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NCR में डीजल ऑटो पर सख्ती, अलवर के 583 ऑटो 31 दिसंबर तक होंगे बाहर

अलवर एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन वाहनों के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इसी के तहत अलवर में भी डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। प्रादेशिक परिवहन कार्यालय, अलवर के क्षेत्राधिकार में वर्तमान में 583 डीजल ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं। इन सभी वाहनों को 31 दिसंबर 2026 तक प्रचलन से बाहर करना अनिवार्य है। परिवहन विभाग की ओर से डीजल ऑटो रिक्शा के वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें तय समय सीमा से पहले अपने वाहन को स्वच्छ ईंधन विकल्प में बदलने या अपग्रेड करने के लिए कहा जा रहा है। वाहन मालिक डीजल ऑटो को सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन में बदल सकते हैं। एनसीआर क्षेत्र में नए डीजल ऑटो रिक्शा के पंजीयन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। 1 जनवरी 2023 से एनसीआर में नए डीजल ऑटो का पंजीयन प्रतिबंधित है। अब पुराने डीजल ऑटो को भी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह हटाना होगा। इसके बाद 1 जनवरी 2027 से एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ईंधन से चलने वाले ऑटो रिक्शा के संचालन की अनुमति होगी। ऐसे में अलवर में चल रहे 583 डीजल ऑटो रिक्शा के मालिकों को आने वाले समय में अपने वाहन बदलने या स्वच्छ ईंधन विकल्प अपनाने होंगे। मंडी मोड़ पर ऑटो चालकों को दी जानकारी परिवहन कार्यालय की ओर से मंडी मोड़ स्टैंड, अलवर पर ऑटो रिक्शा संचालकों को नियमों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने ऑटो चालकों को बताया कि 31 दिसंबर 2026 तक डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा को कार्यालय के क्षेत्राधिकार से बाहर करना होगा। ऑटो संचालकों को यह भी समझाया गया कि तय समय सीमा के बाद डीजल ऑटो चलाने पर विभाग की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग अब पंजीकृत डीजल ऑटो मालिकों तक नियमों की जानकारी पहुंचाने में जुटा है। प्रदूषण कम करने के लिए नियम एनसीआर क्षेत्र में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के वाहनों को स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने की योजना के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। डीजल ऑटो की जगह सीएनजी और इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा मिलने से परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य है। अलवर एनसीआर का हिस्सा होने के कारण यहां भी इन नियमों को लागू किया जा रहा है। अब डीजल ऑटो मालिकों के पास 31 दिसंबर 2026 तक अपने वाहन को बदलने या स्वच्छ ईंधन विकल्प अपनाने का समय है। 1 जनवरी 2027 के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजल ऑटो के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।

एशियन गेम्स में नीरू ढांडा का दूसरा गोल्ड, मिक्स्ड टीम में भी रचा इतिहास

भोपाल  एशियन गेम्स 2026 में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की प्रतिभावान खिलाड़ी नीरू ढांडा ने एक और स्वर्णिम उपलब्धि हासिल की है। 30 सितंबर को ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में नीरू ढांडा और क्यानन चेनाई की भारतीय जोड़ी ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में अपना तीसरा पदक और दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया है। नीरू ने इससे पहले महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वहीं महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में उन्होंने मनीषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ भारत को रजत पदक दिलाया था। अब मिक्स्ड टीम में स्वर्ण जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स में अपने पदकों की संख्या तीन कर ली है। मिक्स्ड टीम में नीरू-क्यानन की जोड़ी का गोल्डन निशाना ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में नीरू ढांडा और क्यानन चेनाई की भारतीय जोड़ी ने शानदार निशानेबाजी करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस स्वर्ण के साथ नीरू के एशियन गेम्स 2026 अभियान में अब दो स्वर्ण और एक रजत पदक हो गए हैं। महिला ट्रैप व्यक्तिगत में भी जीता था ऐतिहासिक स्वर्ण 29 सितंबर को नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में 30 में से 28 सटीक निशाने लगाकर स्वर्ण पदक जीता था। उनके प्रदर्शन ने नया एशियन रिकॉर्ड भी बनाया। वह एशियन गेम्स में महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बनीं। इसी दिन महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भी नीरू ने भारत को रजत पदक दिलाया था। नीरू, मनीषा कीर और आशिमा अहलावत की भारतीय टीम ने 328 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया। टीम की ओर से नीरू ने 118, आशिमा ने 106 और मनीषा ने 104 अंक अर्जित किए। मध्यप्रदेश के खाते में अब 8 पदक नीरू ढांडा के मिक्स्ड टीम स्वर्ण के साथ एशियन गेम्स 2026 में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के पदकों की संख्या 8 हो गई है। प्रदेश ने अब तक 3 स्वर्ण, 4 रजत और 1 कांस्य पदक जीता है। स्वर्ण पदक     क्रांति गौड़ — क्रिकेट     नीरू ढांडा — शूटिंग, शॉटगन ट्रैप महिला व्यक्तिगत     नीरू ढांडा — शूटिंग, शॉटगन ट्रैप मिक्स्ड टीम रजत पदक     ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर — शूटिंग, 50m Rifle 3P टीम     आशी चौकसे — शूटिंग, 50m Rifle 3P महिला टीम     नीरू ढांडा — शूटिंग, शॉटगन ट्रैप महिला टीम     मनीषा कीर — शूटिंग, शॉटगन ट्रैप महिला टीम कांस्य पदक     जय मीणा — सॉफ्ट टेनिस पुरुष एकल नीरू के नाम तीन पदक, दो स्वर्ण एशियन गेम्स में नीरू ढांडा का प्रदर्शन मध्यप्रदेश के लिए खास उपलब्धि बन गया है। उन्होंने महिला ट्रैप व्यक्तिगत में स्वर्ण, महिला ट्रैप टीम में रजत और अब ट्रैप मिक्स्ड टीम में स्वर्ण पदक जीतकर तीन पदक अपने नाम किए हैं। इनमें दो स्वर्ण पदक शामिल हैं। मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन नीरू ढांडा और मनीषा कीर का प्रदर्शन मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा को भी सामने लाता है। भोपाल स्थित अकादमी में खिलाड़ियों को शॉटगन सहित शूटिंग की आधुनिक सुविधाओं और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने नीरू ढांडा को एशियन गेम्स में दूसरा स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि नीरू ने अपने शानदार प्रदर्शन से मध्यप्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने नीरू के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते रहें।  

किसान कल्याण के लिए गौपालन एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक : उद्यानिकी मंत्री कुशवाह

भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि कृषि और किसानों की समृद्धि के लिए गौपालन एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। गौमाता का गोबर खेती के लिए अत्यंत उपयोगी प्राकृतिक खाद है। इसका उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलती है। हम सभी को जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह बात भोपाल स्थित आईसीएआर, नवीबाग, बैरसिया रोड पर दिल्ली प्रेस द्वारा आयोजित ‘फार्म फूड कृषि सम्मान अवार्ड 2026 – मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रारंभ किए गए नदी जोड़ो अभियान को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी निरंतर कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसान कल्याण के लिए प्रयासरत हैं। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित करना कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की समृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनें, उनकी आय में वृद्धि हो तथा कृषि क्षेत्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे। अन्नदाता किसानों का सम्मान उनके अथक परिश्रम, समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल, दिल्ली प्रेस के संपादक  पारेशनाथ, संयुक्त संचालक मती सुमन प्रसाद, के.वी.के. भोपाल के  मेदिनी प्रसाद, मध्यप्रदेश ब्यूरो चीफ  भरत भूषण वास्तव, मती श्रुति जोशी सहित बड़ी संख्या में किसान भाई एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जैविक खेती के क्षेत्र में कार्य करने वाले उत्कृष्ट किसानों को फार्म फूड कृषि सम्मान अवार्ड से सम्मानित किया गया।  

मुश्किल घड़ी में ‘अभिभावक’ बनी योगी सरकार, वाराणसी के 11,219 परिवारों को 191 करोड़ से अधिक की मदद

*वाराणसी  बीमारी जब दरवाजे पर दस्तक देती है, तो सिर्फ शरीर नहीं, पूरा घर टूटने लगता है। जमा-पूंजी खत्म होती है, कर्ज का बोझ बढ़ता है और कई बार अपने भी हाथ खड़े कर देते हैं। ऐसे कठिन वक्त में योगी सरकार एक संवेदनशील अभिभावक की तरह जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़ी दिख रही है। वाराणसी में मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 11,219 लाभार्थियों को 191 करोड़ 11 लाख 58 हजार 416 की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह मदद इलाज की राह में खड़ी पैसों की दीवार को गिराकर परिवारों को नई उम्मीद दे रही है। संकट में सरकार का बड़ा सहारा गंभीर बीमारी या आकस्मिक दुर्घटना के समय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने इलाज का खर्च जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। दवाएं, जांच, ऑपरेशन, अस्पताल में भर्ती और उसके बाद की देखभाल का खर्च कई बार परिवार को कर्ज लेने या संपत्ति बेचने तक की स्थिति में पहुंचा देता है। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ-साथ सरकार मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से गंभीर बीमारियों से पीड़ित पात्र लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। इससे परिवार अपने प्रियजनों का समय पर उपचार करा पा रहे हैं। आकस्मिक दुर्घटनाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में भी सरकार त्वरित मदद देकर परिवारों का संकट कम करने का प्रयास कर रही है। अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) विनय कुमार सिंह ने बताया कि वाराणसी में मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक कोष से कुल 11,219 लाभार्थियों को 1,91,11,58,416  रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि यह सहायता गंभीर बीमारी और आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। बीमारी और आर्थिक लड़ाई में खड़ी योगी सरकार मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज, आकस्मिक दुर्घटना या परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु की स्थिति में पीड़ित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाता है। जिन परिवारों की आय किसी एक सदस्य पर निर्भर होती है, उनके लिए यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह सहायता केवल गंभीर बीमारियों तक सीमित नहीं है। आकस्मिक दुर्घटना अथवा अन्य गंभीर परिस्थितियों में भी पात्र जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। समय पर मदद, यही असली राहत जिला प्रशासन का जोर इस पर है कि सहायता पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। आवेदन, सत्यापन, संस्तुति और स्वीकृति की प्रक्रिया जितनी सरल और समयबद्ध होगी, मदद का असर उतना ही बड़ा होगा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि पात्र जरूरतमंदों को सरकार की इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए, ताकि संकट की घड़ी में उन्हें आवश्यक राहत मिल सके। जिनकी जिंदगी में लौटी उम्मीद केस-1: जैतपुरा के बुनकर परिवार को मिला सहारा जैतपुरा के बुनकर परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उनके 54 वर्षीय पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। सरकार से मदद मांगी तो मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तुरंत आर्थिक सहायता मिल गई। इससे पिता का इलाज हो सका और उनकी जान बच गई। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए यह मदद बहुत बड़ा सहारा है। केस-2: ऑपरेशन सफल, पत्नी की सेहत में सुधार पिंडरा तहसील के पुआरी कला गांव के ऑटो चालक अरविंद कुमार की पत्नी शिल्पी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। ऑपरेशन और उपचार का खर्च परिवार की क्षमता से बाहर था। कोष से मिली सहायता से ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो गया और अब शिल्पी की सेहत में सुधार हो रहा है। अरविंद ने कहा कि सरकारी मदद से उन्हें बड़ी राहत मिली है। केस-3: उधार के इलाज को मिला 'जीवन की डोर' का सहारा भोजूबीर निवासी एक किसान की पत्नी कैंसर से जूझ रही थीं। शुरुआत में परिवार ने उधार लेकर इलाज कराया, फिर कोष की जानकारी मिली और इलाज के लिए बड़ी आर्थिक मदद मिली। 47 वर्षीय मरीज के पति ने कहा कि यह सहायता न मिलती तो इलाज जारी रखना मुश्किल हो जाता। उनके लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष मुश्किल समय में सहारा और जीवन की डोर बन गया।

पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंबे अलगाव के आधार पर पत्नी को मिला तलाक

पटना  पटना हाईकोर्ट ने करीब 15 साल पुराने वैवाहिक संबंध को समाप्त करते हुए लंबे समय से चले आ रहे अलगाव और वैवाहिक तनाव को मानसिक क्रूरता के दायरे में माना है। न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने कुमारी सौम्या की अपील स्वीकार करते हुए मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया। दोनों का विवाह वर्ष 2009 में हुआ था और अप्रैल 2019 से अलग रह रहे थे। वर्षों के अलगाव से व्यावहारिक रूप से टूट चुका था वैवाहिक बंधन हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक मंजूर किया। कोर्ट ने कहा कि वर्षों तक जारी अलगाव, लगातार तनाव और वैवाहिक संबंधों का पुनर्स्थापित न हो पाना इस निष्कर्ष की ओर ले जाता है कि वैवाहिक बंधन व्यावहारिक रूप से टूट चुका है। इसी आधार पर वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया गया। पति के व्यभिचार के आरोप को कोर्ट ने नहीं माना मामले में पति की ओर से पत्नी पर व्यभिचार के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि हाईकोर्ट ने ठोस साक्ष्य नहीं होने के कारण इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं, उसके समर्थन में विश्वसनीय प्रमाण भी जरूरी हैं। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी दिया हवाला खंडपीठ ने मानसिक क्रूरता और वैवाहिक संबंधों से जुड़े अपने निष्कर्ष के लिए सुप्रीम कोर्ट के शोभा रानी बनाम मधुकर रेड्डी (1988) और समर घोष बनाम जया घोष (2007) के फैसलों का भी उल्लेख किया। इन निर्णयों के संदर्भ में वैवाहिक जीवन में लंबे तनाव और अलगाव के प्रभाव पर विचार किया गया। पत्नी को मिलेगा 71.66 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण हाईकोर्ट ने पत्नी के लिए 71.66 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण निर्धारित किया है। अदालत ने यह राशि तय करते समय पति की करीब 3.70 लाख रुपये मासिक आय और बच्चों समेत परिवार की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखा। भुगतान दो बराबर किश्तों में किया जाना है। तीन और छह महीने में चुकानी होगी राशि अदालत के निर्देश के अनुसार भरण-पोषण की राशि दो बराबर किश्तों में दी जाएगी। पहली किश्त तीन महीने और दूसरी छह महीने के भीतर भुगतान करनी होगी। राशि का भुगतान पूरा होने के बाद दोनों पक्ष लंबित मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। लंबे अलगाव पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी फैसले में हाईकोर्ट ने माना कि लगातार वर्षों तक अलग रहना, वैवाहिक तनाव बने रहना और संबंधों के सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना समाप्त होना मानसिक क्रूरता के निष्कर्ष तक पहुंचा सकता है। वहीं व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए ठोस प्रमाण की आवश्यकता पर भी अदालत ने जोर दिया।  

पुलिस मुख्यालय में नारकोटिक्स मामलों की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन पर राज्यस्तरीय कार्यशाला

रायपुर  नारकोटिक्स के मामलों में केवल आरोपियों तक पहुंचने के बजाय नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में नारकोटिक्स प्रकरणों की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेशभर से उप पुलिस अधीक्षक से सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के 70 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नारकोटिक्स  अमित कुमार ने कहा कि नारकोटिक्स के मामलों में अपराधियों को सजा दिलाने के साथ ही उनके द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान और जब्ती कर वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना आवश्यक है। इसके लिए प्रभावी और व्यापक विवेचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नारकोटिक्स पदार्थ कहां से आ रहा है, कौन इसकी आपूर्ति कर रहा है और इसे किस तक पहुंचाया जा रहा है, इन सभी पहलुओं पर फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड लिंक स्थापित करते हुए वित्तीय जांच की जानी चाहिए। इससे नशे के कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उसके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। उप पुलिस महानिरीक्षक, नारकोटिक्स मती पारुल माथुर ने कहा कि एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना में विभिन्न संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नशे के कारोबार से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान और उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने नारकोटिक्स की सप्लाई रिडक्शन, डिमांड रिडक्शन, हार्म रिडक्शन और रिहैबिलिटेशन के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग, रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर  प्रकाश चंद्र चौहान ने विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि वित्तीय जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि नशे के अवैध कारोबार में अवैध धन कहां से आ रहा है और उसे कहां निवेश किया जा रहा है। द्वितीय सत्र में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स, रायपुर के एडिशनल असिस्टेंट डायरेक्टर  सलमान इम्तियाज हुसैनी ने जीएसटी के विश्लेषण के माध्यम से अवैध धन और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मती अनामिका जैन सहित पुलिस मुख्यालय के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

यूपी में गुंडई की पहचान है सपा की लाल टोपी : दयाशंकर सिंह

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लाल-हरे रंग वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने लाल टोपी को उत्तर प्रदेश में गुंडई का प्रतीक बताया। मंत्री ने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं को लाल टोपी में देखकर लोगों के मन में भय पैदा होता है। वहीं, भगवा रंग को उन्होंने समृद्धि का प्रतीक बताया और कहा कि अब अखिलेश यादव भी लाल रंग छोड़कर अपने रथ को भगवा कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के प्रति कथित नाराजगी और चौधरी चरण सिंह की लगातार तारीफ पर दयाशंकर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल के साथ हालिया बयानबाजी के बाद समाजवादी पार्टी को जाट समाज की नाराजगी का एहसास हुआ है। मंत्री के मुताबिक, चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर इस नाराजगी को लगातार शांत करने की भरपूर कोशिश की जा रही है, लेकिन जाट समाज कथित अपमान को आसानी से भूलेगा नहीं। अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों के लगातार अपमान और समाजवाद को पढ़ने की सलाह दिए जाने पर भी मंत्री दयाशंकर सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि समाजवाद का पाठ पहले अखिलेश यादव को पढ़ना चाहिए, क्योंकि समाजवादी पार्टी जिस विचारधारा के साथ बनी थी, उससे वह भटक गई है। दयाशंकर सिंह ने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस के खिलाफ समाजवादी पार्टी बनाई थी। लोकतांत्रिक संघर्ष के दौरान डंडे खाए, लाठियां खाईं और जेल गए। दयाशंकर सिंह ने कहा कि जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने अपने संघर्ष और त्याग से खड़ा किया, आज उनके बेटे अखिलेश यादव सत्ता पाने की लालसा में उसकी मान-मर्यादा और मूल विचारधारा को कांग्रेस की गोद में बैठाकर खत्म कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुलायम सिंह यादव ने जिस विचारधारा और संघर्ष की जमीन पर सपा खड़ी की थी, आज उसी पार्टी को कांग्रेस के साथ क्यों ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को अखिलेश यादव कांग्रेस की गोद में बिठा रहे हैं।

धमतरी के प्रभु लाल ने आजीविका डबरी से गढ़ी सफलता की नई इबारत

जल संचयन से समृद्धि की ओर धमतरी के प्रभु लाल ने आजीविका डबरी से गढ़ी सफलता की नई इबारत ​रायपुर       "जल है तो कल है" की उक्ति को धमतरी जिले के एक छोटे से गांव ने चरितार्थ कर दिखाया है। जल की एक-एक बूंद को सहेजकर उसे आजीविका का मजबूत आधार बनाने की सोच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। इसका जीवंत और प्रेरक उदाहरण मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत पठार के आश्रित गांव बेन्द्राचुवा में देखने को मिलता है, जहां एक आजीविका डबरी ने एक साधारण किसान के जीवन में खुशहाली के नए द्वार खोल दिए हैं।       ​बेन्द्राचुवा निवासी किसान श्री प्रभु लाल पिता श्री तीजू राम के पास लगभग 2.5 एकड़ कृषि भूमि है। अन्य पारंपरिक किसानों की तरह उनकी खेती भी पूरी तरह से मानसून की मेहरबानी पर निर्भर थी और बारिश की अनिश्चितता के कारण अक्सर फसलों को नुकसान पहुंचता था। किसान की इस समस्या का स्थायी समाधान लेकर आई 'वीबी-जी रामजी योजना'। वर्ष 2025-26 में श्री प्रभु लाल के खेत में आजीविका डबरी निर्माण की स्वीकृति मिली। 2.55 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति से निर्मित इस डबरी में 2.24 लाख रुपए का व्यय हुआ और इसके बनने से वर्षा जल के संचयन के साथ खेत के लिए पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो गई।        ​डबरी बनने के बाद श्री प्रभु लाल के 2.5 एकड़ खेत को स्थायी सिंचाई सुविधा मिली, जिससे फसल की नाजुक अवस्थाओं में समय पर पानी मिलने लगा और पैदावार की गुणवत्ता व उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया। हालांकि, उन्होंने इस जलस्रोत को केवल सिंचाई तक सीमित न रखते हुए अपनी दूरदर्शिता और मेहनत से डबरी में 5 किलोग्राम मछली बीज डालकर मछली पालन भी शुरू कर दिया। इस पहल से उन्हें प्रथम वर्ष में ही लगभग 5,000 रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। यह अतिरिक्त आमदनी भले ही शुरुआती चरण में छोटी दिखे, लेकिन ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और दैनिक घरेलू जरूरतों को पूरा करने में एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है।          ​जल संरक्षण, सुलभ सिंचाई और मछली पालन के इस त्रिकोणीय समन्वय ने साबित कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन से खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है। अपनी खुशी जाहिर करते हुए श्री प्रभु लाल बताते हैं कि डबरी बनने के बाद से अब उन्हें पानी की चिंता नहीं रहती, क्योंकि एक ही जलस्रोत से फसलें भी लहलहा रही हैं और मछली पालन से अतिरिक्त आय भी मिल रही है। बेन्द्राचुवा की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन सही दिशा में हो, तो जल सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता एक साथ हासिल की जा सकती है। यह पहल संपूर्ण राज्य के किसानों के लिए जल संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत करती है।

सेवा संकल्प यात्रा उज्जैन पहुंची, युवा संवाद में मुख्यमंत्री वर्चुअली जुड़े

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सेवा कार्यों को आगे बढ़ायें। उनके द्वारा किये जा रहे जन-कल्याण के कार्यों को जन-जन तक पहुंचायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत वाराणसी से वड़नगर तक चल रही सेवा यात्रा के उज्जैन पहुंचने पर विक्रम विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम को भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यात्रा के लिए सेवा यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों से नागरिकों को जोड़े। अलग-अलग राज्यों से जुड़े सेवा यात्री खान पान,संस्कृति का आपस में आदान प्रदान करे एवं सदभावना के साथ यात्रा को आगे बढ़ाये। सेवा यात्रियों ने ग्राम कनासिया से उज्जैन जिले में प्रवेश किया। यात्रियों ने पौध-रोपण किया। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी के तालाब की साफ-सफाई भी की। युवा संवाद कार्यक्रम उज्जैन में महापौर  मुकेश टटवाल, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  रवि सोलंकी,  संजय अग्रवाल,  जगदीश पांचाल एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।    

मनी लॉन्ड्रिंग केस में हेमंत सोरेन की याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई, आरोप गठन पर टिकी नजर

 रांची हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत में बड़गांई अंचल की 8.86 एकड़ की कथित जमीन फर्जीवाड़ा से जुड़े मामले में सीएम हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई टल गई। वहीं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन आरोप गठन की सुनवाई बुधवार को ईडी कोर्ट में 4:15 बजे तक के लिए टाल दी गई है। उनके अधिवक्ता ने हाई कोर्ट में इससे संबंधित मामले में सुनवाई होने का हवाला देते हुए आरोप गठन पर सुनवाई को टालने का आग्रह किया था। हाई कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर को 2.15 बजे निर्धारित की है। हेमंत सोरेन की ओर मनी लांड्रिंग मामले में आरोप गठन की कार्रवाई को रोकने और ईडी कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू आनलाइन जुडे़ थे। इस दौरान अदालत ने कहा कि समयाभाव के कारण मामले में बुधवार को सुनवाई की जाएगी। इस पर हेमंत सोरेन की ओर से कहा गया कि बुधवार की सुबह ही इस मामले में सुनवाई की जाए। क्योंकि ईडी कोर्ट में आरोप गठन होना है। इस पर अधिवक्ता एसवी राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामला होने की वजह से वह दूसरी पाली में उपलब्ध हो पाएंगे। इसलिए मामले की सुनवाई दूसरी पाली में ही रखी जाए। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई बुधवार को दूसरी पाली में निर्धारित की है। ईडी की ओर से एएसजीआइ एसवी राजू, वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास एवं अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। बता दें कि हेमंत सोरेन की ओर से याचिका दाखिल कर पीएमएलए एक्ट की धारा 44 (1) (डी) का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब तक मामले में अनुसंधान पूरा नहीं होता है, तब तक उनके खिलाफ आरोप गठन न किया जाए। इस मामले में अभी अनुसंधान पूरा नहीं हुआ है। इसलिए ईडी कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। वहीं ईडी कोर्ट ने मामले में आरोप गठन की अनुमति दे दी है।