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नक्सली जीवन छोड़ कौशल विकास योजना से बदली जिंदगी, लोगों के लिए बना मिसाल

रायपुर : शासन की नीति से प्रभावित होकर नक्सलवाद छोड़ा  नक्सलवाद छोड़ा,आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता तक का सफर नक्सली जीवन छोड़ कौशल विकास योजना से बदली जिंदगी, लोगों के लिए बना मिसाल रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और पुनर्वास को लेकर लागू माओवादी आत्मसमर्पण पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 अब कई जिंदगियों में नई उम्मीद जगा रही है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के सोनपुर गांव निवासी अन्नुलाल भंडारी इसका प्रेरक उदाहरण है। कभी बंदूक उठाने को मजबूर हुए अन्नुलाल ने माओवादी संगठन में करीब 20 वर्षों तक सक्रिय रहते हुए कई जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 1998 में संगठन से जुड़े अन्नुलाल ने गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण प्राप्त कर संगठन के प्रचार-प्रसार, सुरक्षा और रसद जैसे कार्यों को अंजाम दिया। लेकिन डर और हिंसा के उस जीवन से निकलकर वर्ष 2017 में उन्होंने आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास नीति को अपनाया और मुख्यधारा में लौट आए। पुनर्वास के बाद अन्नुलाल ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती कर सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत की। इसके बाद मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ने उनके जीवन में नई दिशा दी। इस योजना के तहत नारायणपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में वे जल वितरक संचालक (प्लम्बर) का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान न सिर्फ तकनीकी विषयों का ज्ञान मिल रहा है, बल्कि उन्हें शासन की जनहितकारी योजनाओं जिसमें जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ भी मिल रहा है। अन्नुलाल प्रशिक्षण पूरा कर ग्राम पंचायत सोनपुर में जल वितरक के रूप में कार्य करेंगे, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति और मजबूत होगी। अन्नुलाल कहते हैं कि अब वे भयमुक्त होकर स्वतंत्रता पूर्वक समाज में जीवन जी पा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। सरकार की यह नीति यह साबित कर रही है कि हिंसा छोड़ने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का रास्ता हमेशा खुला है बस जरूरत है सही अवसर और हौसले की।

मछुआरों की सुरक्षा की दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मछुआरों की सुरक्षा और समृद्धि सरकार की प्राथमिकता है। उनकी सुरक्षा की दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कंट्रोल कमांड सेंटर और ट्रांजिट हाउस जैसी पहल की जा रही हैं। राज्य के बड़े जलाशयों में मछुआरों की सुरक्षा और मत्स्य बीज संचयन की निगरानी के लिये आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश के सबसे बड़े जलाशयों में शामिल इंदिरा सागर में ड्रोन, जीपीएस और सीसीटीवी युक्त आधुनिक कमांड कंट्रोल रूम की स्थापना की जा रही है। आपात स्थिति में इस प्रणाली से मछुआरों को शीघ्र सहायता पहुंचाई जा सकेगी। ये पहल ब्रीडिंग ग्राउंड के चिन्हांकन के साथ मत्स्य आखेट पर निगरानी को और ज़्यादा आसान, सुलभ और प्रभावशाली बनाएगी। कमांड कंट्रोल रूम की मदद से मुख्यालय स्तर से ही 24X7 निगरानी संभव हो सकेगी। ड्रोन के माध्यम से जल क्षेत्र की लाइव मॉनिटरिंग और जीपीएस सिस्टम से नावों की ट्रैकिंग की जा सकेगी और आपात स्थिति में मछुआरों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। मछुआरों के लिए बनेंगे ट्रांजिट हाउस और फ़्लोटिंग प्लेटफ़ॉर्म मत्स्य महासंघ के जलाशयों में कार्यरत मछुआरों को कई बार 15 दिन से लेकर एक महीने तक खुले टापुओं या जलाशय के किनारों पर अपनी नावों में रात्रि विश्राम करना पड़ता है। वर्षा ऋतु में टापुओं का जलस्तर बढ़ जाता है, ऐसे में मछुआरों को जलीय जीव-जंतुओं से जान-माल की हानि की आशंका बनी रहती है। मछुआरों को इससे बचाने के लिए महासंघ ने गांधी सागर और इंदिरा सागर के टापुओं पर 5 ट्रांजिट हाउस और जल के मध्य 2 फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। मछुआरों के लिए इसमें आपातकालीन स्थिति में भोजन निर्माण, सोलर मोबाइल चार्जिंग और बायो टॉयलेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। राज्य सरकार की यह पहल मछुआरों की सुरक्षा और सुविधा को बेहतर बनाएगी, साथ ही जल आधारित संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन और मत्स्य उत्पादन की वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक तकनीक के समावेश से अब राज्य में मत्स्याखेट और मछलीपालन नए आयाम स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं। भोपाल में बनेगा आधुनिक केवट प्रशिक्षण संस्थान राज्य में मॉडर्न एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अहम पहल की जा रही है। केन्द्र सरकार की फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट फंड योजना के तहत भोपाल में 5 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक केवट प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जा रही है। इस संस्थान में केज कल्चर, बायोफ्लॉक, रिसर्कुलेटरी एक्वा कल्चर सिस्टम, मछलियों की हाइजेनिक हैंडलिंग, फिश प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यूएडिशन जैसे विषयों पर मछुआ समुदाय को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मछुआरों को इससे वैश्विक मानकों के अनुरूप मछली पालन तकनीक की जानकारी और व्यावसायिक दक्षता प्राप्त होगी।  

प्रदेश के सभी कलेक्टरों, संभाग आयुक्तों, संचालक, प्रबंध संचालकों एवं पंजीयक सहाकारी संस्थाएं को जारी किया पत्र

रायपुर राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों की चिंता करते हुए कृषि उन्नति योजना के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मंत्रालय महानदी स्थित कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टरों, संभाग आयुक्तों, संचालकांे, प्रबंध संचालकों एवं पंजीयक सहाकारी संस्थाएं रायपुर को पत्र लिखकर  कृषि उन्नति योजना के  क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश किए गए हैं। नवीन दिशा-निर्देशों के आधार पर योजना का क्रियान्वयन खरीफ 2025 से किया जाएगा।  मंत्रालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य का अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने से मौसमी प्रतिकूलता एवं कृषि आदान लागत में वृद्धि के कारण कृषि आय में अनिश्चितता बनी रहती है, फलस्वरुप कृषक फसल उत्पादन के लिए आवश्यक आदान जैसे उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, यांत्रिकीकरण एवं नवीन कृषि तकनीकी में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते। राज्य सरकार द्वारा कृषि में पर्याप्त निवेश एवं कास्त लागत में राहत देने के लिये कृषक उन्नति योजना प्रारंभ की गई है। साथ ही फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन देने, दलहन तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार तथा इनके उत्पादन में आत्म निर्भरता के लक्ष्य के साथ इस योजना के तहत चिन्हित अन्य फसलों पर भी आदान सहायता राशि दिये जाने का निर्णय लिया गया है।  कृषक उन्नति योजना का लाभ केवल उन्हीं कृषकों को मिलेगा जिन्होंने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया हो। जिनके द्वारा खरीफ मौसम में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (लैम्पस सहित) अथवा छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि धान अथवा धान बीज का विक्रय किया गया हो। विगत खरीफ मौसम में एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे कृषक जिन्होंने धान फसल लगाये हो तथा प्रदेश की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया हो तथा वर्तमान में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु पंजीयन कराया हो। जिनके द्वारा खरीफ मौसम में दलहन, तिलहन, मक्का लघु धान्य फसल (कोदो, कुटकी एवं रागी) एवं कपास फसल हेतु पंजीयन कराया गया हो।  पत्र में कहा गया कि  विधिक व्यक्तियों जैसे ट्रस्ट/मण्डल/प्राईवेट लिमि. समिति/केन्द्र एवं राज्य शासन के संस्थान / महाविद्यालय आदि संस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नहीं होगी। जो कृषक प्रमाणित धान बीज उत्पादन कार्यक्रम लेते हैं और सामान्य धान भी सहकारी समितियों में विक्रय करते हैं, उनके द्वारा कुल विक्रय की जाने वाली धान की मात्रा, उनके कुल धारित रकबे की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिये, इसे छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या. (मार्कफेड) एवं छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड द्वारा आपसी समन्वय से सुनिश्चित किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि का भुगतान कृषि भूमि सिलिंग कानून के प्रावधानांे के अध्याधीन किया जाएगा।  पत्र में कहा गया कि कृषकों को भुगतान योजनांतर्गत आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) के माध्यम से की जाएगी। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति/छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि निगम लिमि, (बीज निगम) को धान/धान बीज का विक्रय करने वाले कृषकों को आदान सहायता राशि का निर्धारण गिरदावरी में सत्यापित रकबे, उपरोक्त संस्थाओं को विक्रय धान/धान बीज की मात्रा तथा भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष घोषित किए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर प्रतिवर्ष पृथक से किया जाएगा। खरीफ 2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर, धान (कॉमन) पर राशि रू. 731 प्रति क्विं. की दर से अधिकतम राशि रूपये. 15351 प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) पर राशि रूपये. 711 प्रति क्विं. की दर से अधिकतम राशि रूपये. 14931 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जाएगा।  विगत खरीफ में एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे कृषक जिन्होंने धान फसल लगाया हो तथा प्रदेश की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया हो, उन्हें, धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल हेतु एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरांत, मान्य रकबे पर 11000 रूपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जाएगा। खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का लघु धान्य फसल (कोदो, कुटकी एवं रागी) एवं कपास लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राशि रूपये 10000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जाएगा।  पंजीकृत कृषकों द्वारा खरीफ मौसम में सहकारी समितियों में विक्रय किये गये धान पर निर्धारित आदान सहायता राशि का कृषकों को वितरण छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या.  द्वारा किया जाएगा तथा आदान सहायता राशि के व्यय से संबंधित विस्तृत लेखा-जोखा के संधारण का दायित्व भी प्रबंध संचालक छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या. का होगा।  बीज उत्पादक कृषकों द्वारा छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि निगम लिमिटेड को विक्रय किये गये धान बीज पर निर्धारित आदान सहायता राशि की कृषकवार मांग का विवरण बीज निगम द्वारा संचालक कृषि को प्रेषित किया जाएगा। संचालक कृषि द्वारा मांग अनुसार राशि छत्तीसगढ़ निगम लिमिटेड को उपलब्ध कराई जाएगी। बीज उत्पादक कृषकों से उपार्जित धान बीज पर प्रदायित आदान सहायता राशि के विस्तृत लेखा-जोखा के संधारण का दायित्व प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ राज्य बीज एवं कृषि निगम लिमि. होगा फसलों हेतु गिरदावरी/सत्यापन के आधार पर पात्रतानुसार आदान सहायता राशि का वितरण संचालक कृषि के द्वारा किया जाएगा तथा आदान सहायता राशि के व्यय से संबंधित विस्तृत लेखा-जोखा के संधारण का दायित्व संचालक कृषि का होगा। प्रबंध संचालक छत्तीसगढ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या. तथा प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ राज्य बीज एवं कृषि निगम लिमि. यह सुनिश्चित करेंगे कि व्यय राशि की उपयोगिता प्रमाण पत्र राशि प्राप्त होने के एक माह के भीतर संचालक कृषि को प्रेषित किया जाए। कृषकों को पात्रता अनुसार आदान सहायता राशि का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित करने की जवाबदारी खाद्य विभाग एवं संचालक कृषि की होगी, उनके द्वारा नियमित रुप से योजना क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

आधुनिक सुविधाएं सुगम और सुलभ तरीकों से मिलेंगी : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

नागरिकों का विदेश जाने का सपना होगा पूरा : मंत्री सारंग पासपोर्ट कार्यालय भवन बनने से नागरिकों को मिलेगी सुविधा: मंत्री सारंग आधुनिक सुविधाएं सुगम और सुलभ तरीकों से मिलेंगी : राज्यमंत्री श्रीमती गौर अरेरा हिल्स पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भवन का लोकार्पण भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि नये पासपोर्ट कार्यालय भवन बनने से नागरिकों को सुविधा मिलेगी। वहीं आसान और सरल तरीके से नागरिकों को पासपोर्ट उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई तकनीकियों के साथ पारदर्शिता पूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं यह उसी का उदाहरण है। मंत्री सारंग अरेरा हिल्स स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री सारंग ने कहा कि कार्यालय भवन में पूरी क्षमता के साथ हर एक टेक्नॉजोजी को आत्मसात किया है। मध्यप्रदेश और देश के हर एक नागरिक को इस कार्यालय की सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कार्यालय भवन की अवधारणा को सराहा। भवन में हर सुविधा का ध्यान रखते हुए निर्माण किया गया है, जो लोगों को कम समय में अधिक लाभ प्रदान करेंगी। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा है कि कार्यालय भवन में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं इससे आसानी से समय पर लोगों को लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सुगम और सुलभ लाभ देने के लिये कर्मचारियों में विनम्रता भी आवश्यक है। मुख्य पासपोर्ट अधिकारी डॉ. के.जे. श्रीनिवास ने बताया है कि हर संसदीय क्षेत्र तक पासपोर्ट सेवाएं पहुंचाने के लिये विदेश मंत्रालय प्रतिबद्ध है। भारत में 450 पासपोर्ट सेवा केन्द्र स्थापित हो चुके हैं। पिछले डेढ़ वर्ष में मध्यप्रदेश में शहडोल, मंदसौर, खंडवा, गुना, खरगोन एवं भिण्ड जिले में पासपोर्ट सुविधा केन्द्र खोले गये है। जल्द ही मंडला में भी सुविधा केन्द्र खोला जायेगा। शुरूआत में अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर और फीता काटकर नये भवन का लोकार्पण किया। कार्यालय भवन में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण के बाद आवेदको की सुविधाओं के दृष्टिगत प्रकाशित कॉमिक बुक 'क्षितिज' का विमोचन भी किया। श्रेष्ठ कार्य करने वालो का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान भी किया। नये पासपोर्ट कार्यालय भवन में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। यहां शिशु पालक कक्ष, आवेदको, कर्मचारियों के लिये पुस्तकालय, छोटे बच्चो के लिये स्ट्रालर, दिव्यांगों के लिये व्हीलचेयर, कर्मचारी कल्याण कक्ष, कैफेटेरिया आदि की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। कार्यक्रम में मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल विनीत माथुर, पुलिस महानिरीक्षक अंशुमन सिंह, सीपीडब्ल्यूडी के जे. आर. मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी और टीसीएस कर्मी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 12 जुलाई को उज्जैन में राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन का आयोजन होगा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 12 जुलाई को उज्जैन में राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन का आयोजन होगा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 12 जुलाई को उज्जैन में राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन का आयोजन होगा। कार्यक्रम की तैयारियों की मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार ने समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन निषादराज समाज के गौरव और संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी व्यवस्थाएं उत्कृष्ट हों। राज्यमंत्री पंवार ने अधिकारियों को समय-सीमा में सभी कार्यों को पूर्ण करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन में आयोजित होने जा रहे इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे भूमिपूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 22.65 करोड़ रूपये की लागत के 453 स्मार्ट फिश पार्लर, 40 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे अत्याधुनिक अंडर वॉटर टनल सहित एक्वापार्क और 91.80 करोड़ रूपये की लागत से इंदिरा सागर जलाशय में 3060 केजेस के माध्यम से मत्स्य उत्पादन से वृद्धि एवं रोजगार सृजन का वर्चुअली भूमि-पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 430 मोटर साइकिल विद आइस बॉक्स के स्वीकृति पत्र एवं 100 यूनिट्स का वितरण, 396 केज के स्वीकृति पत्र का प्रदाय, फीडमील के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र का प्रदाय एवं उत्कृष्ट कार्य कर रहे मछुआरों एवं मत्स्य सहकारी समितियों को पुरस्कार वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य महासंघ के मछुआरों को 9.63 करोड़ रूपये के डेफर्ड वेजेस का सिंगल क्लिक से अंतरण करने के साथ ही रॉयल्टी चेक प्रदाय करेंगे।  

जल गंगा संवर्धन अभियान में रायसेन जिले को मिला द्वितीय स्थान

खेत तालाबों और अमृत सरोवर से पांच हजार एकड भूमि होगी सिंचित 2500 से अधिक खेत तालाबों का हुआ निर्माण और 1600 से अधिक कूप रिचार्ज जल गंगा संवर्धन अभियान में रायसेन जिले को मिला द्वितीय स्थान भोपाल  रायसेन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में 2500 से अधिक खेत तालाब एवं 23 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य कराया गया है। इनके निर्माण से 5000 एकड से अधिक भूमि सिंचित होगी। कूप रिचार्ज पिट 1600 से अधिक निर्माण कराए गए हैं जिससे कूपों में जल भराव से किसान दोनों फसलों में सिचाई कर सकेंगे। इन कार्यों को नवीन तकनीक सीपरी ऐप के माध्यम से चिन्हांकित किया गया। अभियान के दौरान बेतवा के उदग्म स्थल को पुर्नजीवित कर अविरल धारा प्रवाहित करने के प्रयास किये गये। पोर्टल पर 15000 से अधिक जलदूतों का पंजीयन कराकर प्रशिक्षण कराया गया। विभिन्न ग्राम पंचायतों में साफ सफाई एवं जल संरक्षण के कार्य भी कराये गये। जिले को प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि रायसेन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजना से जल संरक्षण के कार्य कराये गये। मनरेगा के तहत 1000 से अधिक जल संग्रहण के कार्यो को भी पूर्ण कराया गया है। अभियान के दौरान जिले के झिरी ग्राम में स्थित बेतवा नदी के उद्गम स्थल को पुर्नजीवित किया गया, जो रायसेन में हुए महत्वपूर्ण कार्यो में से एक है। जिले में स्थित अन्य नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने के कार्य भी कराये गये। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रायसेन जिले की सभी 7 जनपद पंचायतों में कुल 2500 से अधिक खेत तालाबों का निर्माण कराया गया है जिससे एक ओर जहां बारिश का जल संग्रहित हो सकेगा, वहीं किसानों को भी सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त 1687 कूप रीचार्ज पिट का निर्माण कराया गया है। जिले की बाड़ी जनपद पंचायत में 329 खेत तालाब, बेगमगंज जनपद पंचायत में 509 खेत तालाब, गैरतगंज जनपद पंचायत में 354 खेत तालाब, औबेदुल्लागंज जनपद पंचायत में 213 खेत तालाब, सांची जनपद पंचायत में 366 खेत तालाब, सिलवानी जनपद पंचायत में 490 खेत तालाब और उदयपुरा जनपद पंचायत में 302 खेत तालाबों के निर्माण कार्य स्वीकृत कराये गये। बाड़ी जनपद पंचायत में 183 कूप रिचार्ज पिट, बेगमगंज जनपद पंचायत में 340, गैरतगंज जनपद पंचायत में 207, औबेदुल्लागंज जनपद पंचायत में 158, सांची जनपद पंचायत में 161, सिलवानी जनपद पंचायत में 144 और उदयपुरा जनपद पंचायत में 194 कूप रीचार्ज पिट का निर्माण कराया गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जुड़े कार्यो में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, संगठनों और नागरिकों की भी सहभागिता सुनिश्चित कराई गई। अभियान के तहत नागरिकों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करने के लिये पानी चौपाल सहित अनेक गतिविधियां भी आयोजित कराई गई। माय भारत एप में 15000 से अधिक जलदूतों का मोबाईल के माध्यम से पंजीयन कराया गया। इन जल दूतों को जल संरक्षण कार्यों का प्रशिक्षण भी जनपद पंचायत स्तर पर दिया गया। इन सभी कार्यों में टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया। जिले को 100 में से 92.35 अंक प्राप्त हुये है जिसमें रायसेन प्रदेश में द्वितीय स्थान पर रहा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से भी भेंट की

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ : 2028 के दृष्टि गत वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से भेंट की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से भी भेंट की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित अनेक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में अधोसंरचनात्मक विकास और महत्वपूर्ण कार्यों के संबंध में केंद्रीय मंत्री गण से मुलाकात एवं चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्री गण को, आगामी सिंहस्थ आयोजन को विश्वस्तरीय बनाए जाने की तैयारी की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से भी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके से भेंट की।  

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के दृढ़ इच्छा शक्ति से नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है – केदार कश्यप

खड़गे के बयान पर मंत्री कश्यप का करारा पलटवार शेर के दहाड़ने से सियार भागते है,सियारो के चिल्लाने से शेर नहीं भागते:केदार कश्यप केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के दृढ़ इच्छा शक्ति से नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है – केदार कश्यप 'खड़गे बताएँ कि जब घर न ससुराल तो राहुल बार-बार विदेश क्यों जाते हैं?' रायपुर  वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरों पर उठाए गए सवाल को कांग्रेस की स्तरहीन और ओछी राजनीतिक सोच का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री जैसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे श्री शाह को देश के विभिन्न क्षेत्रों में बार-बार प्रवास करना होता है और छत्तीसगढ़ में चूंकि नक्सली उन्मूलन का अभियान चल रहा है इसलिए उसकी रणनीतिक समीक्षा के लिए श्री शाह छत्तीसगढ़ आ रहे हैं तो खड़गे के पेट में एकाएक मरोड़ क्यों उठ गया? जिस तरह प्रदेश के कांग्रेस नेता नक्सलियों के समर्थन में बयानबाजी करते रहते हैं, क्या यह सवाल पूछकर खड़गे भी 'नक्सलियों से भाईचारा निभानन की कांग्रेसी परंपरा' का निर्वहन कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस कदर फोबिया हो गया है कि सोते जागते कांग्रेसी उनकी स्तरहीन आलोचना करते हैं और गाहे- बगाहे उनके हर काम पर सवाल उठाकर अपने गर्हित इरादों का प्रदर्शन करते रहते हैं।  मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ प्रदेश को नक्सली मुक्त करने की दृढ़ इच्छा शक्ति से काम कर रहे हैं और उनकी इन्हीं इच्छा शक्ति की वजह से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है जो कांग्रेस पार्टी के नेताओं को हजम नहीं हो रहा है जिसके चलते कांग्रेस के प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के नेता केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह के लिए इस तरह की बयानबाजी हमेशा करते रहते है।  मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि शेर के दहाड़ने से सियार भाग जाते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह शेर की तरह निर्भीक होकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने  कहा कि खड़गे देश को यह भी बताएँ कि उनके नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बार-बार विदेश क्यों जाते हैं? उन देशों में भी राहुल गांधी का घर या ससुराल तो नहीं है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह तो नक्सलवाद के खात्मे के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे हैं, बस्तर को फिर से उसका अधिकार दिलवाने आ रहे हैं, बस्तर में खुशहाली लाने के लिए आ रहे हैं, छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए आ रहे हैं, छत्तीसगढ़वासियों के जीवन में खुशहाली लाने आ रहे हैं लेकिन राहुल बार-बार विदेश जाते हैं। संसद का सत्र चलता रहता है तब विदेश चले जाते हैं, यहाँ कोई आंदोलन चलता रहता है तो विदेश चले जाते हैं, देश में बड़ी-बड़ी घटनाएँ होती रहती हैं तो वह विदेश चले जाते हैं और वहाँ जाकर भी वह सिवाय भारत और भारतीय संवैधानिक ढाँचे के खिलाफ विष-वमन करने के कुछ नहीं करते।

रायपुर : भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राजनांदगांव में आजीविका, जल संरक्षण और उद्यमिता कार्यों का किया निरीक्षण

रायपुर भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव टीके अनिल कुमार ने आज राजनांदगांव जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित योजनाओं और विकास गतिविधियों का निरीक्षण किया। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), मिशन जल रक्षा, स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम, वन स्टॉप फैसिलिटी और चना प्रोसेसिंग यूनिट सहित कई योजनाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुसुरूचि सिंह भी उपस्थित थीं। कुमार ने ग्राम अंजोरा स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर का निरीक्षण किया, जहां महिला स्वसहायता समूह की सदस्याएं हर्बल गुलाल, चंदन, सिंदूर, रोली, कुमकुम आदि उत्पादों का निर्माण और पैकेजिंग कर रही हैं। उन्होंने गणेशा हर्बल गुलाल प्राइवेट लिमिटेड से हुए अनुबंध के अंतर्गत चल रहे कार्य की सराहना की, जिससे 75 महिलाओं को जोड़ा गया है। अब तक 181 मीट्रिक टन उत्पादन से 1 करोड़ 5 लाख 70 हजार रुपये की आमदनी हुई है। उन्होंने पैकेजिंग यूनिट के स्थायित्व और विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की और बफर प्लेट, दोना-पत्तल जैसी लघु इकाइयों के माध्यम से हुए रोजगार सृजन की सराहना की। इसके अतिरिक्त उन्होंने ग्राम टेड़ेसरा में वर्षा जल संचयन के लिए बनाए गए रिचार्ज सॉफ्ट और इंजेक्शन वेल का अवलोकन किया। स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम के तहत मनीष साहू द्वारा शुरू की गई हार्डवेयर एवं इलेक्ट्रिकल दुकान का निरीक्षण करते हुए उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के नवाचारों को सराहा। ग्राम पदुमतरा में उन्होंने बिहान संकुल संगठन कार्यालय और आजीविका प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया। यहां महिलाओं ने उन्हें बताया कि बिहान से जुड़कर उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। आचार-पापड़ निर्माण, मसाला बिक्री और कृषि उपज की प्रोसेसिंग जैसे कार्यों के जरिए कई महिलाएं ष्लखपति दीदीष् बनी हैं। अतिरिक्त सचिव ने महिलाओं से मार्केटिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने स्वरधारा महिला समूह द्वारा 65 लाख रुपये की बिक्री की जानकारी प्राप्त की और उसकी सराहना की। महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें रोज़गार के साथ ही देशभर में एक्सपो और प्रदर्शनियों में भाग लेने का मौका मिला। कुछ महिलाएं अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच चुकी हैं दृ जैसे कि दमयंती सोनी, जो जेसीबी ऑपरेटर के रूप में काम कर रही हैं और जापान यात्रा की तैयारी में हैं। ग्राम सुकुलदैहान में उन्होंने स्वर्ण उपज महिला उत्पादक कंपनी के चना प्रसंस्करण केंद्र का दौरा किया, जहां 15,875 महिला किसान कार्यरत हैं। इस एफपीओ ने वर्ष 2024-25 में 408 लाख रुपये का टर्नओवर किया है। निरीक्षण के दौरान ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव का प्रदर्शन भी किया गया। ग्राम बरगा में रिचार्ज वेल के निरीक्षण के दौरान पद्मश्रीमती फूलबासन बाई यादव ने उन्हें नीर और नारी अभियान तथा आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारीगण, राज्य और केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी, तथा बड़ी संख्या में महिला समूह की सदस्याएं उपस्थित रहीं। कुमार ने समूहों की गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्हें आगे और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

गुरु पूर्णिमा पर खास अंदाज़ में दिखेंगे सीएम योगी, निभाएंगे गुरु और शिष्य दोनों की भूमिका

गोरखपुर सनातन विचार दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-शिष्य के रिश्ते को प्रतिष्ठित करने वाले पावन पर्व गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ के लिए विशेष होती है। यह वह अवसर होता है, जब गोरक्षपीठाधीश्वर नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ सहित पीठ के अपने पूर्ववर्ती गुरुजनों की पूजन-स्तुति करते हैं और तदुपरांत अपने शिष्यों और गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं को स्नेहाशीष से अभिसिंचित करते हैं। गोरक्षपीठ की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरु पूर्णिमा (10 जुलाई, गुरुवार) पर शिष्य और गुरु दोनों भूमिकाओं में दिखेंगे। यूं तो गोरक्षपीठ, गोरखनाथ मंदिर में धर्म-अध्यात्म की मंगलध्वनि अहर्निश गुंजायमान रहती है, पर गुरु पूर्णिमा का पर्व यहां बेहद खास होता है। इस दिन के विशेष आयोजन में सहभागी बनने की गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं की उत्कंठा प्रबल होती है। नाथपंथ मुख्यतः गुरुगम्य मार्ग है। इस लिहाज से गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का अटूट नाता है। गुरु-शिष्य परंपरा इस पीठ के मूल में है। गुरु परंपरा से ही नाथ परंपरा आगे बढ़ी है। यही वजह है कि गोरक्षपीठ, गुरु परंपरा के प्रतीक के तौर पर पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित है। हर काल में इस परंपरा को कायम रख पीठ ने कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। शिवावतार भगवान गोरखनाथ ने योग को लोक कल्याण का माध्यम बनाया तो उनके अनुगामी नाथपंथ के मनीषियों ने लोक कल्याणकारी अभियान को गति दी। उल्लेखनीय है कि सनातन संस्कृति गुरु को गोविंद (भगवान) से भी ऊंचे स्थान पर प्रतिष्ठित करती है। गुरु का ध्येय समग्र रूप में लोक कल्याण होता है और इसकी दीक्षा भी वह अपने शिष्य को देता है। गुरु परंपरा के आईने में देखें तो नाथपंथ की विश्व प्रसिद्ध गोरक्षपीठ बेमिसाल है। पीढ़ी दर पीढ़ी गोरक्षपीठाधीश्वरों ने अपने गुरु से प्राप्त लोक कल्याण की परंपरा को विस्तारित किया है। वर्तमान पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इसे निरंतर ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। गुरु परंपरा के लोक कल्याणकारी कार्यों के अनुगमन में गोरक्षपीठ की गत-सद्यः तीन पीढ़ियां तो कीर्तिमान रचती नजर आती हैं। गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने लोक कल्याण के लिए शिक्षा को सबसे सशक्त माध्यम बनाते हुए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। उदात्तमना ब्रह्मलीन महंत जी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपने दो महाविद्यालय भी दान में दे दिए थे। उनके समय में ही लोगों को हानिरहित व सहजता से उपलब्ध चिकित्सा सुविधा हेतु मंदिर परिसर में एक आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र की भी स्थापना हुई थी। अपने गुरु द्वारा शुरू किए गए इन प्रकल्पों को अपने समय में उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने विस्तार दिया। शिक्षा, चिकित्सा, योग सहित सेवा के सभी प्रकल्पों को नया आयाम दिया। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज के शिष्य एवं वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक कल्याण के लिए अपने दादागुरु द्वारा रोपे और अपने गुरु द्वारा सींचे गए पौधे को वटवृक्ष सरीखा बना दिया है। किराए के एक कमरे में शुरू शिक्षा का प्रकल्प दर्जनों संस्थानों के साथ ही विश्वविद्यालय तक विस्तारित हो चुका है। इलाज के लिए गोरक्षपीठ की तरफ से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय की ख्याति पूरे पूर्वांचल में है। गोरक्षपीठ से योग के प्रसार को लगातार गति मिली है। पीठ की गुरु परंपरा में लोक कल्याण के मिले मंत्र की सिद्धि योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री की भूमिका में भी नजर आती है। मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद की तमाम व्यस्तताओं के बावजूद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ हर गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेने और शिष्यों को आशीर्वाद देने के लिए गोरखनाथ मंदिर जरूर पहुंचते हैं। इसी क्रम में इस बार भी गुरुवार को वह गुरु पूर्णिमा पूजा के लिए मंदिर में मौजूद रहेंगे।