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नारायणपुर में जिला स्तरीय रंगोली प्रतियोगिता संपन्न

​रायपुर       छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर में सोमवार को जिला स्तरीय महाविद्यालयीन रंगोली प्रतियोगिता का गरिमामय आयोजन किया गया। "सेवा के रंग-राष्ट्र के संग" थीम पर आधारित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य युवाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय परंपराओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति जागरूकता व रुचि विकसित करना रहा।         ​ जनभागीदारी अध्यक्ष श्री नरेंद्र मेश्राम तथा प्राचार्य एवं जिला नोडल अधिकारी के मार्गदर्शन के सफल संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अतिथियों ने प्रतियोगिता व प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उनका उत्साहवर्धन किया।            ​प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं, शासकीय योजनाओं, राष्ट्रीय एकता, प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को रंगोली के माध्यम से बेहद रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान स्थानीय और प्राकृतिक सामग्रियों के विशेष प्रयोग ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कड़े मूल्यांकन मानदंडों—रचनात्मकता, विषयवस्तु, प्रस्तुति, कलात्मकता और प्राकृतिक सामग्री के उपयोग—के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।         ​ प्रतियोगिता में शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर की बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की छात्रा सुनीता नुरेटी एवं उनकी साथी ने प्रथम स्थान हासिल किया। द्वितीय स्थान संयुक्त रूप से रामकृष्ण मिशन विवेकानंद महाविद्यालय, नारायणपुर के कपूरचंद व उनकी टीम तथा शासकीय नवीन महाविद्यालय छोटेडोंगर के प्रमोद कुमार नाग व उनकी टीम को मिला। वहीं तृतीय स्थान पर संयुक्त रूप से शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय की भूमिका सोरी व उनकी टीम तथा वीरांगना रामोतीन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय की वीना मातलाम व उनकी टीम रही।          ​ महाविद्यालय के प्राध्यापकों, अतिथि व्याख्याताओं, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के विशेष सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का समापन भारतीय संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्र की "विविधता में एकता" की भावना को और मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।

पीएम स्वनिधि के लक्ष्य दो साल पहले पूरे करेगा छत्तीसगढ़, निकायों को एक्शन-प्लान बनाने के निर्देश

रायपुर नगरीय निकायों में पीएम स्वनिधि योजना में ऋण वितरण से लेकर डिजिटल लेन-देन के कार्यों में तेजी लाई जाएगी। राज्य शासन ने भारत सरकार से मिले लक्ष्यों को तय समय-सीमा से दो साल पहले पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है। सभी नगरीय निकाय इसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएंगे। बैंकों में लंबित ऋण प्रकरण तेजी से निपटाने के साथ ही पात्र पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ने शत-प्रतिशत डिजिटल सशक्तीकरण पर फोकस किया जाएगा।  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज पीएम स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) की राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों से कहा कि कोई भी पात्र पथ विक्रेता योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। योजना का मुख्य उद्देश्य पथ विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के सुलभ कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने नगरीय निकायों और बैंक प्रतिनिधियों को आपसी समन्वय बढ़ाकर ऋण प्रकरणों का तेजी से निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण के ऋण वितरण की निकायवार और बैंकवार समीक्षा करते हुए लंबित आवेदनों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) को निर्देशित किया। प्रमुख सचिव  बोरा ने मंत्रालय में आयोजित वर्चुअल बैठक में सभी नगरीय निकायों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य समय-सीमा से दो वर्ष पहले हासिल करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर प्रभावी ढंग से अमल करने को कहा। उन्होंने अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए निकायों और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने ऋण वितरण के साथ ही पथ विक्रेताओं के डिजिटल सशक्तीकरण पर भी फोकस करने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में क्यूआर (QR) कोड वितरण, यूपीआई (UPI) से डिजिटल लेन-देन और इस पर दिए जा रहे कैशबैक प्रोत्साहन की समीक्षा की। उन्होंने पथ विक्रेताओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। पीएम स्वनिधि की निगरानी समिति की बैठक में योजना को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने राज्य और निकाय स्तर पर मानव संसाधन की नियुक्ति की स्वीकृति दी गई। बैठक में क्रेडिट कार्ड योजना की प्रगति, प्रदेश में स्वच्छ एवं हाइजीनिक स्ट्रीट फूड हब की स्थापना और ऋण अदायगी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। भारत सरकार को भेजे गए प्रस्तावों पर कार्योत्तर स्वीकृति भी प्रदान की गई।  बोरा ने नगरीय निकायों में पथ विक्रेताओं के साथ नियमित संवाद कार्यक्रम और जिला स्तर पर बैंकर्स कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके जरिए पथ विक्रेताओं को योजना, ऋण प्रक्रिया और डिजिटल लेन-देन की जानकारी देने के साथ बैंकों से समन्वय कर लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण किया जाएगा। बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों और बैंक शाखाओं को सम्मानित करने का भी निर्णय लिया गया। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग के उप सचिव  ए.के. सिंग, राज्य शहरी विकास अभिकरण के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील अग्रहरि, भारतीय रिजर्व बैंक के उप महाप्रबंधक  प्रदीप गोंदुले, सिडबी के उप महाप्रबंधक  संतोष राव मोरे, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के प्रतिनिधि उप महाप्रबंधक  मनोज सिंह, नगर निगमों के आयुक्त  प्रकाश सर्वे,  अरुण वर्मा,  दशरथ सिंह राजपूत, उपायुक्त  नीरज कौशिक, कार्यपालन अभियंता  ए.के. सिंग तथा योजना के निकाय स्तरीय नोडल अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।  

पीएमईजीपी से शुरू किया बेकरी उद्योग, खुद बने आत्मनिर्भर और 10 लोगों को दिया रोजगार

रायपुर कोरिया में अब कई परिवारों की सुबह सिर्फ ‘गुड मॉर्निंग’ संदेश से नहीं, बल्कि ‘गुड मॉर्निंग बेकरी’ के ताजा ब्रेड, टोस्ट, बिस्किट और केक से भी होती है। ग्राम ओड़गी के दिलीप और सावित्री गुप्ता की जोड़ी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का लाभ उठाकर अपने सपने को कारोबार में बदला है।कभी आर्थिक कठिनाइयों से जूझने वाला यह परिवार आज आत्मनिर्भर है और अपने साथ करीब 10 लोगों को रोजगार दे रहा है। मोदी की योजना ने दिखाई राह, सपने को मिला आकार           स्नातक तक पढ़ी सावित्री गुप्ता और दसवीं तक पढ़े उनके पति दिलीप के लिए अपना व्यवसाय शुरू करना आसान नहीं था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले दिलीप करीब पांच वर्षों तक दूसरी बेकरी में काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने बेकरी उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार और ग्राहकों की जरूरतों को करीब से समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनके अपने कारोबार की ताकत बना।           वर्ष 2023-24 में बैकुंठपुर विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े के माध्यम से दिलीप को पीएमईजीपी योजना की जानकारी मिली। योजना को समझने के बाद दिलीप और सावित्री ने तय किया कि अब दूसरों के लिए काम करने के बजाय अपना रोजगार खड़ा किया जाए। पीएमईजीपी ने दिया पूंजी का संबल            सावित्री ने पीएमईजीपी के माध्यम से करीब 10 लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी जमीन पर बेकरी उद्योग स्थापित किया। परिवार ने भी करीब 2 से 3 लाख रुपये की राशि लगाई। करीब 10 से 12 हजार वर्गफीट क्षेत्र में ‘गुड मॉर्निंग बेकरी’ की शुरुआत हुई। यहां केक, बिस्किट, मीठा गोला, ब्रेड, टोस्ट सहित विभिन्न बेकरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। कच्चा माल अनूपपुर, मनेंद्रगढ़ और बैकुण्ठपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से मंगाया जाता है। दिलीप का अनुभव, सावित्री का संकल्प बना सफलता की ताकत          इस कारोबार की खासियत सिर्फ सरकारी ऋण से शुरू होना नहीं, बल्कि दिलीप के वर्षों के अनुभव और सावित्री के आत्मविश्वास की साझेदारी भी है। दिलीप ने जहां बेकरी के काम का व्यावहारिक अनुभव कारोबार में लगाया, वहीं सावित्री ने परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारियों को संभालते हुए उद्यम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों की मेहनत का परिणाम है कि गांव में शुरू हुआ कारोबार अब बैकुण्ठपुर के साथ कुदरगढ़, खर्रा और सूरजपुर तक अपने उत्पाद पहुंचा रहा है। एक परिवार की आत्मनिर्भरता से 10 परिवारों की आजीविका तक            पीएमईजीपी से शुरू हुआ यह उद्योग अब केवल दिलीप और सावित्री के परिवार की आय का साधन नहीं है। बेकरी में करीब 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यानी सरकारी योजना से मिले एक अवसर ने एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के साथ दूसरे जरूरतमंद परिवारों के लिए भी रोजगार का रास्ता खोला है।   सावित्री कहती हैं कि पीएमईजीपी ने उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी। कभी अपने व्यवसाय की कल्पना करना कठिन था, लेकिन योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उस सपने को हकीकत में बदल दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ दूसरों को रोजगार देने की स्थिति में हैं। मोदी जी की योजना ने हमें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया              प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सावित्री कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मेहनत से स्वरोजगार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।             दिलीप कहते हैं कि योजना का लाभ मिलने के साथ समय का सही उपयोग, अपने काम का अनुभव और निरंतर मेहनत उनकी सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं। दूसरे की बेकरी में काम करते हुए जो सीखा, उसे अपने व्यवसाय में लगाया और आज उसी अनुभव ने उन्हें अपनी पहचान बनाने में मदद की है। जोड़ी ने मेहनत की कई परिवारों की सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ से            दिलीप और सावित्री की यह जोड़ी सेवा संकल्प की उस भावना को भी मजबूत करती है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर बने और आगे बढ़कर दूसरों के लिए भी रोजगार व आजीविका का माध्यम तैयार करे। एक योजना ने अवसर दिया, एक जोड़ी ने मेहनत की और आज उस मेहनत से कई परिवारों की सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ हो रही है।

‘नागरिक विज्ञान’ से जैव विविधता संरक्षण में भागीदारी करेंगे युवा

रायपुर  सेवा संकल्प अभियान के तहत जशपुर वनमंडल में युवाओं, स्थानीय समुदायों और वन अमले को जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं को ‘नागरिक विज्ञान’ से जोड़ते हुए स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।  कार्यक्रम में वन मुख्यालय रायपुर के विषय विशेषज्ञ डॉ. अनिल वास्तव और कृषि महाविद्यालय, अम्बिकापुर के रिसर्च एसोसिएट  यमलेश निषाद ने जलवायु परिवर्तन के कारणों और पर्यावरण एवं जैव विविधता पर उसके प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों में वन पारिस्थितिकी तंत्र के प्रभावी प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के विभिन्न पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। ‘युवान’ पहल से जैव विविधता के दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण       फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी, रायपुर की ‘युवान’ पहल के माध्यम से युवाओं को स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक अवलोकन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया समझाई गई। ‘मेरा युवा भारत’, जशपुर के स्वयंसेवकों ने भी इसमें भागीदारी की। प्रशिक्षण के दौरान पक्षियों, तितलियों और सरीसृपों के पारिस्थितिक महत्व तथा उनके संरक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। प्रकृति भ्रमण और बर्ड वाचिंग के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की पहचान, क्षेत्रीय अवलोकन और उनके अभिलेखीकरण का व्यावहारिक अनुभव भी मिला। कार्यक्रम में जशपुर के वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विषय विशेषज्ञ और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस का 10 दिवसीय विशेष अभियान

भोपाल  सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को रोकने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर 10 दिवसीय विशेष प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान 28 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना तथा सुरक्षित यातायात संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा में सामने आया है कि दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट तथा चार पहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों द्वारा सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने से दुर्घटना की स्थिति में गंभीर चोट एवं मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान हेलमेट एवं सीटबेल्ट के शत-प्रतिशत उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख चौराहों, हाईवे और ब्लैक स्पॉट पर विशेष चेकिंग अभियान के दौरान जिलों में मुख्य चौराहों, राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजमार्गों तथा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट) पर निर्धारित समयावधि में विशेष चेकिंग प्वाइंट स्थापित कर सघन जांच की जाएगी। हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों तथा सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने वाले चार पहिया वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाली सवारी के लिए भी हेलमेट अनिवार्य होने के संबंध में विशेष रूप से जागरूक किया जाएगा तथा नियम का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन चालक एवं पीछे बैठी सवारी के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ITMS, CCTV और ANPR से होगी निगरानी जिन शहरों में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) एवं CCTV कैमरे उपलब्ध हैं, वहां ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सहित उपलब्ध तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हुए ई-चालान की कार्रवाई की जाएगी। हेलमेट एवं सीटबेल्ट के नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन के लिए मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी। स्कूल-कॉलेजों से लेकर बाजारों तक चलेगा जागरूकता अभियान प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, औद्योगिक संस्थानों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में हेलमेट एवं सीटबेल्ट के महत्व को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख चौराहों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थानों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, पंपलेट सहित अन्य प्रचार माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, रेडक्रॉस, सामाजिक संगठनों तथा अन्य हितधारकों को भी जोड़ा जाएगा। पेट्रोल पंप, ऑटोमोबाइल डीलर, ड्राइविंग स्कूल, परिवहन व्यवसाय से जुड़े संगठनों एवं अन्य संबंधित संस्थानों के सहयोग से नागरिकों को हेलमेट एवं सीटबेल्ट के नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं अन्य उपलब्ध संचार माध्यमों के जरिए सड़क सुरक्षा संबंधी संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। हेलमेट एवं सीटबेल्ट के उपयोग से दुर्घटनाओं में जीवन बचने के वास्तविक उदाहरणों को जन-जागरूकता सामग्री में प्रमुखता से शामिल किया गया, ताकि नागरिकों को इन सुरक्षा उपकरणों के महत्व के प्रति जागरूक किया जा सके

साइबर जालसाजों से सावधान रहें, बिल भुगतान केवल अधिकृत माध्यमों से ही करें : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिलों का नगद भुगतान कंपनी के जोन, वितरण केन्द्र कार्यालय, पीओएस मशीन अथवा अधिकृत भुगतान केन्द्रों जैसे एम.पी.ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर पर ही करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के केशलेस भुगतान के लिये कंपनी के पोर्टल (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम ऐप, व्हाट्सएप पे एवं उपाय मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि उपभोक्ता को असमय विद्युत विच्छेदन से बचने के लिये किसी निजी मोबाईल नंबर से कॉल कर भुगतान करने हेतु कोई एसएमएस/ व्हाट्सएप जारी नहीं किया जाता है। कंपनी द्वारा जारी किए गए एसएमएस केवल निर्धारित नम्बर सेंडर आईडी से ही प्रेषित किए जाते हैं। उपभोक्ता किसी अन्य सेंडर आईडी अथवा निजी नंबर से आए भ्रामक मेसेज से सतर्क रहें। कंपनी अंतर्गत विद्युत देयकों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान नंबर यानि आईवीआरएस नंबर की जरूरत होती है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही जोन, वितरण केन्द्रों या अन्य गेटवे एमपी ऑनलाइन, पेटीएम, फोन पे, गूगल पे. अमेजन पे, व्हाट्सएप पे आदि पर बिजली बिलों का भुगतान होता है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी अनजान मोबाइल नंबर से आए फोन या व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर देयकों की राशि अंतरित न करें। साथ ही अपना पिन नंबर भी किसी के साथ साझा न करें। कंपनी के संज्ञान में आया है कि सायबर जालसाजों द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज अथवा आई.व्ही.आर. तकनीक से फोन कॉल पर नंबर दबाने के लिये कहा जाता है जिसमें बिल भुगतान कराने हेतु भय बनाकर कि आपकी बिजली कुछ घंटों बाद काट दी जाएगी, इसके लिए बिल भुगतान करने के लिये विशेष नंबर दबाएं, मोबाइल नंबर विशेष अथवा अनजान लिंक/ऐप पर क्लिक कर या संपर्क कर बकाया राशि जमा कराएं। इस प्रकार के एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज एवं आई.व्ही.आर. फोन कॉल फर्जी हैं, इन पर ध्यान नहीं दिया जाए। विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की गयी है कि इस प्रकार के फर्जी सायबर जालसाजों से सतर्क और सावधान रहें। साइबर फ्रॉड संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल भारत सरकार की हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराए। यदि किसी अनजान नंबर से बिजली संबंधी कार्य के लिए फोन आता है, तो उपभोक्ता संबंधित व्यक्ति से उसका Employee ID अवश्य पूछें। सत्यापन के बाद ही किसी व्यक्ति को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी मानें और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी किसी से भी साझा करने से बचें।  

मुन्नी का हौसला, एम हेल्प वॉटर की धार, महालक्ष्मी समूह से रोजगार की बहार

कोरिया  सेवा संकल्प अभियान केवल सेवा कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी है। इसी भावना को ग्राम डुमरिया की श्रीमती मुन्नी बाई राजवाड़े अपने उद्यम के माध्यम से साकार कर रही हैं। कभी खेतों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके परिवार चलाने वाली मुन्नी बाई आज सरकारी योजनाओं के सहयोग से सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं। बिहान योजना से स्वयं सहायता समूह का संबल मिला, प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ने उनके सपने को कारोबार में बदलने का आर्थिक आधार दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर हैं और करीब 10 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। ’समूह से जुड़कर मिली उद्यम की राह’’ मुन्नी बाई बिहान योजना के अंतर्गत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण मिला। रायपुर में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पीएमईजीपी की जानकारी मिली। योजना से प्रभावित होकर उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र पहुंचकर विस्तृत जानकारी ली और अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पेयजल प्लांट स्थापित करने का फैसला किया। कई महीनों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण एवं उपलब्ध सहायता से शेड, बाउंड्री और बोरवेल सहित आवश्यक व्यवस्था तैयार की गई। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ‘एम हेल्प वॉटर’ पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया। एक उद्यम से 10 लोगों को रोजगार मुन्नी बाई का व्यवसाय अब केवल उनके परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं है। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तथा अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है और कर्मचारियों को 6 से 9 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच से लेकर बोतल भरने और पैकेजिंग तक के कार्य के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार और नए कौशल का अवसर मिला है। गांव से कई जिलों तक पहुंचा कारोबार मुन्नी बाई के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है। बैकुण्ठपुर के साथ मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में ‘एम हेल्प वॉटर’ की आपूर्ति की जा रही है। महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिली वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के अभिसरण से पीएमईजीपी का सहयोग उनके उद्यम की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ। मुन्नी बाई प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाओं ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। सरकारी सहयोग और मार्गदर्शन से आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और दूसरों को भी रोजगार दे पा रही हैं। मुन्नी बाई की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जब जनभागीदारी, संकल्प और मेहनत से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव एक परिवार से आगे बढ़कर पूरे समाज तक पहुंचता है। एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहभागी बनती है। सेवा संकल्प अभियान की भावना भी यही है सेवा के साथ जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता विकसित समाज के निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी। मुन्नी बाई इसी संकल्प की एक प्रेरक तस्वीर हैं।

केरलापेंदा में 21 साल बाद खुले श्रीराम मंदिर के द्वार, फिर से सुनाई देने लगी पूजा की घंटियां, जलने लगे आस्था के दीप

रायपुर कभी जिन रास्तों पर कदम रखने से पहले लोग कई बार सोचते थे, जहां जंगलों के बीच बंदूक की आवाज और बारूदी सुरंगों का डर बस्तर की पहचान बन गया था, उन्हीं इलाकों में अब बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है। यह बदलाव केवल सड़कों, सुरक्षा कैंपों या विकास कार्यों में नहीं, बल्कि उन लोगों की जिंदगी में भी दिखाई दे रहा है, जिन्होंने हिंसा का दौर अपनी आंखों से देखा है। दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स ने बस्तर भ्रमण के दूसरे दिन सुकमा से जगरगुंडा और केरलापेंदा होते हुए पूवर्ती तक का सफर किया। करीब 13 घंटे से अधिक चले इस सफर में उन्होंने बस्तर के उस चेहरे को करीब से देखा, जो लंबे समय तक देश के सामने नक्सल हिंसा की खबरों के जरिए ही आया। पुनर्वास केंद्र में मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से संवाद से लेकर सुरक्षा व्यवस्था को समझने, ‘खूनी सड़क’ से गुजरने, 76 जवानों की शहादत से जुड़े क्षेत्र को देखने, ग्रामीणों से बातचीत करने, 21 साल तक बंद रहे राम मंदिर में पहुंचने और अंत में पूवर्ती में हिडमा के परिवार से मिलने तक की यह यात्रा बस्तर के अतीत, वर्तमान और बदलती परिस्थितियों की एक जीवंत तस्वीर बन गई। सुबह सुकमा पहुंचने के बाद इंफ्लुएंसर्स ने सबसे पहले सुकमा पुनर्वास केंद्र का दौरा किया। यहां उन्होंने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से सीधे संवाद किया। बातचीत में उन्होंने उनके जीवन, आत्मसमर्पण के बाद आए बदलाव और सामान्य जीवन की ओर लौटने के अनुभवों को समझा। इन चेहरों के पीछे एक लंबा और कठिन अतीत था, लेकिन उनके सामने खड़े होकर संवाद करते इंफ्लुएंसर्स को बस्तर की कहानी का एक ऐसा मानवीय पक्ष दिखाई दिया, जिसे दूर बैठकर समझना आसान नहीं है। यह कहानी केवल बंदूक छोड़ने की नहीं, बल्कि एक सामान्य जिंदगी को दोबारा पाने की कोशिश की भी है। इसके बाद इंफ्लुएंसर्स ने सुकमा के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा, शांति, विकास और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बस्तर के दूरस्थ और कभी कठिन माने जाने वाले इलाकों तक सुरक्षा के साथ नागरिक सुविधाओं और विकास की पहुंच किस तरह बढ़ रही है। सुकमा में ही दल ने साइंस पार्क का भ्रमण किया। जंगलों और संघर्ष की छवि से इतर यह पड़ाव बस्तर की उस तस्वीर से परिचित कराने वाला था, जिसमें शिक्षा, विज्ञान और आधुनिक सुविधाओं के लिए भी जगह बन रही है। इसके बाद सफर तोंगपाल की ओर बढ़ा। भोजन के बाद दल जगरगुंडा के लिए रवाना हुआ। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह मार्ग था, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘खूनी सड़क’ के नाम से जाना जाता है। इसी रास्ते से गुजरते हुए इंफ्लुएंसर्स ने उस दौर की जानकारी ली, जब यह क्षेत्र लंबे समय तक नक्सली हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र रहा। जगरगुंडा पहुंचकर उन्हें उस क्षेत्र के बारे में बताया गया, जो वर्ष 2010 में सुरक्षा बलों के 76 जवानों की शहादत से जुड़े ताड़मेटला हमले की स्मृति से जुड़ा है। 6 अप्रैल 2010 को हुए इस हमले में 76 सीआरपीएफ जवानों की जान गई थी। यह पड़ाव इंफ्लुएंसर्स के लिए केवल इतिहास जानने का अवसर नहीं था। जिन स्थानों के नाम कभी देशभर में हिंसा की खबरों के साथ सुर्खियों में आते थे, वहां खड़े होकर उस अतीत को समझना उनके लिए बस्तर को एक अलग नजरिए से देखने जैसा था। लेकिन इसी सफर में उन्हें यह भी महसूस हुआ कि बस्तर की कहानी केवल अतीत में अटकी हुई नहीं है। जगरगुंडा से आगे बढ़ते हुए इंफ्लुएंसर्स केरलापेंदा पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से संवाद किया और क्षेत्र में आए बदलावों के बारे में जाना। ग्रामीणों के अनुभवों ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि वर्षों तक संघर्ष से प्रभावित रहे इलाके में सामान्य जीवन की वापसी का अर्थ स्थानीय लोगों के लिए क्या है। केरलापेंदा में उनका सामना बस्तर की इस बदलती तस्वीर के सबसे मार्मिक प्रतीकों में से एक राम मंदिर से हुआ। यह वही मंदिर है, जो डर और भय से करीब 21 वर्षों तक बंद रहा था। मंदिर में भगवान राम, माता सीता और भगवान लक्ष्मण की संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित हैं। वर्ष 2003 में माओवादी प्रभाव के दौर में ग्रामीणों को मंदिर बंद रखने और वहां पूजा-अर्चना न करने का फरमान दिया गया था। भय का ऐसा वातावरण था कि लोग मंदिर के आसपास जाने से भी बचते थे। मंदिर में पूजा करीब 21 वर्षों तक बंद रही। फिर अप्रैल 2024 में परिस्थितियां बदलीं। सुरक्षा बलों की मौजूदगी और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर की सफाई की गई। करीब 21 वर्षों से बंद मंदिर के कपाट फिर खुले। ग्रामीणों और सीआरपीएफ जवानों ने मिलकर मंदिर परिसर की सफाई की और भगवान राम, माता सीता तथा भगवान लक्ष्मण की संगमरमर की प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना दोबारा शुरू हुई। जिस मंदिर के दरवाजे कभी भय के कारण बंद हुए थे, वहां फिर पूजा की घंटियां सुनाई देने लगीं। बस्तर की बदलती तस्वीर को समझने के लिए शायद इससे अधिक भावनात्मक दृश्य मुश्किल है, एक ओर बंदूक और भय का अतीत, दूसरी ओर फिर से जलता दीप और मंदिर में लौटती पूजा। केरलापेंदा का यह प्रसंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गांव कभी माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। वर्ष 2025 में यहां से 9 सहित कुल 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद केरलापेंदा को माओवादी मुक्त गांव घोषित किया गया था।  यही कारण है कि इंफ्लुएंसर्स के लिए केरलापेंदा केवल यात्रा का एक पड़ाव नहीं रहा। यह उनके सामने बस्तर के बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा, जहां कभी भय के कारण पूजा रुक गई थी, वहीं अब ग्रामीण जीवन और धार्मिक गतिविधियों की वापसी दिखाई दे रही है। इसके बाद  इंफ्लुएंसर्स का दल पूवर्ती की ओर रवाना हुआ। जंगलों और दूरस्थ इलाकों से गुजरते हुए कई घंटे की यात्रा के बाद वे रात में पूवर्ती पहुंचे। पूवर्ती  नक्सली कमांडर हिडमा का पैतृक गांव है। यहां इंफ्लुएंसर्स ने हिडमा के बड़े भाई, भाभी और भतीजे से संवाद किया। उन्होंने परिवार से गांव की वर्तमान परिस्थितियों, स्थानीय जीवन … Read more

सेवा की कहानी: पहाड़ी कोरवा बस्ती के नन्हे कदमों को मिला बेहतर माहौल, लालमाटी में नया आंगनबाड़ी भवन बना पोषण और सीखने का केंद्र

रायपुर दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती के नन्हे बच्चों को अब पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और नियमित गतिविधियों के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है। सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत लालमाटी स्थित पहाड़ी कोरवा बस्ती में 11.69 लाख रुपये की लागत से नया आंगनबाड़ी भवन तैयार किया गया है। स्थायी भवन उपलब्ध होने से बच्चों को एक ही स्थान पर आंगनबाड़ी की विभिन्न सेवाओं से जोड़ने की राह आसान हुई है। वहीं माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं और जानकारियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती में बना नवीन आंगनबाड़ी भवन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 11.69 लाख रुपये में तैयार हुआ नया आंगनबाड़ी भवन पहाड़ी कोरवा बस्ती में नवीन आंगनबाड़ी भवन का निर्माण वीबी जी राम जी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से 11.69 लाख रुपये की लागत से किया गया है। नया भवन मिलने से केंद्र की गतिविधियों के नियमित और व्यवस्थित संचालन के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है। इससे बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने के साथ आंगनबाड़ी की सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में भी सहूलियत हुई है। दूरस्थ बस्ती में ही केंद्र उपलब्ध होने से बच्चों और महिलाओं को विभिन्न सेवाओं एवं गतिविधियों से जोड़ना आसान हुआ है। पहाड़ी कोरवा बच्चों को मिला पोषण और सीखने का बेहतर माहौल आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती में नया भवन बनने से बच्चों के लिए नियमित गतिविधियों के संचालन की बेहतर व्यवस्था हुई है। अब उन्हें निर्धारित स्थान पर पोषण संबंधी सेवाओं के साथ प्रारंभिक शिक्षा और विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। स्थायी भवन से बच्चों को नियमित रूप से केंद्र से जोड़ने और उनके पोषण एवं प्रारंभिक विकास से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में सहायता मिल रही है। अभिभावकों के लिए भी बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचाना सुविधाजनक हुआ है। माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी बना सेवाओं का केंद्र नया आंगनबाड़ी भवन केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है। केंद्र के माध्यम से उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न सेवाओं के साथ पोषण, मातृ एवं शिशु देखभाल तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों से जोड़ा जा रहा है। नया भवन उपलब्ध होने से इन गतिविधियों के आयोजन के लिए भी एक निश्चित स्थान मिला है। बच्चों, माताओं और किशोरी बालिकाओं को एक ही छत के नीचे सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था ने दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र की पहुंच और उपयोगिता को मजबूत किया है। विभागीय अभिसरण से दूरस्थ जनजातीय बस्ती तक पहुंची सुविधा वीबी जी राम जी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से तैयार यह भवन दूरस्थ जनजातीय बसाहटों में आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में उपयोगी पहल बनकर सामने आया है। इससे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के साथ महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं के लिए भी स्थानीय स्तर पर सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि योजनाओं के अभिसरण से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर बच्चों और महिलाओं को उनके गांव में ही बेहतर सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।

‘पर्यावरण और जीवनशैली’ विषय पर प्री-सीओपी 31 परामर्श राष्ट्रीय संगोष्ठी गुरुवार को भोपाल में

भोपाल ‘पर्यावरण और जीवनशैली’ विषय पर प्री-सीओपी31 परामर्श राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विज्ञान भवन, भोपाल में गुरुवार, 1 अक्टूबर को किया जाएगा। संगोष्ठी में जलवायु और सतत विकास के बीच समन्वय को मजबूत करने और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्यों की भूमिका पर विचार-विमर्श होगा। विशेषज्ञ एवं संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव से जुड़े विषयों पर विचार साझा करेंगे। जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण संगोष्ठी ‘लिविंग द राइट वे’ पहल की अवधारणा पर आधारित है। इसका उद्देश्य जलवायु कार्रवाई, सतत विकास और जीवनशैली में परिवर्तन के लिए सरकार और समाज के समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देना है। पहल के अंतर्गत सरकार, संस्थाओं, समुदायों और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से जलवायु-सक्षम, समतापूर्ण और सतत समाज के निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पहल की परिकल्पना ऐसे जलवायु-सक्षम, समतापूर्ण और सतत समाज के निर्माण की है, जहां सरकार, संस्थाएं, समुदाय और नागरिक मिलकर ऐसी जीवनशैली अपनाएं, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं, सतत विकास लक्ष्यों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी योगदान दे। पहल का उद्देश्य सरकार, नागरिक समाज, अकादमिक जगत, निजी क्षेत्र, युवाओं और समुदायों को साथ लाकर जलवायु कार्रवाई एवं सतत विकास को नीतियों, संस्थाओं और दैनिक जीवनशैली में एकीकृत करना है। तीन तकनीकी सत्रों में होगा विचार-विमर्श संगोष्ठी में तीन तकनीकी सत्र होंगे। इनमें नीतिगत समन्वय के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान, राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्यों की भूमिका एवं संक्रमण के वित्तपोषण तथा सीओपी31 से अपेक्षाओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भारत की राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं, पंचामृत संकल्पों, मिशन लाइफ और सतत विकास लक्ष्यों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने में राज्यों, स्थानीय सरकारों, नागरिक समाज, अकादमिक जगत, निजी क्षेत्र, युवाओं और समुदायों की भूमिका पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संयुक्त संगठन मंत्री  प्रवीण रामदास विशिष्ट अतिथि और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक  गोपाल आर्य अध्यक्ष के रूप में शामिल होंगे। मध्यप्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (मैपकास्ट), मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस एंड पॉलिसी एनालिसिस कार्यक्रम में सहभागी संस्थाओं के रूप में शामिल हैं।