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भोपाल में बनेगा गैस त्रासदी मेमोरियल, भुज के स्मृतिवन से प्रेरित परियोजना पर सरकार की तैयारी

भोपाल  भोपाल में 1984 में हुए भीषण गैस कांड की याद में अब एक भव्य और विश्वस्तरीय स्मारक बनाने की योजना तैयार की जा रही है. यह स्मारक गुजरात के भुज स्थित प्रसिद्ध ‘स्मृतिवन’ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यूनियन कार्बाइड की केमिकल कचरा-मुक्त भूमि पर यह स्मारक बनाया जाए।  इस परियोजना के लिए एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड कॉर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन (Environmental Planning and Coordination Organisation) को जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें भुज के भूकंप स्मारक और म्यूजियम का अध्ययन करने तथा उसके आधार पर एक डिटेल्ड एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है।  हजारों लोगों की याद में बने स्मारक मुख्यमंत्री मोहन यादव फरवरी 2026 में कच्छ दौरे के दौरान भुज के स्मृतिवन से काफी प्रभावित हुए थे. 2001 के विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वाले हजारों लोगों की याद में बने इस स्मारक ने उन्हें प्रेरित किया. यह स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम है, जिन्होंने इसे 2011 में चीन के सिचुआन भूकंप स्मारक को देखकर तैयार करने की योजना बनाई थी।  भुज का ‘स्मृतिवन’ 470 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे देश का सबसे बड़ा स्मारक माना जाता है. यह 2001 के भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की स्मृति में बनाया गया है. यहां 7 थीम आधारित गैलरियां बनाई गई हैं, जहां आधुनिक तकनीक जैसे सिम्युलेटर, थ्री-डी और प्रोजेक्टर के जरिए भूकंप का वास्तविक अनुभव कराया जाता है।  सीएम ने दिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एप्को की एक विशेष टीम गुजरात के भुज में बने आधुनिक भूकंप स्मारक व संग्रहालय का मौका-मुआयना करे। वहां की व्यवस्थाओं और डिजाइन का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद भोपाल में भी वैसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए एक विधिवत प्रस्ताव और ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जाए। भुज का 'स्मृतिवन' मॉडल क्यों है खास? भोपाल में जिस भुज मॉडल को आधार बनाकर स्मारक की रूपरेखा तैयार की जा रही है, वह बेहद अनूठा है। 2001 के गुजरात भूकंप पीड़ितों की याद में बना भुज का 'स्मृतिवन' अपनी आधुनिक गैलरी, मियावाकी वन और आपदा प्रबंधन के जीवंत अनुभवों (सिम्युलेटर तकनीक) के कारण दुनिया भर में मशहूर है। अब इसी तर्ज पर भोपाल गैस त्रासदी के इतिहास और पीड़ितों की याद को सहेजने के लिए यूनियन कार्बाइड परिसर को नया रूप दिया जाएगा। कच्‍छ दौरे के समय सीएम हुए थे प्रभावित दरअसल, फरवरी 2026 में अपने कच्छ दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भुज के 'स्मृतिवन' को देखकर बेहद प्रभावित हुए थे। वर्ष 2001 के विनाशकारी भूकंप पीड़ितों की याद में 470 एकड़ में फैला भुज का यह अनूठा स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम था। पीएम मोदी ने साल 2011 में चीन के सिचुआन प्रांत के भूकंप स्मारक को देखने के बाद इस भव्य स्मृतिवन का खाका तैयार किया था। क्यों अनूठा व विश्वस्तरीय है भुज का 'स्मृतिवन'? देश का सबसे बड़ा स्मारक: यह स्मारक 2001 के गुजरात भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की याद में भुज की भुजिया पहाड़ी पर पूरे 470 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। भूकंप का वास्तविक अहसास: स्मृतिवन में 7 थीम-आधारित गैलरी बनाई गई हैं। यहाँ विशेष सिम्युलेटर की मदद से आने वाले आगंतुकों को भूकंप का वास्तविक (लाइव) अनुभव कराया जाता है। कच्छ की संस्कृति और इतिहास: थ्री-डी प्रोजेक्टर व आधुनिक गैजेट्स के जरिए कच्छ की अनूठी संस्कृति, भूकंप का इतिहास और इस भीषण आपदा के बाद हुए अद्भुत पुनर्निर्माण की पूरी कहानी को जीवंत रूप में दिखाया गया है। पर्यावरण और जल संरक्षण: पूरे परिसर में 50 चेकडैम बनाए गए हैं। इसके साथ ही, दिवंगत आत्माओं की याद में 50,000 से अधिक पौधे लगाकर एक भव्य 'मियावाकी वन' विकसित किया गया है। पुनर्निर्माण की कहानी को दिखाया इस स्मारक में कच्छ की संस्कृति, इतिहास और भूकंप के बाद हुए पुनर्निर्माण की कहानी को भी दिखाया गया है. इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. यहां 50 चेकडेम बनाए गए हैं और 50,000 से अधिक पौधों के साथ मियावाकी वन विकसित किया गया है।  इसी मॉडल को आधार बनाकर भोपाल में बनने वाला नया स्मारक गैस कांड का दर्द, इतिहास और सबक को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करेगा। 

Right to Business Act: चंडीगढ़ में बिजनेस के लिए नई व्यवस्था लागू, पढ़ें कैसे मिलेगा फायदा और कैसे करें आवेदन

चंडीगढ़  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट, 2020 को कुछ जरूरी संशोधनों के साथ लागू कर दिया है। तारीख 2 जुलाई, 2026 से यह प्रभावी रूप से लागू हो चुका है।। इस नए कानून के आने से चंडीगढ़ में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को एक नई मजबूती मिलेगी। आइए समझते हैं यह राइट टू बिजनेस एक्ट क्या है और लोगों व व्यापारियों को कैसे इसका फायदा होगा। राइट टू बिजनेस एक्ट क्या है? राइट टू बिजनेस एक्ट का मुख्य उद्देश्य नए व्यवसायों को शुरू करने के लिए दी जाने वाली सरकारी मंजूरियों से है। जहां पहले किसी भी कारोबार को शुरू करने से पहले एनओसी के लिए व्यवसासियों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। वहीं, अब इसके लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम बनाया जाएगा है। इसके जरिए आवश्यक मंजूरियां एक ही जगह से और एक तय समय-सीमा के अंदर दी जाएंगी। चंडीगढ़ तक एक्सटेंड करने के पीछे क्या है उद्देश्य? चंडीगढ़ में इस एक्ट को लागू करने का मुख्य उद्देश्य लोगों के समय को बचाना है। वहीं, सरकार भी चाहती है कि चंडीगढ़ देश में निवेश और कारोबार के लिए एक पसंदीदा और आकर्षक केंद्र बने। इसके लिए प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जाएगा ताकि कारोबारी घर बैठे सरकारी काम आसानी से करवा सके। कौन-कौन से बिजनेस इसमें आएंगे? इस एक्ट के दायरे में मुख्य रूप से तीन बड़े सेक्टर्स को शामिल किया गया है। पहला उद्योग मसलन नए कारखाने और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, व्यापार- रिटेल, होलसेल और सर्विस सेक्टर आईटी कंपनियां और स्टार्टअप्स इत्यादि। क्या होगी आवदेन की प्रक्रिया व्यवसाय शुरू करने के लिए अब किसी भी निवेशक को अलग-अलग विभागों में जाने की जरूरत नहीं होगी। आवेदन करने की प्रक्रिया सिंगल विंडो क्लियरेंस पोर्टल के माध्यम से पूरी होगी। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और फीस एक ही बार में जमा करनी होगी।  चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 को मिलेगी नई रफ्तार मास्टर प्लान-2031 के अंतर्गत चंडीगढ़ के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के आधुनिकीकरण में यह कानून एक गेम-चेंजर साबित होगा। राइट टू बिजनेस एक्ट इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए मुख्य भूमिका निभाएगा। इसके लागू होने से शहर में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ लालफीताशाही खत्म होगी। कारोबार बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

मंत्री विश्वास सारंग ने पर्वतारोही ज्योति रात्रे को दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं

भोपाल सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग से शनिवार को भोपाल में मध्यप्रदेश की पर्वतारोही ज्योति रात्रे ने सौजन्य भेंट की। मंत्री सारंग ने उन्हें हाल ही में मैक्सिको स्थित पिको डी ओरिजाबा की 5,636 मीटर (18,491 फीट) ऊँची चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर देश का गौरव बढ़ाने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। मंत्री सारंग ने कहा कि ज्योति रात्रे का साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, अथक परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी सफलता के नए शिखर छूते हुए देश और मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर गौरवान्वित करती रहेंगी। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों एवं साहसिक खेलों से जुड़े प्रतिभाशाली युवाओं की उपलब्धियां मध्यप्रदेश को नई पहचान दिला रही हैं। राज्य सरकार खेल और साहसिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मैक्सिको के पिको डी ओरिजाबा शिखर पर तिरंगा फहराने के साथ ही ज्योति रात्रे तीन महाद्वीपों के सबसे ऊँचे ज्वालामुखियों पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाली देश की सबसे वरिष्ठ महिला पर्वतारोही बन गई हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।  

भोपाल के डायल-112 हीरोज बिछड़ी 06 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल भोपाल जिले के थाना कटारा हिल्स क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से पिता से बिछड़ गई 06 वर्षीय मासूम बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालिका को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका। 04 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कटारा हिल्स क्षेत्र अंतर्गत स्प्रिंग वैली के पास एक 06 वर्षीय बालिका अकेली मिली है, जो अपने पिता से बिछड़ गई है एवं पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  नवीन यादव एवं पायलट  तीर्थ कुमार ने मौके पर पहुँचकर बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पूछताछ करने पर बालिका ने अपने परिजनों की जानकारी एवं घर का पता बताया। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बालिका द्वारा बताए गए पते के आधार पर उसे डायल 112 वाहन से सुरक्षित उसके घर ले जाकर पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 06 वर्षीय मोहिनी, निवासी अयोध्या नगर, अपने पिता के साथ कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में आई थी, जहाँ भीड़ के दौरान वह अपने पिता से बिछड़ गई थी। डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालिका को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

वाराणसी में आकार ले रहा विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रहे हैं। उनकी दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व में प्रदेश में खेल अवसंरचना तेजी से विकसित हो रही है। इसी कड़ी में वाराणसी में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में उभर रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह अत्याधुनिक स्टेडियम प्रदेश में खेल विकास के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जल्द ही यह खिलाड़ियों व क्रिकेट प्रेमियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की बढ़ती खेल क्षमता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश खेल क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल के खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान भी दिलाएगा। शिव थीम, क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी शिव थीम है, जो इसे देश के अन्य क्रिकेट स्टेडियमों से अलग पहचान देती है। स्टेडियम का मीडिया सेंटर/ नार्थ पवेलियन भगवान शिव के डमरू के आकार में तैयार किया जा रहा है। वहीं फ्लडलाइट्स त्रिशूल की आकृति में स्थापित की जा रही हैं। प्रवेश द्वार बेलपत्र थीम पर आधारित है, जबकि छत को अर्धचंद्राकार स्वरूप दिया जा रहा है। काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक वास्तुकला के साथ जोड़ने का यह प्रयास स्टेडियम को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करेगा।  क्रिकेट स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता लगभग 30,000 दर्शकों की बैठने की क्षमता वाला यह स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। परिसर में एक अंतरराष्ट्रीय मानकों का मुख्य क्रिकेट मैदान और एक पूर्ण आकार का प्रैक्टिस ग्राउंड तैयार किया गया है। इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन के साथ-साथ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए भी उत्कृष्ट वातावरण उपलब्ध होगा। फिलहाल स्टेडियम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है, सितंबर माह तक पूरा होने की संभावना है। स्टेडियम में विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया स्टेडियम में खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, प्रसारण एजेंसियों और दर्शकों के लिए सभी आवश्यक विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया है। इसमें अत्याधुनिक ड्रेसिंग रूम, आधुनिक पवेलियन, उन्नत मीडिया एवं ब्रॉडकास्ट सुविधाएं, 1500 गाड़ियों की क्षमता वाली पार्किंग, उच्च क्षमता वाली फ्लडलाइट व्यवस्था, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, उन्नत विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा प्रबंधन और दर्शकों के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के चलते यह स्टेडियम देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों की श्रेणी में शामिल होने की पूरी क्षमता रखता है। 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा क्रिकेट स्टेडियम इस महत्वाकांक्षी परियोजना की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि इसका निर्माण उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा अपनी संचित निधियों से कराया जा रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह स्टेडियम यूपीसीए की वित्तीय आत्मनिर्भरता, संस्थागत क्षमता और प्रदेश में क्रिकेट के समग्र विकास के प्रति उसकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि अगर खेल संस्थाएं दूरदर्शी सोच और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ कार्य करें, तो विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना का निर्माण संभव है। 90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई इस परियोजना को साकार करने में योगी सरकार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्टेडियम परियोजना को हर स्तर पर मजबूत सहयोग प्रदान किया। राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम निर्माण के लिए लगभग 90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई, जिससे परियोजना को मजबूत आधार मिला। यही नहीं, परियोजना से जुड़ी सभी प्रशासनिक अनुमतियां और आवश्यक स्वीकृतियां भी समयबद्ध ढंग से प्रदान की गईं, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बड़ी बाधा के तेज गति से आगे बढ़ सका है। योगी सरकार की त्वरित कार्यशैली से स्टेडियम निर्माण में तेजी योगी सरकार की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता तेज निर्णय क्षमता और समयबद्ध क्रियान्वयन रही है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण इस परियोजना में देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री की त्वरित विकास निधि के माध्यम से स्टेडियम के समीप विद्युत उपकेंद्र की स्थापना कराई गई और मात्र चार माह के भीतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई। यह कदम निर्माण कार्य को गति देने के साथ-साथ भविष्य में स्टेडियम के सुचारु संचालन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। वाराणसी प्रशासन और राज्य सरकार के निरंतर समन्वय ने इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।  पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्र बिंदु बनेगा स्टेडियम यह स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं होगा, बल्कि पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्रबिंदु बनेगा। वाराणसी सहित पूर्वांचल के लाखों युवाओं को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, अभ्यास और प्रतियोगी माहौल उपलब्ध होगा। इससे क्षेत्र की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर वाराणसी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान देगा। खेल गतिविधियों में वृद्धि से खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। 92 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा यूपीसीए के सीईओ अंकित चटर्जी ने बताया कि क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश सरकार और वाराणसी प्रशासन के सफल समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि आने वाले दशकों तक प्रदेश के खेल विकास, युवा सशक्तीकरण और क्रिकेट संस्कृति को नई दिशा देने वाली एक स्थायी धरोहर के रूप में स्थापित होगी।

5 जुलाई को होगी प्रवेश परीक्षा, 1 अगस्त से शुरू होंगी कक्षाएं

लखनऊ उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के गरीब व मेधावी युवाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना बड़ी राहत बनकर सामने आई है। समाज कल्याण विभाग की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी।  10,175 अभ्यर्थी देंगे प्रवेश परीक्षा 5 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी मंडलों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में कुल 10,175 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश के विभिन्न आवासीय कोचिंग सेंटरों में प्रवेश दिया जाएगा। नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से प्रारंभ होंगी, जबकि यह शैक्षणिक सत्र 31 मई 2027 तक संचालित किया जाएगा। सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में मिलेगी मुफ्त सुविधा प्रदेश के सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में कुल 865 चयनित छात्र-छात्राओं को निशुल्क आवासीय सुविधा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इनमें से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा क्वालीफाई कर चुके हैं। चयनित अभ्यर्थियों को रहने, खाने, पुस्तकें, स्टडी मटेरियल और अनुभवी शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन जैसी सभी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों से समझौता न करें। गरीब और होनहार युवाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर यह योजना केवल कोचिंग कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का बड़ा प्रयास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के भविष्य में बाधा न बने। इसी उद्देश्य से सरकार गरीब और होनहार युवाओं को निशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध करा रही है, ताकि वे यूपीएससी और यूपीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें। योगी सरकार की पहल से प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ रही वंचित वर्ग की भागीदारी वर्तमान समय में निजी कोचिंग संस्थानों में आईएएस-पीसीएस की तैयारी पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में योगी सरकार की यह योजना एसी, एसटी और ओबीसी वर्ग के युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन मिलने से वंचित वर्ग के युवा प्रशासनिक सेवाओं में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराएंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

साइबर सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता और पुलिस फिटनेस को मिला एक साथ बढ़ावा

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संचालित "SAFE CLICK 2.0" साइबर जागरूकता अभियान के अंतर्गत जीआरपी भोपाल द्वारा आज शनिवार को 5 किलोमीटर साइबर जागरूकता मैराथन का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य आमजन को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करना तथा पुलिस बल में फिटनेस को बढ़ावा देना था। मैराथन का शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल  राजाबाबू सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक, रेलवे,  पंकज वास्तव, पुलिस अधीक्षक, रेलवे, भोपाल,  अंकित जायसवाल सहित रेल पुलिस कार्यालय एवं आरआरपी लाइन भोपाल के लगभग 150 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। मैराथन के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में व्यापक रूप से जागरूक किया। उपस्थित लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग लिंक, सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराध, डिजिटल अरेस्ट तथा ऑनलाइन निवेश के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए गए। साथ ही साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी प्रदान की गई। इस अवसर पर अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपने बैंक खाते, एटीएम, ओटीपी, पासवर्ड अथवा अन्य व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग पूरी सतर्कता एवं सावधानी के साथ करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान जीआरपी के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने साइबर सुरक्षा के प्रति सदैव जागरूक रहने तथा समाज को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। इसके साथ ही पुलिस बल में फिटनेस को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में यह निर्णय भी लिया गया कि मध्यप्रदेश जीआरपी के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी प्रत्येक शनिवार कम से कम 5 किलोमीटर दौड़ अथवा पैदल चाल पूर्ण करेंगे, जिससे स्वस्थ एवं सक्षम पुलिस बल के निर्माण के साथ बेहतर पुलिसिंग को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस का "SAFE CLICK 2.0" अभियान प्रदेशभर में लगातार विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क एवं सुरक्षित डिजिटल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। जीआरपी भोपाल द्वारा आयोजित यह मैराथन इसी अभियान की एक प्रभावी पहल रही, जिसमें जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता एवं पुलिस फिटनेस का सफल समन्वय देखने को मिला।  

केंद्र एवं राज्य शासन की सब्सिडी से घर की छत पर लगा सोलर रूफटॉप

रायपुर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों के बिजली खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राजनांदगांव जिले के ग्राम मोखला निवासी  विद्यासागर साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किया है। इससे वे स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं तथा भविष्य में बिजली खर्च में बचत का लाभ प्राप्त करेंगे।  विद्यासागर साहू ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आवेदन कर अपने घर में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया। योजना का बैंकिंग प्रक्रिया छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक भर्रेगांव शाखा से पूरी हुई। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपए तथा राज्य शासन से 30 हजार रूपए की सब्सिडी स्वीकृत हुई है। सब्सिडी दावा की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है तथा शीघ्र ही राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो जाएगी।  विद्यासागर साहू ने बताया कि सोलर रूफटॉप सिस्टम का स्थापना कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में संयंत्र सुचारू रूप से कार्य कर रहा है। मोर बिजली मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिदिन सोलर पैनल द्वारा उत्पादित बिजली एवं बिजली की खपत की जानकारी आसानी से देख रहे हैं। इससे ऊर्जा उत्पादन की निगरानी सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है।  विद्यासागर ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह योजना न केवल बिजली खर्च कम करने में सहायक है, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।   विद्यासागर साहू ने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी से सोलर रूफटॉप लगवाना पहले की अपेक्षा अधिक सुलभ हो गया है। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे आना चाहिए। इससे बिजली पर होने वाले खर्च में कमी आएगी, ऊर्जा की बचत होगी तथा पर्यावरण संरक्षण में भी सभी की सहभागिता सुनिश्चित होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के लिए केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एक दूरदर्शी एवं जनहितकारी पहल है। इससे नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल रहा है।

भोपाल और झाबुआ में सैकड़ों खिलाड़ियों ने दिखाया हुनर, विशेषज्ञों ने परखी क्षमता

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा संचालित "टैलेंट सर्च 2026-27" अभियान प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए सुनहरा अवसर बनकर उभर रहा है। राज्य खेल अकादमियों के लिए योग्य खिलाड़ियों के चयन के लिये आयोजित ट्रायल्स में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शनिवार को राजधानी भोपाल स्थित टी.टी. नगर स्टेडियम तथा झाबुआ में आयोजित चयन ट्रायल्स में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी खेल क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी में उमड़ा खिलाड़ियों का उत्साह टी.टी. नगर स्टेडियम स्थित मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी में आयोजित चयन ट्रायल्स में कुल 148 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें 84 बालक एवं 64 बालिकाएं शामिल रहीं। चयन प्रक्रिया अनुभवी प्रशिक्षकों की देखरेख में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप संपन्न हुई। ट्रायल्स का संचालन मुख्य प्रशिक्षक रोशन लाल के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान सहायक प्रशिक्षक नेहा कश्यप, सोनम नायक एवं भरत पंसोरिया ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन का सूक्ष्म मूल्यांकन किया। बैडमिंटन ट्रायल्स में 70 खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल में आयोजित बैडमिंटन चयन ट्रायल्स में 70 खिलाड़ियों ने भाग लेकर अपनी तकनीकी दक्षता और खेल कौशल का प्रदर्शन किया। चयन प्रक्रिया का नेतृत्व ग्वालियर बैडमिंटन अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक अगुस द्वी सन्तोसा ने किया, जो वर्ष 2021 एवं 2023 में भारतीय स्टार शटलर P. V. Sindhu के पूर्व कोच रह चुके हैं। उनके साथ इंडोनेशिया के डबल्स विशेषज्ञ प्रशिक्षक सोफियान तथा सहायक प्रशिक्षक विनीत सरोदे ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। झाबुआ में तीरंदाजी ट्रायल्स का सफल आयोजन झाबुआ में आयोजित तीरंदाजी चयन ट्रायल्स में 22 खिलाड़ियों ने सहभागिता कर अपनी एकाग्रता, तकनीकी कौशल एवं लक्ष्यभेदन क्षमता का प्रदर्शन किया। दूरस्थ अंचलों से खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि प्रदेश के जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। पारदर्शी प्रक्रिया से होगा प्रतिभाओं का चयन विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही है। खिलाड़ियों का मूल्यांकन शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, फिटनेस एवं खेल विशेष की आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, जिससे सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन कर उन्हें राज्य खेल अकादमियों में आधुनिक सुविधाओं के साथ उच्चस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके। प्रदेशभर में जारी रहेगा प्रतिभा खोज अभियान "टैलेंट सर्च 2026-27" के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स प्रदेश के अलग-अलग जिलों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने पात्र खिलाड़ियों से अधिक से अधिक संख्या में ट्रायल्स में भाग लेने का आह्वान किया है, ताकि मध्यप्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया जा सके। आगामी चरण में भी जारी रहेंगे चयन ट्रायल्स टैलेंट सर्च अभियान के आगामी चरणों में एथलेटिक्स, ट्रायथलॉन, क्याकिंग एवं केनोइंग, पुरुष हॉकी, महिला हॉकी, तीरंदाजी, ताइक्वांडो सहित विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। इससे प्रदेश के अधिकाधिक खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।  

योगी सरकार ने गाजियाबाद और रामपुर में 100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का कार्य किया पूर्ण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रही फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। यूपी के गाजियाबाद और रामपुर में 100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण हो गया है। प्रदेश सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.38 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 82.69 प्रतिशत है।      प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2, 38,72,418 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 49,98,007 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है।    योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगले 90 दिनों यानी 26 सितंबर 2026 तक लक्ष्य पूरा करना है।     प्रदेश सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.53 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।    विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी।    योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।