तालाब की भराव क्षमता 13 फीट है। बरसात के दिनों में यह तालाब पूरा भर जाता है और आसपास की लगभग 600 बीघा भूमि की सिंचाई भी इसी तालाब से होती है। श्रावण मास के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों का आयोजन होता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। हर सोमवार और हरियाली अमावस्या के दिन यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है। दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के मनोरम दृश्य और तालाब के बीच बने मंदिर की छटा हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी मोहनलाल शर्मा ने बताया कि हर वर्ष बरसात के मौसम में तालाब 90 प्रतिशत तक भर जाता है और मंदिर का आधा हिस्सा जलमग्न रहता है। सावन के इस महीने में श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं ताकि वे सुरक्षित और सुगम रूप से मंदिर पहुंच सकें। शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा सफाई, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था के भी खास इंतजाम किए जाते हैं। आने वाले दिनों में मंदिर परिसर में और अधिक विकास कार्य किए जाने की योजना है, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था, प्रसाद वितरण केंद्र और पार्किंग सुविधा शामिल है। झांतल विश्वनाथ महादेव मंदिर के प्रति लोगों की आस्था और आकर्षण देखकर यह स्पष्ट है कि यह मंदिर भीलवाड़ा जिले ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के प्रमुख शिवालयों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। श्रावण मास के इस पावन अवसर पर मंदिर में उमड़ती भीड़ और गूंजते जयकारे इस बात के साक्षी हैं कि भगवान विश्वनाथ की महिमा आज भी जीवित है और लोगों के दिलों में गहराई से बसी हुई है।  

सावन सोमवार के पहले दिन हटकेश्वरनाथ मंदिर में शिवभक्तों की भक्ति का सागर

रायपुर 11 जुलाई से श्रावण महीने की शुरुआत हो चुकी है। सावन के पहले सोमवार को रायपुर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। सुबह 5 बजे से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। राजधानी के पूरे शिवालय हर-हर महादेव की जयघोष से गूंज रहे हैं। रायपुर के महादेवघाट स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन भारी संख्या में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव की मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। हरिद्वार के लक्ष्मण झूला की तर्ज पर यहां बने लक्ष्मण झूला और खारून नदी में नाव की सवारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पास में बने गॉर्डन यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। रायपुर सहित अन्य जिलों के सैलानी यहां बड़ी संख्या पहुंचकर इसका आनंद लेते हैं। शहर की जीवनदायिनी नदी 'खारुन' तट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वरनाथ मंदिर का विशेष महत्व है। कल्चुरी राजाओं ने कराया था मंदिर का निर्माण 1402 ई में कल्चुरी वंश के राजा रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय के शासन काल में हाजीराज नाइक ने मंदिर का निर्माण करवाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां नंदी महाराज के कानों में जो भक्त फरियाद या मन्नत मांगते हैं, उसकी भगवान शिव मुरादें जरूर पूरी करते हैं। सावन के महीने में यहां रायपुर और प्रदेश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों से श्रद्धालु कांवर लेकर पहुंचते हैं। हर साल कांवर पदयात्रा भी निकाली जाती है। ये है धार्मिक मान्यता धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, जहां भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई के लिए रामेश्वरम में समुंद्र पर पुल बनाने की योजना बनाई तो उस समय बजरंग बली को शिवलिंग लाने के लिए कहा गया था। इस पर बजरंग बली शिवलिंग लाने गए। इस दौरान शिवलिंग लाने में काफी देर हुई, तो भगवान राम ने रामेश्वरम में रेत से ही विधि-विधान से पूजा अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना कर दी थी। बजरंग बली को किसी नदी के किनारे उस शिवलिंग को रखने के लिए कहा गया। कहा जाता है कि भगवान हनुमान ने रायपुर में खारून नदी के तट पर शिवलिंग रखकर चले गए, जो कालांतर में हटकेश्वर नाथ, महादेव घाट के  नाम से विख्यात हुआ। सावन सोमवार व्रत का महत्व सावन सोमवार व्रत रखने से विवाह के योग बनते हैं। इस व्रत को करने से माता पार्वती को शिवजी पति स्वरूप में प्राप्त हुए। इस वजह से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखा जाता है। इसके अलावा शिव कृपा प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखते हैं। सावन सोमवार व्रत और पूजा विधि जो लोग सोमवार व्रत पूरे साल रखना चाहते हैं, वे सावन के पहले सोमवार से इसकी शुरूआत कर सकते हैं। सावन सोमवार व्रत के नियमों का पालन करते हुए शिव पूजा करते हैं। शिव जी को बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, गाय का दूध, गंगाजल, भस्म, अक्षत्, फूल, फल, नैवेद्य आदि चढ़ाते हैं। सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करते हैं। शिव चालीसा, शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ते हैं। शिव मंत्रों का जाप करते हैं। सावन के सभी सोमवार व्रत रखना चाहिए। इससे आपकी मनोकामना पूरी होगी।

सोमवार को काशी में शिवभक्ति की बयार: रुद्राभिषेक, सप्तऋषि आरती और ‘बम-बम भोले’ की गूंज

वाराणसी श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग में आज प्रातः सप्तऋषि आरती का दिव्य और अलौकिक आयोजन सम्पन्न हुआ। बाबा विश्वनाथ के दरबार में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का समुंदर उमड़ पड़ा, जब श्रद्धालुओं ने साक्षात सप्तऋषियों के स्वरूप में आरती का दर्शन किया। साथ ही श्री काशी विश्वनाथ धाम में धार्मिक उल्लास और आस्था के वातावरण में विशेष सोमवासरीय रूद्राभिषेक का आयोजन किया गया। यह आयोजन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संकल्पित परंपरा के अंतर्गत हुआ, जिसमें प्रत्येक सोमवार को संकल्प पाठ संग रूद्राभिषेक किया जाता है। आज के दिव्य आयोजन में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने प्रतिनिधित्व करते हुए श्री अविमुक्तेश्वर महादेव का विशेष उद्देश्य के साथ संकल्प पाठ व रुद्राभिषेक किया। विश्वनाथ धाम शिवमय हो उठा धूप, दीप, नैवेद्य और शंखनाद के साथ जब आरती प्रारंभ हुई, तो सम्पूर्ण विश्वनाथ धाम शिवमय हो उठा। सप्त ऋषियों की परंपरा अनुसार होने वाली यह आरती केवल विशेष पर्वों एवं सावन जैसे पवित्र मास में ही आयोजित होती है, जो शिव भक्तों के लिए परम दुर्लभ और पुण्यकारी मानी जाती है। भक्तों की लगी लंबी कतार भक्तों की लंबी कतारों और “हर हर महादेव” के जयघोष के बीच काशी नगरी का हर कोना आज शिवभक्ति में डूबा रहा। बाबा के जलाभिषेक, पुष्पांजलि और रुद्राभिषेक के बाद हुई यह सप्तऋषि आरती, श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव लेकर आई।